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Thursday, 21 November 2019

06:52

21 नवंबर 2019 हिंदू पंचांग पंडित विष्णु जोशी के साथ


🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग पंडित विष्णु जोशी*
 ~ 🌞7905156547
⛅ *दिनांक 21 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - गुरुवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - मार्गशीर्ष (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार कार्तिक)*
⛅ *पक्ष - कृष्ण*
⛅ *तिथि - नवमी सुबह 11:21 तक तत्पश्चात दशमी*
⛅ *नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी शाम 06:30 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी*
⛅ *योग - वैधृति शाम 04:16 तक तत्पश्चात विष्कम्भ*
⛅ *राहुकाल - दोपहर 01:34 से दोपहर 02:55 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:53*
⛅ *सूर्यास्त - 17:54*
⛅ *दिशाशूल - दक्षिण दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण -
 💥 *विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *उत्पत्ति एकादशी* 🌷
➡ *22 नवम्बर 2019 शुक्रवार को सुबह 09:02 से 23 नवम्बर शनिवार को प्रातः 06:24 तक एकादशी है ।*
💥 *विशेष ~ 23 नवम्बर 2019 शनिवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।*
🙏🏻 *निर्णयसिन्धु के प्रथम परिच्छेद में एकादशी के निर्णय में 18 भेद कहे गये हैं l*
🙏🏻 *कालहेमाद्रि में मार्कण्डेयजी ने कहा है – जब बहुत वाक्य के विरोध से यदि संदेह हो जाय तो एकादशी का उपवास द्वादशी को ग्रहण करे और त्रयोदशी में पारणा करे ।*
🙏🏻 *पद्म पुराण में आता है कि एकादशी व्रत के निर्णय में सब विवादों में द्वादशी को उपवास तथा त्रयोदशी में पारणा करे ।*
💥 *विशेष ~ अतः इस बार भी शास्त्र अनुसार 23 नवम्बर शनिवार को उपवास करें*।
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷
🙏🏻 *एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें .......विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l*
          🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* 🌷
🙏🏻 *महीने में १५-१५ दिन में  एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के जो दिन चावल खाता है... तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है...ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा था।*
           🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~* 🌞
🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏

Wednesday, 20 November 2019

07:46

20 नवंबर 2019 का हिंदू पंचांग पंडित विष्णु



🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग पंडित विष्णु जोशी*
~ 🌞7905156547
⛅ *दिनांक 20 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - बुधवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - मार्गशीर्ष (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार कार्तिक)*
⛅ *पक्ष - कृष्ण*
⛅ *तिथि - अष्टमी शाम 01:41 तक तत्पश्चात नवमी*
⛅ *नक्षत्र - मधा रात्रि 08:05 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी*
⛅ *योग - इन्द्र शाम 07:19 तक तत्पश्चात वैधृति*
⛅ *राहुकाल - दोपहर 12:12 से दोपहर 01:34 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:53*
⛅ *सूर्यास्त - 17:55*
⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - बुधवारी अष्टमी  (सूर्योदय से दोपहर 01:41 तक)*
 💥 *विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *अष्टमी तिथि के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *बुधवारी अष्टमी* 🌷
➡ *20 नवंबर 2019 सूर्योदय से दोपहर 01:41 तक बुधवारी अष्टमी  हैं ।*
🙏🏻 *बुधवारी अष्टमी को  किये गए जप, तप, मौन, दान व ध्यान का फल अक्षय होता है ।*
🙏🏻 *मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि  सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी –  ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं।  इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है।(शिव पुराण, विद्यश्वर संहिताः अध्याय 10)*
         🌞 ~ *हिन्दू पंचांग* ~ 🌞

🌷 *नारी कल्याण पाक* 🌷
👩🏻 *यह पाक युवतियों, गर्भिणी, नवप्रसूता माताएँ तथा महिलाएँ – सभी के लिए लाभदायी है |*
➡ *लाभ : यह बल व रक्तवर्धक, प्रजनन – अंगों को सशक्त बनानेवाला, गर्भपोषक, गर्भस्थापक (गर्भ को स्थिर – पुष्ट करनेवाला), श्रमहारक (श्रम से होनेवाली थकावट को मिटानेवाला) व उत्तम पित्तनाशक है | एक – दो माह तक इसका सेवन करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया, अत्यधिक मासिक रक्तस्राव व उसके कारण होनेवाले कमरदर्द, रक्त की कमी, कमजोरी , निस्तेजता आदि दूर होकर शक्ति व स्फूर्ति आती है | जिन माताओं को बार-बार गर्भपात होता हो उनके लिए यह विशेष हितकर है | सगर्भावस्था में छठे महिने से पाक का सेवन शुरू करने से बालक हृष्ट-पुष्ट होता है, दूध भी खुलकर आटा है |*
💪🏻 *धातु की दुर्बलता में पुरुष भी इसका उपयोग कर सकते है |*
👉🏻 *सामग्री : सिंघाड़े का आटा, गेंहू का आटा व देशी घी प्रत्येक २५० ग्राम, खजूर १०० ग्राम, बबूल का पिसा हुआ गोंद १०० ग्राम, पिसी मिश्री ५०० ग्राम |*
➡ *विधि : घी को गर्म कर गोंद को घी में भून लें | फिर उसमें सिंघाड़े व गेंहू का आटा मिलाकर धीमी आँच पर सेंके | जब मंद सुगंध आने लगे तब पिसा हुआ खजूर व मिश्री मिला दे | पाक बनने पर थाली में फैलाकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर रखें |*
🍜 *सेवन-विधि : २ टुकड़े ( लगभग २० ग्राम ) सुबह शाम खायें | ऊपर से दूध पी सकते हैं |*
💥 *सावधानी : खट्टे, मिर्च-मसालेदार व तेल में तले हुए तथा ब्रेड-बिस्कुट आदि बासी पदार्थ न खाये |*
       🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🌻🍀🌺🙏🏻

Tuesday, 19 November 2019

11:20

19 नवंबर 2019 का हिंदू पंचांग पण्डित विश्णु जोशी के साथ



🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग पंडित विष्णु जोशी* ~
🌞7905156547
⛅ *दिनांक 19 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - मंगलवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - मार्गशीर्ष (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार कार्तिक)*
⛅ *पक्ष - कृष्ण*
⛅ *तिथि - सप्तमी शाम 03:35 तक तत्पश्चात अष्टमी*
⛅ *नक्षत्र - अश्लेशा रात्रि 09:23 तक तत्पश्चात मघा*
⛅ *योग - ब्रह्म रात्रि 10:08 तक तत्पश्चात इन्द्र*
⛅ *राहुकाल - दोपहर 02:55 से शाम 04:16 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:51*
⛅ *सूर्यास्त - 17:55*
⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - कालभैरव जयंती*
 💥 *विशेष सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा  शरीर का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *कालभैरवाष्टमी* 🌷
🙏🏻 *मंगलवार, 19 नवम्बर 2019 को कालभैरवाष्टमी (कालभैरव जयंती) है। शिवपुराण शतरुद्रासंहिता के अनुसार “भगवान् शिव ने मार्गशीर्ष मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को भैरवरूप से अवतार लिया था। इसलिये जो मनुष्य मार्गशीर्ष मासकी कृष्णाष्टमी को काल भैरव के संनिकट उपवास करके रात्रि में जागरण करता है वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है | जो मनुष्य भक्तिपूर्वक जागरण सहित इस व्रतका अनुष्ठान करेगा, वह भी महापापो से मुक्त होकर सद्गति को प्राप्त हो जाएगा ।”*
🙏🏻 *वामकेश्वर तंत्र की योगिनीहदयदीपिका टीका में अमृतानंद नाथ कहते हैं- 'विश्वस्य भरणाद् रमणाद् वमनात्‌ सृष्टि-स्थिति-संहारकारी परशिवो भैरवः' अर्थात भ- से विश्व का भरण, र- से रमश, व- से वमन अर्थात सृष्टि को उत्पत्ति पालन और संहार करने वाले शिव ही भैरव हैं।*
🙏🏻 *इस दिन उपवास तथा रात्रि जागरण का ही विशेष महत्व है। 'जागरं चोपवासं च कृत्वा कालाष्टमीदिने । प्रयतः पापनिर्मुक्तः शैवो भवति शोभनः॥' के अनुसार उपवास करके रात्रि में जागरण करें तो सब पाप दूर हो जाते हैं और व्रती शैव बन जाता है। भैरव रात्रि के देवता माने जाते हैं और इनकी आराधना का खास समय भी मध्य रात्रि में 12 से 3 बजे का माना जाता है।*
🙏🏻 *भैरव का मध्याह्न में जन्म हुआ था, अतः मध्याह्णव्यापिनी अष्टमी ही व्रत/पूजन में लेनी चाहिये ।*
🙏🏻 *भविष्यपुराण, उत्तरपर्व, अध्याय ५८ के अनुसार मार्गशीर्ष कृष्णपक्ष अष्टमी में अनघाष्टमी व्रत का विधान है जिसको करने से त्रिविध पाप (कायिक, वाचिक और मानसिक) नष्ट हो जाते है और अष्टविध ऐश्वर्य (अणिमा, महिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, लघिमा, ईशित्व, वशित्व तथा सर्वकामावसायिता) प्राप्त होते हैं।*
🙏🏻 *शिवपुराण में “भैरव: पूर्णरूपोहि शंकरस्य परात्मन:। मूढास्तेवै न जानन्ति मोहिता:शिवमायया।।”  को शिव का ही पूर्णरूप बताया है। ब्रह्माण्डपुराण के उत्तरभाग में “तयोरेव समुत्पन्नो भैरवः क्रोधसंयुतः” के अनुसार क्रुद्ध शिव से भैरव की उत्पत्ति तथा उसके बाद भैरव द्वारा ब्रह्मा के सिर का छेदन बताया गया है। वामनपुराण में शिव के रक्त से ८ दिशाओं में विभिन्न भैरवों की उत्पत्ति बताई गयी है। जबकी ब्रह्मवैवर्त्तपुराण में कृष्ण के दक्षिण नेत्र से भैरव की उत्पत्ति बताई गयी है।*
      🌞 ~ *हिन्दू पंचांग* ~ 🌞

🌷 *कालभैरव अष्टमी* 🌷
👉🏻 *गतांग से आगे....*
🙏🏻 *5. कालभैरव अष्टमी पर 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ॐ नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। साथ ही, एकमुखी रुद्राक्ष भी अर्पण करें। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।*
🙏🏻 *6. कालभैरव अष्टमी को एक रोटी लें। इस रोटी पर अपनी तर्जनी और मध्यमा अंगुली से तेल में डुबोकर लाइन खींचें। यह रोटी किसी भी दो रंग वाले कुत्ते को खाने को दीजिए। इस क्रम को जारी रखें, लेकिन सिर्फ हफ्ते के तीन दिन (रविवार, बुधवार व गुरुवार)। यही तीन दिन भैरवनाथ के माने गए हैं।*
🙏🏻 *7. अगर आप कर्ज से परेशान हैं तो कालभैरव अष्टमी की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव की पूजा करें। उन्हें बिल्व पत्र अर्पित करें। भगवान शिव के सामने आसन लगाकर रुद्राक्ष की माला लेकर इस मंत्र का जप करें।*
🌷 *मंत्र- ॐ ऋणमुक्तेश्वराय नम:*
🙏🏻 *8. कालभैरव अष्टमी के एक दिन पहले  उड़द की दाल के पकौड़े सरसों के तेल में बनाएं और रात भर उन्हें ढककर रखें। सुबह जल्दी उठकर सुबह 6 से 7 बजे के बीच बिना किसी से कुछ बोलें घर से निकलें और कुत्तों को खिला दें।*
🙏🏻 *9. सवा किलो जलेबी भगवान भैरवनाथ को चढ़ाएं और बाद में गरीबों को प्रसाद के रूप में बांट दें। पांच नींबू भैरवजी को चढ़ाएं। किसी कोढ़ी, भिखारी को काला कंबल दान करें।*
🙏🏻 *10. कालभैरव अष्टमी पर सरसो के तेल में पापड़, पकौड़े, पुए जैसे पकवान तलें और गरीब बस्ती में जाकर बांट दें। घर के पास स्थित किसी भैरव मंदिर में गुलाब, चंदन और गूगल की खुशबूदार 33 अगरबत्ती जलाएं।*
🙏🏻 *11. सवा सौ ग्राम काले तिल, सवा सौ ग्राम काले उड़द, सवा 11 रुपए, सवा मीटर काले कपड़े में पोटली बनाकर भैरवनाथ के मंदिर में कालभैरव अष्टमी पर चढ़ाएं।*
🙏🏻 *12. कालभैरव अष्टमी की सुबह स्नान आदि करने के बाद भगवान कालभैरव के मंदिर जाएं और इमरती का भोग लगाएं। बाद में यह इमरती दान कर दें। ऐसा करने से भगवान कालभैरव प्रसन्न होते हैं।*
🙏🏻 *13. कालभैरव अष्टमी को समीप स्थित किसी शिव मंदिर में जाएं और भगवान शिव का जल से अभिषेक करें और उन्हें काले तिल अर्पण करें। इसके बाद मंदिर में कुछ देर बैठकर मन ही मन में ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।*
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏

