Tap news india

Hindi news ,today news,local news in india

Breaking news

गूगल सर्च इंजन

Showing posts with label हेल्थ टिप्स. Show all posts
Showing posts with label हेल्थ टिप्स. Show all posts

Saturday, 26 September 2020

18:21

जानिए दिल को दुरुस्त रखने के 10 आसान टिप्स TNI

WHO की रिपोर्ट:tap news india deepak tiwari दुनिया में हर साल 20 लाख लोगों की मौत तम्बाकू से होने वाले हृदय रोगों से हो रही, एक्सपर्ट से जानिए दिल को दुरुस्त रखने के 10 आसान टिप्स
सिगरेट और तम्बाकू फेफड़े ही नहीं हार्ट भी डैमेज कर रहे हैं। तम्बाकू के कारण होने वाले हृदय रोगों से हर साल दुनियाभर में 20 लाख लोगों की मौत हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में यह आंकड़ा जारी किया है। रिपोर्ट कहती है, हृदय रोगों से होने वाली हर पांचवी मौत की वजह तम्बाकू है। साल दर साल इसके मामले बढ़ रहे हैं।
रिपोर्ट की 5 बड़ी बातें जो अलर्ट करती हैं
1. कोरोनरी हार्ट डिसीज में 20 फीसदी मौतों की वजह तम्बाकू
WHO की रिपोर्ट कहती है, कोरोनरी हार्ट डिसीज से होने वाली मौतों में से 20 फीसदी मौतें तम्बाकू के अधिक सेवन के कारण हो रही हैं। सिगरेट और तम्बाकू के कारण हृदय रोगियों की संख्या बढ़ रही है।
2. तम्बाकू छोड़ते ही खतरा 50 फीसदी तक घट जाता है
वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के टोबैको एक्सपर्ट ग्रुप के हेड डॉ. एजुआर्डो बियांको का कहना है कि अगर आप तम्बाकू और सिगरेट छोड़ते हैं तो हृदय रोगों का खतरा 50 फीसदी तक घट जाता है। धुएं से दूर होते ही हृदय और फेफड़े में जमने वाले टार में कमी होने लगती है।
3. ई-सिगरेट भी है खतरनाक
कई लोग समझते हैं कि ई-सिगरेट से कोई खतरा नहीं है लेकिन यह गलत है। डॉ. एजुआर्डो के मुताबिक, ई-सिगरेट खतरनाक है। यह ब्लड प्रेशर को अनियंत्रित कर देती है और इसके बढ़ने के साथ जान का जोखिम बढ़ता जाता है।
4. कोरोनाकाल में खतरा और भी ज्यादा
अब तक कई रिसर्च में भी साबित हो चुका है कि हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों से जूझ रहे लोग कोरोना के हाई रिस्क जोन में हैं। अगर ऐसे मरीजों में संक्रमण होता है तो मौत का खतरा ज्यादा है। WHO के सर्वे के मुताबिक, इटली में मरने वाले ज्यादातर लोग ब्लड प्रेशर या हृदय रोगों से जूझ रहे थे।
5. दूसरे की सिगरेट से कश लेने की गलतफहमी भी खतरनाक
WHO की रिपोर्ट कहती है, दुनियाभर में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी है जो दिन में एक सिगरेट पीते हैं या किसी दूसरे की सिगरेट से कश लगाते हैं। इन्हें लगता है कि इससे खतरा कम हो जाता है। यह गलतफहमी है। यही वजह है कि हार्ट और लंग्स से जुड़ी बीमारियां युवाओं को कम उम्र में ही घेर रही हैं।
दिल को स्वस्थ रखने के 10 आसान तरीके
गेहूं की रोटी की जगह बाजरा, ज्वार या रागी अथवा इनका आटा मिलाकर बनाई रोटी खाएं। ब्रिटिशर्स के आने से पहले हम यही खाते थे। ये दिल के लिए ज्यादा फायदेमंद हैं। आम, केला, चीकू जैसे ज्यादा मीठे फल कम खाएं। इनके बजाय पपीता, कीवी, सेवफल, संतरा जैसे कम मीठे फल खाएं।
हर दिन चार किमी तेज चहलकदमी करें। यह इतनी तेज होनी चाहिए कि आप 30 से 35 मिनट में चार किमी कवर कर सकें। इसमें आपकी हार्ट रेट कम से कम सामान्य से डेढ़ गुनी होनी चाहिए। इससे पूरा कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम स्वस्थ रहेगा।
तली हुई और मीठी चीजों को भले ही पूरी तरह अवॉइड न करें, लेकिन कम जरूर करें। अगर आपने एक गुलाब जामुन खा लिया है तो फिर कम से कम एक सप्ताह तक और कोई मीठी चीज न खाएं या चाय में चीनी की मात्रा कम करके उसकी भरपाई करें।
सप्ताह में पांच दिन 45 मिनट तक कसरत करें (वॉकिंग भी करेंगे तो और बेहतर रहेगा)। इससे वजन को काबू में कर सकेंगे। दिल की बीमारियों की एक बड़ी वजह मोटापा है। फिटनेस को इस स्तर पर लाने का प्रयास करें कि सीधे खड़े होने पर जब आप नीचे नजरें करें तो बेल्ट का बक्कल दिखे।
एक व्यक्ति का जो भी आदर्श वजन होना चाहिए, उससे 10 प्रतिशत से ज्यादा न हो। 10 प्रतिशत से जितना ज्यादा वजन होगा, दिल की बीमारियां होने की आशंका उतनी ही बढ़ जाएगी। आदर्श वजन मास बॉडी इंडेक्स से निकाला जा सकता है।
धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दें। लगातार धूम्रपान करने से उसका धुआं धमनियों की लाइनिंग को कमजोर करता है। इससे धमनियों में वसा के जमा होने की आशंका और भी बढ़ जाती है। इसी तरह अल्कोहल का कम से कम सेवन करें। छोड़ देंगे तो आपके लिए सबसे बेहतर रहेगा।
रोजाना रात को कम से कम 7 घंटे सोएं, 8 घंटे सोएंगे तो और बेहतर रहेगा। जल्दी सोएं और जल्दी उठें। रात 10 से सुबह 6 बजे तक सोने का आदर्श समय है। इससे शरीर नाइट साइकिल में बेहतर आराम कर सकेगा। दिल को भी पूरा आराम मिलेगा।
सभी तरह का खाना खा सकते हैं, लेकिन लिमिट में। जितनी भूख है, उससे 20 फीसदी कम खाएं। घर में वजन मापने की डिजिटल मशीन रखें। रोजाना सुबह के समय वजन चेक करें। अगर कल की तुलना में वजन ज्यादा है तो उसे आज ही खाने से या व्यायाम से मेंटेन करें। कल पर न छोड़ें।
अगर वॉकिंग या कसरत करने का समय नहीं मिल पा रहा है तो भी दूसरे तरीके से कैलोरी बर्न कर सकते हैं। रुटीन के दौरान हल्के-फुल्के व्यायाम करें। जैसे चाय बना रहे हैं तो उस समय 4-5 मिनट में हल्की-फुल्की वर्जिश कर लें।
अगर आपको एक-डेढ़ किमी दूर जाना है और आपके पास समय है (अधिकांश केवल खराब समय प्रबंधन के कारण ही समय नहीं निकाल पाते) तो पैदल ही जाइए और पैदल ही आइए। दिल के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। तीन मंजिल तक रहने वाले लोग पैदल ही सीढ़ियां चढ़ें और उतरें।

