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Sunday, 24 May 2020

18:16

सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा शुरू हो जाता है



आज२५मई से नव दिन तक तेज भीषण गर्मी के साथ शुरू हो रहा है नवतपा पर विशेष-के सी शर्मा



सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा शुरू हो जाता है, 

आज सूर्य 25 जून से रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता हैं-

आज 25 मई से 2 जून तक नवतपा माना जायेगा


प्रतिवर्ष 25 मई  से एक प्राकर्तिक खगोलीय घटना होती है जिसे नौतपा कहते हैं।  

ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि यानी 25 मई को सूर्य कृतिका से रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा और 8 जून तक इसी नक्षत्र में रहेगा। 
सूर्य के नक्षत्र बदलते ही नौतपा शुरू हो जाएगा। 
इसकी वजह यह है कि इस दौरान सूर्य की लंबवत किरणें धरती पर पड़ती हैं। लेकिन इस बार शुक्र तारा अस्त होने से इसका प्रभाव कम रहेगा।

क्या होता है नौतपा, इसे समझते हैं।

सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा शुरू हो जाता है, विगत कुछ वर्षों से सूर्य नारायण लगभग 25 मई को ही रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर रहे थे इस वर्ष भी सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में 24 मई की रात्रि को 2 बजकर 32 मिनट पर प्रवेश करेगें जो 8 जून तक इसी नक्षत्र में रहेगा।
इन दिनों के प्रथम 9 दिन यानी 
25 मई से 2 जून तक नवतपा माना जायेगा।

नौतपा साल के वह 9 दिन होते है जब सूर्य पृथ्वी के सबसे नजदीक रहता है जिस कारण से इन 9 दिनों में भीषण गर्मी पड़ती है इसी कारण से इसे *नौतपा* कहते हैं।

ज्योतिष गणना के अनुसार, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आता है तो उन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सर्वाधिक गर्मी वाले होते हैं। इन्हीं शुरुआती नौ दिनों को नौतपा के नाम से जाना जाता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधी लम्बवत पड़ती हैं। जिस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है। कई ज्योतिषी मानते हैं कि यदि नौतपा के सभी दिन पूरे तपें, तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है।

सूर्य के वृष राशि के 10 अंश से 23 अंश 40 कला तक नौतपा कहलाता है। इस दौरान तेज गर्मी रहने पर बारिश के अच्छे योग बनते है। सूर्य 8 जून तक 23 अंश 40 कला तक रहेगा।

दरअसल रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चंद्रमा होता है। सूर्य तेज और प्रताप का प्रतीक माना जाता है जबकि चंद्र शीतलता का प्रतीक होता है। सूर्य जब चंद्र के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है तो सूर्य इस नक्षत्र को अपने प्रभाव में ले लेता है जिसके कारण ताप बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस दौरान ताप बढ़ जाने के कारण पृथ्वी पर आंधी और तूफान आने लगते है।   

इन दिनों में शरीर तेज़ी से *डिहाइड्रेट* होता है जिसके कारण डायरिया, पेचिस, उल्टियां होने की संभावना बढ़ जाती है अतः नीम्बू पानी, लस्सी, मट्ठा (छांछ), खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजे का भरपूर प्रयोग करें, बाहर निकलते समय सिर को ढक कर रखें अन्यथा बाल बहुत तेज़ी से सफेद होंगे, झड़ेंगे।

एक दूसरे दृष्टिकोण के अनुसार चंद्रमा जब ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में आर्द्रा से स्वाति नक्षत्र तक अपनी स्थितियों में हो एवं तीव्र गर्मी पड़े, तो वह नवतपा है। मानना है कि सूर्य वृष राशि में ही पृथ्वी पर आग बरसाता है और खगोल शास्त्र के अनुसार वृषभ तारामण्डल में यह नक्षत्र हैं कृतिका, रोहिणी और मृगशिरा (वृषभो बहुलाशेषं रोहिण्योऽर्धम् च मृगशिरसः) जिसमें कृतिका सूर्य, रोहिणी चंद्र, मृगशिरा मंगल अधिकार वाले नक्षत्र हैं इन तीनों नक्षत्रों में स्थित सूर्य गरमी ज्यादा देता है ।

