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Tuesday, 26 November 2019

16:06

75 घण्टे में फड़नवीस का कार्यकाल खत्म दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा


मुंबई: महाराष्ट्र में जारी घमासान के बीच देवेंद्र फडणवीसने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में फडणवीस ने अपने इस्तीफे की घोषणा की। बता दें कि इससे पहले डिप्टी सीएम अजित पवार इस्तीफा दे चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को निर्देश दिया था कि वह बुधवार को शाम पांच बजे तक विधानसभा में अपना बहुमत साबित करें। न्यायालय ने कहा कि बहुमत परीक्षण में विलंब होने से ‘खरीद फरोख्त’ की आशंका है। न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि विधान सभा चुनाव के नतीजों की घोषणा हुए एक महीना हो गया लेकिन अभी तक अनिश्चितता बनी है।

पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में खरीद फरोख्त जैसी गैरकानूनी गतिविधयों पर अंकुश लगाने और अनिश्चितता खत्म करके स्थिर सरकार सुनिश्चित करने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना न्यायालय के लिए जरूरी हो गया है। सदन में तत्काल शक्ति परीक्षण ही इसका सबसे प्रभावशाली तरीका है। शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से कहा कि वह अस्थाई अध्यक्ष नियुक्त करें और यह सुनिश्चित करें कि सारे निर्वाचित सदस्य बुधवार को शाम पांच तक शपथ ग्रहण कर लें ताकि सदन में शक्ति परीक्षण हो सके।

न्यायालय ने निर्देश दिया कि शक्ति परीक्षण के लिए गुप्त मतदान नहीं होगा और सदन की सारी प्रक्रिया का सीधा प्रसारण होगा। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अस्थाई अध्यक्ष की नियुक्ति सिर्फ इसी कार्य के लिए तत्काल की जाएगी। पीठ ने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में जहां, अगर सदन में शक्ति परीक्षण में विलंब हुआ, खरीद फरोख्त की आशंका है, न्यायालय के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए इसमें हस्तक्षेप करना अनिवार्य हो जाता है। ऐसी स्थिति में तत्काल शक्ति परीक्षण ही संभवत: सबसे प्रभावी तरीका होगा।’’
15:29

महाराष्ट्र की राजनीतिक में बड़ा उलटफेर- अजीत पवार ने दिया इस्तीफा थोड़ी देर में फडणवीस की प्रेस कान्फ्रेंस शिवसेना का होगा मुख्यमंत्री


*नई दिल्ली* महाराष्ट्र में चल रहे सियासी घटनाक्रम ने दोपहर में एक बार फिर रोचक मोड़ ले लिया। बीजेपी की अहम बैठक के बाद एक तरफ तो एनसीपी नेता अजित पवार के इस्तीफे की बात सामने आई तो दूसरी तरफ खुद सीएम फडणवीस की ओर से करीब साढ़े तीन बजे प्रेस वार्ता करने की जानकारी मिली।

बताया जा रहा है कि सीएम देवेंद्र फडणवीस इस प्रेसकॉन्फ्रेंस के बाद ही अपनी इस्तीफा दे सकते हैं। इससे पहले अजित पवार के इस्तीफे की खबर ने पूरे महाराष्ट्र में हड़कंप मचा दिया।

दरअसल एनसीपी लगातार अजित पवार से डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा देने की बात कह रही थी। इसी को लेकर उन्होंने सुबह शरद पवार, सुप्रिया सुले और देवेंद्र फडणवीस के साथ-साथ भाई श्रीनिवास से भी बातचीत की थी।

इन मुलाकातों के बात उनके इस्तीफे की खबरें सामने आ गईं। हालांकि उनके बेटे और जयंत पाटिल ने भी इस्तीफा जैसी किसी भी खबर की जानकारी नहीं होने की बात कही।

बहरहाल बहुमत साबित करने में जुटी बीजेपी के अचानक यू टर्न लेने से भी महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है। आखिर ऐसी क्या वजह रही कि बीजेपी ने बहुमत साबित करने से पहले ही हार मान ली है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए 30 घंटे का वक्त दिया गया था। इसके बाद से ही बीजेपी अपनी सरकार बचाने की कवायद में जुटी थी, लेकिन दोपहर में अचानक सीमकरण बदले और देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे की बात सामने आ गई।

Saturday, 23 November 2019

13:27

महाराष्ट्र मे सत्ता संग्राम जारी फडणवीस बने मुख्यमंत्री पवार बोले मेरा समर्थन नहीं


महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशयारी ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। देवेंद्र फडणवीस के साथ शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने भी डिप्टी सीएम पद की शपथ ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवेंद्र फड़णवीस और अजित पवार को महाराष्ट्र के क्रमश: मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर शनिवार को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके भरोसा जताया कि ये दोनों नेता महाराष्ट्र के विकास के लिए काम करेंगे। गृह मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने देवेंद्र फडणवीस को सीएम और अजीत पवार को डिप्टी सीएम बनने पर दी बधाई।_
_फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, अमित शाह जी और जेपी नड्डा जी का आभार व्यक्त करता हूं उन्होंने महाराष्ट्र की सेवा करने का मौका दिया। जनता ने हमें स्पष्ट जनादेश दिया था लेकिन शिवसेना ने हमारा साथ छोड़कर किसी और जगह गठबंधन करना शुरू कर दिया। जिसके चलते महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। महाराष्ट्र जैसे राज्य में यह कितने समय लागू रहे यह शोभा भी नहीं देता है। इसके चलते महाराष्ट्र को एक स्थिर सरकार की जरूरत थी खिचड़ी सरकार की नहीं। अंत में मैं राष्ट्रवादी पार्टी के नेता अजित पवार को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने हमारा साथ दिया।_
_उन्होंने कहा कि हमारे साथ कई अन्य लोग भी आएं हैं। हमारा दावा राज्यपाल का पेश किया। राज्यपाल जी ने राष्ट्रपति जी से अनुशंस की कि वह राष्ट्रपति शासन वापस लें। इसके बाद राज्यपाल ने सरकार बनाने का न्यौता दिया। महाराष्ट्र में स्थिर और स्थाई सरकार दे पाएंगे।_
_डिप्टी सीएम अजीत पवार ने कहा कि 24 तारीख को नतीजे आए और किसी की सरकार नहीं बनी। बहुत समस्या थी जिसमें किसानों की समस्या थी। सरकार आती है तो रास्ता निकालने में मदद हो सकती है। इसलिए हम सब ने यह निर्णय लिया।_
_आपको बता दें कि एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने शुक्रवार शाम उद्धव के साथ करीब दो घंटे तक बातचीत के बाद इसका ऐलान किया कि वह मुख्यमंत्री होंगे। पवार ने कहा कि ये साफ है कि नेतृत्व का मुद्दा हमारे सामने नहीं है। कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना तीनों दलों में इस बात को लेकर सहमति है कि उद्धव ठाकरे ही सरकार का नेतृत्व करेंगे। वहीं महाराष्ट्र की राजनीति में आज का दिन अहम होने वाला है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को दी बधाई_
उधार उद्धव ठाकरे और पवार ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि बीजेपी रात के अंधेरे में सरकार बनाकर देश की जनता को गुमराह कर रही है शरद पवार का कहना है कि सरकार एनसीसी टांडे प्रकार की ही बनेगी अजित पवार के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई होगी

Thursday, 21 November 2019

20:57

महाराष्ट्र में उद्धव बनेंगे मुख्यमंत्री आदित्य को शिक्षा मंत्रालय मिलने के आसार


*नई दिल्ली।* महाराष्ट्र नई सरकार के गठन की घड़ियां नजदीक हैं। गुरुवार को एनसीपी-कांग्रेस की बैठक के बाद अब तो नया फॉर्मूला भी सामने आने लगा है। सूत्रों की मानें तो पूरा मंत्रिमंडल तैयार हो गया है। शिवसेना के आदित्य ठाकरे को शिक्षा मंत्री बनाने पर मुहर लगी है, जबकि अजीत पवार गृह मंत्री बन सकते हैं। इसके अलावा बाला साहेब थोराट, नवाब मलिक, एकनाथ शिंदे, दिवाकर राउते, सुभाष देसाई को भी मंत्री पद दिए जाएंगे।

सीएम बनेंगे उद्धव ठाकरे
शिवसेना के सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक उद्धव ठाकरे इस महागठबंधन की सरकार के मुख्यमंत्री होंगे। इसके अलावा सरकार के कामकाज को लेकर भी एक समिति का गठन किया जाएगा।

आपको बता दें कि इन जानकारियों पर अब तक किसी भी दल से आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि शुक्रवार को महाराष्ट्र में नई सुबह होगी और सरकार बनाने को लेकर बड़ा ऐलान भी कर दिया जाएगा।

