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Monday, 19 October 2020

18:22

1200 साल पुराना है अम्बाजी मंदिर deepak tiwari

गुजरात और राजस्थान की सीमा पर बनासकांठा जिले की दांता तालुका में अम्बाजी का मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर देश के सबसे पुराने और पवित्र शक्ति तीर्थ स्थानों में से एक है। ये शक्ति की देवी सती को समर्पित 51 शक्तिपीठों में से एक है।
सिद्धपीठ अम्बाजी मंदिर
अम्बाजी का मंदिर गुजरात-राजस्थान सीमा पर अरावली शृंखला के आरासुर पर्वत पर स्थित है, जो देश का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर लगभग बारह सौ साल पुराना है। सफेद संगमरमर से बना ये मंदिर बेहद भव्य है। मंदिर का शिखर 103 फीट ऊंचा है। शिखर सोने से बना है। ये मंदिर की खूबसूरती बढ़ाता है। यहां विदेशों से भी भक्त दर्शन करने आते हैं। ये 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां मां सती का हृदय गिरा था ।
मान्यता: सालों से जल रही अखंड ज्योत कभी नहीं बुझी
कहने को तो यह मंदिर भी शक्ति पीठ है पर यह मंदिर अन्य मंदिरो से कुछ अलग हटकर है। इस मंदिर में मां अम्बा की पूजा श्रीयंत्र की आराधना से होती है जिसे सीधे आंखों से देखा नहीं जा सकता। यहां के पुजारी इस श्रीयंत्र का श्रृंगार इतना अद्भुत ढंग से करते हैं कि श्रद्धालुओं को लगता है कि मां अंबा जी यहां साक्षात विराजमान हैं। इसके पास ही पवित्र अखण्ड ज्योति जलती है, जिसके बारे में कहते हैं कि यह कभी नहीं बुझी।
गब्बर नामक पहाड़ की महिमा
माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 1200 साल पुराना है। अम्बा जी के मंदिर से 3 किलोमीटर की दूरी पर गब्बर पहाड़ भी मां अम्बे के पद चिन्हों और रथ चिन्हों के लिए विख्यात है। मां के दर्शन करने वाले भक्त इस पर्वत पर पत्थर पर बने मां के पैरों के चिन्ह और मां के रथ के निशान देखने जरूर आते हैं। अम्बाजी मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर भगवान श्रीकृष्ण का मुंडन संस्कार संपन्न हुआ था । वहीं भगवान राम भी शक्ति की उपासना के लिए यहां आ चुके हैं। नवरात्र पर्व में श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां माता के दर्शन के लिए आते हैं। इस समय मंदिर प्रांगण में गरबा करके शक्ति की आराधना की जाती है।

Friday, 4 September 2020

10:34

गुजरात में हार्दिक ने दिया भाजपा को बड़ा झटका

राजकोट। गुजरात के राजकोट में निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने भाजपा को बड़ा झटका देते हुए उसके 20 बड़े नेताओं सहित 40 कार्यकर्ताओं को कांग्रेस में शामिल कर लिया।
हार्दिक पटेल ने गुजरात की कमान संभालने के बाद राजकोट के भाजपाई खेमे में सेंध लगाने का काम शुरू कर दिया है। हार्दिक ने भाजपा काउंसलर रक्षा भेसनिया सहित 20 बड़े नेताओं को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करवाई। पटेल का दावा है कि एक सप्ताह के भीतर 100 से अधिक नेता और कार्यकर्ता भाजपा छोडक़र कांग्रेस में शामिल होंगे। इनमें व्यापारिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सहित कई लोग शामिल हैं।