Monday, 18 November 2019

06:32

18 नवंबर 2019 हिंदू पंचांग




🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग पंडित विष्णु जोशी*
~ 🌞7905156547
⛅ *दिनांक 18 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - सोमवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - मार्गशीर्ष (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार कार्तिक)*
⛅ *पक्ष - कृष्ण*
⛅ *तिथि - षष्ठी शाम 05:10 तक तत्पश्चात सप्तमी*
⛅ *नक्षत्र - पुष्य रात्रि 10:22 तक तत्पश्चात अश्लेशा*
⛅ *योग - शुक्ल रात्रि 12:41 तक तत्पश्चात ब्रह्म*
⛅ *राहुकाल - सुबह 08:08 से सुबह 09:29 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:51*
⛅ *सूर्यास्त - 17:55*
⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण -
 💥 *विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *भैरव अष्टमी* 🌷
🙏🏻 *19 नवंबर,मंगलवार को भैरव अष्टमी पर्व है। यह दिन भगवान भैरव और उनके सभी रूपों के समर्पित होता है। भगवान भैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है,इनकी पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना जाता है।*
🙏🏻 *भगवान भैरव को कई रूपों में पूजा जाता है।भगवान भैरव के मुख्य 8 रूप माने जाते हैं। उन रूपों की पूजा करने से भगवान अपने सभी भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें अलग-अलग फल प्रदान करते हैं।*
➡ *भगवान भैरव के 8 रूप जानें कौन-सी मनोकामना के लिए करें किसकी पूजा*
1⃣ *कपाल भैरव*
*इस रूप में भगवान का शरीर चमकीला है, उनकी सवारी हाथी है । कपाल भैरव एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में तलवार तीसरे में शस्त्र और चौथे में पात्र पकड़े हैं। भैरव के इन रुप की पूजा अर्चना करने से कानूनी कारवाइयां बंद हो जाती है । अटके हुए कार्य पूरे होते हैं ।*
2⃣ *क्रोध भैरव*
*क्रोध भैरव गहरे नीले रंग के शरीर वाले हैं और उनकी तीन आंखें हैं । भगवान के इस रुप का वाहन गरुण हैं और ये दक्षिण-पश्चिम दिशा के स्वामी माने जाते ह । क्रोध भैरव की पूजा-अर्चना करने से सभी परेशानियों और बुरे वक्त से लड़ने की क्षमता बढ़ती है ।*
3⃣ *असितांग भैरव*
*असितांग भैरव ने गले में सफेद कपालों की माला पहन रखी है और हाथ में भी एक कपाल धारण किए हैं । तीन आंखों वाले असितांग भैरव की सवारी हंस है । भगवान भैरव के इस रुप की पूजा-अर्चना करने से मनुष्य में कलात्मक क्षमताएं बढ़ती है ।*
4⃣ *चंद भैरव*
*इस रुप में भगवान की तीन आंखें हैं और सवारी मोर है ।चंद भैरव एक हाथ में तलवार और दूसरे में पात्र, तीसरे में तीर और चौथे हाथ में धनुष लिए हुए है। चंद भैरव की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय मिलता हैं और हर बुरी परिस्थिति से लड़ने की क्षमता आती है ।*
5⃣ *गुरू भैरव*
*गुरु भैरव हाथ में कपाल, कुल्हाडी, और तलवार पकड़े हुए है ।यह भगवान का नग्न रुप है और उनकी सवारी बैल है।गुरु भैरव के शरीर पर सांप लिपटा हुआ है।गुरु भैरव की पूजा करने से अच्छी विद्या और ज्ञान की प्राप्ति होती है ।*
6⃣ *संहार भैरव*
*संहार भैरव नग्न रुप में है, और उनके सिर पर कपाल स्थापित है ।इनकी तीन आंखें हैं और वाहन कुत्ता है । संहार भैरव की आठ भुजाएं हैं और शरीर पर सांप लिपटा हुआ है ।इसकी पूजा करने से मनुष्य के सभी पाप खत्म हो जाते है ।*
7⃣ *उन्मत भैरव*
*उन्मत भैरव शांत स्वभाव का प्रतीक है । इनकी पूजा-अर्चना करने से मनुष्य की सारी नकारात्मकता और बुराइयां खत्म हो जाती है । भैरव के इस रुप का स्वरूप भी शांत और सुखद है । उन्मत भैरव के शरीर का रंग हल्का पीला हैं और उनका वाहन घोड़ा हैं।*
8⃣ *भीषण भैरव*
*भीषण भैरव की पूजा-अर्चना करने से बुरी आत्माओं और भूतों से छुटकारा मिलता है । भीषण भैरव अपने एक हाथ में कमल, दूसरे में त्रिशूल, तीसरे हाथ में तलवार और चौथे में एक पात्र पकड़े हुए है ।भीषण भैरव का वाहन शेर है ।*
🌞 ~ *हिन्दू पंचांग* ~ 🌞

🌷 *कालभैरव अष्टमी* 🌷
🙏🏻 *धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालभैरव अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने कालभैरव का अवतार लिया था। इसलिए इस पर्व को कालभैरव जयंती को रूप में मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 19 नवंबर,मंगलवार को है।*
🙏🏻 *भगवान कालभैरव को तंत्र का देवता माना गया है। तंत्र शास्त्र के अनुसार,किसी भी सिद्धि के लिए भैरव की पूजा अनिवार्य है। इनकी कृपा के बिना तंत्र साधना अधूरी रहती है। इनके 52 रूप माने जाते हैं। इनकी कृपा प्राप्त करके भक्त निर्भय और सभी कष्टों से मुक्त हो जाते हैं। कालभैरव जयंती पर कुछ आसान उपाय कर आप भगवान कालभैरव को प्रसन्न कर सकते हैं।*
➡ *ये हैं कालभैरव को प्रसन्न करने के 11 उपाय, कोई भी 1 करें*
🙏🏻 *1. कालभैरव अष्टमी को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद कुश (एक प्रकार की घास) के आसन पर बैठ जाएं। सामने भगवान कालभैरव की तस्वीर स्थापित करें व पंचोपचार से विधिवत पूजा करें। इसके बाद रूद्राक्ष की माला से नीचे लिखे मंत्र की कम से कम पांच माला जाप करें तथा भैरव महाराज से सुख-संपत्ति के लिए प्रार्थना करें।*
🌷 *मंत्र- 'ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:'*
🙏🏻 *2. कालभैरव अष्टमी पर किसी ऐसे भैरव मंदिर में जाएं, जहां कम ही लोग जाते हों। वहां जाकर सिंदूर व तेल से भैरव प्रतिमा को चोला चढ़ाएं। इसके बाद नारियल, पुए, जलेबी आदि का भोग लगाएं। मन लगाकर पूजा करें। बाद में जलेबी आदि का प्रसाद बांट दें। याद रखिए अपूज्य भैरव की पूजा से भैरवनाथ विशेष प्रसन्न होते हैं।*
🙏🏻 *3. कालभैरव अष्टमी को भगवान कालभैरव की विधि-विधान से पूजा करें और नीचे लिखे किसी भी एक मंत्र का जाप करें। कम से कम 11 माला जाप अवश्य करें।*
🌷 *- ॐ कालभैरवाय नम:।*
🌷 *- ॐ भयहरणं च भैरव:।*
🌷 *- ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।*
🌷 *- ॐ भ्रां कालभैरवाय फट्*
🙏🏻 *4. कालभैरव अष्टमी की सुबह भगवान कालभैरव की उपासना करें और शाम के समय सरसों के तेल का दीपक लगाकर समस्याओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।*
👉🏻 *शेष कल.....*
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏

Sunday, 17 November 2019

01:00

आज का हिंदू पंचांग पंडित विष्णु जोशी के साथ 17 नवंबर 2019





🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग पंडित विष्णु जोशी* ~ 🌞7905156547
⛅ *दिनांक 17 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - रविवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - मार्गशीर्ष (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार कार्तिक)*
⛅ *पक्ष - कृष्ण*
⛅ *तिथि - पंचमी शाम 06:23 तक तत्पश्चात षष्ठी*
⛅ *नक्षत्र - पुनर्वसु रात्रि 10:58 तक तत्पश्चात पुष्य*
⛅ *योग - शुभ 18 नवम्बर रात्रि 02:58 तक तत्पश्चात शुक्ल*
⛅ *राहुकाल - शाम 04:16 से शाम 05:38 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:51*
⛅ *सूर्यास्त - 17:55*
⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - विष्णुपदी संक्रांति (पुण्यकाल सूर्योदय से दोपहर 12:24 तक), रविपुषयामृत योग  (रात्रि 10:59 से 18 नवम्बर सूर्योदय तक)*
 💥 *विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *स्वास्थ्यवर्धक खजूर* 🌷
➡ *खजूर मधुर, शीतल, पौष्टिक व सेवन करने के बाद तुरंत शक्ति-स्फूर्ति देनेवाला है | यह रक्त, मांस व वीर्य की वृद्धि करता है | ह्रदय व मस्तिष्क को शक्ति देता है | वात, पित्त व कफ इन तीनों दोषों का शामक है | यह मल व मूत्र को साफ लाता है | खजूर में कार्बोहाइड्रेटस, प्रोटीन्स, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नेशियम, लौह आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाता है | ' अमेरिकन कैंसर सोसाइटी ' के अनुसार शरीर को एक दिन में २०-३५ ग्राम डाएटरी फाइबर (खाद्य पदार्थों में स्थित रेशा) की जरुरत होती है, जो खजूर खाने से पूरी हो जाती है |*
➡ *खजूर रात भर पानी में भिगोकर सुबह लेना लाभदायक है | खजूर रक्त को बढ़ाता है और यकृत (लीवर) के रोगों में लाभकारी है | रक्ताल्पता में इसका नियमित सेवन लाभकारी है | नींबू के रस में खजूर की चटनी बनाकर खाने से भोजन की अरुचि मिटती है | खजूर का सेवन बालों को लंबा, घना और मुलायम बनाता है |*
💊 *औषधि-प्रयोग*

👉🏻 *कब्जनाशक : खजूर में रेचक गुण भरपूर है | ८-१० खजूर २०० ग्राम पानी में भिगों दें,सुबह मसलकर इनका शरबत बना लें | फिर इसमें ३०० ग्राम पानी और डालकर गुनगुना गर्म करें | खाली पेट चाय की की तरह पी जायें | कुछ देर बाद दस्त होगा | इससे आँतों को बल और शरीर को स्फूर्ति भी मिलेगी | उम्र के अनुसार खजूर की मात्रा कम-ज्यादा करें |*
👉🏻 *नशा निवारक : शराबी प्राय: नशे की झोंक में इतनी शराब पी जाता है की उसका यकृत नष्ट होकर मृत्यु का कारण बन सकता है | इस स्थिति में ताजे पानी में खजूर को अच्छी तरह मसलते हुए शरबत बनायें | यह शरबत पीने से शराब का विषैला प्रभाव नष्ट होने लगता है |*
👉🏻 *आँतों की पुष्टि : खजूर आँतों के हनिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है, साथ ही खजूर के विशिष्ट तत्त्व ऐसे जीवाणुओं को जन्म देते हैं जो आँतों को विशेष शक्तिशाली तथा अधिक सक्रिय बनाते हैं |*
👉🏻 *हृदय रोगों में : लगभग ५० ग्राम गुठली रहित छुहारे (खारक) २५० मी. ली. पानी में रात को भिगो दें | सुबह छुहारों को पीसकर पेस्ट बना के उसी बचे हुए पानी में घोल लें | इसे प्रात: खाली पेट पी जाने से कुछ ही माह में ह्रदय को पर्याप्त सबलता मिलती है | इसमें १ ग्राम इलायची चूर्ण मिलाना विशेष लाभदायी है |*
👉🏻 *तन-मन की पुष्टि : बच्चों को दूध में खजूर उबाल के देने से उन्हें शारीरिक-मानसिक पोषण मिलता है व शरीर सुदृढ़ बनता है |*
👉🏻 *शैयामूत्र : जो बच्चे रात्रि में बिस्तर गीला करते हों, उन्हें दो छुहारे रात्रि में भिगोकर सुबह दूध में उबाल के दें |*
👉🏻 *बच्चों के दस्त में : बच्चों के दाँत निकलते समय उन्हें बार बार गारे दस्त होते हों या पेचिश पड़ती हो तो खजूर के साथ शहद को अच्छी तरह फेंटकर एक-एक चमच दिन में २-३ बार चटाने से लाभ होता है |*
👉🏻 *मस्तिष्क व हृदय की कमजोरीः रात को खजूर भिगोकर सुबह दूध या घी के साथ खाने से मस्तिष्क व हृदय की पेशियों को ताकत मिलती है। विशेषतः रक्त की कमी के कारण होने वाली हृदय की धड़कन व एकाग्रता की कमी में यह प्रयोग लाभदायी है।*
👉🏻 *मलावरोधः रात को भिगोकर सुबह दूध के साथ लेने से पेट साफ हो जाता है।*
👉🏻 *कृशताः खजूर में शर्करा, वसा (फैट) व प्रोटीन्स विपुल मात्रा में पाये जाते हैं। इसके नियमित सेवन से मांस की वृद्धि होकर शरीर पुष्ट हो जाता है।*
👉🏻 *रक्ताल्पताः खजूर रक्त को बढ़ाकर त्वचा में निखार लाता है।*
👉🏻 *शुक्राल्पताहा खजूर उत्तम वीर्यवर्धक है। गाय के घी अथवा बकरी के दूध के साथ लेने से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त अधिक मासिक स्राव, क्षयरोग, खाँसी, भ्रम(चक्कर), कमर व हाथ पैरों का दर्द एवं सुन्नता तथा थायराइड संबंधी रोगों में भी यह लाभदायी है।*
💥 *सावधानी* 💥