4:34 PM - Nov 21, 2019

मुंबई में शिवसेना से एनसीपी और कांग्रेस की अंतिम दौर की बातचीत शुक्रवार 22 नवंबर को होना है। मुमकिन है इस बैठक के बाद कोई बड़ा ऐलान हो जाए।

आपको बता दें कि इससे पहले ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने सभी विधायकों को आधारकार्ड और पांच दिन के कपड़े लेकर बुलाया है। वहीं शुक्रवार को ही शिवसेना के साथ एनसीपी-कांग्रेस की अहम बैठक होना है।

इस बैठक के बाद सरकार बनाए जाने के फॉर्मूले से पर्दा हट जाएगा और साथ ही ये भी खुलासा हो जाएगा कि महाराष्ट्र में राजनीति किस करवट बैठती है।

Tuesday, 12 November 2019

15:48

राष्ट्रपति शासन की दहलीज पर पहुंचा महाराष्ट्र





महाराष्ट्र में सत्ता का संघर्ष अब राष्ट्रपति शासन की तरफ पहुंचता दिखाई दे रहा है. किसी भी दल को बहुमत न मिलने के चलते 24 अक्टूबर के बाद से अब तक राज्य में सरकार गठन नहीं हो पाया है. बीजेपी और शिवसेना दोनों को राज्यपाल सरकार बनाने के लिए बुला चुके हैं और उनके चांस खत्म हो गए हैं. आज एनसीपी की बारी है. इससे  पहले ही मोदी कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन पर फैसला ले लिया है और राष्ट्रपति को सिफारिश भेज दी है. राष्ट्रपति शासन-दी मंजूरी महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश, मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी  बीच शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

Friday, 8 November 2019

22:12

महाराष्ट्र में बिगड़े राजनीतिक समीकरण फडणवीस का इस्तीफा



महाराष्ट्र में चल रहे भाजपा और शिवसेना के कोन बनेगा मुख्यमंत्री का खेल आखिरकार पहले मैं पहले मैं करते हुवे खत्म हुवा शिवसेना के 56 इंच के सीने को देखने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने दिया राज्यपाल को स्तीफा।
फणनवीस ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पिछले 15 दिनों से आज तक शिवसेना ने भाजपा और मोदी जी के खिलाफ लगातार बयान दिये जिसके कारण हम बहुत आहत हुवे है फणनवीस ने कहा कि चाहते तो हम भी जवाब दे सकते थे पर हमने जवाब नही दिया।
वही शिवसेना प्रमुख उद्दव ठाकरे ने कहा कि हमने मोदी जी पर कभी भी व्यक्तिगत आरोप नही लगाये है जो भी बाते हमने सामने रखी हैं उसमें जो भी पहले समझौता हुवा था कि विधानसभा चुनाव में 50-50 का फार्मूला तय हुवा था वही बात हम आज भी कह रहे हैं।

 सूत्रों के अनुसार भाजपा हाईकमान शिवसेना को उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्रालय सहित 14 मंत्रालय भी देने को राजी हो गया था पर बात नही बनी शिवसेना ने अपनी वही बात रखी कि मुख्यमंत्री तो शिवसेना का ही बनेगा जिस पर सहमती नही बनी हालाकि केंद्रीयमंत्री नितिन गड़करी ने भी सुलह की पहल की थी पर बात नही बनी।

रामदास अठावले भी शरद पवार से मिलने पहुंचे शरद पवार ने अठावले से कहा कि हम शिवसेना के साथ सरकार नही बनाएंगे उसके बाद शिवसेना नेता संजय राउत भी शरद पवार से मिलने पहुंचे।

Wednesday, 6 November 2019

10:22

क्लाइमेक्स की ओर महाराष्ट्र का मैच मोहन भागवत फडणवीस ने किया घंटे भर मंथन के सी शर्मा



नागपुर. महाराष्ट्र में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है. शिवसेना और बीजेपी अपने-अपने जिद पर अड़े हैं, इसी का नतीजा है कि अभी तक राज्य में सरकार का गठन नहीं हो सका है.कांग्रेस-एनसीपी मौके को भांपने में जुटे हैं और अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं. ऐसे में महाराष्ट्र के सियासी मुकाबले में क्लाइमेक्स बना हुआ है.

