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Thursday, 21 January 2021

10:09

संयुक्त किसान मोर्चा ने आम राय से सरकार द्वारा कल रखे गए प्रस्ताव को अस्वीकार किया

संयुक्त किसान मोर्चा की आम सभा में सरकार द्वारा कल रखे गए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया।  तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द करने और सभी किसानों के लिए सभी फसलों पर लाभदायक एमएसपी के लिए एक कानून बनाने की बात, इस आंदोलन की मुख्य मांगो के रूप में, दोहराई गयी।

सयुंक्त किसान मोर्चा इस आंदोलन में अब तक शहीद हुए 147 किसानों को श्रद्धाजंलि अर्पित करता है। इस जनांदोलन को लड़ते लड़ते ये साथी हमसे बिछड़े है। इनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

पुलिस प्रशासन के साथ हुई बैठक में पुलिस ने दिल्ली में प्रवेश न करने की बात कही वहीं किसानों ने दिल्ली की रिंग रोड पर परेड करने की बात दृढ़ता और ज़ोर से रखी। 

शांतिपूर्ण चल रहा यह आंदोलन अब देशव्यापी हो चुका है। कर्नाटक में अनेक स्थानों पर वाहन रैलियों के माध्यम से किसान गणतंत्र दिवस के लिए एकजुट हो रहे है। केरल में कई जगहों पर किसान ट्रेक्टर मार्च निकाल रहे है।

उत्तराखन्ड के बिलासपुर व रामपुर समेत अन्य जगहों पर किसान ट्रेक्टर मार्च कर दिल्ली की किसान परेड की तैयारी कर रहे है। छत्तीसगढ़ में किसान 23 जनवरी को राजभवन का घेराव करेंगे और एक जत्था दिल्ली की तरफ भी रवाना होगा।

नवनिर्माण किसान संगठन की किसान दिल्ली चलो यात्रा, जो कि ओडिशा से चली थी, को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बार बार परेशान किया जा रहा है। उनके रुट बदलने से लेकर बैठके न करने के निर्देश दिए जा रहे है। हम प्रशासन के इस बर्ताव का विरोध करते है।

कोलकाता में 3 दिन का विशाल महापड़ाव 20 जनवरी से 22 जनवरी तक होगा। कल हुए विशाल कार्यक्रम में हज़ारो लोगो ने भाग लिया। आने वाले समय मे ओर भी तेज होने की संभावना है।

मजदूर किसान शक्ति संगठन के नेतृत्व में किसान, मजदूर व आम लोग शाहजहांपुर बॉर्डर पहुंच रहे है। कठपुतली और गीतों के माध्यम से नव उदारवादी नीतियों का विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।


Wednesday, 20 January 2021

01:50

किसानों और सरकार के बीच आज वार्ता SC में ट्रैक्टर रैली पर होगी सुनवाई

Tap news India deepak tiwari 
दिल्ली बॉर्डर पर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच आज किसान संगठनों और सरकार के बीच 10वें दौर की बातचीत होनी है. नए कृषि कानूनों को लेकर यह बैठक कल ही होनी थी, लेकिन इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया. सरकार का कहना है कि केंद्र और किसान इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझा लेना चाहते हैं, लेकिन इसमें अन्य विचारधाराओं के लोग घुस आए हैं, और इस वजह से गतिरोध खत्म करने में देरी हो रही है.

यह कहते हुए कि नए कृषि कानून किसान समुदाय के हित में हैं, सरकार ने कहा कि जब भी अच्छी चीजें या उपाय किए जाते हैं तो बाधाएं आती हैं और इस मुद्दे को हल करने में अधिक समय लग रहा है क्योंकि किसान नेता अपने तरीके से समाधान चाहते हैं.

बहरहाल, 41 किसान संगठनों के साथ सरकार की बैठक का महत्वपूर्ण 10वां दौर आज के लिए निर्धारित है. इस बीच, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कल उम्मीद जताई थी कि किसान संगठन 10वें दौर की बातचीत में नए कृषि कानूनों को निरस्त करने के अलावा अन्य विकल्पों पर चर्चा करेंगे. कृषि मंत्री ने किसानों से यह भी अपील की कि वे दिल्ली में 26 जनवरी को अपनी ट्रैक्टर रैली न करें. 

Monday, 18 January 2021

07:32

किसान आंदोलन का 54 वां दिन यूपी दिल्ली गाजीपुर बोर्डर पर महिलाओं ने संभाली बागडोर- गंगेश्वर दत्त शर्मा

नई दिल्ली कृषि क़ानूनों के खिलाफ गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में महिला दिवस मनाया गया।इस अवसर पर सम्पूर्ण दिन की करवाई महिलाओं को समर्पित की गई।अनशन पर 21 महिला बैठी व सभा की अध्यक्षता अनशनकारियों ने की।संचालन रवनीत कौर ने किया। आंदोलनकारियों को जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड सुभाषिनी अली सहगल व अन्य कई महिलाओं ने संबोधित किया। आंदोलन में नोएडा गाजियाबाद दिल्ली उत्तर प्रदेश के कई जिलों से अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सेदारी किया।
धरना स्थल पर सभा को संबोधित करते हुए एडवा की राष्ट्रीय नेता सुभाषिनी अली सहगल ने कहा कि सरकार किसान विरोधी, जन विरोधी काले कानूनों को वापस ले उन्होंने कहा कि इन कानूनों से किसान बड़े कारपोरेट के हाथ बंधवा बन जाएगा इसीलिए इसका विरोध करना जरूरी है जिस कानून से किसान अपनी जमीन खो बैठेगा उसका विरोध करना जरूरी है जब सरकार किसानों से अनाज खरीदना बंद कर देगी तो राशन व्यवस्था भी चौपट हो जाएगी सरकार के इस षड्यंत्र का भंडाफोड़ करने की जरूरत है साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों की लड़ाई हम सब की लड़ाई है इस लड़ाई में कई किसान अपनी जान दे चुके हैं उनकी कुर्बानियों को हम व्यर्थ नहीं जाने देंगे बहादुर किसानों के साथ हम साथ हैं हमारा संगठन अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति किसानों के आंदोलन का पूरा समर्थन कर रही है और पूरी उनके साथ है।
   दोपहर बाद लड़कियों की कबड्डी प्रतियोगिता की गई।
महिलाओं के नोएडा जत्थे का नेतृत्व जनवादी महिला समिति नोएडा कमेटी की नेता पूनम देवी, मंजू शर्मा, गुड़िया, चंदा बेगम आदि ने किया।
साथ ही किसान आंदोलन में सीटू नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा, मदन प्रसाद, रामाकांत सिंह, भीखू प्रसाद, रामसागर, विनोद कुमार, जीएस तिवारी, ईश्वर त्यागी, जेपी शुक्ला, आदि के नेतृत्व में सैकड़ों मजदूरों ने भी हिस्सा लिया।
रामजी पांडे

Saturday, 16 January 2021

05:30

वर्किंग जॉर्नलिस्ट ऑफ इंडिया ने कोरोना वेक्सीनेशन अभियान की सफ़ल शुरुआत पर देश व केंद्र सरकार को दी बधाई tap news

नई दिल्ली,16 जनवरी का दिन भारत वर्ष के लिए बहुत  महत्वपूर्ण है। आज देश में वैश्विक महामारी कोरोना का काम तमाम करने की मुहिम का आगाज़ हो चुका है। देश भर में आज यानि 16 जनवरी का दिन भारत वर्ष के लिए बहुत  महत्वपूर्ण है। आज देश में वैश्विक महामारी कोरोना का काम तमाम करने की मुहिम का आगाज़ हो चुका है। वहीं वर्किंग जॉर्नलिस्ट ऑफ इंडिया का आज स्थापना दिवस भी है। आज ही के दिन लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले  मीडिया कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए देश के शीर्ष संगठन WJI की नींव भी रखी गई। 