 *- आजकल खजूर को वृक्ष से अलग करने के बाद रासायनिक पदार्थों के द्वारा सुखाया जाता है | ये रसायन शरीर के लिए हानिकारक होते है | अत: उपयोग करने से पहले खजूर को अच्छी तरह से धों लें | धोकर सुखाने के बाद इन्हें विभिन्न प्रकार से उपयोग किया जा सकता है |*
 *- होली के बाद खजूर खाना हितकारी नहीं है।*
 *- Diabities वाले खजूर की जगह पर किशमिश का उपयोग करना |*
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏

Friday, 15 November 2019

06:32

आज का हिंदू पंचांग पंडित विष्णु जोशी के साथ


*आज का हिन्दू पंचांग पंडित विष्णु जोशी*
~ 🌞7905156547
⛅ *दिनांक 15 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - शुक्रवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - मार्गशीर्ष (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार कार्तिक)*
⛅ *पक्ष - कृष्ण*
⛅ *तिथि - तृतीया शाम 07:46 तक तत्पश्चात चतुर्थी*
⛅ *नक्षत्र - मॄगशिरा रात्रि 11:13 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
⛅ *योग - शिव सुबह 08:06 तक तत्पश्चात सिद्ध*
⛅ *राहुकाल - सुबह 10:49 से दोपहर 12:11 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:49*
⛅ *सूर्यास्त - 17:56*
⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - संकष्ट चतुर्थी  (चन्द्रोदय रात्रि 08:18)*
 💥 *विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *विघ्नों और मुसीबते दूर करने के लिए* 🌷
🙏🏻 *शिव पुराण में आता हैं कि  हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी ( पूनम के बाद की ) के दिन सुबह में गणपतिजी का पूजन करें और रात को चन्द्रमा में गणपतिजी की भावना करके अर्घ्य दें और ये मंत्र बोलें :*
🌷 *ॐ गं गणपते नमः ।*
🌷 *ॐ सोमाय नमः ।*
           🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

‪🌷 *चतुर्थी‬ तिथि विशेष* 🌷
🙏🏻 *चतुर्थी तिथि के स्वामी ‪भगवान गणेश‬जी हैं।*
📆 *हिन्दू कैलेण्डर में प्रत्येक मास में दो चतुर्थी होती हैं।*
🙏🏻 *पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्ट चतुर्थी कहते हैं।अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।*
🙏🏻 *शिवपुराण के अनुसार “महागणपतेः पूजा चतुर्थ्यां कृष्णपक्षके। पक्षपापक्षयकरी पक्षभोगफलप्रदा ॥*
➡ *“ अर्थात प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को की हुई महागणपति की पूजा एक पक्ष के पापों का नाश करनेवाली और एक पक्षतक उत्तम भोगरूपी फल देनेवाली होती है ।*
           🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *कोई कष्ट हो तो* 🌷
🙏🏻 *हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है | उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याएं आ रही हैं वो नष्ट हों |*
👉🏻 *छः मंत्र इस प्रकार हैं –*
🌷 *ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे ।*
🌷 *ॐ दुर्मुखाय नम: : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृत्ति वाला सताता है तो… भैरव देख दुष्ट घबराये ।*
🌷 *ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले । उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें ।*
🌷 *ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय; दूसरों को भी आनंदित करते हैं । भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी । आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है । और  जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है ।*
🌷 *ॐ अविघ्नाय नम:*
🌷 *ॐ विघ्नकरत्र्येय नम:*
           🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷🌸🌼💐☘🌹🌻🌺🙏🏻

Monday, 11 November 2019

08:47

11 नवंबर 2019 हिंदू पंचांग पंडित विष्णु जोशी के साथ





*आज का हिन्दू पंचांग .......................पंडित विष्णु .जोशी* ~ 🌞7905156547
⛅ *दिनांक 11 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - सोमवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - कार्तिक*
⛅ *पक्ष - शुक्ल*
⛅ *तिथि - चतुर्दशी शाम 06:02 तक तत्पश्चात पूर्णिमा*
⛅ *नक्षत्र - अश्विनी शाम 07:18 तक तत्पश्चात भरणी*
⛅ *योग - सिद्धि सुबह 10:50 तक तत्पश्चात व्यतिपात*
⛅ *राहुकाल - सुबह 08:04 से सुबह 09:26 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:47*
⛅ *सूर्यास्त - 17:57*
⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण -
 💥 *विशेष - चतुर्दशी और पूर्णिमा के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *व्यतिपात योग* 🌷
🙏🏻 *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*
🙏🏻 *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*
🙏🏻 *व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।*
💥 *विशेष ~ 11 नवम्बर 2019 सोमवार को सुबह 10:51 से 12 नवम्बर, मंगलवार को सुबह 10:38 तक व्यतीपात योग है।*
              🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *तंदुरुस्ती व पुष्टि के ख़ास प्रयोग – दिमागी व शारीरिक शक्तिवर्धक योग*
👉🏻 *२५० ग्राम बबूल की गोंद घी में सेंककर बारीक पीस लें | इसमें बराबर मात्रा में पिसी हुई मिश्री मिला लें | १२५ ग्राम बीज निकाले हुए मुनक्के और ५०० ग्राम छिलके उतारे हुए भिगोये बादाम कूट के इसमें मिला लें |*
👉🏻 *सुबह १ चम्मच (१० – १५ ग्राम) मिश्रण खूब चबा – चबाकर खायें | साथ में एक गिलास मिश्री डालकर दूध घूँट – घूँट पियें | इसके बाद २ घंटे तक कुछ नहीं खायें | जब खूब अच्छी भूख लगे, तभी भोजन करें | यह हड्डियों की मजबूती के साथ ही दिमागी ताकत और तरावट के लिए भी बहुत गुणकारी है | बौद्धिक कार्य करनेवालों व विद्यार्थियों के लिए यह योग विशेष लाभकारी है |*
🍚 *पुष्टिकारक खीर : २ छोटे चम्मच सिंघाड़े का आटा, २ चम्मच घी व स्वादानुसार मिश्री लें | सिंघाड़े के आटे को मंद आँच पर लाल होने तक भुनें | जब अच्छी तरह भुन जाय, तब ३०० मि. ली. दूध डालकर पकायें | तैयार होने पर मिश्री, इलायची मिला लें | यह स्वादिष्ट तथा पौष्टिक खीर है | यह प्रयोग गर्भिणी व प्रसूता माताओं के लिए विशेष लाभदायी है |*
💪🏻 *बल्य और पुष्टिकारक प्रयोग : पके हुए १ केले का गूदा, १ चम्मच शहद व थोड़ी – सी मिश्री एक साथ घोंट लें और १ चम्मच आँवले का रस मिलाकर खायें | इससे वीर्यस्त्राव तथा वीर्य-विकार में लाभ होता है | बल बढ़ता है व वीर्य गाढ़ा होता है |*
➡ *ध्यान दें : प्रयोगों में दिये गये द्रव्यों की मात्रा अपनी पाचनशक्ति के अनुसार लें | इन दिनों भोजन सुपाच्य व खुलकर भूख लगने पर ही करें | दूध के सेवन के बाद २ घंटे तक कुछ न लें |*
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏

Thursday, 7 November 2019

07:13

आज का हिंदू पंचांग 7 नवंबर 2019 पण्डित विश्णु जोशी के साथ




आज का हिन्दू पंचांग पं.विष्णुजोशी* ~ 🌞7905156547
⛅ *दिनांक 07 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - गुरुवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - कार्तिक*
⛅ *पक्ष - शुक्ल*
⛅ *तिथि - दशमी सुबह 09:55 तक तत्पश्चात एकादशी*
⛅ *नक्षत्र - शतभिषा सुबह 09:16 तक तत्पश्चात पूर्व भाद्रपद*
⛅ *योग - ध्रुव सुबह 08:44 तक तत्पश्चात व्याघात*
⛅ *राहुकाल - दोपहर 01:33 से दोपहर 02:56 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:45*
⛅ *सूर्यास्त - 17:58*
⛅ *दिशाशूल - दक्षिण दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण -
 💥 *विशेष -
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *देवउठी एकादशी के दिन* 🌷
➡  *07 नवम्बर 2019 गुरुवार को सुबह 09:56 से 08 नवम्बर शुक्रवार को 12:24 तक एकादशी है ।*
💥 *विशेष - 08 नवम्बर शुक्रवार को एकादशी का व्रत उपवास रखें ।*
🙏🏻 *देवउठी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को इस मंत्र से उठाना चाहिए*
🌷 *उतिष्ठ-उतिष्ठ गोविन्द, उतिष्ठ गरुड़ध्वज l*
*उतिष्ठ कमलकांत, त्रैलोक्यं मंगलम कुरु l l*
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *भीष्मपञ्चक व्रत* 🌷
*अग्निपुराण अध्याय – २०५*
🙏🏻 *अग्निदेव कहते है – अब मैं सब कुछ देनेवाले व्रतराज ‘भीष्मपञ्चक’ विषय में कहता हूँ | कार्तिक के शुक्ल पक्ष की एकादशी को यह व्रत ग्रहण करें | पाँच दिनों तक तीनों समय स्नान करके पाँच तिल और यवों के द्वारा देवता तथा पितरों का तर्पण करे | फिर मौन रहकर भगवान् श्रीहरि का पूजन करे | देवाधिदेव श्रीविष्णु को पंचगव्य और पंचामृत से स्नान करावे और उनके श्री अंगों में चंदन आदि सुंगधित द्रव्यों का आलेपन करके उनके सम्मुख घृतयुक्त गुग्गुल जलावे ||१-३||*
🙏🏻 *प्रात:काल और रात्रि के समय भगवान् श्रीविष्णु को दीपदान करे और उत्तम भोज्य-पदा

Wednesday, 6 November 2019

08:40

6 नवंबर 2019 का हिंदू पंचांग



 *आज का हिन्दू पंचांग पं.विष्णु जोशी* ~
 🌞7905156547
⛅ *दिनांक 06 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - बुधवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - कार्तिक*
⛅ *पक्ष - शुक्ल*
⛅ *तिथि - नवमी सुबह 07:21 तक तत्पश्चात दशमी*
⛅ *नक्षत्र - शतभिषा पूर्ण रात्रि तक*
⛅ *योग - वृद्धि सुबह 07:50 तक तत्पश्चात ध्रुव*
⛅ *राहुकाल - दोपहर 12:10 से दोपहर 01:33 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:44*
⛅ *सूर्यास्त - 18:00*
⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण -
 💥 *विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *अकाल मृत्यु से रक्षा हेतु विशेष आरती* 🌷
➡  *07 नवम्बर 2019 गुरुवार को सुबह 09:56 से 08 नवम्बर शुक्रवार को 12:24 तक एकादशी है ।*
💥 *विशेष - 08 नवम्बर शुक्रवार को एकादशी का व्रत उपवास रखें ।*
🙏🏻 *देवउठी एकादशी देव-जगी एकादशी के दिन को संध्या के समय कपूर आरती करने से आजीवन अकाल-मृत्यु से रक्षा होती है; एक्सीडेंट, आदि उत्पातों से रक्षा होती है l*
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *भीष्म पंचक व्रत* 🌷
➡ *08 नवम्बर 2019 शुक्रवार से 12 नवम्बर 2019 मंगलवार तक भीष्म पंचक व्रत है ।*
🙏🏻 *कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूनम तक का व्रत 'भीष्म-पंचक व्रत' कहलाता है l जो इस व्रत का पालन करता है, उसके द्वारा सब प्रकार के शुभ कृत्यों का पालन हो जाता है l यह महापुण्य-मय व्रत महापातकों का नाश करने वाला है l*
🙏🏻 *कार्तिक एकादशी के दिन बाणों की शय्या पर पड़े हुए भीष्मजी ने जल कि याचना कि थी l तब अर्जुन ने संकल्प कर भूमि पर बाण मारा तो गंगाजी कि धार निकली और भीष्मजी के मुंह में आयी l उनकी प्यास मिटी और तन-मन-प्राण संतुष्ट हुए l इसलिए इस दिन को भगवान् श्री कृष्ण ने पर्व के रूप में घोषित करते हुए कहा कि 'आज से लेकर पूर्णिमा तक जो अर्घ्यदान से भीष्मजी को तृप्त करेगा और इस भीष्मपंचक व्रत का पालन करेगा, उस पर मेरी सहज प्रसन्नता होगी l'*
🌷 *कौन यह व्रत करें* 🌷
👉🏻 *निःसंतान व्यक्ति पत्नीसहित इस प्रकार का व्रत करें तो उसे संतान कि प्राप्ति होती है l*
👉🏻 *जो अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं, वैकुण्ठ चाहते हैं या इस लोक में सुख चाहते हैं उन्हें यह व्रत करने कि सलाह दी गयी है l*
👉🏻 *जो नीचे लिखे मंत्र से भीष्मजी के लिए अर्घ्यदान करता है, वह मोक्ष का भागी होता है l*
🌷 *वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृतप्रवराय च l*
*अपुत्राय ददाम्येतदुद्कं भीष्म्वर्मणे ll*
*वसूनामवताराय शन्तनोरात्मजाय च l*
*अर्घ्यं ददामि भीष्माय आजन्मब्रह्मचारिणे ll*
🙏🏻 *'जिनका व्याघ्रपद गोत्र और सांकृत प्रवर है, उन पुत्ररहित भीश्म्वार्मा को मैं यह जल देता हूँ l वसुओं के अवतार, शांतनु के पुत्र आजन्म ब्रह्मचारी भीष्म को मैं अर्घ्य देता हूँ l ( स्कन्द पुराण, वैष्णव खंड, कार्तिक महात्मय )*
🌷 *व्रत करने कि विधि* 🌷
*इस व्रत का प्रथम दिन देवउठी एकादशी है l इस दिन भगवान् नारायण जागते हैं l इस कारण इस दिन निम्न मंत्र का उच्चारण करके भगवान् को जगाना चाहिए :*
🌷 *उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द उत्तिष्ठ गरुडध्वज l*
*उत्तिष्ठ कमलाकान्त त्रैलोक्यमन्गलं कुरु ll*
🙏🏻 *'हे गोविन्द ! उठिए, उठए, हे गरुडध्वज ! उठिए, हे कमलाकांत ! निद्रा का त्याग कर तीनों लोकों का मंगल कीजिये l'*
➡ *इन पांच दिनों में अन्न का त्याग करें l कंदमूल, फल, दूध अथवा हविष्य (विहित सात्विक आहार जो यज्ञ के दिनों में किया जाता है ) लें l*
➡ *इन दिनों में पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, गोझरण व् गोबर-रस का मिश्रण )का सेवन लाभदायी है l पानी में थोडा-सा गोझरण डालकर स्नान करें तो वह रोग-दोषनाशक तथा पापनाशक माना जाता है l*
➡ *इन दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए l*
➡ *भीष्मजी को अर्घ्य-तर्पण -*
*इन पांच दिनों निम्नः मंत्र से भीष्म जी के लिए तर्पण करना चाहिए :*
🌷 *सत्यव्रताय शुचये गांगेयाय महात्मने l*
*भीष्मायैतद ददाम्यर्घ्यमाजन्मब्रह्मचारिणे ll*
🙏🏻 *'आजन्म ब्रह्मचर्य का पालन करनेवाले परम पवित्र, सत्य-व्रतपरायण गंगानंदन महात्मा भीष्म को मैं यह अर्घ्य देता हूँ l'*
           🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏

Tuesday, 5 November 2019

09:10

5 नवंबर 2019 का हिंदू पंचांग tap news india



आज का हिन्दू पंचांग पं.विष्णु  जोशी*
~ 🌞7905156547
⛅ *दिनांक 05 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - मंगलवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - कार्तिक*
⛅ *पक्ष - शुक्ल*
⛅ *तिथि - नवमी पूर्ण रात्रि तक*
⛅ *नक्षत्र - धनिष्ठा 06 नवम्बर प्रातः 06:16 तक तत्पश्चात शतभिषा*
⛅ *योग - गण्ड सुबह 07:02 तक तत्पश्चात वृद्धि*
⛅ *राहुकाल - दोपहर 02:57 से शाम 04:20 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:43*
⛅ *सूर्यास्त - 18:00*
⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - ब्रह्मलीन भगवत्पाद साँईं श्री लीलाशाहजी महाराज महानिर्वाण दिवस, कुष्मांड नवमी, अक्षय-आँवला नवमी, रंग अवधूत महाराज जयंती, नवमी वृद्धि तिथि*
 💥 *विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *आँवला (अक्षय) नवमी* 🌷
🙏🏻 *नारद पुराण के अनुसार*
🌷 *कार्तिके शुक्लनवमी याऽक्षया सा प्रकीर्तता । तस्यामश्वत्थमूले वै तर्प्पणं सम्यगाचरेत् ।।* ११८-२३ ।।*
*देवानां च ऋषीणां च पितॄणां चापि नारद । स्वशाखोक्तैस्तथा मंत्रैः सूर्यायार्घ्यं ततोऽर्पयेत् ।। ११८-२४ ।।*
*ततो द्विजान्भोजयित्वा मिष्टान्नेन मुनीश्वर । स्वयं भुक्त्वा च विहरेद्द्विजेभ्यो दत्तदक्षिणः ।। ११८-२५ ।।*
*एवं यः कुरुते भक्त्या जपदानं द्विजार्चनम् । होमं च सर्वमक्षय्यं भवेदिति विधेर्वयः ।। ११८-२६ ।।*
🍏 *कार्तिक मास के शुक्लपक्ष में जो नवमी आती है, उसे अक्षयनवमी कहते हैं। उस दिन पीपलवृक्ष की जड़ के समीप देवताओं, ऋषियों तथा पितरों का विधिपूर्वक तर्पण करें और सूर्यदेवता को अर्घ्य दे। तत्पश्च्यात ब्राह्मणों को मिष्ठान्न भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा दे और स्वयं भोजन करे। इस प्रकार जो भक्तिपूर्वक अक्षय नवमी को जप, दान, ब्राह्मण पूजन और होम करता है, उसका वह सब कुछ अक्षय होता है, ऐसा ब्रह्माजी का कथन है।*
👉🏻 *कार्तिक शुक्ल नवमी को दिया हुआ दान अक्षय होता है अतः इसको अक्षयनवमी कहते हैं।*
🙏🏻 *स्कन्दपुराण, नारदपुराण आदि सभी पुराणों के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी युगादि तिथि है। इसमें किया हुआ दान और होम अक्षय जानना चाहिये । प्रत्येक युग में सौ वर्षों तक दान करने से जो फल होता है, वह युगादि-काल में एक दिन के दान से प्राप्त हो जाता है “एतश्चतस्रस्तिथयो युगाद्या दत्तं हुतं चाक्षयमासु विद्यात् । युगे युगे वर्षशतेन दानं युगादिकाले दिवसेन तत्फलम्॥”*
🙏🏻 *देवीपुराण के अनुसार कार्तिक शुक्ल नवमीको व्रत, पूजा, तर्पण और अन्नादिका दान करनेसे अनन्त फल होता है।*
🍏 *कार्तिक शुक्ल नवमी को ‘धात्री नवमी’ (आँवला नवमी) और ‘कूष्माण्ड नवमी’ (पेठा नवमी अथवा सीताफल नवमी) भी कहते है। स्कन्दपुराण के अनुसार अक्षय नवमी को आंवला पूजन से स्त्री जाति के लिए अखंड सौभाग्य और पेठा पूजन से घर में शांति, आयु एवं संतान वृद्धि होती है।*
🍏 *आंवले के वृक्ष में सभी देवताओं का निवास होता है तथा यह फल भगवान विष्णु को भी अति प्रिय है। अक्षय नवमी के दिन अगर आंवले की पूजा करना और आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन बनाना और खाना संभव नहीं हो तो इस दिन आंवला जरूर खाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि को आंवले के पेड़ से अमृत की बूंदे गिरती है और यदि इस पेड़ के नीचे व्यक्ति भोजन करता है तो भोजन में अमृत के अंश आ जाता है। जिसके प्रभाव से मनुष्य रोगमुक्त होकर दीर्घायु बनता है। चरक संहिता के अनुसार अक्षय नवमी को आंवला खाने से महर्षि च्यवन को फिर से जवानी यानी नवयौवन प्राप्त हुआ था।*
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 

Monday, 4 November 2019

06:06

4 नवंबर 2019 का हिंदू पंचांग जाने आंवला अक्षय नवमी का फल



आज का हिन्दू पंचांग पं. विष्णुजोशी*
~ 🌞7905156547
⛅ *दिनांक 04 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - सोमवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - कार्तिक*
⛅ *पक्ष - शुक्ल*
⛅ *तिथि - अष्टमी 05 नवम्बर प्रातः 04:57 तक तत्पश्चात नवमी*
⛅ *नक्षत्र - श्रवण 05 नवम्बर प्रातः 03:24 तक तत्पश्चात धनिष्ठा*
⛅ *योग - गण्ड पूर्ण रात्रि तक*
⛅ *राहुकाल - सुबह 08:00 से सुबह 09:24 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:43*
⛅ *सूर्यास्त - 18:00*
⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - गोपाष्टमी*
 💥 *विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *अष्टमी तिथि के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *अक्षय फल देनेवाली अक्षय नवमी* 🌷
🙏🏻 *कार्तिक शुक्ल नवमी (05 नवम्बर 2019) मंगलवार को ‘अक्षय नवमी’ तथा ‘आँवला नवमी’ कहते हैं | अक्षय नवमी को जप, दान, तर्पण, स्नानादि का अक्षय फल होता है | इस दिन आँवले के वृक्ष के पूजन का विशेष महत्व  है | पूजन में कर्पूर या घी के दीपक से आँवले के वृक्ष की आरती करनी चाहिए तथा निम्न मंत्र बोलते हुये इस वृक्ष की प्रदक्षिणा करने का भी विधान है :*
🌷 *यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च |*
*तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे ||*
🍏 *इसके बाद आँवले के वृक्ष के नीचे पवित्र ब्राम्हणों व सच्चे साधक-भक्तों को भोजन कराके फिर स्वयं भी करना चाहिए | घर में आंवलें का वृक्ष न हो तो गमले में आँवले का पौधा लगा के अथवा किसी पवित्र, धार्मिक स्थान, आश्रम आदि में भी वृक्ष के नीचे पूजन कर सकते है | कई आश्रमों में आँवले के वृक्ष लगे हुये हैं | इस पुण्यस्थलों में जाकर भी आप भजन-पूजन का मंगलकारी लाभ ले सकते हैं |*

               🌞 ~ *हिन्दू पंचांग* ~ 🌞

🌷 *आँवला (अक्षय) नवमी है फलदायी* 🌷
🙏🏻 *भारतीय सनातन पद्धति में पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए महिलाओं द्वारा आँवला नवमी की पूजा को महत्वपूर्ण माना गया है। कहा जाता है कि यह पूजा व्यक्ति के समस्त पापों को दूर कर पुण्य फलदायी होती है। जिसके चलते कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को महिलाएं आँवले के पेड़ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करती हैं।*
🍏 *आँवला नवमी को अक्षय नवमी के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था। कहा जाता है कि आंवला भगवान विष्णु का पसंदीदा फल है। आंवले के वृक्ष में समस्त देवी-देवताओं का निवास होता है। इसलिए इसकी पूजा करने का विशेष महत्व होता है।*
🌷 *व्रत की पूजा का विधान* 🌷
👉🏻 *नवमी के दिन महिलाएं सुबह से ही स्नान ध्यान कर आँवला के वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा में मुंह करके बैठती हैं।*
👉🏻 *इसके बाद वृक्ष की जड़ों को दूध से सींच कर उसके तने पर कच्चे सूत का धागा लपेटा जाता है।*
👉🏻 *तत्पश्चात रोली, चावल, धूप दीप से वृक्ष की पूजा की जाती है।*
👉🏻 *महिलाएं आँवले के वृक्ष की १०८ परिक्रमाएं करके ही भोजन करती हैं।*
🍏 *आँवला नवमी की कथा* 🍏
*वहीं पुत्र रत्न प्राप्ति के लिए आँवला पूजा के महत्व के विषय में प्रचलित कथा के अनुसार एक युग में किसी वैश्य की पत्नी को पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हो रही थी। अपनी पड़ोसन के कहे अनुसार उसने एक बच्चे की बलि भैरव देव को दे दी। इसका फल उसे उल्टा मिला। महिला कुष्ट की रोगी हो गई।*
🍏 *इसका वह पश्चाताप करने लगे और रोग मुक्त होने के लिए गंगा की शरण में गई। तब गंगा ने उसे कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आँवला के वृक्ष की पूजा कर आँवले के सेवन करने की सलाह दी थी।*
🍏 *जिस पर महिला ने गंगा के बताए अनुसार इस तिथि को आँवला की पूजा कर आँवला ग्रहण किया था, और वह रोगमुक्त हो गई थी। इस व्रत व पूजन के प्रभाव से कुछ दिनों बाद उसे दिव्य शरीर व पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, तभी से हिंदुओं में इस व्रत को करने का प्रचलन बढ़ा। तब से लेकर आज तक यह परंपरा चली आ रही है।*
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

