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Friday, 15 May 2020

14:56

श्रमिक विरोधी कानूनों के खिलाफ श्रमिक विकास संगठन (SVS) आम आदमी पार्टी का आज एक दिवसीय देशव्यापी सत्याग्रह हुआ| अगले चरण में 1 जून से देशव्यापी आंदोलन शुरू होगा|


  भोपाल 15 मई । मध्य प्रदेश मैं भाजपा खरीद-फरोख्त कर सरकार मैं आते ही अपने रंग दिखाने प्रारंभ कर दिए श्रम कानूनों में बदलाव कर मध्य प्रदेश सरकार ने काम के घंटों को 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर श्रम कानूनों में बदलाव की घोषणा कर श्रमिक विरोधी बदलाव कर दिए हैं

राज्य सरकारों द्वारा औद्योगिक विवाद अधिनियम और कारखाना अधिनियम, 'पेमेंट ऑफ वेजेज एक्ट 1936' सहित प्रमुख अधिनियमों में संशोधन किए हैं.  ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 को 3 साल के लिए रोक दिया गया है| श्रमिकों के 38 कानूनों में बदलाव किये है जिससे ILO कन्वेंशन 87), सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार (ILO कन्वेंशन 98), ILO कन्वेंशन 144 और साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत आठ घंटे के कार्य दिवस का घोर उल्लंघन हो रहा है ।

 *पंकज सिंह ने कहा कि* राज्य सरकारों द्वारा लेबर कानून के बदलाव से मुख्य संभावित खतरे पैदा हो गए हैं ।
1. उद्योगों को सरकारी व् यूनियन की  जांच और निरीक्षण से मुक्ति देने से कर्मचारियों/ श्रमिकों का शोषण बढ़ेगा.
2. शिफ्ट व कार्य अवधि में बदलाव की मंजूरी मिलने से कर्मचारियों / श्रमिकों को बिना साप्ताहिक अवकाश के प्रतिदिन 8 घंटे से ज्यादा काम करना पड़ेगा । जो कि 8 घंटे काम के एक लम्बी लड़ाई के बाद प्राप्त हुए थे ।
3.श्रमिक यूनियनों को मान्यता न मिलने से कर्मचारियों / श्रमिकों के अधिकारों की आवाज कमजोर होगी और पूंजीपतियों का मनमानापन बढ़ेगा . मजदूरों के काम करने की परिस्थिति और उनकी सुविधाओं पर ट्रेड यूनियन कि दखल /निगरानी खत्म हो जाएगी.
4. उद्योग-धंधों को ज्यादा देर खोलने से वहां श्रमिकों को डबल शिफ्ट करनी पड़ेगी जिससे शोषण बढ़ेगा ।
5. पहले प्रावधान था कि जिन उद्योग में 100 या ज्यादा मजदूर हैं, उसे बंद करने से पहले श्रमिकों का पक्ष सुनना होगा और अनुमति लेनी होगी. अब ऐसा नहीं होगा. इससे  बड़े पैमाने पर श्रमिकों का शोषण बढ़ेगा | उद्योगों में बड़े पैमाने पर छंटनी और वेतन कटौती शुरू हो सकती है.
6. अब कानून में छूट के बाद  ग्रेच्युटी देने से बचने के लिए उद्योग, ठेके पर श्रमिकों की हायरिंग बढ़ा सकते हैं। जिससे बड़ी संख्या में बेरोजगारी बढ़ेगी । 
7-मालिक श्रमिकों को उचित वेंटिलेशन, शौचालय, बैठने की सुविधा, पीने का पानी, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, सुरक्षात्मक उपकरण, कैंटीन, क्रेच, साप्ताहिक अवकाश और आराम के अंतराल प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं होंगे, जो कि श्रमिकों के मूल अधिकार थे। 
श्रमिक विकास संगठन(SVS) असंवैधानिक तरीके से श्रमिक कानून में किए गए बदलाव का पूर्णत: विरोध जताते हुए मज़दूरों के हक़ की लड़ाई लड़ रही है  

आज संगठन के सभी पदाधिकारियों/ सदस्यों द्वारा देशव्यापी सत्याग्रह "सामूहिक उपवास किया गया| अगले चरण में तानाशाही सरकार के खिलाफ 1 जून से देशव्यापी आंदोलन शुरू होगा| 


 नसीम जावेद

Monday, 20 April 2020

21:28

आम आदमी पार्टी ने जनसमस्याओं के निराकरण हेतु लिखा मुख्यमंत्री को पत्र



मध्यप्रदेश/आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज सिंह जी ने वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान आम जन को हो रही समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी को पत्र लिखा, जिसमें मुख्यतः इन बिंदुओं की तरफ सरकार का ध्यानाकर्षित कराया :-

 *1.* *अभिभावकों को विद्यालय शुल्क* में सहूलियत दी जाए, जैसे पंजीयन शुल्क, वाहन शुल्क, सुरक्षा निधि आदि शुल्क लेने के लिए दबाव न बनाया जाए ।

*2.* *घरेलू बिजली बिल* कोरोना महामारी संकट के दौरान प्रदेशभर की आम जनता के बिजली बिल माफ किए जाएं ।

*3.* *प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाओं* में हो रही अनियमितताओं में सुधार किया जाए।

आज जब प्रदेश भर में समस्त उद्योग धंधे, कल-कारखाने, रोजगार, ट्रांसपोर्टेशन आदि लॉकडाउन के चलते बंद हैं तब आम आदमी के समक्ष जीवन यापन हेतु भोजन व्यवस्था कर पाना एक संकट का विषय बन गया है।
महोदय आपके द्वारा संचालित योजनाएं सुचारू रूप से जरूरतमंद लोगों तक उपयुक्त रूप से नहीं पहुंच पा रही हैं। आज जब प्रदेश की जनता घोर संकट से जूझ रही है तो प्रदेश सरकार का यह उत्तरदायित्व है कि इस घोर संकट काल में अपनी जनता की यथासंभव सहायता करे।

Monday, 23 March 2020

06:23

एमपी: कौन बनेगा मुख्‍यमंत्री...


मध्‍यप्रदेश में सत्‍तापलट के बाद अब कोरोना से निपटने के लिये लागू जनता कर्फ्यू के बीच प्रदेश में कौन बनेगा मुख्‍यमंत्री का सवाल हर किसी के मन में कौंध रहा हैं। वैसे बीजेपी में कांग्रेस की तरह से ओपन फ्लोर पर कुछ दिखाई नहीं देता, लेकिन अंदरखाने वह सब कुछ होता है, जो राजनीति में हासिल करने के लिए किया जाता हैं। चर्चा में सबसे पहला नाम पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम इस दौड़ में है। इसके अतिरिक्‍त जो दूसरा नाम है, वह केन्‍द्रीय मंत्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर का है।

मध्‍यप्रदेश में अगर शिवराज सिंह एवं डॉ. नरोत्‍तम मिश्रा सबसे ज्‍यादा सक्रिय रहे तो दिल्‍ली में तोमर का निवास इस जोड़-तोड़ की राजनीति का केन्‍द्र रहा। वैसे इस सत्‍तापलट के किरदारों में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री भूपेन्‍द्र सिंह सहित बैंगलूरू में युवा बीजेपी नेता अरविंद भदौरिया भी शामिल रहे। लेकिन मुख्‍यत: जो नाम केन्‍द्र में हाईकमान के सामने जोन ऑफ कंसीडरेशन में है, उसमें शिवराज सिंह, नरेन्‍द्र तोमर, डॉ. नरोत्‍तम मिश्रा के नाम प्रमुख हैं। एक नाम कैलाश विजयवर्गीय का भी है, जो इन दिनों केन्‍द्र में ही अपना अधिकांश समय देते है। इसीलिए ज्‍यादा विवाद होने पर उन्‍हें भी प्रदेश में भेजा जा सकता है। सत्‍तापलट में उन्‍होंने भी सायलेंट रोल अदा किया है। जातिगत समीकरण में थावरचंद गहलोत का नाम भी सामने आता है।

