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Sunday, 25 July 2021

18:13

फालुन दाफा - दुनियाभर में लोकप्रिय किन्तु चीन में शोषण का शिकार

20 जुलाई को फालुन दाफा के चीन में दमन के बाईस वर्ष – जानिये भारत के लिए यह प्रासंगिक क्यों है  
फालुन दाफा साधना पद्धति का अभ्यास विश्व में 100 से अधिक देशों में 10 करोड़ से अधिक लोगों द्वारा किया जा रहा है। लेकिन दुःख की बात यह है कि चीन, जो फालुन दाफा की जन्म भूमि है, वहां 20 जुलाई 1999 से इसका दमन किया जा रहा है, जो आज तक जारी है। 20 जुलाई के दिन को फालुन दाफा अभ्यासी दुनियाभर में विरोध दिवस के रूप में मनाते हैं और शांतिपूर्वक प्रदर्शन और कैंडल लाइट विजिल द्वारा लोगों को चीन में हो रहे बर्बर दमन के बारे में अवगत कराते हैं। 
फालुन दाफा (जिसे फालुन गोंग भी कहा जाता है) बुद्ध और ताओ विचारधारा पर आधारित एक प्राचीन साधना अभ्यास है जिसे श्री ली होंगज़ी द्वारा 1992 में चीन में सार्वजनिक किया गया। फालुन दाफा और इसके संस्थापक, श्री ली होंगज़ी को दुनियाभर में 1500 से अधिक पुरस्कारों और प्रशस्तिपत्रों से नवाज़ा गया है। 
चीन में फालुन गोंग का दमन
इसके स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक शिक्षाओं के कारण फालुन गोंग चीन में इतना लोकप्रिय हुआ कि 1999 तक करीब 7 से 10 करोड़ लोग इसका अभ्यास करने लगे। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की मेम्बरशिप उस समय 6 करोड़ ही थी। चीनी कम्युनिस्ट शासकों ने फालुन गोंग की शांतिप्रिय प्रकृति के बावजूद इसे अपनी प्रभुसत्ता के लिए खतरा माना और 20 जुलाई 1999 को इस पर पाबंदी लगा कर कुछ ही महीनों में इसे जड़ से उखाड़ देने की मुहीम चला दी, जो आज तक जारी है। 
चीन में अवैध मानवीय अंग प्रत्यारोपण अपराध
यह अविश्वसनीय लगता है, किन्तु चीन में अंगों के प्रत्यारोपण के लिए अंग न केवल मृत्युदण्ड प्राप्त कैदियों से आते हैं, बल्कि बड़ी संख्या में कैद फालुन गोंग अभ्यासियों से आते हैं। स्वतंत्र जाँच द्वारा यह प्रकाश में आया है कि चीनी शासन, सरकारी अस्पतालों की मिलीभगत से, कैदियों के अवैध मानवीय अंग प्रत्यारोपण के अपराध में संग्लित है। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए देखें: www.endtransplantabuse.org
भारत में भी 20 जुलाई को मनाया जाएगा विरोध दिवस
दुनिया भर के फालुन दाफा अभ्यासियों की भांति भारत के फालुन दाफा अभ्यासी भी 20 जुलाई को शांतिपूर्वक प्रदर्शन और कैंडल लाइट विजिल का आयोजन करते हैं। क्योंकि इस लॉक डाउन अवस्था में बाहरी गतिविधि नहीं की जा सकती, भारत के फालुन दाफा अभ्यासी इस वर्ष सोशल और प्रिंट मीडिया द्वारा चीन में हो रहे दमन के बारे में लोगों को अवगत करा रहे हैं। 
भारत में सन 2000 से फालुन दाफा का अभ्यास सभी प्रमुख शहरों में किया जा रहा है। यदि आप भी इस अभ्यास को सीखने के इच्छुक हैं तो www.learnfalungong.in पर इसके नि:शुल्क वेबिनार के लिए रजिस्टर कर सकते हैं। फालुन दाफा के बारे में अधिक अधिक जानकारी आप www.falaundafa.org पर पा सकते हैं।    


यह भारत के लिए प्रासंगिक क्यों है?
पिछले कुछ समय से भारत और चीन के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। भारत पर दबाव बनाने के लिये चीन मसूद अजहर समर्थन, अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख बॉर्डर विवाद आदि का इस्तेमाल करता रहा है। भारत के कड़े रुख और चीनी सामान के बायकाट की मुहीम ने चीन को भारत की ताकत का अंदाजा लगा दिया है। 
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की धारणाएं और नीतियां उन सभी चीजों का खंडन करती हैं जिनका भारत जैसी एक प्राचीन संस्कृति और आधुनिक लोकतंत्र प्रतिनिधित्व करता है। भारत के पास चीन को सिखाने के लिये बहुत कुछ है। भारत को चीन में तिब्बत बोद्ध, वीगर मुस्लिम और फालुन गोंग पर हो रहे घोर मानवाधिकार अपराधों की निंदा करनी चाहिए। यही सोच भारत को विश्वगुरु का दर्जा दिला सकती है।
17:18

Falun Dafa पुदुचेरी अनाथालय में विश्व-प्रसिद्ध फालुन दाफा ध्यान अभ्यास कराया गया


फालुन दाफा भारत — पुडुचेरी के तटीय शहर में, रूसी मूल की एक बुजुर्ग महिला, तातिआना, रोज समुद्र तट पर फालुन दाफा अभियास करती हैं। उत्सुक लोग अक्सर उससे इस आत्म-सुधार आध्यात्मिक प्रणाली के बारे में अधिक जानकारी मांगते है। फालुन दाफा दुनिया भर में 10 करोड़ से अधिक लोगों द्वारा अभ्यास किया जाता है। 

कैथोलिक नन मोली ने तातिआना को अपने पुदुचेरी से 160 किलोमीटर दूर कराईकल शहर में स्थित अपने अनाथालय में आमंत्रित किया। वह अनाथ बच्चों को फालुन दाफा के "सत्य, करुणा और सहनशीलता" के सिद्धांतों का उपहार देना चाहती थी और मेडिटेशन सीखना चाहती थी। 

फालुन दाफा, मन और शरीर का प्राचीन साधना अभ्यास, पहली बार चीन में मई 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा आरम्भ किया गया था। श्री होंगज़ी को दुनियाभर में 5,000 से अधिक पुरस्कारों और प्रशस्तिपत्रों से नवाज़ा गया है और नोबेल शांति पुरस्कार व स्वतंत्र विचारों के लिए सखारोव पुरस्कार के लिए भी मनोनीत किया जा चुका है। लेकिन दुर्भाग्य से, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने फालुन दाफा की शांतिप्रिय प्रकृति के बावजूद इसे अपनी प्रभुसत्ता के लिए खतरा माना और जुलाई 1999 में इस मेडिटेशन पर पाबंदी लगा दी। पिछले 21 वर्षों से फालुन दाफा अभ्यासियों को चीन में यातना, हत्या, ब्रेनवाश, कारावास, बलात्कार, जबरन मज़दूरी, दुष्प्रचार, निंदा, लूटपाट, और आर्थिक अभाव का सामना करना पड रहा है। अत्याचार की दायरा बहुत बड़ा है और मानवाधिकार संगठनों द्वारा दर्ज़ किए गए मामलों की संख्या दसियों हजारों में है।

12 फरवरी को, बैंगलोर के फालुन दाफा स्वयंसेवक कराइकल में मौली के अनाथालय गए। उन्होंने बच्चों को फालुन दाफा अभियास सिखाया। उन्होंने पुडुचेरी के शिक्षा निदेशक श्री रुद्र गौड से भी मुलाकात की। साम्यवादी चीन दुआर फालुन दाफा उत्पीड़न के बारे में शिक्षा निदेशक को जानकारी थी और अपनी चिंताओं को व्यक्त किया था।