Friday, 1 November 2019

08:38

हिंदू पंचांग पंडित विष्णु जोशी के साथ





*आज का हिन्दू पंचांग
पं. विष्णु जोशी 7905156547
  * ~ 🌞
⛅ *दिनांक 01 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - शुक्रवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - कार्तिक*
⛅ *पक्ष - शुक्ल*
⛅ *तिथि - पंचमी रात्रि 12:51 तक तत्पश्चात षष्ठी*
⛅ *नक्षत्र - मूल रात्रि 09:53 तक तत्पश्चात पूर्वाषाढा*
⛅ *योग - अतिगण्ड सुबह 07:59 तक तत्पश्चात सुकर्मा*
⛅ *राहुकाल - सुबह 10:47 से दोपहर 12:10 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:42*
⛅ *सूर्यास्त - 18:01*
⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - लाभ पंचमी, श्री-सौभाग्य-पांडव-ज्ञान पंचमी*
 💥 *विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *छठ पर्व* 🌷
🙏🏻 *(02 नवम्बर, शनिवार) को छठ पूजा है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में सूर्य को साक्षात भगवान माना गया है, क्योंकि वे रोज हमें दर्शन देते हैं और उन्हीं के प्रकाश से हमें जीवनदायिनी शक्ति प्राप्त होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, रोज सूर्य की उपासना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।*
🌞 *पूजा विधि*
*छठ की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर शौच आदि कार्यों से निवृत्त होकर नदी के तट पर जाकर आचमन करें तथा सूर्योदय के समय शरीर पर मिट्टी लगाकर स्नान करें। इसके बाद पुन: आचमन कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और सप्ताक्षर मंत्र- ॐ खखोल्काय स्वाहा से सूर्यदेव को अर्घ्य दें।*
🌞 *इसके बाद भगवान सूर्य को लाल फूल, लाल वस्त्र व रक्त चंदन अर्पित करें। धूप-दीप दिखाएं तथा पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। अंत में हाथ जोड़कर सूर्यदेव से प्रार्थना करें। इसके बाद नीचे लिखे शिव प्रोक्त सूर्याष्टक का पाठ करें-*
🌷 *आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।*
*दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोस्तु ते।।*
*सप्ताश्चरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्ममज्म।*
*श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।*
*लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम्।*
*महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यम्।।*
*त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम्।*
*महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यम्।।*
*बृंहितं तेज:पुजं च वायु माकाशमेव च।*
*प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।*
*बन्धूकपुष्पसंकाशं हारकुण्डलभूषितम्।*
*एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।*
*तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेज: प्रदीपनम्।*
*महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्।।*
*तं सूर्य जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम्।*
*महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणामाम्यहम्।।*
🙏🏻 *इस प्रकार सूर्य की उपासना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।*
           🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

 🌷 *सूर्य षष्ठी* 🌷
🙏🏻 *कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान सूर्य की पूजा करने का विधान है। इस पर्व को सूर्य षष्ठी व्रत के रूप में मनाया जाता है। इस बार ये व्रत 02 नवम्बर, शनिवार को है। यह दिन सूर्य की पूजा और उससे जुड़े उपाय करने के लिए खास माना जाता है।*
➡ *घर की 8 खास जगहों पर रखें तांबे के सूर्य, हर काम में मिलेगा दोगुना फल*
👉🏻 *वास्तु पंच तत्वों पर आधारित है । ये पंच तत्व है अग्नि, वायु, पानी, पृथ्वी व आकाश । सूर्य भी अग्नि का ही स्वरूप माना गया है । सूर्य भी वास्तु शास्त्र को प्रभावित करता है । अगर वास्तु अनुसार घर की इन 8 जगहों पर तांबे के सूर्य को दीवार पर लगाया जाएं तो हर इच्छा पूरी की जा सकती है ।*
1⃣ *रात 12 से 3 बजे तक सूर्य पृथ्वी के उत्तरी भाग में होता है । उत्तर धन की दिशा होती है । अगर धन की कमी हो तो घर में जहां कीमती वस्तुओं या जेवरात आदि रखें हो, वहां तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से घर में कभी पैसों की कमी नहीं होती ।*
2⃣ *रात 3 से सुबह 6 बजे तक सूर्य पृथ्वी के उत्तर-पूर्वी भाग में होता है । यह समय चिंतन व अध्ययन का होता है । बच्चे पढ़ाई में कमजोर हो तो स्टडी रुम या बच्चों के कमरे में सूर्य प्रतिमा लगाने से पढ़ाई में सफलता मिलती है ।*
3⃣ *सुबह 6 से 9 बजे तक सूर्य पृथ्वी के पूर्वी हिस्से में रहता है । इस समय सूर्य की रोशनी रोगों से बचाती है । घर में अगर बीमारियाँ ज्यादा हो तो हाॅल में सूर्य प्रतिमा लगानी चाहिए, जहां घर के सभी सदस्य ज्यादा से ज्यादा समय बिताते हों ।*
4⃣ *सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक सूर्य पृथ्वी के दक्षिण-पूर्व में होता है । यह समय भोजन पकाने के लिए उत्तम होता है । इसलिए घर के किचन में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती ।*
5⃣ *दोपहर 12 से 3 बजे के दौरान सूर्य दक्षिण में होता है, इसे विश्रांति काल (आराम का समय) मानते है । अगर घर में अशांति या झगड़े का माहौल रहता है तो घर के मुखिया के बेडरूम में सूर्य प्रतिमा लगाने से कोई परेशानी नहीं आती ।*
6⃣ *दोपहर 3 से शाम 6 के दौरान सूर्य दक्षिण-पश्चिम भाग में होता है। यह समय अध्ययन और कार्य का समय होता है । व्यापार में नुकसान हो रहा हो तो ऑफिस या दुकान में सूर्य प्रतिमा लगाने पर बिजनेस में लगातार तरक्की होती है ।*
7⃣ *शाम 6 से रात 9 में सूर्य पश्चिम दिशा की ओर आता है । इस समय में देव पूजा और ध्यान के लिए अच्छा मानते है । इसलिए घर के मंदिर में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने से घर-परिवार पर सूर्य देव की कृपा बनी रहती है ।*
8⃣ *रात 9 से मध्य रात्रि के समय सूर्य उत्तर-पश्चिम में होता है । घर के बेडरूम में तांबे की सूर्य प्रतिमा लगाने पर वहां रहने और सोने वालों को मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।*
       🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏

Sunday, 27 October 2019

11:00

आज का हिंदू पंचांग दैनिक राशिफल के साथ-tapnewsindia






          आज का पञ्चांग*
कलियुगाब्द..........................5121
विक्रम संवत्.........................2076
शक संवत्............................1941
मास..................................कार्तिक
पक्ष.....................................कृष्ण
तिथी.................................चतुर्दशी
दोप 12.24 पर्यंत पश्चात अमावस्या
रवि...............................दक्षिणायन
सूर्योदय..............प्रातः 06.28.43 पर
सूर्यास्त..............संध्या 05.52.32 पर
सूर्य राशि................................तुला
चन्द्र राशि..............................कन्या
नक्षत्र....................................चित्रा
रात्रि 03.12 पर्यंत पश्चात स्वाति
योग..................................विष्कुम्भ
रात्रि 22.10 पर्यंत पश्चात प्रीती
करण...................................शकुन
दोप 12.24 पर्यन्त पश्चात चतुष्पद
ऋतु.....................................हेमंत
दिन...................................रविवार

🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार :-*
27 अक्तूबर सन 2019 ईस्वी ।

📜 *तिथी/पर्व/व्रत विशेष :-*
दीपावली या दीवाली अर्थात "रोशनी का त्योहार" शरद ऋतु में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन सनातनी हिंदू त्योहार है । यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है । *‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’* अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’यह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे बन्दी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है। माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे । अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए । कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी । तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं ।
दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफ़ेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी साफ़ सुथरा कर सजाते हैं। बाज़ारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाज़ार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नज़र आते हैं। दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों 'दीप' अर्थात 'दिया' व 'आवली' अर्थात 'लाइन' या 'श्रृंखला' के मिश्रण से हुई है। इसके उत्सव में घरों के द्वारों, घरों व मंदिरों पर लाखों प्रकाशकों को प्रज्वलित किया जाता है । दीपावली जिसे दिवाली भी कहते हैं ।

📜 *दीपावली से जुड़ी 10 प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं...*
*1. लक्ष्मी अवतरण -*
कार्तिक मास  की अमावस्या तिथि‍ को मां लक्ष्मी समुद्र मंथन द्वारा धरती पर प्रकट हुई थीं। दीपावली के त्योहार को मनाने का सबसे खास कारण यही है। इस पर्व को मां लक्ष्मी के स्वागत के रूप में मनाते हैं और हर घर को सजाया संवारा जाता है ताकि‍ मां का आगमन हो।
*2. भगवान विष्णु द्वारा लक्ष्मी जी को बचाना -*
इस घटना का उल्लेख हमारे शास्त्रों में मिलता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से माता लक्ष्मी को मुक्त करवाया था।
*3. भगवान राम की विजय -*
रामायण के अनुसार इस दिन जब भगवान राम, सीताजी और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या वापिस लौटे थे। उनके स्वागत में पूरी अयोध्या को दीप जलाकर रौशन किया गया था।
*4 नरकासुर वध -*
भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर 16000 स्त्र‍ियों को इसी दिन मुक्त करवाया था। इसी खुशी में दीपावली का त्यौहार दो दिन तक मनाया गया और इसे विजय पर्व के नाम से जाना गया।
*5. पांडवों की वापसी -*
महाभारत के अनुसार जब कौरव और पांडव के बीच होने वाले चौसर के खेल में पांडव हार गए, तो उन्हें 12 वर्ष का अज्ञात वास दिया गया था। पांचों पांडव अपना 12 साल का वनवास समाप्त कर इसी दिन वापस लौटे थे। उनके लौटने की खुशी में दीप जलाकर खुशी के साथ दीपावली मनाई गई थी।
*6. विक्रमादित्य का राजतिलक -*
राजा विक्रमादित्य के राजतिलक का प्रसंग भी इसी दिन से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि राजा विक्रमादित्य का राजतिलक इस दिन किया गया था, जिससे दि‍वाली का महत्व और खुशियों दुगुनी हो गईं।
*7. आर्य समाज -*
स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना भी इसी दिन की गई थी। इस कारण भी दीपावली का त्योहार विशेष महत्व रखता है।
*8. जैन धर्म -*
दीपावली का दिन जैन संप्रदाय के लोगों के लिए भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जैन धर्म इस पर्व को भगवान महावीर जी के मोक्षदिवस के रूप में मनाता है। ऐसा माना जाता है कि‍ कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही भगवान महावीर को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
*9. सिक्ख धर्म -*
सिख धर्म के लिए भी दीपावली बहुत महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन को सिख धर्म के तीसरे गुरु अमरदास जी ने लाल पत्र दिवस के रूप में मनाया था जिसमें सभी श्रद्धालु गुरु से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। इसके अलावा सन् 1577 में अमृतसर के हरिमंदिर साहिब का शिलान्यास भी दीपावली के दिन ही किया गया था।
10  सन् 1619 में सिक्ख गुरु हरगोबिन्द जी को ग्वालियर के किले में 52 राजाओं के साथ मुक्त किया जाना भी इस दिन की प्रमुख ऐतिहासिक घटना रही है। इसलिए इस पर्व को सिक्ख समाज बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी मनाता हैं। इन राजाओं व हरगोबिंद सिंह जी को मुगल बादशाह जहांगीर ने नजरबंंद किया हुआ था।

☸ शुभ अंक......................9
🔯 शुभ रंग.....................लाल

👁‍🗨 *राहुकाल :-*
संध्या 04.24 से 05.48 तक ।

⚜ *महालक्ष्मी पुजन मुहूर्त विचार :-*
अमावस्या तिथि दोप. 12.24 के पश्चात लगेगी अतः व्यापारी वर्ग के लिए सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त :
*दोप. 01.34 से 02.58 तक शुभ*

*स्थिर लग्न :*
दीपावली पूजा वृषभ लग्न में ही करना चाहिए। इससे आर्थिक समृद्धि के साथ शांति और आनंद की प्राप्ति होती है :
*वृष     - संध्या 06:59 से 08:58 तक*
*सिंह    - रात्रि 01:28 से 03:39 तक*

🌞 *उदय लग्न मुहूर्त :-*
*तुला*
05:50:33 08:05:09
*वृश्चिक*
08:05:09 10:21:21
*धनु*
10:21:21 12:26:59
*मकर*
12:26:59 14:14:08
*कुम्भ*
14:14:08 15:47:42
*मीन*
15:47:42 17:18:54
*मेष*
17:18:54 18:59:36
*वृषभ*
18:59:36 20:58:13
*मिथुन*
20:58:13 23:11:54
*कर्क*
23:11:54 25:28:04
*सिंह*
25:28:04 27:39:54
*कन्या*
27:39:54 29:50:33

🚦 *दिशाशूल :-*
पश्चिमदिशा - यदि आवश्यक हो तो दलिया, घी या पान का सेवनकर यात्रा प्रारंभ करें।

✡ *चौघडिया :-*
प्रात: 07.55 से 09.20 तक चंचल
प्रात: 09.20 से 10.45 तक लाभ
प्रात: 10.45 से 12.09 तक अमृत
दोप. 01.34 से 02.58 तक शुभ
सायं 05.48 से 07.23 तक शुभ
रात्रि 07.23 से 08.59 तक अमृत
रात्रि 08.59 से 10.34 तक चंचल ।

📿 *आज का मंत्रः*
॥ ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः ॥

॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम: ॥

*महालक्ष्मी गायत्री मंत्र :-*
॥ ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ॥

 *संस्कृत सुभाषितानि :-*
त्यजेत् धर्मं दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत् ।
त्यजेत् क्रोधमुखीं भार्यां निःस्नेहान् बान्धवांस्त्यजेत् ॥
अर्थात :-
इन्सान ने दयाहीन धर्म का, विद्याहीन गुरु का, क्रोधी पत्नी का, और स्नेहरहित संबंधीयों का त्याग करना चाहिए ।

