Tap news india

Tap here ,India News in Hindi top News india tap news India ,Headlines Today, Breaking News, latest news City news, ग्रामीण खबरे हिंदी में

Breaking news

गूगल सर्च इंजन

Showing posts with label राष्ट्रीय. Show all posts
Showing posts with label राष्ट्रीय. Show all posts

Tuesday, 15 October 2019

08:57

जाने किस घर में है दो नोबेल पुरस्कार विजेता




संभवतः पहली बार किसी शादीशुदा जोड़े को नोबल पुरुस्कार मिला है. भारत को गर्वान्वित करने वाले भारतीय - अमेरिकन अर्थशास्त्री और कांग्रेस की "न्याय" योजना से जुड़े रहे श्री अभिजीत बैनर्जी को गरीबी हटाने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध के लिए जिन दो अन्य अर्थशास्त्रियों के साथ संयुक्त रूप से नोबल पुरुस्कार मिला है, उनमें से एक फ्रेंच - अमेरिकन अर्थशास्त्री श्रीमती एस्थर डफ्लो बैनर्जी ( वो अपने नाम के आगे बैनर्जी नहीं लगातीं हैं, पर मैंने लगा दिया है) उनकी शरीके हयात या धर्म पत्नी हैं. मतलब भारत के पुत्तर के साथ ही भारत की बहुरिया को भी नोबल पुरुस्कार मिला है. डबल जश्न मनाओ रे .... बेचारे अभिजीत दा, पूरी दुनिया में नोबल अर्थशास्त्री का रौब जमायेंगे और घर में बीबी कहेगी ... ज़्यादा न उछलो .. मुझे भी मिला है !! खैर, भारत की बहुएँ भारत के मुंडों से कम है के .... दोनों को कस के बधाई..... ये उपलब्धि इतनी बड़ी थी कि बंगाली बाबू के कांग्रेस से जुड़ाव के बाद भी भक्तों के भगवान को उन्हें बधाई देनी पडी, वरना रवीश के मैग्सेसे अवार्ड को तो साहब ने रिएक्शन देने लायक ही नहीं माना था. खैर, कल से बैनर्जी - डफ्लो निवास में मजेदार दृश्य होगा ... एक नोबल विजेता पूछेगा, बटर लगा दूँ टोस्ट पर ? दूसरा, नोबल विजेता जवाब देगा - थोड़ा सा .. डार्लिंग ... ! तुम्हारी चाय में चीनी, वही एक चम्मच या आज नोबल की खुशी में दो कर दूँ ???
07:40

अयोध्या में श्री राम मंदिर पर 17 नवंबर तक आ सकता है कोर्ट का फैसला





के सी शर्मा
देश का सबसे बड़ा विवादित मसला अयोध्या का राम जन्मभूमि-बाबरी मस्ज़िद  का फैसला अगले महीने की 17 तारीख तक आ सकता हैं।सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी करने का पक्षकारों को समय दिया हैं कल मुस्लिम पक्ष का अपनी दलीलें रखने का आखरी दिन था।अब सुनवाई के लिए मात्र 72 घण्टे और शेष बचे हैं।आज से दो दिन तक हिन्दू पक्ष को जवाब देने का समय दिया जाएगा। 17 अक्टूबर तक दलीलें पूरी होने के बाद तकरीबन 1 महीना सुप्रीम कोर्ट को फैसला लिखने में लगेगा और उम्मीद हैं की 17 नवंबर तक राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना देगा।क्योंकि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई अगले महीने रिटायर होने वाले हैं और रिटायर होने से पहले वो भारत के सबसे बड़ा विवादित मसले पर फैसला  सुनाने वाले हैं।
अयोध्या विवाद के फैसले को देखते हुए प्रशासन अभी से सतर्क हो गया हैं और  धारा 144 लगा दीया गया है ।
सुप्रीम कोर्ट में 6 अगस्त से लगातार अयोध्या विवाद पर सुनवाई हो रही हैं और 17 अक्टूबर को अयोध्या विवाद की पूरी सुनवाई हो जाएगी।
और 17 नवंबर तक सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकता हैं।

Monday, 14 October 2019

19:46

जानिए कौन थे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु




भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी समाजसेवी विचारक और सुधारक गोपाल कृष्ण गोखले महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु थे और गोपाल कृष्ण गोखले के गुरु महादेव गोविंद रानाडे थे उनको वित्तीय मामलों की काफी अच्छी समझ थी उस पर अधिकार पूर्व बहस करने की क्षमता से उन्हें भारत का ग्लैडस्टोन कहा जाता था भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में एक बात प्रसिद्ध थी की वह चरित्र निर्माण की आवश्यकता से पूर्णतः सहमत होकर ही उन्होंने सर्वेट्स आफ इंडिया सोसाइटी की स्थापना की थी ताकि नौजवानों को सार्वजनिक जीवन के लिए प्रशिक्षित किया जा सके उनका मानना था कि वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा भारत की महत्वपूर्ण आवश्यकता है महात्मा गांधी उन्हें अपना राजनीतिक गुरु मानते थे गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म रत्नागिरी के कोटलुक ग्राम में एक सामान्य परिवार में हुआ था कृष्णराव उनके पिता का नाम था गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म 9 मई 1966 को हुआ था उनके पिता के असामयिक निधन से गोपाल कृष्ण गोखले को बचपन से ही सहिष्णु और कर्मठ बना दिया था देश की पराधीनता गोपाल कृष्ण को हमेशा खलती रहती थी राष्ट्रभक्ति की ओजस्वी धारा का प्रवाह उनके अंतर्मन में हमेशा ही प्रभावित रहता था इसी कारण वह सच्ची लगन निष्ठा की धारा के वशीभूत होकर कार्य करते और देश की पराधीनता से मुक्ति के प्रयत्न में लगे रहते थे अफ्रीका से लौटने पर महात्मा गांधी भी सक्रिय राजनीति में आ गए और गोपाल कृष्ण गोखले के निर्देशन में सर्वेट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी की स्थापना की जिसमें सम्मिलित होकर लोग देश सेवा कर सके इस सोसाइटी की सदस्यता के लिए गोखले जी एक एक सदस्य की कड़ी परीक्षा लेकर सदस्यता प्रदान करते थे
14:20

राष्ट्रीय नौजवान दल के राष्ट्रीय सचिव बने रामजी पांडे




राष्ट्रीय नौजवान दल की दिल्ली में हुई नेशनल काउंसिल की हुई बैठक में युवा पत्रकार व समाजसेवी रामजी पांडे को सर्वसम्मति से पार्टी का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है इसके अलावा उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है। जिसकी जानकारी राष्ट्रीय नौजवान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जसवीर सिंह ने मीडिया को दी है। मिली जानकारी के अनुसार आज दिल्ली में हुई राष्ट्रीय नौजवान दल की नेशनल काउंसिल की बैठक में पार्टी ने रामजी पांडे को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सचिव नियुक्त किया है इसकी जानकारी देते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जसवीर सिंह ने मीडिया को बताया कि रामजी पांडे इससे पहले 2008में राष्ट्रीय नौजवान दल गौतम बुद्ध नगर के जिला सचिव  रह चुके हैं और वह काफी मेहनती और कर्मठ रहे है उन्होंने बताया कि रामजी पांडे का स्वभाव हमेशा से ही एक राजनेता का ना होकर के एक सामाजिक कार्यकर्ता का रहा है इसलिए वह शुरुआत से ही समाज की समस्याओं को लेकर संघर्षशील रहे हैं और देश के  कई छोटे बड़े आंदोलनों में भी सक्रिय रहे हैं उन्होंने बताया कि  इससे पहले रामजी पांडे ने 2003 में  लखीमपुर खीरी के  चाउछ चौराहे पर जिले में  बड़ी रेलवे लाइन  और फ्लाई ओवर ब्रिज की मांग को लेकर  अनिश्चितकालीन अनशन भी किया था। जिसके बाद देर से ही सही लेकिन आज उनकी दोनों मांगे पूर्ण हो चुकी है और  आज लखीमपुर खीरी में बड़ी रेलवे लाइन और फ्लाईओवर ब्रिज दोनों बनकर तैयार हैं। इसके बाद वह 2006 में नोएडा  आ गए थे वहां आकर वह 2008 में नवगठित पार्टी राष्ट्रीय नौजवान दल से जुड़कर पार्टी के लिए काम करने लगे उनकी मेहनत और लगन को देखकर पार्टी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपने का मन बना लिया था लेकिन इसी बीच दिल्ली में अन्ना आंदोलन की शुरुआत हो गई थी  और वह अपने देश भक्त व समाज सेवी स्वभाव के चलते अन्ना आंदोलन में सक्रिय हो गए क्योंकि वह एक सामाजिक आंदोलन था इसलिए पार्टी ने उनके इस निर्णय का समर्थन किया लेकिन आंदोलन के बाद बनी  आम आदमी पार्टी  मैं उनकी सक्रियता  से पार्टी को कहीं न कहीं उनकी कमी खलती रही क्योंकि अन्ना आंदोलन के बाद बनी आम आदमी पार्टी में वह सक्रिय रूप से शामिल हो चुके थे लेकिन आम आदमी पार्टी के खास आदमी पार्टी बनते ही उनका मोहभंग हो गया और वह वापिस राष्ट्रीय नौजवान दल में शामिल हो गए चूंकि वह हमेशा से ही एक अलग तरीके के मेहनती और जुझारू कार्यकर्ता  रहे हैं  इसलिए कोई भी पार्टी ऐसे कार्यकर्ताओं को खोना नहीं चाहती है इसलिए  उन्हें पार्टी में  बड़ी जिम्मेदारी देकर उनकी पदोन्नति की गई है उनकी पार्टी मे पुनः वापसी उत्तर प्रदेश में कई नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म देगी।
07:54