WJI ने  आज से शुरू हुए कोरोना वेक्सिनेशन अभियान पर खुशी जताई और  केंद्र सरकार और देश के वैज्ञानिकों को इस अभूतपूर्व  सफलता के लिये बधाई दी और आभार जताया। WJI ने एक बयान जारी कर कहा कि जहाँ विश्व के बड़े बड़े देशों की स्वास्थ्य सेवाओं ने कोरोना के सामने घुटने टेक दिये वहीं भारत ने पूरे विश्व के सामने इस महामारी का जिस तरह से मुकाबला किया यह अपने आप में एक मिसाल है। भारतीय चिकित्सा प्रणाली को पूरी दुनिया ने देखा है कि किस तरह हमारी पुरातन आयुर्वेदिक चिकित्सा विशेषकर काढ़े के चमत्कारी प्रभाव को दुनिया ने जाना है। वहीं हमारी सरकार और वैज्ञानिकों ने जिस तेज़ी से वेक्सिनेश की सुविधा देश को उपलब्ध करवायी है वो  काबिले तारीफ है 
आज देश के तमाम करोना योद्धाओं को भी आभार व्यक्त करने  और कोरोना काल में  शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करने का भी का वक़्त है।  कोरोना काल में मीडिया की भूमिका भी बड़ी अहम रही है। पत्रकारों ने अपनी जान की परवाह किए बिना जिस तरह से अपने फर्ज को अदा किया है देश का इतिहास उन्हें याद रखेगा   कोरोना काल में कई पत्रकार भी अपने फर्ज को पूरा करते करते शहीद हो गए WJI उन पत्रकारों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। 
 आज जब वेक्सिनेशन अभियान शुरू हो चुका है तो पत्रकार साथी देश को इस अभियान से रूबरू करवा रहे हैं।  वहीं WJI का सदस्यता अभियान तेज़ी से चल रहा है। लिहाज़ा WJI की सदस्यता लेने वाले कुछ पत्रकार साथियों को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया,PCI बुलाकर ही सदस्यता कार्ड  दिये गये। इस अवसर पर जिन पत्रकारो ने WJI की सदस्यता कार्ड दिये गए उन्होंने खुशी जताई की वे देश के शीर्ष पत्रकार संगठन का हिस्सा बने हैं

Sunday, 10 January 2021

04:48

किसान आंदोलन को मजबूत करने के लिए पप्पू यादव ने सांसदों और मंत्रियों के साथ की बैठक tap news india

दिल्ली 10 जनवरी: दिल्ली में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे किसानों के पक्ष में आज जाप सुप्रीमो पप्पू यादव ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में पूर्व एवं वर्तमान सांसदों और मंत्रियों के साथ बैठक की। बैठक का उद्देश्य किसानों के पक्ष में आम सहमति बनाना था। अपने संबोधन में जाप सुप्रीमो ने कहा की देश के अन्नदाता काले कानून के खिलाफ पूस की रात में सड़क पर हैं। उनकी मौत हो रही हैं। लेकिन सरकार पूंजीपतियों के साथ खड़ी है।

पप्पू यादव ने कहा की आज जरूरत है कि सभी राजनेता किसानों के साथ खड़े हो। किसान आंदोलन को अब जनआंदोलन बनाने की जरूरत हैं। यह सभी वर्तमान और पूर्व सांसद की जिम्मेदारी है कि इस आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाएं। 

पप्पू यादव ने बताया कि इस बैठक में देश के सभी राज्यों के सभी धर्मों के नेताओं ने भाग लिया। सभी नेताओं ने एक स्वर में इस काले कानून के खिलाफ लोंगों को एकजूट होने की अपील की। जाप का हर एक कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर देश की जनता को एकजूट करेगा।

आगे उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत से पूरे देश का पेट भरता है। केंद्र सरकार किसानों के साथ निर्ममता बंद करे और अविलंब तीनों काले कृषि कानून रद्द हों।

आर्थिक आजादी की बात करते पप्पू यादव ने कहा कि समग्र विकास के लिए आर्थिक आजादी बहुत जरूरी है। भारत का किसान आर्थिक रूप से कमजोर है। इन कृषि कानूनों से किसानों को और कमजोर किया जा रहा है ताकि उनकी जमीनें भी छीन कर पूंजीपतियों को दी जा सके।

जाप अध्यक्ष ने बैठक में मौजूद सभी लोगों से बिहार में 14, 15 और 16 जनवरी को प्रस्तावित किसान - मजदूर रोजगार यात्रा में शामिल होने का भी आग्रह किया।

Sunday, 3 January 2021

07:46

भारी बारिश व सर्दी बढ़ने के बाद भी किसानों के हौसले बुलंद सहयोग में लगे रहे श्रमिक संगठन tni

नोएडा, किसान विरोधी कृषि कानूनों तथा बिजली संशोधन विधेयक 2020 के निरस्त किए जाने को लेकर भारी बारिश के बाद भी किसानों के मजबूत हौसले के साथ रविवार 3 जनवरी 2021 को 39 वें दिन भी किसान आंदोलन जारी रहा।
दिल्ली यूपी गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन के समर्थन में  सीटू गौतमबुद्धनगर जिलाध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा व श्रमिक विकास संगठन के गौतमबुद्ध नगर के जिला अध्यक्ष रामजी पांडे, मदन प्रसाद, भीखू प्रसाद, पूनम देवी, गाजियाबाद सीटू नेता ईश्वर त्यागी के नेतृत्व में दर्जनों मजदूरों ने आंदोलन में हिस्सा लिया तथा अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय महासचिव मरियम धवले, दिल्ली एनसीआर एडवा महासचिव आशा शर्मा, वरिष्ठ नेता पापिया, पुष्पा, नीरू, पुनावती, सरबनी, गौरी, अनीता, सीता, प्राची, मैमुना के नेतृत्व में अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति नोएडा व गाजियाबाद की सैकड़ों महिला कार्यकर्ताओं ने भी किसानों के आंदोलन के साथ एकजुटता में हिस्सा लिया। एडवा की नेता मरियम ढ़वले ने कहा कि आज सावित्री बाई फुले की 190 वी जयंती को हम संघर्ष दिवस के रूप में मना रहे हैं और महिला समिति की कार्यकर्ता पूरे देश में किसानों के आंदोलन के साथ एकजुटता में जगह जगह चल रहे  किसान आंदोलन में हिस्सा ले रही हैं। श्रमिक विकास संगठन के जिला अध्यक्ष व श्रमिक नेता रामजी पांडे दिन भर बारिस के कारण परेशान किसानों की मदत करते रहे।
आंदोलन में मौजूद अखिल भारतीय किसान सभा के वरिष्ठ नेता डीपी सिंह, चंद्रपाल सिंह, मेघराज सोलंकी ने कहा  कि भारी बारिश भयंकर सर्दी के बाद भी हमारे हौसले बुलंद है और हम आंदोलन को मजबूती के साथ तब तक जारी रखेंगे जब तक केंद्र सरकार किसानों की बात को मान कर काले कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

Saturday, 2 January 2021

09:43

श्रमिक विकास संगठन नेता रामजी पांडे किसानों के समर्थन में पहुंचे बार्डर new delhi

