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Wednesday, 20 November 2019

01:51

बर्खास्त विधायक की सदस्यता पर लटकी खतरे की तलवार


*पंकज पाराशर छतरपुर*
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की पवई विधानसभा से भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता रद्द होने का मामला बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन के बुलावे पर विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति उनसे मिलने नहीं पहुंचे। जिसपर राज्यपाल ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने इस संबंध में पवई विधानसभा में उपचुनाव कराने एक पत्र चुनाव आयोग को भी लिखा है।
दरअसल, सदस्यता रद्द होने के बाद विधायक लोधी हाई कोर्ट की शरण में गए थे। जहां से उनकी विधायकी रद्द होने के फैसले पर राहत मिली थी। जिसके बाद राज्यपाल से उनकी विधानसभा सदस्या बहाल करने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान समेत प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव मिलने पहुंचे थे। कुछ दिन पहले भाजपा के पवई से विधायक प्रहलाद लोधी को कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई थी। इस पर विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने विधायक की सदस्यता बर्खास्त कर दी थी। विधायक लोधी इस पर हाईकोर्ट चले गए, जहां कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए सजा पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी। भाजपा नेता के प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात करने के बाद एक आवेदन दिया था। राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति को बीते रोज मिलने के लिए बुलाया था।  लेकिन अध्यक्ष ने उस दिन व्यस्तात का कारण बताते हुए मुलाकात टाल दी। जिसके बाद वह अभी तक मिलने नहीं पहुंचे। उनके नहीं मिलने पर राज्यपाल ने गंभीर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग के पत्र लिखकर उपचुनाव की मंजूरी मांगी है। गौरतलब है कि भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी तहसीलदार से मारपीट और बलवे के मामले में विशेष अदालत ने दोषी करार दिया था। इसके बाद उन्हें हाईकोर्ट से राहत मिल गई है।

Tuesday, 19 November 2019

18:17

संगिनी महिला समिति ने जरूरतमंद बच्चों को दिए उपहार


नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के दुधीचुआ क्षेत्र की संगिनी महिला समिति ने बाल स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की बेहतरी की दिशा में कदम उठाते हुए वार्ड संख्या 13 के शासकीय प्राथमिक विद्यालय, बैगा बस्ती के जरूरतमंद बच्चों को बर्तन दिए हैं। संगिनी महिला समिति की अध्यक्षा श्रीमती किरन कुमार की अगुवाई में समिति की सदस्याओं ने बच्चों को उन्हें स्कूल में मिलने वाले मध्याहन भोजन (मिड डे मील) के समुचित सेवन में सहयोग देने के उद्देश्य से 45 जोड़ी थाली एवं गिलास दिए हैं।

संगिनी महिला समिति के इस प्रयास से विद्यालय के बच्चों को भोजन के सेवन में प्रयोग के लिए सही बर्तन मिलेंगे। साथ ही, अलग-अलग बर्तन का प्रयोग करने से उनमें स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी, जिससे उनके स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। सके। सभी बच्चों के अच्छे पोषण के लिए उन्हें संगिनी महिला समिति की ओर से दूध के पैकेट एवं केले भी दिए गए, जिन्हें पाकर बच्चों में खुशी की लहर दौड़ गई।

बर्तन वितरण में संगिनी महिला समिति की श्रीमती बूबू सरकार, श्रीमती प्रीति चोपड़ा, श्रीमती तरन्नुम खान, श्रीमती छंदा लाहा, श्रीमती रश्मि रंजन, श्रीमती मंजु सिंह एवं श्रीमती रितु वर्मा ने सहयोग किया।
06:19

असंगठित कामगार कांग्रेस ने धूमधाम से मनाया मुख्यमंत्री कमलनाथ का जन्मदिन



सिंगरौली जिला मुख्यालय में असंगठित कामगार कांग्रेस के नेतृत्व में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का जन्म दिवस आज दिनांक 18/11/2019 को ग्राम नौगढ़ वार्ड क्र. 45 स्थान- हनुमान मंदिर के पास गरीब - दलित आदिवासी जनता के बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में बड़े हर्षोउल्लास के साथ केक काटकर जन्मदिवस मनाया गया और जन्मदिवस के अवसर पर विशाल भंडारा का आयोजन भी किया गया है ।

उक्त अवसर पर असंगठित कामगार कांग्रेस एवं जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता गण उपस्थित रहे एवं सभी लोगों ने प्रदेश कांग्रेस सरकार के जन कल्याणकारी योजनाओं को आमजन को अवगत कराया गया ।

*जिसमें मुख्य रुप से उपस्थित अमित द्विवेदी(प्रदेश सचिव)मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी, रामशिरोमणि शाहवाल, रेनू शाह,  अशोक शाह, ज्ञानेन्द्र सिंह (ज्ञानू), रामगोपाल पाल, लखनलाल शाह, ललित सिंह, प्रह्लाद शाह, रामलल्लू शाहवाल, ललित सिंह, डॉक्टर प्रकाश शाह, सुदामा कुशवाहा, विद्यापति शाह, बुधलाल बैगा, परशुराम बैगा, रामकृपाल कहार, शिवनाथ पाण्डेय, छोटेलाल केवट, राजू साकेत, कृष्णा साकेत, विष्णुदत्त पाण्डेय सहित स्थानीय लोग भारी संख्या में महिलाये - पुरुष, बच्चे मौजूद रहे ।*

Monday, 18 November 2019

16:21

मरीजो को फल बांटकर मनाया गया मुख्यमंत्री का जन्मदिन


मनगवा* -- खुशहाल और स्वर्णिम मध्यप्रदेश के पथ प्रदर्शक माननीय मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ जी के जन्मदिवस पर आज मनगवां विधानसभा के नगर पंचायत मनगवां में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सिविल अस्पताल मनगवा में मरीजों को फल वितरित कर माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी का जन्मदिन मनाया कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश की खुशहाली एवं माननीय मुख्यमंत्री जी के दीर्घायु होने की मंगल कामना की कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉक्टर देवव्रत पांडे सिविल अस्पताल मनगवा  डॉक्टर त्रिवेणी प्रसाद मैत्रेय पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मनगवा अरविंद मिश्रा पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष मनगवां  अखिलेश मणि पांडेय प्रवक्ता ब्लॉक कांग्रेस कमेटी गंगेव पुष्पेंद्र वर्मा महामंत्री एडवोकेट बालेंद्र तिवारी पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट रवि प्रकाश तिवारी एडवोकेट एसके तिवारी प्रदीप तिवारी युवक कांग्रेस कमलेश सोनी पार्षद छेदीलाल साकेत विवेक साकेत आदर्श गुप्ता शेरे असलम अंसारी दिलीप गुप्ता एवं सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे
मध्यप्रदेश के विकास पुरुष के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।