पत्रकार अपनी अहमियत समझो वरना




के सी शर्मा
वर्तमान समय मे देश मे इतना ज्यादा एलक्ट्रानिक मीडिया एवं प्रिंट मीडिया एवं पत्रकार हो गए है कि सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ रहा है।
हम बात कर रहे है आज की जिधर देखो उधर एलक्ट्रानिक मीडिया का हुड़प लुल्ला लेकर घूमते नजर आजायेंगे, जब कुछ नही मिलता तो सब्जी का ही रेट पूछने लगते है।उक्त पत्रकार अक्सर सभी थानों के दरवाजे में 4-6 देखने को मिल जाएंगे।एक समय था जब पत्रकारों को इज्जत व सम्मान से लोग देखा करते थे आज बात करना तो दूर लोग देखना पसंद नही करते, चंद पैसो के खातिर पत्रकार अपनी अहमियत को ही भूल गए यही कारण है कि आज लोग धीरे धीरे समाचार पत्र एवं एलक्ट्रानिक मीडिया का समाचार देखना व पढ़ना बन्द कर रहे है, तभी तो पत्रकार साथी सोशल मीडिया का सहारा ले रहे है कम से कम जिसका समाचार है वह पढ़ ले एवं देख ले। आज उर्जान्चल की यह स्थित है कि हर दश मोटरसाइकल में 9 प्रेस लिखा रहता है जिसमे दूध बेचने वाला सब्जी बेचने वालों के साथ साथ टेम्पू टेक्सी में में भी प्रेस लिखा मिल जाएगा।
पुलिस भी क्या करे जब भी कोई कार्यवाही करने की कोशिश भी करती तो जिनके अधिनस्त काम कर रहे आकाओ का फोन आ जाता है जो अक्सर पैसा लेकर प्रेस का कार्ड बाटते फिरते रहते है।अब तो ऐसे ऐसे चैनलो का एवं समाचार पत्रों का नाम बताते है फिरते की कभी आपने सुना भी नही होगा, करे भी तो क्या बेरोजगारी इतना ज्यादा बढ़ गई है कि इससे अच्छा कोई रोजगार भी नही है। सुबह मोटर साइकिल से बिना नास्ता किये निकल देते है शाम तक सौ पचास एकत्रित कर हजार रुपये लेकर वापस आ जाते है उनका सोच भी अच्छी लोग जो देते है अपना देते है मेरा क्या लेते है। वक्त रहते पत्रकार अपनी अहमियत को समझे नही तो वह दिन दूर नही जब लोग बैठना भी नही पूछेंगे।

Sunday, 13 October 2019

07:35

KBC -कौन बनेगा करोड़पति के नाम पर युवती से ठगी





दिल्ली में कौन बनेगा करोड़पति में 35,00000 रुपए की रकम जीतने के नाम पर एक महिला से ₹87000 की ठगी का मामला प्रकाश में आया है जिसमें आरोपियों ने युवती को इस झांसे में लेकर उसकी बाइक तक गिरवी रखवा दी मामला दिल्ली के शाहदरा इलाके का है जहां आरोपी इनाम के रुपए भेजने के नाम पर युवती से कई तरह के चार्ज के रूप में रकम जमा कराते रहे यहां तक आरोपियों ने युवती से मिठाई खाने के नाम पर भी पैसे वसूल लिए आरोपियों को जब लगा कि युवती के पास अब देने के लिए कुछ भी नहीं है तो अपना नंबर बंद कर दिया जब पीड़िता को लगा कि उसके साथ ठगी हुई है तो उसने इसकी शिकायत पुलिस को दी आरोपियों ने युवती को इस तरीके से अपने जाल में फंसाया कि पहले उसके दस्तावेज लिए ₹40000 फाइल चार्ज लिए उसके बाद आरोपियों ने ₹19000 रजिस्ट्रेशन फीस और खाता चालू कराने के नाम पर ₹20000 जमा करने को कहा पीड़िता ने उसे भी जमा कर दिए आरोपियों ने कहा कि अब लास्ट में उन्हें ₹35000 इनकम टैक्स के लिए जमा करने होंगे जब युवती ने इतने पैसे नहीं होने में असमर्थता जताई जब उनसे ₹20000 तक जमा करने के लिए कहा गया 20000 रूपए जुटाने के लिए युवती ने अपनी सेना और बाइक तक गिरवी रख दी और ₹15000 जमा कर दिए रुपए मिलने के बाद आरोपी ने ₹5000 मिठाई खाने के लिए मांगे जिसको भी युवती ने जमा कर दिया इसके बाद आरोपियों का फोन बंद आने लगा जिसके बाद महिला को शक हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाएं
07:03

राम जन्मभूमि स्थान में पुरातत्व विभाग के पास अनेकों ऐसे साक्ष्य है जिन्हें झुठलाया नहीं जा सकता




इस समय अयोध्या में जिस स्थान पर रामलला विराजमान हैं, वही श्रीराम का जन्मस्थान है। इसके हजारों साक्ष्य हैं, इतिहास भी साक्षी है। लेकिन राम विरोधी लोग उन साक्ष्यों को कुतर्क के आधार पर नकारते रहे हैं। लेकिन पुरातत्व विभाग के अनेक साक्ष्य ऐसे हैं जो झुठलाए नहीं जा सकते

6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में वह विवादास्पद ढांचा ढह गया था, जिसके बारे में सदियों से हिंदुओं का कहना था कि उनके सर्वाधिक पूज्य मंदिर को गिराकर उसे खड़ा किया गया था। इस घटना ने जहां हिंदुओं के आत्म-निश्चय को दुर्बल करने वाले मनोवैज्ञानिक अवरोधों को दूर किया, वहीं अबूझ सवालों की गुत्थियों को सुलझाने की कड़ियां भी परोस दीं। यही नहीं, इसने पहली बार इस तथ्य के ठोस साक्ष्य प्रदान किए कि बाबरी ढांचे की दीवारों के बीच एक प्राचीन मंदिर का अस्तित्व था।

पहले भी जोसेफ टिफेंथलर जैसे विदेशी यात्रियों ने बाबरी ढांचे की दीवारों में 14 काले पत्थर के खंभों पर गढ़े हुए हिंदुओं के पवित्र प्रतीकों का शिल्प देखा था। 1992 में नए पुरातात्विक प्रमाण मिले जब जून के महीने में बाबरी ढांचे के सामने अधिग्रहित 2़ 77 एकड़ भूमि के एक पुराने गड्ढे में मूर्तिकला और स्थापत्य के 40 से अधिक भग्नावशेष मिले। उस भूमि को फैजाबाद के जिलाधिकारी आऱ एऩ श्रीवास्तव की देखरेख में समतल किया जा रहा था।

बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के इतिहासकार आऱ एस़ शर्मा, डी़ एऩ झा, अथर अली और सूरजभान ने अवशेषों को ‘साक्ष्यात्मक प्रमाण’ नहीं माना था, क्योंकि उनके अनुसार, ‘‘ये अलग-अलग स्थानों और इतिहास के भिन्न-भिन्न कालखंडों से संबंधित थे।’’ पुरातत्वविद् एस़ पी. गुप्ता का कहना था कि पुराकालिक अवशेष एक प्राचीन गड्ढे में मिले थे, जिसे 16वीं शताब्दी में बंद कर दिया गया था।

धीरे-धीरे ढांचे के नीचे मंदिर के अस्तित्व के साक्ष्य सामने आने लगे। राज्य सरकार द्वारा जब अधिग्रहित भूमि समतल कराई जा रही थी तो लगभग 12 फीट गहरा एक हिस्सा सामने आया। भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के पूर्व निदेशक डॉ. के़ एम़ श्रीवास्तव और डॉ. एस़ पी. गुप्ता ने इसकी जांच की तो वहां उत्तर-दक्षिणी भाग में प्राचीन र्इंटों की कई परतों की चूने और पत्थर से बनी दीवार दिखी। उसके नीचे एक और दीवार थी, जिसका फर्श अलग तरीके का था। ये चिह्न किसी विशाल दीवार के नष्ट होने को इंगित करते हैं। पुरातत्व विभाग, उत्तर प्रदेश के निदेशक डॉ. राकेश तिवारी ने खुदाई के दौरान मिली हिंदू मंदिर से संबंधित 263 कलाकृतियों की एक सूची इलाहाबाद उच्च न्यायालय को सौंपी।

6 दिसंबर, 1992 की घटना के बाद सैकड़ों वस्तुएं सामने आर्इं। ढांचा ढहाए जाने के एक महीने बाद जब स्थल केंद्र सरकार के नियंत्रण में था तो एक बैरीकेड बनाते समय भग्न मंदिर का 2़ 5 फीट फलक दिखाई दिया। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण खोज थी 5७2़ 25 फीट का एक शिलालेख, जो ढांचे की दीवार ढहने के दौरान गिरा था। पुरालेख और मुद्राशास्त्र के प्रसिद्ध विशेषज्ञ प्रोफेसर अजयमित्र शास्त्री ने कहा कि शिलालेख 11वीं शताब्दी ईसा पूर्व की शुद्ध और शास्त्रीय नागरी लिपि में उत्कीर्णित है, जिसमें अयोध्या के साकेत मंडल में सुनहरे गुंबद वाले विष्णु हरि के एक अद्वितीय मंदिर का उल्लेख है, जो पूर्व के अन्य राजाओं द्वारा निर्मित सभी मंदिरों में सबसे भव्य है। इसमें भगवान विष्णु (वामन अवतार के रूप में) द्वारा राजा बाली और दस मुख वाले व्यक्ति दशानन (रावण) का विनाश करने की बात वर्णित है।

भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के पुरालेख निदेशक प्रसिद्ध पुरालेखविद् डॉ. के़ वी़ रमेश ने शिलालेख की वैज्ञानिक जांच करने के बाद बताया कि 20 पंक्तियों का शिलालेख एक आयताकार पत्थर पर 115 से.मी.७55 से़ मी़ में उत्कीर्ण किया गया था, जो गिरने पर दो तिरछे टुकड़ों में टूट गया था; इसलिए लगभग हर पंक्ति में कुछ शब्द खो गए हैं। शुद्ध संस्कृत में लिखा गया यह शिलालेख 12वीं शताब्दी ईस्वी के मध्य का बताया गया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी गहड़वाल राजवंश के राजा गोविंदचंद्र के बारे में थी, जिन्होंने 1114 से 1155 ईस्वीं तक एक विशाल साम्राज्य पर शासन किया था। शिलालेख राज्य के प्रशासनिक विभाग साकेत मंडल का उल्लेख करता है। मंदिर मेघसूत ने बनवाया था, लेकिन शिलालेख उनके उत्तराधिकारी द्वारा उत्कीर्ण कराया गया था।

इस शिलालेख की 19-20 पंक्तियों में ‘पश्चायत’ शब्द का उल्लेख है। डॉ. रमेश ने इसका अनुवाद इस तरह किया है, ‘‘और अब शासक की उग्र सेना  पश्चिमी देशों (पश्चायत) के कारण पैदा भय का भी नाश करती है।’’ उन्होंने इसे मुसलमानों, विशेष रूप से गजनवियों का संदर्भ बताया है, जिन्होंने उस समय भारत पर आक्रमण किया था। लेकिन वामपंथी इतिहासकार प्रोफेसर इरफान हबीब ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा, ‘‘किसी भी शिलालेख या संस्कृत कथन में मुसलमानों और गजनवियों को ‘पश्चायत’ के नाम से उल्लेलख नहीं किया गया है। यह कन्नौज और बदायूं के राष्ट्रकूटों का संदर्भ हो सकता है, जो 12वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में गहड़वाल के पश्चिमी पड़ोसियों में से थे।’’

लेकिन वास्तविकता यह भी है कि गहड़वाल अपने शासनकाल की शुरुआत से ही हिंदू धर्म के सबसे बड़े रक्षकों में से थे। इस राजवंश के संस्थापक चंद्रदेव को ऐसे व्यक्ति के तौर पर वर्णित किया गया था, जो उस धर्म और वेदों की पुनर्स्थापना के लिए स्वयंभू के रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुए थे जिन्हें विस्मृत कर दिया गया था। राजवंश के ताम्रपत्र पर अंकित लेखों में बताया गया है कि चंद्रदेव ने काशी, कुशिका या कान्यकुब्ज, उत्तरकौशल या अयोध्या और इंद्र या इंद्रस्थनीयक शहर की रक्षा की थी।

गहड़वालों ने तुर्कों के साथ बहादुरी से लड़ाई की थी। चंद्रदेव ने ‘तुरुष्कदण्ड’ नाम का एक विशेष कर लगाया था जिसका उद्देश्य युद्ध के लिए धन जुटाना था। उनके पोते गोविंदचंद्र का वर्णन ‘कृत्यकल्पतरू’के लेखक लक्ष्मीधर ने युद्ध में मारे गए वीर हमीरा के रूप में वर्णित किया था, जो एक मुसलमान सेना प्रमुख, संभवत: हजीब तुग तिगिन के संबंध में बताता है। वाराणसी के पास सारनाथ में एक शिलालेख में गोविंदचंद्र की रानी कुंवर देवी ने उनकी तुलना विष्णु से की है, जिन्होंने अपने राज्य की रक्षा करने के लिए पुनर्जन्म लिया- हरि (विष्णु), जिन्हें दुष्ट आक्रांता तुरुष्का से वाराणसी की रक्षा करने के लिए ‘हर’ (शिव) ने नियुक्त किया था, क्योंकि सिर्फ वही पृथ्वी की रक्षा करने में सक्षम थे, उन्होंने फिर जन्म लिया था और गोविंदचंद्र के रूप में प्रसिद्ध हुए - वाराणसीम् भुवन-रक्षाना-दक्षह दुस्तत तुरुस्का-सुभता-दवितम्  । लेकिन इरफान हबीब ने शिलालेख को खारिज करते हुए दावा किया, ‘‘उसे कहीं और से लाया गया था और सिर्फ इतना कहा कि साकेत के स्थानीय राजा ने विष्णु-हरि के लिए एक सुंदर मंदिर बनवाया था। यह मंदिर राम के जन्मस्थल पर नहीं बनाया गया था। शिलालेख में किसी भी मुस्लिम खतरे या मुसलमानों द्वारा नष्ट किए गए किसी भी पूर्व मंदिर का कोई संदर्भ नहीं दिया गया है।’’