Saturday, 6 March 2021

20:38

बच गई पाकिस्तान की सरकार:इमरान खान ने हासिल किया विश्वास मत tap news india

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इस्लामाबाद. पाकिस्तान में इमरान खान आखिरकार अपनी सरकार बचाने में कामयाब रहे। फ्लोर टेस्ट के दौरान नेशनल असेंबली में इमरान खान के पक्ष में 178 वोट पड़े। 170 वोट की जरूरत थी। इस बीच, विपक्ष के सांसदों और नेताओं पर असेंबली के बाहर जमकर हंगामा हुआ। फ्लोर टेस्ट का बायकॉट करके असेंबली के बाहर प्रदर्शन कर रहे विपक्ष के नेताओं पर जूते फेंके गए। मुस्लिम लीग की नेता मरियम नवाज को इमरान खान के समर्थकों ने हमला कर दिया। उन्हें लात और घूसे से मारा गया।
इमरान ने कहा, चुनाव सुधार की ओर बढ़ रहे
विश्वास मत हासिल करने के बाद इमरान खान ने करीब 45 मिनट तक सदन को संबोधित किया। कहा,' पाकिस्तान के विकास को कोई नहीं रोक सकता है। हम चुनाव सुधार के दिशा में भी काम कर रहे हैं। अब विदेश में रहने वाले पाकिस्तानी भी वोट कर सकेंगे। इसके अलावा अब हम इलेक्ट्रॉनिक मशीन से वोटिंग कराने पर काम कर रहे हैं। ऐसा होने पर जो हारेगा उसे अपनी हार माननी पड़ेगी।
विपक्ष ने फ्लोर टेस्ट का बायकॉट किया
असेंबली में विपक्ष के सदस्यों ने फ्लोर टेस्ट का बायकॉट किया। वोटिंग से पहले सीनेट चेयरमैन ने विपक्ष के सदस्यों को असेंबली में आने के लिए 5 मिनट का मौका दिया था, लेकिन कोई सदस्य नहीं पहुंचा। इसके बाद असेंबली के सारे दरवाजे बंद करके वोटिंग हुई। विदेश मंत्री महमूद कुरैशी ने संसद में विश्वास प्रस्ताव पेश किया था। विश्वास मत हासिल करने के लिए इमरान सरकार को 172 वोट चाहिए थे, लेकिन उन्हें 178 वोट मिले। मतलब इमरान ने 6 वोट ज्यादा हासिल किया। नेशनल असेंबली के स्पीकर असद कैसर ने इसका ऐलान किया। कहा, जब इमरान खान सत्ता में आए थे तो उनके पास 176 वोट थे, लेकिन आज 178 हो गए हैं।
विपक्ष ने कहा- धोखेबाज हैं इमरान
विपक्ष के नेता रहमान ने दावा किया कि राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने शनिवार को जो सेशन बुलाया है, उसका मतलब है कि PM इमरान खान ने बहुमत का विश्वास खो दिया है। इसलिए उन्हें विश्वास मत हासिल करने की जरूरत है। राष्ट्रपति नेशनल असेंबली के सत्र को बुलाने की बात करते हैं, तो यह विपक्ष के रुख को मजबूत करता है। रहमान ने कहा कि इस सेशन का कोई राजनीतिक महत्व नहीं होगा। इमरान सरकार को देश की प्रतिनिधि सरकार नहीं माना जाएगा।
सीनेट चुनाव में वित्त मंत्री हारे
हाल में हुए सीनेट चुनाव में विपक्षी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के उम्मीदवार पूर्व प्रधान मंत्री सैयद यूसुफ रजा गिलानी ने पाकिस्तान के वित्त मंत्री अब्दुल हफीज शेख को हरा दिया। यह नतीजा इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि उनकी पार्टी और उसके सहयोगी नेशनल असेंबली में बहुमत में हैं। इसका मतलब यह है कि कुछ सदस्यों या सहयोगियों ने उनके पक्ष में वोट नहीं किया।
20:35

पर्सीवरेंस रोवर लाल ग्रह पर पहली बार 21 फीट तक चला मिट्‌टी पर पहियों के निशान बने NASA ने तस्वीर साझा की

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वॉशिंगटन. अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA की ओर से मंगल ग्रह पर भेजा गया पर्सीवरेंस रोवर शुक्रवार को पहली बार अपनी लैंडिंग वाली जगह से आगे बढ़ा। करीब 21.3 फीट तक टेस्ट ड्राइव की। इससे मंगल की मिट्‌टी पर उसके पहियों के निशान बन गए। NASA ने इन निशानों की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है।
NASA ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इस टेस्ट ड्राइव में हमने पर्सीवरेंस के सभी सिस्टम, सबसिस्टम और उपकरणों की जांच की। उन्होंने बताया कि पर्सीवरेंस ने जहां से अपना मिशन शुरू किया, अब उसे 'ऑक्टिविया ई बटलर लैंडिंग' नाम दिया गया है। यह नाम एक साइंस फिक्शन ऑथर के नाम पर रखा गया है।
आने वाले दिनों में रोज 200 मीटर का सफर तय करेगा
बयान में कहा गया कि रोवर जब अपने साइंस गोल के लिए मार्स पर काम करना शुरू करेगा, तो हमें उम्मीद है कि यह रेगुलर 656 फीट यानी 200 मीटर का सफर तय करेगा। पर्सीवरेंस रोवर मोबिलिटी टेस्टबेड इंजीनियर अनायस जारिफायन ने कहा कि यह हमारे लिए पहला अनुभव था। रोवर के 6 पहिए बढ़िया काम कर रहे हैं। यह हमें अगले 2 साल तक साइंस की दुनिया में ले जाने में कामयाब होगा।
33 मिनट तक चली प्रोसेस
पर्सीवरेंस को चलाने और टेस्टिंग की यह प्रोसेस करीब 33 मिनट तक चली। पहले वह 13 फीट चला फिर 150 डिग्री लेफ्ट टर्न लेकर वह करीब 8 फीट पीछे आया। अब वह अपने टेम्परेरी पार्किंग स्पेस में है।
18 फरवरी को मार्स पर लैंड हुआ था
पर्सीवरेंस मार्स रोवर 18-19 फरवरी की दरम्यानी रात मंगल पर जीवन की तलाश के लिए उतरा था। इसने भारतीय समय के अनुसार रात करीब 2 बजे मार्स की सबसे खतरनाक सतह जजीरो क्रेटर पर लैंडिंग की थी। इस सतह पर कभी पानी हुआ करता था। NASA ने दावा किया है कि यह अब तक के इतिहास में रोवर की मार्स पर सबसे सटीक लैंडिंग है। पर्सीवरेंस रोवर लाल ग्रह से चट्‌टानों के नमूने भी लेकर आएगा।
पानी की खोज और जीवन की पड़ताल करेगा
पर्सीवरेंस और इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर मंगल ग्रह पर कार्बन डाईऑक्साइड से ऑक्सीजन बनाने का काम करेंगे। यह जमीन के नीचे जीवन के संकेतों के अलावा पानी की खोज और उनसे संबंधित जांच भी करेगा। इसका मार्स एनवॉयर्नमेंटल डायनामिक्स एनालाइजर (MEDA) मंगल ग्रह के मौसम और जलवायु का अध्ययन करेगा।
पर्सीवरेंस रोवर में 23 कैमरे
मंगल ग्रह के लेटेस्ट वीडियो और आवाज रिकॉर्ड करने के लिए पर्सीवरेंस रोवर में 23 कैमरे और दो माइक्रोफोन लगाए गए हैं। रोवर के साथ दूसरे ग्रह पर पहुंचा पहला हेलिकॉप्टर Ingenuity भी है। इसके लिए पैराशूट और रेट्रोरॉकेट लगे हैं। इसके जरिए ही स्मूद लैंडिंग हो सकी। अब रोवर दो साल तक जजीरो क्रेटर को एक्सप्लोर करेगा।
रोवर का वजन 1000 किलोग्राम
पर्सीवरेंस रोवर 1000 किलोग्राम वजनी है। यह परमाणु ऊर्जा से चलेगा। पहली बार किसी रोवर में प्लूटोनियम को ईंधन के तौर पर उपयोग किया जा रहा है। यह रोवर मंगल ग्रह पर 10 साल तक काम करेगा। इसमें 7 फीट का रोबोटिक आर्म, 23 कैमरे और एक ड्रिल मशीन है। वहीं, हेलिकॉप्टर का वजन 2 किलोग्राम है।