राजनीतिक प्रेक्षकों की माने तो पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह को चौ‍थी बार इस पद के सबसे प्रबल दोवदारों में देखा जा रहा है। पिछड़ा वर्ग से आने वाले इस नेता को होने वाले उप चुनावों (24 या 25 सीटों पर ) के लिए सबसे ज्‍यादा उपयुक्‍त नेता माना जा रहा है। उधर, चम्‍बल क्षेत्र की राजनीति में अब नरेन्‍द्र सिंह ताेमर, ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया तथा बीजेपी के प्रदेशाध्‍यक्ष वीडी शर्मा तीन बड़े नाम हो गये है। सिंधिया को केन्‍द्र की राजनीति में रखने पर इस क्षेत्र से दो नाम हो जाएंगे। बीजेपी के पास प्रदेश में वैसे ही बड़े नेताओं की भरमार है, इसलिए हो सकता है कि तोमर को फिर प्रदेश में भेजा जाए। तोमर के नाम की चर्चा करने वाले वो नेता है, जो मध्‍यप्रदेश में चेहरा बदलने की राय रखते है। तोमर के माइनस पाइंट में यह भी है कि अगर उन्‍हें मौका दिया गया तो चम्‍बल क्षेत्र में नेताओं का वजन भौगोलिक हिसाब से ज्‍यादा हाे जाएगा।  उधर, 22 कांग्रेसी विधायकों में से 16 ग्वालियर या उसके आस-पास के क्षेत्र से चुनकर आते हैं। इस क्षेत्र में सिंधिया का खासा प्रभाव है। उपचुनाव में सिंधिया के साथ ही यहां केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर फैक्टर भी काम करेंगा।

ऑपरेशन लोटस के नाम पर प्रदेश की राजनीति में परिवर्तन करने की शुरूआत हुई थी। इसके प्रमुख कर्ताधर्ताओ में सबसे पहला नाम डॉ. नरोत्‍तम मिश्रा का है। इसमें अरविंद भदौरिया और उमाशंकर गुप्‍ता सहित अन्‍य का भी जिम्‍मेदारी दी गयी। ये नेता आखिर तक बैंगलूरू में जमे रहे। लेकिन सबसे ज्‍यादा सक्रिय भदौरिया रहे। जो बागी पूर्व हो ये विधायकों को दिल्‍ली और फिर भोपाल वापिस लाने तक साथ रहे। आखिर मौके पर पर्दे के पीछे से काम कर रहे नरोत्‍तम मिश्रा भी उन्‍हें दिल्‍ली लेने गये। उन्‍हें बीजेपी ज्‍वाइन करवाई और फिर अभी भी दिल्‍ली में ही जमे हुए हैं। मिश्रा का दावा भी बनता है। इसीलिए वो दिल्‍ली दरबार में अपना पक्ष रखने में लगे हुए है। बीजेपी के राष्‍ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की ओर से वैसे तो सीधे तौर पर कोई दावा नहीं है, लेकिन अगर अंदरखाने में ज्‍यादा खींचतान मची तो फिर विजयवर्गीय का नाम हाईकमान की ओर से रखा जा सकता है। विजयवर्गीय केन्‍द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीब माने जाते है। जातीय समीकरणों को देखते हुए थावरचंद गहलोत भी एक नाम है। हांलाकि उनका नाम हमेशा ही दौड़ में रहता है, मगर अभी तक ऐसा गणित नहीं बना कि उन्‍हें इसका लाभ मिले। वैसे भूपेन्‍द्र सिंह भी मुख्‍यमंत्री पद की दौड़ में है।

कोराना वायरस और प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के जनता कर्फ्यू के आव्‍हान् के कारण जो नेता दिल्‍ली मे है, वो वहीं है, और जो प्रदेश में है, वो यहीं से अन्‍य माध्‍यमों से अपनी जमावट में लगे हुए है। पिछले एक पखवाड़े से अपने क्षेत्रों में नही गये बीजेपी के विधायकों ने भोपाल वापसी तो कर ली, मगर अभी उनमें से अधिकांश वाे विधायक जो मंत्री पद की दौड़ में हैं, यहीं जमे हुए हैं।

माना जा रहा है कि सोमवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में नेता का फैसला होगा। इसमें नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के इस्तीफे के बाद नए नेता का चुनाव किया जाएगा। विधायक दल की बैठक के लिए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे पर्यवेक्षक बनाए जाने की कवायद चल रही है। अभी औपचारिक आदेश जारी नहीं किए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में सुबह दिग्गज नेताओं की बैठक होने वाली है, इसका फैसला लेकर केंद्रीय पर्यवेक्षक हाईकमान द्वारा तय नेता की विधायक दल में मुहर लगवाएंगे। इसके बाद विधायक दल के नेता मध्य प्रदेश के राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। पार्टी की रणनीति के मुताबिक सब कुछ ठीक रहा तो 25 मार्च को नई सरकार का शपथ ग्रहण भी हो सकता है। क्‍योंकि इसी दिन नवरात्र पूजा की शुरुआत भी हो रही है।
अभी तक पलड़ा शिवराज सिंह का ही भारी है,....

Monday, 6 January 2020

06:26

मध्य प्रदेश में धान खरीदी केंद्र का कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने किया औचक निरीक्षण


मध्यप्रदेश शासन की मंशा अनुसार प्रदेश व जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों के द्वारा माडा धान केंद्र का औचक निरीक्षण किया गया जिसमें नायब तहसीलदार माडा सुश्री दिव्या सिंह उपस्थित रही, कमलनाथ सरकार द्वारा किसानों के हितार्थ की कदम उठाए है ताकि किसानों को सही दाम मील व किसानों को ज्यादा आय हो सके, किसानों को सही समय में भुगतान एवं किसी प्रकार का कमीशन ख़ोरी को रोकने हेतु कई कदम उठाए है  किसानों को सही समय से भुगतान किया जा रहा है या नहीं, सिंगरौली जिले के माडा के धान खरीदी केंद्र में श्री अमित दिवेदी (प्रदेश सचिब) मप्र कांग्रेस कमेटी,राम शिरोमण शाहवाल (प्रदेश उपाध्यक्ष)पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ, रमाशंकर शुक्ल( कार्यवाहक अध्यक्ष) जिला कांग्रेस कमेटी, ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू प्रदेश उपाध्यक्ष ,रामसजीवन वैश्य ,रामखेलावन शाह ,राजेश तिवारी ,जियालाल शाह,रामकृष्ण वैश्य ,सुरेश साकेत,समकेश शाह,सीताराम मिश्रा,आशीष सिंह गहरवार विद्यासागर दुबे प्रतिनिधि मंडल उपस्थिति रहे--

Thursday, 19 December 2019

18:25

मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार ने जरूरतमंद गरीबों के लिए शुरू किया ₹5 में भरपेट भोजन व्यवस्था-अमित


विजय दिवस के शुभअवसर पर मप्र की जनहितैषी कमलनाथ सरकार व माननीय पंचायत ग्रामीण विकास मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल जी एवम प्रभारी मंत्री श्री प्रदीप जायसवाल  निर्देशानुसार सिंगरौली जिले के गरीबों - जरूरत मंदो के लिए 5 रु मे भरपेट भोजन की योजना शुभारंभ स्थान- पुराना जिला अस्पताल बैढन के अन्नपूर्णा भवन में किया गया है गौरतलब है कि पूर्व में कागजों पर गरीबों को भोजन देने की योजना शुरू की गई थी मगर बजट के अभाव में यह योजना ने दम तोड़ दिया था पूर्व में नगर निगम के द्वारा संचालित योजना में फंड की कमी के कारण यह योजना बीजेपी के कार्यकाल में बंद हो गई थी जिसके लिए अमित द्विवेदी (प्रदेश सचिव) मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा माननीय पंचायत मंत्री जी एवम प्रभारी मंत्री प्रदीप जायशवाल को 10 सितम्बर 2019 को पत्र क्र-169 लिखकर गरीबो को सस्ता व भरपेट भोजन की सुविधा हेतु अनुरोध किया था जिसको देखते हुए मध्य प्रदेश की कमलनाथ जन हितैषी सरकार ने तत्काल ₹5 में रेडक्रॉस सोसाइटी को नए सिरे से गरीबों के लिए सस्ते दरों पर व गुणवत्ता युक्त भोजन दिए जाने हेतु अनुबंध करके भोजन वितरण की व्यवस्था शुरू कर दी है सिंगरौली जिले के गरीबों के लिए इस व्यवस्था से पर प्रभारी मंत्री व पंचायत मंत्री के प्रति सिगरौली की जनता ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कमलनाथ सरकार की लिस्ट ₹5 भरपेट भोजन व्यवस्था से राहत मिलेगी जो गरीब अपने कार्य हेतु चितरंगी, देवसर ,माडा, सरई, मकरोहर, रजमिलान जैसे दूर अंचल क्षेत्र जो ग्रामीण आते हैं उन्हें यह सुविधा मिलने से काफी राहत होगी और सस्ता व गुणवत्ता युक्त भोजन मिलने से गरीबो के चेहरे पर खुशी साफ देखी जा सकती है सिंगरौली की जनता ने गरीबो की जन हितेषी कमलनाथ सरकार को बहुत-बहुत बधाई प्रेषित की है