Thursday, 6 August 2020

00:24

श्रेय हॉस्पिटल में लगी आग 8 की मौत PM मोदी ने CM और मेयर से की बात

दीपक तिवारी /गुजरात के अहमदाबाद में गुरुवार तड़के एक कोरोना अस्पताल में आग लग गई. इस हादसे में आठ कोरोना मरीजों की मौत हो गई, जबकि एक मेडिकल स्टाफ घायल हो गया. इस हादसे ने राज्य सरकार से लेकर मोदी सरकार तक हलचल बढ़ा दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद गुजरात के सीएम विजय रुपाणी से बात की है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अहमदाबाद के अस्पताल में आग लगने से दुखी हूं. शोकाकुल परिवारों के प्रति मेरी संवेदना. घायलों के जल्दी ठीक होने की कामना. मैंने सीएम विजय रुपाणी और मेयर बिजल पटेल से बात की और स्थिति के बारे में जानकारी ली. प्रशासन प्रभावितों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है._

_सीएम विजय रुपाणी और अहमदाबाद की मेयर बिजल पटेल से बात करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुआवजे का ऐलान भी कर दिया है. प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत फंड (पीएमएनआरएफ) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजारों की मदद की जाएगी._

_गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, सीएम विजय रूपाणी ने अहमदाबाद के श्रेय अस्पताल में आग लगने की घटना की जांच के आदेश दिए हैं. संगीता सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह विभाग) जांच का नेतृत्व करेंगी. सीएम ने 3 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है._

*_क्या है पूरा मामला_*

_अहमदाबाद स्थित श्रेय अस्पताल में गुरुवार तड़के आग लग गई. श्रेय अस्पातल को कोरोना के लिए डेडिकेड किया गया है. आग सुबह 3 बजकर 15 मिनट पर लगी. 3 बजकर 22 मिनट पर दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची. दमकल की टीम ने 4 बजकर 20 मिनट पर आग पर काबू पाया._

_आग जब लगी उस समय आईसीयू में 10 कोरोना मरीज थे, जबकि पूरे हॉस्पिटल में 49 कोरोना मरीज थे. इसमें से आठ लोगों की मौत हो गई है. मरने वालों में अरविंद भावसार, नवीनलाल शाह, लीलावती शाह, आयशाबेन तिरमीश, मनुभाई रामी, ज्योति सिंधी, नरेंद्र शाह और आरिफ मंसूर शामिल है._

_जान गंवाने वाले इन आठ लोगों का श्रेय अस्पताल में इलाज चल रहा था. फिलहाल, बाकी मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया है. साथ ही जांच के लिए फॉरेंसिक विभाग की टीम पहुंच गई है. इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग की टीम भी श्रेय अस्पताल पहुंच गई है. आग लगने के पीछे की वजह शार्ट सर्किट बताई जा रही है_
00:18

पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पत्रकारों का PCWJ करेगा सम्मान, हुई नामों की घोषणा -दीपक तिवारी

    
गुजरात ।सम्पूर्ण भारत वर्ष में पत्रकारिता की अस्मिता को जिंदा रखने वाले क्रांतिकारी पत्रकारों को उनके अदम्य साहस , समर्पण और पत्रकारिता के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान देने के फलस्वरुप  *प्रेस कौंसिल ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट* के समक्ष प्रस्तुत आवेदनों एवं ज्यूरी की सहमति के बाद चयनित पत्रकारों को सम्मान किया जायगा ।
चयनित नामों की आज PCWJ के *राष्ट्रीय महासचिव एवं गुजरात प्रभारी शाकिर मलेक* ने घोषणा की ।
घोषणा अनुसार इस वर्ष का राष्ट्रीय स्तर का सर्वश्रेष्ठ सम्मान *नारद सम्मान 2020* के लिये25वर्षों से अधिक समय देने वाले वरिष्ठ पत्रकार –
– श्रीयुत रविंद्र व्यास वरिष्ठतम पत्रकार (छतरपुर मध्यप्रदेश ),
श्री एसएम आसिफ वरिष्ट पत्रकार एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष आल इंडिया माइनोरिटी फोरम दिल्ली (दिल्ली भारत ),
श्री ज़हूर अहमद चौहान पंजाब केसरी संवाददाता (मालेरकोटला पंजाब ),
श्री मनोज दुबे वरिष्ट पत्रकार नवभारत एवं क्रानिकल एवं ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट (पचमढ़ी होशंगाबाद मप्र ),
श्री हेमंत पाल वरिष्ट पत्रकार (इन्दौर मप्र ) को चुना गया है ।