Tuesday, 23 February 2021

17:59

न्यूजीलैंड में बिना तारों के होगी बिजली सप्लाई

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ऑकलैंड.बिना तारों के बिजली की सप्लाई की कल्पना साकार होने वाली है। आने वाले महीनों में न्यूजीलैंड की एक फर्म एमरोड, ऊर्जा वितरण कंपनी पावरको और टेस्ला मिलकर इसका ट्रायल करने जा रहे हैं। ये तीनों ऑकलैंड उत्तरी द्वीप में स्थित एक सोलर फार्म से कई किमी दूरदराज स्थित बस्तियों में बीम एनर्जी के जरिए बिजली पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं।
इस टेक्नोलॉजी के तहत माइक्रोवेव की बहुत पतली बीम के रूप में बिजली पहुंचाई जाएगी। पावर बीमिंग की इस प्रक्रिया का पहले भी इस्तेमाल किया जा चुका है, लेकिन यह सेना से जुड़े काम और अंतरिक्ष से जुड़े प्रयोगों तक ही सीमित था। 1975 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने माइक्रोवेव के जरिेए 1.6 किमी दूरी तक 34.6 किलोवॉट बिजली भेजने का रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि इसका इस्तेमाल व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं किया गया।
शुरुआत में कम दूरी तक बिजली भेजी जाएगी
एमरोड कंपनी के फाउंडर ग्रेग कुशनिर ने बताया कि हम शुरुआत में 1.8 किमी तक कुछ किलोवॉट बिजली भेजेंगे। धीरे-धीरे दूरी और पावर में बढ़ोतरी करेंगे। उन्होंने बताया कि इससे दूरदराज इलाकों में बिजली भेजने पर तारों के भारी भरकम खर्च से निजात मिलेगी।
कुशनिर के मुताबिक बिना तारों के बिजली पहुंचाने की दो और टेक्नोलॉजी पर उनकी कंपनी काम कर रही है। इनमें से एक रिले है, ये निष्क्रिय उपकरण है। यह लैंस की तरह काम करता है और माइक्रोबीम को रीफोकस करके कम से कम ट्रांसमिशन लॉस के जरिए बिजली पहुंचाता है। दूसरे मेटामटेरियल्स हैं। ये पहले से ही क्लोकिंग डिवाइस में लगाए जाते रहे हैं। ये युद्धपोत और लड़ाकू विमान को रडार से बचने में मदद करते हैं। पर साथ ही ये विद्युत चुंबकीय तरंगों को बिजली में बेहतर तरीके से बदलने में सक्षम हैं।
एमरोड के अलावा सिंगापुर की ट्रांसफरफाई, अमेरिका की पावरलाइट टेक्नोलॉजी भी हवा से बिजली भेजने की योजना पर काम कर रही हैं। जापान की मित्सुबिशी भी सोलर पैनल लगे उपग्रहों से बिजली सप्लाई की संभावना तलाश रही है।
इंसानों को जोखिम नहीं, एहतियात के लिए बीम को लेजर से कवर देंगे
हवा में बिजली सप्लाई के जोखिम पर कुशनिर का कहना है कि इन बीम्स का घनत्व काफी कम होगा। इसलिए इंसान और जानवरों पर इसका बहुत असर नहीं होगा। फिर भी एहतियात के लिए इन बीम्स को एक तरह से लेजर के पर्दे से कवर कर दिया जाएगा। लंदन के इंपीरियल कॉलेज की स्टडी के मुताबिक इंसान या अन्य डिवाइसों को इससे कोई खतरा नहीं होगा।
17:57

दुबई एयरपोर्ट पर अब आपका चेहरा ही पासपोर्ट होगा, बायोमैट्रिक टेक्नोलॉजी से पैसेंजर की पहचान होगी

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दुबई.दुबई एयरपोर्ट पर अब पैसेंजर्स को सफर के लिए लंबी लाइनों से राहत मिल जाएगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने लेटेस्ट फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इसके अलावा आंखों की पुतलियों (iris) के जरिए भी पैसेंजर का आईडेंटिफिकेशन किया जाएगा। दरअसल, इन दोनों के इस्तेमाल से ही पहचान पूरी की जाएगी। एयरपोर्ट एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, उसने पूरे प्रॉसेस को बायोमैट्रिक मोड में पूरा करने का फैसला किया है।
बायोमैट्रिक पैसेंजर जर्नी
इस प्रोजेक्ट को बायोमैट्रिक पैसेंजर जर्नी नाम दिया गया है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने कहा- इस प्रोग्राम से पैसेंजर्स को सहूलियत मिलेगी। कोविड-19 के दौर में कॉन्टैक्ट फ्री जर्नी जरूरी थी। अब पैसेंजर्स एयरलाइन स्टाफ के संपर्क में नहीं आएंगे। इसके लिए 122 स्मार्ट गेट्स बनाए गए हैं। किसी भी गेट पर 5 से 9 सेकंड्स ही लगेंगे।
दुबई एयरपोर्ट के डायरेक्टर मेजर जनरल मोहम्मद अहमद अल मायरी ने कहा- हमने अमीरात एडमिनिस्ट्रेशन और दूसरे सहयोगियों की मदद से यह प्रॉसेस शुरू किया है। एक स्मार्ट टनल भी बनाई गई है। हम फ्यूचर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इसलिए कर रहे हैं, ताकि पैसेंजर्स को एयरपोर्ट पर किसी तरह की दिक्कत न हो। फिलहाल, हर रोज तीन हजार पैसेंजर्स इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, पुराना तरीका भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह पैसेंजर्स पर डिपेंड करता है कि वो कौन सा तरीका प्रॉसेस चुनते हैं।
ऐसा होगा प्रॉसेस
पैसेंजर जब दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेगा तो फेस और आईरिस रिकग्निशन के जरिए चेक इन पर उसकी पहचान होगी। यह एक बार ही होगा और भविष्य के लिए डेटा कलेक्ट हो जाएगा। इसके बाद जितने भी स्मार्ट गेट्स से वह गुजरेगा, उन सभी पर बायोमैट्रिक टेक्नोलॉजी का डेटा मैच होगा और गेट खुलते जाएंगे। हालांकि, जेब में पासपोर्ट होना जरूरी होगा। बिजनेस लाउंज में जाने के लिए बोर्डिंग पास दिखाने की जरूरत नहीं होगी, फेस रिकग्निशन से गेट खुल जाएंगे और पैसेंजर यहां पहुंच सकेगा।
17:56