मंगलवार देर शाम नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में सीएम देवेंद्र फडणवीस ने संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की. इस दौरान कार्यकारी प्रमुख भैयाजी जोशी व अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे. इससे पहले देवेंद्र फडणवीस ने सरकार पर सस्पेंस के बीच मुंबई में अपने आवास पर बीजेपी कोर कमेटी की आपात बैठक बुलाई थी.

*शिवसेना से कोई प्रस्ताव नहीं आया*

भाजपा महाराष्ट्र अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा, 'हमें अब तक सरकार के गठन पर शिवसेना से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है. हम इंतजार कर रहे हैं और हमारे दरवाजे उनके लिए 24 घंटे खुले हैं. हम जल्द से जल्द 'महा-यति' की नई सरकार बनाएंगे.'उन्होंने दोहराया कि निवर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में शिवसेना और अन्य सहयोगी दलों के साथ भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ही शपथ लेगी. पाटिल मंगलवार की दोपहर भाजपा राज्य कोर कमेटी की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे. यह बैठक फडणवीस की अध्यक्षता में हुई, जिसमें कई मंत्रियों और अन्य शीर्ष नेताओं ने भाग लिया.

बीजेपी-शिवसेना ने एक साथ लड़ा था विधानसभा चुनाव

बता दें कि बीजेपी और शिवसेना ने एक साथ महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव लड़ा था. 24 अक्टूबर को आए नतीजों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिल सका और बीजेपी 105 सीटों पर सिमट गई, जबकि शिवसेना 56 सीटें जीतने में कामयाब रही. दोनों दलों के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त विधायक हैं, लेकिन दोनों ही दल 50-50 फॉर्मूले को अपने-अपने हिसाब से आगे रख रहे हैं और सत्ता में भागीदारी को लेकर चल रही खींचतान के चलते अब तक सरकार का गठन नहीं हो पाया है.

Monday, 4 November 2019

14:50

शिवसेना को मनाने के लिए भाजपा ने लिया बड़ा फैसला लेकिन क्या खत्म हो सकता है टकराव





महाराष्ट्र में चुनाव नतीजों की घोषणा हुए 10 दिन से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक भाजपा और शिवसेना के बीच सरकार बनाने को लेकर समाधान नहीं निकल सका है। दोनों ही दल मुख्यमंत्री पद को लेकर अड़े हुए हैं।

हालांकि भाजपा दो अहम मंत्रालयों की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गई है। सूत्रों की मानें तो भाजपा इस बात पर गंभीर रूप से चर्चा कर रही है कि शिवसेना के साथ सरकार गठन करने के लिए वह दो अहम मंत्रालय राजस्व और वित्त मंत्रालय को छोड़ दे ।

सूत्रों के अनुसार रविवार को देवेंद्र फडणवीस ने भाजपा की कोर कमेटी की बैठक को बुलाया था, जिसमे यह तय हुआ है कि पार्टी शिवसेना को राजस्व और वित्त मंत्रालय देने का प्रस्ताव दे सकती है। माना जा रहा है कि भाजपा शिवसेना को यह दोनों मंत्रालय इसलिए देना चाहती है ताकि वह मुख्यमंत्री पद की जिद को छोड़ दे। बता दें कि इससे पहले भाजपा ने शिवसेना को 13 और भाजपा को 26 मंत्री पद का प्रस्ताव दिया था, जिसे शिवसेना ने ठुकरा दिया था।

मौजूदा समम में सरकार की बात करें तो राजस्व मंत्रालय चंत्रकांत पाटील और वित्त मंत्रालय सुधीर मुनगंटीवार के पास है। शिवसेना मुख्यमंत्री पद के साथ-साथ गृह, वित्त, राजस्व और नगर विकास जैसे अहम मंत्रालयों का समान बंटवारा चाहती है। फिलहाल गृह और नगर विकास मंत्रालय खुद फडणवीस के पास है।

ऐसे में अगर भाजपा राजस्व और वित्त मंत्रालय को छोड़ती है तो चंत्रकांत पाटील और सुधीर मुनगंटीवार को मंत्रालय छोड़ना पड़ेगा। दरअसल दोनों ही नेताओं को पार्टी का कद्दावर नेता माना जाता है, लिहाजा इन दो अहम मंत्रालयों के जाने से फडणवीस की सरकार पर पकड़ ढीली हो जाएगी, ऐसे में पार्टी उम्मीद कर रही है कि शिवसेना इस प्रस्ताव के बाद मुख्यमंत्री पद को छोड़ सकती है।