Sunday, 17 November 2019

08:34

मध्यप्रदेश में विधानसभा शीतकालीन सत्र हंगामेदार बनने के आसार


मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र को हंगामाखेज बनाने के लिए भाजपा विधायक, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की अगुवाई में अभी से कमर कसते नजर आने लगे है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी इस बार पूरी तैयारी कर रही है ताकि हर मुद्दे पर जबरर्दस्त प्रत्युत्तर के माध्यम से विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोपों की धार को न केवल कुंद कर दे अपितु उस पर अपनी बढ़त हासिल कर सके। जब यह सत्र आरंभ होगा उस समय तक कमल नाथ सरकार प्रदेश में एक साल का कार्यकाल लगभग पूरा कर लेगी। उसके हाथ में वचनपत्र पूरे करने की लम्बी-चौड़ी उपलब्धियों की फेहरिस्त होगी तो भाजपा विधायक वायदे पूरे न करने और अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर पूरे लाव-लश्कर के साथ आक्रामक मुद्रा में नजर आएंगे, इसलिए विधायकों को अभी से तैयारी करने के लिए कह दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति द्वारा भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता रद्द करने और उसके बाद म.प्र. उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें मिली सजा पर रोक लगाने के बाद से भाजपा इस मुद्दे को लेकर राज्यपाल लालजी टंडन के सामने उठा चुकी है तो वहीं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ऐलान किया है कि वे अपने साथ लोधी को विधानसभा सत्र में लेकर जायेंगे। इससे साफ होता है कि शीतकालीन सत्र को भाजपा हंगामाखेज बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी।
विधानसभा अध्यक्ष प्रजापति ने सांसदों, विधायकों के प्रकरणों की सुनवाई के लिए गठित विशेष न्यायालय द्वारा लोधी को 2 साल की सजा देने के निर्णय के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के साथ ही सीट रिक्त होने की सूचना निर्वाचन आयोग को दे दी थी। भाजपा इस मामले को लेकर जिस प्रकार की घेराबंदी करने के मूड में नजर आ रही है उसका अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि राज्यपाल को ज्ञापन देने प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष सांसद राकेश सिंह, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव एवं पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा शामिल थे। उनके साथ ही विधायक प्रहलाद लोधी भी थे। लगभग पौन घंटे इस प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे पर राज्यपाल टंडन से चर्चा की और पवई के विधायक पद से बर्खास्त किए गए लोधी को पुन: सदस्य बनाने के लिए ज्ञापन सौंपा। इन नेताओं ने राज्यपाल को बताया कि विधानसभा अध्यक्ष का आदेश असंवैधानिक है क्योंकि सीट रिक्त करने की घोषणा विधानसभा अध्यक्ष नहीं कर सकते यह अधिकार केवल राज्यपाल के पास है जिसका अतिक्रमण कर विधानसभा अध्यक्ष ने सीट रिक्त होने की सूचना निर्वाचन आयोग को भेज दी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उसको सुधारना था लेकिन इस मामले में कांग्रेस लगातार राजनीति कर रही है जिसे भाजपा स्वीकार नहीं करेगी। अध्यक्ष के फैसले को जल्दबाजी में उठाया गया कदम निरुपित करते हुए शिवराज ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष निष्पक्ष नहीं हैं, हमारा विश्‍वास है कि अध्यक्ष का फैसला असंवैधानिक एवं विधिसम्मत नहीं है। अगले सत्र में हम विधानसभा में लोधी को लेकर जायेंगे। भाजपा का यह प्रयास भी है कि इस निर्णय का विरोध करते समय वह कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधे।
शीतकालीन सत्र के छोटे होने को मुद्दा बनाते हुए नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने इसे बढ़ाने की मांग की, जिसका उत्तर एक पत्र के माध्यम से सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने देते हुए उनकी मांग को खारिज कर दिया। इससे एक यह साफ हो गया कि सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग सरकार स्वीकार करने वाली नहीं है। डॉ. सिंह ने भार्गव के उस आरोप को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने प्रदेश सरकार पर जनता के मुद्दों से बचने के लिए छोटा सत्र बुलाने का आरोप लगाते हुए इसे गलत परम्परा बताया था। संसदीय कार्य मंत्री ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित करने की कोशिश की कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही छोटे सत्र रखने की शुरुआत हुई थी, इसके साथ ही विधानसभा के छोटे सत्रों की सूची संलग्न कर भेज दी। भार्गव ने दो दिन पहले कमलनाथ को पत्र लिखकर शीतकालीन सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की थी और अवधि के निर्धारण में नेता प्रतिपक्ष की सहमति न लेने व सत्र को छोटा रखने की परम्परा को गलत बताया था। पूर्व संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा का भी आरोप था कि सरकार किसान कर्जमाफी, प्रशासनिक अव्यवस्था, तबादला उद्योग, अतिवृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा न देने के चलते सदन में लगाये गये नये सवालों से बचना चाह रही है इसलिए सत्र की अवधि छोटी रखी जा रही है। नेता प्रतिपक्ष से सलाह न लेने का उत्तर देते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार ने भी तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष से सलाह नहीं ली थी, जबकि लोक महत्व के विषय पर चर्चा कराने के लिए हमारी सरकार तैयार है।
नेता प्रतिपक्ष भार्गव के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के उत्तर में संसदीय कार्यमंत्री ने जो जवाब दिया है उसमें यह बताया गया है कि 15 साल में भाजपा मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में 20 अल्पावधि सत्रों में 97 बैठकें आयोजित हुई थीं। इसमें सबसे कम तीन बैठकों वाले सत्र का उल्लेख है तो सर्वाधिक दस बैठकों वाले सत्र का भी उल्लेख किया गया है। नवम्बर-दिसम्बर 2011 में दस बैठकों वाला शीतकालीन सत्र हुआ था जबकि पांच छोटे सत्रों में तीन-तीन बैठकें ही हुईं थीं। गोपाल भार्गव ने संसदीय कार्यमंत्री द्वारा दी गयी जानकारी को आधी-अधूरी बताया, उन्होंने देर रात तक सदन की कार्रवाई चलाने की जगह बैठकों की संख्या बढ़ाने का भी सुझाव दिया था। विधानसभा सत्र में भाजपा विधायक पूरी तरह मुखर रहें इसलिए शीतकालीन सत्र से पहले अपने सभी विधायकों की काउंसलिग करने की भी भाजपा तैयारी कर रही है। विधि विधायी कार्य एवं जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने हाल ही में कहा था कि भाजपा के तीन-चार विधायक अभी और उनके संपर्क में हैं जो कभी भी कांग्रेस के पाले में आ सकते हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं अन्य कुछ मंत्री तथा कांग्रेस नेता भी इस बात के संकेत दे चुके हैं कि कुछ और भाजपा विधायक किसी भी समय कांग्रेस में आ सकते हैं। बीते विधानसभा सत्र में भाजपा के दो विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में जाकर एक विधेयक पर हुए मतदान में वोट डाले थे। इनमें से नारायण त्रिपाठी तो भाजपा पाले में वापस खड़े नजर आने लगे लेकिन वे कब क्या फैसला कर लें और फिर दल बदल लें इसकी संभावना उनके पुराने रिकार्ड को देखते हुए नकारी नहीं जा सकती। ब्यौहारी के भाजपा विधायक शरद कोल अभी भी बागी तेवर अपनाये हुए हैं वे त्रिपाठी के भाजपा पाले में वापस आने के बाद भी कह रहे हैं कि कमलनाथ के साथ ही हूं। इसी बीच त्रिपाठी भी मंत्री जीतू पटवारी के साथ लम्बी बैठक कर चुके हैं, यही कारण है कि यह सब देखते हुए भाजपा भी त्रिपाठी को संदिग्ध मान रही है।
और यह भी
भाजपा सत्ताधारी दल कांग्रेस द्वारा उसके पाले में सेंध लगाने से रोकने के लिए अपने विधायकों को समेटने की कोशिश कर रही है। समझा जाता है कि काउंसलिंग के तहत पहले चुनिंदा भाजपा विधायकों को प्रदेश कार्यालय में बुलाकर राकेश सिंह और संगठन महामंत्री सुहास भगत उनसे सीधे चर्चा करेंगे, इसके बाद सत्र के पूर्व सभी विधायकों को राजधानी बुलाकर उनकी भी बैठक की जाएगी। फिलहाल पार्टी इसकी रणनीति तैयार कर रही है। ऐसे विधायकों को भी पार्टी नेता चिन्हित कर सीधे संपर्क स्थापित करेंगे जो कांग्रेस नेताओं के संपर्क में बने हुए हैं और अवसर आने पर किसी लालच या दबाव में पाला बदल सकते हैं। भाजपा के नेताओं को पहले यह भरोसा था कि कमलनाथ सरकार कभी भी अपना बहुमत खो देगी और उन्हें सरकार बनाने का अवसर मिलेगा, लेकिन सरकार एक साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही है। कांतिलाल भूरिया के चुनाव जीतते ही कांग्रेस विधायकों की संख्या सदन की कुल संख्या से आधा हो गयी है और लोधी की सदस्यता समाप्त होने के बाद अब वह बहुमत में हैं। इसके अलावा चार कांग्रेस पृष्ठभूमि के निर्दलीय विधायक भी कांग्रेस को समर्थन दे रहे हैं, इनमें से एक मंत्री भी है। बसपा एवं सपा विधायक भी सरकार के ही साथ हैं, फिर भी भाजपा के कुछ बड़े नेताओं को अभी भी भरोसा है कि उसके पास सरकार पलटने का कभी भी अवसर आ सकता है।