नई दिल्ली - जहां एक ओर केंद्र सरकार व मीडिया लोकसभा में मनमाने ढंग से पास किये गए तीनो बिल को सही साबित करने में जुटी है  तो वहीं दूसरी ओर   किसानों में जबरदस्त आक्रोश है। सरकार के अड़ियल रवैये को देखते हुए किसान अब पीछे हटने को कतई तैयार नहीं दिख रहे हैं  इन बिलों को लेकर  सरकार लगातार कटघरे में  दिख रही है यही वजह है की किसान यूनियन  श्रमिक विकास संगठन के नेता मंच से लोगों को आंदोलन में शामिल होने की अपील करते दिख रहे हैं। इस बीच किसानों को समर्थन देने कई पंजाबी कलाकार और कवि भी पहुंच रहे हैं, जिससे यहां सिंधु बॉर्डर पर पर किसानों का जमावड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है  मिली जानकारी के अनुसार किसानों का केंद्र सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव भी दिया गया था, लेकिन पिछली बार भी कोई सहमति नहीं बन पाई थी  हालांकि सरकार नेे फिर सेे किसानों के साथ बैठने का मन बना लिया है और इसके लिए 4 तारीख का दिन निश्चित किया है लेकिन अभी तक  किसानों का धरना लगातार जारी है उनका साथ देने के लिए  अब तो श्रमिक विकास संगठन भी मैदान में उतर चुका है  जिसके तहत  श्रमिक  विकास संगठन के जिलाध्यक्ष रामजी पांडे भी वहां दल बल के साथ पहुंच चुके हैं श्रमिक विकास संगठन के कार्यकर्ता किसानोंं के खाने पीने की व्यवस्था करनेे में लगातार उनका साथ देे रहे  श्रमिक नेता रामजी पांडे  ने पहले तो इस मुद्दे पर मीडिया से बात करनेे के साफ इनकार कर दिया लेकिन काफी मान मनोबल के बाद वह मीडिया से बात करनेे को राजी हो गए उन्होंने  कहा कि किसान मजदूर हमेशा से भाई भाई  रहे है। इसलिए जब जब जरूरत पड़ी है  हम ने एक दूसरे की मदद की है और आगे भी करते रहेंगे उन्होंनेे कहा जब एक ओर देश भर में तीनो  कानून का लगातार विरोध हो रहा है तो उसके बावजूद भी केंद्र सरकार अपने अहंकार में चूर है  यह समझ नहीं आ रहा  कि यह सरकार  जनता की है या उद्योगपतियों की जो सत्ता के मद में चूर होकर  लगातार किसानो, मजदूरों  व आम नागरिकों का उत्पीड़न कर रही  है। सत्ता में बैठे नेताओं  को यह समझना चाहिए यह जनता है जब यह आपको सिंहासन पर बैठा  सकती है तो उतार कर सड़क पर भी ला सकती है ।

Friday, 1 January 2021

16:11

सफदर हाश्मी शहादत दिवस पर स्मृति सभा का आयोजन

नई दिल्ली /कॉमरेड सफदर हाश्मी शहादत दिवस के अवसर पर हर साल की तरह स्मृति सभा और नुक्कड़ नाटक और जनवादी  गीत का आयोजन किया गया।  स्मृति सभा को संबोधित करते हुए #JNU की अध्यक्ष Aishe Ghosh  ने कहा कि मोदी सरकार ने देश को विकास की जगह विनाश की ओर धकेल दिया है। चाय बेचते बेचते मोदी सरकार ने देश के सार्वजनिक कंपनियों को बेचना शुरू कर दिया है। लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को घर तक जाने के लिए बस और रेल प्रबंध करने के बजाए सब कुछ बंद कर मजदूरों को भूखा मरने पर मजबूर कर दिया। मोदी सरकार 2 करोड़ रोजगार प्रतिवर्ष देने की बजाय पिछले 1 साल में ही 15 करोड़ नौजवानों के रोजगार को छीनने वाली सरकार बन गई है । पिछले 6 साल में इस सरकार ने आम आदमी के लिए एक भी काम नहीं किया, बल्कि शिक्षा और रोजगार का निजीकरण करने का काम किया है।  भाजपा-आरएसएस ने देश में नफरत फैलाने के काम को और तेज कर दिया है, ताकि देश की आवाम एकजुट होकर इसका विरोध ना कर पाए। अब मोदी सरकार की नजर देश के अन्नदाता की जमीन पर है जिसे बड़ी मेहनत करके जंगल काटकर  अन्नदाता ने खेती के योग्य बनाया है।  देश का अन्नदाता जिसने लॉक डाउन में भी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया था उसको भी बर्बाद करने के लिए करोना के आपात काल में  मोदी सरकार ने अपने अडानी अंबानी  मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए किसान विरोधी कृषि कानूनों को अलोकतांत्रिक तरीकों से संसद में पास करवा लिया। पिछले 1 महीने से ज्यादा समय से इतनी ठंड में हमारे अन्नदाता सिंधु, टिकरी और अन्य बॉर्डर पर डटे हुए हैं और हर रोज एक किसान की मृत्यु हो रही है । मोदी सरकार मूकदर्शक बनकर काम कर रही है और आंदोलन को बदनाम करने पर तुली हुई है। जो सरकार देश की मेहनतकश मजदूर और किसान के साथ नहीं है वह देश प्रेमी नहीं है और ऐसी जनविरोधी सरकार को  हमें एकजुट होकर बदलना होगा। कॉमरेड सफदर हाशमी का यही हमारे लिए संदेश है। स्मृति सभा में पहले जनवादी गीत और फिर जन नाट्य मंच द्वारा नाटक पेश किया गया। इस दौरान  कॉमरेड बृजेश, कॉमरेड के एम तिवारी, वीरेंद्र गौड़ ने भी स्मृति सभा को संबोधित किया।

Wednesday, 23 December 2020

17:54

पत्रकार सुरक्षा कानून के बिना लोकतंत्र की रक्षा नहीं हो सकती- डब्ल्यू जे आई.


नई दिल्ली/वर्किंग जॉर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया, सम्बद्ध भारतीय मजदूर संघ ने बिहार,पटना के PMCH हॉस्पिटल के सुरक्षा कर्मियों द्वरा पत्रकार प्रशांत रॉय पर किये गए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। साथ ही यूनियन ने दिल्ली में  अपनी पत्रकारिता कर रही महिला पत्रकार चंदरप्रीत के साथ एक साक्षात्कार के दौरान सांसद जसवीर डीम्पा द्वारा किए गए  दुर्व्यवहार को लेकर चिंता जाहिर की।
 पत्रकार यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय कुमार उपाध्याय, राष्ट्रीय महासचिव नरेंद्र भंडारी, राष्ट्रीय प्रचार सचिव उदय कुमार मन्ना के मुताबिक प्रशांत रॉय अपनी रिपोर्टिंग की जिम्मेदारियों को निभा रहे थे, जिसमे हॉस्पिटल के सुरक्षाकर्मियों ने उसपर हमला करके बाधा पहुंचाई वहीं सांसद महोदय ने तो अभद्र भाषा बोलते हुए माईक छीनकर कैमरे पर हाथ मारा।  यूनियन का कहना है कि सरकार जब तक पत्रकार सुरक्षा कानून नही बनाएगी, तब तक इस तरह के हमले पत्रकारों पर होते रहेंगे। यूनियन की तरफ से इस बारे में ट्वीट के जरिये सख्त निंदा प्रस्ताव बिहार के मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री को किया गया है और दोषी सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने की मांग की गयी है. यूनियन का कहना है कि सांसद महोदय को भी अपनी मर्यादा का ख्याल रखना चाहिए।

Tuesday, 22 December 2020

04:17

दिल्ली गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन में सीटू नेता गंगेश्वर शर्मा पहुंचे tap news india