अब प्रश्न यह कि इन तीनों नक्षत्रों में सर्वाधिक गरम नक्षत्र अवधि कौन होगा इसके पीछे खगोलीय आधार है इस अवधि मे सौर क्रांतिवृत्त में शीत प्रकृति रोहिणी नक्षत्र सबसे नजदीक का नक्षत्र होता है।
जिसके कारण सूर्य गति पथ में इस नक्षत्र पर आने से सौर आंधियों में वृद्धि होना स्वाभाविक है इसी कारण परिस्थितिजन्य सिद्धांत कहता है कि जब सूर्य वृष राशि में रोहिणी नक्षत्र में आता है उसके बाद के नव चंद्र नक्षत्रों का दिन नवतपा है ।

 *नौतपा की पौराणिक परंपरा:-*


परंरपरा के अनुसार नौतपा के दौरान महिलाएं हाथ पैरों में मेहंदी लगाती हैं। क्योंकि मेहंदी की तासीर ठंडी होने से तेज गर्मी से राहत मिलती है। इन दिनों में पानी खूब पिया जाता है और जल दान भी किया जाता है ताकि पानी की कमी से लोग बीमार न हो। इस तेज गर्मी से बचने के लिए दही, मक्खन और दूध का उपयोग ज्यादा किया जाता है। इसके साथ ही नारियल पानी और ठंडक देने वाली दूसरी और भी चीजें खाई जाती हैं।

 *शुक्र तारा अस्त होने का प्रभाव:-*

इस बार नौतपा के दौरान 30 मई को शुक्र ग्रह वक्री होकर अपनी ही राशि में अस्त हो जाएगा और सूर्य के साथ रहेगा। रोहिणी नक्षत्र का का स्वामी ग्रह चंद्रमा है। सूर्य के साथ शुक्र भी वृषभ राशि में रहेगा। शुक्र रस प्रधान ग्रह है, इसलिए वह गर्मी से राहत भी दिलाएगा। इसलिए देश के कुछ हिस्सों में बूंदाबांदी और कुछ जगहों पर तेज हवा और आंधी-तूफान के साथ बारीश होने की संभावना ज्यादा है। नौतपा के आखिरी दो दिन तेज हवा-आंधी चलने व बारिश होने के भी योग बन रहे हैं। वराहमिहिर के बृहत्संहिता ग्रंथ में ने बताया है कि ग्रहों के अस्त होने से मौसम में बदलाव होता है।

*बारिश के योग:-*

इस वर्ष प्रमादी नामक संवत्सर के राजा बुध है और रोहिणी का निवास संधि में है। इससे बारीश तो समय पर आ जाएगी लेकिन कहीं पर ज्यादा तो कहीं पर कम बारिश हो सकती है। इस बार देश के रेगिस्तानी और पर्वतीय इलाकों में ज्यादा बारीश हो सकती है। बारीश के कारण अनाज और धान की पैदावार अच्छी रहेगी। धान्य, दूध व पेय पदार्थों में तेजी रहेगी। जौ, गेहूं, राई, सरसों, चना, बाजरा, मूंग की पैदावार आशानुकूल होगी।

ॐ अर्काय नमः
ॐ श्री सवितृ सूर्यंनारायणाय नमः

Sunday, 5 January 2020

02:42

सकारात्मक सोच का महत्व और प्रकृति के नियम



*जाने,सकारात्मक सोच का महत्व- के सी शर्मा*


एक व्यक्ति ऑटो से रेलवे स्टेशन जा रहा था।  ऑटो वाला बड़े आराम से ऑटो चला रहा था। एक कार अचानक ही पार्किंग से निकलकर रोड पर आ गई। ऑटो ड्राइवर ने तेजी से ब्रेक लगाया और कार, ऑटो से टकराते-टकराते बची।

कार चला रहा आदमी गुस्से में ऑटो वाले को ही भला-बुरा कहने लगा जबकि गलती उसकी थी!
 ऑटो चालक एक सत्संगी,  सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति था। उसने कार वाले की बातों पर गुस्सा नहीं किया और क्षमा माँगते हुए आगे बढ़ गया।