Wednesday, 11 December 2019

10:23

राजनैतिक सियासत में मध्यप्रदेश के बदले मिजाज


*पंकज पाराशर छतरपुर*
भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में आजकल फिल्मी पटकथा जैसे ही हालात बन रहे हैं। कभी सत्तारुढ पार्टी कांग्रेस जश्न मनाती है तो कभी भाजपा अपनी लड़ाई जीतने पर कांग्रेस पर निशाना साधती है। हाल ही में भाजपा अपने एक विधायक की विधानसभा सदस्यता बचाने में कामयाब रही है। प्रदेश में भाजपा की संख्या बढ़ गई है। नवंबर में भाजपा के पवई विधानसभा से विधायक प्रहलाद लोधी को एक मामले में दो साल से अधिक सजा होने के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता को रद्द् करदी गई थी। जिसके खिलाफ भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया। कांग्रेस इस मौके पर अपनी खुशी का जोरशोर से इजहार कर रही थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस को झटका लगा है। कोर्ट ने प्रहलाद लोधी की सदस्यता रदद् होने के मामले में रोक लगा दी। जिससे कांग्रेस बैकफुट पर आ गई है। अब भाजपा नेता प्रहलाद लोधी द्वारा विधानसभा में पूछे जाने वाले सवालों के लिए समय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
दरअसल, कांग्रेस को हाल ही में दो घटनाओं पर जोरदार झटका लगा है। मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने विधानसभा में कांग्रेस के पक्ष में वोटिंग कर भाजपा को झटका दिया था। तब अटकलें लगाईं जा रही थी कि नारायण त्रिपाठी की घर वापसी हो रही है। इसपर कांग्रेस भी गदगद थी। जबकि कुछ दिनों बाद त्रिपाठी वापस बीजेपी खेमे में आ गए। हाल ही में उन्होंने बयान दिया था कि समय बताएगा कि वह किसके साथ हैं। विधायक नारायण त्रिपाठी ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के साथ हुए भाजपा के साथ होने की बात कही थी।
दूसरा झटका कांग्रेस को प्रहलाद लोधी की सदस्यता को लेकर लगा है। झाबुआ उपचुनाव जीतने के बाद कांग्रेस का मनोबल बड़ा था। साथ ही भाजपा को तगड़ झटका लगा था। भाजपा उससे उभरपाती एक और झटका तैयार था। प्रहलाद लोधी की सदस्यता रद्द होने के बाद भाजपा ने एड़ी चोटी का ज़ोर लगाते हुए सु्प्रीम कोर्ट ततक लड़ाई लड़ी और सदस्यता बचाने में कामयाब रही। कांग्रेस सदस्यता रद्द होने के बाद बहुमत में होने के साथ ही मज़बूत सरकार चलाने का दावा कर रही थी। लेकिन अब वह बैकफुट पर नज़र आ रही है।

Tuesday, 10 December 2019

16:02

सोनिया गांधी के जन्मदिन पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिव्यांग बच्चों संग मनाया अपनी नेता का जन्मदिन


*अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी जी का जन्मदिन सिंगरौली जिले के नवप्रवाह के दिव्यांग बच्चों के बीच धूमधाम से मनाया गया, दिव्यांग बच्चों के बीच 73 वा जन्मदिन में केक काटकर एवं मिष्ठान खिलाकर जन्मदिन मनाकर दीर्घायु एवं स्वस्थ होने की कामना की, उक्त अवसर पर  जिला कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष पूर्व सांसद तिलकराज सिंह ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि
सोनिया गांधी अक्टूबर १९९९ में बेल्लारी, कर्नाटक से और साथ ही अपने दिवंगत पति के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी, उत्तर प्रदेश से लोकसभा के लिए चुनाव लड़ीं और करीब तीन लाख वोटों की विशाल बढ़त से विजयी हुईं। १९९९ में १३वीं लोक सभा में वे विपक्ष की नेता चुनी गईं, कार्यवाहक अध्यक्ष रमाशंकर शुक्ल  ने श्रीमति गांधी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि २००४ के चुनाव से पूर्व आम राय ये बनाई गई थी कि अटल बिहारी वाजपेयी ही प्रधान मंत्री बनेंगे पर सोनिया ने देश भर में घूमकर खूब प्रचार किया और सब को चौंका देने वाले नतीजों में यूपीए को अनपेक्षित २०० से ज़्यादा सीटें मिली सोनिया गांधी स्वयं रायबरेली, उत्तर प्रदेश से सांसद चुनी गईं, राम शिरोमण सावाल प्रदेश उपाध्यक्ष पिछड़ा वर्ग ने कहा कि एन डी ए के नेताओं ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल पर आक्षेप लगाए उसके बावजूद भी  देश की जनता ने  सोनिया गांधी के नेतृत्व में सरकार बनाने पर अपना भरोसा जताया उन्होंने त्याग करते हुए  मनमोहन सिंह को  देश का प्रधानमंत्री बनाया, नवप्रवाह समिति के अध्यक्ष एवं प्रदेश सचिव अमित द्विवेदी ने  उक्त अवसर राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को  जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नवप्रवाह समिति दिव्यांग बच्चों के लिए 15 वर्षो से काम कर रही गई श्री अमित द्विवेदी ने बताया कि इस समिति में नेत्रहीन -मूक बधिर व मानसिक बच्चे निवास करते हैं संस्था का मूल उद्देश्य इन दिव्यांग बच्चों को स्वावलंबी बनाकर अपने पैरों में खड़ा करना संस्था का मूल उद्देश्य है और यह संस्थान 15 वर्षों से लगातार इस काम को कर रही है उक्त अवसर पर रमाशंकर शुक्ल अनिल सिंह (संगठन प्रभारी), अरुण सिंह (जिला उपाध्यक्ष),राम गोपाल पाल (अध्यक्ष) असंगठित कामगार कांग्रेस, सुदामा कुशवाहा, उसैद हसन सिद्दीकी, राम ब्रिज कुशवाहा, अभिषेक द्विवेदी, दीपक तिवारी, निर्मल उपाध्याय, दीपक पाठक ,पंकज पाठक, पंकज यादव , राजेंद्र सिंह गौड़ ,वीरेश सिंह गोड, अश्वनी सिंह ,रमाशंकर पनिका ,अमित द्विवेदी (अध्यक्ष) नवप्रवाह समिति एवं प्रदेश सचिव मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ,अधीक्षक बिप्रधर द्विवेदी नवप्रवाह समिति के सदस्य गन मौजूद रहे
15:52

मध्य प्रदेश में 58 साल का पत्रकार भवन बुलडोजर के नीचे जमीनदोज



 खींचो न कमानों को ,
            न तलवार निकालो।
जब तोप मुक़ाबिल हो ,
          तो अख़बार निकालो ।।

        18वीं सदी के शायर और पेशे से जज अकबर इलाहाबादी सैयद अकबर हुसैन रिज़्वी ने यह शेर लिखते वक्त कल्पना भी नहीं की होगी कि पत्रकारिता पर लिखे गए उनके संजीदा और इंकलागी शेर की लाज 20 वीं सदी के अंत तक इस तरह लुट जाएगी।
        मध्यप्रदेश की पत्रकारिता इतिहास में 9 दिसबंर 2019 का दिन भारी मन से इसलिए याद रखा जाएगा कि इस दिन पत्रकारिता और पत्रकारों के लिए अब से 58 साल पहले राजधानी भोपाल के मालवीय नगर स्थित जमीन पर बनाया गया पत्रकार भवन सरकारी बुलडोजर के नीचें आकर जमींदोज हो जायेगा।