अंत में, उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘शिलालेख त्रेता-का-ठाकुर मंदिर स्थल का है, जिसकी खोज 19वीं शताब्दी के अंत में हुई थी, जो फैजाबाद संग्रहालय में रखा हुआ था (जिसे 1953 में लखनऊ संग्रहालय में स्थानांतरित कर दिया गया था) और उसे ही ध्वस्त ढांचे के पास गाड़ दिया गया था।’’ इस तरह की बात करने वाले हबीब ने यह स्पष्ट करने की जहमत नहीं उठाई कि जिस स्थल पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजर टिकी थी, वहां उसे जमीन में कैसे गाड़ा जा सकता था? यही नहीं, लखनऊ संग्रहालय ने भी पुष्टि की कि उसकी सारी संपत्ति उसके पास ही थी। हबीब के बताए त्रेता-का-ठाकुर शिलालेख में भी बीस पंक्तियां हैं, पर यह किसी राजा की चर्चा नहीं करता और उनके अनुसार, इसका ऊपरी दायां हिस्सा क्षतिग्रस्त है। लेकिन अयोध्या से प्राप्त शिलालेख का तो निचला दायां हिस्सा क्षतिग्रस्त है, अत: वह हबीब द्वारा वर्णित शिलालेख नहीं हो सकता।

हैरानी की बात है कि हबीब अपने ही तर्कों पर खरे नहीं उतरते। त्रेता-का-ठाकुर त्रेता युग के सर्वोच्च देवता श्रीराम का ही परिचय है। उनकी ओर से प्रस्तुत त्रेता-का-ठाकुर शिलालेख दरअसल पुरातत्वविद् एंटोन फ्यूहर ने त्रेता-का-ठाकुर मंदिर स्थल पर खड़े किए गए ढांचे के भग्नावशेषों के बीच खोजा था। हबीब इस तथ्य को मानते हैं। फिर उन्हें यह तथ्य स्वीकार करने से परहेज क्यों है कि विष्णु हरि शिलालेख बाबरी ढांचे की दीवारों के बीच पाया गया जिसे प्राचीनकाल में स्थित विष्णु हरि मंदिर पर खड़ा किया गया था? इलाहाबाद उच्च न्यायालय को मंदिर के पुराकालिक अवशेषों के सत्य को स्वीकार करने में 18 साल लग गए, जो 1992 के बाद ढहाए गए ढांचे के बीच से उभरने लगा था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद सरयू में न जाने कितना पानी बह गया, पर श्रीराम जन्मभूमि का मामला अभी तक अटका हुआ है। अब जो माहौल बन रहा है उसने उम्मीद जगा दी है कि जल्दी ही यह मामला निपट सकता है।

(यह आलेख मीनाक्षी जैन द्वारा लिखी पुस्तक ‘राम और अयोध्या’ (प्रकाशक : आर्यन बुक्स इंटरनेशनल, 2013) पर आधारित है)
06:47

सौहार्दपूर्ण समाधान की एक सराहनीय पहल




 वरिष्ठ पत्रकार के सी शर्मा की रिपोर्ट
वैसे तो राम जन्म भूमि बाबरी मस्जिद का मामला सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक दौर में गुजर रहा है।फिर भी कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने इस समस्या के सौहार्द पूर्ण समाधान की एक कोशिश की है।इंडियन मुस्लिम फार पीस ने सुन्नी वक्फबोर्ड को सुझाव दिया है कि अयोध्या में 2.77 एकड़ भुमि हिन्दुओं को गिफ्ट के लिए सरकार को सौंप दिया जाय। शिया वक्फबोर्ड के.अध्यक्ष वसीम रिजवी तो पहले ही विवादित भूमि शिया सम्पत्ति बताकर राम मन्दिर को सौंपने की घोषणा कर चुके थे।
हालांकि अब इस सुझाव का  कोई औचित्य नहीं रह गया है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में पहले ही एक सेवा निवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनाकर आपसी सुलह समझौते से समस्या के समाधान हेतु मध्यस्थता का प्रयास कर चुका है ,दो माह बाद भी नतीजा सिफर रहा।

  इसके पूर्व रामराज स्थापना महामंच ने राम मन्दिर निर्माण के सौहार्द पूर्ण समाधान के लिए कई हिन्दू मुस्लिम संगठनों मुस्लिम कारसेवक मंच,सूफी सन्त सेवा समिति, सनातन महासभा,अ.भा.समग्र विचार मंच के साथ कई दौर में नृत्य गोपाल दास,वेदान्ती जी,परम हंस जी,बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी, हाजी महबूब, मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सलमान नदवी, रामजन्म भूमि के पक्षकार महन्त धर्मदास जी सहित दोनों वर्गों के बुद्धिजीवियों से कई दौर वार्ता की थी।
28 जनवरी 2018 को लखनऊ विश्वविद्यालय में राममन्दिर निर्माण समस्या और समाधान विषय पर चर्चा भी की थी ।परन्तु कुछ कट्टरपंथियो के चलते सौहार्द पूर्ण समाधान के प्रयास में निराशा ही हाथ लगी। अब जब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही अन्तिम दौर में है , सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने फैसले की तिथि भी लगभग तय कर दी है , वैसे तो अब इस सुझाव का कोई अर्थ नहीं फिर भी हम मुस्लिम बुद्धिजीवियों के इस सकारात्मक प्रयास की सराहना करते हैं।।

Saturday, 12 October 2019

09:22

अब डॉक्टरों को भी देनी होगी बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी

गाजियाबाद /अक्सर कर देखने और सुनने में आता है कि चिकित्सक अपनी ड्यूटी पर हमेशा देरी से पहुंचते हैं हालांकि सभी ऐसा नहीं करते लेकिन ज्यादातर डॉक्टर अपनी नौकरी से बेफिक्रे होकर ऐसा करते रहते हैं लेकिन यह खबर उन लोगों के लिए परेशान करने वाली हो सकती है जो अपनी नौकरी को लापरवाही से करने के आदी हैं क्योंकि अब चिकित्सकों की लेटलतीफी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी लगाने की योजना तैयार कर ली है अब देर से आने वाले डॉक्टरों और स्टाफ पर कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा फिलहाल शुरुआत में इसे 30 नगरीय स्वास्थ्य केंद्र पर लगाया जाएगा  इन केंद्रों पर चिकित्सक वार्ड बॉय फार्मासिस्ट तैनात हैं जहां प्राथमिक उपचार किया जाता है इन केंद्रों पर पहुंचने वाले स्टाफ की हाजिरी बायोमेट्रिक मशीन से ली जाएगी इसका कंट्रोल रूम सीएमओ कार्यालय में बनेगा सीएमओ डॉक्टर एनके गुप्ता ने बताया कि जनपद में 50 नगरीय स्वास्थ्य केंद्र में से अभी शुरुआत में केवल 30 केंद्रों पर ही बायोमेट्रिक मशीन लगाई जाएगी इसके बाद अन्य केंद्रों पर भी लगाई जा सकती है मशीन लगाने की शुरुआत भी कर दी गई है इसके अलावा एक कंट्रोल रूम सीएमओ कार्यालय में बनाया जाएगा जिससे सभी चिकित्सकों पर निगाह रखी जा सके।
07:04