Friday, 18 September 2020

15:03

ऑनलाइन क्लासेस का आंखों पर असर और बचाव:deepak tiwari

ऑनलाइन क्लासेस का आंखों पर असर:deepak tiwari लैपटॉप के मुकाबले मोबाइल से आंखों पर बुरा असर पड़ने का खतरा दोगुना, आंखों में खुजली और सिरदर्द से बचने के लिए ध्यान रखें एक्सपर्ट की ये बातें
कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच फिलहाल घर से ही पढ़ाई हो रही है। कई घंटों तक चलने वाली ऑनलाइन क्लासेस के दौरान बरती गईं छोटी-छोटी लापरवाही आंखों में खुजली, लालिमा, रुखापन और सिरदर्द को बढ़ा रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, लम्बे समय तक ऐसी स्थिति रही तो मायोपिया हो सकता है। अगर आप भी ऑनलाइन स्टडी कर रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि आंखों की रोशनी पर असर न पड़े और सिरदर्द के कारण होने वाले चिड़चिड़ेपन को रोका जा सके। बच्चे छोटे हैं तो यह जरूरी है कि पेेरेंट्स उन पर नजर रखें ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सम्पर्क करें।
बंसल हॉस्पिटल की आई और ग्लूकोमा स्पेशलिस्ट डॉ. विनीता रामनानी बता रही हैं, आंखों की इन समस्या से कैसे निपटें....
वो सवाल जो आपको अलर्ट रखेंगे
1. लैपटॉप के मुकाबले मोबाइल ज्यादा खतरनाक क्यों, इसकी क्या वजह हैं?
पहली वजह : हमेशा लैपटॉप के मुकाबले मोबाइल ज्यादा आंखों के करीब होता है, इसलिए असर भी ज्यादा होता है।
दूसरी वजह : मोबाइल की स्क्रीन छोटी होने के कारण आंखों पर जोर अधिक पड़ता है। इससे निकलने वाली नीली रोशनी आंखों के सबसे करीब होने के कारण ज्यादा बुरा असर छोड़ती है।
तीसरी वजह : ज्यादातर घरों में लैपटॉप एक या दो ही होते हैं वो ज्यादातर लोगों में बंट जाता है लेकिन मोबाइल हर इंसान के पास होता है। इसलिए इसका इस्तेमाल भी ज्यादा होता है।
लगातार गैजेट को इस्तेमाल के दौरान इंसान पलकें झपकाना भूल जाता है, यह आदत इसके बुरे असर को और बढ़ाने में मदद करती है। यही से आंखों में सूखेपन की शुरुआत होती है। ध्यान न देने पर धीरे-धीरे दूसरे लक्षण भी दिखने शुरू होते हैं। जितने ज्यादा घंटे इन्हें इस्तेमाल करेंगे आंखों पर उतना ही बुरा असर पड़ेगा।
2. कौन से लक्षण दिखने पर अलर्ट हो जाएं?
अगर आंखों में खिंचाव, खुजली, थकावट, लालिमा, पानी आना, धुंधला दिखने जैसी समस्या हो रही है तो अलर्ट हो जाएं। ये डिजिटल आई स्ट्रेन के लक्षण हैं। लम्बे समय तक ऐसी स्थिति रहती है तो सिरदर्द, उल्टी और चिड़चिड़ेपन की शिकायत होने लगती है।
कुछ लोगों में चक्कर आने के साथ, आंखों से फोकस करने में कठिनाई, एक ही चीज के दो प्रतिबिम्ब दिखना जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं। कई बार यह समझ नहीं आता है क्योंकि जब दिन की शुरुआत होती है तो सब कुछ नॉर्मल लगता है, दिन में ऑनलाइन क्लासेज लेते हैं, दिमाग डायवर्ट रहता है। लेकिन शाम होते-होते इसका असर दिखने लगता है।
3. कैसे समझें कि आंखों पर बुरा असर पड़ रहा है?
डिजिटल गैजेट्स से निकलने नीली रोशनी आंखों पर लगातार पड़ने से इनमें पहले रुखापन आता है फिर मांसपेशियों पर जोर पड़ता है। लम्बे समय तक ऐसा होने से आंखें कमजोर हो जाती हैं। इनकी दूर की नजर कमजोर होने का खतरा ज्यादा रहता है, इसे मायोपिया कहते हैं। लगातार ऐसा होने पर चश्मा लग सकता है और जो पहले से लगा रहे हैं उनका नम्बर बढ़ सकता है।
एक हालिया रिसर्च के मुताबिक, अगर बच्चों में गैजेट का इस्तेमाल ऐसे ही बढ़ता रहा तो 2050 तक 50 फीसदी बच्चों को चश्मा लग जाएगा।
4. अगर लगातार ऑनलाइन क्लासेस नहीं ले रहे तो कैसे ध्यान रखें?
अगर ऑनलाइन क्लासेस नहीं हैं और मोबाइल से स्टडी से कर रहे हैं तो आंखों को हर 20 मिनट पर 20 सेकंड के लिए तक 20 फीट तक देखें। इसके बाद वापस पढ़ाई शुरू कर सकते हैं। आंखों को दिन में 4-5 बार पानी से धोएं।
5. गैजेट्स से कितनी दूरी होनी चाहिए?
लैपटॉप की स्क्रीन और आंखों के बीच कम से कम 26 इंच की दूरी होनी चाहिए।
मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो यह दूरी 14 इंच होनी चाहिए। हालांकि यह हाथों की लम्बाई पर भी निर्भर करता है।
स्क्रीन की ब्राइटनेस और कंट्रास्ट को कम रखें, ताकि आंखों पर ज्यादा जोर न पड़े।
स्क्रीन पर एंटीग्लेयर शीशा हो तो बेहतर है या फिर खुद एंटीग्लेयर चश्मा लगाएं।
स्क्रीन पर दिखने वाले अक्षरों को सामान्य तौर पर पढ़े जाने वाले अक्षरों के साइज से 3 गुना ज्यादा रखें।
6. अब बात उनकी जो वीडियो गेम में बिजी रहते हैं?
ज्यादातर बच्चे पेरेंट्स के डर से रात में लाइट ऑफ करके मोबाइल या दूसरे गैजेट पर वीडियो गेम खेलते हैं। ये सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति है क्योंकि कमरे में अंधेरा होने के कारण गैजेट की नीली रोशनी का बुरा असर सीधे आंखों पर पड़ता है। नतीजा, रात में नींद न आने की समस्या, सुबह देर से उठने के कारण शरीर में भारीपन और सिरदर्द महसूस होने जैसे लक्षण बढ़ते जाते हैं।

