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Thursday, 4 March 2021

17:58

तमिलनाडु में चुनाव से पहले शशिकला का राजनीति से संन्यास जाने क्यों

tap news India deepak tiwari 
चेन्नई. अन्नाद्रमुक की सुप्रीमो स्वर्गीय जयललिता की प्रमुख सहयोगी रही शशिकला ने राजनीतिक जीवन से संन्यास की घोषणा की है। उन्होंने द्रमुक को हराने के लिए अन्नाद्रमुक नेताओं से एकजुट होने की अपील भी की है। शशिकला ने चिट्ठी जारी कर कहा, 'पार्टी के कार्यकर्ता मिलकर रहें और आने वाले विधानसभा चुनाव में DMK को हराकर बड़ी जीत तय करें।' इसके पहले कयास लगाए जा रहे थे कि शशिकला अपने भतीजे दिनाकरण के साथ मिलकर पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं, वहीं सूत्र इस पूरी एपिसोड को भाजपा की लिखी पटकथा का हिस्सा बता रहे हैं।
अम्मा यानी जयललिता के जमाने में बेहद ताकतवर रहीं शशिकला चिन्नम्मा के नाम से जानी जाती हैं। उन्हें को 4 साल पहले 68 करोड़ के एक भ्रष्टाचार के मामले में जेल भेज दिया गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ई पलानी स्वामी ( ईपीएस) की अगुवाई वाले अन्नाद्रमुक ने उन्हें पार्टी महासचिव के पद से हटा दिया था। इसके खिलाफ शशिकला ने खुद को जयललिता की विरासत का असली दावेदार बताते हुए अदालत की शरण भी ली थी। फरवरी में जेल से छूटने के बाद बेंगलुरु से चेन्नई तक उनके जबरदस्त रोड शो को शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा था।
बगावत से नुकसान रोकने में जुटी थी भाजपा
शशिकला ने तो पार्टी से निकाले जाने के बाद नई पार्टी नहीं बनाई, लेकिन उनके भतीजे दिनाकरन ने एएमएमके नाम से अलग पार्टी बना ली थी। इस पार्टी ने लोकसभा में 5.2% और और विधानसभा उपचुनावों में 7% वोट भी हासिल किए थे। उधर, मुख्यमंत्री ईपीएस और उपमुख्यमंत्री ओपीएस ने शशिकला को पार्टी में लेने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद उनके पार्टी में वापसी के रास्ते बंद हो गए थे। ऐसे में अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन करने वाली भाजपा शशिकला की संभावित बगावत के चलते नुकसान को रोकने के लिए लगातार कोशिश कर रही थी।
चुनाव में सब मिलकर काम करें- शशिकला
शशिकला ने अपनी चिट्ठी में कहा कि जब पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता जीवित थीं, तब भी मैं कभी सत्ता में या पद पर नहीं रही। उनके निधन के बाद भी मैं ऐसा नहीं करूंगी। उन्होंने लिखा- राजनीति छोड़ रही हूं, लेकिन मैं हमेशा भगवान से प्रार्थना करूंगी कि अम्मा का स्वर्णिम शासन आए और विरासत आगे बढ़े। ये मानते हुए कि हम एक ही मां की संतान हैं, सभी समर्थकों को आगामी चुनावों में एक साथ काम करना चाहिए। सभी को DMK के खिलाफ लड़ना चाहिए और अम्मा की सरकार बनाना चाहिए। सभी को मेरा शुक्रिया।'
जयललिता के निधन के बाद AIADMK की कमान संभाली
दिसंबर 2016 में जयललिता के निधन के बाद शशिकला AIADMK की महासचिव चुनी गई थीं। फरवरी 2017 में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनका नाम सामने आया था। उसके बाद उन्होंने पार्टी की कमान अपने भतीजे टीटीवी दिनाकरन को दे दी थी। सितंबर 2017 में AIADMK ने उन्हें और दिनाकरन को पार्टी से निकाल दिया था। दिनाकरन ने अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कषघम (AMMK) की स्थापना की। शशिकला के समर्थन से ही पलानीस्वामी तमिलनाडु के CM बनाए गए। हालांकि, तब पार्टी दो धड़ो में बंट गई। पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम के बीच CM बनने को लेकर विवाद बढ़ गया। बाद में दोनों गुट एक हो गए और शशिकला को पार्टी से किनारे कर दिया।
भ्रष्टाचार केस में 4 साल जेल में रहीं
चार साल की जेल की सजा काटने के बाद 27 जनवरी को शशिकला रिहा हुईं। उसके बाद कोरोना पॉजिटिव हो गईं। उन्हें बेंगलूरु के विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। 31 जनवरी को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। यहां से वे 8 फरवरी को चेन्नई लौंटी। उनके बाहर आने के बाद यह चर्चा थी कि वे विधानसभा चुनाव में उतरेंगी।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा भी था कि वे जल्द चुनावी मैदान में उतरेंगी। शशिकला और उनके भतीजे AMMK सचिव टीटीवी दिनाकरन ने मीडिया और समर्थकों से चेन्नई में मुलाकात की थी। फिलहाल वे अपनी भतीजी जे कृष्णप्रिया के साथ रह रही हैं।