लक्ष्य परम वैभव संपन्न भारत -संघ प्रमुख


के सी शर्मा
हमारे वैज्ञानिकों ने अब तक चंद्रमा के अनछुए प्रदेश, उसके दक्षिण ध्रुव पर अपना चंद्रयान ‘विक्रम’ उतारा. यद्यपि अपेक्षा के अनुरूप पूर्ण सफलता ना मिली, परंतु पहले ही प्रयास में इतना कुछ कर पाना यह भी सारी दुनिया को अब तक साध्य न हुई, एक बात थी.
हमारे देश की बौद्धिक प्रतिभा व वैज्ञानिकता का तथा संकल्प को परिश्रमपूर्वक पूर्ण करने की लगन का सम्मान हमारे वैज्ञानिकों के इस पराक्रम के कारण दुनिया में सर्वत्र बढ़ गया है.
सुखद वातावरण में अलसा कर हम अपनी सजगता व अपनी तत्परता को भुला दें, सब कुछ शासन पर छोड़ कर, निष्क्रिय होकर विलासिता व स्वार्थों में मग्न हो ऐसा समय नहीं है. जिस दिशा में हम लोगों ने चलना प्रारंभ किया है, वह अपना अंतिम लक्ष्य-परमवैभव संपन्न भारत-अभी दूर है.
मार्ग के रोड़े, बाधाएं और हमें रोकने की इच्छा रखने वाली शक्तियों के कारनामे अभी समाप्त नहीं हुए हैं. हमारे सामने कुछ संकट हैं, जिनका उपाय हमें करना है. कुछ प्रश्न है जिनके उत्तर हमें देने हैं, और कुछ समस्याएं हैं, जिनका निदान कर हमें उन्हें सुलझाना है.
सौभाग्य से हमारे देश के सुरक्षा सामर्थ्य की स्थिति, हमारे सेना की तैयारी, हमारे शासन की सुरक्षा नीति तथा हमारे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुशलता की स्थिति इस प्रकार की बनी है कि इस मामले में हम लोग सजग और आश्वस्त हैं.
हमारी स्थल सीमा तथा जल सीमाओं पर सुरक्षा सतर्कता पहले से अच्छी है. केवल स्थल सीमापर रक्षक व चौकियों की संख्या व जल सीमापर (द्वीपों वाले टापुओं की) निगरानी अधिक बढ़ानी पड़ेगी. देश के अन्दर भी उग्रवादी हिंसा में कमी आई है. उग्रवादियों के आत्मसमर्पण की संख्या भी बढ़ी है.
गत कुछ वर्षों में एक परिवर्तन भारत की सोच की दिशा में आया है. उसको न चाहने वाले व्यक्ति दुनिया में भी हैं और भारत में भी. भारत को बढ़ता हुआ देखना, जिनके स्वार्थों के लिए भय पैदा करता है, ऐसी शक्तियां भी भारत को दृढ़ता व शक्ति से संपन्न होने नहीं देना चाहतीं.

- डॉ मोहन भागवत जी (विजयदशमी उत्सव उद्बोधन 2019)
06:53

देश में निजी करण का बढ़ता खतरा



देश के सबसे अच्छे अस्पताल का नाम मेदांता नहीं एम्स है जो सरकारी हैं , सबसे अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज का नाम IIT है जो सरकारी हैं सबसे अच्छे मैनेजमेंट कॉलेज का नाम IIM है जो सरकारी हैं ,देश के सबसे अच्छे विद्यालय केन्द्रीय विद्यालय हैं जो सरकारी हैं ,देश के एक करोड़ लोग अभी या किसी भी वक़्त अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए सरकारी रेल में बैठते हैं..., नासा को टक्कर देने वाला ISRO अम्बानी नहीं सरकार के लोग चलाते हैं.सरकारी संस्थाएँ फ़ालतू मे बदनाम हैं, अगर इन सारी चीज़ों को प्राइवेट हाथों में सौंप दिया जाए तो ये सिर्फ़ लूट खसोट का अड्डा बन जाएँगी। निजीकरण एक व्यवस्था नहीं बल्कि नव रियासतीकरण है, अगर हर काम में लाभ की ही सियासत होगी तो आम जनता का क्या होगा। कुछ दिन बाद नवरियासतीकरण वाले लोग कहेगें कि देश के सरकारी स्कूलों, कालेजों, अस्पतालों से कोई लाभ नहीं है अत: इनको भी निजी हाथों में दे दिया जाय तो जनता का क्या होगा।

अगर देश की आम जनता प्राइवेट स्कूलों और हास्पिटलों के लूटतंत्र से संतुष्ट है तो रेलवे, बैंकों एंव अन्य सरकारी संस्थाओं को भी निजी हाथों में जाने का स्वागत करें।

हमने बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए सरकार बनाई है न कि सरकारी संपत्ति मुनाफाखोरों को बेचने के लिए। अगर प्रबंधन सही नहीं तो सही करे। भागने से तो काम नही चलेगा।

एक साजिश है, कि पहले सरकारी संस्थानों को ठीक से काम न करने दो, फिर बदनाम करो, जिससे निजीकरण करने पर कोई बोले नहीं, फिर धीरे से अपने आकाओं को बेच दो। जिन्होंने चुनाव के भारी भरकम खर्च की फंडिंग की है।

याद रखिये पार्टी फण्ड में गरीब मज़दूर, किसान पैसा नही देता। पूंजीपति देता है। और पूंजीपति दान नहीं देता, निवेश करता है। चुनाव बाद मुनाफे की फसल काटता है ।

आइए विरोध करें निजीकरण का। सरकार को अहसास कराएं कि अपनी जिम्मेदारियों से भागे नहीं। सरकारी संपत्तियों को बेचे नहीं।अगर कहीं घाटा है तो प्रबंधन ठीक से करे।



क्रान्तिकारी अभिवादन के साथ, के सी शर्मा

Friday, 11 October 2019

13:32

लोक नायक जयप्रकाश जी की 117 वी जयंती पर विशेष रिपोर्ट के सी शर्मा की कलम से





के सी शर्मा की रिपोर्ट
भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और जननेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की आज शुक्रवार को 117वीं जयंती हैउनका जन्म 11 अक्टूबर, 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गांव में हुआ था।
 उन्होंने इंदिरा गांधी की नीतियों के विरोध में ऐसा आंदोलन खड़ा किया, जिससे देश की राजनीति ही बदल गई थी।जेपी के इस आंदोलन में आरएसएस के लोग भी बकायदा शामिल थे, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब जेपी ने इंदिरा गांधी को खत लिखकर कहा कि आरएसएस मुझे उसी तरह का गद्दार समझता है जिस तरह से नाथूराम गोडसे महात्मा गांधी को गद्दार समझता था।लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी को कश्मीर मुद्दे पर पत्र लिखा था।
इस पत्र में उन्होंने इंदिरा गांधी से शेख अब्दुलाह की रिहाई के संबंध में कश्मीर समस्या का जिक्र करते हुए कहा था,
 'मैं ये भी नहीं सोचता हूं कि वे (कश्मीरी) देश के गद्दार हैं।

 नाथूराम गोडसे ने सोचा था कि गांधी जी गद्दार थे। आरएसएस समझता है कि जयप्रकाश गद्दार हैं। गोडसे एक व्यक्ति था, जबकि आरएसएस एक निजी संगठन है।'

उन्होंने आगे जिक्र करते हुए कहा कि एक लोकतांत्रिक सरकार लोगों का प्रतिनिधित्व करती है और इसके कुछ सिद्धांत होते हैं, जिसके अनुरूप वह कार्य करती है।
भारत सरकार किसी को गद्दार नहीं करार दे सकती, जब तक पूरी कानूनी प्रक्रिया से ये साबित न हो जाए कि वह गद्दार है।

 अगर सरकार ऐसा करने में अपने को असमर्थ पाती है, तब डीआईआर का प्रयोग करना और लगातार प्रयोग करना कायरतापूर्ण है, उस समय भी जब देश की सुरक्षा को कोई खतरा महसूस न हो।

जय प्रकाश नारायण लिखते हैं कि कश्मीर ने दुनिया भर में भारत की छवि को जितना धूमिल किया है, उतना किसी और मसले ने नहीं किया है।
रूस समेत दुनिया का कोई ऐसा देश नहीं है, जो हमारी कश्मीर संबंधी नीतियों की तारीफ करता हो, यद्यपि उनमें से कुछ देश अपने कुछ वाजिब कारणों से हमें समर्थन देते हैं।

 स्वतंत्रता सेनानी जयप्रकाश नारायण की 117वीं जयंती पर शत्-शत् नमन!
06:54

जब संघ का स्वरूप देखकर राजनीतिक सत्ता का सिंहासन डोलने लगा था-के सी शर्मा




के सी शर्मा
1940 के बाद, संघ का स्वरुप देखकर राजनीतिक सत्ता का सिंहासन डोलने लगा और संघ के खिलाफ दुष्प्रचार किया जाने लगा। मगर स्वयंसेवकों की दिन रात की कठिन तपस्या के कारण, एक दशक बाद ही वो कालखंड आया. जब प्रधानमंत्री ने अन्य नेताओं के साथ माननीय संघ चालक को विचार विनमेय के लिए बुलाया।26 जनवरी की परेड में आर.एस.एस. की वाहिनी को शामिल किया गया. इसके बाद संघ के स्वयंसेवकों ने एक से बढ़कर एक प्रकल्पों में बढ़चढ़कर हिसा लेना आरम्भ कर दिया।शीघ्र ही हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और अनुशासन की वजह से स्वयंसेवकों ने अपने झंडे गाड़ लिए।आपातकाल ने संघ के महत्व को पुन: समझाया. आर.एस.एस. के प्रचार तंत्र से देश ने प्रजातंत्र की रक्षा की।  तब संघ को देखने की समाज की नज़र बदल गयी थी. यह सब कैसे हुआ संघ का विचार,सत्य विचार है, अधिष्ठान शुद्ध है पवित्र है।इस शक्ति से ही संघ हर मुश्किल का सामना कर रहा है।इन विचारों को व्यवहार में लाने वाली कार्यपद्दति को तैयार करने का काम, संघ शाखाओं के माध्यम से कर रहा है।बाकी सब बंद हो सकता है।संघ की शाखा कभी बंद नहीं हो सकती।
06:36