Thursday, 19 December 2019

08:56

हमेशा स्वस्थ रहना है तो ध्यान रखें ये बातें


*-के सी शर्मा*

चाय के साथ कोई भी नमकीन चीज नहीं खानी चाहिए।दूध और नमक का संयोग सफ़ेद दाग या कि,सी भी स्किन डीजीज को जन्म दे सकता है, बाल असमय सफ़ेद होना या बाल झड़ना भी स्किन डीजीज ही है।

दूध या दूध की बनी किसी भी चीज के साथ दही ,नमक, इमली, खरबूजा,बेल, नारियल, मूली, तोरई,तिल ,तेल, कुल्थी, सत्तू, खटाई, नहीं खानी चाहिए।

दही के साथ खरबूजा, पनीर, दूध और खीर नहीं खानी चाहिए।

गर्म जल के साथ शहद कभी नही लेना चाहिए।

ठंडे जल के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, ककड़ी, खीरा, जामुन ,मूंगफली कभी नहीं।

शहद के साथ मूली , अंगूर, गरम खाद्य या गर्म जल कभी नहीं।

खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई, खिचड़ी ,कटहल कभी नहीं।

घी के साथ बराबर मात्र1 में शहद भूल कर भी नहीं खाना चाहिए ये तुरंत जहर का काम करेगा।

तरबूज के साथ पुदीना या ठंडा पानी कभी नहीं।

चावल के साथ सिरका कभी नहीं।

चाय के साथ ककड़ी खीरा भी कभी मत खाएं।

खरबूज के साथ दूध, दही, लहसून और मूली कभी नहीं।

कुछ चीजों को एक साथ खाना अमृत का काम करता है जैसे-

खरबूजे के साथ चीनी
इमली के साथ गुड
गाजर और मेथी का साग
बथुआ और दही का रायता
मकई के साथ मट्ठा
अमरुद के साथ सौंफ
तरबूज के साथ गुड
मूली और मूली के पत्ते
अनाज या दाल के साथ दूध या दही
आम के साथ गाय का दूध
चावल के साथ दही
खजूर के साथ दूध
चावल के साथ नारियल की गिरी
केले के साथ इलायची

कभी कभी कुछ चीजें बहुत पसंद होने के कारण हम ज्यादा बहुत ज्यादा खा लेते हैं।

ऎसी चीजो के बारे में बताते हैं जो अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचाई जाएँ ----

केले की अधिकता में दो छोटी इलायची
आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड
जामुन ज्यादा खा लिया तो ३-४ चुटकी नमक
सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम
खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत
तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग
अमरूद के लिए सौंफ
नींबू के लिए नमक
बेर के लिए सिरका
गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो ३-४ बेर खा लीजिये
चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये

बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च
मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये
बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं
खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये
मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं
इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये
मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये
मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये
घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं
खुरमानी ज्यादा हो जाए तोठंडा पानी पीयें
पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीजिये

अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ दो नींबू का रस आपको जरूर ले लेना चाहिए या पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये ,८०% बीमारियों से बचे रहेंगे।

अब ये देखिये कि किस महीने में क्या नही खाना चाहिए और क्या जरूर खाना चाहिए ---

चैत में गुड बिलकुल नहीं खाना ,नीम की पत्ती /फल, फूल खूब चबाना।
बैसाख में नया तेल नहीं खाना ,चावल खूब खाएं।
जेठ में दोपहर में चलना मना है, दोपहर में सोना जरुरी है।
आषाढ़ में पका बेल खाना मना है, घर की मरम्मत जरूरी है।
सावन में साग खाना मना है, हर्रे खाना जरूरी है।
भादो मे दही मत खाना, चना खाना जरुरी है।
कुवार में करेला मना है, गुड खाना जरुरी है।
कार्तिक में जमीन पर सोना मना है, मूली खाना जरूरी है।
अगहन में जीरा नहीं खाना , तेल खाना जरुरी है।
पूस में धनिया नहीं खाना, दूध पीना जरूरी है।
माघ में मिश्री मत खाना ,खिचड़ी खाना जरुरी है।
फागुन में चना मत खाना, प्रातः स्नान और नाश्ता जरुरी है।

Monday, 16 December 2019

13:00

क्या आप जानते हैं कि चुकंदर खाने से होता है यह




क्या आपको पता है कि Beetroot में ऐसे कई पोषक तत्व होते हैं जो लीवर के Detoxification Process में बहुत मदद करते हैं ?

लीवर आपके शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। अगर सीधे शब्दों में कहा जाये तो यह शरीर के बाकि अंगों की तुलना में सबसे ज्यादा काम करने वाला अंग है। यह आपके खून में से टॉक्सिक को निकालने और उन्हें शुद्ध करने के बाद ही बाकि शरीर में पहुँचने देता है।

लीवर ही यह तय करता है कि क्या आपके शरीर के लिये सही है और  उस हिसाब से वह गन्दगी को फ़िल्टर करता रहता है। इस लिहाज से आपको अपने लीवर का ख़ास ख्याल रखना चाहिये और अपनी डायट पर ध्यान देना चाहिये।

चुकन्दर इस मामले में काफी उपयोगी फल है यह अतिरिक्त काम के बोझ से सुस्त पड़ चुके लीवर को उत्तेजित करने में काफी मदद करता है और इस अंग की अतिरिक्त गर्मी को भी शांत करता है। चुकन्दर खून को साफ़ करने में बहुत मदद करता है जिससे लीवर की कार्यक्षमता बढ़ जाती है।

चुकन्दर कैसे मदद करता है ?

चुकन्दर न सिर्फ एंटी-ऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं बल्कि इसमें बीटेन,ग्लूटाथायोन (Glutathione), और पेक्टिन जैसे पोषक तत्व भी होते हैं जो लीवर को टॉक्सिक हटाने में मदद करते हैं।

लीवर द्वारा फ़िल्टर किये हुए टॉTक्सिन को फाइबर पेक्टिन साफ़ कर देता है जिससे शरीर इन्हें दोबारा अवशोषित नहीं कर पाता है। इसमें बीटालेंस जैसे यौगिक भी होते हैं जिनमें एंटी-इंफ्लेमटोरी क्षमता होने के कारण यह डिटाक्सिफिकेशन प्रक्रिया में काफी सहायक होते हैं।

आपको अपने लीवर को अच्छे से साफ़ रखने  के लिए रोजाना सुबह एक गिलास ताजे चुकन्दर का जूस पीना चाहिये। आप इस जूस में अदरक,खीरा और नींबू मिलाकर इसे और गुणकारी बना सकते हैं।

टिप्स : अल्कोहल,शुगर और अन्य मीठे चीजों का इस्तेमाल कम करें। ये चीजें आसानी से पच नहीं पाती हैं जिस कारण लीवर पर अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ जाता है। हाइड्रोजेनेटेड़ ऑयल से भरपूर चीजों का भी कम सेवन करना चाहिये।