Tuesday, 12 November 2019

18:27

ट्रांसफर पोस्टिंग में मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के बगैर पत्ता भी नहीं हिलेगा



भोपाल। तबादलों पर प्रतिबंध (Restrictions on transfers) होने के बावजूद मुख्यमंत्री समन्वय से अनुमति लेकर हो रहे तबादलों (Transfer) पर 25 नवंबर से ब्रेक लग जाएगा। चुनाव आयोग मतदाता सूची में एक जनवरी 2020 की स्थिति में 18 साल के होने वाले युवाओं के नाम शामिल करने के लिए अभियान चलाएगा। 25 नवंबर को सभी जिलों में मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन होगा। इसके बाद कलेक्टर (जिला निर्वाचन अधिकारी), SDM (निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी) और बूथ लेवल ऑफिसर (शिक्षक सहित अन्य कर्मचारी) के तबादलों पर रोक लग जाएगी।

यदि सरकार को किसी अधिकारी को तबादला करना बेहद जरूरी है तो इसके लिए चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी। यह व्यवस्था मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन 20 जनवरी तक रहेगी। सूत्रों के मुताबिक सरकार के स्तर पर कुछ कलेक्टरों का तबादला करने की सुगबुगहाट काफी दिनों से चल रही है, लेकिन किसी न किसी वजह से यह टलता रहा है। बताया जा रहा है कि मतदाता सूची और विधानसभा के शीतकालीन सत्र की वजह से बड़े स्तर पर यह काम अब जनवरी के बाद ही होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि चुनाव आयोग के स्थाई आदेश हैं कि जब तक मतदाता सूची का काम चले, तब तक इसमें लगे अधिकारियों-कर्मचारियों को स्थानांतरित न किया जाए।

एक प्रकार से इस काम के दौरान कलेक्टर, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और बूथ लेवल ऑफिसर चुनाव आयोग की प्रतिनियुक्ति पर रहते हैं। 25 नवंबर को मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन होना है। इसके बाद नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए दावे-आपत्ति लिए जाएंगे। बीएलओ घर-घर सर्वे कर आवेदन भरवाएंगे। दावे-आपत्ति का निराकरण करने के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयारी होगी और उसका प्रकाशन 20 जनवरी को किया जाएगा। इसी दौरान ऐसे मतदाता, जिनके पास ब्लैक एंड व्हााइट फोटो वाले मतदाता परिचय पत्र हैं, उनकी रंगीन फोटो वाले कार्ड तैयार किए जाएंगे।
सरकार को किसी भी कलेक्टर का तबादला करना यदि जरूरी है तो इसके लिए उसे पैनल बनाकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के माध्यम से चुनाव आयोग भेजनी होगी। आयोग सामान्य तौर पर शासन के पक्ष को स्वीकार कर एक नाम को मंजूरी दे देता है। इसके बाद ही तबादला आदेश निकाले जा सकते हैं
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव का कहना है कि यह एक सामान्य व्यवस्था है। जब भी मतदाता सूची का काम चलता है तो इससे जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को स्थानांतरित नहीं किया जाता है। 20 नवंबर को मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन होना है। इसके बाद कलेक्टरों के तबादले विशेष परिस्थिति में ही आयेाग की अनुमति से ही होंगे।
05:21

मध्य प्रदेश में 12 मंत्री समेत 45 विधायकों की सदस्यता खतरे में


भोपाल। जिस तरीके से भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता 0 की गई, मध्य प्रदेश के 12 मंत्री और 47 विधायकों की सदस्यता खतरे में है। इन 12 मंत्रियों में विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति का नाम भी शामिल है जिन्होंने विधायक की सदस्यता समाप्त की। कमलनाथ सरकार का कार्यकाल पूर्ण होने से पहले इनकी सदस्यता समाप्त हो सकती है क्योंकि इन सभी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और विशेष न्यायालय में सुनवाई चल रही है। बताने की जरूरत नहीं कि इन सभी मामलों पर फैसला सरकार के कार्यकाल आने से पहले हो जाएगा। यदि सजा हुई तो सदस्यता भी समाप्त होगी।

नेशनल इलेक्शन वॉच के डेटा के मुताबिक विधानसभा चुनाव के दौरान विधायकों की ओर से दिए गए हलफनामों के मुताबिक *मध्य प्रदेश में 93 ऐसे विधायक हैं जिनके खिलाफ क्रिमिनल केस चल रहे हैं, *जबकि 47 ऐसे विधायक हैं जिन पर गंभीर क्रिमिनल केस दर्ज हैं*। खास बात ये है कि इनमें बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों के कई बड़े नेता शामिल हैं।

*इन मंत्रियों के खिलाफ अपराधिक मामले*

गृहमंत्री बाला बच्चन, मंत्री हर्ष यादव, इमरती देवी, जीतू पटवारी, लखन घनघोरिया, लाखन सिंह यादव, स्पीकर एनपी प्रजापति, प्रद्युम्न सिंह तोमर, तरुण भनोत, तुलसी सिलावट, पीसी शर्मा, ब्रजेंद्र सिंह राठौर के खिलाफ भी क्रिमिनल केस हैं। खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के खिलाफ 20 और कानून मंत्री पी सीशर्मा के खिलाफ 14 क्रिमिनल केस हैं।
इन कांग्रेसी विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले

भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद।

मंत्री जीतू पटवारी के रिश्तेदार एवं विधायक कुणाल चौधरी।

आदिवासी युवा नेता एवं कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा।
*भाजपा विधायकों के खिलाफ *आपराधिक मामले*

*पूर्व बीजेपी मंत्री गौरीशंकर बिसेन*
*बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय*
बीजेपी विधायक मोहन यादव, जालम सिंह पटेल, कमल पटेल, पारस जैन, राजेंद्र शुक्ल, रामेश्वर शर्मा, संजय पाठक, सुरेंद्र पटवा समेत कई और विधायकों पर भी क्रिमिनल केस है।

*सबसे ज्यादा 26 क्रिमिनल केस बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा के खिलाफ हैं*
*मामला क्या है*

पन्ना जिले की पवई विधानसभा से विधायक एवं भाजपा नेता प्रह्लाद सिंह लोधी को भोपाल की विशेष अदालत में तहसीलदार के साथ मारपीट के मामले में 2 साल की सजा सुनाई थी। हालांकि कोर्ट में अपील करने का मौका दिया था लेकिन विधानसभा सचिवालय ने अपील की अवधि पूर्ण होने से पहले विधायक प्रह्लाद सिंह लोधी की सदस्यता 0 कर दी। हाईकोर्ट ने प्रहलाद लोधी को राहत दे दी है लेकिन विधानसभा सचिवालय ने अब तक उनकी शून्य हो चुकी सदस्यता पर कोई कार्यवाही नहीं की है। इसके बाद आंकड़े जुटाए जा रहे हैं कि अगले 5 साल में कितने विधायक और मंत्रियों की सदस्यता खतरे में है।