मंगल ग्रह से आई आवाज

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वॉशिंगटन.अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) ने मार्स यानी मंगल ग्रह की पहली ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी की। 10 सेकंड की इस ऑडियो क्लिप में बहुत मामूली आवाज है। नासा के मुताबिक, यह उसके पर्सीवरेंस रोवर के उतरने के बाद वहां मौजूद धूल और मिट्टी पर पड़े दबाव की वजह से पैदा हुई। नासा ने इसके साथ ही लाल ग्रह पर पर्सीवरेंस रोवर की लैंडिंग का वीडियो भी जारी किया है। इस रोवर ने गुरुवार को मंगल ग्रह पर लैंडिंग की थी।
लैंडिग के बाद माइक्रोफोन ने काम नहीं किया था
मीडिया रिपोर्ट्स में नासा के हवाले से कहा गया है कि गुरुवार को जब पर्सीवरेंस ने मार्स पर लैंडिंग की थी उस दौरान इसके माइक्रोफोन ने काम करना अचानक बंद कर दिया था। यही वजह है कि लैंडिंग के दौरान का इसका ऑडियो सामने नहीं आ सका था। हालांकि, इसके बाद माइक्रोफोन ने काम करना शुरू कर दिया और अब इसकी पहली क्लिप नासा ने जारी की है।
मिशन के कैमरा और माइक्रोफोन सेक्शन इंजीनियर डेव ग्रुएल ने कहा- 10 सेकंड के इस क्लिप में बहुत धीमी और मामूली आवाज सुनी जा सकती है, लेकिन रिसर्च के लिहाज से यह बेहद कीमती है।
वीडियो क्लिप भी जारी
ऑडियो के साथ ही नासा ने एक लैंडिंग टाइम (टच डाउन) वीडियो जारी किया है। 3 मिनट 25 सेकंड के इस वीडियो में तीन फ्रेम हैं। इसमें दिखता है कि रोवर ने कैसे लैंडिंग की। हीट शील्ड और पैराशूट भी नजर आते हैं। इसी वीडियो में नासा के स्टाफ की खुशी के पल भी कम्पाइल किए गए हैं। नासा ने कहा- यह इतिहास में पहली बार हुआ जब मार्स पर लैंडिंग का वीडियो और तस्वीरें ली गई हैं। हम इनका अध्ययन शुरू कर चुके हैं।
रोवर बिल्कुल सही हालत में
पर्सीवरेंस की मिशन मैनेजर जेसिका सैमुअल्स ने कहा- अब तक सभी चीजें वैसी ही हैं, जैसी हम चाहते थे। यह बिल्कुल हमारी उम्मीदों के मुताबिक ही काम कर रहा है। अब हम जल्द ही इसके साथ मौजूद हेलिकॉप्टर की पहली उड़ान पर फोकस करेंगे। फिलहाल, शुरुआती तैयारियां की जा रही हैं।
17:54

अब मुस्लिम सांसदों से भी नहीं मिल सकेंगे इमरान खान

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कोलंबो.पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान मंगलवार को दो दिन के श्रीलंका दौरे पर कोलंबो पहुंचे। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला श्रीलंका दौरा है। हालांकि, श्रीलंका की इस पहली ही यात्रा में इमरान की किरकिरी हो रही है। एक हफ्ते में दूसरी बार श्रीलंका की गोटबाया राजपक्षे सरकार ने उन्हें झटका दिया। पिछले हफ्ते श्रीलंकाई संसद में उनके भाषण का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था। अब श्रीलंका के मुस्लिम सांसदों से मीटिंग के प्रोग्राम को शेड्यूल से हटा दिया गया है।
इमरान के शेड्यूल के मुताबिक, उन्हें श्रीलंका मुस्लिम कांग्रेस के लीडर रऊफ हकीम और ऑल सीलोन मक्कल कांग्रेस के लीडर रिशाद बाथीउद्दीन से मुलाकात करनी थी। इस मीटिंग को श्रीलंकाई सरकार ने रद्द कर दिया है।
दो नहीं तीन झटके मानिए
पाकिस्तान के ARY टीवी चैनल के मुताबिक, श्रीलंका सरकार ने एक हफ्ते में इमरान के तीन कार्यक्रम रद्द किए। पहला- संसद में होने वाला भाषण टाला। दूसरा- मुस्लिम सांसदों से मुलाकात भी नहीं हो सकेगी। तीसरा- स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स भी नहीं जा सकेंगे। आखिरी दो कार्यक्रमों को कथित तौर पर सुरक्षा का हवाला देकर टाला गया है।
हकीकत क्या है
सच्चाई ये है कि श्रीलंका में लंबे वक्त से मुस्लिम विरोधी भावनाएं हैं। यहां बौद्ध समुदाय की संख्या सबसे ज्यादा है। पिछले दिनों यहां के बौद्ध समुदाय ने मस्जिदों में जानवरों की कुर्बानी का विरोध किया। इस पर रोक के लिए रैलियां निकाली गईं। कोविड-19 के दौर में आरोप लगा कि महामारी से मारे गए मुस्लिमों के शव दफनाने के बजाए जलाए जा रहे हैं। इमरान ने सार्वजनिक तौर पर इस मुद्दे को उठाया और इसका विरोध किया।
राजपक्षे सरकार की आशंका
इमरान ने अफगानिस्तान दौरे पर मुस्लिम कार्ड खेला था। श्रीलंकाई सरकार को आशंका है कि वे इस दौरे पर भी ऐसा कर सकते हैं। इसलिए हर उस प्रोग्राम को इमरान के शेड्यूल से हटा दिया गया, जिससे श्रीलंका में सवाल उठ सकते हैं। संसद में भाषण को तो साफ तौर पर इसलिए रद्द किया गया, क्योंकि इससे भारत नाराज हो सकता था। आशंका थी कि इमरान वहां कश्मीर का मुद्दा उठा सकते हैं। भारत ने कोविड-19 के दौर में श्रीलंका की काफी मदद की। हाल ही में करीब पांच लाख वैक्सीन वहां मुफ्त भेजी गईं।
35 साल बाद कोलंबो में इमरान
इमरान खान 1986 में आखिरी बार श्रीलंका गए थे। उस वक्त वे पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के कप्तान थे। इस दौरे में उन्होंने श्रीलंकाई अंपायरों पर पक्षपात का आरोप लगाया था।

Sunday, 21 February 2021

17:24

अमेरिका में घरों के पंखों पर भी जमी बर्फ की चादर

 deepak tiwari 
न्यूयॉर्क.दुनिया की सुपरपावर अमेरिका में लोगों की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। कोरोना के बाद अब यहां ठंड ने लोगों को बदहाल कर दिया है। सबसे खराब हालात टेक्सास में है। यहां घर के अंदर तक बर्फ जम गई है। पंखों पर बर्फ की परतें चढ़ने लगी हैं। ठंड के चलते लोग घर में और कारों में दम तोड़ रहे हैं।
खाने के लिए लग रही लंबी लाइनें
टेक्सास में पानी और बिजली का संकट है। यहां अब सरकार की तरफ से लोगों को खाने के पैकेट बांटे जा रहे हैं। इसके लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। बर्फबारी के चलते बिजली के ग्रिड फेल हो गए। इस कारण राज्य के बड़े हिस्से में 5 दिन तक बिजली, गैस सप्लाई ठप रही।
जमा देने वाली सर्दी में हीटर नहीं चले। लोगों ने ठंड से बचने के लिए कमरों और कारों में पहुंचकर खुद को पैक कर लिया। इससे कार्बन मोनो ऑक्साइड बढ़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। कुछ की जान हाइपोथर्मिया से गई। ओहियो समेत ऐसी कई घटनाओं में अब तक 58 लोगों की मौत हो चुकी है।
टेक्सास में भीषण सर्दी से पानी सप्लाई के पाइप फट गए, जिससे राज्य की 2.9 करोड़ में से आधी आबादी पानी के संकट से जूझ रही हैं। हूस्टन के एक स्टेडियम के बाहर पानी की बोतल पाने के लिए सैकड़ों लोगों की लाइन लग रही है।