🍃 *आरोग्यं सलाह :-*
*गुस्सा कम करने के उपाय -*

*3. खुद के लिए समय निकालें -*
व्यस्तता कई बार तनाव की वजह बनता है। पैसे प्राप्त करने या किसी को खुश करने के लिए हम कई बार खुद को समय नहीं दे पाते जिसकी वजह से हमारे अंदर असंतुष्टि और निराशा का भाव पैदा होने लगता है। अपने गुस्से को दूर करने के लिए आप खुद को समय दीजिए। यदि आप अपने आप को समय देते हैं, तो आप खुद को बेटर महसूस करेंगे।

⚜ *आज का राशिफल :-*

🐏 *राशि फलादेश मेष :-*
(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)
स्थायी संपत्ति के बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। परीक्षा, साक्षात्कार व करियर संबंधी कार्यों में सफलता प्राप्त होगी। मान-सम्मान मिलेगा। नौकरी में प्रशंसा प्राप्त होगी। यात्रा लाभदायक रहेगी। जोखिम न उठाएं। थकान महसूस होगी।

🐂 *राशि फलादेश वृष :-*
(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
शैक्षणिक व शोध इत्यादि कार्यों के परिणाम सुखद रहेंगे। पार्टी व पिकनिक का आयोजन हो सकता है। नौकरी कार्य में उत्साह व प्रसन्नता से सफलता प्राप्त होगी। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। निवेशादि लाभदायक रहेंगे। भाग्य का साथ रहेगा। जल्दबाजी न करें।

👫 *राशि फलादेश मिथुन :-*
(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
दु:खद समाचार मिल सकता है। भागदौड़ रहेगी। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। मानसिक बेचैनी रहेगी। प्रियजनों के साथ रिश्तों में खटास आ सकती है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। अपरिचितों पर अंधविश्वास न करें। कारोबार ठीक चलेगा। आय होगी। धैर्य रखें।

🦀 *राशि फलादेश कर्क :-*
(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
संबंधियों तथा मित्रों की सहायता करने का अवसर प्राप्त होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड से मनोनुकूल लाभ होगा। स्वास्थ्य कमजोर होगा। किसी बाहरी व्यक्ति पर भरोसा न करें।

🦁 *राशि फलादेश सिंह :-*
(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
घर में अतिथियों का आगमन होगा। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। लंबे प्रवास की योजना बनेगी। बड़ा काम करने का मन बनेगा। कारोबार में अनुकूलता रहेगी। पार्टनरों का सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी से बचें।

👩🏻‍🦰 *राशि फलादेश कन्या :-*
(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
बेरोजगारी दूर होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। नौकरी में उच्चाधिकारी की प्रसन्नता प्राप्त होगी। प्रतिद्वंद्वी पस्त होंगे। घर-बाहर प्रसन्नता का माहौल रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। कोई रुका हुआ कार्य पूर्ण होने के योग हैं।

⚖ *राशि फलादेश तुला :-*
(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
किसी अपने ही व्यक्ति से कहासुनी हो सकती है। स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है। फालतू खर्च होगा। असमंजस रहेगा। निर्णय लेने की क्षमता कम होगी। चिंता तथा तनाव रहेंगे। किसी अपरिचित व्यक्ति पर अंधविश्वास न करें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। अशुभ समय।

🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-*
(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
यात्रा लाभदायक रहेगी। काफी समय से रुका हुआ धन प्राप्ति के योग हैं। भरपूर प्रयास करें। आय में वृद्धि होगी। कारोबार मनोनुकूल लाभ देगा। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा। नौकरी में मातहतों का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रह सकता है। जल्दबाजी न करें।

🏹 *राशि फलादेश धनु :-*
(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)
नई योजना बनेगी। पुराने किए गए निर्णयों का लाभ अब प्राप्त होगा। सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में वृद्धि होगी। नए कार्यकारी अनुबंध हो सकते हैं। नौकरी में चैन रहेगा। घर में तनाव रह सकता है। चिंता में वृद्धि होगी।

🐊 *राशि फलादेश मकर :-*
(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)
राजकीय बाधा दूर होकर लाभ की स्थिति बनेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। धार्मिक कृत्यों में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। आय में वृद्धि होगी। व्यस्तता रहेगी। थकान महसूस होगी। किसी लंबे प्रवास की योजना बनेगी। कारोबार लाभदायक रहेगा। नौकरी में कार्यभार रहेगा।

🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-*
(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
चोट व दुर्घटना से शारीरिक हानि की आशंका है। विवाद को बढ़ावा न दें। अतिउत्साह हानिप्रद रहेगा। कुसंगति से बचें। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। किसी उलझन में फंस सकते हैं। विवेक से निर्णय लें। सार्वजनिक स्थान पर लोगों का ध्यान नहीं खींच पाएंगे। धैर्य रखें।

🐡 *राशि फलादेश मीन :-*
(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी।। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। बाहरी सहायता से कार्यों में गति आएगी। राजकीय सहयोग प्राप्त होगा। नौकरी में चैन रहेगा। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। शारीरिक कष्ट की आशंका है, अत: लापरवाही से बचें। प्रसन्नता बनी रहेगी।

☯ *आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।*

आप सभी मित्रों को दीपोत्सव पञ्च प्रदीप के तृतीया आयाम सनातनी संस्कृति के सबसे महान पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें |*


Thursday, 24 October 2019

08:56

हिंदू पंचांग 24 अक्टूबर 2019 हिंदू पंचांग







🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~
🌞पं. विष्णु जोशी 7905156547
⛅ *दिनांक 24 अक्टूबर 2019*
⛅ *दिन - गुरुवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076 (गुजरात. 2075)*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - कार्तिक (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अश्विन )*
⛅ *पक्ष - कृष्ण*
⛅ *तिथि - एकादशी रात्रि 10:19 तक तत्पश्चात द्वादशी*
⛅ *नक्षत्र - मघा दोपहर 01:19 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी*
⛅ *योग - शुक्ल दोपहर 01:38 तक तत्पश्चात ब्रह्म*
⛅ *राहुकाल - दोपहर 01:36 से शाम 03:01 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:38*
⛅ *सूर्यास्त - 18:06*
⛅ *दिशाशूल - दक्षिण दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - रमा एकादशी*
💥 *विशेष - हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है lराम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
💥 *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
💥 *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
💥 *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
💥 *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *रमा एकादशी* 🌷
🙏🏻 *रमा एकादशी ( यह व्रत बड़े – बड़े पापों को हरनेवाला, चिन्तामणि तथा कामधेनु के समान सब मनोरथों को पूर्ण करनेवाला है |*
          🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *गोवत्स द्वादशी* 🌷
🙏🏻 *कार्तिक मास (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अश्विन मास) की द्वादशी को गोवत्स द्वादशी कहते हैं । इस दिन यानी 25 अक्टूबर 2019 शुक्रवार को दूध देने वाली गाय को उसके बछड़े सहित स्नान कराकर वस्त्र ओढाना चाहिये, गले में पुष्पमाला पहनाना , सींग मढ़ना, चन्दन का तिलक करना तथा ताम्बे के पात्र में सुगन्ध, अक्षत, पुष्प, तिल, और जल का मिश्रण बनाकर निम्न मंत्र से गौ के चरणों का प्रक्षालन करना चाहिये ।*
🌷 *क्षीरोदार्णवसम्भूते सुरासुरनमस्कृते ।*
*सर्वदेवमये मातर्गृहाणार्घ्य नमो नमः ॥*
🙏🏻 *(समुद्र मंथन के समय क्षीरसागर से उत्पन्न देवताओं तथा दानवों द्वारा नमस्कृत, सर्वदेवस्वरूपिणी माता तुम्हे बार बार नमस्कार है।)*
🐄 *पूजा के बाद गौ को उड़द के बड़े खिलाकर यह प्रार्थना करनी चाहिए-*
🌷 *“सुरभि त्वं जगन्मातर्देवी विष्णुपदे स्थिता ।*
*सर्वदेवमये ग्रासं मया दत्तमिमं ग्रस ॥*
*ततः सर्वमये देवि*               
   *मातर्ममाभिलाषितं सफलं कुरू नन्दिनी ॥“*
🙏🏻 *(हे जगदम्बे ! हे स्वर्गवासिनी देवी ! हे सर्वदेवमयी ! मेरे द्वारा अर्पित इस ग्रास का भक्षण करो । हे समस्त देवताओं द्वारा अलंकृत माता ! नन्दिनी ! मेरा मनोरथ पूर्ण करो।) इसके बाद रात्रि में इष्ट , ब्राम्हण , गौ तथा अपने घर के वृद्धजनों की आरती उतारनी चाहिए।*
          🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *गोवत्स द्वादशी* 🌷
🐄 *यह चिंतामणि एवं कामधेनु के समान सब मनोरथों को पूर्ण करनेवाली है अतः इस दिन अवश्य व्रत कर विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ एवं रात्रि कीर्तन के साथ जागरण करें ।*
          🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *क्या करें धनतेरस के दिन* 🌷
➡  *25 अक्टूबर 2019 शुक्रवार को धनतेरस है ।*
*सुबह उठकर स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान धन्वंतरि की पूजा कर स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना करें ।*
*यदि धन्वंतरि का चित्र उपलब्ध न हो तो भगवान विष्णुजी की प्रतिमा में धन्वंतरि की भावना कर उनकी पूजा कर सकते हैं ।इस दिन भगवान सूर्य को निरोगता की कामना कर लाल फूल डालकर अर्घ्य दें ।सायंकाल घर के बाहर चावल, गेहूँ व गुड़ रखें उसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़े होकर मै यमराज के निमित्त दीपदान कर रहा हूँ, भगवान देवी श्यामा सहित मुझ पर प्रसन्न हो ऐसा बोलकर उस अनाज के ऊपर यमराज के निमित्त दीपक जलायें और निम्नोत्क मंत्र का उच्चारण करते हुए गंध-पुष्यादि से पूजन करें -*
*मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह ।*
*त्रयोदश्यां दीपदानात्सुर्यज: प्रीयतामिति।।(पद्मपुराण)*
🌷 *लक्ष्मी प्राप्ति हेतु लक्ष्मीजी की पूजा करें -*
*ॐ नम: भाग्यलक्ष्मी च विद्महे ।अष्टलक्ष्मी च धीमहि।तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात ।*
           🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~* 🌞
🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏

Wednesday, 23 October 2019

10:08

हिंदू पंचाग पण्डित विश्णु जोशी के साथ

🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~
 🌞पं. विष्णु जोशी 7905156547
⛅ *दिनांक 23 अक्टूबर 2019*
⛅ *दिन - बुधवार* 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 (गुजरात. 2075)*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - कार्तिक (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अश्विन )*
⛅ *पक्ष - कृष्ण* 
⛅ *तिथि - दशमी 24 अक्टूबर रात्रि 01:09 तक तत्पश्चात एकादशी*
⛅ *नक्षत्र - अश्लेशा शाम 03:14 तक तत्पश्चात मघा*
⛅ *योग - शुभ शाम 04:59 तक तत्पश्चात शुक्ल*
⛅ *राहुकाल - दोपहर 12:11 से दोपहर 01:36 तक* 
⛅ *सूर्योदय - 06:38*
⛅ *सूर्यास्त - 18:07* 
⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - हेमंत ऋतु प्रारंभ*
💥 *विशेष - 
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *एकादशी के दिन करने योग्य* 🌷
➡ *23 अक्टूबर यानी (मध्यरात्रि के बाद अर्थात 24 अक्टूबर को रात्रि 1:09 am से रात्रि 10:19 pm तक ) एकादशी है ।*
💥 *विशेष - 24 अक्टूबर गुरुवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।*
🙏🏻 *एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें .......विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *धनतेरस के दिन दीपदान* 🌷
👉🏻 *पहले बताई विधि के अनुसार यमदीपदान करें।*
🔥 *निर्धनता दूर करने के लिए अपने पूजाघर में  धनतेरस की शाम को अखंड दीपक जलाना चाहिए जो दीपावली की रात तक जरूर जलता रहे . अगर दीपक भैयादूज तक अखंड जलता रहे तो घर के सारे वास्तु दोष भी समाप्त हो जाते हैं.*
🔥 *घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें साथ ही दिए में थोड़ी सी केसर भी डाल दें।*
🔥 *घर के तेल का दीपक प्रज्वलित करें तथा उसमें दो काली गुंजा डाल दें, गन्धादि से पूजन करके अपने घर के मुख्य द्वार पर अन्न की ढ़ेरी पर रख दें। साल भर आर्थिक अनुकूलता बनी रहेगी। स्मरण रहे वह दीप रातभर जलते रहना चाहिये, बुझना नहीं चाहिये ।*
           🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *दीपावली पर लक्ष्मी प्राप्ति की साधना-विधियाँ* 🌷
➡ *25 अक्टूबर 2019 शुक्रवार को धनतेरस है ।*
👉🏻 *धनतेरस से आरम्भ करें* 
➡ *सामग्री:*
*दक्षिणावर्ती शंख, केसर, गंगाजल का पात्र,धूप , अगरबत्ती, दीपक, लाल वस्त्र l*
➡ *विधि: साधक अपने सामने गुरुदेव व लक्ष्मीजी के फोटो रखें तथा उनके सामने लाल रंग का वस्त्र बिछाकर उस पर दक्षिणावर्ती शंख रख दें l उस पर केसर से सतिया बना लें तथा कुम कुम से तिलक कर दें l*
🙏🏻 *बाद में स्फटिक की माला से निम्न मंत्र की ७ मालाएँ करें l तीन दिन तक ऐसा करने योग्य है l इतने से ही मंत्र-साधना सिद्ध हो जाती है l मंत्रजाप पूरा होने के पश्चात् लाल वस्त्र में शंख को बांधकर घर में रख दें l*
🙏🏻 *कहते हैं- जब तक वह शंख घर में रहेगा, तब तक घर में निरंतर उन्नति होती रहेगी l*
🌷 *मंत्र : ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं महालक्ष्मी धनदा लक्ष्मी कुबेराय मम गृहे स्थिरो ह्रीं ॐ नमः l*
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏

Tuesday, 22 October 2019

07:26

22 अक्टूबर 2019 का हिंदू पंचांग पण्डित विश्णु जोशी के साथ




🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~
🌞पं. विष्णु जोशी 7905156547
⛅ *दिनांक 22 अक्टूबर 2019*
⛅ *दिन - मंगलवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076 (गुजरात. 2075)*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - शरद*
⛅ *मास - कार्तिक (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अश्विन )*
⛅ *पक्ष - कृष्ण*
⛅ *तिथि - अष्टमी 23 अक्टूबर प्रातः 03:33 तक तत्पश्चात नवमी*
⛅ *नक्षत्र - पुष्य शाम 04:40 तक तत्पश्चात अश्लेशा*
⛅ *योग - साध्य शाम 07:57 तक तत्पश्चात शुभ*
⛅ *राहुकाल - शाम 03:02 से शाम 04:27 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:37*
⛅ *सूर्यास्त - 18:08*
⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - स्वामी रामतीर्थजी जयंती*
💥 *विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *धनतेरस के दिन यमदीपदान* 🌷
➡ *25 अक्टूबर 2019 शुक्रवार को धनतेरस है ।*
🙏🏻 *इस दिन यम-दीपदान जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। पूरे वर्ष में एक मात्र यही वह दिन है, जब मृत्यु के देवता यमराज की पूजा सिर्फ  दीपदान करके की जाती है। कुछ लोग नरक चतुर्दशी के दिन भी दीपदान करते हैं।*
👉🏻 *स्कंदपुराण में लिखा है*
🌷 *कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां निशामुखे ।*
*यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनिश्यति ।।*
➡ *अर्थात कार्तिक मासके कृष्णपक्ष की त्रयोदशी के दिन सायंकाल में घर के बाहर यमदेव के उद्देश्य से दीप रखने से अपमृत्यु का निवारण होता है ।*
👉🏻 *पद्मपुराण में लिखा है*
🌷 *कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां तु पावके।*
*यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनश्यति।।*
➡ *कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को घर से बाहर यमराज के लिए दीप देना चाहिए इससे दुरमृत्यु का नाश होता है।*
🔥 *यम-दीपदान सरल विधि*
*यमदीपदान प्रदोषकाल में करना चाहिए । इसके लिए आटे का एक बड़ा दीपक लें। गेहूं के आटे से  बने दीप में तमोगुणी ऊर्जा तरंगे एवं आपतत्त्वात्मक तमोगुणी तरंगे (अपमृत्यु के लिए ये तरंगे कारणभूत होती हैं) को शांत करने की क्षमता रहती है । तदुपरान्त स्वच्छ रुई लेकर दो लम्बी बत्तियॉं बना लें । उन्हें दीपक में एक -दूसरे पर आड़ी इस प्रकार रखें कि दीपक के बाहर बत्तियों के चार मुँह दिखाई दें । अब उसे तिल के तेल से भर दें और साथ ही उसमें कुछ काले तिल भी डाल दें । प्रदोषकाल में इस प्रकार तैयार किए गए दीपक का रोली , अक्षत एवं पुष्प से पूजन करें । उसके पश्चात् घर के मुख्य दरवाजे के बाहर थोड़ी -सी खील अथवा गेहूँ से ढेरी बनाकर उसके ऊपर दीपक को रखना है । दीपक को रखने से पहले प्रज्वलित कर लें और दक्षिण दिशा (दक्षिण दिशा यम  तरंगों के लिए पोषक होती है अर्थात दक्षिण दिशा से यमतरंगें  अधिक मात्रा में आकृष्ट एवं प्रक्षेपित होती हैं) की ओर देखते हुए चार मुँह के दीपक को खील आदि की ढेरी के ऊपर रख दें । ‘ॐ यमदेवाय नमः ’ कहते हुए दक्षिण दिशा में नमस्कार करें ।*
🔥 *यम दीपदान का मन्त्र :*
*मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह |*
*त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम ||*
➡ *इसका अर्थ है, धनत्रयोदशीपर यह दीप मैं सूर्यपुत्रको अर्थात् यमदेवताको अर्पित करता हूं । मृत्युके पाशसे वे मुझे मुक्त करें और मेरा कल्याण करें ।*
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏

Monday, 21 October 2019

08:23

हिंदू पंचांग पण्डित विश्णु जोशी के साथ 21 अक्टूबर 2019



🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~
🌞पं. विष्णु जोशी 7905156547
⛅ *दिनांक 21 अक्टूबर 2019*
⛅ *दिन - सोमवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076 (गुजरात. 2075)*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - शरद*
⛅ *मास - कार्तिक (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अश्विन)*
⛅ *पक्ष - कृष्ण*
⛅ *तिथि - सप्तमी सुबह 06:44 तक तत्पश्चात अष्टमी*
⛅ *नक्षत्र - पुनर्वसु शाम 05:33 तक तत्पश्चात पुष्य*
⛅ *योग - सिद्ध रात्रि 10:28 तक तत्पश्चात साध्य*
⛅ *राहुकाल - सुबह 07:55 से सुबह 09:21 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:36*
⛅ *सूर्यास्त - 18:09*
⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - कालाष्टमी, अष्टमी क्षय तिथि*
💥 *विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा  शरीर का नाश होता है।एवं अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *हेमंत ऋतु* 🌷
➡ *23 अक्टूबर 2019 बुधवार से हेमन्त ऋतु प्रारंभ।*
👉🏻 *पथ्य आहार :- वातनाशक, मधुर, खट्टा, कड़वा, तीखा, घर की बनी मिठाई, दूध, ताजी दही, मट्ठा, मलाई, रबड़ी, नये चावल, उड़द के बड़े पकोड़े, गाजर, टमाटर, बीट, काला चना, खजूर, सूखा  मेवा, मक्खन, घी, दूध से बनी खीर, गेहूँ के आटे से बने पदार्थ, उड़द दाल, गरम जल, ऋतुनुसार हरि सब्जियाँ जैसे कि पालक, मेथी, सरसों, मकाई का आटा एवं रसयुक्त पदार्थों का सेवन करें ।*
👉🏻 *पथ्य विहार :- वातनाशक तेल से मालिश करें ।आँवला, तिल के उबटन से स्नान, व्यायाम तथा सुबह की सूर्यकिरणों का सेवन करें ।*
👉🏻 *अपथ्य आहार :- सूखे चने, सूखे मटर, मुरमुरे जैसे वातवर्धक और रुखे पदार्थ तथा ठंडे पेय-पदार्थ का सेवन न करें ।*
👉🏻 *अपथ्य विहार :- ठंडी हवा का सेवन ।*
   🌷 *स्वास्थ्यप्रद नुस्खे* 🌷
1⃣ *सोंठ, गुड़ और घी को मिक्स करके गोलियाँ बनायें और रोज सुबह दो गोलियाँ खायें ।*
2⃣ *सुबह 5 से 10 ग्राम काले तिल व गुड़ का खाली पेट सेवन करें ।*
3⃣ *रात को एक मुट्ठी काले चने व दो खजूर पानी में भिगोकर रखें और सुबह चबा-चबाकर खायें ।*
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *हेमन्त और शिशिर की ऋतुचर्या* 🌷
➡ *23 अक्टूबर 2019 बुधवार से हेमन्त ऋतु प्रारंभ।*
➡ *शीतकाल आदानकाल और विसर्गकाल दोनों का सन्धिकाल होने से इनके गुणों का लाभ लिया जा सकता है क्योंकि विसर्गकाल की पोषक शक्ति हेमन्त ऋतु हमारा साथ देती है। साथ ही शिशिर ऋतु में आदानकाल शुरु होता जाता है लेकिन सूर्य की किरणें एकदम से इतनी प्रखर भी नहीं होती कि रस सुखाकर हमारा शोषण कर सकें। अपितु आदानकाल का प्रारम्भ होने से सूर्य की हल्की और प्रारम्भिक किरणें सुहावनी लगती हैं।*
➡ *शीतकाल में मनुष्य को प्राकृतिक रूप से ही उत्तम बल प्राप्त होता है। प्राकृतिक रूप से बलवान बने मनुष्यों की जठराग्नि ठंडी के कारण शरीर के छिद्रों के संकुचित हो जाने से जठर में  सुरक्षित रहती है जिसके फलस्वरूप अधिक प्रबल हो जाती है। यह प्रबल हुई जठराग्नि ठंड के कारण उत्पन्न वायु से और अधिक भड़क उठती है। इस भभकती अग्नि को यदि आहाररूपी ईंधन कम पड़े तो वह शरीर की धातुओं को जला देती है। अतः शीत ऋतु में खारे, खट्टे मीठे पदार्थ खाने-पीने चाहिए। इस ऋतु में शरीर को बलवान बनाने के लिए पौष्टिक, शक्तिवर्धक और गुणकारी व्यंजनों का सेवन करना चाहिए।*
➡ *इस ऋतु में घी, तेल, गेहूँ, उड़द, गन्ना, दूध, सोंठ, पीपर, आँवले, वगैरह में से बने स्वादिष्ट एवं पौष्टिक व्यंजनों का सेवन करना चाहिए। यदि इस ऋतु में जठराग्नि के अनुसार आहार न लिया जाये तो वायु के प्रकोपजन्य रोगों के होने की संभावना रहती है। जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी न हो उन्हें रात्रि को भिगोये हुए देशी चने सुबह में नाश्ते के रूप में खूब चबा-चबाकर खाना चाहिए। जो शारीरिक परिश्रम अधिक करते हैं उन्हें केले, आँवले का मुरब्बा, तिल, गुड़, नारियल, खजूर आदि का सेवन करना अत्यधिक लाभदायक है।*
➡ *एक बात विशेष ध्यान में रखने जैसी है कि इस ऋतु में रात लंबी और ठंडी होती है।  अतः केवल इसी ऋतु में आयुर्वेद के ग्रंथों में सुबह नाश्ता करने के लिए कहा गया है, अन्य ऋतुओं में नहीं।*
➡ *अधिक जहरीली (अंग्रेजी) दवाओं के सेवन से जिनका शरीर दुर्बल हो गया हो उनके लिए भी विभिन्न औषधि प्रयोग जैसे कि अभयामल की रसायन, वर्धमान पिप्पली प्रयोग, भल्लातक रसायन, शिलाजित रसायन, त्रिफला रसायन, चित्रक रसायन, लहसुन के प्रयोग वैद्य से पूछ कर किये जा सकते हैं।*
➡ *जिन्हें कब्जियत की तकलीफ हो उन्हें सुबह खाली पेट हरड़े एवं गुड़ अथवा यष्टिमधु एवं त्रिफला का सेवन करना चाहिए। यदि शरीर में पित्त हो तो पहले एक टुकी चूर्ण एवं मिश्री लेकर उसे निगद लें । सुदर्शन चूर्ण अथवा गोली थोड़े दिन खायें।*
➡ *विहारः आहार के साथ विहार एवं रहन-सहन में भी सावधानी रखना आवश्यक है। इस ऋतु में शरीर को बलवान बनाने के लिए तेल की मालिश करनी चाहिए। चने के आटे, लोध्र अथवा आँवले के उबटन का प्रयोग लाभकारी है। कसरत करना अर्थात् दंड-बैठक लगाना, कुश्ती करना, दौड़ना, तैरना आदि एवं प्राणायाम और योगासनों का अभ्यास करना चाहिए। सूर्य नमस्कार, सूर्यस्नान एवं धूप का सेवन इस ऋतु में लाभदायक है। शरीर पर अगर का लेप करें। सामान्य गर्म पानी से स्नान करें किन्तु सिर पर गर्म पानी न डालें। कितनी भी ठंडी क्यों न हो सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। रात्रि में सोने से हमारे शरीर में जो अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है वह स्नान करने से बाहर निकल जाती है जिससे शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है।*
➡ *सुबह देर तक सोने से यही हानि होती है कि शरीर की बढ़ी हुई गर्मी सिर, आँखों, पेट, पित्ताशय, मूत्राशय, मलाशय, शुक्राशय आदि अंगों पर अपना खराब असर करती है जिससे अलग-अलग प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से इन अवयवों को रोगों से बचाकर स्वस्थ रखा जा सकता है।*
➡ *गर्म-ऊनी वस्त्र पर्याप्त मात्रा में पहनना, अत्यधिक ठंड से बचने हेतु रात्रि को गर्म कंबल ओढ़ना, रजाई आदि का उपयोग करना, गर्म कमरे में सोना, अलाव तापना लाभदायक है।*
➡ *अपथ्यः इस ऋतु में अत्यधिक ठंड सहना, ठंडा पानी, ठंडी हवा, भूख सहना, उपवास करना, रूक्ष, कड़वे, कसैले, ठंडे एवं बासी पदार्थों का सेवन, दिवस की निद्रा, चित्त को काम, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष से व्याकुल रखना हानिकारक है।*
             🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🍀🌷🌻🌺🌸🌹🍁🙏