जेल में बंद आंदोलनकारी के लिए हांगकांग में हुआ प्रदर्शन



हांगकांग में हिंसक प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए 6 साल की सजा पाए गए 1 कार्यकर्ता के समर्थन में सैकड़ों नकाबपोश आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन किया और उच्च न्यायालय के सामने जमा हो गए  जहां आंदोलनकारी लेंग की अपील पर सुनवाई हो रही थी प्रदर्शनकारी क्रांति अब का नारा लगा रहे थे सुनवाई के बाद जब पुलिस की बस एडवर्ड लेंग को लेकर जा रही थी तो प्रदर्शनकारी गाड़ी के सामने आ गए और थोड़ी देर के लिए यातायात जाम हो गया लेकिन अभी यह साफ नहीं हो सका है कि लेंग की सुनवाई के दौरान कोर्ट का क्या फैसला हुआ है लेंग 2014 के विफल प्रदर्शन के बाद विरोध के एक चेहरे के तौर पर उभरे थे 2014 के प्रदर्शन चीन द्वारा चुनाव को सीमित करने के विरोध में किए गए थे उच्च न्यायालय के बाहर जमा हुए प्रदर्शनकारियों में शामिल केंनी ली ने कहा है कि लेंग ने कई सारे लोगों को आंदोलन करके संघर्स करने के लिए प्रेरित किया है खासकर हमारे जैसे युवाओं को उन्होंने कहा कि लेंग के जेल में होने के बावजूद उनकी सक्रियता अभी देखी जा सकती है।

Wednesday, 9 October 2019

07:09

विजयदशमी 2019 पर संघ प्रभु मोहन भागवत का उद्बोधन





के सी शर्मा
हमारे वैज्ञानिकों ने अब तक चंद्रमा के अनछुए प्रदेश, उसके दक्षिण ध्रुव पर अपना चंद्रयान ‘विक्रम’ उतारा. यद्यपि अपेक्षा के अनुरूप पूर्ण सफलता ना मिली, परंतु पहले ही प्रयास में इतना कुछ कर पाना यह भी सारी दुनिया को अब तक साध्य न हुई, एक बात थी.हमारे देश की बौद्धिक प्रतिभा व वैज्ञानिकता का तथा संकल्प को परिश्रमपूर्वक पूर्ण करने की लगन का सम्मान हमारे वैज्ञानिकों के इस पराक्रम के कारण दुनिया में सर्वत्र बढ़ गया है.सुखद वातावरण में अलसा कर हम अपनी सजगता व अपनी तत्परता को भुला दें, सब कुछ शासन पर छोड़ कर, निष्क्रिय होकर विलासिता व स्वार्थों में मग्न हो ऐसा समय नहीं है. जिस दिशा में हम लोगों ने चलना प्रारंभ किया है, वह अपना अंतिम लक्ष्य-परमवैभव संपन्न भारत-अभी दूर है.

मार्ग के रोड़े, बाधाएं और हमें रोकने की इच्छा रखने वाली शक्तियों के कारनामे अभी समाप्त नहीं हुए हैं. हमारे सामने कुछ संकट हैं, जिनका उपाय हमें करना है. कुछ प्रश्न है जिनके उत्तर हमें देने हैं, और कुछ समस्याएं हैं, जिनका निदान कर हमें उन्हें सुलझाना है.

सौभाग्य से हमारे देश के सुरक्षा सामर्थ्य की स्थिति, हमारे सेना की तैयारी, हमारे शासन की सुरक्षा नीति तथा हमारे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुशलता की स्थिति इस प्रकार की बनी है कि इस मामले में हम लोग सजग और आश्वस्त हैं.
हमारी स्थल सीमा तथा जल सीमाओं पर सुरक्षा सतर्कता पहले से अच्छी है.
 केवल स्थल सीमापर रक्षक व चौकियों की संख्या व जल सीमापर (द्वीपों वाले टापुओं की) निगरानी अधिक बढ़ानी पड़ेगी. देश के अन्दर भी उग्रवादी हिंसा में कमी आई है. उग्रवादियों के आत्मसमर्पण की संख्या भी बढ़ी है.

गत कुछ वर्षों में एक परिवर्तन भारत की सोच की दिशा में आया है. उसको न चाहने वाले व्यक्ति दुनिया में भी हैं और भारत में भी. भारत को बढ़ता हुआ देखना, जिनके स्वार्थों के लिए भय पैदा करता है, ऐसी शक्तियां भी भारत को दृढ़ता व शक्ति से संपन्न होने नहीं देना चाहतीं.

- डॉ मोहन भागवत जी (विजयदशमी उत्सव उद्बोधन 2019)

Tuesday, 8 October 2019

09:53

रावण दहन से पहले अपने अपने भीतर मौजूद राक्षसी शक्ति का करे दहन -नागेंद्र प्रताप सिंह

 फिल्में भी एक पाठशाला ही होती हैं। कई बातें जो स्कूल में नहीं सिखाई जातीं वे फिल्मों से मिल जाती हैं। आदमी जो दिखता है दरअसल वह वैसा होता नहीं। यह सीख फिल्मों के चरित्र से ही मिली। फिल्में समाज से ही चरित्र उठाती हैं। हम जिसका अनुमान लगाते हैं या महसूस करते हैं फिल्में उसे दिखा देती हैं। वे दमित आकांक्षाओं को परदे पर पूरा करने व कल्पनाओं में पंख साजने का काम करती हैं। बुराई पर अच्छाई की विजय जिस खूबसूरत तरीके से तीन घंटे में फिल्में दिखा देती हैं, उसी बात को प्रवचनकर्ता घुमावदार तरीके से सात दिनों में बता पाते हैं। हर फिल्म में कुछ न कुछ अपने काम का ह़ोता है। अपना उसी से मतलब रहा करता है। मनोहर श्याम जोशी ने ..पटकथा लेखन..नाम की अपनी किताब में लिखा है कि..हर फिल्म या तो रामायण से या फिर महाभारत से प्रभावित होती है। दुनिया में जो है वह महाभारत में है और जो इसमें नहीं है समझो कहीं नहीं है, यह उद्घोष महाभारत के रचनाकार महर्षि व्यास का है।

फिल्मों में हीरो से ज्यादा खलनायक को लेकर जिग्यासा होती है। हम लोग फिल्म देखने का पैमाना खलनायक की खूंखारियत से तय करते थे। फिल्म में कितना बड़ा हीरो ले लो खलनायक दमदार न हुआ तो सब बेकार। हीरो की महत्ता खलनायक से है। कल्पना करिए यदि रावण या कंस नहीं होता तो राम,कृष्ण को कौन जानता। रामायण, महाभारत जैसे अद्वितीय ग्रंथ नहीं पढने को मिलते। महिषासुर, मधुकैटभ नहीं होते तो दुर्गा मां की जो प्रतिष्ठा है, क्या होती। जैसे दिन रात बराबर है वैसे ही अच्छाई और बुराई भी।

