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Saturday, 4 July 2020

09:29

5 जुलाई को लगेगा 2020 का साल का तीसरा चंद्र ग्रहण


इस साल का तीसरा ग्रहण  चंद्र ग्रहण 5 जुलाई को लगेगा। यह ग्रहण एक उपछाया चंद्र ग्रहण होगा यानी ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उपछाया चंद्र ग्रहण का असर न के बराबर होता है इसलिए ज्यादा बुरा प्रभाव नहीं पड़ता लेकिन फिर भी सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। इस उपछाया चंद्रग्रहण को धनुर्धारी चंद्रग्रहण भी कहा जा रहा है।
क्या चंद्र ग्रहण का समय 
गुरु पूर्णिमा यानि 5 जुलाई को लगने वाले चंद्र ग्रहण का प्रारंभ सुबह 08 बजकर 38 मिनट पर होगा। परमग्रास चन्द्र ग्रहण का समय 09 बजकर 59 पर होगा। ग्रहण का मोक्ष काल दिन में 11 बजकर 21 मिनट पर होगा। ऐसे में देखा जाए तो इस चंद्र ग्रहण का कुल समय 02 घण्टा 43 मिनट 24 सेकेण्ड है।

 
कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण?
5 जुलाई लगने वाला ये चंद्र ग्रहण अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप में दिखाई देगा। ये ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा और उसका सूतक भी भारत में मान्य नहीं होगा।पूजा पाठ आदि मे कोई परहेज नहीं है  सूतक के सारे नियम पूर्ण ग्रहण में माने जाते हैं।

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क्या है चंद्र ग्रहण का प्रभाव 
21 जून को लगे सूर्य ग्रहण का प्रभाव 21 दिनों तक रहेगा और साथ में 5 जुलाई को चंद्र ग्रहण लगने की वजह से स्थितियां थोड़ी बिगड़ सकती हैं लेकिन घबराने की कोई बात नहीं है। भले ही एक महीने के अंदर तीन ग्रहण लगे हों लेकिन इन्हें एक ही माना जाएगा क्योंकि इन तीनों ग्रहण में सिर्फ सूर्य ग्रहण ही पूर्ण रूप से लगा था।

 आचार्य प्राणनाथ मिश्रा 
        कथा प्रबक्ता 
ज्योतिष बास्तु कर्मकांड मर्मज्ञ 
📱8383985883
📱7835882780

Wednesday, 16 October 2019

07:59

बिना जन्मपत्री के इस तरह जाने अपना भविष्य


कई व्यक्तियों के पास अपना जन्म विवरण नहीं होता है तब उनका हाथ देखकर उनके आने वाले समय के बारे में बताया जा सकता है। हाथों की लकीरों में ही इंसान के जीवन-मरण का सारा रहस्य छुपा होता है।  हथेली में सामान्यत: मुख्य रूप से तीन रेखाएं दिखाई देती हैं। ये तीन रेखाएं जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा है। हम आपको जीवन रेखा के विषय मे सामान्य जानकारी दे रहे है ।

लंबी आयु- हस्तरेखा ज्योतिष में बताया गया है कि लंबी, गहरी, पतली और साफ जीवन रेखा शुभ होती है। जीवन रेखा पर क्रॉस का चिह्न अशुभ होता है। यदि जीवन रेखा शुभ है तो व्यक्ति की आयु लंबी होती है और उसका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

स्वतंत्र विचार- यदि मस्तिष्क रेखा (मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा लगभग एक ही स्थान से प्रारंभ होती है) और जीवन रेखा के मध्य थोड़ा अंतर हो तो व्यक्ति स्वतंत्र विचारों वाला होता है।

सोच-विचार- यदि मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा के मध्य अधिक अंतर हो तो व्यक्ति बिना सोच-विचार के कार्य करने वाला होता है।

कष्ट, गंभीर बीमारी- यदि जीवन रेखा बाएं हाथ में टूटी हुई हो और दाहिने हाथ में साफ तथा सुस्पष्ट है तब यह कुछ गंभीर बीमारी का संकेत है। परन्तु अंतत: बीमारी ठीक हो जाती है लेकिन यदि जीवन रेखा दोनो हाथ मे टूटी हुई हो तो व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है।

निर्बलता- यदि किसी व्यक्ति के हाथ में जीवन रेखा श्रृंखलाकार या अलग-अलग टुकड़ों से जुड़ी हुई या बनी हुई हो तो व्यक्ति निर्बल हो सकता है। ऐसे लोग स्वास्थ्य की दृष्टि से भी परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसा विशेषत: तब होता है, जब हाथ बहुत कोमल हो। जब जीवन रेखा के दोष दूर हो जाते हैं तो व्यक्ति का जीवन सामान्य हो जाता है।