     कुछ दशक में पत्रकारों ने अपनी हालत इतनी दायनीय कर ली कि सरकारी बुलडोजर ने घंटे भर में मप्र की पत्रकारिता और पत्रकारों की इज्जत बता दी।
    मप्र सरकार ने साल 1961 में बनाए गए पत्रकार भवन को 9 दिसबंर 2019 को जमींदोज कर दिया। सरकार का कहना है कि 58 साल पुराने भवन पर अब सर्वसुविधायुक्त सरकारी मीडिया सेंटर बनाया जाएगा। यहां तक बात कुछ ठीक लगती हैं ।
           लेकिन सरकारी मीडिया सेंटर में बैठकर क्या कोई भी पत्रकार सरकार की योजनाओं,नीतियों,लापरवाही या घोटालों पर निष्पक्ष कलम चला पायेगा ? सरकार तो छोडें..उसके कमाऊ पूत अधिकारियों के कारनामों को उजागार करने का दम दिखा पायेगा ?
      अगर किसी भी पत्रकार ने ऐसा किया तो उसे सरकारी मीडिया सेंटर से बाहर का रास्ता दिया दिया जाएगा ! और उसके साथ भी वहीं होगा जो अभी पत्रकार भवन के साथ हुआ है। यह भी गौर करने वाली बात है कि सरकारी मीडिया सेंटर की बागडोर सरकार के जनसम्पर्क विभाग के हाथों में होगी! जनसम्पर्क विभाग अपको निष्पक्ष पत्रकारिता करने देगा ?
    दरअसल पत्रकार भवन को जमींदोज किए जाने के पीछे कहानी यह थी की इस समूचे भवन पर पत्रकारिता के नाम पर माफियागीरी करने वाले व्यक्ति विशेष का ही कब्जा था , जिसे मुक्त कराए जाने की भी सख्त आवश्यकता थी इस समूचे भवन पर अवैधानिक रूप से काबिज व्यक्ति ने इस भवन को अपनी निजी जागीर मान लिया था जिसका प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन था। न्यायालय ने इस भवन को मुक्त कराते हुए उक्त व्यक्ति की बेदखली के आदेश भी दिए थे ।

पत्रकार भवन कैसे बना...
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    म प्र की राजधानी भोपाल में 1961 के समय वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल और नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट संगठन पत्रकारों के हित के लिए काम करते थे। उस समय नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट संगठन में अधिक पत्रकार होने की वजह से उसकी सक्रियता अधिक दिखाई देती थी। यही वजह थी कि मप्र सराकर के उस समय के मुख्यमंत्री पं श्यामाचरण शुक्ल ने कलेक्टर सीहोर के हस्ताक्षर से मालवीय नगर स्थित प्लाट नम्बर एक की 27007 वर्ग फिट जमीन आवंटित की थी। इस जमीन पर पत्रकार भवन का निर्माण कर उसमें पत्रकारों के सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक उत्थान की गतिविधियां संचालित की जानी थी। जमीन आवंटन की शर्तो में यह शर्ते भी शामिल थी। तब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पं श्यामाचरण शुक्ल थे। सर्व श्री धन्नालाल शाह, नितिन मेहता, त्रिभुवन यादव, प्रेम बाबू श्रीवास्तव, इश्तियाक आरिफ,डीवी लेले, सूर्य नारायण शर्मा, वीटी जोशी के अथक परिश्रम से पत्रकार भवन का भव्य निर्माण हो गया। यह सब अब इस दुनिया में नहीं रहें।

       भोपाल के इस पत्रकार भवन की चर्चा दिल्ली तक थी। उस समय भारत सरकार का पत्र सूचना विभाग बरसों तक पत्रकार भवन समिति का किरायेदार भी रहा। इस भवन में कई नामी पत्रकार लंबे समय तक रहे। समय बीता और फिर 90 के दशक के लगभग सब कुछ बदल गया। पत्रकारों के कई संगठन बन गए। आपसी झगडा,अपने हित को साधने में पत्रकार भवन,पत्रकारिता और पत्रकारों की साख गिरती चली गई। पत्रकारों व भोपाल के गौरव इस पत्रकार भवन पर पत्रकारिता के नाम पर पत्रकारों समेत सरकार का शोषण करने वाले माफिया सरगना सरीखे व्यक्ति विशेष का एकाधिकार व कब्जा हो गया तब से इस भवन पर एकाधिकार कब्जे को लेकर प्रकरण न्यायालय में चलायमान रहा , जिसका अंजाम सामने है।
06:44

19 दिसंबर को भाजपा युवा मोर्चा मध्य प्रदेश करेगा युवा आक्रोश आंदोलन


भारतीय जनता युवा मोर्चा मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर अभिलाष पांडे के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में भारतीय जनता युवा मोर्चा युवाओं के सम्मान में युवा मोर्चा मैदान में युवाओं की हक की लड़ाई लड़ेगा
   मध्य प्रदेश की वर्तमान की कांग्रेस सरकार जालौर छलावा मध्य प्रदेश के युवाओं के साथ कर रही है मध्य प्रदेश में बेरोजगारी भत्ते के नाम से युवाओं को चलने का काम उन्होंने किया है भारतीय जनता पार्टी की सरकार की युवा हितेषी जनकल्याणकारी योजनाएं बंद कर दी हैं हर वर्ग हर समाज का युवा परेशान है और अपने आप को छला हुआ महसूस कर रहा है इसका भारतीय जनता युवा मोर्चा पुरजोर विरोध करती है

आज दिनांक 9 दिसंबर 2019 को भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय बैढ़न में युवा आक्रोष आंदोलन बैठक के *मुख्य अतिथि श्री श्रवण मिश्रा जी* प्रदेश संयोजक स्वच्छता अभियान एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजयुमो जिलाध्यक्ष श्री विनोद चौबे जी ने किया मुख्य अतिथि  ने अपने उदबोधन में कहा की  कांग्रेस सरकार को प्रदेश में 1 साल पूरा होने को आ गया लेकिन अपने वचन पत्र का 1% भी वादा पूरा नही कर पाई है और उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष के द्वारा कहा गया था कि सरकार में आते ही 10 दिनों के भीतर यदि किसान कर्ज माफ नहीं कर पाती है तो हम मुख्यमंत्री बदल देंगे इस बात से पता चलता है कि कांग्रेस सरकार को पहले से ही पता था कि हम अपने वादे को कभी पूरा नहीं कर पाएंगे साथ ही भाजयुमो अध्यक्ष श्री  विनोद चौबे जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि अब समय आ चुका है ईट से ईट बजाने का राज्य सरकार ने श्री शिवराज सिंह जी के द्वारा चलाए गए जन कल्याणकारी योजनाओं को बंद कर दिया है युवा बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता एवम 70% स्तानीय कंपनियों में रोजगार देने का वादा कर मुकर जाने के खिलाफ हम सभी युवा जल्द ही 16 तारीख को जिले के सभी एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन देकर दो दिवस के भीतर वायदे को पूर्ण करने का मोहलत देंगे और यदि 2 दिन के भीतर राज्य सरकार द्वारा वादे को पूरा नहीं किया जाता है तो 19 दिसंबर 2019 आक्रोष आंदोलन निकालकर राज्य सरकार की गलतियों एवं विफलताओं के खिलाफ डीएम ऑफिस का घेराव कर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
 साथ ही साथ  बैठक में भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा से निकल कर बने नवनियुक्त मंडल अध्यक्ष श्री विक्रम सिंह चंदेल जी ,भारतेंदु पांडे जी ,देवेश पांडे जी ,नीरज चतुर्वेदी जी का स्वागत किया गया और युवा मोर्चा पर विस्वास दिलाने पर प्रदेश एवम जिला नेतृत्व का आभार  ब्यक्त कोय बैठक में मुख्य रूप से युवा मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संदीप शुक्ला जी ,जिला उपाध्यक्ष मुकेश तिवारी सुरेंद्र पटेल ,जिला मंत्री कमलेश पांडे ,संजय दुबे डीके सिंह  ,लाल बाबू बैस संदीप चौबे राजेश पांडेय  जिला आईटी सेल धीरज सिंह  ,जिला मीडिया प्रभारी सौरभ गुप्ता  ,नीरज चौबे ,मंडल अध्यक्ष प्रवेन्द्र धर द्विवेदी सोनु पांडे आशीष शुक्ला ,दिलशरण सिंह अरुण बैस उमेश गुर्जर बरगवां शैलेंद्र द्विवेदी विकाश केशरी राहुल शुक्ला ,दीपक सिंह  ,ऋषभ सिंह अतीत शर्मा  प्रविन्द तिवारी एवं कई कार्यकर्ता मौजूद रहे ।