नोएडा, 22 दिसंबर 2020 को 27 वें दिन भी किसान आंदोलन मजबूती के साथ जारी रहा दिल्ली गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन में सीटू नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा, मदन प्रसाद, भीखू प्रसाद, पारस गुप्ता, भरत डेंजर, हरकिशन सिंह, महेंद्र पाल सिंह के नेतृत्व में सीटू जिला कमेटी गौतम बुध नगर के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर सीटू जिलाध्यक्ष गंगेश्वर दत शर्मा ने कहा कि किसान विरोधी कानूनों के विरोध में सारा देश किसानों के साथ है वहीं मजदूर आंदोलन किसानों की कृषि संबंधी तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग का पूर्ण समर्थन कर रहा है हमारी मांग है कि बिना किसी शर्त व दबाव के किसानों के नेतृत्व से संवाद किया जाए और उनकी सारी आवश्यक मांगों को माना जाए। जब तक किसानों की मांग नहीं मानी जाएगी मजदूर संगठन सीटू किसानों के आंदोलन के साथ है
धरने पर मौजूद अखिल भारतीय किसान सभा उत्तर प्रदेश के महामंत्री मुकुट सिंह, अध्यक्ष भरत सिंह, संयुक्त मंत्री चंद्रपाल सिंह, व मेघराज सोलंकी, उपाध्यक्ष डीपी सिंह, माकपा सांसद मोहम्मद करीम, किसान सभा के राष्ट्रीय नेता बीजू कृष्णन ने कहा कि किसानों ने पिछले वर्षों में आंदोलन करके मांग उठाई कि कम से कम एक बार कर्ज माफी घोषित हो और स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों के अनुसार लागत मूल्य से डेढ़ प्रतिशत अधिक दर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य को निश्चित किया जाए केंद्र की मोदी सरकार ने इन मांगों को मानने की बजाय तीन नए कानूनों को किसानों पर थोपा है यह कानून पहले से उत्पीड़ित किसानों के लिए ताबूत में आखिरी कील की तरह है यह किसानों को बड़ी देशी-विदेशी कंपनियों का गुलाम बना देंगे क्या फसलें उगाई जाए फसलों का कितना दाम मिले यह सारी चीजें कंपनियां अपने मुनाफे को देखते हुए तय करेंगी और किसानों का हक मारा जाएगा मंडियों को खत्म करने की यह एक बड़ी साजिश है अगर नाम के वास्ते मंडी आ रहे भी गई तो उनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधार पर खरीद नहीं होगी बल्कि कंपनियां मंडियों को बाईपास करके फसल को सस्ती दरों में ख़रीदेंगे कंपनियां और किसानों की होड़ में किसानों की हार तय है और तो और धान गेहूं आलू प्याज आदि को आवश्यक वस्तु अधिनियम की सूची से हटाया गया है ताकि कंपनियां इन वस्तुओं की जमाखोरी कर सके और बाजार में इन वस्तुओं के दाम को बढ़ा सके नतीजा किसानों को फसलों के लिए कम दाम मिलेगा ग्राहक यानी आम नागरिक को खाने की आवश्यक वस्तुएं बहुत बढ़े हुए दाम पर मिलेंगी इसीलिए हम इन काले कानूनों को वापस लेने के लिए लड़ रहे हैं

Monday, 14 December 2020

04:35

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण आज tap news india


 साल 2020 का अंतिम सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर, सोमवार को लगने वाला है। ज्योतिषाचार्य इस सूर्य ग्रहण को खास मान रहे हैं। 

बताया जाता है कि सूर्य ग्रहण का प्रभाव देश और दुनिया पर बहुत अधिक पड़ता है। कहते हैं कि सूर्य ग्रह सत्ता, सत्ताधारी और घर के मुखिया को सबसे अधिक प्रभावित करता है। इसलिए सूर्य ग्रहण को बहुत प्रभावशाली माना जाता है। विद्वानों का मानना है कि सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों के जातकों पर अलग-अलग पड़ता है। सूर्य ग्रहण के प्रभाव को जानने के लिए इस दिन राशिफल देखा जाता है। बताया जाता है कि राशिफल के माध्यम से सूर्य ग्रहण के प्रभाव को समझा जा सकता है।
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भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण – ये ग्रहण साल का आखिरी सूर्य ग्रहण है। जानकारों की मानें तो ये सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। क्योंकि यह ग्रहण तब लगेगा जब भारत में सूर्यास्त हो चुका होगा। इसलिए यह उन क्षेत्रों में दिखेगा जहां इस दौरान सूर्योदय रहेगा। ज्योतिषों के अनुसार साल का आखिरी सूर्य ग्रहण शाम 7 बजकर 3 मिनट से शुरू होगा और रात 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इस ग्रहण की कुल अवधि करीब 5 घंटे की रहेगी।
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गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान – सूर्य ग्रहण की समयावधि में गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान रखना चाहिए। कहा जाता है कि ग्रहण का सबसे ज्यादा असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। इसलिए इस दौरान गर्भवती महिलाओं को कुछ विशेष कार्य करने के लिए मना किया जाता है ताकि गर्भ में पल रहे बच्चे को नकारात्मक प्रभावों से बचाया जा सके।


विशेष तौर पर सतर्क रहें गर्भवती महिलाएं
सूर्य ग्रहण के दौरान अपनी गतिविधियों को सही रखना बहुत जरूरी होता है। विशेष तौर पर गर्भवती महिलाओं को इस दौरान अपना ख्याल रखना चाहिए। कहते हैं कि इस अवधि में प्रेग्नेंट महिला अगर कोई भी ऐसी गतिविधि करती है जो ग्रहण के दौरान करना मना है तो इसका दुष्परिणाम गर्भ में पल रहे बच्चे को सहना पड़ता है।
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कहां दिखेगा ग्रहण
साल का आखिरी सूर्य ग्रहण दक्षिणी अफ्रीका, अधिकांश दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक, हिंद महासागर और अंटार्कटिका में पूर्ण रूप से नजर आएगा।
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बच्चे पर पड़ सकता है प्रभाव
कहते हैं कि इस अवधि में प्रेग्नेंट महिला अगर कोई भी ऐसी गतिविधि करती है जो ग्रहण के दौरान करना मना है तो इसका दुष्परिणाम गर्भ में पल रहे बच्चे को सहना पड़ता है।

सूतक काल का समय...
ज्योतिष शास्त्र के विद्वानों के अनुसार साल 2020 का आखिरी सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर, सोमवार को शाम 7 बजकर 3 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इस सूर्य ग्रहण की कुल अवधि करीब 5 घंटे की रहेग
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सावधानियां...
सूर्य ग्रहण के दौरान अपनी गतिविधियों को सही रखना बहुत जरूरी होता है। विशेष तौर पर गर्भवती महिलाओं को इस दौरान अपना ख्याल रखना चाहिए।

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सावधानियां हैं जरूरी...
ग्रहण के बीच सूई, कील, तलवार और चाकू जैसी नुकीली वस्तुओं का इस्तेमाल न करें। ध्यान रखें कि ऐसे में खाना खाना, बनाना, सब्जी काटना, आसमान के नीचे खड़े होना और दीपक जलाकर पूजा आदि करना मना होता है
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भारत में सूर्यास्त के बाद है ग्रहण का समय
जानकारों की मानें तो यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। क्योंकि यह ग्रहण तब लगेगा जब भारत में सूर्यास्त हो चुका होगा। इसलिए यह उन क्षेत्रों में दिखेगा जहां इस दौरान सूर्योदय रहेगा। 
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इसलिए ग्रहण होगा अधिक महत्वपूर्ण
मार्गशर्ष और अगहन मास की सोमवती अमावस्या होने के कारण इस ग्रहण का महत्व औऱ भी बढ़ गया है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र में लगेगा।
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कैसे बनता है गुरु चंडाल योग
सूर्य ग्रहण के दौरान इस बार गुरु चंडाल योग बनेगा. राहु और गुरु के एक ही स्थान पर बैठने से गुरु चंडाल योग  बनता है.


क्यों दी जाती है सावधानी बरतने की सलाह
ग्रहण का मनुष्य की राशि के अनुसार नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही असर पड़ता है। इसी कारण ज्योतिष शास्त्र ग्रहण काल में विशेष सावधानी बरतने की सलाह देता है। 
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कहां-कहां दिखेगा ग्रहण
ग्रहण का असर प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, दक्षिणी अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका, अटलांटिक और अंटार्कटिका में पड़ेगा। 


कितने देर तक रहेगा ग्रहण
करीब पांच घंटे तक के लिए लगने वाला खंडग्रास सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार शाम 7.04 बजे से आरंभ होगा जो कि मध्य रात्रि 12.23 तक रहेगा।

बन रहा है गुरु चंडाल योग
सूर्य ग्रहण के दौरान एक खतरनाक योग का भी निर्माण हो रहा है. इस योग को गुरु चंडाल योग कहते हैं. यह योग जन्म कुंडली में तब बनाता है जब गुरु के साथ राहु एक ही स्थान में बैठ जाए. वहीं जब दोनों ग्रह कुंडली के अलग-अलग भाव में बैठकर एक-दूसरे को पूर्ण दृष्टि से देखें तो भी गुरु चंडाल योग का निर्माण होता है. इस समय गुरु शनि के साथ मकर राशि और राहु वृष राशि में विराजमान है.


