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Sunday, 14 February 2021

17:35

लद्दाख की बुद्ध प्रतिमाएं और भित्ति चित्र संरक्षित होंगे:tap news India

deepak tiwari
करगिल.बामियान बुद्ध प्रतिमाओं के नष्ट होने के बाद दुनिया में बुद्ध की सबसे ऊंची तीन प्रतिमाएं लद्दाख के करगिल जिले में हैं। इन्हें मैत्रेय बुद्ध के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा लद्दाख में करीब साढ़े पांच सौ ज्यादा स्थानों पर भित्ति चित्र भी हैं, जिनका संरक्षण एएसआई करने जा रहा है।
इन्हें एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित भी किया जाएगा। केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि इन सांस्कृतिक विरासतों की कल्चरल मैपिंग का काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही एएसआई इन्हें अपने अधीन लेकर इनके संरक्षण का काम शुरू करेगी।
किसी को बेदखल नहीं किया जाएगा
पटेल ने बताया कि इनमें से मुलबेक चंबा में जहां मैत्रेय बुद्ध हैं, वह पूजा स्थल भी हैं। वहां रहने वालों में एक हिचकिचाहट है कि एसएसआई के अधीन होने के बाद उन लोगों को वह स्थान खाली करने के लिए कह दिया जाएगा लेकिन मैंने उन्हें इस बात का भरोसा दिया है कि किसी भी ऐतिहासिक विरासत में, जहां पूजा भी होती है, किसी को बेदखल नहीं किया जाएगा। भित्ति चित्रों को भी उन्हीं मूल रंगों से संरक्षित किया जाएगा। उसमें किसी किस्म की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
पटेल ने बताया कि लेह से करगिल तक पर्यटन हाइवे विकसित किया जा रहा है, जिसमें लेह से कारगिल तक के रास्ते में पड़ने वाले सभी होटल, होम स्टे, दुर्घटना संभावित क्षेत्र और बर्फ से लदे पहाड़ों के बेहतरीन व्यू प्वाइंट की जानकारी भी मुहैया कराई जाएगी।
इसके अलावा पर्यटकों को मौसम संबंधी जानकारी भी दी जाएगी। 225 किमी के इस रास्ते में हर 25 किमी पर स्वास्थ्य जरूरतों के लिए ऑक्सीजन पार्लर और टी-स्नैक्स के स्टॉल की सुविधा भी विकसित करने की योजना है। इसके अलावा लेह से 76 किमी दूर सस्पोल गुफाओं में 15वीं सदी की पेंटिंग हैं।
जंस्कार, चेंगथेंग, नुब्रा इलाकों में मिलाकर 400 से अधिक रॉक आर्ट व पेंटिंग की विस्तृत जानकारी भी जुटाई जा रही है। उन्होंने बताया कि कल्चरल मैपिंग के जरिए इस इलाके में आने वाले और गुजरने वाले पर्यटकों को यह जानकारी भी दी जाएगी कि सांस्कृतिक रूप से यह इलाका कितना समृद्ध है और कहां पर क्या-क्या देखने योग्य है।
करगिल में 3 बुद्ध प्रतिमाएं, इनमें एक चतुर्भुजी
तीन बुद्ध प्रतिमाओं में से एक लेह-करगिल राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर करगिल से करीब 45 किमी दूर मुलबेक गांव में बिल्कुल सड़क किनारे है। यह बुद्ध की चतुर्भुजी प्रतिमा है। दूसरी प्रतिमा कारगिल से 40 किलोमीटर दूर संकू कस्बे के पास खरसे खार गांव में है। तीसरी प्रतिमा बालटिक रोड पर अपाती गांव में है। यह प्रतिमा तीनों में सबसे छोटी है।

Thursday, 3 December 2020

18:02

जाने किस राज्य में कितने जिले tap news india


राज्यों के नाम                  जिले

1.   राजस्थान                33 जिले
2.   महाराष्ट्र.                 36 जिले 
3.   नागालैंड                 12 जिले
4.   मणिपुर।                 16 जिले
5.   पश्चमी बंगाल           23 जिले
6.   तेलंगाना                  33 जिले
7.   आसाम                   33 जिले
8.    त्रिपुरा                    08 जिले
9.  मध्यप्रदेश                 55 जिले
10.  तमिलनाडु              38 जिले
11.  गुजरात                  33 जिले
12.  सिक्किम                04 जिले
13.  आंध्रप्रदेश               13 जिले
14.  उत्तरप्रदेश               75 जिले
15.  पंजाब                    22 जिले
16.  कर्नाटक                 30 जिले
17.  मेघालय                  11 जिले
18.  उत्तराखंड                13 जिले
19.  गोवा                       02 जिले
20.  हरियाणा                 22 जिले
21.  मिजोरम                  11 जिले
22.  अरुणाचल प्रदेश      25 जिले
23.  हिमाचल प्रदेश         12 जिले
24.  केरल                      14 जिले
25.  छत्तीसगढ़                28 जिले
26.  बिहार                      38 जिले
27.  झारखण्ड                 24 जिले
28.  उड़ीसा                     30 जिले

 केन्द्र शासित  प्रदेश 

1.   अंडमान व निकोबार      03 जिले
2.   चंडीगढ़                         01 जिला
3.   दादर व नगर हवेली
       & दमन व द्वीप              03 जिले
4.   लक्षद्वीप                        01 जिला
5.   दिल्ली                           11 जिले
6.   पांडिचेरी                       04 जिले
7.   लद्धाख                         02 जिले 
8.   जम्मू-कश्मीर                 20 जिले

    कुल जिले                       739 जिले


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Wednesday, 2 December 2020

22:34

बिन कमियों के कोई इंसान नही tap news india

किसी व्यक्ति में या किसी वस्तु में थोड़ा सा भी अवगुण देखकर कई व्यक्ति आग−बबूला हो उठते हैं और उसकी उस छोटी सी बुराई को ही बढ़ा-चढ़ाकर कल्पित करते हुए ऐसा मान बैठते हैं मानों यही सबसे खराब हो। अपनी एक बात किसी ने नहीं मानी तो उसे अपना पूरा शत्रु ही समझ बैठते हैं। जीवन में अनेकों सुविधाऐं रहते हुए भी यदि कोई एक असुविधा है तो उन सुविधाओं की प्रसन्नता अनुभव न करते हुए सदा उस अभाव का ही चिंतन करके खिन्न बने रहते हैं। ऐसे लोगों को सदा संताप और क्रोध की आग में ही झुलसते रहना पड़ेगा। इस संसार में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं जिसमें कोई दोष-दुर्गुण नहीं और न ही कोई वस्तु ऐसी है जो सब प्रकार हमारे अनुकूल ही हो। सब व्यक्ति सदा वही आचरण करें जो हमें पसंद है ऐसा हो नहीं सकता। 
सदा मनचाही परिस्थितियाँ किसे मिली हैं? किसी को समझौता करके जो मिला है उस पर सन्तोष करते हुए यथासंभव सुधार करते चलने की नीति अपनानी पड़ी है तभी वह सुखी रह सकता है। जिसने कुछ नहीं, या सब कुछ की माँग की है उसे क्षोभ के अतिरिक्त और कुछ उपलब्ध नहीं हुआ है। अपनी धर्मपत्नी में कई अवगुण भी हो सकते हैं यदि उन अवगुणों पर ही ध्यान रखा जाय तो वह बहुत दुखदायक प्रतीत होगी। किन्तु यदि उसके त्याग, आत्म-समर्पण, वफादारी, सेवा-बुद्धि, उपयोगिता, उदारता एवं निस्वार्थता की कितनी ही विशेषताओं का देर तक चिन्तन करें तो लगेगा कि वह साक्षात् देवी के रूप में हमारे घर अवतरित हुई है। उसी प्रकार पिता−माता के एक कटुवाक्य पर क्षुब्ध हो उठने उपकार, वात्सल्य एवं सहायता की लम्बी शृंखला पर विचार करें तो उत्तेजनावश कह दिया गया एक कटु शब्द बहुत ही तुच्छ प्रतीत होगा। मन को बुराई के बीच अच्छाई ढूँढ़ निकालने की आदत डालकर ही हम अपनी प्रसन्नता को कायम रख सकते हैं।