Thursday, 7 November 2019

09:15

मध्यप्रदेश में होर्डिंग के कारोबार पर नकेल कसने की तैयारी


 मध्य प्रदेश में होडिंग कारोबार के नाम पर विज्ञापन एजेंसियों और नगरीय निकायों के अधिकारियों कर्मचारियों ने दोनों हाथों से जमकर धन बटोरने का काम पूरी ईमानदारी से किया है।

 लेकिन अब मध्य प्रदेश में होडिंग कारोबार को लेकर नियम कायदों का पालन करना विज्ञापन एजेंसियों और कराना नगरीय निकाय के अधिकारियों की मजबूरी हो गई है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नगरीय निकायों में शहर की सुंदरता को ग्रहण लगाने वाले होडिंग कारोबार पर कंट्रोल करने के लिए फरमान जारी कर दिया है।
बकायदा मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव श्री मोहंती ने सभी संभागायुक्त, सभी कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त को आदेश जारी कर अवैध होर्डिंग्स को हटाने और अवगत कराने के लिए कहा है।
 रीवा नगर निगम कार्यालय में पिछले पच्चीस साल के दौरान तैनात रहे जिम्मेदार अधिकारियों ने शहर में अवैध होर्डिंग्स के कारोबार को बढ़ाने में अपना हमेशा योगदान ईमानदारी के साथ दिया।‌
 यही वजह है कि रीवा नगर निगम क्षेत्र के प्रमुख चौराहों, तिराहों, आलीशान काम्प्लेक्स एरिया सहित अन्य जगहों पर छोटी और बड़ी होडिंग का जाल फैला रहा।
विज्ञापन संबंधी होडिंग लगाने के एवज में नगर निगम को जो वाजिब राजस्व मिलना चाहिए था वह अधिकारियों की जेब में चला गया।
रीवा नगर निगम आयुक्त सभाजीत यादव ने मुख्य सचिव का आदेश देखने के साथ ही चारों जोन के अधिकारियों और कर्मचारियों को गलियों तक में लगे पोस्टर को हटाने के अभियान में लगा दिया है।

*विज्ञापन एजेंसियों को देना होगा नया रेट*

मुख्यमंत्री के सख्त रुख का मध्य प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में असर बराबर देखने को मिल रहा है।
 संभागायुक्त और कलेक्टर बराबर अपने क्षेत्रों में मानीटरिंग कर रहे हैं।‌
रीवा नगर निगम में पिछले पच्चीस साल तक जानबूझकर राजस्व के इस पहलू पर लीपापोती की गई है।
 जिसका लाभ तत्कालीन अधिकारियों और विज्ञापन एजेंसियों को हुआ है।
बताया जाता है कि नगरीय प्रशासन विकास विभाग ने होडिंग कारोबार को लेकर जिस फीस का निर्धारण किया है उसे रीवा नगर निगम में अक्षरशः लागू करने की व्यवस्था आयुक्त सभाजीत यादव ने बना डाली है।
 ऐसे में रीवा नगर निगम क्षेत्र में जिन विज्ञापन एजेंसियों का बोलबाला है , अब उनके मालिकानो को कमर कस कर बिजनेस करना पड़ेगा।
 नया रेट साल 2017 में लागू किया गया है।  जिसे जानबूझकर रीवा नगर निगम में लागू नहीं किया जा रहा था। इसके एवज में जिम्मेदार अधिकारी अपनी जेब भरने का काम कर रहे थे।
 वैसे भी अब होडिंग लगाने के लिए कलेक्टर की अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
शहर की सुंदरता और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही कलेक्टर को अनुमति देनी होगी।

Monday, 4 November 2019

19:40

मध्य प्रदेश में भाजपा की हुंकार



सिंगरौली जहाँ सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में लकिसान आक्रोश रैली का  आयोजन कर केंद्र की भाजपा सरकार ने कांग्रेस सरकार की नीति एवं नियत पर धावा बोला वहीँ सिंगरौली जिले में सांसद रीती पाठक,विधायक राम लल्लू वैश्य, सुभाष रामचरित्र वर्मा एवं प्रदेश मंत्री एवं कार्यक्रम प्रभारी बुद्धिसेन पटेल ने 11 माह वाली कांग्रेस सरकार पर अनेक गम्भीर आरोप लगाते हुए ,कलेक्ट्रेट के बैरिकेट को उखाड़ते हुए मेन गेट पर पहुँचकर कमलनाथ मुर्दावाद का नारा लगाया और बिजली बिल को आग के हवाले कर होलिकादहन भी किया।
*कांग्रेस सरकार किसानों के साथ धोका करते हुए आपने वचन पत्र में 2 लाख की ऋणमाफ़ी एवं बिजली बिल जैसे महत्वपूर्ण योजनाओ के साथ किसानो को ठगा है -सांसद रीती पाठक
70% नोकरी का लालीपाप दिखाने वाली एवं किसानो के साथ अन्याय करने वाली कांग्रेस सरकार निकम्मी है-विधायक रामलल्लू वैश्य
केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा आवंटित किसानों की राशि 6000प्रधानमन्त्री सम्मान निधि का यह सरकार किसानों के खाते में नही पहुँचा पा रही-विधायक सुभाष एवं अमर सिंह
ज्ञापन देने के बाद सांसद ,विधायक एवं कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी देते हुए पुलिस लाइन में अपनी अपनी जमानत करवाई।
*किसान आक्रोस रैली के मद्देनजर सिंगरौली पुलिस की चाक चौबन्द व्यवस्था से आज का यह कार्यक्रम सम्पन्न हुआ

निष्कर्ष-सरकारे किसी भी की हों उनको जनता के दुःख दर्द से उतना ही मतलब होता है ,उन्हें सिर्फ उनके 1 वोट से ,सरकारें आएँगी जाएँगी लेकिन सिंगरौली की हालत ,युवाओं की दशा सुधरने वाली नही
क्योंकि 11 माह पहले यही भाजपा सरकार थी फिर 11 माह में बनी कांग्रेस सरकार कितना और कहा से सिंगरौली को कथित सिंगापूर बना दे, यही तो राजनीती है इसे ही कहते हैं भावुक जनता भाषण यदि वीर रस में  हो तो जनता उसी की बन जाती है।
19:35