देवताओं की मूर्तियां स्पर्श करना है वर्जित
ग्रहण काल में भगवान की मूर्तियों को न तो छूना चाहिए और न ही पूजा पाठ करना चाहिए। ग्रहण का सूतक काल लगते ही कई मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं।


साल का अंतिम ग्रहण होगा खंडग्रास
इस साल का आखिरी सूर्यग्रहण सोमवार, 14 दिसंबर को लग रहा है। यह ग्रहण खंडग्रास होगा। अपने देश भारत में यह सूर्यग्रहण नहीं दिखेगा। 


गर्भवती महिलाएं रखें कुछ खास बातों का ख्याल
सूर्य ग्रहण की अवधि में सूई, कील, तलवार और चाकू जैसी नुकीली वस्तुओं का इस्तेमाल न करें। ध्यान रखें कि ऐसे में खाना खाना, बनाना, सब्जी काटना, आसमान के नीचे खड़े होना और दीपक जलाकर पूजा आदि करना मना होता है।


भारत में नहीं देगा दिखाई
बताया जा रहा है कि यह सूर्य ग्रहण उस दौरान लगेगा जब भारत में सूर्यास्त होकर शाम हो चुकी होगी इसलिए भारत में रहने वाले लोगों को यह ग्रहण दिख नहीं पाएगा। कहा जा रहा है कि इसकी वजह से यह संभावनाएं भी बन सकती हैं कि यह भारत की परिस्थितियों में बहुत अधिक परिवर्तन लाने वाला साबित नहीं हो पाएगा।


क्यों प्रभावशाली होता है सूर्य ग्रहण
बताया जाता है कि सूर्य ग्रहण का प्रभाव देश और दुनिया पर बहुत अधिक पड़ता है। कहते हैं कि सूर्य ग्रह सत्ता, सत्ताधारी और घर के मुखिया को सबसे अधिक प्रभावित करता है। इसलिए सूर्य ग्रहण को बहुत प्रभावशाली माना जाता है। विद्वानों का मानना है कि सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों के जातकों पर अलग-अलग पड़ता है। 


ग्रहण के बाद दान-पुण्य करना चाहिए
सूतक काल लगने से पहले ही खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते डालकर रख देने चाहिए। यदि घर में मंदिर है तो सूतक लगते ही उसे ढक देना चाहिए। मान्यता है कि ग्रहण के बाद दान-पुण्य करना चाहिए।

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ग्रहण काल के बाद स्नान जरूर करें
ग्रहण काल के बाद पवित्र नदियाें, सरोवरों में स्नान जरूर करें। नदी तक न पहुंच सकें तो घर में ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें। इससे ग्रहण की अशुद्धि से मुक्ति मिलती है।

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ग्रहण काल में करें गुरु मंत्र का जाप
ग्रहण काल में गुरु मंत्र का जाप, किसी मंत्र की सिद्धी, रामायण, सुंदरकांड का पाठ, तंत्र सिद्धी आदि कर सकते हैं।


भगवान की मूर्तियां नहीं छूना चाहिए
ग्रहण काल में भगवान की मूर्तियों को न तो छूना चाहिए और न ही पूजा पाठ करना चाहिए। ग्रहण का सूतक काल लगते ही कई मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं।

सूर्य ग्रहण के दौरान पेड़ों से पत्ते न तोड़ें
ग्रहण के समय पत्ते, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना गया है। साथ ही ग्रहण काल में पेड़ों को भी नहीं स्पर्श करन चाहिए।


नंगी आंखों से क्यों नहीं देखते ग्रहण..
नंगी आंखों से सूर्य ग्रहण देखने को इसलिए मना किया जाता है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि नंगी आंखों से ग्रहण देखने से आंखों में विकार आ सकता है।

मीन राशि वालों को रखना होगा ध्यान...
मीन राशि के जातकों को नौकरी में खास ध्यान देना होगा। इनकी आर्थिक स्थिति ठीक रहेगी।


कुंभ राशि वाले रखें इसका ध्यान...
कुंभ राशि वालों को आर्थिक स्थिति संभालने की जरूरत है। कोशिश करें कि पैसा व्यर्थ खर्चों में न जाए।

क्या करें मकर राशि वाले...
मकर राशि वालों को मानसिक और शारिरीक सेहत का ध्यान रखना चाहिए।


धनु राशि के जातक...
धनु राशि वाले जातक आर्थिक रूप से परेशान रह सकते हैं। आपको पैसे के लेनदेन में ध्यान रखना होगा।


वृश्चिक राशि वाले क्या करें...
वृश्चिक राशि वाले स्वास्थ्य का ध्यान रखें। दूसरों के साथ अच्छे से पेश आएं।


तुला राशि वाले रखें ध्यान..
तुला राशि वालों को आर्थिक और सामाजिक जीवन में परेशानियां आ सकती है। खर्चा करने से पहले समझदार लोगों से सलाह लें।

कन्या राशि के लोग इस बात का रखें ध्यान
कन्या राशि के लोगों को लगन से काम करना होगा। परिवार में अच्छा वातावरण बनाए रखें। 

आर्थिक स्थिति को लेकर सावधान रहें सिंह राशि के लोग
सिंह राशि वालों के लिए ग्रहण अच्छा प्रभाव नहीं ला रहा है। आर्थिक स्थिति को लेकर सचेत रहना होगा

कर्क राशि वालों के कम हो सकते हैं आय के साधन
कर्क राशिवालों को हर कार्य सोचकर और समझकर करना है। आय के साधन कम हो सकते हैं।

समझदारी से काम लें मिथुन वाले
मिथुन राशि वाले जीवनसाथी को सम्मान दें और समझदारी से काम लें। आय को लेकर समय प्रतिकूल है।

सेहत को लेकर सचेत रहें वृष राशि के लोग
वृष राशिवालों को घर में अच्छा वातावरण बनाकर रखना होगा। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें।

सूर्य ग्रहण का मेष राशि पर कैसा पड़ेगा प्रभाव
मेष राशि वालों को सूर्य ग्रहण के प्रभाव के कारण अधिक मेहनत करनी होगी। आर्थिक लेनदेन ध्यान से करें।

क्या होता है सूर्य ग्रहण
सूर्य ग्रहण अथवा चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब पृथ्वी व सूर्य के बीच चंद्रमा आ जाता है, तब इस स्थिति को सूर्य ग्रहण कहते ह

नहीं देखना चाहिए सूर्य ग्रहण...
ग्रहण काल का सूर्य देखने से आंखों की रोशनी पर असर पड़ सकता है। इस कारण नंगी आंखों से ग्रहण काल में सूर्य की ओर न देखें। संभव हो तो खिड़की बंद कर दें ताकि सूर्य की हानिकारक किरण घर में प्रवेश न कर सके।

बन रहा है खतरनाक योग...
सूर्य ग्रहण के दौरान एक खतरनाक योग का भी निर्माण हो रहा है. इस योग को गुरु चंडाल योग कहते हैं. यह योग जन्म कुंडली में तब बनाता है जब गुरु के साथ राहु एक ही स्थान में बैठ जाए. वहीं जब दोनों ग्रह कुंडली के अलग-अलग भाव में बैठकर एक-दूसरे को पूर्ण दृष्टि से देखें तो भी गुरु चंडाल योग का निर्माण होता है. इस समय गुरु शनि के साथ मकर राशि और राहु वृष राशि में विराजमान है.

इसलिए माना जा रहा है महत्वपूर्ण...
मार्गशर्ष और अगहन मास की सोमवती अमावस्या होने के कारण इस ग्रहण का महत्व औऱ भी बढ़ गया है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र में लगेगा।

जानें क्या है ग्रहों की स्थिति...
सूर्य ग्रहण के दौरान वृश्चिक राशि में 5 ग्रह मौजूद रहेंगे. ज्योतिष गणना के मुताबिक सोमवती अमावस्या पर पर वृश्चिक राशि में सूर्य, चंद्र, बुध, शुक्र और केतु विराजमान रहेंगे. ऐसी स्थिति कई वर्षों बाद बन रही है.