इसी प्रकार अमर शहीद वरिष्ठ महिला पत्रकार गौरी लंकेश की याद में आरंभ किया गया पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिला पत्रकार को मिलने वाला राष्ट्रीय सम्मान  *गौरी लंकेश स्मृति सम्मान 2020*
-श्रीमती विजया पाठक वरिष्ठ पत्रकार एवं निदेशक जगत पाठक पत्रकारिता संस्थान (भोपाल मप्र ),
-सुश्री शहनाज़ मलेक पत्रकार (गुजरात ),
-श्रीमती एकता शर्मा पत्रकार एवं अभिभाषक (इंदौर मप्र ), -श्रीमती सरोज जोशी पत्रकार (दिल्ली ) को दिया जाऐगा ।

पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का समय देने वाले क्रांतिकारी ,निष्पक्ष पत्रकारों को दिया जाने वाला राष्ट्रीय सम्मान     *पत्रकार शिरोमणि सम्मान 2020*
-श्री शकील नियाज़ी पत्रकार ( पिपरिया होशंगाबाद मप्र ),
-श्री लालजी पन्सूरीया पत्रकार (आनंद गुजरात),
-श्री ख़ालिद हफ़ीज़ पत्रकार एवं अभिभाषक (भोपाल मप्र )
-श्री मुईन अख़्तर ख़ान पत्रकार (हरदा मप्र ),
-श्री सैयद रिज़वान अली पत्रकार (बांकानेर धार मप्र ),
-श्री हाजी मुईन ख़ान पत्रकार एवं हाई कोर्ट मध्यप्रदेश अधिवक्ता (जबलपुर मप्र ),
-श्री मुरली खंडेलवाल पत्रकार (इन्दौर मप्र ), को दिया जाऐगा ।
-श्री रफ़ी मोहम्मद शेख़ पत्रकार (इंदौर मप्र )

युवा क्रांतिकारी पत्रकारों को उनके अदम्य सहयोग के फलस्वरुप *पत्रकार गौरव सम्मान 2020* दिया जाएगा ।जिसके लिये चयनित नाम हैं –
1-श्री मोहम्मद अहमद संपादक वतन समाचार (दिल्ली )
2- श्रीमति डॉक्टर रीमा ईरानी पत्रकार एवं लेखिका (दिल्ली )
3- डॉक्टर सीमा रामपुरिया पत्रकार (इंदौर मप्र ),
4-श्रीमती डॉक्टर आभा सेन पत्रकार (भोपाल मप्र )
5- श्री डॉ जाकिर शेख पत्रकार (बैतूल म प्र)
6-श्रीमती सौदामिनी गुप्ता पत्रकार (रीवा मप्र )
7-श्री पंडू भाई चौधरी पत्रकार (डिसा गुजरात )
8-श्री जगदीश भाई पत्रकार (आनंद गुजरात )
9- श्री नसरुद्दीन राठौड़(आनंद गुजरात )
10- श्री जितुभाई परमार पत्रकार (डिसा गुजरात ) 11- श्री लालजी पन्सुरिया