Saturday, 20 February 2021

15:11

8वीं पास मुरुगेसन केले के फाइबर वेस्ट से बना रहे हैं प्रोडक्ट एक करोड़ है साल का टर्नओवर

tap news India deepak tiwari तमिलनाडु के मदुरै में रहने वाले मुरुगेसन का बचपन तंगहाली में गुजरा। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इसलिए आठवीं के बाद ही वे पढ़ाई छोड़कर खेती में पिता की मदद करने लगे। हालांकि खेती में कुछ खास मुनाफा नहीं हो रहा था। जैसे-तैसे करके वे अपना काम चला रहे थे। इसी बीच एक दिन गांव में ही एक आदमी को केले की छाल से रस्सी तैयार करते देखा। वह आदमी उस रस्सी से फूलों की माला तैयार कर रहा था। उन्होंने पास जाकर देखा और उसके काम को समझा। इसके बाद मुरुगेसन ने तय किया कि क्यों न इस काम को बिजनेस के रूप में किया जाए।
57 साल के मुरुगेसन बताते हैं कि केले की बाहरी छाल को लोग या तो फेंक देते हैं या जला देते हैं। कॉमर्शियल फॉर्म में इसका इस्तेमाल बहुत ही कम लोग करते हैं। मैंने घर में इस आइडिया को लेकर पिता जी से बात की। उन्हें भी आइडिया पसंद आया। इसके बाद 2008 में मैंने केले के फाइबर से रस्सी बनाने का काम शुरू किया।
हर साल 500 टन केले के ‘फाइबर वेस्ट’ की प्रोसेसिंग करते हैं
वे बताते हैं कि शुरुआत में यह काम मुश्किल था। उन्हें सारा काम हाथ से ही करना पड़ता था। ऐसे में वक्त ज्यादा लगता था और काम कम हो पाता था। कई बार तो रस्सी ठीक से तैयार भी नहीं हो पाती थी। इसके बाद एक मित्र ने उन्हें नारियल की छाल को प्रोसेस करने वाली मशीन के बारे में बताया। हालांकि इस मशीन से उन्हें कोई फायदा नहीं मिला। मुरुगेसन केले के फाइबर की प्रोसेसिंग मशीन बनाने के लिए लगातार प्रयोग करते रहे। आखिरकार एक दिन उन्होंने पुरानी साइकिल की रिम और पुली का इस्तेमाल करके एक ‘स्पिनिंग डिवाइस’ बनाया। ये प्रयोग सफल रहा। अभी मुरुगेसन हर साल 500 टन केले के ‘फाइबर वेस्ट’ की प्रोसेसिंग करते हैं। सालाना करीब एक करोड़ रुपए उनका टर्नओवर है।
कैसे तैयार करते हैं प्रोडक्ट?
इस मशीन को तैयार करने में करीब एक लाख रुपए का खर्च आया। इस मशीन के लिए उन्हें पेटेंट भी मिल चुका है। केले के फाइबर से रस्सी बनाने के लिए सबसे पहले उसके तने को टुकड़ों में काट लिया जाता है। इसके बाद उसके ऊपर की छाल को हटाकर तने को कई भागों में पतला-पतला काटा लिया जाता है। इसके बाद केले की छालों को सूखने के लिए धूप में डाल दिया जाता है। चार से पांच दिन बाद इन सूखे हुई छालों को मशीन में डालकर अपनी जरूरत के हिसाब से रस्सी तैयार की जाती है। मशीन की मदद से कई छोटे-छोटे रेशों को जोड़कर मोटी और मजबूत रस्सी भी तैयार की जाती है। मुरुगेसन अभी 15 हजार मीटर तक लंबी रस्सी बना रहे हैं।
मुरुगेसन ने अपने साथ इस काम के लिए सौ से ज्यादा लोगों को जोड़ा है। इनमें ज्यादातर महिलाएं हैं। वे अपनी रस्सी इन्हें देते हैं और उनसे तरह-तरह के प्रोडक्ट तैयार करवाते हैं। इसके बाद उसे मार्केट में भेजते हैं। वे अभी केले के वेस्ट फाइबर से कई तरह की रस्सी, चटाई, टोकरी, चादर, सजावट के सामान जैसी चीजें तैयार कर रहे हैं।
कैसे करते हैं कमाई?
मुरुगेसन ​​​​​​​को भारत के साथ-साथ दूसरे देशों से भी ऑर्डर मिल रहा है। उन्होंने एमएस रोप प्रोडक्शन नाम से एक कंपनी बनाई है। लोग अपनी जरूरत के हिसाब से फोन कर ऑर्डर कर सकते हैं। इसके साथ ही वे कई शहरों में प्रदर्शनी लगाकर भी अपने उत्पाद भेजते हैं। हाल ही में उन्होंने रस्सी तैयार करने वाली मशीन का भी कारोबार शुरू किया है। उन्होंने अब तक तमिलनाडु, मणिपुर, बिहार, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में लगभग 40 मशीनें बेची हैं। वे कहते हैं कि नाबार्ड ने उनसे संपर्क किया है। वे 50 मशीन उसे सप्लाई करेंगे।
बनाना ​​​​​​​​​​​​फाइबर वेस्ट की इकोनॉमी
भारत में बड़े लेवल पर केले का उत्पादन होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल 14 मिलियन टन केले का उत्पादन देश में होता है। तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, गुजरात और बिहार में सबसे ज्यादा उत्पादन होता है। अगर फाइबर वेस्ट की बात करें तो हर साल 1.5 मिलियन टन ड्राई बनाना फाइबर भारत में होता है। भारत सहित दुनिया के कई देशों में अब इस वेस्ट का कॉमर्शियल यूज हो रहा है। कई जगह बनाना फाइबर टेक्सटाइल भी बनाए गए हैं।
कहां से ले सकते हैं ट्रेनिंग?
बनाना वेस्ट से फाइबर निकालने और उससे प्रोडक्ट तैयार करने की ट्रेनिंग देश में कुछ जगहों पर दी जा रही है। तिरुचिरापल्ली में 'नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर बनाना' में इसकी ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें कोर्स के हिसाब से फीस जमा करनी होती है। इसके अलावा कई राज्यों में कृषि विज्ञान केंद्र में भी इसकी ट्रेनिंग दी जाती है। कई किसान व्यक्तिगत रूप से भी लोगों को ट्रेंड करने का काम कर रहे हैं। खुद मुरुगेसन ​​​​​​​कई लोगों को ट्रेंड कर चुके हैं।