ऑटो में बैठे पैसेंजर को कार वाले की हरकत पर गुस्सा आ रहा था और उसने ऑटो वाले से पूछा...
तुमने उस कार वाले को बिना कुछ कहे ऐसे ही क्यों जाने दिया ?
उसने तुम्हें भला-बुरा कहा जबकि गलती तो उसकी थी
हमारी किस्मत अच्छी है....
नहीं तो उसकी वजह से हम अभी अस्पताल में होते।
ऑटो वाले ने बहुत मार्मिक जवाब दिया......
"साहब, बहुत से लोग गार्बेज ट्रक (कूड़े का ट्रक) की तरह होते हैं।
 वे बहुत सारा कूड़ा अपने दिमाग में भरे हुए चलते हैं।......

जिन चीजों की जीवन में कोई ज़रूरत नहीं होती उनको मेहनत करके जोड़ते रहते हैं।
जैसे.... क्रोध, घृणा, चिंता, निराशा आदि।
जब उनके दिमाग में इनका कूड़ा बहुत अधिक हो जाता है....
तो, वे अपना बोझ हल्का करने के लिए इसे दूसरों पर फेंकने का मौका ढूँढ़ने लगते हैं।

इसलिए .....मैं ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ और उन्हें दूर से ही मुस्करा कर अलविदा कह देता हूँ।
क्योंकि ....अगर उन जैसे लोगों द्वारा गिराया हुआ कूड़ा मैंने स्वीकार कर लिया..... तो,
मैं भी कूड़े का ट्रक बन जाऊँगा और अपने साथ-साथ आसपास के लोगों पर भी वह कूड़ा गिराता रहूँगा।

मैं सोचता हूँ जिंदगी बहुत ख़ूबसूरत है। इसलिए...... जो हमसे अच्छा व्यवहार करते हैं उन्हें धन्यवाद कहो और जो हमसे अच्छा व्यवहार नहीं करते उन्हें मुस्कुरा कर भुला दो।
हमें यह याद रखना चाहिए कि सभी मानसिक रोगी केवल अस्पताल में ही नहीं रहते हैं.......
कुछ हमारे आसपास खुले में भी घूमते रहते हैं!

*प्रकृति के नियम*

यदि खेत में बीज न डाले जाएँ..... तो, कुदरत उसे घास-फूस से भर देती है।
उसी तरह से...... यदि दिमाग में सकारात्मक विचार न भरें जाएँ तो नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं।

*दूसरा नियम है कि*

जिसके पास जो होता है वह वही बाँटता है।.......
“सुखी” व्यक्ति सुख बाँटता है, “दुखी” व्यक्ति दुख बाँटता है, “ज्ञानी” ज्ञान बाँटता है, "भ्रमित" भ्रम बाँटता है और.... “भयभीत” भय बाँटता है।
जो खुद डरा हुआ है वह औरों को डराता है, जो दबा हुआ है वह दूसरों को दबाता है।
इसलिए.... नकारात्मक लोगों से दूरी बनाकर खुद को नकारात्मकता से दूर रखें।
और जीवन में सकारात्मकता अपनाएं ।