इसके अलावा ज्यूरी एवं संगठन की सर्वसम्मति से स्व विवेक से नवीन क्रांतिकारी प्रतिभाओ को जो अपनी कलम से समाज ओर देश में नव चेतना जागृत कर रहे हैं उनके लिये राष्ट्रीय सम्मान *युवा गौरव सम्मान2020* दिया जाऐगा ।
जिसके लिये :-
-सुश्री विजय लक्ष्मी पत्रकार (पटना )
-सुश्री अंजलि सिँह @गरिमा पत्रकार एवं समाजसेवी (लखनऊ उप्र )
-श्री आबिद हुसैन पत्रकार (हापुड़ उप्र )
-सुश्री साक्षी मगरे पत्रकार (उज्जैन मप्र ),
– श्री अबरार ख़ान पत्रकार (भोपाल मप्र ),
-श्री शैलेंद्र पांचाल पत्रकार (देवास मप्र ),
-सुश्री अमृत कौर जट पत्रकार (हरदा मप्र ),
-श्री दुष्यंत पंचोली पत्रकार (राजगढ़ मप्र )
– श्री खेमराज चौरसिया (छतरपुर मप्र )
-श्री घनश्याम पाटीदार (धार मप्र ) को दिया जाऐगा ।
प्रेस कौंसिल ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट द्वारा दिए जाने वाले यह सभी सम्मान स्वतन्त्रता दिवस के उपलक्ष्य में दिए जाएंगे ।

Tuesday, 17 December 2019

07:53

सोमनाथ महादेव मंदिर पर विशेष रिपोर्ट के सी शर्मा की कलम से





गुजरात के प्रभास क्षेत्र का प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव मंदिर और बाँणस्तंभ.
"आसमुद्रांत दक्षिण धृव पर्यंत, अबाधित ज्योतिरमार्ग."
जिसका उल्लेख किया गया हैं, वह ‘ज्योतिरमार्ग’ क्या है..?

‘इतिहास’ बडा चमत्कारी विषय हैं। इसको खोजते खोजते हमारा सामना ऐसे स्थिति से होता हैं, की हम आश्चर्य में पड जाते हैं. पहले हम स्वयं से पूछते हैं, यह कैसे संभव हैं..?

......करीब डेढ़ हजार वर्ष पहले इतना उन्नत और अत्याधुनिक ज्ञान हम भारतीयों के पास था, इस पर विश्वास ही नहीं होता..!

गुजरात के सोमनाथ मंदिर में आकर कुछ ऐसी ही स्थिति होती हैं. वैसे भी सोमनाथ मंदिर का इतिहास बड़ा ही विलक्षण और गौरवशाली रहा हैं. १२ ज्योतिर्लिंगों में से पहला ज्योतिर्लिंग हैं सोमनाथ..!.... एक वैभवशाली, सुंदर शिवलिंग..!! इतना समृध्द था की की उत्तर-पश्चिम से आने वाले प्रत्येक आक्रांता की पहली नजर सोमनाथ पर जाती थी. अनेकों बार सोमनाथ मंदिर पर हमले हुए. उसे लूटा गया. सोना, चांदी, हीरा, माणिक, मोती आदि गाड़ियाँ भर-भर कर आक्रांता ले गए. इतनी संपत्ति लूटने के बाद भी हर बार सोमनाथ का शिवालय उसी वैभव के साथ खड़ा रहता था.........

लेकिन केवल इस वैभव के कारण ही सोमनाथ का महत्व नहीं हैं. सोमनाथ का मंदिर भारत के पश्चिम समुद्र तट पर हैं. विशाल अरब सागर रोज भगवान सोमनाथ के चरण पखारता हैं. और गत हजारों वर्षों के ज्ञात इतिहास में इस अरब सागर ने कभी भी अपनी मर्यादा नहीं लांघी हैं. न जाने कितने आंधी, तूफ़ान आये, चक्रवात आये लेकिन किसी भी आंधी, तूफ़ान, चक्रवात से मंदिर की कोई हानि नहीं हुई हैं.

इस मंदिर के प्रांगण में एक स्तंभ (खंबा) हैं. यह ‘बाणस्तंभ’ नाम से जाना जाता हैं. यह स्तंभ कब से वहां पर हैं बता पाना कठिन हैं. लगभग छठी शताब्दी से इस बाणस्तंभ का इतिहास में नाम आता हैं. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं की बाणस्तंभ का निर्माण छठवे शतक में हुआ हैं. उस के सैकड़ों वर्ष पहले इसका निर्माण हुआ होगा. यह एक दिशादर्शक स्तंभ हैं, जिस पर समुद्र की ओर इंगित करता एक बाण हैं. इस बाणस्तंभ पर लिखा हैं –

‘आसमुद्रांत दक्षिण धृव पर्यंत
अबाधित ज्योतिरमार्ग..’