           *सौरभ गुप्ता*
      
06:32

मध्य प्रदेश सर्व कोली समाज कल्याण महासभा का परिचय सम्मेलन संपन्न



अखिल भारतीय कोली समाज रजिस्टर्ड नई दिल्ली शाखा मध्य प्रदेश सर्व कोरी कोरी समाज कल्याण महासभा का प्रदेश स्तरीय युवक युवती परिचय सम्मेलन आज भोपाल के रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म क्रमांक 1 के पास आयोजित हुआ। युवक युवती परिचय सम्मेलन में ५०० से अधिक युवक-युवतियों ने अपना परिचय दिया।
परिचय सम्मलेन में जनसंपर्क मंत्री पी. सी. शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, , पूर्व  महापौर सुनील सूद , अखिल भारतीय कोली समाज के प्रदेश पूर्व विधायक कमलापत आर्य, कैलाश वेगवानी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक पी एल तंतुवाय, भावना पंथी,  सुरेश पंथी ,  अध्यक्ष पूनम वर्मा ,   और पूर्व आईपीएस तथा पूर्व विधायक कमलापत आर्य, विपिन कुमार कोरी, अमरदीप चंसोरिया  ने भगवान बुद्ध और कबीर दास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित करके किया ।
जीवनसाथी शासकीय सेवा या अच्छा बिजनेस करना व्यवसाय करने वाला घर परिवार को लेकर चलने वाला होना चाहिए जैसी अपेक्षाएं व्यक्त करते इस तरह की बातें विवाह योग्य युवतियों ने परिचय सम्मेलन के दौरान कही।  वहीं  युवकों ने अपना परिचय देते हुए कहा कि जीवनसंगिनी पढ़ी लिखी तथा घर को चलाने वाली होनी चाहिए और परिवार को साथ लेकर चले।
मध्य प्रदेश सर्व कोरी कोरी समाज कल्याण महासभा नवल किशोर पंथी द्वारा परिचय सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों को बंद करने का संकल्प लिया गया साथ ही समाज के लोगों ने पॉलिथीन का बहिष्कार करने वह थैले का उपयोग करने का भी संकल्प लिया । उन्होंने आगे बताया कि आज परिचय सम्मेलन में सभी वर्ग महावर साकेत अंतवास धीमान कोठार एक साथ एक मंच पर पहुंचे और समाज में एकता का संदेश दिया।
साथ ही रोटी और बेटी व्यवहार करने का भी संदेश दिया गया पंथी ने आगे कहा कि परिचय सम्मेलन कराने का उद्देश्य महंगी शादी दहेज प्रथा तथा रूढ़ियों का अंत करना है हम चाहते हैं कि बेटी को पढ़ाएं समाज में उनकी कम हो रही संख्या चिंता का विषय है इसलिए बेटियों को आगे बढ़ाएं इसके अलावा उन्होंने कहा कि समाज में नशा मुक्ति एक अभिशाप है जिसे दूर करना है तथा लोग नशा से परहेज करें इसके अलावा कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया गया पति ने कहा कि सभी जीवन में एक पौधा जरूर लगाएं और उसका भरण पोषण करें।
सुरेश पंथी कल्लू भैया ने बताया कि आज कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश राजस्थान महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ सहित अन्य पड़ोसी राज्यों के करीब 500 युवक-युवतियों ने परिचय दिया ।
मुकेश पंथी , दीपक पंथी ने सभी आगंतुक मुख्य अतिथि का स्वागत किया।
इस अवसर पर वीरेंद्र सूत्र कार, दुलीचंद शाक्य, नंदकिशोर,  दिलीप वेगोरिया , लकी कबीरपंथी, हर्ष पंथी, संगीता कबीर पंथी, गीता पंथी हीरामणि पुरिया, किरण पंथी सहित  परिचय सम्मलेन में लगभग 4000  से अधिक संख्या में समाज बंधु उपस्थित थे।

Monday, 9 December 2019

09:07

मध्यप्रदेश में तेजी से तबादलों का दौर जारी


*पंकज पाराशर छतरपुर*
भोपाल। मध्य प्रदेश में इस समय तेज़ी से तबादलों का दौर जारी है। लेकिन इस बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी अफसरों पर गाज गिरने से मंत्रालय में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। वाणिज्य कर विभाग के प्रमुख सचिव रहे मनु श्रीवास्तव को कामकाज में लापरवाही बरते पर उनसे विभाग की जिम्मेदारी वापस ले ली गई हैं। ऐसा माना जाता है कि श्रीवास्तव सीएम के खास अफसरों में से हैं। लेकिन लगातार उनकी शिकायतें मिलने की वजह से उनपर भी गाज गिर गई। मंत्रालय में अफसरों के बीच अब डर की स्थिति बन गई है। दबी जुबान कहा जा है कि अब गाज किसी पर भी गिर सकती है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सत्ता में आने के बाद श्रीवास्तव को उनकी पसंद का विभाग दिया था। यही नहीं, श्रीवास्तव के अलावा सीएम ने अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरी सिंह का भी तबादला पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से प्रशासन अकादमी में किया था। सिंह आईएएस एसोसिएशन की चैयरपर्सन भी हैं। उनको हटाने से अफसरों में संदेश गया है कि मंत्री के  आदेश की उपेक्षा करना किसी भी अफसर को भारी पड़ सकता है। ऐसा ही कुछ होशंगाबाद कलेक्टर और दतिया कलेक्टर, टीकमगढ़ कलेक्टर के साथ भी हुआ है। होशंगाबाद कलेक्टर शीलेंद्र सिंह को हटाने के पीछे रेत विवाद को बड़ी वजह माना जा रहा है। वहीं टीकमगढ़ कलेक्टर और दतिया कलेक्टर भी अपनी कार्यशैली के कारण हटाए गए हैं। इन तबादलों के बाद से अफसरों में संदेश गया है कि अब सरकार एक्शन मोड में है और किसी भी अफसर पर गाज गिर सकती है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री जल्द ही प्रिंसिपल सेक्रेटरी की एक नई टीम तैयार करेंगे। सत्ता में आने के बाद से ही कमलनाथ सरकार ने कई विभागों के पीएम बदले हैं।