सृष्टि रचते समय ब्रह्मा ने हर चीज का विलोम भी रचा। इसीलिए देवता हुए तो ब्रह्मा को दैत्य भी बनाने पड़े। वैसे देवता और दैत्य एक पिता की ही संतान हैं, माताएं अलग-अलग। दिति के बेटे दैत्य हुए तो अदिति के देवता। इस नाते ये दोनों भाई-भाई हुए। इस दृष्टि से देखें तो रूपरंग कद काठी एक जैसे होनी चाहिए क्योंकि दोनों में कश्यपजी का ही गुणसूत्र है। हमारी कल्पना में राक्षस की जो आकृति उभरती है दरअसल वह वास्तविक नहीं होती। वह कलाकारों की कल्पित छवि है,जो कथाओं में वर्णित राक्षसों की प्रवृत्ति दर्शाती है।

जैसे रावण को ही ले लीजिए। हर चित्र में उसे दस सिरों वाला बताते हैं। ये चित्र प्रतीकात्मक है। वह दसों द्वारपालों को बंधक बनाए रखता है। सभी ग्रह नक्षत्र उसके बंदी होते हैं। एक साथ वह दस तरह की बातें सोचता है। कब क्या हो जाए, किसका रूप धर ले यह उसमें पारंगत था। पल में साधु, पल में राक्षस, पल में राजा, पल में विद्वान पंडित। रावण सीधे ब्रह्मा जी का पोता था। सप्तर्षियों में से एक पुलस्त्य का नाती। वह जन्मना राक्षस नहीं था। उसकी वृत्ति व प्रवृति ने उसे राक्षस बना दिया बावजूद इसके रावण के चरित्र से यह बात सीखने की ज़रूरत है कि किसी पर स्त्री का अपहरण करने के बावजूद उसका सम्मान कैसे किया जाता है । रावण ने सीता का हरण करने के बावजूद अशोक वाटिका में सम्मानपूर्वक रखा सीता के सतीत्व मे आँच भी नहीं आने दिया वरना आज के युग में हम इंसानों के बीच मौजूद रावण अबोध बालिकाओं को भी नहीं छोड़ते ये या रावण के बीच व्याप्त अच्छाई और इंसानों के बीच व्याप्त बुराई का सूचक है

जन्मना न कोई देवता होता है न राक्षस। सब एक से होते हैं। उनके गुण व चरित्र उन्हें देवता या राक्षस बनाते हैं। जन्म से ही कोई देवता बनता तो वो जयन्त भी देवता होता, जिसने सीता जी के पैरों में चोंच मारा था। वह देवराज इंद्र का बेटा था। पुराण कथाओं में कई ऐसे उदाहरण हैं कि राक्षस के घर पैदा हुआ पर देवता निकल गया। प्रहलाद, विरोचन, बलि ये तीनों हिरण्यकशिपु के वंशज हैं पर आचरण और गुण से देवताओं से भी बढकर। बलिदान कितना महान शब्द है। यह राजा बलि से आया, जो उन्होंने ने वामनरूप भगवान् को अपना दान दे दिया। तन, मन, धन अर्पित करना ही बलिदान है। तो राक्षस कोई अलग प्रजाति नहीं। यह गुणानुवर्ती है।

हर व्यक्ति राक्षस और देवता दोनों है। जो वृत्ति उभरती है वह वही बन जाता है। विवेकानंद जी कहते हैं - हर मनुष्य में सभी गुण उसी तरह विद्यमान रहते हैं जैसे कि दिखने वाले रंग में शेष सभी रंग। यदि हमें लाल दिखता है तो शेष सभी छः रंग उसमें छिपे होते हैं। अनुकूलतावश एक रंग प्रदीप्त होता है। वैसे ही मनुष्य में सभी गुण बराबर अनपात में होते हैं। जो प्रदीप्त होता है उसी के आधार पर हम उसे देवता, राक्षस,चोर,डाकू,निर्दयी, दयावान,वैज्ञानिक,आतंकवादी आदि आदि की संग्या देते हैं। यानी राक्षस कहीं बाहर नहीं हमारे भीतर है। सभी प्रवृत्तियां बाहर आने के मौके तलाशती रहती हैं। आपने दरवाजा खोला, वे बाहर आईं। इसीलिये शरीर के रंगमहल में  दस दरवाजे बताए गए हैं इनपर मालिकाना हक बनाए रखने के लिए ही जप,तप नियम,संयम बताए गए हैं। इन त्योहारों और देवी, देवताओं के पीछे गूढ़ार्थ हैं। इन्हें समझेंगे तभी सुफल मिलेगा। खाली उपवास रखने और भजनकीर्तन से कुछ हांसिल नहीं होने वाला।

माता भगवती हमारे चित्त और वृत्ति की अधिष्ठात्री हैं। इसलिए.. या देवी सर्वभूतेषु ....विभिन्न वृत्ति रूपेण संसिथा ..हैं। इनकी आराधना हमारे भीतर छुपे हुए राक्षस का नाश करती हैं। पर नाश तभी कर पाएंगी जब एक एक कर्मकाण्ड के मर्म को समझेंगे। विविध कलारूप हमें मनुष्य की  वृत्तियों और उसके भीतर छिपे हुए चरित्रों को समझने में मदद करती हैं, बशर्ते उस नजरिए से देखें। हर कला व साहित्य में समझने के लिए कुछ न कुछ है। हर पर्व में अपने जीवन का दर्शन दुरुस्त करने की सीख है। दैव और दैत्यवृत्ति सर्वव्यापी है। हमारे चित्त और वृत्ति की अधिष्ठात्री माता भगवती का महात्म्य यही है कि वे दैत्यवृत्ति की नाशिनी हैं। आइये विजयादशमी में हम कुछ इसी तरह की आराधना कर  लें और अपने अंदर मौजूद रावण रूपी बुराई का दरवाजा सदैव के लिये बंद कर पहले स्वयं के अंदर मौजूद रावण रूपी बुराई का दहन कर लें
06:58

नारी का सम्मान और दशहरा



रावण ने भगवान_गीधराज_जटायु के दोनों पंख काट डाले तो काल आया और जैसे ही काल आया तो भगवान_गीधराज_जटायु ने मौत को ललकार कहा,
 "सावधान ! ऐ मृत्यु ! आगे बढ़ने की प्रयास न करना मैं मृत्यु को स्वीकार करता हु, किंतु तू मुझे तब तक नहीं छू सकता जब तक मैं माँ_सीताजी की सुधि प्रभु "श्रीराम" को नहीं सुना देता मौत उन्हें छू नहीं पा रही है काँप रही है खड़ी हो कर मौत तब तक खड़ी रही, काँपती रही यही इच्छा मृत्यु का वरदान जटायु को मिला।किन्तु महाभारत के भीष्म_पितामह छह महीने तक बाणों की शय्या पर लेट करके मौत का मृत्यु की राह देखते रहे आँखों में आँसू हैं रो रहे हैं भगवान मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं !
 
कितना अलौकिक है यह दृश्य रामायण मे गिद्धराज जटायु भगवान की गोद रूपी शय्या पर लेटे हैं प्रभु "श्रीराम" रो रहे हैं और जटायु हँस रहे हैं वहाँ महाभारत में भीष्म पितामह रो रहे हैं और भगवान "श्रीकृष्ण" हँस रहे हैं भिन्नता प्रतीत हो रही है कि नहीं अंत समय में जटायु को प्रभु "श्रीराम" की गोद की शय्या मिली। किंतु भीषण पितामह को मरते समय बाण की शय्या मिली जटायु अपने कर्म के बल पर अंत समय में भगवान की गोद रूपी शय्या में प्राण त्याग रहा है प्रभु "श्रीराम" की शरण में और बाणों पर लेटे लेटे भीष्म पितामह रो रहे हैं ऐसा अंतर क्यों?