भाजपा विधायक की सदस्यता समाप्त होने के बाद गरमाई मध्य प्रदेश की सियासत


पंकज पाराशर छतरपुर भोपाल। भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की
सदस्यता समाप्त होने के बाद प्रदेश में एक बार फिर सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दावा किया है कि भाजपा की कुछ सीट और कम होने वाली हैं। इसके बाद से भाजपा में हड़कंप मच गया है। पार्टी ने कांग्रेस के संपर्क में रहने वाले विधायकों की संगठन स्तर पर निगरानी शुरू कर दी है। इधर प्रहलाद लोधी ने हाईकोर्ट में अपील की तैयारी कर ली है। पार्टी नेताओं से इस मसले पर बातचीत चल रही है l दरअसल,  कमलनाथ ने कहा 'अभी दो-तीन सीटें और आएंगी, इंतजार करें, 'कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस सरकार हमेशा बहुमत में थी। विधानसभा अध्यक्ष उपाध्यक्ष के चुनाव तथा पिछले जुलाई के पावस सत्र में दंड विधि संशोधन विधेयक पर मत विभाजन में सरकार ने बहुमत हासिल किया था। कमलनाथ के बयान के बाद सियासत गरमा गई है, भाजपा ने आशंका जताई है क्या कांग्रेस साजिश रच रही है l वहीं पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि भाजपा ऐसा कोई काम करती है तो कहा जाता है कि हार्स ट्रेडिन्ग कर रही है । हम करें तो पाप कांग्रेस करे तो पुन्य, इधर, विधानसभा सचिवालय द्वारा प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त करने की सूचना सोमवार को निर्वाचन आयोग को भेजने की तैयारी है। इसमें विधानसभा राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशन की प्रति के साथ पवई विधानसभा सीट की रिक्तता की सूचना आयोग को देगी।
*भाजपा कर रही अदालत की अवमानना*
उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए ट्वीट में कहा है कि लोधी पर मारपीट का मामला उनके ही कार्यकाल का है। मारपीट उनके मुख्यमंत्रित्वकाल में हुई और पुलिस में प्रकरण भी तभी दर्ज हुआ। अदालत का फैसला अब आया है। उन्होंने कहा कि ऐसे में चौहान द्वारा कोर्ट के फैसले व संविधान पर सवाल खड़ा किया जाना, शोभा नहीं देता। इसी तरह पीसीसी के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे और पीसीसी अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि भाजपा विधायक की सदस्यता समाप्त किए जाने के मामले में कांग्रेस पार्टी का कोई सरोकार नहीं है। अदालत के फैसले पर विधानसभा ने सदस्यता समाप्त की है और भाजपा नेता उस पर सवाल उठाकर अदालत की अवमानना कर रहे हैं।
*कानूनी सलाह ले रही भाजपा*
प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त होने के बाद भाजपा निचली अदालत के फैसले को उच्च कोर्ट में चुनौती देने को लेकर विशेषज्ञों से कानूनी सलाह ले रही है। इधर प्रहलाद लोधी ने कहा है कि विधायक सदस्यता समाप्त करने में कांग्रेस ने उनके साथ बदले की भावना से फैसला किया है। उन्हें विधायक चुने जाने के बाद कांग्रेस में आने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया था। इसलिए कांग्रेस ने अदालत के आदेश के बहाने सदस्यता समाप्त कर दी और पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क तक नहीं किया। लोधी ने कहा कि उन्हें अदालत पर विश्वास है। अदालत ने उन्हें फैसले के बाद तुरंत जमानत दे दी। वे हाई कोर्ट में विशेष न्यायालय के फैसले पर अपील कर सकते हैं।
09:33

जाने मध्य प्रदेश का इतिहास



के सी शर्मा 1 नवंबर को मध्य प्रदेश स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस दौरान पूरे प्रदेश में हर जगह अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।  मध्यप्रदेश की स्थापना को लेकर ये सवाल कि आखिर वो क्या कारण था जिनके चलते मध्य प्रदेश अस्तित्व में आया ?
यहां हम आपको प्रदेश की स्थापना से जुड़ीं खास जानकारियां हम आपको दे रहे हैं :-

  मध्य प्रदेश आज  64वें वर्ष में प्रवेश कर गया है!

- मध्य प्रदेश 1 नवंबर, 2000 तक क्षेत्रफल के आधार पर भारत का सबसे बड़ा राज्य था।इस दिन मध्य प्रदेश राज्य से १४ जिले अलग कर छत्तीसगढ़ राज्य छत्तीसगढ़ की स्थापना हुई थी।मध्य प्रदेश की सीमाएं पांच राज्यों की सीमाओं से मिलती है। इसके उत्तर में उत्तर प्रदेश, पूर्व में छत्तीसगढ़, दक्षिण में महाराष्ट्र, पश्चिम में गुजरात तथा उत्तर-पश्चिम में राजस्थान।

1 नवंबर 1956 को प्रदेश के गठन के साथ ही इसकी राजधानी और विधानसभा का चयन भी कर लिया गया।

- मध्यप्रदेश की राजधानी के रूप में भोपाल को चुना गया।

- इस राज्य का निर्माण तात्कालीन सीपी एंड बरार, मध्य भारत, विंध्यप्रदेश और भोपाल राज्य को मिलाकर हुआ।

 1956 में अस्तित्व में आए इस प्रदेश को पहले मध्य भारत कहकर संबोधित किया जाता था।

- इसका पुनर्गठन भाषाई आधार पर हुआ।

- 15 अगस्त, 1947 के पूर्व देश में कई छोटी-बड़ी रियासतें और देशी राज्य अस्तित्व में थे।

- आजादी के बाद उन्हें स्वतंत्र भारत में सम्मिलित और एकीकृत किया गया।

 1 नव‍ंबर,1956 को मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर पं. रविशंकर शुक्ल का पहला भाषण लाल परेड ग्राउंड पर हुआ था।

- 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के बाद देश में सन् 1952 में पहले आम चुनाव हुए, जिसके कारण संसद एवं विधान मण्डल कार्यशील हुए।

- प्रशासनिक दृष्टि से इन्हें श्रेणियों में विभाजित किया गया था।

 सन् 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के फलस्वरूप 1 नवंबर, 1956 को नया राज्य मध्यप्रदेश अस्तित्व में आया।

- इसके घटक राज्य मध्य प्रदेश, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश।

- राजधानी बनाए जाने के बाद 1972 में भोपाल को एक जिले का तमगा मिला।

- अपने गठन के वक्त मध्य प्रदेश में कुल 43 जिले थे।

- आज मध्यप्रदेश में 52 जिले हैं।
09:01

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की बढ़ी मुश्किलें


पंकज पाराशर छतरपुर भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही है, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी उन पर शिकंजा कसा है। 2017 में शिवराज सरकार के कार्यकाल में हुए पौधरोपण कथित घोटाले में सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। अब इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा द्वारा की जाएगी। यह जानकारी प्रदेश के वन मंत्री उमंग सिंघार ने दी। दरअसल, वन मंत्री उमंग सिंघार ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) को पत्र लिखकर जांच करने के लिए कहा है। इस मामले में आधा दर्जन से ज्यादा वन अधिकारियों के खिलाफ भी जांच की जाएगी। मामले में आरोप लगाया गया है कि नर्मदा नदी के किनारे छह करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाने के विश्व रिकॉर्ड बनाने की कोशिश के चलते पब्लिक फंड के पैसों का दूसरे लोगों को लाभ पहुंचाने के इरादे से इस्तेमाल किया गया। हालांकि, सरकार रिकार्ड बनाने में नाकाम रही थी। सिंघार ने कहा कि विश्व रिकॉर्ड बनाने के नाम पर पूर्व शिवराज सरकार ने सिर्फ ढोंग किया। उन्होंने कहा कि ग्नीज़ बुक वर्ड रिकार्ड के मुताबिक महज  4.5 फीसदी पौधरोपण मापदंडों के तहत किया गया था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि 455 करोड़ रुपये की वृक्षारोपण परियोजना में बड़े पैमाने पर विसंगतियां पाई गई हैं। उन्होंने कहा कि पौधे गुजरात और महाराष्ट से मंगवाए गए थे। जबकि गड्ढे खोदने के लिए जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया लेकिन कई स्थानों पर गड्ढे खोदे नहीं गए। उन्होंने कहा कि इस मामले में पूर्व वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार और पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी गई है। वन विभाग द्वारा दिखाए गए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि तत्कालीन अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक बीबी सिंह को परियोजना का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था और सेवानिवृत्त पीसीसीएफ वाई सत्यम को अनुबंध के आधार पर राज्य योजना आयोग में एक विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया था। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, रोपण के लिए 1.21 लाख से अधिक स्थानों की पहचान की गई और 7.10 करोड़ पौधे लगाए गए, जबकि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिकारियों ने मप्र सरकार को जो आंकड़े पेश किए, उनमें केवल 5,540 पौधरोपण स्थल थे और अंत में 2.22 करोड़ पौधे लगाए गए थे। दस्तावेजों में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि पूर्व वन मंत्री ने रिकॉर्ड बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए l एक जांच के बाद, विभाग ने बताया कि 2.96 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए थे, जिनमें से 59% फरवरी 2019 में जीवित थे। मंत्री ने बताया कि उन्हें विभाग द्वारा गलत जानकारी दी गई थी क्योंकि बैतूल के पथाई RF227 क्षेत्र में विभाग ने दावा किया था कि 15,625 पौधे लगाए हैं जबकि निरीक्षण के दौरान केवल 9985 गड्ढे मिले थे। 11,140 जीवित पौधों के मुकाबले, एक निरीक्षण के दौरान मंत्री ने 2,343 पौधों को मौके पर पाया था।