Wednesday, 9 September 2020

01:46

वाट्सएप के जरिये पढ़ाई को बनाया आसान:deepak tiwari

तमिलनाडु के एक गवर्नमेंट स्कूल की टीचर ने अपनी सेविंग से 16 स्मार्टफोन खरीदे और गरीब विद्यार्थियों को बांट दिए, ताकि वे ऑनलाइन क्लास अटैंड कर सकें। इतना ही नहीं, टीचर ने इन बच्चों से कहा है कि स्कूल खुलने तक वे उनके मोबाइल में रिचार्ज भी करवाती रहेंगी।
सभी बच्चे 10वीं कक्षा के हैं। एलामबेलुर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की टीचर के. भैरवी चाहती हैं कि प्राइवेट स्कूलों की तरह उनके विद्यार्थी भी ऑनलाइन पढ़ सकें। उनके विद्यार्थी कक्षा 10वीं के हैं और उनकी बोर्ड परीक्षा होगी।
स्टूडेंट के बारे में अधिक जानकारी के लिए पहले वे अलग-अलग गांवों में गईं और अपने स्टूडेंट्स के पैरेंट्स से मिलीं। उन्होंने देखा कुछ बच्चे तो इतने गरीब हैं कि उनके घर में मामूली सुविधाएं भी नहीं हैं। यह सब देख वे बहुत उदास हुईं। उन्होंने पैरेंट्स से कहा कि आप बच्चे को लेकर स्कूल आएं, वहां बात करते हैं।
लॉकडाउन के चलते भैरवी वाट्सएप के जरिए अनेक बच्चों को पढ़ा रही हैं। उन्हें पता चला कि कुछ बच्चे स्मार्टफोन न होने से क्लास अटैंड नहीं कर पा रहे। ऐसे में भैरवी की बेटी ने आइडिया दिया कि मम्मी आप इन्हें फोन खरीदकर दे दीजिए।
इसके बाद भैरवी ने अपनी बचत में से एक लाख रुपए के 16 फोन और सिमकार्ड खरीदे। वे ऑनलाइन क्लासेस रिकॉर्ड कर वाट्सएप पर पढ़ाती हैं।
जिन बच्चों को स्मार्ट फोन देना तय किया गया था, उन्हें माता-पिता के साथ स्कूल बुलवाया गया और सरप्राइज गिफ्ट के रूप में सभी को मोबाइल सौंप दिए। किसी बच्चे और उसके पैरेंट्स को यह पता नहीं था कि उन्हें स्कूल क्यों बुलवाया है? बच्चे स्मार्टफोन पाकर बहुत खुश हैं।