Sunday, 8 December 2019

21:27

व्यापम घोटाले की फिर खुल सकती है फ़ाइल


*पंकज पाराशर छतरपुर*
भोपाल। बहुचर्चित व्यापमं घोटाले में आज तक मुख्य आरोपियों की पकड़ नहीं हो पाई है। जबकी शिक्षा जगत का यह देश में सबसे बड़ा घोटाला कहा जाता है। जिसके तार 2003 में आई भाजपा सरकार के कार्यकाल से जुड़े हैं। 15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस अब एक बार फिर व्यापमं मामले में नइ सिरे से जांच कराना चाहती है। मुख्यमंत्री कमलनाथ इस संबंध में एक समिति भी गठित कर रही है। जो बीती सरकार में हुए घोटालों की जांच करेगी। अब पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर आफत का पहाड़ टूट गया है l दोषियों पर एफआईआर दर्ज होगी l इस समिति में गृह, शिक्षा, मेडिकल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और कानून विभाग के अफसर शामिल रहेंगे। इस बारे में बताया कि समिति का उद्देश्य यह देखना है कि क्या किसी दोषी को निर्दोष छोड़ दिया गया है या किसी निर्दोष के साथ अन्याय हुआ है। समिति यह भी जांच करेगी कि क्या कोई छात्र जिसके खिलाफ कोई एफआईआर नहीं थी, उसे दंडित किया गया है। समिति उन छात्रों और उनके परिवार के सदस्यों का भी पता लगाएगी, जिनके खिलाफ बहाने से मुकदमे दर्ज किए गए थे। सरकार उन मामलों पर भी कार्रवाई करेगी, जिनकी दोबारा जांच की जाएगी
सरकार ने गृह विभाग से उन मामलों को फिर से खोलने के लिए कहा है जो बंद हो चुके हैं। गृह विभाग उन मामलों के माध्यम से स्थानांतरित कर रहा है जिन्हें सीबीआई ने छोड़ दिया है, क्योंकि 1,040 ऐसे मामले हैं जिन्हें केंद्रीय एजेंसी ने अपनी जांच के दायरे से बाहर रखा है। सबूतों के अभाव में पुलिस द्वारा बंद किए गए कई मामले फिर से खुल जाएंगे। समिति के माध्यम से, सरकार माता पिता को आरोपी बनाने के बजाय अनुमोदन करने के कुछ तरीकों का पता लगाना चाहती है, ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके। समिति घोटाले में पकड़े गए छात्रों को बचाने के तरीके भी खोजेगी, क्योंकि सरकार छात्रों और उनके माता-पिता को कुछ राहत देने के लिए उत्सुक है।
गृह मंत्री बाला बच्चन ने कहा कि 300 छात्रों का प्रवेश रद्द कर दिया गया, हालांकि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं था। बच्चन के अनुसार, गृह मंत्रालय उन फर्जी मामलों की जांच कर रहा है जो सीबीआई जांच के बाहर थे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों और तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्दोषों के साथ न्याय किया जाएगा और दोषियों को दंडित किया जाएगा l
13:21

मध्य प्रदेश में नई रेत नीति से बड़ा प्रदेश का राजस्व


भोपाल।म प्र।
राज्य शासन द्वारा तैयार की गई नई रेत नीति के बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं। खनिज साधन मंत्री प्रदीप जायसवाल ने बताया की रेत खदानों के लिए बुलाई गई ऑनलाइन निविदाओं के जरिए मध्य प्रदेश सरकार को 1203 करोड़ रुपए की आमदनी होगी। मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में बनी नई सरकार ने मात्र 1 साल के अंदर पिछली सरकार की तुलना में  5 गुना राजस्व बढ़ाया है।पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में रेत से प्राप्त होने वाले वाला राजस्व मात्र 240 करोड़ था।
शनिवार को मीडिया से बातचीत में खनिज मंत्री जायसवाल ने कहा कि नई रेत नीति के बहुत बेहतर परिणाम प्राप्त हो रहे हैं ।सरकार ने रेत की उपलब्धता के आधार पर 43 जिलों के समूह बनाए थे और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए निविदाएं आमंत्रित की थी। जिसमें 243 निविदाएं प्राप्त हुई थी ।खनिज मंत्री के मुताबिक अब तक 7 जिलों में एकमात्र निविदा  अभी प्राप्त नहीं हुई है, जिसके लिए निविदा बुलाने की पुनः कार्यवाही की जा रही है। जायसवाल ने उम्मीद जताई कि जिन 7 जिलों में अभी निविदाएं की जाना है।उनसे और राजस्व प्राप्त होगा तो यह राजस्व के आँकड़े  और बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल 36 जिलों प्रदेश सरकार को 1203 करोड़ों पर की आमदनी हुई है। जिसका आपसेट  प्राइस ₹448करोड़  रखा गया था। राजस्व प्राप्ति और बढ़ोतरी का खास बिंदु यह है कि आपसेट प्राईस  से भी 3 गुना अधिक राजस्व सरकार को प्राप्त होने वाला है।पांच गुना राजस्व बढ़ाने का मध्य प्रदेश ने नया कीर्तिमान पहली बार बनाया गया ।जो अपने आप में रिकॉर्ड है। खनिज मंत्री ने बताया कि राजस्व बढ़ोतरी के प्रयास चारों तरफ किए जा रहे हैं ,अन्य गौण खनिजों के लिए बुलाई गई निविदाओं के भी जल्द ही अच्छे परिणाम प्राप्त होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व बढ़ोतरी से उम्मीद है कि प्रदेश में विकास की रफ्तार और तेज होगी। जायसवाल ने कहा सरकार के सुशासन का ही परिणाम है कि रेत की निविदा से 5 गुना अधिक राजस्व बहाने ने खनिज विभाग सफल रहा है। उन्होंने खनिज साधन विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसके लिए बधाई दी कि प्रदेश प्रदेश के विकास  के लिए उन्होंने सराहनीय कार्य किया है।

Wednesday, 4 December 2019

19:50

दिल्ली दरबार में होगा मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष का फैसला


*पंकज पाराशर छतरपुर*
भोपाल। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन में बड़े बदलाव करने जा रही है। हाल ही में संगठन चुनाव संपन्न हुए हैं। इस बीच अब प्रदेश अध्यक्ष के बदलाव को लेकर भी सियासी गलियारों में हवा चल रही है। भाजपा के कद्दावर नेता दिल्ली में भाजपा सुप्रीमो अमित शाह के दरबार में हाजिरि लगा रहे हैं। वही, वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह भी अफने दावे पर बरकरार हैं। इस हलचल को देखते हुए केंद्रीय आलाकमान ने दो केंद्रीय मंत्रियों मुख्तार अब्बास नकवी और अश्विनी चौबे को पर्यवेक्षक नियुक्ति किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में वर्तमान अध्यक्ष राकेश सिंह समेत कई दिग्गज नेता शामिल हैं। इनमें  पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह, राज्यसभा सांसद प्रभात झा, पूर्व संसदीय कार्यमंत्री मंत्री नरोत्तम मिश्रा और खजुराहो सांसद बी डी शर्मा के नाम प्रमुखता से लिए जा सकते हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान इस पद के प्रमुख दावेदार बताए जा रहे हैं। उन्होंने वादा किया है कि अगर पार्टी उन्हें मौका देती है तो वह कांग्रेस सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित होंगे। वहीं, पूर्व गृह मंत्री का नाम भूपेंद्र सिंह का नाम भी शिवराज ने ही आगे बढ़ाया है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के पद को देखते हुए जातीय समीकरण भी साधने की कोशिश कर रही है। इसलिए नेता प्रतिपक्ष के पद पर गोपाल भार्गव को बैठाने के बाद पार्टी ने ब्राम्हणों को साधने का काम किया था। अब पार्टी अन्य वर्गोंं को साधने के लिए किसी गैर ब्राम्हण नेता को मौका दे सकती है। हालांकि बीजेपी की पार्टी लाइन के मुताबिक आमतौर पर जो प्रदेश अध्यक्ष नॉमिनेटेड होता है उसे निर्वाचन का मौका मिलता है, इस लिहाज से देखें तो राकेश सिंह का दावा मजबूत है. लेकिन जिस तरह प्रदेश में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और राकेश सिंह के बीच मतभेद सामने आए हैं और बीजेपी को प्रदेश की सत्ता से बाहर होना पड़ा, उसे देखते हुए क्या केंद्रीय आलाकमान प्रदेश बीजेपी के सेनापति के नाम पर कोई बड़ा बदलाव करेगा ये देखने वाली बात होगी l

Monday, 2 December 2019

09:21

सरकार का देश के चौथे स्तंभ को दबाने का प्रयास विवेक हीन-के सी शर्मा



के सी शर्मा*

मीडिया जगत इसकी भत्सना करता है।चौथेस्तम्भ  पर सरकार द्वारा  कुठाराघात का "आल इंडिया यूनाइटेड वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन"  निंदा करता है।और सम्पूर्ण प्रेस जगत के साथ है।

हनीट्रैप में शामिल अय्याशों को बचाने के लिए नियम कायदे को ठेंगा दिखाते हुए सरकारी मशीनरियों का दुरुपयोग कर ईमानदारी से खबरे दिखाने वाले सांध्य अखबार को दबाने में लगी है।

कांग्रेस सरकार हनीट्रैप के सबूतों के आधार पे विधायकों व उच्च अधिकारियों को सभी सबूतों को सार्वजनिक करने  का डर दिखाकर सरकार चला रही है और हानि ट्रैप में शामिल अय्याशों को बचाती नजर आ रही है ।

सरकार इतनी ईमानदार है तो शामिल सभी आरोपियों का नाम सार्वजनिक करें और मध्यप्रदेश की भोली भाली जनता को अपनी ईमानदारी का परिचय दे यदि  सरकार ईमानदार है ?