Friday, 13 December 2019

07:21

मधुमेह के रोगियों के लिए घरेलू उपचार के सी शर्मा की कलम से



*मधुमेह के लिए घरेलू उपचार-के सी शर्मा*


1- 10 मिग्रा आंवले के जूस को 2
    ग्राम हल्दी  के पाउडर में मिला
   लीजिए। इस घोल को दिन में
   दो बार लीजिए। इसको लेने से
   खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित
   होती है।
2- औसत आकार का एक
    टमाटर, एक खीरा और एक
    करेला को लीजिए। इन तीनों
    को मिलाकर जूस निकाल
    लीजिए। इस जूस को हर रोज
    सुबह-सुबह खाली पेट
    लीजिए। इससे डायबिटीज में
    फायदा होता है।
3- डायबिटीज के मरीजों के लिए
    सौंफ बहुत फायदेमंद होता है।
    सौंफ खाने से डायबिटीज
    नियंत्रण में रहता है। हर रोज
    खाने के बाद सौंफ खाना
    चाहिए।
4- मधुमेह के रोगियों को जामुन
    खाना चाहिए। काले जामुन
   डायबिटीज के मरीजों के लिए
   अचूक औषधि मानी जाती है।
   जामुन को काले नमक के साथ
   खाने से खून में शुगर की मात्रा
   नियंत्रित होती है।
5- स्टीविया का पौधा मधुमेह
    रोगियों के लिए बहुत
   फायदेमंद होता है। स्टीविया
   बहुत मीठा होता है लेकिन
   शुगर फ्री होता है। स्टीविया
   खाने से पैंक्रियाज से इंसुलिन
   आसानी से मुक्त होता है।
6- डायबिटीज के मरीजों को
    शतावर का रस और दूध का
    सेवन करना चाहिए। शतावर
    का रस और दूध को एक
    समान मात्रा में लेकर रात में
    सोने से पहले मधुमेह के
    रोगियों को सेवन करना
    चाहिए। इससे मधुमेह नियंत्रण
    में रहता है।
7- मधुमेह मरीजो को नियमित
    रूप से दो चम्मच नीम का रस
   और चार चम्मच केले के पत्ते
    के रस को मिलाकर पीना
    चाहिए।
8- चार चम्‍मच आंवले का रस,
    गुड़मार की पत्ती मिलाकर
    काढ़ बनाकर पीने मधुमेह
    नियंत्रण में रहता है।
9- गेहूं के पौधों में रोगनाशक गुण
    होते हैं। गेहूं के छोटे-छोटे पौधों
    से रस निकालकर सेवन करने
    से मुधमेह नियंत्रण में रहता है।
10-मधुमेह के रोगियों को खाने
    को अच्छे से चबाकर खाना
    चाहिए। अच्छे से चबाकर
    खाने से भी मधुमेह को
    नियंत्रण में किया जा सकता
     है।
11-मधुमेह रोगियों को नियमित
     व्यायाम और योग करना
     चाहिए।

इन घरेलू उपायों को अपनाकर आप रक्‍त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित कर सकते हैं। लेकिन, याद रखें इसके साथ ही आपको संतुलित आहार भी अपनाना चाहिए। साथ ही आपको चाहिए कि इन उपायों को आजमाने से पहले आपको डॉक्‍टर से सलाह भी ले लेनी चाहिए। डॉक्‍टर इस हिसाब से आपको दी जाने वाली दवाओं में फेरबदल कर सकता है।

Thursday, 5 December 2019

08:17

किशमिश महिलाओं के लिए है सबसे ज्यादा फायदेमंद इन पांच समस्याओं से दिलाती है निजात



के सी शर्मा*
1 आयरन की मात्रा से भरपूर किशमिश महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद है। खास तौर से महिलाओं में अक्सर आयरन की कमी पाई जाती है। ऐसे में किशमिश का सेवन शरीर में आयरन की आपूर्ति के लिए बेहतरीन विकल्प है।
 2 अत्यधि‍क मात्रा में फाइबर से भरपूर किशमिश, पाचन संबंधी समस्याओं का समाधान भी है। अगर आपको कब्जियत की समस्या है, तो किशमिश का प्रयोग आपके लिए बेहद फायदेमंद है।
3 किशमिश का सेवन कैंसर जैसी बीमारियों से बचाने में सहायक है। यह फ्री रेडिकल से बचाकर कैंसर की कोशि‍काओं की वृद्धि‍ को रोकने में सक्षम है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।
4 आंखों की समस्याएं आजकल आम बात है, लेकिन किशमिश के पास इसका इलाज है। इसमें मौजूद विटामि‍न ए, बीटा कैरोटीन, ए-कैरोटीनॉइड और एंटीऑक्सीडेंट आंखों की मांशपेशि‍यों को कमजोर होने से बचाते हैं, साथ ही आंखों की सभी समस्याओं से निजात दिलाते हैं।
5 किशमिश में प्राकृतिक शर्करा भरपूर मात्रा में पाई जाती है जो आपके शरीर में ऊर्जा का संचार करने के साथ ही वजन बढ़ाने में भी मददगार है। कमजोर लोगों के लिए किशमिश का सेवन फायदेमंद है।

Tuesday, 3 December 2019

11:05

नेत्रों के लिए चमत्कारिक औषधि है काजल जाने काजल बनाने की सही विधि


*नेत्रों के लिए चमत्कार*

छोटे बच्चों की आँखों में काजल ज़रूर लगाना चाहिए, काजल केवल सुंदरता ही नही बढ़ाता अपितु यह बच्चों की आँखों को सूर्य की किरणों से भी बचाता है। जिस प्रकार कार्बन पानी को साफ करने का सबसे अच्छा साधन है उसी प्रकार काजल आँखों को साफ करने का साधन है। आज आधुनिक चिकित्सा में डॉक्टर काजल लगाने को मना करते हैं ये बिलकुल उसी प्रकार है जैसे कुछ साल पहले तक डॉक्टर प्रसव के बाद नवजात बच्चे को माँ का दूध पिलाने से मना करते थे, लेकिन आज उसी दूध को पिलाने के लिए विज्ञापन दिए जा रहे हैं, काजल हमेशा घर का बना ही प्रयोग करना चाहिए, 5 वर्ष से छोटे बच्चों को नियमित काजल लगाने से उनको जीवन पर्यंत इसका लाभ मिलता है।

*काजल बनाने की विधि:*

साफ़ रुई की बत्ती को एक मिटटी के दिए में सरसों का तेल या तिल का तेल भर कर उसमें डुबोएं ,बत्ती को जला कर ऊपर से पीतल की थाली या मिटटी का कच्चा दिया इस प्रकार ढँक दे ताकि दिए को जलने के लिए ऑक्सीजन मिलती रहे रात भर दिया जल कर कार्बन थाली में चिपक जायेगा, इस कार्बन को इकठ्ठा करके किसी डिब्बी में स्टोर करें इसमें देशी घी की कुछ बुँदे मिला लें।
काजल तैयार है, इसे रोज सबकी आँखों में लगाएं, नेत्र ज्योति बढ़ेगी साथ में सुंदरता भी।