इसका अर्थ यह हुआ – ‘इस बिंदु से दक्षिण धृव तक सीधी रेखा में एक भी अवरोध या बाधा नहीं हैं.’ अर्थात ‘इस समूची दूरी में जमीन का एक भी टुकड़ा नहीं हैं’.

यह ज्ञान इतने वर्षों पहले हम भारतीयों को था........? कैसे संभव हैं..? ......और यदि यह सच हैं, तो सोचिये की हम कितने समृध्दशाली ज्ञान की वैश्विक धरोहर संजोये हुए हैं..!

संस्कृत में लिखे हुए इस पंक्ति के अर्थ में अनेक गूढ़ अर्थ समाहित हैं. इस पंक्ति का सरल अर्थ यह हैं की ‘सोमनाथ मंदिर के उस बिंदु से लेकर दक्षिण धृव तक (अर्थात अंटार्टिका तक), एक सीधी रेखा खींची जाए तो बीच में एक भी भूखंड नहीं आता हैं’. क्या यह सच हैं..? आज के इस विज्ञान के युग में यह ढूँढना संभव तो हैं, लेकिन उतना आसान नहीं.

गूगल मैप में ढूंढने के बाद भूखंड नहीं दिखता हैं, लेकिन वह बड़ा भूखंड. छोटे, छोटे भूखंडों को देखने के लिए मैप को ‘एनलार्ज’ या ‘ज़ूम’ करते हुए आगे जाना पड़ता हैं. वैसे तो यह बड़ा ही ‘बोरिंग’ सा काम हैं. लेकिन धीरज रख कर धीरे-धीरे देखते गए तो रास्ते में एक भी भूखंड (अर्थात 10 किलोमीटर X 10 किलोमीटर से बड़ा भूखंड. उससे छोटा पकड में नहीं आता हैं) नहीं आता हैं. अर्थात हम मान कर चले की उस संस्कृत श्लोक में सत्यता हैं.

किन्तु फिर भी मूल प्रश्न वैसा ही रहता हैं. अगर मान कर भी चलते हैं की सन ६०० में इस बाण स्तंभ का निर्माण हुआ था, तो भी उस जमाने में पृथ्वी को दक्षिणी धृव हैं, यह ज्ञान हमारे पुरखों के पास कहां से आया..? अच्छा, अगर ये मान भी लें की दक्षिण धृव ज्ञात था ...................... तो भी सोमनाथ मंदिर से दक्षिण धृव तक सीधी रेषा में एक भी भूखंड नहीं आता हैं, यह जबरदस्त निर्धारण किसने किया होगा ..? कैसे किया..?
.........सब कुछ अद्भुत ज्ञान था ..!!

इसका अर्थ यह हैं की ‘बाण स्तंभ’ के निर्माण काल में भारतीयों को पृथ्वी गोल हैं, इसका ज्ञान था. इतना ही नहीं, पृथ्वी को दक्षिण धृव हैं (अर्थात उत्तर धृव भी हैं) यह भी ज्ञान था. यह कैसे संभव हुआ..? इसके लिए पृथ्वी का ‘एरिअल व्यू’ लेने का कोई साधन उपलब्ध था..? अथवा पृथ्वी का विकसित नक्शा बना था..?