सरकार अगर इसी प्रकार सभी विभागों की एक जुटता कर के आम जनता के प्रति सार्वजनिक होने वाले कार्यों में दिखाए तो सरकारी मद से होने वाले कार्य समय पर हो जाये।
 लेकिन कमलनाथ है कि अपनी सरकार बचाने के लिए संविधान के चौथे स्तम्भ को दबाने में लगे है।

Sunday, 1 December 2019

18:26

मध्य प्रदेश में भाजपा संगठन चुनावी संग्राम कल होगा नए जिला अध्यक्षों के नामों का ऐलान


*पंकज पाराशर छतरपुर*
मध्य प्रदेश में भाजपा के जिलाध्यक्षों की चुनाव प्रक्रिया के बाद जिलाध्यक्षों के नामों को लेकर रायशुमारी कर ली गई है। जिला निर्वाचन अधिकारियों ने मंडल अध्यक्षों, विधायकों, सांसदों, पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य व प्रदेश पदाधिकारियो से प्रोफार्मा में जिलाध्यक्ष के लिए तीन-तीन नामों का पैनल मांगा। 46 जिलों में अध्यक्ष का चुनाव लगभग कर लिया गया है। उनके नाम लिफाफे बंद हो गए हैं। इस बीच प्रदेश के पांच जिलों में जिलाध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया रोक दी गई है। भोपाल में जिला निर्वाचन अधिकारी राजेंद्र शुक्ला ने पार्टी नेताओं से जिलाध्यक्ष के लिए रायशुमारी की और तीन-तीन नामों का पैनल मांगा। इस दौरान जिलाध्यक्ष के लिए सुनील पांडे, विकास बिरानी और रवींद्र यति के नाम प्रमुखता सामने आए हैं। इसके अलावा कुछ नेताओं ने भगवानदास सबनानी और लिली अग्रवाल का नाम भी जिलाध्यक्ष के लिए आगे बढ़ाया है। भोपाल जिलाध्यक्ष की घोषणा में समय लग सकता है।
 *यहां गुटबाजी के कारण अटके चुनाव*
बताते हैँ कि भाजपा ने पांच जिलों में जिलाध्यक्ष पद की चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। ग्वालियर शहर, होशंगाबाद एवं सिवनी में भाजपा संगठन के भीतर गुटबाजी चरम पर है। यहां गुटबाजी इतनी अधिक बढ़ गई है कि मंडल अध्यक्षों के चुनाव भी पूरे नहीं हो पाए हैं। शहडोल में नगरीय निकाय उपचुनाव के कारण जिला अध्यक्ष पद की चुनाव प्रक्रिया रोक दी गई है। झाबुआ में भी गुटबाजी के चलते जिलाध्यक्ष का चुनाव नहीं कराए जा सके।
बारह जिलों के लिफाफे पहुंचे
सूत्रों के अनुसार बारह जिलों के लिफाफे बीती देर रात प्रदेश कार्यालय पहुंच गए। ग्वालियर-चंबल के जिलों के पैनलों के लिफाफे रविवार दोपहर तक भोपाल पहुंच जाएंगे। सभी लिफाफे भोपाल पहुंचने पर प्रदेश संगठन नामों पर विचार करेगा। शनिवार को कुछ लोगों ने प्रदेश पदाधिकारियों को फोन पर जिलाध्यक्ष के लिए अपनी पसंद बताई, तो उन्हें साफ कह दिया गया कि वे जिला निर्वाचन अधिकारियों को प्रोफार्मा में भरकर नामों का पैनल सौंपे।
12:51

बनवासी सेवा आश्रम को मिला पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेशम पुरस्कार



गोविंन्दपुर/से बाबू लाल शर्मा की रिपोर्ट

म्योरपुर ब्लॉक क्षेत्र में स्थित सामाजिक संस्था बनवासी सेवा आश्रम गोविन्दपुर में खादी ग्रामोद्योग विभाग के सहयोग एंव निर्देशन में खादी एंव ग्रामोद्योग के गतिविधियों को लालबहादुर भाई के संयोजन में विपरीत परिस्थितियों भी में अबाध रूप से संचालित कर क्षेत्र के लोगों को रोजगार से जोड़ने का काम कर रही है जिसमें सिल्क व सूती  खादी के उत्पादन, कोल्हू द्वारा सरसों का तेल, कपड़ा धोने व नहाने के साबुन, शहद उत्पादन, अगरबत्ती व सब्जी मशाला आदि प्रमुख उत्पादन होता है।
बीते दिन शुक्रवार को वाराणसी में भब्य पुरस्कार वितरण समारोह में *_बनवासी सेवा आश्रम को रेशम धागा उत्पादन में पं.दीनदयाल  उपाध्याय रेशम पुरस्कार_* खादी बोर्ड के अध्यक्ष व अतिथियों के हाथों खादी के वरिष्ठ कार्यकर्ता हरिप्रसाद भाई को 11हजार रूपये व प्रशस्तिपत्र  मिला। आप सभी को मालूम को यह पुरस्कार आश्रम को लालबहादुर भाई व उनके टीम के सराहनीय प्रयास से सातवीं बार पाने को गौरव हासिल है। आश्रम मंत्री शुभा बहन इस सम्मान को सभी आश्रम प्रेमी, सहयोगियों व शुभचिंतकों को समर्पित किया है।
06:05

मध्यप्रदेश में कांगेस की कलह से मुख्यमंत्री नाराज


*पंकज पाराशर छतरपुर*
बुंदेलखंड में कांग्रेस की आंतरिक कलह सड़क पर दिखने लगी है, छतरपुर में हंगामे को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ नाराज हो गए हैं, 15  सालों बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस गुटबाजी और अंतरकलह से उभर नही पा रही है। पर आए दिन कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच विवाद और बैठक में हंगामे की खबरें सुर्खियां बन रही है। ताजा मामला छतरपुर से सामने आया है।जहां कार्यकर्ताओं ने अपनी उपेक्षा के आरोप लगाकर सहप्रभारी के सामने ही हंगामा करना शुरु कर दिया। इस दौरान प्रभारी मंत्री भी मौजूद रहे।जब कार्यकर्ता हंगामा कर रहे थे तो सहप्रभारी सुधांशु त्रिपाठी, जिले के प्रभारी मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर और बैठक में मौजूद विधायक मौन बैठे रहे। दरअसल, जिले में काफी दिनों बाद कांग्रेस ने बड़ी और खास बैठक बुलाई थी।जिसमें मध्य प्रदेश के सहप्रभारी सुधांशु त्रिपाठी और जिले के प्रभारी मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर शामिल हुए। बैठक में कार्यकर्ता पूरे समय असंतुष्ट दिखाई दिए और हंगामा करना शुरु कर दिया। उधर कांग्रेसियों ने स्थानीय विधायकों और  खनिज विभाग पर रेत माफियाओं का  सहभागी होने का आरोप भी लगाया l बैठक में कार्यकर्ताओं ने सहप्रभारी पर अनदेखी का आरोप लगाया।आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने कहा कि पार्टी पहले देश नहीं अपने कार्यकर्ताओं को बचाए तो ज्यादा सही होगा। यदि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का यही हाल रहा तो कार्यकर्ताओं की नाराजगी का खामियाजा पार्टी को आगामी निकाय चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
बैठक में कांग्रेस की महिला जिला अध्यक्ष ने भी सहप्रभारी को जमकर खरी खरी सुनाईं। नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्यकर्ताओं का कहना था कि पार्टी में उनकी हर मोर्चे पर बराबर उपेक्षा की जा रही है। जो चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं। वे भी कार्यकर्ताओं को कोई खास तवज्जो नहीं दे रहे हैं।  काफी देर तक हंगामे की यह स्थिति बनी रही। जब कार्यकर्ताओं की मन की भड़ास निकल गई तब हालात सामान्य हो सके ।

Saturday, 30 November 2019

17:43

कौन बनेगा भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष गरमाने लगी राजनीति