✍🏻 पं श्रीराम शर्मा आचार्य

Saturday, 21 November 2020

05:40

जानिए क्यों कपिल देव फिल्म 83 के पक्ष में नहीं थे deepak tiwari

मुंबई। साल 1983 में भारत को पहला विश्व कप दिलाने वाले पूर्व कप्तान कपिल देव (Kapil Dev) शुरुआत में फिल्म ’83’ बनाने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने कहा कि जब उन्हें पता चला कि दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) और रणवीर सिंह (Ranveer Singh) बड़े पर्दे पर उनके जीवन की कहानी का किरदार निभाएंगे तो वह डर गए थे। फिल्म ’83’ में कपिल देव का किरदार रणवीर सिंह और रोमी का किरदार दीपिका पादुकोण करती दिखेंगी।

एक्ट्रेस और टॉक शो होस्ट नेहा धूपिया के शो ‘नो फिल्टर नेहा’ में कपिल मेहमान बनकर आए थे और इस दौरान उनसे कई सवाल पूछे गए, जिनका कि कपिल ने बड़ी सहजता के साथ जवाब दिया। यह पूछे जाने पर कि जब उनकी पत्नी रोमी को इस बारे में पता चला तो उनका क्या कहना था, इस पर कपिल देव ने कहा, ‘मैं थोड़ा डरा हुआ था। मुझे लगा कि वह एक एक्टर है। आप किसी खेल और एथलेटिक्स की नकल कर रहे हैं। क्या उनके पास इतना ही है? लेकिन, जब मैंने उनके साथ समय बिताया, तो मैं हैरान था कि उन्होंने इस पर कितना समय लगाया है। पिछले साल जून और जुलाई में, उन्होंने करीब आठ घंटे क्रिकेट के मैदान पर बिताए थे और मुझे डर लगता था। मैं कहना चाहूंगा कि वह 20 साल का नहीं है और उन्हें चोटिल नहीं होना चाहिए। मुझे उनकी चिंता थी। मुझे लगता है कि जहां कलाकार और अभिनेता एक साथ सामने आते हैं, तो उन्हें पता होता है कि उन्हें क्या करना है और कैसे करना है।’

कपिल ने साथ ही यह भी बताया कि इस फिल्म में अपनी भूमिका निभाने के लिए रणवीर ने कैसे उनके साथ अपनी तैयारी की। उन्होंने कहा, ‘वह सात या आठ दिनों के लिए मेरे साथ थे। इस दौरान उन्होंने मेरे सामने (रिकॉर्ड करने के लिए) कैमरा रखा और मुझसे पूछा कि मैं कैसे बात करता हूं, क्या करता हूं और कैसे खाता हूं। मुझे लगता है कि वे शानदार हैं।’
यह पूछे जाने पर कि क्या रणवीर ने क्लासिक नटराज शॉट किया है, कपिल ने कहा, ‘मुझे लगता है कि उन्होंने बहुत मेहनत की है। मुझे अब देखना होगा। मैंने तस्वीरों और अन्य चीजों के बारे में बहुत कुछ देखा है। ये कैमरामैन और ये लोग अच्छे हैं। मैं उनसे बहुत दूर था। हमने कहानी का अपना पक्ष दिया और कुछ नहीं।’ कपिल देव ने खुलासा किया है कि वह अभी भी फिल्म ’83’ नहीं बनाना चाहते क्योंकि उनका मानना है कि ‘हम सभी अभी युवा हैं’।
उन्होंने कहा, ‘अपने जीवन के दौरान, वे आप पर एक फिल्म बनाते हैं और आपको पता नहीं होता है कि इस पर कैसे प्रतिक्रिया करें। मुझे लगा कि हम अभी भी काफी युवा हैं और कहते हैं ‘यार, यह क्या हो रहा है, लेकिन जब पूरी टीम ने फैसला किया, तो मैं भी उसी का हिस्सा था। मेरी पहली प्रतिक्रिया थी, ‘क्या हम इंतजार कर सकते हैं? हम बहुत छोटे हैं और हर किसी ने हमें देखा है, चलो इसे नहीं बनाते हैं।’

Friday, 20 November 2020

03:21

रोजाना एक अंडा खाते हैं तो डायबिटीज होने का खतरा 60 फीसदी तक बढ़ जाता है-ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों का दावा deepak tiwari