भारत में नहीं देगा दिखाई
भारत में सूर्य ग्रहण का असर पड़े या न पड़े, ग्रहण काल में भोजन करना और सोना स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से ठीक नहीं है। ज्‍योतिष के अनुसार ग्रहण काल में ईश्वर की प्रार्थना करना चाहिए।

किन जगहों पर दिखेगा ग्रहण
ग्रहण का असर प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, दक्षिणी अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका, अटलांटिक और अंटार्कटिका में पड़ेगा।

किस राशि में लग रहा है ग्रहण...
सूर्य ग्रहण वृश्चिक राशि और मिथुन लग्न में लग रहा है. ग्रहण का नक्षत्र ज्येष्ठा है. इस कारण सूर्य ग्रहण का सबसे अधिक प्रभाव वृश्चिक राशि और मिथुन राशि पर पड़ेगा

सोमवती अमावस्या के दिन है ग्रहण
साल का अंतिम सूर्य ग्रहण ज्योतिष गणना के अनुसार मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या की तिथि को लगने जा रहा है. इस दिन सोमवती अमावस्या का पर्व भी है

साल का अंतिम सूर्य ग्रहण...
सूर्य ग्रहण पंचांग के अनुसार 14 दिसंबर को लगने जा रहा है. इस बार का सूर्य ग्रहण इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ये सूर्य ग्रहण साल का अंतिम ग्रहण भी है.

इस योग के कारण अशुभ माना जा रहा है ये ग्रहण
सूर्य ग्रहण लगने में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं. इस बार का सूर्य कुछ मामलो में बहुत ही अशुभ माना जा रहा है. इस सूर्य ग्रहण पर गुरु चंडाल योग का निर्माण हो रहा है.
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          कथा ब्यास 
    आचार्य प्राण गुरूजी
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Saturday, 12 December 2020

19:24

रक्षा मंत्री व कृषि मंत्री से मुलाकात के बाद चिल्ला बार्डर खुला दिल्ली नोएडा आने-जाने वालों को होगी आसानी

नोएडा-दिल्ली का चिल्ला बॉर्डर को रात 11 बजे खोल दिया गया है। ये कवायत चिल्ला बार्डर पर धरने पर बैठे किसानों के पदाधिकारियों की  शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात के बाद हुई है। मुलाक़ात के दौरान किसानों ने अपनी 18 मांगों को रखा था। किसानों को मांगों के संबंध में सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था।

पुलिस और किसान मिल कर नोएडा-दिल्ली का चिल्ला बॉर्डर पर लगे बैरिकेटिंग को को हटाया और  शनिवार देर रात पूरी तरह से खोल दिया गया। देर रात करीब दस बजे नोएडा से दिल्ली जाने वाले रास्ते पर लगे आधे बैरीकेड हटाए गए थे, रात 11 बजे इस मार्ग पर लगे सभी बैरीकेड हटा दिए गए, जिसके बाद दिल्ली जाने के लिए वाहन चालकों ने इस मार्ग का प्रयोग शुरू कर दिया। अबतक दिल्ली जाने के लिए वाहन चालकों को डीएनडी और कालिंदी कुंज होकर जाना पड़ रहा था। दिल्ली से नोएडा की तरफ आने वाला मार्ग पहले से खुला हुआ था।

चिल्ला बार्डर पर धरने पर बैठे भारतीय किसान यूनियन भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने बताया की नोएडा-दिल्ली का चिल्ला बॉर्डर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उन्होंने हमें बुलाया था जिसमे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजब सिंह कसाना, प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी बी पी सिंह, जिला अध्यक्ष राजीव नागर के साथ राजनाथ सिंह की कोठी पर हम गए वहां पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी थे। दोनों लोगों ने हमारा यह ज्ञापन लिया और  ज्ञापन को पढ़कर ज्ञापन को जेनुइन बताया। उन्होने कहा की इसमें कोई समस्या ऐसी नहीं है जो दिक्कत करें । लेकिन यह ज्ञापन हम प्रधानमंत्री से मिलकर ही पूरा कर पाएंगे । उन्होंने कहा धरना हटा दो हम आपको 10 दिन में 15 दिन में बुलाएंगे इसके बाद फैसला ले लिया गया कि चिल्ला बॉर्डर से प्रदर्शन को खत्म कर दिया गया और बॉर्डर के दोनों सड़कों को खोल दिया गया है। 
बाइट : भानु प्रताप सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष बीकेयू (भानु) 
  
किसान आयोग के गठन का आश्वसन मिलने के बाद किसान संतुष्ट है, हालांकि बीकेयू (भानु) किसानों में एक धड़ा  ने अपना धरना जारी रखने की बात कही है। भारतीय किसान यूनियन (भानु) जिलाध्यक्ष राजीव नागर ने बताया कि किसानों का धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। रविवार सुबह 11 बजे महापंचायत होगी, जिसमें आगे की रणनीति बनाई जाएगी। किसान अपना धरना प्रदर्शन पास के ही एक पार्क में जारी रख सकते हैं। जिस जगह पर किसान धरना दे रहे थे, वहां रामायण पाठ चल रहा है।
पत्रकार विक्रम

Sunday, 6 December 2020

20:39

8 दिसंबर को भारत बंद का समर्थन करेगी:- भूदान विनियोजन आंदोलन

भूदान विनियोजन आंदोलन किसान महा आंदोलन द्वारा 8 दिसम्बर को भारत बंद का समर्थन करता है। जब तक तीनों काला कृषि कानून सरकार द्वारा रद्द नही कर दिया जाता है, तब तक भूदान विनियोजन आंदोलन किसान आंदोलन के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ा है। सभी जानते है कि अपने महा आंदोलन में तीन कृषि विधेयक, जिसका किसान पुरज़ोर विरोध कर रहा है, उसके कारण किसानों पर दूरगामी दुष्प्रभाव पड़ेगा। वह कानून निम्न प्रकार से समझा जा सकता है..*

        *1*.किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020: इसका उद्देश्य विभिन्न राज्य विधानसभाओं द्वारा गठित कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) द्वारा विनियमित मंडियों के बाहर कृषि उपज की बिक्री की अनुमति देना है. सरकार का कहना है कि किसान इस कानून के जरिये अब एपीएमसी मंडियों के बाहर भी अपनी उपज को ऊंचे दामों पर बेच पाएंगे. निजी खरीदारों से बेहतर दाम प्राप्त कर पाएंगे.

लेकिन, सरकार ने इस कानून के जरिये एपीएमसी मंडियों को एक सीमा में बांध दिया है. एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) के स्वामित्व वाले अनाज बाजार (मंडियों) को उन बिलों में शामिल नहीं किया गया है. इसके जरिये बड़े कॉरपोरेट खरीदारों को खुली छूट दी गई है. बिना किसी पंजीकरण और बिना किसी कानून के दायरे में आए हुए वे किसानों की उपज खरीद-बेच सकते हैं.

किसानों को यह भी डर है कि सरकार धीरे-धीरे न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म कर सकती है, जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है. लेकिन केंद्र सरकार साफ कर चुकी है कि एमएसपी खत्म नहीं किया जाएगा.

         2. किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक: इस कानून का उद्देश्य अनुबंध खेती यानी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की इजाजत देना है. आप की जमीन को एक निश्चित राशि पर एक पूंजीपति या ठेकेदार किराये पर लेगा और अपने हिसाब से फसल का उत्पादन कर बाजार में बेचेगा.

किसान इस कानून का पुरजोर विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि फसल की कीमत तय करने व विवाद की स्थिति का बड़ी कंपनियां लाभ उठाने का प्रयास करेंगी और छोटे किसानों के साथ समझौता नहीं करेंगी.*

         3 आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक: यह कानून अनाज, दालों, आलू, प्याज और खाद्य तिलहन जैसे खाद्य पदार्थों के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण को विनियमित करता है. यानी इस तरह के खाद्य पदार्थ आवश्यक वस्तु की सूची से बाहर करने का प्रावधान है. इसके बाद युद्ध व प्राकृतिक आपदा जैसी आपात स्थितियों को छोड़कर भंडारण की कोई सीमा नहीं रह जाएगी.