Saturday, 20 February 2021

15:37

दुनिया में कोरोना का कहर जारी deepak tiwari

फ्रांस में एक बार फिर संक्रमण और मौतों का आंकड़ा बढ़ने लगा है। शनिवार को कुल मिलाकर 21 हजार 231 मामले सामने आए। इसी दौरान 328 संक्रमितों की मौत भी हो गई। शुक्रवार को 20 हजार 701 मामले सामने आए थे और 310 लोगों की मौत हो गई थी।
एक ही दिन में अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या भी 10 हजार से ज्यादा बढ़ी। हेल्थ मिनिस्ट्री ने माना है कि पिछले हफ्ते संक्रमितों और मरने वालों की संख्या बढ़ी है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि अब नेशनल लॉकडाउन नहीं लगाया जाएगा। फ्रांस में दो महीने पहले तक हर दिन 50 हजार से ज्यादा संक्रमित पाए जा रहे थे। सरकार ने सख्त लॉकडाउन से हालात सुधारे।
अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में पाबंदियां जारी रहेंगी
वैक्सीनेशन के बीच दुनिया के कई देशों में एक बार फिर से कोरोना मरीजों के बढ़ने की रफ्तार तेज होने लगी है। इसको देखते हुए अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको ने देश में 21 मार्च तक पाबंदियां बढ़ा दी हैं। इसके मुताबिक, यहां रहने वाले लोग गैर-जरूरी कामों के लिए ट्रैवल नहीं कर पाएंगे। लोगों को यात्रा की वजह बताना जरूरी होगा। अब तक ये पाबंदी 21 फरवरी तक ही थीं।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ऐलान किया है कि जुलाई तक हर अमेरिकी को वैक्सीन का डोज लग जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए पूरी तरह से तैयार है। इस पर फाइजर ने कहा है कि वह हर हफ्ते अमेरिका को एक करोड़ डोज देने के लिए तैयार है। अमेरिका में अब तक सबसे ज्यादा 5.70 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। दूसरे नंबर पर चीन है, जहां 4 करोड़ लोगों तक वैक्सीन पहुंच चुकी है। यूरोपियन यूनियन में अब तक 2.45 करोड़ और भारत में 1.04 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई गई है।
अब तक 11.12 करोड़ मरीज मिले
पूरी दुनिया में अब तक 11 करोड़ 12 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 24 लाख 62 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 करोड़ 61 लाख लोग ठीक हो चुके हैं। 2 लाख 26 लाख मरीज ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है। दुनिया के 19 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
कोरोना अपडेट्स
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) को शक है कि चीन के वुहान मार्केट में बेचे गए फैरेट बैजर्स और खरगोश से कोरोना वायरस इंसानों में फैला। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया। हालांकि, बाजार में ऐसे और अन्य जानवरों के सप्लायर की जांच की जा रही है। फिलहाल एक्स्पर्ट्स वुहान मार्केट में कानूनी या अवैध रूप से बेचे जाने वाले जीवित और मृत जानवरों की सूची तैयार कर रहे हैं।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भरोसा दिलाया है कि उनके देश में सरप्लस वैक्सीन हुई तो वे इसे गरीब देशों को जरूर देंगे। जॉनसन का यह बयान अहम है। सिर्फ दो दिन पहले UN चीफ एंतोनिया गुटेरेस ने साफ कहा था कि अमीर देशों के पास वैक्सीन का जरूरत से ज्यादा स्टॉक मौजूद है और यह बाकी दुनिया खासकर गरीब देशों के लिए खतरे का संकेत है। इस बयान के डिप्लोमैटिक मायने भी हैं। रूस और चीन वैक्सीन डिप्लोमैसी के जरिए कुछ देशों में दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। चीन तो गरीब अफ्रीकी देशों को टारगेट कर रहा है।
ग्रीस सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर ब्रिटेन के नागरिक बतौर टूरिस्ट उनके देश में आना चाहते हैं तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसके लिए उनके पास वैक्सीन पासपोर्ट होना जरूरी होगा। वैक्सीन पासपोर्ट का अर्थ यह है कि टूरिस्ट्स को ग्रीस पहुंचने से पहले ही ऑनलाइन डॉक्यूमेंट्स के जरिए ये बताना होगा कि उन्होंने वैक्सीनेशन करा लिया है। इसमें डोजेस की जानकारी भी देना होगी। इसके पहले डेनमार्क और स्वीडन भी यह कदम उठा चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव (UN secretary general) एंतोनियो गुटेरेस के मुताबिक दुनिया में 130 देश हैं, जिनके पास कोविड-19 वैक्सीन का एक सिंगल डोज तक नहीं पहुंचा। यह बहुत बड़ी नाइंसाफी है। सिक्योरिटी काउंसिल की मीटिंग के दौरान गुटेरेस ने कहा- बहुत दुख और गुस्सा है कि हम दुनिया के 130 देशों को महामारी से निपटने के लिए वैक्सीन का एक डोज तक नहीं दे सके। वहीं, 10 देश ऐसे हैं जहां 75% वैक्सीनेशन प्रॉसेस पूरा हो चुका है।
15:33

ब्रिटेन के प्रिंस खास से आम हुए जाने कैसे

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​​​​​​​लंदन.ब्रिटेन के प्रिंस हैरी और उनकी पत्नी डचेस ऑफ ससेक्स मेगन मर्केल से सभी राॅयल टाइटल वापस ले लिए गए हैं। शुक्रवार को ​महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने इसकी घोषणा की। प्रिंस हैरी को ब्रिटेन की राॅयल मरीन का कैप्टन जनरल बनाया गया था। वे अब बकिंघम पैलेस की सभी राजशाही सुविधाओं से दूर एक आम नागरिक की तरह जीवन बिताएंगे। शाही जोड़े ने एक साल पहले ही बंकिंघम पैलेस छोड़ा था।
महारानी एलिजाबेथ ने कहा कि सोशल सर्विस के साथ हैरी का आने वाली जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को जारी रखना संभव नहीं है। ऐसे में उन्हें पैलेस की जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाता है।
दूसरे बच्चे के पिता बनने वाले हैं प्रिंस हैरी
प्रिंस हैरी और उनकी पत्नी डचेस ऑफ ससेक्स मेगन मर्केल के घर जल्द ही दूसरा बच्चा आने वाला है। वैलेंटाइन डे पर इस बात का ऐलान किया गया। उनका पहले से एक साल का बेटा है, जिसका नाम आर्ची है। इस घोषणा के बाद से बकिंघम पैलेस में खुशियों का माहौल है। खुद महारानी एजिलाबेथ द्वितीय और हैरी के पिता प्रिंस चा‌र्ल्स इस घोषणा के बाद बेहद खुश हैं।
जनवरी 2020 में शाही परिवार से अलग हुए थे प्रिंस हैरी
​​​​​​​शाही दंपती ने 8 जनवरी 2020 को यह एलान कर सबको चौंका दिया था कि वे शाही जिम्मेदारियां छोड़कर आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहते हैं।​​​​​​​​​​​​​​ इसके बाद प्रिंस हैरी और उनकी पत्नी मेगन की शाही जिम्मेदारियां 31 मार्च 2020 को आधिकारिक तौर पर खत्म हो गई थी।
प्रिंस हैरी ने अपना मीडिया वेंचर लॉन्च किया
प्रिंस हैरी और मेगन मर्केल ​​​​​​​फिलहाल कैलिफोर्निया में रह रहे हैं। दोनों यहीं अपने दूसरे बच्चे का इंतजार कर रहे हैं। लंदन छोड़ने के बाद शाही जोड़े ने अपना एक मीडिया वेंचर भी लॉन्च किया है। इस हफ्ते दोनों ने ओपरा विन्फ्रे के साथ एक इंटरव्यू में दिखेंगे। इसकी घोषणा खुद हैरी और मेगन ने की थी।

Tuesday, 13 October 2020

13:04

शोधकर्ताओं का दावा नोट और फोन स्क्रीन पर इतने दिनों तक रह सकता है कोरोना वायरस deepak tiwari