रोजाना एक अंडा खाते हैं तो टाइप-2 डायबिटीज का होने का खतरा 60 फीसदी तक बढ़ जाता है। यह दावा ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में किया है। वैज्ञानिकों ने अंडे और ब्लड शुगर के बीच कनेक्शन ढूंढा है। चीन के 8,545 लोगों पर हुई स्टडी कहती है, डाइट में अंडे की मात्रा बढ़ाते हैं तो ब्लड शुगर का लेवल बढ़ता है।
लम्बे समय से अंडा खाने वालों को खतरा अधिक
रिसर्च करने वाली यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों का दावा है कि अंडा चाहें उबला खाएं या फ्राई करके, यह ब्लड शुगर का लेवल बढ़ाता है। रिसर्च करने वाले वैज्ञानिक डॉ. मिंग ली कहते हैं, डाइट ही ऐसी चीज है जो टाइप डायबिटीज को बढ़ावा देती है लेकिन इसे कंट्रोल करके ब्लड शुगर घटाया भी जा सकता है।
ऐसे हुई रिसर्च
ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, यह स्टडी चीन में की गई। रिसर्च के दौरान पाया गया कि यहां के लोग अनाज और सब्जियों को छोड़कर डाइट में मीट, स्नैक्स और अंडों को अधिक इस्तेमाल करने लगे हैं।
1991 से 2009 के बीच चीन में अंडा खाने वाले लोगों की संख्या दोगुनी हो गई। 1991 से 93 के बीच लोगों की डाइट में अंडे की मात्रा 16 ग्राम थी। 2000 से 2004 के बीच बढ़कर यह 26 ग्राम हो गई। 2009 तक ये 31 ग्राम पहुंच गई।
वैज्ञानिकों ने 1991 से इन 8,545 लोगों के अंडे खाने की आदत को रिकॉर्ड किया। 2009 में इनका ब्लड शुगर टेस्ट कराया गया।
रिसर्च में पाया गया कि जिन्होंने 38 ग्राम अंडा रोजाना खाया उनमें डायबिटीज होने का रिस्क 25 फीसदी तक बढ़ा।
जिन लोगों ने 50 ग्राम या इससे अधिक अंडा खाया उनमें यह खतरा 60 फीसदी तक था।
रिसर्च पर सवाल भी उठे
डॉ. मिंग ली कहते हैं, अंडे और डायबिटीज के बीच का कनेक्शन बहस का विषय रहा है लेकिन हमारी रिसर्च बताती है कि लम्बे समय से अंडा खा रहे हैं तो डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। आहार विशेषज्ञों ने इस रिसर्च पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है, रिसर्च के दौरान ऐसे फैक्टर को नजरअंदाज किया गया खराब खानपान से जुड़े हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्प्टन की न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. जुलिएट ग्रे कहती हैं, रिसर्च के नतीजे भ्रम पैदा करने वाले हैं। जो लोग अंडे खाते हैं उनकी डाइट सही नहीं होती। ये फास्ट और फ्राय फूड लेते हैं इसलिए इनमें लिपिड की मात्रा बढ़ी हुई होती है। इसलिए इनका बॉडी मास इंडेक्स ज्यादा होता है।

Sunday, 15 November 2020

04:21

क्यों की जाती है गोवर्धन पूजा जानें पूरी कहानी -के सी शर्मा tapnews

दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इसे देश के कुछ हिस्सों में अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं. गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा की जाती है. गोवर्धन पूजा के दिन 56 या 108 तरह के पकवानों का श्रीकृष्ण को भोग लगाना शुभ माना जाता है. इन पकवानों को 'अन्नकूट' कहते हैं.

गोवर्धन पूजा की कहानी
जब भगवान श्री कृष्ण ने बृजवासियों को इंद्र की पूजा करते हुए देखा तो उनके मन में इसके बारे में जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हुई. श्री कृष्ण की मां भी इंद्र की पूजा कर रही थीं. कृष्ण ने इसका कारण पूछा तब बताया गया कि इंद्र बारिश करते हैं, तब खेतों में अन्न होता है और हमारी गायों को चारा मिलता है. इस पर श्री कृष्ण ने कहा कि हमारी गायें तो गोवर्धन पर्वत पर ही रहती हैं इसलिए गोवर्धन पर्वत की पूजा की जानी चाहिए. इस पर बृजवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी तब इंद्र को क्रोध आया और उन्होंने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी. चारों तरफ पानी के कारण बृजवासियों की जान बचाने के लिए श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठा लिया. लोगों ने उसके नीचे शरण लेकर अपनी जान बचाई. इंद्र को जब पता चला कि कृष्ण ही विष्णु अवतार हैं, तब उन्होंने उनसे माफी मांगी. इसके बाद श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा के लिए कहा और इसे अन्नकुट पर्व के रूप में मनाया जाने लगा.

श्री कृष्ण खुद गाय चराते थे इसलिए उन्हें ग्वाला भी कहा जाता है. गोवर्धन पर्वत पर गायें चरती थीं इसलिए कृष्ण ने पर्वत को ही गायों के भरण पोषण का श्रेय दिया और उनकी पूजा करने के लिए बृजवासियों से आग्रह किया. गायों को चारा मिलने की बात पर ही गोवर्धन पूजा के लिए श्री कृष्ण ने कहा था क्योंकि उन्हें गायों से काफी ज्यादा लगाव था. गोवर्धन पूजा में गाय के गोबर से घर में पर्वत बनाकर पूजा आज भी की जाती है.

Wednesday, 4 November 2020

23:15

आंसुओं का निकलना क्यों जरूरी tap news india

टियर थैरेपी:deepak tiwari रोना थैरेपी से कम नहीं, यह दर्द और तनाव घटाती है; जापान के इस शख्स से समझिए आंसुओं का निकलना क्यों जरूरी?
जापान में हिदेफुमी योशिदा नाम का शख्स लोगों को रुलाकर उनका तनाव दूर कर रहा है। लोग इन्हें टियर टीचर कहते हैं। टियर टीचर यानी रोने की कला सिखाने वाला टीचर। योशिदा पिछले 8 साल से लोगों को रुलाकर उन्हें तरोताजा कर रहे हैं । वह अब तक 50 हजार लोगों को रुला चुके हैं। योशिदा की जुबानी जानिए रोना क्यों जरूरी है...
ऐसे लोगों को रुलाते हैं
योशिदा कहते हैं, लोगों को रुलाना आसान नहीं है। मैं कई तरह की फिल्में, बच्चों की किताबें, चिटि्ठयां और तस्वीरों से लोगों को रुलाकर उन्हें तरोताजा महसूस कराता हूं। मेरी क्लास में कुछ ऐसे लोग भी आते हैं जो एक प्राकृतिक दृश्य को देखकर रो पड़ते हैं। रोने की कला को जापानी भाषा में 'रूई कात्सु' कहते हैं।
आखिर लोगों को रुलाने की जरूरत क्यों पड़ी?
योशिदा के मुताबिक, जापानी लोग आसानी से रो सकते हैं, लेकिन इन्हें बचपन से सिखाया जाता है कि आंसुओं को कंट्रोल करना है। हम इसी सोच के साथ हम बड़े होते हैं। दर्द और तनाव को अपने अंदर भरते जाते हैं। इस तरह इंसान घुटने लगता है और बीमार पड़ जाता है।
अब रोने के तरीके और फायदे भी समझ लीजिए
योशिदा कहते हैं, सबसे बेहतर रुलाई वो होती है, जिसमें आपकी आंखें पूरी तरह भीग जाती हैं। आप मन से रोते हैं और आंसू अपने आप निकलकर बहने लगते हैं। जितना ज्यादा रोते हैं उतना तरोताजा महसूस करते हैं।
अगर आप मन से रोते हैं तो यह फिजिकली और मेंटली दोनों तरह से राहत पहुंचाता है। यह आपको शांत रखता है और मूड को बेहतर बनाता है। रोने के दौरान, मस्तिष्क की नर्व एक्टिविटी बढ़ती है जो हार्ट रेट को थोड़ा धीमा करके दिमाग को रिलैक्स करती है। जितना ज्यादा अंदर से रोते हैं उतना ही हल्का महसूस करते हैं।
जापान में कई शहरों में रोने की वर्कशॉप करने का ट्रेंड बढ़ रहा है
जापान के कई शहरों में रोने की कला सीखने का ट्रेंड बढ़ रहा है। योशिदा यहां वर्कशॉप और लेक्चर ऑर्गेनाइज करते हैं। जापान टाइम्स से हुई बातचीत में वह कहते हैं, अगर आप हफ्ते में एक दिन भी रोते हैं तो आप तनावमुक्त जीवन जी सकते हैं। तनाव दूर करने के लिए नींद और हंसने से भी ज्यादा असरदार है रोना।
यूं तो योशिदा इस फील्ड में 8 साल से हैं लेकिन इनके काम ने रफ्तार 2015 में उस समय पकड़ी जब जापान में कर्मचारियों का तनाव कम करने की पॉलिसी शुरू हुई। उस दौरान योशिदा ने कम्पनियों से अपनी वर्कशॉप और लेक्चर शुरू करने के लिए परमिशन मांगी। इस काम में उन्हें लम्बा संघर्ष करना पड़ा।
इनकी वर्कशॉप में शामिल एक महिला का कहना है कि मुझे नहीं लगता था कि मैं रो पाउंगी। लेकिन मेरी आंखें आंसुओं और इमोशंस से भर गई थीं। इसके बाद मैंने नहाया और खुद को काफी हल्का महसूस किया।