Sunday, 3 November 2019

21:56

मध्यप्रदेश में 9 आईएएस अफसरों की नवीन पदस्थापना जाने किस को कहां मिली पोस्टिंग




भोपाल। राज्य शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के 9 अधिकारियों की नवीन पदस्थापना की है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेशानुसार श्री पी. नरहरि सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क तथा आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास (अतिरिक्त प्रभार) तथा पदेन सचिव नगरीय विकास एवं आवास को आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा पदेन सचिव नगरीय विकास एवं आवास और अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक आयुक्त जनसम्पर्क का प्रभार अतिरिक्त रूप से सौंपा गया है। श्री विकास नरवाल प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड इंदौर को संचालक जनसम्पर्क तथा कार्यपालक संचालक म.प्र. माध्यम पदस्थ किया गया है।

श्री चन्द्रमौलि शुक्ला उप सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी सह विशेष परियोजनाओं को प्रबंध संचालक औद्योगिक केन्द्र विकास निगम इंदौर पदस्थ किया गया है। श्री कुमार पुरूषोत्तम औद्योगिक केन्द्र विकास निगम इंदौर को प्रबंध संचालक म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड इंदौर, श्री डी.पी. आहूजा आयुक्त वाणिज्यिक कर इंदौर को आयुक्त तथा पदेन सचिव उच्च शिक्षा, श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह आयुक्त एवं पदेन सचिव उच्च शिक्षा को आयुक्त वाणिज्यिक कर, इंदौर,

श्री रजनीश कुमार श्रीवास्तव सचिव मंत्रालय को आयुक्त भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर, श्री स्वतंत्र कुमार सिंह अपर आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा अतिरिक्त प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कम्पनी लिमिटेड भोपाल तथा आयुक्त सह-संचालक नगर एवं ग्राम निवेश (अतिरिक्त प्रभार) को संचालक नगर एवं ग्राम निवेश तथा अपर आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास और अतिरिक्त प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कम्पनी लिमिटेड (अतिरिक्त प्रभार) तथा श्री अनय द्विवेदी अपर आयुक्त भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर को प्रबंध संचालक कृषि विपणन बोर्ड-सह-संचालक मण्डी पदस्थ किया गया है।
18:12

मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने बोला भाजपा पर ज्ञापन हमला लगाया जनता के अधिकारों पर कुठाराघात का आरोप



सीधी प्राकृतिक मांर से जूझ रहे मध्य प्रदेष के किसानों को उबारने के लिये किये जा रहे प्रदेष सरकार के प्रयासों मे सहयोग करने के बजाय असहयोगात्मक रवैया जनता के अधिकारों पर कुठारा घात है जनता को उनका हक दिलाने के लिये महांमहिम के नाम पर  जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर आगाह किया जावेगा अगर मांगों की पूर्ति नही हुई तो 10 नबंम्बर के बाद बाद आन्दोलन किया जायेगा उक्त बाते जवाहर भवन मे आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए सहकारिता प्रकोष्ट के सम्भागीय संयोजक राजेन्द्र भदौरिया ने कहा है। रविवार को दोपहर मे आयोजित बार्ता मे भदौरिया ने कहा कि बीते महीने हुई अतिवृष्ट के कारण अंन्नदाताओं को भारी छाति उठानी पड़ी है तो सड़क बिजली सहित तमाम सरकारी सम्पतियों की भी भारी छति हुई है जिससे उवरने के लिये संघीय ढांचे की ब्यवस्था के अनुसार केन्द्र सरकार का दायित्व बनता है कि प्रदेषों मदद केन्द्रीय आपदा कोष से करे लेकिन भाजपा सरकार राजनैतिक प्रतिषोध की भावना के कारण प्रदेष सरकार के कोष मे एक रूपये की मदद राषि जमा नहीकिया है जवकी प्रदेष सरकार 270 करोड़ की राहत राषि बांटी है। भदौरिया ने कहा कि प्रदेष के 29 सांसदो मे 28 सांसद भाजपा के है लेकिन राजनैतिक बदले की भावना के से इतने प्रभावित है कि प्रदेष की जनता का हक दिलाने के लिये एक भी सांसद ने सदन सहित केन्द्र सरकार के मुखिया से मुलाकात तक नही किया मांग करने और सांसद निधि से मदद करना दूर किसानों और पीड़ित नागरिकों के जख्म को कुरेदने के लिये अनर्गल बयानवाजी कर रही है। उन्होने भाजपा व केन्द्र सरकार पर विकास के साथ विष्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेष के साथ भेदभाव कर नागरिकों का हक छीन रही है जवकी केन्द्र प्रायोजित योजनाए भावांतर भुगतान नल जल केन्द्रीय सड़क विकास निधी के नही मिलने से अवद्ध हो रहे हैं। कांग्रेस पाटी की आयोजित बार्ता भाजपा के आन्दोलन के जबाव मे आन्दोलन खड़े करना दिखाई दिया है आज जहां भाजपा कमलनाथ सरकार पर हमला करने के लिये आन्दोलन की तैयारी कर रही है वही कांग्रेस प्रदेष सरकार के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाकर महांमहिम के नाम पर ज्ञापन देकर भाजपा के आरोपों के जबाव देने की तैयारी कर ली है। वार्ता के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रूद्रप्रताप सिंह बाबा पूर्व जिला अध्यक्ष आनंद सिंह चैहान हरिहर गोपाल मिश्रा देवेन्द्र सिंह मुन्नू अरविंद तिवारी रंजना मिश्रा रोहित मिश्रा छात्र नेता दीपक मिश्रा सुरेष सिंह चैहान गणेष द्धिवेदी सहित दर्जन भर पदाधिकारी मौजूद रहे है।
रेल की समीक्षा तो सड़क की क्यो नही!
कांग्रेस पार्टी के आयोजित प्रेस बार्ता के दौरान प्रदेष कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष लालचंद्र गुप्त भी पहुंच गये जहां उन्होने ने सीधी सांसद का नाम लिये विना ही उनपर सीधी के विकास की सोच नही रखने का न केवल आरोप लगाया वल्की ललितपुर सिंगरौली रेल परियोजना के चल रहे कार्यो की समीक्षा किये जाने पर भी सवालिया निसान यह कहते हुए लगाया कि रेल के कार्य की समीक्षा करके अपने खुद के कराये गये रेलवे स्टेषन के सिलान्यांस और 2019 तक सीधी रेल पहुंचाने के दावों पर पर्दा डालने के प्रयास है जवकी एन एच 39 के कार्य की कभी समीक्षा करने की कोषिस तक नही की है हालत यह है कि सीधी से सिंगरौली जाने का मार्ग पूरी तरह से बंद है उसकी समीक्षा की जानी चाहिये उन्होने आगाह किया कि अगर 10 नबम्बर19 तक इस मार्ग के चालू कराने और कराये गये कार्य की समीक्षा सांसद और भाजपा के नेता नही करते तो कांग्रेस पार्टी आन्दोलन के लिये बाध्य होगी उनके इस प्रस्ताव का समूची पार्टी ने समर्थन किया है।
08:30