लंदन। कोरोना वायरस को लेकर पिछले 8 माह से लगातार शोध चल रहे है। वस्तुओं पर कितने दिन तक यह वायरस रह सकता है, इसकी सही जानकारी अभी तक कोई नहीं दे पाया है। लेकिन अब ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय विज्ञान संस्था के शोध में दावा किया गया है कि  नोट और फोन की स्क्रीन पर लगभग 28 दिनों तक कोरोना वायरस जिंदा रह सकता है।
शोधकर्ताओं ने तीन अलग-अलग तापमान पर अंधेरे में कोरोना वायरस के जीवित रहने का परीक्षण किया। जिससे पता चला कि तापमान के ज्यादा गर्म होने की स्थिति में कोरोना वायरस के जीवित रहने की दर कम हो गई। वैज्ञानिकों ने पाया कि 20 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर कोरोना वायरस चिकनी सतह जैसे फोन की स्क्रीन पर बहुत ज्यादा मजबूत हो गया। उन्होंने बताया कि ग्लास, स्टील, प्लास्टिक, बैंक नोट पर कोरोना वायरस 28 दिनों तक जीवित रह सकता है। इसके अलावा, 30 डिग्री सेल्सियस पर उसका जिंदा रहने का समय घटकर सात दिन हो गया। जबकि 40 डिग्री सेल्सियस पर कोरोना वायरस मात्र 24 घंटे तक जीवित रह सका।
शोधकर्ताओं का कहना है कि छेदवाली सतह जैसे कॉटन पर कोरोना वायरस सबसे कम तापमान पर 14 दिनों तक जिंदा रह सकता है। जबकि सबसे ज्यादा तापमान पर 16 घंटे तक जीवित रह सकता है। शोधकर्ताओं ने शोध के दौरान अलग-अलग सामग्री पर टेस्ट से पहले वायरस के ड्राइंग सैंपल को शामिल किया गया। इस दौरान अति संवेदनशील प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए पाया गया कि जीवित वायरस के अंश कोशिका संवर्धन को संक्रमित करने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि इसका ये मतलब नहीं है कि वायरस की तादाद किसी को संक्रमित कर पाने में सक्षम होगी। अगर कोई शख्स इन सामग्रियों के प्रति लापरवाह है और उनको छूता है और फिर आपके हाथों को चूमता है या आंखों या नाक को छूता है तो उसके संक्रिमत होने की पूरी संभावना है, और वह दो सप्ताह तक संक्रमित हो सकता हैं। सतह को छुने से भी लोग ज्यादा संक्रमित हो रहे है

Tuesday, 22 September 2020

08:49

deepak tiwari लोक भाषा बघेली कवियों में बैजनाथ बैजू सैफुद्दीन



घेली कविता की त्रिवेणी...बैजू सैफू, शंभू...
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लोक भाषा बघेली कवियों में बैजनाथ बैजू,.  सैफुद्दीन सैफू .और शंभू प्रसाद द्विवेदी शंभू काकू .को बघेली कविता का त्रई कहां जाता है । वस्तुतः बघेली में कविताओं के मुख्य शुरुआत यहीं से होती है। यद्यपि इससे पूर्व भी नाथ राय हरिदास और मुन्नीलाल कि कुछ कविताएं मिलती है। बैजू को बघेली कविता का वटवृक्ष कहा जाता है उनकी प्रकाशित बैजू की. सूक्तियां. में बघेलखंड का अंतर्मन झलकता है। 
अभी तक बैजू तथा शंभू काकू की कविताओं का कोई संग्रह लोगों के बीच नहीं है जबकि सैफू का बघेली साहित्य काफी मात्रा में मैं उपलब्ध है। यह सुखद संयोग है कि शंभू काकू का एक कविता संग्रह. बोले चला निरा  लबरी .अगले महीने लोगों के बीच उपलब्ध हो जाएगा वही बैजनाथ बैजू के पौत्र चंद्रनाथ के अनुसार बैजू की प्रकाशित बैजू की .सूक्तियां. का पुनः प्रकाशन के साथ बैजू जी के दो अन्य कविता संग्रह साल के अंत तक छप कर  लोगों के बीच उपलब्ध हो जाएंगे ।  यह बघेली साहित्य के लिए एक उपलब्धि होगी ।

Monday, 21 September 2020

06:23

चीन ने अमेरिकी नेवल बेस गुआम पर हमले का नकली वीडियो जारी कियाdeepak tiwari

 September 21, 2020
H‑6 बॉम्बर से किया अटैक
पेइचिंग। अमेरिका से जारी तनाव के बीच चीन ने प्रशांत महासागर में स्थिति अमेरिकी नौसैनिक बेस गुआम पर हमले का नकली वीडियो जारी किया। इस हमले में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स ने अपने एच‑6 परमाणु बॉम्बर का उपयोग किया। चीनी सेना ने इस हमले का बकायदा एक सिमुलेटेड वीडियो भी जारी किया है, जिसमें उसका एच‑6 बॉम्बर अमेरिकी एंडरसन एयर फोर्स बेस पर बम गिराता दिखाई दे रहा है।
चीनी एच‑6 बॉम्बर ने गुआम में किया ‘अटैक’
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स के वीबो अकाउंट पर यह वीडियो शनिवार को अपलोड किया गया था। चीनी वायुसेना का दो मिनट और 15 सेकंड का यह वीडियो किसी हॉलीवुड फिल्म की ट्रेलर की तरह दिखाई दे रहा है। जिसमें चीन का एच‑6 बॉम्बर रेगिस्तान में स्थित किसी एयरफोर्स बेस से उड़ान भरता दिखाई दे रहा है। वीडियो में कहा गया है कि युद्ध के देवता एच-6के हमले पर जा रहे हैं।
इस वीडियो में आगे दिखाई देता है कि चीनी एयरफोर्स का पायलट आसमान में एक बटन दबाता है और मिसाइल समुद्र के किनारे बने एक रनवे पर गिरकर फट जाती है। जैसे ही मिसाइल रनवे से टकराती है वैसे ही उपग्रह से इसका चित्र दिखाया जाता है। जिसमें यह रनवे अमेरिकी नेवल बेस गुआम के एंडरसन एयरफोर्स बेस की तरह दिखाई देता है। इस वीडियो में चीनी एयरफोर्स ने कई तरह के म्यूजिक का भी प्रयोग किया है।
चीनी और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने नहीं की कोई टिप्पणी
PLAAF ने वीडियो को जारी कर कैप्शन में लिखा कि हम मातृभूमि की हवाई सुरक्षा के रक्षक हैं। हमारे पास मातृभूमि के आसमान की सुरक्षा करने का हमेशा से भरोसा और क्षमता है। इस वीडियो के जारी होने के बाद न तो चीनी रक्षा मंत्रालय ने और न ही अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड ने अभी तक कोई टिप्पणी की है।
चीन ने इसलिए जारी किया है यह वीडियो
सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस एंड स्ट्रेटेजिक स्टडीज के एक रिसर्च फेलो कोलिन कोह ने कहा कि चीन ने इस वीडियो को एक खास मकसद से जारी किया है। चीन के इस वीडियो को जारी करने का उद्देश लंबी दूरी तक मार करने की उसकी क्षमताओं का प्रदर्शन करना है। इस वीडियो के जरिए चीन ने अमेरिका को चेतावनी भी दी है कि वह ताइवान और साउथ चाइना सी में विवादों से दूर रहे।
प्रशांत महासागर में अमेरिका का बड़ा सैन्य ठिकाना है गुआम
प्रशांत महासागर में स्थित गुआम नेवल बेस चीन के नजदीक अमेरिका का बड़ा सैन्य ठिकाना है। इस नेवल बेस की बदौलत अमेरिका चीन के साथ उत्तर कोरिया की हरकतों पर भी करीबी नजर रखता है। हाल के दिनों में चीन से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने गुआम नेवल बेस पर सैनिकों की संख्या के साथ ही कई आधुनिक एयरक्राफ्ट को भी तैनात किया है। यहां से मिनटों में अमेरिकी बॉम्बर साउथ चाइना सी में स्थित चीन के कई सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी कर सकते हैं।