Saturday, 31 October 2020

23:55

1 नवम्बर से बदल रहे कई जरूरी नियम tap news India deepak tiwari

1️⃣ एक नवंबर से LPG सिलेंडर की डिलिवरी का सिस्टम बदल जाएगा. तेल कंपनियां एक नवंबर से डिलिवरी ऑथेंटीकेशन कोड (DAC) सिस्टम लागू करेंगी. यानी गैस की डिलिवरी से पहले उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP भेजा जाएगा. जब सिलेंडर आपके घर आएगा तो उस OTP को डिलिवरी ब्वॉय के साथ शेयर करना होगा. जब OTP सिस्टम से मैच होगा तभी आपको सिलेंडर की डिलिवरी होगी.


2️⃣ अगर किसी कस्टमर का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है तो डिलीवरी ब्वॉय के पास के ऐप होगा, जिसके जरिए तत्काल ही अपना नंबर अपडेट करवा सकेंगे. अगर किसी ग्राहक का पता, नाम जैसी जानकारियां अपडेट नहीं हैं तो उन्हें भी 1 नवंबर से पहले ये सभी चीजें अपडेट करवानी होंगी नहीं तो सिलेंडर डिलिवरी में दिक्कत आ सकती है.

3️⃣ दरअसल गैस चोरी को रोकने के लिए तेल कंपनियों ने डिलिवरी का पूरा सिस्टम ही बदल दिया है. ये सिस्टम पहले 100 स्मार्ट सिटी में लागू होगा, फिर धीरे धीरे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा. ये सिस्टम सिर्फ घरेलू गैस सिलेंडरों की डिलिवरी के लिए है, कमर्शियल LPG सिलेंडरों पर ये सिस्टम लागू नहीं होगा.


4️⃣ एक नवंबर से इंडेन ग्राहकों के लिए गैस बुक करने का नंबर बदल जाएगा.  इंडियन ऑयल ने बताया कि पहले रसोई गैस बुकिंग के लिए देश के अलग-अलग सर्किल के लिए अलग-अलग मोबाइल नंबर होते थे. अब देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी ने सभी सर्किल के लिए एक ही नंबर जारी किया है, अब देश भर के ग्राहकों को एलपीजी सिलेंडर बुक कराने के लिए 7718955555 पर कॉल या एसएमएस भेजना होगा.


5️⃣ बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) खाताधारकों के लिए बुरी खबर है. 1 नवंबर से बैंक ऑफ बड़ौदा ग्राहकों से एक तय सीमा से ज्याद पैसा जमा करने और निकालने दोनों पर चार्ज वसूलेगा. बैंक ऑफ बड़ौदा ने चालू खाता, कैश क्रेडिट लिमिट और ओवरड्राफ्ट अकाउंट से जमा-निकासी के अलग और बचत खाते से जमा-निकासी के अलग-अलग चार्ज तय किए हैं. लोन अकाउंट के लिए महीने में तीन बार के बाद जितनी बार ज्यादा पैसा निकालेंगे, 150 रुपये हर बार देने पड़ेंगे. बचत खाते में तीन बार तक जमा करना मुफ्त होगा, लेकिन इसके बाद चौथी बार जमा किया तो 40 रुपये देने होंगे.

6️⃣ हालांकि जन-धन खाताधारकों को इस फीस में हल्की राहत दी गई है. उन्हें डिपॉजिट पर कोई चार्ज नहीं चुकाना होगा, लेकिन पैसे निकालने पर 100 रुपये देने होंगे. वरिष्ठ नागरिकों को भी चार्ज से कोई राहत नहीं दी गई है.
बाकी बैंक्स जैसे बैंक ऑफ इंडिया, पीएनबी, एक्सिस और सेंट्रल बैंक भी जल्द ही इस तरह के चार्ज लगाने पर फैसला लेंगे.


7️⃣ 1 नवंबर से SBI के भी कुछ अहम नियमों में बदलाव होने जा रहा है. SBI के बचत खातों पर कम ब्याज मिलेगा. अब 1 नवंबर से जिन सेविंग्स बैंक अकाउंट में 1 लाख रुपए तक की राशि जमा है उस पर ब्याज की दर 0.25 परसेंट घटकर 3.25 परसेटं रह जाएगी. जबकि 1 लाख रुपए से ज्यादा की जमा पर अब रेपो रेट के अनुसार ब्याज मिलेगा.


8️⃣ एक  नवंबर से अब पचास करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए डिजिटल पेमेंट लेना अनिवार्य होगा. RBI का यह नियम भी एक नवंबर से लागू हो जाएगा. नई व्यवस्था के मुताबिक, ग्राहक या मर्चेंट्स से डिजिटल पेमेंट के लिए कोई भी शुल्क या मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं वसूला जाएगा. ये नियम सिर्फ 50 करोड़ रुपये से ज्यादा वाले टर्नओवर पर ही लागू होगा.


9️⃣ एक नवंबर से महाराष्ट्र में बैंकों का नया टाइम लागू होने जा रहा है. अब राज्य के सभी बैंक एक ही समय पर खुलेंगे और एक समय पर बंद होंगे. महाराष्ट्र में सभी बैंक्स सुबह 9 बजे से खुलकर शाम 4 बजे तक बंद होंगे. यह नियम सभी पब्लिक सेक्टर बैंक्स पर लागू होगा. हाल ही में वित्त मंत्रालय ने देश में बैंकों के कामकाज का समय एक जैसा करने का निर्देश दिया था. यह नियम उसी के बाद लागू किया जा रहा है.