Sunday, 1 December 2019

09:19

जाने बाई करवट सोने के फायदे के सी शर्मा की कलम से



*अपनी बाईं ओर मुंह करके (बाएं पसवाड़े) सोने के फायदे- के सी शर्मा*

आयुर्वेद में इसे "वामकुक्षी" कहा जाता है।

1. खर्राटों को रोकता है।
2. बेहतर रक्त परिसंचरण में मदद करता है।
3. भोजन के बाद उचित पाचन में मदद करता है।
4. पीठ और गर्दन में दर्द होने वाले लोगों को राहत देता है।
5. विषाक्त पदार्थों, लिम्फ तरल पदार्थ (Lymph is a clear fluid that travels through your body's arteries, circulates through your tissues to cleanse them and keep ...) और कचरे को छानने और शुद्ध करने में मदद करता है।
6. गंभीर बीमारी को रोकता है क्योंकि संचित विषाक्त पदार्थों को आसानी से बाहर निकाल दिया जाता है।
7. लिवर और किडनी बेहतर काम करते हैं।
8. मल त्याग को आसान करता है।
9. दिल पर कामकाज काम का बोझ कम करता है और उसे सुधारता है।
10. एसिडिटी और हार्टबर्न को रोकता है।
11. सुबह के समय थकान होने से रोकता है।
12. वसा आसानी से पच जाती है।
13. मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव।
14. यह पार्किंसंस और अल्जाइमर की शुरुआत में देरी करता है।
15.इसे आयुर्वेद के अनुसार सबसेअच्छी नींद की स्थिति भीमाना जाताहै।

Thursday, 28 November 2019

06:50

लम्बे स्वस्थ जीवन के लिए नियमित करें यह उपाय




*गंभीर से गंभीर रोग में शीघ्र स्वस्थ होने की विधि- के सी शर्मा*

1-प्रति दिन रात समय से सो जाओ लगभग रात्रि 10 बजे अथवा जैसे ही सहज नींद आ जाये,प्रातः जल्दी उठे अथवा जैसे सहज हो, अपने आलस को सहजता मत समझ लेना है।लगभग 7 घण्टे की नींद लेना उचित है।

2-सुबह उठकर ताजा जल 2-3 गिलास बैठकर जरूर पिए । फिर नित्य कर्म से निवृत होकर टहलने जरूर जाय, व्यायाम जरूर करे,हल्का पसीना आना चाहिए ।

3-गहरी लंबी धीमे धीमे  नाभि तक स्वास छोड़ना लेना जरूर करे,दिन के समय भी जब भी याद आये , गहरी लम्बी स्वास ले छोड़े।ज्यादा से ज्यादा गहरी लम्बी धीमी स्वास की आदत डालें , नाभि तक गहरी लंबी धीमी स्वास लेनी है छोड़नी है ।जिससे शरीर में प्राण की मात्रा बढे।

4-जब आप स्वास को ले रहे है आँखे धीमे से बंद कर ले और आती जाती स्वास को पहले कुछ दिन नाक के नथुने से बहार आते अंदर जाते महसूस करे देखे,अपना पूरा ध्यान इस बात पर रहे कैसे स्वास आप धीमे धीमे अंदर ले रहे है ।उस स्वास को उसके स्वाद को महसूस करे। कैसे धीमे धीमे बहार निकाल रहे है।शुरू शुरू में 1 घण्टे ध्यान में सुबह व शाम बैठे या खड़े होकर जिस भी स्थिति में सहज हो , अपनी गहरी स्वास के आने जाने को ध्यान करे ।

5-जब आप स्वास ले रहे होते है ध्यान पूरा नाक के नथुने से अंदर प्रवेश करती व बाहर निकलती प्राण वायु पर हो।
साथ ही साथ।  """स्वस्थ हूँ""" के भाव को हर स्वास के साथ करे।

6- कुछ दिन इस तरह ध्यान करने से आप नाक के नथुनों से आज्ञा चक्र तक दोनों भौहों के मध्य माथे तक कुछ शितलता खिंचाव महसूस करेंगे,वायु के घर्षण को महसूस करेंगे।

7-तब आप दोनों भौहों के मध्य माथे पर ही अपना ध्यान ,स्वास की शितलता पर ले जाकर आते जाते स्वास को महसूस करेंगे और अपने भाव को सतत हर आती जाती स्वास के साथ दोहराएंगे।"""" स्वस्थ हूँ""" ऐसा सिर्फ भाव ही नही करना है अपने स्वास्थ्य को महसूस करे। उसके घटने को महसूस करे ।प्राण के रूप में जो संजीवनी हममे प्रवेश कर रही है की वो लगातार आपको स्वस्थ बनाए हुए है। बार बार हर स्वास के साथ """" स्वस्थ हूँ""",  """" स्वस्थ हूँ""" दोहराए अपने भाव को प्रगाढ़ करे।

8-शुरू शुरू में उपरोक्त कार्य एक घण्टे सुबह एक घण्टे शाम ताजी स्वच्छ वायु में करे। हर आती जाती स्वास के साथ आप एक ही भाव गहरे में रखे"""स्वस्थ हूँ""",  """ स्वस्थ हूँ"""।इस मंत्र को ही दोहराना है।

9-"" स्वस्थ हूँ"" ये आपका मंत्र है। इसको हर स्वास के साथ जोड़ देना है। जो कार्य हमने 1 घण्टे सुबह 1 घण्टे शाम किया इसको अपने पूरे 24 घण्टे पर फैला दो।ध्यान के समय के अलावा जब आप ये कर रहे है आँख बंद करने की भी जरूरत नही।एक धारा सतत चित में प्रगाढ़ होती रहे """" स्वस्थ हूँ"""" और परमात्मा के प्रति धन्यवाद के भाव से भरे।रात को सोने से पूर्व इसी भाव के साथ सो जाय ,जिससे रात भर ये मंत्र काम करता रहे,साथ ही साथ परमात्मा के अनुग्रह का भाव धन्यवाद का भाव रहे।

10-आप जैसे सहज महसूस करे इस अभ्यास को करे।
मूल बात ये है कि हमे मन से ये बार बार दोहराना है कि """स्वस्थ हूँ""" साथ में गहरी लंबी धीमी नाभि तक स्वास का अभ्यास करना है दोनों को जोड़ देना है।

11- यह शिव सूत्र है  """चित ही मंत्र है""" आप जो भी मन से दोहराते है वही घटने लगता है।जो भी दोहराओगे वही घटने लगेगा।वही घटता भी है। आपके मन के द्वारा जो भी बार बार पुनरुक्ति की जाती है वह चित की धारा में प्रवाह बन जाता है।वही शक्ति बन जाती है।वही आपके याद करते ही प्रकट होने लगती है।मन शरीर दो नही एक ही है।मन पर जो जो घटेगा शरीर पर लक्षण आने शुरू हो जाते है।दोनों एक दूसरे से गहरे में जुड़े है।