ऐसा अंतर इसलिए है कि भरे दरबार में भीष्म पितामह ने द्रौपदी की इज्जत को लुटते हुए देखा था विरोध नहीं कर पाये थे।दुःशासन को ललकार देते दुर्योधन को ललकार देते, किंतु द्रौपदी रोती रही... बिलखती रही... चीखती रही... चिल्लाती रही... लेकिन भीष्म पितामह सिर झुकाये बैठे रहे... नारी की रक्षा नहीं कर पाये.उसका परिणाम यह निकला कि इच्छा मृत्यु का वरदान पाने पर भी बाणों की शय्या मिली और जटायु ने नारी का सम्मान किया अपने प्राणों की आहुति दे दी... तो मरते समय भगवान "श्रीराम" की गोद की शय्या मिल जो दूसरों के साथ गलत होते देखकर भी आंखें मूंद लेते हैं ... उनकी गति भीष्म जैसी होती है जो अपना परिणाम जानते हुए भी औरों के लिए संघर्ष करते है उसका माहात्म्य जटायु जैसा कीर्तिवान होता है... ।

Monday, 7 October 2019

07:04

रेलवे में निजी करण की हकीकत और भविष्य की आशंकाएं






एडिटर-के सी शर्मा की रिपोर्ट
 आस पास कुछ महाज्ञानियों का जमघट इकट्ठा हो गया है जो गाहे बगाहे निजीकरण के समर्थन में खड़ा हो जाता है।
 उसका कहना है कि निजीकरण बहुत फायदेमंद होता है। अब इस संदर्भ में आप संलग्न खबर को देखिए जो इसी साल 16 जनवरी की है ब्रिटेन के प्रमुख पेपर डेली मिरर में छपी है जो कहती है कि अब ब्रिटिशर्स रेलवे का फिर से राष्ट्रीयकरण कर देने की मांग उठा रहे है। अक्सर रेलवे के निजीकरण के संदर्भ में ब्रिटेन का ही उदाहरण दिया जाता है।
 1993 में थैचर के उत्तराधिकारी जॉन मेजर ने ब्रिटिश रेलवे का निजीकरण कर दिया था
लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि निजी कम्पनियों ने 1993 में ब्रिटिश रेल के निजीकरण करते वक्त रेल यात्रियों से जो वादे किए थे वह आज तक पूरे नहीं किए  हैं।

आज की कंडीशन में ब्रिटेन की हालत यह है कि अब यात्रियों  के दबाव के कारण सरकार को कई रेलमार्गों का पुनः राष्ट्रीयकरण करने पर मजबूर होना पड़ा है।
16 मई 2018 को, ब्रिटेन के परिवहन मंत्री ने घोषणा की कि पूर्वी तट रेल लाइन को राज्य नियंत्रण के तहत निजी कंपनियों से वापस ले लिया जाए यह एक प्रमुख रेल मार्ग है जो लगभग 600 किमी लंबा है और लंदन को एडिनबर्ग से जोड़ता है।

ब्रिटेन छोड़िए अर्जेंटीना में भी यही हालत है वहाँ भी निजी कंपनियां रेलवे में मोटा माल कमाने के बाद बाद भाग खड़ी हुई है।

अब आ जाते हैं भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस पर

दिल्ली-लखनऊ रूट पर मौजूदा वक्त में 53 ट्रेन चलाई जा रही हैं.उसमे से एक ट्रेन है तेजस, इस रुट की सबसे प्रीमियम ट्रेन स्वर्ण शताब्दी है, जिससे दिल्ली से लखनऊ जाने में सफर में करीब 6.30 घंटे का वक्त लगता है. ओर तेजस को 6.20 घण्टे का वक्त लग रहा है यानी कोई चमत्कार नही कर दिया है तेजस ने, जैसा कि सरकार द्वारा बताया जा रहा है .......

वैसे चमत्कार किया है उन्होंने फेयर के क्षेत्र में !

तेजस एक्सप्रेस में एसी चेयरकार का किराया 1,125 रुपये वसूला जा रहा है जबकि स्वर्ण शताब्दी का किराया 800 से ज्यादा नही है और उसमे भी सीनियर सिटीजन ओर बच्चों को रेलवे द्वारा दी जा रही सामान्य छूट प्राप्त है लेकिन तेजस में यात्रियों को ऐसी कोई छूट प्राप्त नही है

तेजस में किराया तय करने के लिए डायनेमिक फेयर  सिस्टम लागू है. डायनेमिक फेयर सिस्टम फ्लाइट्स की बुकिंग के लिए भी लागू होता है.
दिवाली के लिए तेजस का किराया फ्लाइट के किराए से भी ज्यादा हो गया है।
  डायनेमिक फेयर सिस्टम के कारण 26 अक्टूबर के दिन तेजस का नई दिल्ली से लखनऊ का किराया 4300 से 4600 रुपये (एक्जीक्यूटिव चेयरकार) के बीच पुहंच गया है.

दरअसल प्राइवेट ऑपरेटर को सिर्फ अपने मुनाफे से मतलब होता है, उसे यात्रियों के जेब से पैसा निकालना आता है वह जानता है कि जब सबसे ज्यादा अर्जेन्सी होगी तब वह सबसे ज्यादा किराया आसानी से वसूल कर लेगा , पूरे विश्व भर रेलवे के निजीकरण के पक्ष में दी गई कोई भी दलील सच पूरी तरह से सच साबित नही हुई है।

प्राइवेट ऑपरेटर को जनता की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने से कोई मतलब नही है और न ही उसके लिए सामाजिक लक्ष्य हासिल करना कोई जिम्मेदारी होती  हैं बल्कि वह सिर्फ और सिर्फ प्रॉफिट कमाना जानता है
 और भारत में तो अभी यह शुरुआत ही है।
 ब्रिटेन का अनुभव तो यह कहता है कि जैसे रेलवे प्राइवेट ऑपरेटर के हाथ मे आया व्यस्त रूट पर किराए तीन गुना ज्यादा बढ़ा दिए गए।

2016 में यूनिवर्सिटी ऑफ हार्टफोर्डशर में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर हूल्या डेगडिविरेन अपने लेख में कहती है.......... 'कामगार संगठनों की एक परिषद टीयूसी ने ब्रिटिश रेलवे में मुसाफिरों के किराए से जुड़ा एक अध्ययन करवाया था. इससे पता चलता है कि चेम्सफोर्ड से एसेक्स होते हुए लंदन तक की 35 मिनट की रेल यात्रा का मासिक टिकट 358 पौंड का होता है. जबकि इटली में इतनी ही यात्रा के लिए 37, स्पेन में 56, जर्मनी में 95 और फ्रांस में आपको 234 पौंड चुकाने होते हैं. इन सभी देशों में रेलवे का बड़ा हिस्सा सरकार द्वारा संचालित है'

कुछ ही सालो बाद ठीक ऐसी ही हालत होगी भारत मे भी, जब यह महाज्ञानी लोगो का समूह जो निजीकरण की रट लगाए हुए हैं वह रेलवे को पूरी तरह से प्राइवेट हाथों में सौप देगा। ..........!

Sunday, 6 October 2019

19:23

एनटीपीसी विंध्यनगर का राख बंधा टूटा मची तबाही






मध्य प्रदेश के सिंगरौली एनटीपीसी विन्ध्यनगर का ऐश डेम फूटा, गया जिससे कई मबेसी बहे गए इसके अलावा आसपास रहने वाले लोगों के घरों में राखड़ युक्त मलवा। घुसने लगा है  जिससे वहां के निवासियों में हड़कंप का माहौल बना हुआ है डर के मारे लोग  परेशान होकर इधर-उधर भाग रहे हैं सूचना मिलते ही हरकत में आए प्रशासन ने तुरंत ही  बचाव कार्य  शुरू कर दिया है जिसमें एनटीपीसी के अधिकारियों सहित जिले का प्रसाशनिक  अमला भी बचाव और राहत कार्य में जुट गया है इस घटना से इलाके में स्थिति
चारो तरफ अफरा तफरी का माहौल। बताते चलें कि अभी पिछले महीने भी सिंगरौली में एस्सार पावर प्रोजेक्ट का राख बाँध टूट गया था ,जिसमे भारी तबाही मची थी।जिसके जांच के लिए एनजीटी ने सुप्रीम कोर्ट को आन रिकार्ड  दिया था अधिवक्ता अश्वनी दूबे के शिकायत पर एक टीम सिंगरौली पहुची थी।अभी वह मामला चल ही रहा था तब तक एनटीपीसी विन्ध्यनगर का ऐश डैम टूट गया।
दूसरी तरफ रिलायन्स पावर प्रोजेक्ट सासन के विस्थापित 3 दिन से ऐश डैम टूटने की आशंका सहित अन्य मांगों को।लेकर धरना चल रहा है जिस पर प्रशासन कोई सुधि लेने को तैयार नहीं था प्रशासन का यही धूल मूल रवैया लोगों के जान से खिलवाड़ कर रहा है।