मध्य प्रदेश में बिना ईवीएम और बिना दल के जनवरी में होंगे पंचायत चुनाव



भोपाल !  राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की घोषणा कर दी है। ये चुनाव तीन चरणों में क्रमश: 20, 22 व 24 जनवरी को होंगे। मतदान प्रात: 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक होगा। उसके बाद मतदान केन्द्र पर ही मतों की गणना की जाएगी। संवेदनशील मतदान केन्द्रों पर मतगणना का काम नहीं किया जाएगा। इन मतों की गणना खण्ड मुख्यालयों पर  क्रमश:  28 जनवरी, 30 जनवरी व 1 फरवरी को होगी। सारणीकरण व निर्वाचन परिणाम की घोषणा पंच, सरपंच व जनपद सदस्य के लिये 3 व 5 फरवरी को तथा जिला पंचायत सदस्यों के लिए 6 फरवरी को होगा। पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है, जो 25 जनवरी तक प्रभावी रहेगी। निर्वाचन आयोग का कहना है, कि मतगणना का आचार संहिता से मतलब नहीं रहेगा और आयोग की मंशा है, कि निर्वाचन प्रक्रिया के कारण गांव के रोजगारोन्मूलक कार्य प्रभावित न हों।
राय निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ए.वी. सिंह ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि इस चुनाव में 50 जिला पंचायतों के 843 व 313 जनपद पंचायतों के 6816 जनपद सदस्यों का निर्वाचन होना है। प्रदेश में कुल पंचायतों की संख्या 23040 है जिनमें से 22 हजार 795 पंचायतों में चुनाव होंगे। प्रदेश के कुल 2 करोड़ 87 लाख मतदाताओं के लिए 62,007 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं। इनमें से कुल 26,874 मतदान केन्द्र संवेदनशील हैं। श्री सिंह ने बताया कि निर्वाचन की प्रक्रिया की शुरुआत 26 दिसम्बर को निर्वाचन की सूचना के प्रकाशन के साथ होगी। नामांकन पत्र भरने की शुरुआत भी इसी दिन से होगी, जो 2 जनवरी तक जारी रहेगी। नामांकन पत्रों की जांच 4 जनवरी को होगी, नाम वापसी की अंतिम तिथि। 6 जनवरी है। श्री सिंह ने बताया कि चुनाव दलीय आधार पर नहीं किए जाएंगे। साथ ही मतदान में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन का उपयोग भी नहीं होगा। उन्होंने बताया कि 2004 के चुनाव में 76.61 प्रतिशत मतदान रहा था। उस चुनाव में 282 मतदान केन्द्रो ंपर पुनर्मतदान हुआ था। पिछले चुनाव में 5 जिला पंचायत सदस्यों, 133 जनपद सदस्यों, 814 सरपंचों व 2,06,557 पंचों का चुनाव निर्विरोध हुआ था। पिछले चुनाव में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 37.36 प्रतिशत था, जो इस बार बढ़कर 50 प्रतिशत कर दिया गया है।
शिक्षकों की नहीं होगी डयूटी: पंचायत चुनाव में शिक्षकों की डयूटी नहीं लगाई जाएगी। यह निर्देश राय निर्वाचन आयोग ने दिए हैं। मुख्य चुनाव पदाधिकारी श्री सिंह ने कहना है कि प्रदेश में कर्मचारियों की कमी है, ऐसे में शिक्षकों की डयूटी लगाई भी जाती है, तो बहुत आवश्यक होने पर ही लगाई जाएगी। चुनाव के दौरान रोजगार गारंटी योजना के तहत स्वीकृत कार्यों पर कोई रोक नहीं होगी।

Saturday, 2 November 2019

09:38

बुंदेलखंड भाजपा में बगावत पूर्व मंत्री ने मिला कांग्रेस के हाथ


*पंकज पाराशर छतरपुर*
भोपाल मध्य प्रदेश में विधान परिषद के गाथा की तैयारी है ने अपने वचन पत्र में इसका जिक्र किया था अब सरकार ने विधान परिषद के गठन की तैयारियां तेज कर दी है जिसका एक स्वर में भाजपा विरोध कर रही है ने आरोप लगाए हैं कि कांग्रेस सरकार प्रदेश के विकास के लिए विधानपरिषद का गठन नहीं करना चाहती, बल्कि सरकार बचाने के लिए ऐसा कदम उठाने जा रही है। लेकिन अब भाजपा के इस विरोध में फूट नजर आ रही है के कद्दावर नेता, पन्ना विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री कुसुम महदेले ने विधान परिषद के लिए कांग्रेस से हाथ मिला लिया है और समर्थन किया है लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है महदेले लम्बे समय से अपनी ही पार्टी में साइडलाइन चल रही हैं और कई मौके पर वो अपनी ही पार्टी को घेर चुकी हैं विधान परिषद के गठन को लेकर हो रही सियासत के बीच पूर्व मंत्री कुसुम महदेले ने कांग्रेस को भाजपा पर निशाना साधने का मौक़ा दे दिया है  उन्होंने कहा कि 'मध्य प्रदेश में विधान परिषद के गठन का फ़ैसला स्वागत है। सर्व सम्मति से समर्थन योग्य है। इससे मध्य प्रदेश के योग्य व्यक्तियों की भागीदारी मध्य प्रदेश के विकास में हो सकेगी'। अब तक भाजपा में इसको लेकर विरोध के स्वर फूट रहे थे, लेकिन पूर्व मंत्री कुसुम मेहदेले के समर्थन के बाद अब मध्य प्रदेश की सियासत गरमा गई है 

Thursday, 31 October 2019

20:27

मध्य प्रदेश में कर्ज माफी बना मजाक- लक्ष्मण सिंह


*पंकज पाराशर छतरपुर*
भोपाल। मध्य प्रदेश में किसान कर्ज माफी पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस के वादे को अमलीामा पहनाने में प्रशासनिक अमला रोढ़ा बन गया है। सरकार दावा कर रही है लाखों किसानों का कर्ज माफ हो चुका है बाकी किसानों का कर्जमाफी की प्रक्रिया चल रही है लेकिन जमीनी हकीकीत यह है कि बैंक द्वारा किसानोंं को अब तक कर्ज माफी का प्रमाण नहीं मिला। जिसे लेकर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के भाई और चाचौड़ा विधायक लक्ष्मण सिंह ने अपने क्षेत्र के गुना कलेक्टर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि, इस तरह की शिकायतें लगातार आ रही हैं। मैंने अपने गृह जिला गुना के सहकारी बैंक के मैनेजर से पूछा कि क्यों किसानों के कर्जे माफ नहीं हुआ छूट कैसे गए। तो उन्होंंने कहा कि ज़िलाधीश हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। इसलिए हम सबके कर्जे माफ नहीं करपा रहे हैं। अब मैं कल वहां जा रहा हूं और यह बात हम ग्रामीणजनों के बताएंगे और मैं अपेक्षा करता हूं कि वहां कलेक्टर भी आएं इसकी वजह बताएं। जिससे की जो वादा सरकार ने किया वह पूरा हो। जब उनसे पूछा गया कि क्या वजह है कि कलेक्टर साइन नहीं कर रहे हैं। तो उन्होंने कहा कि वजह तो मंत्री और मुख्यमंत्री बताएं क्यों नहीं कर रहे हैं। मैं चाहता हूं कि हर विधानसभा में एक शिविर लगे सिर्फ किसान कर्ज माफी का और जिन किसानों के कर्ज माफी नहीं हुए हैं वहां कलेक्टर मौके पर ही हस्ताक्षर कर किसानों का कर्ज माफी करें। गौरतलब है कि कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने किसान कर्ज माफी की फाइल दस मिनट में साइन करदी थी। लेकिन सरकार को सत्ता में एक साल होने को है पूरी तरह से इस योजना के तहत किसानों का कर्ज माफी नहीं हो पाया है। समय समय पर विभिन्न तरह की परेशानियों के कारण किसान कर्ज माफी अटकी हुई है। जिससे सरकार की बार बार किरकिरी हो रही है। वहीं, विपक्षी पार्टी भाजपा भी सरकार पर लगातार दबाव बनाए हुए और आरोप लगा रही है कि सराकर ने किसी भी किसान का कर्ज माफ नहीं किया है।
18:50