Saturday, 23 November 2019

06:50

समय का कालचक्र फिर पलटकर वही आता है




हम पहने फटे कपड़े तो गरीब!
 तुम पहनो फटे कपड़े तो  मॉडर्न!!
 इंसान दिखावे से परेशान हैं ।
कोई गाड़ी ,कोई बंगला!
कोई पैसा दिखाने में परेशान है !!
समय का कालचक्र  पलट के आता है ,यह बात बिल्कुल सही है जो सामान पहले गरीब इस्तेमाल करते थे , आज वही चीजें इस दौर के पैसे वाले लोग इस्तेमाल करने में अपनी शान समझते हैं ,इस दौर में लोग अपनी सेहत पर बहुत ज्यादा ध्यान देने लगे हैं । रोटी खाते हैं बाजरे की । यह वही बाजरा है ,जो गरीब गेहूं नहीं खरीद पाते थे ,वह बाजरा खाया करते थे ,या हम बात करें मल्टीग्रेन आटे की इसमें गेहूं बाजरा ,मक्का ,चने के आटा को मिलाकर मल्टीग्रेन आटा बनता है बाजरा हो या मक्का यह गरीबों का अनाज हुआ करता था और चने के आटे को गर्मियों में पानी में घोलकर पिया जाता था । आजकल बड़े-बड़े डॉक्टर लोगों को सलाह देते हैं अगर आपको अपना वजन कम करना है तो चने का सत्तू पानी में घोलकर पिए, इस दौर में गेहूं का आटा ₹30 किलो मिलेगा और बाजरे का आटा ₹70 किलो मिलता है । अब हम बात करें पुरानी कहावत की बेचारा *बहुत गरीब है चने खाकर अपनी भूख मिटा रहा है* , इस दौर में यह कहावत बिल्कुल उल्टी हो गई है ,बहुत पैसे वाला है ,अपने स्वास्थ के लिए सजग है ,इसलिए चने खाकर अपनी सेहत बना रहा है । इस दौर में भुने हुए चने तकरीबन ₹200 किलो से कम नहीं होंगे *वाह* *ऊपर वाले तेरी लीला है* *अपरंपार* ,पहले जिस चीज को देखकर लोग मुंह बनाते थे अब उसको इस्तेमाल करने  से हाई सोसाइटी में शुमार हो जाते हैं जैसे अगर कोई आदमी साइकिल पर घूमता था ,तो लोग उंगली उठाते थे ,बेचारा बहुत गरीब है इसके पास इतने पैसे नहीं है के एक मोपेड  खरीद ले ,और इस दौर में हाई सोसाइटी वाले हजारों रुपए महीना देखकर जिम में जाकर साइकिल चलाते हुए पसीना बहाते हैं ,और अपने आप को हाई सोसायटी   का समझने लगते हैं ,पहले आदमी साइकिल चलाता था गले में गमछा डाला रहता था ,जब पसीना आता था तो गमछे से पसीना पोंछ लेता था आजकल हाई सोसाइटी के लोग जब साइकिल जिम में चलाते हैं  हाफ पैंट ,टी शर्ट  और गमछे के जगह इंपोर्टेड टॉवल गले में लटका रहता है ,और बड़ी शान से अपना शरीर का पसीना पोंछते जाते हैं । पहले ज्यादातर गरीब लोग अपनी सेहत बनाने के लिए नदी किनारे या अखाड़ों में जाते थे वहां पर कसरत किया करते थे , इस दौर में पैसे वाले लोग महंगे महंगे  जिम जाते हैं  और अपनी सेहत बनाते हैं ।
अब हम बात करें कपड़ों की आजकल जो लेटेस्ट फैशन है
जो  मॉडर्न लड़के लड़कियां कपड़े पहनते हैं ,जींस पैंट जगह-जगह से फटी हुई अगर पुराने दौर में ऐसी पैंट कोई पहन ले तो लोग उसको बहुत गरीब  समझे और उसके लिए चंदा करके नए कपड़े बनवा दे ।
 वाह रे पैसे वालों वाह तुम करो तो फैशन अगर हम करें तो गरीब।
 दिखावे से दूर ,
 हकीकत से वास्ता हो ,
 जिंदगी सरल हो ,
 भले ही कठिन रास्ता हो ।

Friday, 22 November 2019

06:47

जाने कैसे होती है मन की सफाई के सी शर्मा की कलम


के सी शर्मा*

_हम घर और आसपास की सफाई की बात तो कर लेते हैं लेकिन आत्मा और मन की सफाई कैसे होगी, इस पर हमारा ध्यान कम ही जाता है। आत्मा और मन की सफाई के लिए ज्ञान स्नान की जरूरत है।  बिना ज्ञान स्नान के कभी भी आत्मा और मन की सफाई नहीं हो सकती है।_