12- उपरोक्त प्रक्रिया में एक बात और जोड़ लीजिये यदि आप किसी गंभीर बीमारी से , रोग से ग्रसित है , शीघ्र स्वस्थ होना चाहते है तो आप अपने दोनों हाथों की हथेलियां आपस में टकराए । यह एक दिन में कम से कम 500 बार जोर जोर से हथेलियां टकराकर बजाये।हर टकराहट के साथ एक ही भाव की आप """ स्वस्थ है""" ये मंत्र बन जाय।आपके गहरे में ये भाव एक धारा प्रवाह बन जाय।आपका अंतश इस जगत में फैले प्राण प्रवाह को संजीवनी को आपमें तेजी प्रवेश के लिए तैयार होगा । वो सभी ग्रन्थियां जो मन व शरीर के स्तर पर गलत जीवन शैली से पैदा हो गयी टूट जायेगी।

13-आप कितनी भी गंभीर बीमारी से, लाइलाज बीमारी से ग्रसित है इस सूत्र को समझ कर उपयोग कर इसका लाभ ले सकते है।आप साधना शुरू होने के उपरांत 15 दिन में एक बार चेकअप जरूर कराये,सतत लगे रहे,आपको लाभ जरूर मिलेगा।धीमे धीमे ये बात प्रगाढ़ होना शुरू हो जायेगी की आप स्वस्थ हो रहे है।एक क्रम तेजी से आपको स्वस्थ करने में विकसित होने लगेगा।
जब तक आप पूर्ण स्वस्थ न हो जाये सतत इस प्रक्रिया में लगे रहना है।परमात्मा के प्रति एक अनुग्रह ,धन्यवाद के भाव से भरे आगे बढ़ना होता रहे तो बड़ा सहयोगी होगा।पूरा अस्तित्व आपको स्वस्थ किये जाने के प्रवाह से भर उठेगा।

14- पूर्व में सभी मंत्रो का निर्माण इसी मन की प्रक्रिया को ध्यान में रख कर किया गया था जो हम विस्मृत कर चुके है।इस विधि के संबंध में किसी पूर्वाग्रह से भरे बिना पहले करे देखे,परिणाम निश्चित है।ये पूरा वैज्ञानिक है।आप हर 15 दिन पर अपना चेकअप कराकर अपनी प्रगति रिपोर्ट बनाये।आप समझ जाएंगे ये कारगर है।ये गहरे से गहरे सूत्रों में से एक है।

Saturday, 23 November 2019

06:46

हेल्थ टिप्स आहार परामर्श के सी शर्मा की कलम से


 के सी शर्मा*

लगभग 40 की उम्र के पार जोड़ों में कैल्शियम पायरोफॉस्फेट डिहायड्रेट के कण जमा होने के कारण, सूजन और दर्द का अनुभव होता है जो रयूमैटिक अर्थिराइटिस (गठिया वात) कहलाता है।
इस स्थिति में, जिस खाने में प्यूरिन नामक रसायन  उपस्थित होता है उस खाने की वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिये जैसे, लाल माँस, गरिष्ठ दालें, गोभियाँ, पालक इत्यादि।
1.अन्नानास में ब्रोमेलिन नामक तत्व होता है जो कि गठिया को कम करने में  मदद करता है, अतः अन्नानास का सेवन अच्छा होगा।
2. चैरीज़ और बैरीज का सेवन भी लाभकारी होता है।
घरेलू उपाय में अजवाइन 3.का सेवन लाभकारी हो सकता है।
4.दिन भर भरपूर और पर्याप्त पानी पीना, ताकि शरीर से टॉक्सिन अधिक से अधिक बाहर हों।
5.पानी में निम्बू के साथ में पुदीने की पत्ती डाल कर या खीरे का टुकड़े के साथ में पुदीने की पत्ती डाल कर,रात भर रख कर अगले दिन भर पानी पीने से यूरिक एसिड नियंत्रित हो सकता है।
6. रिसर्च में देखा गया है कि शरीर मे आयरन अधिक होने के कारण भी गठिया का दर्द बढ़ सकता है। अतः आयरन पर नज़र रखना अच्छा होगा।
7.शक्कर खासकर फ्रुक्टोज़ (फलों से प्राप्त शर्करा) का कम सेवन लाभकारी होगा।
06:41

जाने क्या है कब्ज और उसके उपचार




कब्ज से मतलब है, कि पेट साफ ना होना  या मल-त्याग न होना, मल-त्याग कम होना, मल में गांठें निकलना, लगातार पेट साफ न होना, रोजाना टट्टी नहीं जाना, भोजन पचने के बाद पैदा मल पूर्ण रूप से साफ न होना, मल त्यागने के बाद पेट हल्का और साफ न होना आदि को कब्ज कहते हैं।

कब्ज की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है यह छोटे से लेकर बड़े तक किसी को भी और कभी भी हो सकती है कब्ज एक ऐसी समस्या है अगर इससे छुटकारा नहीं पाया गया तो बहुत पेट में दर्द होता है तकलीफ होती है और यह असहनीय दर्द भी हो जाता है।

कब्ज का इलाज आज हम आपको बताएंगे कि कब्ज का इलाज कैसे करें कब्ज एक आम समस्या बन गई है यह हर व्यक्ति को परेशान करती है जब किसी व्यक्ति का खाना पूरी तरह से पच नहीं पाता है तो उसे गैस की समस्या हो जाती है और गैस की समस्या होने पर ही कब्ज़ा का होना  संभव होता है।

*क़ब्ज़ होने के कारण :*

खानपान सम्बंधी गलत आदतें जैसे- समय पर भोजन न करना, बासी और अधिक चिकनाई वाला भोजन, मैदा आदि से बनाया गया मांसाहारी भोजन, भोजन में फाइबर की कमी, अधिक भारी भोजन अधिक खाना, शौच को रोकने की आदत, शारीरिक श्रम न करना, विश्राम की कमी, मानसिक तनाव (टेंशन), आंतों का कमजोर होना, पानी की कमी, गंदगी में रहना, मादक द्रव्यों का सेवन, एलोपैथी दवाइयों के दुष्प्रभाव के कारण, भोजन के साथ अधिक पानी पीने, मिर्च-मसालेदार तथा तले हुए पदार्थ जैसे-पूरी-कचौड़ी, नमकीन, चाट-पकौड़े खाने, अधिक गुस्सा, दु:ख आलस्य आदि कारणों से कब्ज हो जाती है।

*कब्ज और पेट की गैस  के कुछ और भी कारण होते हैं* जैसे कि हमारा खाने का सही ढंग से ना पचना खाना खाने के बाद बैठ जाना हल्का ना टहलना आदि कारण हो सकते हैं कब्ज को दूर करने के लिए हम यहां पर कुछ उपाय बता रहे हैं जिनको प्रयोग करके आप अपनी कब्ज को दूर कर सकते हैं।