नक़्शे बनाने का एक शास्त्र होता हैं. अंग्रेजी में इसे ‘कार्टोग्राफी’ (यह मूलतः फ्रेंच शब्द हैं.) कहते हैं. यह प्राचीन शास्त्र हैं. इसा से पहले छह से आठ हजार वर्ष पूर्व की गुफाओं में आकाश के ग्रह तारों के नक़्शे मिले थे. परन्तु पृथ्वी का पहला नक्शा किसने बनाया इस पर एकमत नहीं हैं. हमारे भारतीय ज्ञान का कोई सबूत न मिलने के कारण यह सम्मान ‘एनेक्झिमेंडर’ इस ग्रीक वैज्ञानिक को दिया जाता हैं. इनका कालखंड ईसा पूर्व ६११ से ५४६ वर्ष था. किन्तु इन्होने बनाया हुआ नक्शा अत्यंत प्राथमिक अवस्था में था. उस कालखंड में जहां जहां मनुष्यों की बसाहट का ज्ञान था, बस वही हिस्सा नक़्शे में दिखाया गया हैं. इस लिए उस नक़्शे में उत्तर और दक्षिण धृव दिखने का कोई कारण ही नहीं था.

आज की दुनिया के वास्तविक रूप के करीब जाने वाला नक्शा ‘हेनरिक्स मार्टेलस’ ने साधारणतः सन १४९० के आसपास तैयार किया था. ऐसा माना जाता हैं, की कोलंबस ने इसी नक़्शे के आधार पर अपना समुद्री सफर तय किया था.

सोमनाथ मंदिर के निर्माण काल में दक्षिण धृव तक दिशादर्शन, उस समय के भारतीयों को था यह निश्चित हैं. लेकिन सबसे महत्वपूर्व प्रश्न सामने आता हैं की दक्षिण धृव तक सीधी रेखा में समुद्र में कोई अवरोध नहीं हैं, ऐसा बाद में खोज निकाला, या दक्षिण धृव से भारत के पश्चिम तट पर, बिना अवरोध के सीधी रेखा जहां मिलती हैं, वहां पहला ज्योतिर्लिंग स्थापित किया..?

उस बाण स्तंभ पर लिखी गयी उन पंक्तियों में,
(‘आसमुद्रांत दक्षिण धृव पर्यंत, अबाधित ज्योतिरमार्ग..’)
जिसका उल्लेख किया गया हैं, वह ‘ज्योतिरमार्ग’ क्या है..?

यह आज भी प्रश्न ही हैं..!

Tuesday, 1 October 2019

23:50

भैंस नहीं लेने दे रही है बिजली विभाग वालों को मीटर रीडिंग



गुजरात के बिजली विभाग की ओर से एक उपभोक्ता को भेजा गया नोटिस इन दिनों काफी चर्चा का विषय बना हुआ है दरअसल बिजली विभाग ने एक उपभोक्ता को नोटिस भेजकर कहा है कि उसकी भैंस मीटर रीडिंग नहीं लेने दे रही है और जब बिजली विभाग की टीम उनके घर मीटर रीडिंग लेने पहुंचती है तो भैंस उन पर हमला बोल देती है विभाग ने उपभोक्ता से आवेदन देकर बिजली का मीटर किसी और जगह पर लगवाने को कहा है उधर उपभोक्ता का कहना है कि उसके यहां तो 2 महीने से बिजली आपूर्ति ही नहीं हो रही है मध्य गुजरात विज कंपनी लिमिटेड के कर्मचारी गत दिनों पंचमहल जिले के सेमलिया गांव निवासी सरिता बाड़िया के घर बिजली मीटर की रीडिंग लेने गए थे बाद में उन्होंने सरिता को एक नोटिस भेजकर बताया कि उनकी भैंस मीटर की रीडिंग नहीं लेने देती है जब भी उनकी टीम मीटिंग लेने पहुंचती है तो वहां भैंस उन को मारने के लिए दौड़ती है गोधरा सर्जिकल के इंजीनियर राकेश चंदेल ने बताया कि सरिता को नोटिस भेजकर  मीटर को दूसरी जगह लगाने को कहा गया है अगर वह चाहे तो विभाग को अर्जी देकर मीटर को वहां से हटवा कर दूसरी जगह लगवा सकती हैं जहां भैंस को बांधा जाता है  वहां से मीटर हटवा ले उधर उपभोक्ता का कहना है कि उसकी भैंस ने कभी किसी पर हमला नहीं किया है।