*रिपोर्ट,के सी शर्मा*
 दरअसल, भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष के कई दावेदार हैं और वे अपने समीकरण भी बैठा रहे हैं।
संगठन चुनाव की प्रकिया के आखिरी दौर में भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेशाध्यक्ष को लेकर सियासत गरमा गई है। जिलाध्यक्षों के चुनाव 30 नवंबर को होने के तत्काल बाद प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव की गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए दावेदारों ने जोर-आजमाइश भी शुरू कर दी है। मौजूदा अध्यक्ष राकेश सिंह ही पार्टी के अगले प्रदेश अध्यक्ष होंगे या कोई नया चेहरा प्रदेश की कमान संभालेगा, इसे लेकर कयासबाजी भी खूब चल रही है। सियासतदार कह रहे हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अब तक प्रदेशाध्यक्ष को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, अगर दोनों के बीच कोई समन्वय हो गया तो प्रदेशाध्यक्ष पद के चुनाव में तस्वीर बदल भी सकती है।

दरअसल, भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष के कई दावेदार हैं और वे अपने समीकरण भी बैठा रहे हैं। सागर संभाग से पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह भी प्रदेशाध्यक्ष के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। हालांकि नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह एक ही जिले व एक ही संभाग से आते हैं पर इसके लिए तर्क दिए जा रहे हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह दोनों ही एक राज्य से है

भूपेंद्र सिंह को चौहान और तोमर दोनों का ही करीबी माना जाता है। संघ की पसंद के चलते खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा का नाम भी दौड़ में शामिल है। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इधर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा पहले भी अध्यक्ष रह चुके हैं, इसलिए वे भी दावा ठोक रहे हैं।
किसकी-क्या संभावना

*राकेश सिंह की हो सकती है पुनरावृत्ति*

राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से नजदीकियों के चलते संभावना है कि राकेश सिंह को ही दोबारा मौका मिल जाए। चूंकि राकेश सिंह को अधूरा कार्यकाल मिला था, इसलिए संभावना है कि पार्टी उन्हें एक मौका और दे। मोदी कैबिनेट में मंत्री पद नहीं देने के पीछे यही तर्क दिया जा रहा है कि पार्टी उन्हें संगठन में ही रखना चाहती है।

*साझा प्रत्याशी बन सकते हैं भूपेंद्र सिंह*

पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की साझा पसंद बन सकते हैं। वरिष्ठता के लिहाज से भी वे सांसद होने के साथ ही संगठन के कई पदों पर रह चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष ब्राह्मण होने के कारण सिंह के साथ जातिगत संतुलन बैठाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

*प्रभात झा भी ठोक रहे दावेदारी*

झा पहले प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं। संगठन में काम करने का बेहतर अनुभव है। प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए सर्वाधिक दौरे किए। फिलहाल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। संघ नेताओं के करीबी होने के कारण दावेदारी मजबूत है पर उम्र बंधन के कारण दौड़ से बाहर हो सकते हैं।
*नरोत्तम मिश्रा हाईकमान के भरोसे*

पूर्व मंत्री मिश्रा हाईकमान के भरोसे प्रदेशाध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहे हैं। लंबे समय तक प्रदेश में मंत्री रहे। पहले भी प्रदेशाध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष पद के भी दावेदार थे।

*वीडी शर्मा संघ की पसंद*

संघ पृष्ठभूमि के चलते सीधे लोकसभा चुनाव का टिकट मिला और सांसद बने। संघ की खास पसंद माने जाते हैं। फिलहाल प्रदेश संगठन में भी महामंत्री हैं। विद्यार्थी परिषद में काम करने के कारण संगठन का बेहतर अनुभव है।
हाईकमान के करीबी कैलाश विजयवर्गीय मालवा से प्रबल दावेदार हैं, मंत्री पद छोड़कर संगठन का काम संभाला। राष्ट्रीय महासचिव हैं। फिलहाल पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं। लोकसभा चुनाव में बेहतर परिणाम भी दिए। हाईकमान के भी करीबी हैं।
- संगठन चुनाव अपने अगले पड़ाव पर है। 30 नवंबर आज  जिलाध्यक्ष का चुनाव होना है। तत्पश्चात प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव होगा। संगठन की गाइडलाइन के मुताबिक कोई सामान्य कार्यकर्ता भी प्रदेशाध्यक्ष हो सकता है।

Thursday, 28 November 2019

08:44

मध्य प्रदेश में राजनीतिक उठापटक के बीच बदल सकते हैं काग्रेस भाजपा के अध्यक्ष


*पंकज पाराशर छतरपुर*
मध्य प्रदेश में राजनीतिक दल नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए जमावट कर रहे हैं। इससे पहले प्रदेश की सियासत में बड़ा बदलाव होने की संभावना है। यह बदलाव चालू साल समाप्त होने तक हो सकता है। यानी अगले 50 दिन के भीतर मप्र के दोनों प्रमुख दल कांग्रेस एवं भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष मिल सकते हैं। साथ ही प्रदेश सरकार कांग्रेस के गिने चुने नेताओं को निगम मंडलों में नियुक्ति दे सकती है। यदि प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी तौर पर चल रही खींचतान जारी रही तो मुख्यमंत्री कमलनाथ जल्द ही अपने मंत्रिमंडल का विस्तार एवं फेरबदल कर सकते हैं।
*भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह रहेंगे या होगी छुट्टी...*
भारतीय जनता पार्टी में संगठन चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। मंडल में चुनाव प्रक्रिया 8 एवं 9 नवंबर को होना थी, लेकिन अयोध्या फैसले के चलते देश भर में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के मद्देनजर भाजपा ने मंडल स्तर का चुनाव कार्यक्रम टाल दिया था। इसके बाद जिले और फिर दिसंबर के अंत में प्रदेशाध्यक्ष के नाम पर मुहर लग जाएगी। मौजूदा भाजपा प्रदेशाध्क्ष राकेश सिंह को फिर से कमान मिलने की संभावना है,लेकिन आधा दर्जन अन्य नेता भी प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में शामिल हैं। निकाय एवं पंचायत चुनाव से पहले भाजपा की नई कार्यकारिणी बनकर तैयार हो जाएगी। जिसमें कई नई चेहरे शामिल होंगे।
*खत्म हो सकता है पीसीसी चीफ का इंतजार...*
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के 17 दिसंबर 2018 को मुख्यमंत्री बनने के बाद से कांग्रेस में नई पीसीसी चीफ को लेकर मशक्कत चल रही है। लेकिन नेताओं की आपसी गुटबाजी और खींचतान के चलते हाईकमान पीसीसी चीफ को लेकर फैसला नहीं कर पाया है। लोकसभा चुनाव के बाद कमलनाथ पीसीसी चीफ का पद छोडऩे का ऐलान भी कर चुके हैं, लेकिन हाईकमान के निर्देश पर वे यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कांग्रेस हाईकमान मध्य प्रदेश कांगेस के अध्यक्ष के लिए कई बार बैठक कर चुका है, लेकिन हर बार नाम पर सहमति नहीं बन पाई। संभवत:साल खत्म होने से पहले इस पर फैसला हो सकता है।
*जल्द हो सकती है निगम मंडलों में नियुक्तियां...*
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से निगम-मंडल, बोर्ड, प्राधिकरणों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों के पद खाली पड़े हैं। अभी तक सिर्फ अपैक्स बैंक के अध्यक्ष की नियुक्ति हुई है। कांग्रेस आलाकमान से जुड़े सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री कमलनाथ अगले एक महीने के भीतर करीब आधा दर्जन निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियां कर सकते हैं। मुख्यमंत्री उन्हें निगम-मंडल एवं प्राधिकरणों में नियुक्तियां करने के पक्ष में हैं जो मुनाफा कमा रहे हैं।
*विधान परिषद पर भी होना है मंथन...*
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश में विधानसभा परिषद बनाने वचन दिया था। इस पर मंथन के लिए एक कमेटी गठित कर दी है। संभवत: यह कमेटी अगले एक महीने के भीतर रिपोर्ट दे देगी। विधान परिषद के जरिए कांगे्रस अधिसूचित क्षेत्र के सामान्य एवं ओबीसी वर्ग के नेताओं को विधानसभा लाना चाहती है।