*कब्ज और पेट की गैस का घरेलु उपाय :*

*धनिया* : धनिया कब्ज तोड़ने में भी सहायता करता है। धनिये के चूर्ण से पुराना से पुराना कब्ज भी दूर हो जाता है। इसके लिए 50 ग्राम धनिया, 10 ग्राम सोंठ, 2 चुटकी कालानमक तथा 3 ग्राम हरड़ लेकर सभी चीजों को कूट पीसकर कपड़े से छानकर रख लेना चाहिए। इस चूर्ण को थोड़ी सी मात्रा में भोजन करने के बाद गुनगुने पानी से लें। इससे कब्ज नष्ट होता है और मल भी खुलकर आने लगता है। इससे पेट का दर्द भी कम हो जाता है और आंतों की खुश्की भी दूर हो जाती है। इससे भूख खुलकर आती है। मलावरोध समाप्त हो जाता है। यदि पुराना कब्ज हो तो इस चूर्ण को लगातार 40 दिनों तक लेना चाहिए।कब्ज न रहने पर भी यह चूर्ण लिया जा सकता है। इससे किसी भी प्रकार की हानि की संभावना नहीं होती है।

*त्रिफला* (छोटी हरड़, बहेड़ा तथा आंवला) : त्रिफला का चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में लेकर हल्के गर्म पानी के साथ रात को सोते समय लेने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) समाप्त होती है।

*अजवायन* : अजवायन 10 ग्राम, त्रिफला 10 ग्राम और सेंधानमक 10 ग्राम को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर चूर्ण बना लें। रोजाना 3 से 5 ग्राम इस चूर्ण को हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से काफी पुरानी कब्ज समाप्त हो जाती है।

*मुनक्का* : रोजाना प्रति 10 मुनक्का को गर्म दूध में उबालकर सेवन करने से लाभ मिलता है।

*आंवला* : सूखे आंवले का चूर्ण रोजाना 1 चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद  ने से लाभ होता हैं। या फिर 1 चम्मच आंवले का चूर्ण शहद के साथ रात में लें।

*गिलोय* *: गिलोय का मिश्रण या चूर्ण 1 चम्मच गुड़ के साथ खाने से कब्ज दूर होती है।

*लहसुन* : पेट में गैस बनने पर सुबह 4 कली लहसुन की खाये इससे पाचन शक्ति बढ़ती है और गैस दूर होती है।

*देशी घी* : देशी घी में कालीमिर्च मिलाकर गर्म दूध में घी के साथ पीने से आंतों में रुका मल नरम और ढीला हो करके बाहर निकल जाता है।

*दूध*: 250 मिलीलीटर गाय का दूध, 250 ग्राम पानी और 5 कालीमिर्च साबुत लेकर आग पर चढ़ा दें और जब पानी जल जाये, तब उतारकर छान लें। इसमें मिश्री मिलाकर पीने से वायुगोला अर्थात गैस का दर्द मिट जाता है।

*मुलहठी* : मुलहठी 5 ग्राम को गुनगुने गर्म दूध के साथ सोने से पहले पीने से सुबह शौच साफ आती है।

*नीम*: नीम के सूखे फल को रात में गर्म पानी के साथ खाने से शौच खुलकर आती है।

*ईसबगोल* : ईसबगोल 6 ग्राम को 250 मिलीलीटर गुनगुने दूध के साथ सोने से पहले पी लें। कभी-कभी ईसबगोल की भूसी लेने से पेट फूल जाता है। ऐसा बड़ी आंतों में ईसबगोल पर बैक्टीरिया के प्रभाव से पैदा होने वाली गैस से होता है। इसलिए ध्यान रखें कि ईसबगोल की मात्रा कम से कम ही लें, क्योंकि ईसबगोल आंतों में पानी को सोखती है, जिससे मल की मात्रा बढ़ती है और मल की मात्रा बढ़ने से आंतों की कार्यशीलता बढ़ जाती है, जिससे मल ठीक से बाहर निकल आता है। ईसबगोल लेने के बाद दो-तीन बार पानी पीना चाहिए। इससे ईसबगोल अच्छी तरह फूल जाता है। इसलिए ईसबगोल रात को ही लेना चाहिए और खाने के तुरंत बाद लें।

*सौंफ*:  सौंफ 50 ग्राम, कालानमक 10 ग्राम, कालीमिर्च 5 ग्राम को कूटकर छान लें। सुबह-शाम इसे 5-5 ग्राम खाना खाने के बाद गर्म पानी के साथ लेने से लाभ होता है। या  सौंफ का चूर्ण रात को खाकर ऊपर से पानी पीने से कब्ज दूर होती है।

*अंजीर*: अंजीर 5 से 6 पीस को 250 मिलीलीटर पानी में उबाल लें, पानी को छानकर पीने से कब्ज में राहत मिलती है।

*नींबू* : नींबू का रस, 5 मिलीलीटर अदरक का रस और 10 ग्राम शहद मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से कब्ज नष्ट होती है।

गुलाब की सुखी पत्या दूध मे शाम को पका ले रात मे सोते समय पिये जरूर लाभ होगा।

यदि आपको बादाम से एलर्जी नही है तो सोते समय 2 बादाम चबा चबा कर खाये सुबह गर्म पानी पिये 100 कदम चले आपको टाइट मोशन से गारॉटी से राहत मीलेगी।

डाइटिग के चक्कर मे भूखे नही रहे भरपूर पानी ओर भरपेट भोजन ले।

*क़ब्ज़ से बचने के लिए कैसा भोजन करे :*

दालों में मूंग और मसूर की दालें, सब्जियों में कम से कम मिर्च-मसालें डालकर परवल, तोरई, टिण्डा, लौकी, आलू, शलजम, पालक और मेथी आदि को खा सकते हैं। आधे से ज्यादा चोकर मिलाकर गेहूं तथा जौ की रोटी खाएं। भूख से एक रोटी कम खाएं। अमरूद, आम, आंवला, अंगूर, अंजीर, आलूचा, किशमिश, खूबानी और आलूबुखारा, चकोतरा और संतरे, खरबूजा, खीरा, टमाटर, नींबू, बंदगोभी, गाजर, पपीता, जामुन, नाशपाती, नींबू, बेल, मुसम्मी, सेब आदि फलों का सेवन करें। दिन भर में 6-7 गिलास पानी अवश्य पीयें। मूंग की दाल की खिचड़ी खायें। फाइबर से बने खाने की चीजें का अधिक मात्रा में सेवन करें, जैसे- फजियां, ब्रैन (गेहूं, चावल और जई आदि का छिलका), पत्ते वाली सब्जियां, अगार, कुटी हुई जई, चाइनाग्रास और ईसबगोल आदि को कब्ज से परेशान रोगी को खाने में देना चाहिए।

*क़ब्ज़ में परहेज़ :*

तले पदार्थ, अधिक मिर्च मसाले, चावल, कठोर पदार्थ, खटाई, रबड़ी, मलाई, पेड़े आदि का सेवन न करें। कब्ज दूर करने के लिए हल्के व्यायाम और टहलने की क्रिया भी करें। पेस्ट्रियां, केक और मिठाइयां कम मात्रा में खानी चाहिए।

Thursday, 21 November 2019

13:52

जानिए गुड़ के सेवन के फायदे और चीनी के नुकसान


के सी शर्मा*
आयुर्वेद में ऐसा एक सूत्र लिखा है कि शरीर को भोजन में से मिलने वाली जो शक्कर है, ये तेजी के साथ मिले और इसके बीच में कोई रुकावट न आये, ऐसी कोई चीज भोजन में मत मिलाये. अब ये बात उन्होंने साढ़े तीन हजार साल पहले कही है. आप देखिये कैसे महान लोग हमारे देश में हुए जिन्होंने साढ़े तीन हजार साल पहले ये कह रहे है कि भोजन के रूप में जो शक्कर आपको मिलने वाली है, ये तेजी के साथ आपको मिले और इसको मिलने में कोई रुकावट न आये ऐसी कोई वस्तु भोजन में मत खाइए.