Monday, 14 September 2020

07:52

अब्राहम लिंकन के बाल के गुच्छे 81 हजार डॉलर में नीलाम

  deepak tiwari 
 September 14, 2020

टेलीग्राम के लिए भी जमकर लगी बोली
वाशिंगटन। अब्राहम लिंकन के बाल का गुच्छा और खून लगे टेलीग्राम की नीलामी हो गई है. नीलामी में बाल और टेलीग्राम की कीमत 81 हजार डॉलर लगाई गई। टेलीग्राम में 1865 में उनकी हत्या के बारे में बताया गया है।
बॉस्टेन में शनिवार को खत्म हुए नीलामी में दोनों सामानों की बिक्री हुई। हालांकि खरीदार कौन है इस बारे में जानकारी साझा नहीं साझा की गई है। लिंकन को गोली लगने के बाद 2 इंच लंबा बाल का गुच्छा पोस्टमॉर्टम परीक्षण के दौरान हटाया गया था। उसके बाद गुच्छे को डॉक्टर लेयमन बीचर टोड के हवाले किया गया। बीचर 16वें राष्ट्रपति की विधवा के चचेरे भाई थे। बताया जाता है कि जिस वक्त लिंकन का पोस्टमॉर्टम किया जा रहा था उस वक्त बीचर मौजूद थे। बाल को सरकारी युद्ध विभाग के टेलीग्राम पर लगाया था, जिसे जॉर्ज किनेर ने डॉक्टर बीचर को भेजा था।
टेलीग्राम वाशिंगटन में 1865 में 14 अप्रैल को 11 बजे रात में हासिल किया गया। RR ऑक्शन ने एक बयान में कहा, “इस सिलिसिले में हमे मालूम है कि ये राष्ट्रपति के बेड के पास मौजूद परिवार के एक सदस्य की तरफ से आया है।” 81 हजार 250 डॉलर की बिक्री कीमत थोड़ा ज्याद रखी गई थी। जबकि उसके 75 हजार डॉलर होने का अनुमान जताया जा रहा था। टेलीग्राम इस मामले में ज्यादा अहम हो जाता है कि इसमें एक थ्योरी को खारिज किया गया है। अब्राहम लिंकन की हत्या के पीछे कहा जाता है कि उस वक्त के युद्ध सचिव एडविन स्टानटोन ने वारदात की साजिश रची थी। इतिहासकारों के मुताबिक स्टानटोन के उनसे राजनीतिक और निजी मतभेद थे। 14 अप्रैल 1865 को अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहिम लिंकन को वॉशिंगटन के ‘फोर्ड थियेटर’ में नाटक देखते समय गोली मार दी गई। अगली सुबह उनका देहांत हो गया था।

Wednesday, 9 September 2020

01:44

जाने आखिर क्यों इस महिला ने पैदल चलकर तय किया 1500 किमी का सफर deepak tiwari

जोहन्ना मारिया स्कॉटिश यूनिवर्सिटी में एग्रीकल्चर की स्टूडेंट हैं। उनके पोनी का नाम हेचिजो है जिसकी उम्र 14 साल है। जोहन्ना पोनी को अपने साथ यूनिवर्सिटी ले जाना चाहती हैं,लेकिन उसे अपने घर से यूनिवर्सिटी तक ले जाने का खर्च तकरीबन डेढ़ करोड़ है। पैसों की कमी के चलते जोहन्ना के लिए पोनी को ले जाने का इतना खर्च उठाना भी मुश्किल है।
जोहन्ना को जब कोई और रास्ता नहीं सूझा तो उसने यूनिवर्सिटी तक लगभग 1500 किमी की दूरी अपने पोनी के साथ मिलकर अकेले ही पैदल तय करने का फैसला किया।
पिछले सात महीनों के दौरान जोहन्ना ने हर दिन 13 से 20 किलोमीटर का सफर पोनी के साथ तय किया। पोनी के साथ जोहन्ना ने एक छोटा सा कार्ट भी अटैच किया। इसके ऊपर उसने अपना सारा सामान रखा।
जोहन्ना ने अपने मजेदार सफर को सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने ये भी बताया कि जब रात को वे काफी थक जातीं तो पोनी के साथ किसी खेत में सो जातीं।
जोहन्ना कहती हैं - ''जब पोनी के साथ अपने सफर को मैंने सोशल मीडिया पर शेयर किया तो ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने मुझे उनके घर में रात रूकने का ऑफर दिया। लेकिन मेरे लिए पोनी के साथ किसी के घर ठहरना भी आसान नहीं था''।
जोहन्ना के लिए ये सफर यादगार रहा। इस दौरान उनके कई दोस्त बनें। उन्होंने हर तरह के मौसम का मजा लिया। कभी तपती धूप में सफर किया तो कभी कड़कड़ाती ठंड के बीच खेतों में रात गुजारी।
जोहन्ना के पिता ने एक कैम्पर वैन के माध्यम से उनके सफर को आसान बनाया और चैनल को पार करने में जोहन्ना की मदद की। इस तरह जोहन्ना 13 जुलाई को इंग्लैंड पहुंचीं। उसके बाद 1 अगस्त से उन्होंने अपने सफर की एक बार फिर शुरुआत की। अपने प्यारे पोनी के साथ उनका ये सफर अब भी जारी है।

Sunday, 6 September 2020

17:50

यूके की आर्टिस्ट बेकेह स्टोनफॉक्स पेपर की कतरन से बनाती हैं पोर्ट्रेट तस्वीर ,deepak tiwar

यूके की आर्टिस्ट बेकेह स्टोनफॉक्स पेपर की कतरन से बनाती हैं पोर्ट्रेट,deepak tiwari दिन की रोशनी के साथ रंग बदलती हैं इनकी बनाई कलाकृतियां
यूके की 45 वर्षीय बेकेह स्टोनफॉक्स पेपर की रंगीन कतरनों द्वारा मुश्किल से मुश्किल आकृतियां बनाने में माहिर हैं। कागज के छोटे से छोटे टुकड़े का भी ये उपयोग कर लेती हैं। वैसे तो ये आर्ट वर्क लंबे समय से कर रही हैं, लेकिन बीते पांच वर्षों से ये दुनिया की नजरों में छा गई हैं।
इनके आर्ट कलेक्शन में काल्पनिक ह्यूमन कैरेक्टर से लेकर विभिन्न प्राणी जैसे डॉगी, कैट, गोरिल्ला, हॉर्स आदि हैं, इनको देखकर लगेगा जैसे ये अब बोलने ही वाले हों। रंगीन कागज से बनी इनके पोर्ट्रेट की खासियत यह है कि ये दिन की कम-ज्यादा होती रोशनी के अनुसार रंग बदल लेते हैं।
स्टोनफॉक्स कागज की कतरनों को चोटी जैसा गूंथकर किसी का भी चेहरा या पूरी आकृति बना देती हैं। इनका कहना है कि दुनिया में ऐसा कुछ नहीं, जिसे वे अपने आर्ट से न बना सकें।
बेकेह स्टोनफॉक्स ने अभी तक केवल पुरुषों तथा प्राणियों की आकृतियां ही बनाई थीं, लेकिन अब वे महिलाओं के विभिन्न पोज पर काम कर रही हैं।
इनके पोर्ट्रेट की खासियत यह भी है कि यह थी-डी तकनीक से प्रेरित हैं। जैसे-जैसे दिनभर में सूरज की रोशनी कम-ज्यादा होती है, पोर्ट्रेट के रंग अपने आप कम या ज्यादा होने लगते हैं। इनमें कभी शाइनिंग आती है तो कभी हल्के रंग दिखने लगते हैं।