जोर शोर से बढ़ रही है एनसीएल की सतर्कता जन जागरूकता फैलाने की मुहिम



नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) में गत सोमवार को शुरू हुए ‘सतर्कता जागरूकता सप्ताह’ के तहत चलाई जा रही सतर्कता जन-जागरूकता फैलाने की मुहिम ज़ोर-शोर से आगे बढ़ रही है। इस दौरान एनसीएल मुख्यालय सहित कंपनी के सभी कोयला क्षेत्रों एवं इकाइयों में भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं सतर्कता को बढ़ावा देने वाले कई रोचक कार्यक्रम हर रोज आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही, एनसीएल के विभिन्न कोयला क्षेत्रों एवं इकाइयों के सतर्कता रथ कंपनी परिक्षेत्र एवं आस-पास सतर्कता जन-जागरूकता फैला रहे हैं।

बुधवार को एनसीएल मुख्यालय में स्कूली बच्चों के लिए सतर्कता विषय पर आधारित अंतर विद्यालय वाद-विवाद, क्विज और निबंध एवं स्लोगन (नारा) लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। साथ ही, मुख्यालय कर्मियों ने स्लोगन लेखन एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता में उत्साह के साथ भाग लिया। बुधवार को ही ककरी एवं निगाही क्षेत्रों और नेहरू शताब्दी चिकित्सालय (एनएससी) में भी सतर्कता जागरूकता सप्ताह की थीम ‘ईमानदारी: एक जीवन शैली’ पर निबंध लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। 

बृहस्पतिवार को कृष्णशिला क्षेत्र के संविदा कर्मियों को सतर्कता शपथ दिलाई गई और उन्हें अपनी दिनचर्या एवं कार्य निर्वहन में ईमानदारी का पालन करने के प्रति जागरूक किया गया।

बृहस्पतिवार को ही अमलोरी क्षेत्र स्थित डीएवी स्कूल एवं सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यार्थियों तथा क्षेत्र के कर्मियों ने संयुक्त रूप से मिलकर सतर्कता मार्च निकाला और मिनी मैराथन में भाग लेकर भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं सतर्कता पालन का संदेश दिया। इससे पहले बुधवार को एनएससी कर्मियों ने सतर्कता रैली और मंगलवार को निगाही क्षेत्र के कर्मियों ने सतर्कता झांकी निकालकर लोगों को भ्रष्टाचार उन्मूलन के प्रति जागरूक किया।

सतर्कता जागरूकता सप्ताह के दौरान एनसीएल के कई क्षेत्र अपने सतर्कता रथ के माध्यम से अपने कार्यक्षेत्र एवं आस-पास रोचक नारों एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों से सतर्कता जागरूकता फैला रहे हैं। ऐसे ही एक रथ को बुधवार को बीना क्षेत्र के महाप्रबंधक श्री राजेंद्र राय ने हरी झंडी दिखाकर बीना कॉलोनी एवं आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में सतर्कता जागरूकता फैलाने के सफर पर रवाना किया।

त्यौहारों के मौसम में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार उन्मूलन का संदेश देने के लिए झिंगुरदा क्षेत्र में एक बेहद अनूठी पहल हुई है। झिंगुरदा आवासीय परिसर के स्टेडियम में सतर्कता और ईमानदारी: एक जीवन शैली विषय पर आधारित एक विशाल रंगोली बनाई गई है, जिसे देखने लगातार लोग उमड़ रहे हैं। जोर जोर से बढ़ रही है
18:34

एनसीएल ने 63 अधिकारियों और कर्मचारियों को दी भावभीनी विदाई



नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के 9 अधिकारी एवं 54 कर्मचारी बृहस्पतिवार को सेवानिवृत्त हुए, जिनमें कंपनी मुख्यालय से महाप्रबंधक (सिविल) श्री ए॰ के॰ सिंह, महाप्रबंधक (सामग्री प्रबंधन) श्री पी॰ के॰ सरकार, वरीय प्रबंधक (ई॰ एंड एम॰) श्री एन॰ पी॰ दूबे और सीनियर क्लर्क श्री सुशील कुमार पांडे शामिल थे। सेवानिवृत्त सहयोगियों के सम्मान में कंपनी मुख्यालय सहित सभी कोयला क्षेत्रो में अभिनंदन समारोह आयोजित किए गए। एनसीएल मुख्यालय में आयोजित समारोह में कंपनी के निदेशक (वित्त एवं कार्मिक) श्री एन.एन. ठाकुर बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।

सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री ठाकुर ने कहा कि एनसीएल परिवार कंपनी के स्तम्भ रहे सेवानिवृत्त कर्मियों के बेहतरीन कार्य हेतु आभारी है और कंपनी की उत्तरोत्तर बढ़ोतरी में इनका अहम योगदान रहा है। साथ ही, सेवानिवृत्त हुए कर्मियों को आगामी पारी की शुभकमनाएं देते हुए उन्होंने आशा जताई कि वे अपने लंबे अनुभव का प्रयोग करते हुए समाज सेवा के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान देते रहेंगे।

सभी सेवानिवृत अधिकारियों-कर्मचारियों ने कार्यक्रम में एनसीएल में अपनी सेवाओं से जुड़े संस्मरण साझा किए। साथ ही, कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी सेवानिवृत कर्मियों से जुड़ी यादें साझा की। मुख्य प्रबंधक (कार्मिक) श्री सत्य प्रकाश ने कार्यक्रम में शरीक होने के लिए सभी अतिथियों का आभार जताया। कार्यक्रम में एनसीएल मुख्यालय के महाप्रबंधकों एवं विभागाध्यक्षों सहित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

कंपनी के सभी कोयला क्षेत्रों एवं इकाइयों में भी कार्यक्रम आयोजित कर सेवानिवृत सहयोगियों का अभिनंदन किया गया।
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क्या भाजपा के हो जाएंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया


*पंकज पाराशर छतरपुर*
भोपाल। पीसीसी चीफ को लेकर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक घमासान चल रहा है। एक तरफ राजधानी में सिंधिया समर्थक प्रेशर पॉलिटिक्स करते नजर आए, वहीं दूसरी तरफ ज्योतिरादित्य सिंधिया का कांग्रेस आला को अल्टिमेटन से सियासत का बाजार गर्म रहा। अब बीजेपी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के दरवार पहुंच द्वंद की चिंता सता रही है l उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मुझे इस बारे में नहीं मालूम किसे कौन अल्टीमेटम दे रहा है। कांग्रेस में रोज सुनने में आ रहा है कोई न कोई किसी न किसी को अल्टीमेटम दे रहा है। प्रदेश में एक मुख्यमंत्री नहीं बल्की कई मुख्यमंत्री हैं। जिस वजह से प्रदेश की सरकार में कामकाज छोड़ बाकी सब हो रहा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था से लेकर अन्य सभी मोर्चों पर कांग्रेस सरकार फेल हो गई है। अफसर भी असमंजस में हैं कि किस मुख्यमंत्री की सुनें। इसलिए किसी को समझ नहीं आ रहा है वह किसका आदेश माने। वहीं, उन्होंने कहा कि दिल्ली में देश भर से बीजेपी कार्यकर्ताओं समेत कई नेताओं को बुलाया गया है। एक बैठक रखी गई है जिसमें पार्टी के कामकाजों की रुपरेख तैयार कर जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसमें मैं भी शामिल होने दिल्ली जा रहा हूं। जब उनसे सिंधिया के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बिना कुछ कहे सिर्फ मुस्कुरा दिया। भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा ने आने का न्योता दिया है l पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साध्वी प्रज्ञा के बयान पर पाबंदी लगाने को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई बेन उनके बयानों पर नहीं लगाया गया है। न ही उनकी ओर से ऐसा कोई विवादित बयान सामने आया है जिसपर किसी तरह का एक्शन लिया जाए l