तरक्‍की- यदि जीवन रेखा से कोई शाखा गुरु पर्वत क्षेत्र (इंडेक्स फिंगर के नीचे वाले भाग को गुरु पर्वत कहते हैं।) की ओर उठती दिखाई दे या गुरु पर्वत में जा मिले तो इसका अर्थ यह समझना चाहिए कि व्यक्ति को कोई बड़ा पद या व्यापार-व्यवसाय में तरक्की प्राप्त होती है।

धन-संपत्ति-.यदि जीवन रेखा से कोई शाखा शनि पर्वत क्षेत्र (मिडिल फिंगर के नीचे वाले भाग को शनि पर्वत कहते हैं।) की ओर उठकर भाग्य रेखा के साथ-साथ चलती दिखाई दे तो इसका अर्थ यह होता है कि व्यक्ति को धन-संपत्ति का लाभ मिल सकता है। ऐसी रेखा के प्रभाव से व्यक्ति को सुख-सुविधाओं की वस्तुएं भी प्राप्त हो सकती हैं।

भाग्य- यदि जीवन रेखा, हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा तीनों प्रारंभ में मिली हुई हो तो व्यक्ति भाग्यहीन, दुर्बल और परेशानियों से घिरा होता है। (हृदय रेखा इंडेक्स फिंगर और मिडिल फिंगर के आसपास से प्रारंभ होकर सबसे छोटी उंगली की ओर जाती है।)

परेशानियां- यदि जीवन रेखा को कई छोटी-छोटी रेखाएं काटती हुई नीचे की ओर जाती हो तो ये रेखाएं व्यक्ति के जीवन में परेशानियों को दर्शाती हैं। यदि इस तरह की रेखाएं ऊपर की ओर जा रही हों तो व्यक्ति को सफलता प्राप्त होती है।

महत्वाकांक्षा- यदि जीवन रेखा गुरु पर्वत से प्रारंभ हुई हो तो व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी होता है। ये लोग अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

अशुभ लक्षण- जब टूटी हुई जीवन रेखा शुक्र पर्वत के भीतर की ओर मुड़ती दिखाई देती है तो यह अशुभ लक्षण होता है। ऐसी जीवन रेखा बताती है कि व्यक्ति को किसी बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है।

मृत्यु- यदि जीवन रेखा अंत में दो भागों में विभाजित हो गई हो तो व्यक्ति की मृत्यु जन्म स्थान से दूर होती है।

जीवन- जीवन रेखा पर वर्ग का चिह्न हो तो यह व्यक्ति के जीवन की रक्षा करता है। आयु के संबंध में जीवन रेखा के साथ ही स्वास्थ्य रेखा, हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा और अन्य छोटी-छोटी रेखाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।

अल्पायु- यदि दोनों हाथों में जीवन रेखा बहुत छोटी हो तो वह व्यक्ति अल्पायु हो सकता है। जीवन रेखा जहां-जहां श्रृंखलाकार होगी, उस आयु में व्यक्ति किसी बीमारी से ग्रसित हो सकता है।

स्वभाव- यदि किसी व्यक्ति के हाथ में जीवन रेखा चंद्र पर्वत तक चली जाए तो व्यक्ति का जीवन अस्थिर हो सकता है। अंगूठे के नीचे वाले भाग को शुक्र पर्वत कहते हैं और शुक्र के दूसरी ओर चंद्र पर्वत स्थित होता है। यदि इस प्रकार की जीवन रेखा कोमल हाथों में हो और मस्तिष्क रेखा भी ढलान लिए हुए हो, तो व्यक्ति का स्वभाव स्थिर होता है। इस प्रकार के लोग साहस भरे और उत्तेजना से पूर्ण कार्य करना चाहते हैं।

व्यक्तित्व- यदि जीवन रेखा पीलापन लिए और चौड़ी हो तो ऐसा व्यक्ति बुरी प्रवृत्ति, खराब चरित्र वाला और बीमार स्वास्थ्य का मालिक होता है।


राजेन्द्र गुप्ता,
ज्योतिषी और हस्तरेखाविद
मो. 9611312076
नोट- अगर आप अपना भविष्य जानना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करके या व्हाट्स एप पर मैसेज भेजकर पहले शर्तें जान लेवें, इसी के बाद अपनी बर्थ डिटेल और हैंडप्रिंट्स भेजें।