किसानों का कहना है कि यह न सिर्फ उनके लिए बल्कि आम जन के लिए भी खतरनाक है. इसके चलते कृषि उपज जुटाने की कोई सीमा नहीं होगी. उपज जमा करने के लिए निजी निवेश को छूट होगी और सरकार को पता नहीं चलेगा कि किसके पास कितना स्टॉक है।

  इमरान खान पामेला
   

Wednesday, 2 December 2020

22:09

एमडीएच मसाला के मालिक धमॅपाल गुलाटी का निधन tap news

दिल्ली। मसाला ब्रांड एमडीएच के मालिक 'महाशय' धर्मपाल गुलाटी का गुरुवार सुबह निधन हो गया है। वे 98 साल के थे। खबरों के मुताबिक, गुलाटी का पिछले तीन हफ्तों से दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। गुरुवार सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उन्होंने सुबह 5:38 बजे अंतिम सांस ली। इससे पहले वे कोरोना से संक्रमित हो गए थे। हालांकि बाद में वे ठीक हो गए थे। पिछले साल उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
'दलाजी' और 'महाशयजी' के नाम से मशहूर धरमपाल गुलाटी का जन्म 1923 में पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था। स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने वाले धर्मपाल गुलाटी शुरुआती दिनों में अपने पिता के मसाले के व्यवसाय में शामिल हो गए थे। 1947 में विभाजन के बाद, धर्मपाल गुलाटी भारत आ गए और अमृतसर में एक शरणार्थी शिविर में रहे। दिल्ली के करोल बाग में पहला खोला पहला स्टोर
फिर वह दिल्ली आ गए थे और दिल्ली के करोल बाग में एक स्टोर खोला। गुलाटी ने 1959 में आधिकारिक तौर पर कंपनी की स्थापना की थी। यह व्यवसाय केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया में भी फैल गया। इससे गुलाटी भारतीय मसालों के एक वितरक और निर्यातक बन गए।
गुलाटी की कंपनी ब्रिटेन, यूरोप, यूएई, कनाडा आदि सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भारतीय मसालों का निर्यात करती है। 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया था। एमडीएच मसाला के अनुसार, धर्मपाल गुलाटी अपने वेतन की लगभग 90 प्रतिशत राशि दान करते थे।

Saturday, 28 November 2020

01:32

देवउठनी ग्यारस पर अनूठी शादी:deepak tiwari

कोटा.शहर में दाे भाइयाें की राेचक शादी हुई। दाेनाें की दुल्हनाें की विदाई हेलीकाॅप्टर से हुई। दाेनाें भाइयाें की दादी की इच्छा थी कि उनकी बहुओं की विदाई हेलीकाॅप्टर से हाे। इस पर जयपुर से किराए पर हेलीकाॅप्टर मंगाया गया। दाेनाें दुल्हनाें काे उनके गांव से हेलीकाॅप्टर से ही काेटा के मैरिज गार्डन लाया गया। फेराें के बाद दाेनाें दंपती हेलीकाॅप्टर से ही अपने गांव देवली अरब तक गए। देवली अरब में रहने वाले अशाेक कुमार मालव के बेटाें पंकज और ललित की शादी देवउठनी ग्यारस पर हुई।
पंकज की शादी भावनीपुरा की काेमल और ललित की शादी दीपपुरा की रश्मिता से हुई है। विवाह समाराेह बारां राेड स्थित मैरिज गार्डन में हुआ। दाेनाें की दादी काली बाई की इच्छा पूरी करने के लिए जयपुर से हेलीकाॅप्टर मंगाया गया। इसके लिए दुल्हनाें के गांव सहित मैरिज गार्डन और देवली अरब में हेलीपैड बनाए गए थे। पंकज सीए की पढ़ाई कर रहा है और ललित खेती का कामकाज संभालता है।
अशाेक मालव का कहना है कि उनके पिता मदनलाल रेलवे अधिकारी थे। वर्ष 1995 में उनका निधन हाे गया। मेरी मां करीब 100 साल की हाे गई हैं ताे उनकी इच्छा पूरी करने के लिए दाेनाें दुल्हनाें की विदाई हेलीकाॅप्टर से कराई।
01:25

हमारे 38 दधीचि जो देह बदलकर जिंदा हैं;deepak tiwari

जयपुर.जिंदगी के बाद भी जिंदा हैं ये 38 लोग, जिनके अंग किसी और के शरीर में जान डाल चुके हैं। किसी का दिल का दिल बनकर तो किसी का लिवर या किडनी। राजस्थान के इन 38 दधीचियों की याद में राजधानी में टोंक रोड पर मुख्य सचिव आवास के सामने टी-पॉइंट पर अंगदाता स्मारक बनाया गया है।
राष्ट्रीय अंगदान दिवस पर शुक्रवार को दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्मारक का वर्चुअल लोकार्पण करेंगे। एक खामोशी अनेक मुस्कान, आओ करें अंगदान के का अलख जगाने वाला स्मारक जनमानस को अंगदान की प्रेरणा देगा। स्मारक पर सभी अंगदाताओं की नाम पटि्टकाएं और उनके नाम जिले का नाम लिखा है। अंगदाता परिवारों के त्याग, बीमार जरूरतमंद लोगों को जीवन की जरूरत और अंगदाता के सम्मान के इस पाषाण स्मारक के सीने में दिल धड़कता है।
ऐसे मिलता है ऑर्गन
मरीज को दिल, किडनी, लंग्स की जरूरत पर राजस्थान नेटवर्क फॉर आर्गन शेयरिंग के तहत पंजीकरण कराना होता है। जब भी कैडेबर डोनर आता है, मरीज की स्थिति व वेटिंग के अनुसार रेसिपिएंट को आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए अस्पताल बुलाया जाता है। डोनर और रेसिपिएंट का ब्लड ग्रुप या अन्य क्राॅस मैच किया जाता है। हरेक तरह से सही पाए जाने पर रेसिपिएंट को बुलाया जाता है। ब्लड ग्रुप या अन्य क्रास मैच नहीं होने पर अगले रेसिपिएंट को बुलाते हैं।
7 साल का मोहित जब गया...एक अभियान दे गया
अलवर के तिलवाड़ा का 7 साल का बच्चा मोहित राजस्थान का पहला अंगदाता है। 5 फरवरी 2015 को जयपुर के निजी अस्पताल में उसके परिजनों ने बच्चे के अंग दान किए थे।
सांगानेर के वाटिका का 10 साल का राजू लुहार राज्य का पहला कैडेवर (ब्रेन डेथ के कारण मृृत) था। 2 अगस्त 2015 को जयपुर के निजी अस्पताल में उसके अंग लिए गए।

Friday, 27 November 2020

00:34

29 वर्षीय इंडियन अमेरिकन दुल्हन संजना ने शादी की ड्रेस के तौर पर पहना पेंटसूट वे इसे अपने पावरफुल होने का सबूत मानती हैं deepak tiwari

शादी की बात होते ही लहंगे या साड़ी में सजी-धजी दुल्हन का ख्याल आता है। लेकिन दुल्हन के इस पहनावे से अलग 29 साल की एक इंटरप्रेन्योर संजना ऋषि ने दिल्ली के बिजनेसमैन ध्रुव महाजन से शादी की। वे दोनों अमेरिका में एक साल से साथ रह रहे थे। इन्होंने 20 सितंबर को दिल्ली में शादी की। हालांकि संजना का कहना है कि महामारी के चलते उन्होंने अपनी शादी के लिए जिस तरह की प्लानिंग की थी, वे पूरी नहीं हो पाई।
संजना ने अपनी शादी में लहंगा या साड़ी के बजाय पाउडर ब्लू कलर का पेंटसूट पहना। इसके साथ दुपट्‌टा ओढ़कर उसने अपने लुक को कंप्लीट किया। पेंटसूट के साथ संजना ने सिंपल ज्वेलरी पहनी और बहुत कम मेकअप किया। इस कपल ने अपनी शादी अमेरिका और दिल्ली दोनों जगह करने की योजना बनाई थी, लेकिन महामारी की वजह से ये काम संभव नहीं हो पाया।
संजना की वेडिंग ड्रेस को सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया गया। कई फैशन डिजाइनर्स और बॉलीवुड सेलिब्रिटीज ने उनके लुक की तारीफ की। संजना ने ये पेंटसूट इटली के एक बुटिक से खरीदा था। वे कहती हैं - ''ये पैंट सूट इटेलियन डिजाइनर ने 1990 में बनाया था। मैं देखकर हैरान रह गई कि ये अभी भी मिल रहा है। मैं इस ड्रेस को खरीदकर बहुत खुश हूं, क्योंकि इससे मेरे पावरफुल होने का पता चलता है''।
उनकी शादी में सिर्फ 11 लोग शामिल हुए। इस शादी का फंक्शन ध्रुव के घर में रखा गया। ध्रुव कहते हैं -'' मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि संजना ने क्या पहना है, क्योंकि मैं ये जानता हूं कि वह जो भी पहनेंगी, उसमें सबसे खूबसूरत लगेगी''।
00:32