_ज्ञान स्नान का मतलब केवल वेद, ग्रंथ, धार्मिक और आध्यात्मिक पुस्तकों का पढ़ लेना नहीं है बल्कि उसे जीवन में अभ्यास कर उतारने की जरूरत है।_

_ हर वक्त अपने मन के संकल्पों पर पहरा देना पड़ेगा,उसकी ज्ञान रूपी झाड़ू   लगाकर सफाई करनी पड़ेगी तब जाकर इसकी धीरे-धीरे सफाईहोने लगेगी। जैसे-जैसे मन की सफाई होगी, आत्मा में निखारआएगा और मन स्वस्थ, खुश और शक्तिशाली होता जाएगा।_

_इसके लिए ज्ञान का सान्निध्य भी जरूरी है। जितना हम परमात्मा के सान्निध्य में रहेंगे उतनी ही जल्दी परमात्मा की शक्तिशाली किरणों से हमारी अंतरात्मा का कीचड़ सूखेगा और हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगेगा। आत्मा और मन की सफाई के लिए ज्ञान स्नान करते रहना बेहद आवश्यक है। ज्ञान स्नान का मतलब केवल वेद, ग्रंथ, धार्मिक और आध्यत्मिक पुस्तकों को पढ़ लेना नहीं है बल्कि उसे जीवन में उतारने की जरूरत है। जब मन की सफाई होगी आत्मा में निखार  आएगा और मन स्वस्थ रहेगा।_

_विचार- जब कभी भी मन में किसी  तरह का नकारात्मक और दुर्भावना पूर्ण विचार आए तो उसे ज्ञान की कसौटी पर उतारें थोड़े धैर्य के साथ समय बिताएं।  पूरी तरह सकारात्मक सोच के साथ काम करें।_

_मन में आने वाले व्यर्थ और नकारात्मक संकल्पों का हमेशा आकलन कर अपने मन से ही दृढ़तापूर्वक संकल्प कर उस पर पाबंदियां लगाएं ताकि वह दुबारा प्रवेश ना कर सकें। जब कभी भी मन में किसी तरह का नकारात्मक और दुर्भावनापूर्ण" विचार आए तो उसे ज्ञान की कसौटी पर उतारें। थोड़े धैर्य के साथ समय बिताएं। पूरी तरह सकारात्मक सोच के साथ काम करें._

_ कर्मों पर निगरानी रखते हुए  जब हम कर्म करेंगे तो व्यर्थ व बुरी चीजें मन में इकट्ठी नहीं हो पाएंगी। इससे धीरे-धीरे आत्मा शुद्ध, सात्विक, आनन्दमयी और सुखदायी बन जाएगी। सकारात्मक दृष्टिकोण बन जाएगा।_

_सद्गुणों की सुगंध हर किसी को मूल्यों से सुगन्धित करेगी। परमात्मा शिव की शक्तियां मन में प्रवेश होने लगेगी। सफाई- मन की सफाई के लिए_
_ध्यान,_
_राजयोग,_
_ ज्ञान का मनन,_
_चिंतन और_
_साधना  पर ध्यान देना होगा। जितनी खतरनाक बाहर की गंदगी है उससे ज्यादा  आंतरिक गंदगी है, जो जीवन को बर्बाद कर देती है। मनुष्य का यह प्रयास आत्मा की मलिनता को साफ कर देगा। जब मलिनता समाप्त हो जाएगी तो उससे  सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास होने लगेगा। जब व्यक्ति देखेगा, बोलेगा, सोचेगा तो उसका दायरा सीमित न होकर विशाल  हो जाएगा। हर कोई अपना लगेगा, सबका भला और शुभ सोचने की मशीनरी पूर्ण रूप से सही दिशा में काम करेगी।_

_ज्ञान का तीसरा नेत्र खुल जाएगा और जीवन में सुख और शांति का  विस्तार होगा। मन की सफाई के लिए ध्यान, राजयोग, ज्ञान का मनन, चिंतन और साधना पर ध्यान देना होगा। सही बात यह है कि जितनी खतरनाक बाहर की गंदगी है उससे ज्यादा आंतरिक गंदगी है,जो पूरे जीवन को बर्बाद कदेतहै।_