🔟 ट्रेन से सफर करने जा रहे हैं तो आपके लिए जरूरी खबर है. 1 नवंबर से भारतीय रेल पूरे देश की ट्रेनों के टाइम टेबल को बदलने जा रही है. पहले ट्रेनों का टाइम टेबल 1 अक्टूबर से बदलने वाला था, लेकिन इस तारीख को आगे बढ़ा दिया गया. 1 नवंबर से ट्रेनों का नया टाइम टेबल जारी हो जाएगा. इस कदम से 13 हजार यात्री और 7 हजार मालभाड़ा ट्रेनों के टाइम बदल जाएंगे. देश की 30 राजधानी ट्रेनों के टाइम टेबल भी 1 नवंबर से बदल जाएंगे.


1️⃣1️⃣ 1 नंवबर से बुधवार को छोड़कर चंडीगढ़ से न्यू दिल्ली के बीच तेजस एक्सप्रेस चलेगी. गाड़ी संख्या 22425 न्यू दिल्ली-चंडीगढ़ तेजस एक्सप्रेस न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन से प्रत्येक सेामवार, मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार रविवार को सुबह 9.40 पर चलेगी और दोपहर 12.40 पर चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंचेगी। यानी आप 3 घंटे में चंडीगढ पहुंच जाएंगे.
13:00

लगातार असफलता मिल रही है तो धैर्य बनाए रखना चाहिए क्योंकि समय बदलते देर नही लगतीdeepak tiwari

कुछ लोगों को कभी-कभी कड़ी मेहनत के बाद भी लगातार असफलता मिलती है, ऐसी स्थिति में हमें धैर्य बनाए रखना चाहिए और लक्ष्य की ओर धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहना चाहिए। सही दिशा में आगे बढ़ते रहने से देर से ही सही, लेकिन सफलता जरूर मिलती है। इस संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है।
प्रचलित कथा के अनुसार एक व्यक्ति बहुत मेहनत कर रहा था, लेकिन उसकी परेशानियां खत्म ही नहीं हो रही थीं, उसे किसी भी काम सफलता नहीं मिल रही थी। असफलता और धन की कमी की वजह से वह हताश हो गया था।
एक दिन वह अपने गांव के विद्वान संत के पास पहुंचा और संत को अपनी परेशानियां बता दीं। संत ने उसकी सारी बातें ध्यान से सुनी और कहा कि तुम्हें अभी धैर्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
संत ने एक कथा सुनाई। संत बोले की पुराने समय में किसी बच्चे ने बांस और कैक्टस का पौधा एक ही समय पर लगाया। बच्चा रोज दोनों पौधों को बराबर पानी देता और जरूरी देखभाल करता था। काफी समय बीत गया। कैक्टस पनप गया, लेकिन बांस का पौधे में कुछ प्रगति नहीं हुई थी।
बच्चे को थोड़ी निराशा हुई, लेकिन उसने पौधों की देखभाल करना नहीं छोड़ी। अब कैक्टस तेजी से बढ़ने लगा था, लेकिन बांस का पौधा वैसा का वैसा ही था।
लड़का ने कुछ दिन और देखभाल की। अब बांस के पौधे में थोड़ी सी उन्नति होने लगी थी, ये देखकर बच्चा खुश हो गया। कुछ और दिन निकल गए। अब बांस का पौधा बहुत तेजी से बढ़ रहा था। कैक्टस का पौधा छोटा रह गया।
इस कथा के माध्यम से संत ने दुखी व्यक्ति को समझाया कि कभी-कभी कुछ कामों में देरी हो जाती है, लेकिन हम धैर्य बनाए रखेंगे तो हमें सफलता जरूर मिल सकती है। इसीलिए निराश होने से बचें और सही दिशा में आगे बढ़ते रहें।

Thursday, 22 October 2020

17:57

जाने नवरात्रि में व्रत आहार का महत्व :deepak tiwari

नवरात्रि के दौरान नौ दिन तक दूध या दही ज़रूर लें, वजन अधिक हो तो पूरी के बजाय रोटी ही खाएं ताकि वेट न बढ़े
नवरात्र के व्रत में आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत रहे, इसके लिए फलाहार में पोषण जोड़ सकते हैं। कैसे, आइए जानते हैं।
व्रत में पोषण करें पूरा
कोरोना के इस दौर में लोग नवरात्र का व्रत भी रखेंगे, परंतु अभी एक चिंता का विषय है- रोग-प्रतिरोधक क्षमता। भूखे रहने पर यह क्षमता प्रभावित होती है। दरअसल, जब भोजन नहीं करते या ज़रूरत से कम करते हैं, तो शरीर पर अधिक भार पड़ता है। शरीर को काम तो सभी करने होते हैं, किंतु भोजन और पोषक तत्व सीमित मिलते हैं और उन्हीं में उसे सारा काम चलाना पड़ता है। ऐसे में व्रत कैसे रखना है, ताकि रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी मज़बूत बनी रहे, आइए, इसके बारे में जानते हैं।
दूध से मिलेगा पोषण
व्रत में दूध और दही का उपयोग बहुत आसानी से किया जा सकता है। फलों का उपयोग भी किया जाता है। आलू, साबूदाना और सिंघाड़े के आटे का उपयोग किया जाता है। इसमें दूध का सेवन बहुत ज़रूरी है। दूध या दही का सेवन दिन में 3 छोटे कप या 2 गिलास ज़रूर करें। इस दूध या दही को केले के साथ ले सकते हैं, आलू की टिक्की के साथ ले सकते हैं या फिर साबूदाने की खीर बनाकर ले सकते हैं, ये पसंद पर निर्भर करता है। दूध पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन बी 12 देगा। वहीं दही इनके साथ-साथ पाचन क्रिया को दुरुस्त रखेगा।
रात का भोजन ऐसा हो
यह भी ध्यान दें कि दोपहर और रात के खाने में किसी भी प्रकार की रोटी को शामिल करना ज़रूरी है। ऐसे में साबूदाना या सिंघाड़े के आटे की रोटी का उपोग करें। अगर वज़न नियंत्रण में है, तो रोटी की जगह सिंघाड़े की पूड़ी या पराठा भी खा सकते हैं। कुछ लोग उबले आलू को सिंघाड़े के आटे के साथ मिलाकर पूड़ी आदि व्यंजन बनाते हैं। अगर वज़न अधिक है तो ऐसे में रोटी का ही उपयोग करें।
ज़रूरी विटामिन मिलेंगे
सिंघाड़े का आटा रेशे से भरपूर होता है जो बहुत सारे खनिज देगा, इसलिए दिन में कम से कम एक समय के खाने में साबूदाने की जगह पर सिंघाड़े का आटा उपयोग करें। ये भी ध्यान रखें कि केला, पपीता आदि ऊर्जा देते हैं, इसलिए व्रत के तीनों समय के आहार यानी कि सुबह के नाश्ते और दोपहर व रात के भोजन में फलों का उपयोग भी अवश्य करिए। इस समय मौसंबी, पपीता, केला ले सकते हैं। इनसे विटामिन सी, फाइबर, विटामिन ए और अन्य विटामिनों की आवश्यकता पूरी हो जाती है।
दालों की दूर होगी कमी
व्रत में दालों का उपयोग नहीं किया जाता, ऐसे में कम से कम एक मुट्ठी मूंगफली, बादाम और काजू का मिश्रण ज़रूर लें। पूरे दिन में अपने खाने में एक चम्मच तिल का उपयोग ज़रूर करें। चाहें तो तिल को आटे में गूंध सकते हैं, साबूदाने की खिचड़ी या आलू की टिक्की में मिलाकर भी ले सकते हैं। पर ध्यान रहे कि तिल को चबाकर ज़रूर खाएं ताकि इसका पूरा फ़ायदा मिले।
रात के समय का पोषण
रात में सोने से पहले एक कप दूध में आधा चम्मच हल्दी डालकर अवश्य लीजिए। पर्याप्त पानी पीना आवश्यक होगा। साथ ही शुद्ध और साफ़ हवा में सैर करें या छत पर ज़रूर टहलें।