साजिश पर भारी साहस:deepak tiwari

इंदौर.एमवाय अस्पताल में बुधवार देर रात एक बुजुर्ग परिवार के साथ करीब 100 किमी दूर से इलाज करवाने पहुंचा। उसके हाथ में एक तीर आर-पार था। विवाद के बाद बुजुर्ग को दूसरे पक्ष के लोगों ने तीर मारकर घायल कर दिया था। तीर हाथ में फंस जाने के बाद उसे इलाज के लिए लाया गया था, जहां ऑपरेशन के बाद तीन निकाला गया।
जानकारी अनुसार घायल झांगू मूलत: आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र धार के टांडा के पास बेरी गांव का रहने वाला है। वह खेती और मजदूरी करता है। परिजन के अनुसार झांगू को गांव में ही रहने वाले रेमू ने रात करीब 8 बजे तीर मार दिया था। हमले में एक तीर झांगू के हाथ में लगा और वह आर-पार हो गया। इसके बाद उसे पहले टांटा के अस्पताल लेकर जाया गया। यहां से सरदारपुर और फिर धार अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से एमवाय अस्पताल रैफर कर दिया गया। मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
घायल ने बताया कि रेमू ने बिना किसी बात के हमला कर दिया। वहीं, परिजन ने बताया कि नशे में धुत होकर रेमू घर आया, उस समय झांगू सो रहा था। अंदर आते ही उसने हमला कर दिया, जबकि हमारा उससे कोई विवाद नहीं था।
00:29

कच्चे तेल की कीमत कम होने का फायदा:deepak tiwari

नई दिल्ली. कोरोनाकाल में जब लोग आर्थिक संकट में थे, तब सरकार और तेल कंपनियां कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी का फायदा ग्राहकों को देने के बजाय अपनी जेबें भर रही थीं। सितंबर में समाप्त तिमाही में तेल कंपनियों का शुद्ध मुनाफा तीन गुना बढ़कर 10,951 करोड़ हो गया, वहीं सरकार को टैक्स के रूप में 18,741 करोड़ रुपए अतिरिक्त हासिल हुए।
पेट्रोलियम उत्पादों में 80% लागत कच्चे तेल की होती है। पिछले साल जुलाई से सितंबर तिमाही में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की प्रति बैरल लागत 4,100 से 4,400 रु. के बीच थी, यह अप्रैल-मई में 2,000 रु. प्रति बैरल तक आ गई थी। उस समय पेट्रोल-डीजल की कीमत कम करने के बजाय सरकार ने 6 मई से पेट्रोल पर 10 रु. और डीजल पर 13 रु. प्रति लीटर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगा दी।
यह अब तक लागू है। कच्चे तेल की कीमतें 3,000 रु. के आसपास हैं, जो 2019 की तुलना में 1000 रु. प्रति बैरल कम है। इसके बाद भी लोगों को पेट्रोल पर 10 रु. अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। वहीं, डीजल की कीमतें 64 रु. से बढ़कर 75 से 76 रु. प्रति लीटर हो गई हैं।
बढ़े टैक्स से सरकार को जहां सितंबर 2020 तिमाही में अतिरिक्त 18,741 करोड़ रुपए की एक्साइज ड्यूटी मिली, वहीं देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल का मुनाफा सितंबर 2019 तिमाही के 563.42 करोड़ रु. से 10 गुना से अधिक बढ़कर 6,227 करोड़ रु. हो गया। एचपीसीएल का मुनाफा 1,052 करोड़ रु. से बढ़कर 2,477 करोड़ और बीपीसीएल का 1,708 करोड़ से बढ़कर 2247 करोड़ रु. हो गया।
पूरी तिमाही के दौरान यानी 92 दिन तक तेल कंपनियों ने भाव स्थिर रखे, जबकि 13 दिन कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज हुई। सितंबर के आखिर में सिर्फ 7 दिन कीमत में मामूली कमी की गई। एक सरकारी तेल कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि तेल कंपनियों के मुनाफा कमाने में कोई बुराई नहीं है।
पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स के चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. एस पी शर्मा कहते हैं कि इंटरनेशनल लेवल पर अगर क्रूड ऑयल के रेट कम हुए हैं तो इसका फायदा ग्राहकों को मिलना चाहिए। तेल के रेट कम नहीं करने से मालभाड़ा अधिक बना रहेगा। इससे महंगाई बढ़ेगी। जनता को राहत देने के लिए सरकार को इंटरनेशनल क्रूड ऑयल के रेट के साथ ही खुदरा दाम कम करने चाहिए।
एक साल में कच्चा तेल सस्ता हुआ, जबकि पेट्रोल-डीजल महंगे
2019 2020
(दूसरी तिमाही) (दूसरी तिमाही)
कच्चा तेल 4300 रु. 3300 रु.
पेट्रोल 74.42 रु. 82.08 रु.
डीजल 67.49 रु. 80.53 रु.
नोट: कच्चे तेल के भाव प्रति बैरल भारतीय बास्केट के, पेट्रोल-डीजल के भाव प्रति लीटर दिल्ली के।

Tuesday, 24 November 2020

23:05

वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल का निधन deepak tiwari

नई दिल्ली। गुजरात से राज्यसभा सांसद और कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे वरिष्ठ नेता अहमद पटेल का आज सुबह निधन हो गया है। 71 वर्षीय अहमद पटेल एक महीना पहले कोरोना से संक्रमित हुए थे। इस बात की जानकारी उन्होंने स्वयं ट्वीट कर दी थी। इसके बाद उनका इलाज मेदांता अस्पताल मे चल रहा था। अहमद पटेल के बेटे फैजल पटेल ने ट्वीट कर कहा कि उनके पिता अहमद पटेल का आज सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर निधन हो गया है। उन्हे 15 नवंबर को मेदांता अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। 

फैजल पटेल ने ट्वीट कर कहा कि वे बेहद दुख के साथ अपने पिता अहमद पटेल की दुखद और असामयिक मृत्यु की घोषणा कर रहे हैं। फैजल पटेल ने कहा कि 25 नवंबर को सुबह 3.30 पर उनके पिता का निधन हो गया। लगभग एक महीना पहले उनके पिता कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इलाज के दौरान उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया और वे मल्टी ऑर्गन फेल्यिोर के शिकार हो गए। फैजल पटेल ने कहा कि गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली। फैजल पटेल ने लोगों से अपील की है कि सभी लोग कोरोना से जुड़े प्रोटोकॉल का पालन करें और भीड़ भाड़ में जाने से बचें। 
अहमद पटेल तीन बार लोकसभा के सदस्य रहे हैं और 5 बार राज्यसभा के सांसद रहे हैं। अगस्त 2018 में उन्हें कांग्रेस पार्टी का कोषाध्याक्ष नियुक्त किया गया था। पहली बार 1977 में 26 साल की उम्र में भरूच से लोकसभा का चुनाव जीतकर अहमद पटेल संसद पहुंचे थे। हमेशा पर्दे के पीछे से राजनीति करने वाले अहमद पटेल कांग्रेस परिवार के विश्वस्त नेताओं में गिने जाते थे. वे 1993 से राज्यसभा सांसद थे