Thursday, 31 October 2019

18:05

क्या अब महाराष्ट्र में बन पाएगी शिवसेना सरकार



भाजपा का मानना है कि शिवसेना सरकार बनाने के लिये कांग्रेस और एनसीपी से कभी भी समर्थन नही लेगी इस लिये ही भाजपा ने अपने तेवर दिखाते हुवे बयान में कहा है कि शेर भूख रहना पसंद करता है पर शेर कभी भी घांस नही खाता है मतलब शिव सेना की मजबूरी सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही है। लगता है इसी कारण भाजपा ने शिवसेना को चेतावनी के लहजे में कहा है कि शेर कभी घांस नही खाता मतलब कुछ भी हो चाहे भाजपा शिव सेना को मुख्यमंत्री पद नही देगी तो भी शिव सेना मजबूर होकर भाजपा को ही समर्थन देगी।
पर लगता है कि भाजपा भूल गई है कि कर्नाटक में कुमार स्वामी की सरकार कांग्रेस के सपोर्ट से बन सकती है और सपोर्ट से झाड़खंड में मधुकोड़ा की सरकार बन सकती है तथा 1979 में केंद्र में चरणसिंह की सरकार पूर्व प्रधानमंत्री स्व इंदिरागांधी के सपोर्ट से बन सकती हैं।
साथ ही 44 सांसदों वाली चन्द्रशेखर की पार्टी की पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी के समर्थन से सरकार बन सकती है तो एनसीपी ओर कांग्रेस के समर्थन से 56 विधायको  वाली शिवसेना की सरकार क्यो नही बन सकती है।

वैसे भी शिवसेना का एक लक्ष्य यह भी है कि वो बाला साहिब ठाकरे के उस सपने को साकार करे जो बाला साहिब ठाकरे का सपना था कि ठाकरे परिवार का सदस्य माहाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बने शिवसेना का मानना है यह वही अवसर है जब बाला साहिब ठाकरे के सपनो को साकार किया जा सकता है। इस लिये संभव नही कि महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार बने और भाजपा का मुख्यमंत्री बन सके।

भाजपा और शिवसेना का विवाद सिर्फ सरकार बनाना ही नही है बल्कि शिव सेना जो माहाराष्ट्र की कभी सबसे बड़ी पार्टी हुवा करती थी उसे अब सबसे छोटी पार्टी भी भाजपा ने ही बनाया है शिवसेना का मानना है कि भाजपा के बढ़ रहे जनाधार को रोकने के लिये सरकार बनाना सबसे अच्छा रास्ता है। क्योंकि सरकार में बैठकर ही भाजपा के जनाधार को कम किया जा सकता है और खुद के जनाधार को बढ़ाया जा सकता है वैसे भी जितने भी मतदाता आज भाजपा के साथ है वो कभी शिवसेना के साथ हुवा करते थे इस घाटे को पूरा करने के लिये शिवसेना का भाजपा से राजीनामा करना संभव नही लगता है।

आज शाम 6 बजे शिवसेना राज्यपाल को सरकार बनाने के लिये शिव सेना के विधायको के समर्थन और सहयोगियों के समर्थन की चिट्ठी सौंप सकती है। इसका मतलब साफ है शिवसेना अब कांग्रेस और एनसीपी के सपोर्ट से सरकार बना सकती हैं।

लगता है आदित्य नही उद्धव ठाकरे बन सकते है माहाराष्ट्र के मुख्यमंत्री क्योकि जिस तरीके से माहाराष्ट्र का राजनीतिक घटनाक्रम बदल रहा है और एकनाथ शिंदे को शिवसेना ने विधायक दल का नेता चुना लिया है इससे साफ नजर आता है कि उद्दव ठाकरे ही माहाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनेंगे।

शिवसेना को भी लगता है कि इस बार अगर 50-50 के फार्मूले पर जो कि देश मे पब्लिश हो चुका है से पीछे हटे तो आने वाले समय मे भाजपा का फायदा ज्यादा ओर शिवसेना का नुकसान ज्यादा होगा क्योकि सामना में भी लगातार प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की खिलाफत शिवसेना करती ही आ रही है और अब अगर शिव सेना फिर भाजपा के सामने झुक गई तो शिवसेना की किरकिरी होना तय है। इस लिये संभव नही कि माहाराष्ट्र में भाजपा की सरकार बने।