Sunday, 20 October 2019

08:40

हिंदू पंचांग 20 अक्टूबर 2019 पण्डित विश्णु जोशी के साथ

आज का हिन्दू पंचांग* 

🌞पं. विष्णु जोशी 7905156547
⛅ *दिनांक 20 अक्टूबर 2019*
⛅ *दिन - रविवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076 (गुजरात. 2075)*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - शरद*
⛅ *मास - कार्तिक (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अश्विन )*
⛅ *पक्ष - कृष्ण*
⛅ *तिथि - षष्ठी सुबह 07:29 तक तत्पश्चात सप्तमी*
⛅ *नक्षत्र - आर्द्रा शाम 05:53 तक तत्पश्चात पुनर्वसु*
⛅ *योग - शिव रात्रि 12:33 तक तत्पश्चात सिद्ध*
⛅ *राहुकाल - शाम 04:28 से शाम 05:54 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:36*
⛅ *सूर्यास्त - 18:09*
⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - रविवारी सप्तमी  (सुबह 07:30 से 21 अक्टूबर सूर्योदय तक)*
विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

               🌞 *~ हिन्दू पंचांग 


🌷 *पटाखों से जलने पर* 🌷
🎆 *पटाखों से जलने पर जले हुए स्थान पर कच्चे आलू के पतले पतले चिप्स काट कर रख दें या आलू का रस लगा दें । और कुछ ना लगाये । इससे १-२ घंटे में आराम हो जायेगा ।*

           ~ हिन्दू पंचांग 


🌷 *राहु मंत्र* 🌷
🙏🏻 *राहुदेवता का मंत्र है ..*
🌷 *ॐ राहवे नम: |  ॐ राहवे नम: |*
🙏🏻 *अर्धकाय महावीर्यं,  चंद्रादित्य विमर्दनं |*
*सिंहिका गर्भसंभूतं ,तं राहूं प्रणमाम्यहं ||*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *शास्त्रों के अनुसार* 🌷
 🔵 *दीपावली के दिनों में न करें ये 7 काम*
🙏🏻 *दीपावली के दिनों में देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय किए जाते है, पूजा की जाती है, लेकिन इन उपायों के साथ ही कुछ सावधानियां भी रखनी जरूरी हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि दीपावली के दिनों में हमें कौन-कौन काम नहीं करना चाहिए। यदि वर्जित किए गए काम दीपावली पर किए जाते हैं तो कई उपाय करने के बाद भी लक्ष्मी कृपा प्राप्त नहीं हो पाती है।*
🔵 *यहां जानिए दीपोत्सव में कौन-कौन से काम न करें...*
*सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए*
*वैसे तो हर रोज सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए, लेकिन काफी लोग ऐसे हैं जो सुबह देर से ही उठते हैं। शास्त्रों के अनुसार दीपावली के दिनों में ब्रह्म मुहूर्त में ही उठ जाना चाहिए। जो लोग इन दिनों में सूर्योदय के बाद तक सोते रहते हैं, उन्हें महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं हो पाती है।*
माता-पिता और बुजुर्गों का अपमान न करें*
*दीपावली पर इस बात का विशेष ध्यान रखें कि किसी भी परिस्थिति में कोई अधार्मिक काम न हो। माता-पिता एवं बुजुर्गों का सम्मान करें। जो लोग माता-पिता का अनादर करते हैं, उनके यहां देवी-देवताओं की कृपा नहीं होती है और दरिद्रता बनी रहती है। किसी को धोखा ना दें। झूठ न बोलें। सभी से प्रेम पूर्वक व्यवहार करें।*
*घर में गंदगी न रखें*
*दीपावली पर घर में गंदगी नहीं होना चाहिए। घर का कोना-कोना एकदम साफ एवं स्वच्छ होना चाहिए। किसी भी प्रकार की बदबू घर में या घर के आसपास नहीं होनी चाहिए। सफाई के साथ ही घर को महकाने के लिए सुगंधित पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है।*
 *क्रोध न करें*
*दीपावली पर क्रोध नहीं करना चाहिए और जोर से चिल्लाना भी अशुभ रहता है। जो लोग इन दिनों क्रोध करते हैं या जोर से चिल्लाते हैं, उन्हें लक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं हो पाती है। घर में शांत, सुखद एवं पवित्र वातावरण बनाए रखना चाहिए। लक्ष्मी ऐसे घरों में निवास करती हैं जहां शांति रहती है।*
शाम के समय न सोएं*
*कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर दिन में या शाम के समय सोना नहीं चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बीमार है, वृद्ध है या कोई स्त्री गर्भवती है तो वह दिन में या शाम को सो सकती हैं, लेकिन स्वस्थ व्यक्ति को दिन में या शाम को सोना नहीं चाहिए। शास्त्रों के अनुसार जो लोग ऐसे समय में सोते हैं, वे निर्धन बने रहते हैं।*
*वाद-विवाद न करें*
*इन दिनों में इस बात का भी ध्यान रखें कि घर में किसी भी प्रकार का कलह या झगड़ा नहीं होना चाहिए। घर-परिवार के सभी सदस्य प्रेम से रहें और खुशी का माहौल बनाकर रखें। जिन घरों में झगड़ा या कलह होता है, वहां देवी की कृपा नहीं होती है। घर के साथ ही बाहर भी इस बात का ध्यान रखें कि किसी से वाद-विवाद या झगड़ा ना करें।*
नशा न करें*
*शास्त्रों के अनुसार इन दिनों में किसी भी प्रकार का नशा करना वर्जित किया गया है। जो लोग दीपावली के दिन नशा करते हैं, वे हमेशा दरिद्र रहते हैं। नशे की हालत में घर की शांति भंग हो सकती है और सभी सदस्यों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। इससे बचना चाहिए। अन्यथा वाद-विवाद हो सकते हैं और लक्ष्मी पूजा भी ठीक से नहीं हो पाती है।*

               ~ हिन्दू पंचांग 

Saturday, 19 October 2019

07:04

हिंदू पंचांग पण्डित विश्णु जोशी के साथ

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 हिन्दू पंचांग

🌞पं. विष्णु जोशी 7905156547
⛅ *दिनांक 19 अक्टूबर 2019*
⛅ *दिन - शनिवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076 (गुजरात. 2075)*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - शरद*
⛅ *मास - कार्तिक (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अश्वीन)*
⛅ *पक्ष - कृष्ण*
 *तिथि - पंचमी सुबह 07:44 तक तत्पश्चात षष्ठी*
नक्षत्र - मॄगशिरा शाम 05:41 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
योग - परिघ 20 अक्टूबर रात्रि 02:11 तक तत्पश्चात शिव*
⛅ *राहुकाल - सुबह 09:20 से सुबह 10:46 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:35*
⛅ *सूर्यास्त - 18:12*
⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण -
💥 *विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
💥 *ब्रह्म पुराण' के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- 'मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।' (ब्रह्म पुराण')*
💥 *शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय।' का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण')*
💥 *हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण)*

               हिन्दू पंचांग 


🌷 *शालिग्राम का दान* 🌷
🙏🏻 *स्कन्दपुराण के अनुसार*
🌷 *सप्तसागरपर्यंतं भूदानाद्यत्फलं भवेत् ।।*
*शालिग्रामशिलादानात्तत्फलं समवाप्नुयात् ।।*
*शालिग्रामशिलादानात्कार्तिके ब्राह्मणी यथा ।।*
➡ *सात समुद्रों तक की पृथ्वी का दान करने से जो फल प्राप्त होता है, शालिग्राम शिला के दान से मनुष्य उसी फल को पा लेता है । अतः कार्तिक मास में स्नान तथा दानपूर्वक शालिग्राम शिला का दान अवश्य करना चाहिए।*
            🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *भगवान श्री कृष्ण* 🌷
🙏🏻 *महाभारत, शान्तिपर्व॰ ४७/९२*
🌷 *एकोऽपि कृष्णस्य कृतः प्रणामो दशाश्वमेधावभृथेन तुल्यः ।*
*दशाश्वमेधी पुनरेति जन्म कृष्णप्रणामी न पुनर्भवाय ॥*
🙏🏻 *नारदपुराण , उत्तरार्ध, ६/३*
*एको हि कृष्णस्य कृतः प्रणामो दशाश्वमेधावभृथेन तुल्यः ।।*
*दशाश्वमेधी पुनरेति जन्म कृष्णप्रणामी न पुनर्भवाय ।। ६-३ ।।*
🙏🏻 *स्कन्दपुराण, वैष्णवखण्डः*
🌷 *एकोऽपि गोविन्दकृतः प्रणामः शताश्वमेधावभृथेन तुल्यः ।।*
*यज्ञस्य कर्त्ता पुनरेति जन्म हरेः प्रणामो न पुनर्भवाय ।।*
➡ *जिसका अर्थ है*
  *‘भगवान्‌ श्रीकृष्णको एक बार भी प्रणाम किया जाय तो वह दस अश्वमेघ यज्ञों के अन्त में किये गये स्नान के समान फल देनेवाला होता है । इसके सिवाय प्रणाम में एक विशेषता है कि दस अश्वमेघ करने वाले का तो पुनः संसार में जन्म होता है, पर श्रीकृष्को प्रणाम करनेवाला अर्थात्‌ उनकी शरणमें जानेवाला फिर संसार-बन्धनमें नहीं आता ।’*

             हिन्दू पंचांग 


Friday, 18 October 2019

07:38

हिंदू पंचांग पण्डित विश्णु जोशी के साथ




🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 
🌞पं. विष्णु जोशी 7905156547
⛅ *दिनांक 18 अक्टूबर 2019*
⛅ *दिन - शुक्रवार* 
⛅ *विक्रम संवत - 2076 (गुजरात. 2075)*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - शरद*
⛅ *मास - कार्तिक (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार अश्विन )*
⛅ *पक्ष - कृष्ण* 
⛅ *तिथि - चतुर्थी सुबह 07:29 तक तत्पश्चात पंचमी*
⛅ *नक्षत्र - रोहिणी शाम 05:00 तक तत्पश्चात मॄगशिरा*
⛅ *योग - वरीयान् 19 अक्टूबर प्रातः 03:24 तक तत्पश्चात परिघ*
⛅ *राहुकाल - सुबह 10:46 से दोपहर 12:12 तक* 
⛅ *सूर्योदय - 06:35*
⛅ *सूर्यास्त - 18:12* 
⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - 
💥 *विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *घातक रोगों से मुक्ति पाने का उपाय* 🌷
👉🏻 *20 अक्टूबर 2019 को सुबह 07:30 से 21 अक्टूबर सूर्योदय तक) रविवारी सप्तमी है।*
🙏🏻 *रविवार सप्तमी के दिन बिना नमक का भोजन करें। बड़ दादा के १०८ फेरे लें । सूर्य भगवान का पूजन करें, अर्घ्य दें व भोग दिखाएँ, दान करें । तिल के तेल का दिया सूर्य भगवान को दिखाएँ ये मंत्र बोलें :-*
🌷 *"जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ।।"*
💥 *नोट : घर में कोई बीमार रहता हो या घातक बीमारी हो तो परिवार का सदस्य ये विधि करें तो बीमारी दूर होगी ।* 
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि* 
🙏🏻 *सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं।*
🌷 *इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है।*
🙏🏻 *(शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याया (10)*
           🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *रविवार सप्तमी* 🌷
🙏🏻 *रविवार सप्तमी के दिन जप/ध्यान करने का वैसा ही हजारों गुना फल होता है जैसा की सूर्य/चन्द्र ग्रहण में जप/ध्यान करने से होता है  |*
🙏🏻 *रविवार सप्तमी के दिन अगर कोई नमक मिर्च बिना का भोजन करे और सूर्य भगवान की पूजा करे , तो उसकी घातक बीमारियाँ दूर हो सकती हैं , अगर बीमार व्यक्ति न कर सकता हो तो कोई और बीमार व्यक्ति के लिए यह व्रत करे | इस दिन सूर्यदेव का पूजन करना चाहिये |*
🌞 *सूर्य भगवान पूजन विधि* 🌞
🙏🏻 *१) सूर्य भगवान को तिल के तेल का दिया जला कर दिखाएँ , आरती करें |*
🙏🏻 *२) जल में थोड़े चावल ,शक्कर , गुड , लाल फूल या लाल कुम कुम मिला कर सूर्य भगवान को अर्घ्य दें |*
🌞 *सूर्य भगवान अर्घ्य मंत्र* 🌞
🌷 *1. ॐ मित्राय नमः।*
🌷 *2. ॐ रवये नमः।*
🌷 *3. ॐ सूर्याय नमः।*
🌷 *4. ॐ भानवे नमः।*
🌷 *5. ॐ खगाय नमः।*
🌷 *6. ॐ पूष्णे नमः।*
🌷 *7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।*
🌷 *8. ॐ मरीचये नमः।*
🌷 *9. ॐ आदित्याय नमः।*
🌷 *10. ॐ सवित्रे नमः।*
🌷 *11. ॐ अर्काय नमः।*
🌷 *12. ॐ भास्कराय नमः।*
🌷 *13. ॐ श्रीसवितृ-सूर्यनारायणाय नमः।*
          🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