Friday, 16 October 2020

17:21

58 वर्षों बाद इस नवरात्रि बन रहा है यह दुर्लभ योग -आचार्य प्राण गुरू जी

नई दिल्ली :देवी भगवती की व‍िशेष पूजा और अर्चना का पर्व शारदीय नवरात्रि 17 अक्‍टूबर दिन शनिवार यानी क‍ि कल से शुरू हो रहा है। यह पर्व 25 अक्टूबर तक चलेगा। 9 दिन मां भगवती की भक्ति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। बता दें क‍ि इस बार की शारदीय नवरात्रि अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है क्‍योंक‍ि इस बार पूरे 58 वर्षों के बाद शनि, मकर में और गुरु, धनु राशि में रहेंगे। इससे पहले यह योग वर्ष 1962 में बना था। तो आइए जानते हैं कलश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त, नवरात्र के नौ द‍िन होने वाले मां के अलग-अलग स्‍वरूप, नौ द‍िनों के नौ रंग खास और नौ द‍िनों के भोग व‍िशेष क्‍या हैं?

2/5शारदीय नवरात्रि का शुभ मुहूर्त

इस बार का शारदीय नवरात्रि आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी क‍ि 17 अक्टूबर को पड़ रही है। इसी द‍िन कलश स्‍थापना होगी। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 13 मिनट तक है। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 29 मिनट तक है।
ऐसे हुई थी शारदीय नवरात्रि की शुरुआत जानिए पौराणिक कथा

3/5जानें कौन से द‍िन होगी देवी के क‍िस रूप की पूजा



मां शैलपुत्री पूजा घटस्थापना : 17 अक्टूबर

मां ब्रह्मचारिणी पूजा : 18 अक्टूबर

मां चंद्रघंटा पूजा : 19 अक्टूबर

मां कुष्मांडा पूजा : 20 अक्टूबर

मां स्कंदमाता पूजा : 21 अक्टूबर

षष्ठी मां कात्यायनी पूजा : 22 अक्टूबर

मां कालरात्रि पूजा : 23 अक्टूबर

मां महागौरी दुर्गा पूजा : 24 अक्टूबर

मां सिद्धिदात्री पूजा : 25 अक्टूबर

4/5नवरात्रि के ये 9 रंग हैं खास, इन्‍हें धारण करके करें पूजा



देवी शैलपुत्री: देवी मां के इस स्‍वरूप को पीला रंग अत्‍यंत प्र‍िय है। इसल‍िए इस द‍िन पीला रंग पहनना शुभ माना जाता है।

देवी ब्रह्मचारिणी: देवी ब्रह्मचारिणी को हरा रंग अत्‍यंत प्र‍िय है। इसल‍िए नवरात्रि के दूसरे दिन हरे रंग का वस्‍त्र धारण करें।

देवी चंद्रघंटा: देवी चंद्रघंटा को प्रसन्‍न करने के ल‍िए नवरात्रि के तीसरे दिन हल्का भूरा रंग पहनें।

देवी कूष्माण्डा: देवी कूष्‍मांडा को संतरी रंग प्र‍िय है। इसल‍िए नवरात्रि के चौथे दिन संतरी रंग के कपड़े पहनें।

देवी स्कंदमाता: देवी स्‍कंदमाता को सफेद रंग अत्‍यंत प्र‍िय है। इसल‍िए नवरात्रि के पांचवे द‍िन सफेद रंग के वस्‍त्र पहनें।

देवी कात्यायनी: देवी मां के इस स्‍वरूप को लाल रंग अत्‍यंत प्रिय है। इसल‍िए इस द‍िन मां की पूजा करते समय लाल रंग का वस्‍त्र पहनें।

देवी कालरात्रि: भगवती मां के इस स्‍वरूप को नीला रंग अत्‍यंत प्र‍िय है। इसल‍िए नवरात्रि के सातवें द‍िन नीले रंग के वस्‍त्र पहनकर मां की पूजा-अर्चना की जानी चाह‍िए।

देवी महागौरी: देवी महागौरी की पूजा करते समय गुलाबी रंग पहनना शुभ माना जाता है। अष्टमी की पूजा और कन्या भोज करवाते इसी रंग को पहनें।

देवी सिद्धिदात्री: देवी मां के इस स्‍वरूप को बैंगनी रंग अत्‍यंत प्रिय है। इसल‍िए नवमी त‍िथ‍ि के द‍िन भगवती की पूजा करते समय बैंगनी रंग के वस्‍त्र पहनने चाह‍िए।

शारदीय नवरात्र 17 से, इस बार घोड़े पर सवार होकर आएंगी देवी भगवती, जान‍िए क्‍या है मतलब

5/5देवी मइया को लगाएं ये भोग, होंगी पूरी मुरादें



नवरात्रि के पहले दिन मां के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करें। ऐसा करने से आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है।

नवरात्रि के दूसरे दिन मां को शक्‍कर का भोग लगाकर घर के सभी सदस्यों में बांटें। इससे आयु वृद्धि होती है।

नवरात्रि के तीसरे दिन देवी भगवती को दूध या खीर का भोग लगाएं। इसके बाद इसे ब्राह्मणों को दान कर दें। ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

नवरात्रि के चौथे दिन देवी मां को मालपुए का भोग लगाएं। इसके बाद इसे जरूरतमंदों को दान कर दें। ऐसा करने से व्‍यक्ति की बौद्धिक क्षमता का व‍िकास होता है।

नवरात्रि के पांचवें दिन मां को केले का भोग अर्पित करें। ऐसा करने से जातक न‍िरोगी रहता है।

नवरात्रि के छठवें द‍िन मां भगवती को शहद का भोग लगाएं। मान्‍यता है क‍ि ऐसा करने से आकर्षण भाव में वृद्धि होती है।

नवरात्रि के सातवें द‍िन देवी मां गुड़ का भोग लगाएं। इसके बाद यह भोग न‍िराश्रितजनों और दिव्‍यांगों को बांट दें। ऐसा करने से देवी मां प्रसन्‍न होती हैं और ऐश्‍वर्य-वैभव की प्राप्ति होती है।