आज के आधुनिक विज्ञानं के हिसाब से ढूँढना शुरू किया कि हमारे आज के भोजन में ऐसी कोण कोण सी चीजे है जो भोजन के अंदर मौजूद नेचुरल शुगर को उपयोग में आने में रुकावट डाल रही है. तो परिणाम चौका देने वाले थे.

हमारे देश में एक बहुत बड़ी लेबोरेटरी है जिसका नाम CDRI (CENTRAL DRUG RESEARCH CENTER) है. कई साइंटिस्ट से इस बारे में बात की कि आप बताइए कि हमारे भोजन में ऐसी कौन कौन सी चीजे है जो हमारे भोजन के प्राकृतिक शक्कर को शरीर के लिए उपयोग में आने से रोकती है तो सभी वैज्ञानिको ने एक स्वर से जिस वस्तु का नाम लिया था, उसका नाम चीनी है, हां वही चीनी जो आप चाय में डालते हो.

अब आप बोलेंगे फिर इसके स्थान पर क्या खाए. तो जवाब ये है कि गुड खाइए. आप बोलेंगे गुड और चीनी में क्या अंतर है. इन दोनों में बहुत अंतर है चीनी बनाने के लिए गन्ने के रस में 23 जहर (केमिकल) मिलाने पड़ते है, और ये सब वो जहर है जो शरीर के अंदर चले तो जाते है लेकिन बाहर नहीं निकल पाते. और गुड एक अकेला ऐसा है जो बिना किसी जहर के सीधे सीधे बनता है गन्ने के रस को गर्म करते जाओ, गुड बन जाता है. इसमे कुछ मिलाना नही पड़ता. ज्यादा से ज्यादा उसमे दूध मिलाते है और कुछ नही मिलाना पड़ता.

गुड से भी अच्छी एक चीज़ है जो आप खा सकते हैं उसका नाम है काकवी. अगर आपने कभी गुड बनता देखा होगा तो आपको इसका भी पता होगा. ये काकवी गुड से भी अच्छी है, गुड तो अच्छा है ही लेकिन गुड से भी अच्छी अगर कोई चीज है तो ये काकवी ही है. एक काम कीजिए काकवी को बाल्टी में भरकर रखिये ये ख़राब नहीं होती, 1 साल 2 साल आराम से रख सकते हैं. काकवी का भाव भी लगभग गुड के बराबर ही है. अब आप या तो काकवी खाइये नहीं तो गुरु खाइए. अगर आपको काकवी मिलती है तो समझ लीजिए कि आप राजा हैं, अगर काकवी ना मिलकर गुड मिल रहा है तो छोटे राजा है.

अभी तक आप यही सोच रहे होंगे कि ये काकवी क्या होता है, आपके ये भी बता देते है. काकडी का मतलब गन्ने के रस को जब हम गर्म करना शुरू करते हैं तो गरम करने के करते-करते गुड बनने से पहले और उसका रस गर्म होने के बाद एक लिक्विड बनता है उसी लिक्विड को काकवी कहते है. जहां भी गुड बनता है वहां पर काकवी जरुर मिलेगी.

आप से मेरी एक छोटी सी विनती है कि अपने घर से यह चीनी निकाल दीजिए. चीनी ने पूरी दुनिया का सत्यानाश किया है. शुगर मील वालों का भी BP हाई है. चीनी बनाना और खाना शुरू किया है, तब से शरीर की हालत ख़राब है. करोड़ों रुपए तो शुगर मिल लगाने में लगते हैं और करोड़ो गन्ने के रस को चीनी बनाने में लगते है. इससे अच्छा है बहुत सस्ते में गुड़ बनता है, प्रोसेस भी लम्बा नहीं है. बहुत सस्ते में काकवी बनती है, सीधे गुड बनाकर बेचे, काकवी बनाकर बेचे.

अब एक रोचक जानकारी आपको देता हूँ कि भारत को छोड़कर दुनिया के देशों में गुड़ और काकवी की बहुत डिमांड है. क्योकि चीनी से बनी मिठाई जल्दी ख़राब हो जाती है और उसमे क्वालिटी नहीं होती, लेकिन गुड से बनी मिठाई कई महीनो तक ख़राब नहीं होती और बेस्ट क्वालिटी होती है. आपको सुनकर आश्चर्य है गाँव में गुड का भाव 20-30 रूपये किलो होता है. लेकिन इजराइल में गुड का भाव 170 रुपए किलो है, इजराइल एक छोटा सा देश है, अगर आप गुड वहा बेचना चाहेंगे तो 170 रुपए किलो बिकता है. जर्मनी में गुड़ का भाव 210 रुपए किलो है, कनाडा में भारत के रुपए के हिसाब से गुड का भाव 330 रुपए किलो है. इन सभी देशों में गुड भी बहुत मांग है.ये चीनी वहा सस्ती है. क्योंकि उनको मालूम है यह शक्कर जहर है और गुड़ अमृत है.

गुड और शक्कर का हमेशा एक ही बात याद रखिए कुछ याद रख पाए या ना रख पाए. अगर शक्कर को अपने खाया तो उसको पचाना पड़ता है और इसमे इतने हानिकारक तत्व है कि आसानी से पचते नहीं है. और अगर आपने गुड खाया तो गुड की इतनी बेहतरीन क्वालिटी है कि जो कुछ गुड के साथ आपने खाया है, उसको गुड पचा देता है. शक्कर को पचाना पड़ता है उसमे 6-7 घन्टे लगते है और गुड जो कुछ भी खाओ उसको मात्र 4 घंटे 4० मिनट में पचा देता है. इसलिए भोजन के साथ गुड जरुर खाइए और शक्कर बिलकुल मत खाइए

अगर आप इस सूत्र का पालन कर ले तो डायबटीज, आर्थराइटिस, अस्थमा, ओस्तिमालिसिस जैसी 148 गंभीर बीमारिया आपकी जिंदगी में झाँकने भी नही आयेगी. आप अपनी जिंदगी में से ये चीनी को निकाल दे चीनी क्यूंकि हम जो प्राकृतिक शक्कर फल में से या और दूसरी वस्तुओं में से ले रहे है, ये चीनी उनके रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट है.

आप एक बात याद रखिये अगर घृणा करने की कोई वस्तु है जिससे सबसे ज्यादा नफरत करनी है तो वो इस चीनी से करिए. गुड खाइए काकवी खाईये