Tuesday, 1 September 2020

02:42

अफगानिस्तान में फिर बम विस्फोट, तीन सैनिकों की मौत कई घायल हुए

  deepak tiwari 
 September 1, 2020

काबुल । अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत पक्तिया की राजधानी गार्देज में मंगलवार को एक बम विस्फोट में कम से कम तीन सैनिकों की मौत हो गयी और पांच अन्य घायल हो गये। आतंकवादी संगठन तालिबान ने बम विस्फोट की जिम्मेदारी ली है। यहां सुरक्षा कमान के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।

 
उन्होंने एक बयान में कहा कि दुर्भाग्य से, हमले में हमारे तीन सैनिक मारे गये और पांच अन्य घायल हो गये। स्थिति अब सामान्य है और सुरक्षा बल इलाके में तैनात हैं। बतादें कि इससे पहले स्थानीय सरकार के प्रवक्ता अब्दुल रहमान मांगल ने गार्देज में बम विस्फोट की पुष्टि की थी।
वहीं, बतादें कि प्रांत के गवर्नर मोहम्मद हलीम फिदाई ने इससे पहले एक बयान में कहा कि अफगान पब्लिक प्रोटेक्शन फोर्स के कम से कम छह सैनिक घायल हो गये हैं। उन्होंने बताया कि पहला विस्फोट स्थानीय समयानुसार सुबह 05:30 बजे हुआ। सुरक्षा बलों ने क्षेत्र को साफ कर दिया और दो आत्मघाती हमलावर मारे गए। अब तक, सार्वजनिक सुरक्षा बल के छह सदस्य घायल हुए हैं।

Monday, 31 August 2020

00:41

कल धरती के करीब से गुजरेगा क्षुद्रग्रह

Deepak Tiwari 
अगले 10 वर्षों तक नहीं दिखेगा ऐसा अद्भुत दृश्य
एक चक्कर पूरा करने में लगाता है 1.14 वर्ष का समय
आने वाले महीने में एक सितंबर को 20-40 मीटर चौड़ा क्षुद्रग्रह 2011 ES4 धरती के करीब से गुजरेगा। इसकी दूरी पृथ्वी से फिलहाल 1.2 लाख किलोमीटर आंकी गई है यानी यह धरती और चांद के बीच में काफी करीब होगा। लेकिन इसके धरती से टकराने की संभावना न के बराबर है। नासा के मुताबिक, इस क्षुद्रग्रह की सापेक्ष गति लगभग 8.16 किलोमीटर प्रति सेकंड है। अगले एक दशक तक पृथ्वी के पास से गुजरने वाले क्षुद्रग्रहों में से यह सबसे पास से गुजरेगा।

साल 2011 में इस क्षुद्रग्रह की खोज हुई थी। उस समय वैज्ञानिक केवल इस पर चार दिन तक नजर रख पाए थे। यह अपना एक चक्कर पूरा करने में 1.14 साल का समय लगाता है। धरती के साथ इसकी कक्षा सिर्फ 9 साल में एक बार इसे हमारे करीब लाती है। हालांकि, इसका मार्ग फिर भी काफी अलग होगा और इससे पृथ्वी या उससे जुड़ी किसी आर्टिफिशल सैटेलाइट को खतरा नहीं है।

नासा के जेट लैबोरेटरी के आंकड़ों के मुताबिक, यह क्षुद्रग्रह 1987 से 8 बार पृथ्वी के करीब से गुजरा है, लेकिन इस बार यह अब तक सबसे पास से गुजरेगा।

इससे पहले यह 2011 में 13 मार्च को पृथ्वी के सबसे नजदीक से होकर गुजरा था। उस समय यह पृथ्वी से 4,268,643 किलोमीटर दूर से गुजरा था। इस बार यह केवल 29376 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। आधिकारिक तौर पर इस क्षुद्रग्रह का नाम 2011 ईएस3 है। बताया जा रहा है कि केवल 2032डीबी नाम का क्षुद्रग्रह इसी दूरी से पृथ्वी के पास से साल 2032 में गुजरेगा।

Sunday, 30 August 2020

17:46

रूस के अंतरराष्ट्रीय ​युद्धाभ्यास से पीछे हटा भारत जाने क्यों deepak tiwari

 August 30, 2020

नई दिल्ली । ​पूर्वी लद्दाख में चीन ​और ​एलओसी​ पर पाकिस्तान से ​चल रही तनातनी को देखते हुए भारत अगले माह रूस में होने वाले युद्धाभ्यास में शामिल नहीं होगा​।​ इसमें हिस्सा लेने चीनी और पाकिस्तानी सेना भी जा ​रही हैं। ​​दक्षिणी रूस के अस्त्रखान क्षेत्र में होने वाले वॉरगेम्स में ​न जाने का निर्णय लेने के ​पीछे ​भारतीय अधिकारियों ने वैश्विक ​कोविड​-19 की बिगड़ती स्थिति को भी ध्यान में रखा है​​।​

​​​​दक्षिण रूस के अस्त्रखान क्षेत्र में 15 से 26 सितम्बर के बीच ​​​​​​युद्धाभ्यास आयोजित किया जाएगा। इसमें ​​शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य चीन, पाकिस्तान, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उजबेकिस्तान समेत ​​11 देश हिस्सा लेंगे। इसके अलावा इस ड्रिल में मंगोलिया, सीरिया, ईरान, मिस्र, बेलारूस, तुर्की, आर्मेनिया, अबकाज़िया, दक्षिण ओसेतिया, अजरबैजान और तुर्कमेनिस्तान भी शामिल होंगे। अगले महीने होने वाले ​​इस ​​युद्धाभ्यास में मेजबान रूस सहित ​​19 काउंटी देश शामिल होंगे। सारे देशों को मिलाकर इस अभ्यास में 12 हजार 500 से अधिक सैनिक भाग लेंगे​​।​ ​रूस ​ने इस युद्धाभ्यास में भाग लेने के लिए भारत को भी तीनों सेनाओं की लगभग 200 कर्मियों की टुकड़ी के साथ आमंत्रित किया था।​ ​पिछले साल ​इस युद्धाभ्यास में भारत, पाकिस्तान और सभी एससीओ सदस्य देशों ​ने भागीदारी ​की ​थी।
​ ​​
एक उच्च‑स्तरीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा स्टाफ के प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने चर्चा कर बताया कि ​दक्षिण रूस के अस्त्रखान क्षेत्र में होने वाले ​युद्धाभ्यास में इसलिए भाग लेना सही नहीं होगा, क्योंकि इसमें चीनी और पाकिस्तानी सेनाएं भी शामिल हो रही हैं​। चीन के साथ चल रहे टकराव के चलते पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत की सेनाएं हाई अलर्ट पर है, इसलिए हमारे लिए बहुपक्षीय युद्धाभ्यास में भाग लेने के लिए जाना सही नहीं होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए 4–6 सितम्बर को रूस जायेंगे। राजनाथ सिंह की वहां चीनी रक्षा मंत्री के साथ वार्ता करने की कोई योजना नहीं है। इस बैठक में भारत पूर्वी लद्दाख में चीन की विस्तारवादी नीतियों का मुद्दा उठा सकता है।
भारत और चीनी सेनाओं के बीच लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चार महीने से ज्यादा लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है। बातचीत के कई स्तरों के बावजूद लद्दाख में तनाव कम करने में सफलता नहीं मिली है और अभी टकराव बरकरार है। लद्दाख से लेकर अरुणाचल, उत्तराखंड, सिक्किम में दोनों तरफ से सैनिकों और हथियारों का जमावड़ा बढ़ता ही जा रहा है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर में भी सीमा पर पाकिस्तान के साथ हालात ठीक नहीं है। सीमा पर लगातार सीज फायर उल्लंघन और पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की घटनाएं बढ़ रही हैं। भारत ने एलओसी पर लड़ाकू विमान तेजस तैनात कर रखा है और सीमा पर हाई अलर्ट रखा गया है।