नवरात्रि के आठवें दिन माता भगवती को नारियल का भोग लगाकर वह नारियल दान कर दें। मान्‍यता है क‍ि ऐसा करने से संतान संबंधी सभी परेशानियों से राहत म‍िलती है

नवरात्रि के नवें द‍िन देवी भगवती को त‍िल का भोग लगाएं। इसके बाद यह भोग क‍िसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान कर दें। इससे अकाल मृत्‍यु से राहत म‍िलती है।

Thursday, 8 October 2020

20:48

जानिए किसकी पूजा से होता है जीवन मे बदलाव आचार्य पंडित हेमराज शास्त्री की कलम से TAP NEWS

सवाई माधोपुर@ रिपोर्ट चंद्रशेखर शर्मा। सवाई माधोपुर निवासी आचार्य पंडित हेमराज शास्त्री (लाखनपुर वाले) बताते हैं कि हमारे हिंदू धर्म में कुछ लोग शिव को ईश्वर मानते हैं,तो कुछ नारायण को और श्रीराम व श्रीकृष्ण आदि अनेकों नामों से लोग ईश्वर को पूजते हैं। कुछ लोग कहते हैं ईश्वर एक है और स्पष्ट भी है कि ईश्वर के कई नाम है परंतु जो भी हो एकेश्वरवाद में एक संदेश छुपा है वह है इष्ट देव का हिंदू धर्म में देवी-देवताओं के अलग-अलग नाम और उनके स्वरूप का वर्णन मिलता है।
शास्त्री जी का कहना है, कि जो लोग आस्थावान हैं उनके लिए यह प्रश्न काफी महत्वपूर्ण है कि मुझे किसकी पूजा करनी चाहिए।
कहते हैं कि मनुष्य एक स्वार्थी प्राणी है यदि पूजा भी करेगा तो उसके पीछे भी उसका स्वार्थ होगा चाहे वह मोक्ष प्राप्ति ही क्यों ना हो अब यदि मनुष्य स्वार्थी है तो उसे अपने हितसाधन के अनुरूप ही अपना एक चुनना चाहिए।
ख्वाहिश एक और मन्नतें कई
जीवन की किसी विशेष इच्छा की पूर्ति के लिए कई बार हम मन्नत मांगते हैं मंदिर गए तो वहां मन्नत मांग ली गुरुद्वारा गए तो वहां भी मन्नत मांग ली और अधिकतर लोग यह भूल जाएंगे की मन्नत कहां कहां मांगी है क्या इससे यह सिद्ध नहीं होता कि हमें ईश्वर के किसी भी रूप पर पूर्ण विश्वास नहीं है और यदि विश्वास है तो डगमगाता क्यों है।
कर्ज खत्म करने के लिए क्या करें
मूर्ती कौन सी चुने
अब कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सवाल उठाते हैं पूजा में मूर्ती का क्या महत्व है क्या आवश्यकता है और पत्थर की पूजा क्यों करें। मूर्ती का एक ख़ास महत्व है। मूर्ती एक प्रतीक है। यह याद रखने के लिए कि हम अमुक देवी देवता के लिए कर्म कर रहे हैं फिर चाहे पत्थर हो या किसी प्रकार की धातु। मन तब तक एकाग्र नहीं होगा जब तक अंतर्मन में ईश्वर के प्रति एक छवि नहीं बनेगी। किसी भी मूर्ती का अखंडित होना सुन्दर होना मन में एक उमंग पैदा करता है एक पवित्रता का संचार होता है।
मूर्ती में प्राण प्रतिष्ठा का विधान है जो शुद्धिकरण का एक चरण है। हम किसी पत्थर की पूजा नहीं कर रहे हैं हम अपने मन को एकाग्र करके शुद्ध कर रहे हैं जो शुद्धता लम्बे समय तक बनी रहती है उसमे सकारात्मक परिवर्तन होता है। कहते हैं न की मन चंगा तो कटौती में गंगा। मन साथ नहीं है तो पूजा करने से पहले मन को शांत करने का उपाय करना होगा। हमारे मन की ताकत असीम है और इस ताकत में वृद्धि होती है जब ईश्वर का प्रतीक सामने होता है।
ऐसे होती है पूजा निष्फल
एक इष्ट चुनें
सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके जीवन का लक्ष्य क्या है।
धन और ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए कुबेर गणेश और महालक्ष्मी, शत्रुओं के नाश के लिए प्रतिस्पर्धा में विजय प्राप्ति के लिए तथा सर्वत्र सफलता प्राप्ति के लिए बगलामुखी, महाकाली तथा छिन्नमस्ता, रोग नाश तथा स्वास्थ्य लाभ के लिए श्री राम रक्षा स्त्रोत, मोक्ष प्राप्ति के लिए शिव, पितरों की संतुष्टि के लिए ब्रह्मा, संतान और संपूर्ण परिवार के लिए विष्णु को इष्ट देव मानकर पूजा प्रारंभ करें।
एक ही मंत्र का चुनाव करें तथा अभीष्ट सिद्धि होने तक किसी अन्य मंत्र का जाप ना करें अपना लक्ष्य सीमित रखें पूजा स्थान बार-बार ना बदले पूजा का समय एक सा रखें मंत्र पढ़ने का तरीका एक रखे यानी मानसिक जप कर रहे हैं तो केवल मानसिक जप करें उपांशु कर रहे हैं तो केवल उपांशु करें जो भी करें उसमें कंसिस्टेंसी रखें माला आसन आदि सब कुछ एक जैसा ही रहे।
स्थिरता जरूरी है
कैसा भी कार्य हो स्थिरता (Consistency) का अपना महत्व होता है कंसंट्रेशन और कंसिस्टेंसी का सही तालमेल और आपकी भावना को मिलाकर जो पूजा की जाती है वह जल्दी सिद्ध होती है।
निष्कर्ष यही है कि पूजा हो प्रार्थना हो या फिर देव दर्शन की इच्छा हो मन का एकाग्र रहना अति आवश्यक है यदि आपका मन आपके साथ हैं है तो किसी भी तरह से अच्छे की उम्मीद करना व्यर्थ है

Sunday, 4 October 2020

18:38

जाने रोज सुबह आंवला खाने के फायदे:deepak tiwari

आंवला खाने के फायदे:deepak tiwari रोज कच्चा आंवला खाने से कम होगा वजन, इसमें मौजूद विटामिन सी की अधिक मात्रा आपकी इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करेगी आमतौर पर आंवले का सेवन बालों को काला, घना बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन ये सिर्फ़ बालों की ही नहीं बल्कि शरीर की कई अन्य दिक़्क़तों को भी दूर भगाने में मददगार है। आंवला बहुत ही पौष्टिक होता है। यह अपने एंटीऑक्सीडेंट्स के कारण सौंदर्य प्रसाधनों में अधिक उपयोग में लाया जाता है। इसे आयुर्वेदिक दवा के रूप में त्वचा और बालों के स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आइए जानते हैं कि आंवला और किस प्रकार से हमारे लिए फ़ायदेमंद है।
पाचन क्रिया में लाभ
कई फलों की तरह आंवले में भी फाइबर भरपूर मात्रा में होता है जो पाचन क्रिया सुचारु रखने में मददगार है। इसलिए आंवले का सेवन पेट संबंधी विकारों को दूर करता है।
मधुमेह पर नियंत्रण
आंवले में क्रोमियम होता है, जो डायबिटीज़ के इलाज में महती भूमिका निभाता है।
वज़न घटाने में मददगार
वज़न कम करने के लिए कच्चा आंवला खाएं। इसके अलावा आंवले के पाउडर को शहद और गुनगुने पानी के साथ पिएं। कुछ ही दिनों में अंतर दिखने लगेगा।
माहवारी नियमित रखे
माना जाता है कि आंवले में पाए जाने वाले मिनरल्स और विटामिन मासिक धर्म में ऐंठन की समस्या से राहत दिलाने में और माहवारी को नियमित करने में भी मददगार हैं।
इम्यूनिटी बढ़ाता है
चूंकि आंवले में विटामिन-सी की भरपूर मात्रा पाई जाती है, इसलिए यह प्राकृतिक प्रतिरक्षा तंत्र को मज़बूत बनाने वाला माना जाता है।
हृदय संबंधी समस्याओं से राहत
आंवले का पाउडर हृदय की मांसपेशियों को मज़बूत करता है। इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छी तरह से होता है।
यूरिन इंफेक्शन से बचाव
आंवला यूरिन की मात्रा को नियंत्रित करता है और यूरिन इंफेक्शन से भी बचाव करता है।
भूख बढ़ाता है
भोजन से पहले मक्खन, शहद के साथ आंवले के पाउडर का सेवन करने से भूख बढ़ती है। आंवला बुख़ार, अपच की समस्या, एनीमिया में भी फ़ायदेमंद साबित होता है।
ख़ून साफ़ करे
आंवला प्राकृतिक रूप से ख़ून को साफ़ करता है। अगर आपको मुंहासे होते हैं तो आंवला आधारित फेस पैक लगाएं। आंवला कोलेजन को बढ़ाने में भी मदद करता है, जो त्वचा को जवां बनाए रखता है।

Tuesday, 29 September 2020

08:44

कोरोनाकाल में संजीवनी बनी प्रोज पोजिशन जाने कैसे:deepak tiwari

कोरोनाकाल में 'संजीवनी' बनी प्रोज पोजिशन:deepak tiwari सांस लेने में दिक्कत है तो 40 मिनट पेट के बल लेट जाएं, यह पोजिशन नेचुरल वेंटिलेटर का काम करती है; 80 % तक इसके नतीजे असरदार
कोरोना संक्रमण के कारण ज्यादातर मरीजों को सांस लेने में दिक्कत है। आक्सीजन का लेवल गिरने पर अस्पतालों में वेंटिलेटर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे मरीजों के लिए प्रोन पोजिशन आक्सीजनेशन तकनीक 80 प्रतिशत तक कारगर है। हर चिकित्सा प्रणाली के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने प्रोन पोजिशन को अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों के लिए 'संजीवनी' बताया है।
सांस लेने में तकलीफ होने पर इस अवस्था में 40 मिनट लेटते हैं तो आक्सीजन का लेवल सुधरता है। पेट के बल लेटने से वेंटिलेशन परफ्यूजन इंडेक्स में सुधार आता है। डॉक्टरों ने कोविड के मरीजों को सलाह दी है कि सांस लेने में दिक्कत होने पर इस तकनीक को आजमा सकते हैं।
इस पोजीशन का इस्तेमाल एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस की हालत में किया जाता है, ताकि ऑक्सीजन सर्कुलेट की जा सके। ऐसी स्थिति में फेफड़ों के निचले हिस्से में पानी आ जाता है।
प्रोन पोजिशन बनाते हुए ये ध्यान रखें
गर्दन के नीचे एक तकिया, पेट-घुटनों के नीचे दो तकिए लगाते हैं और पंजों के नीचे एक। हर 6 से 8 घंटे में 40-45 मिनट ऐसा करने के लिए कहते हैं।
पेट के बल लिटाकर हाथों को कमर के पास पैरलल भी रख सकते हैं। इस अवस्था में फेफड़ों में खून का संचार अच्छा होने लगता है। फेफड़ों में मौजूद फ्लुइड इधर-उधर हो जाता है और यहां तक ऑक्सीजन पहुंचने लगती है।
प्रोन पोजिशन सुरक्षित है और खून में ऑक्सीजन का लेवल बिगड़ने पर कंट्रोल करने का काम करती है। यह डेथ रेट को भी घटाती है।
एक्सपर्ट के मुताबिक, आईसीयू में भर्ती मरीजों को प्रोन पोजिशन से बेहतर रिजल्ट मिलते हैं। वेंटिलेटर न मिलने पर यह सबसे अधिक कारगर तकनीक है। इससे 80 फीसदी तक नतीजे वेंटिलेटर जैसे ही मिलते हैं।
एक्सपर्ट पैनल : एसएमएस अस्पताल, जयपुर के अधीक्षक डॉ. राजेश शर्मा, मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. रमन शर्मा, पल्मोनरी मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. नरेंद्र खिप्पल, अस्थमा रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेन्द्र सिंह, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक डॉ. संजीव शर्मा और आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. राकेश पांडे।

Thursday, 17 September 2020

03:01

अपनी कला से बांट रहीं खुशियां जाने कैसे:deepak tiwari

अपनी कला से बांट रहीं खुशियां:deepak tiwari भव्या दोषी कोरोना के बीच अपने वेंचर 'द डूडल डेस्क' से लोगों को दे रहीं पॉजिटिव थिंकिंग का संदेश, इनके 2 लाख फॉलोअर्स में से 81% महिलाएं हैं
पूरी दुनिया में फैली महामारी की वजह से लोगों का एक दूसरे से मिलना कम हुआ है। कोरोना के चलते हर उम्र के लोगों के बीच डिप्रेशन तेजी से बढ़ा है। ऐसे में भव्या दोषी अपने वेंचर 'द डूडल डेस्क' के माध्यम से लॉकडाउन के दौरान लोगों के अहसास बयां कर रही हैं।
भावना कहती हैं ''ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने अपने मैसेज के जरिये ये बताया कि वे अपनी फीलिंग किस तरह से शेयर कर रहे हैं। मेरे पॉजिटिव डूडल्स और मैसेज लोगों को कोरोना काल में सकारात्मक रहने का संदेश देते हैं''।
उनके इंस्टाग्राम पेज पर दो लाख फॉलोअर्स हैं। इनमें से 81% महिलाएं हैं। उनके पेज पर कलरफुल डूडल्स और स्ट्रॉन्ग मैसेज देखते ही बनते हैं। एमबीए पासआउट भव्या दोषी अपनी इस कला को खुशी जाहिर करने का जरिया मानती हैं।
भव्या के अनुसार, ''मैंने इस पेज की शुरुआत उस वक्त की जब 2015 में मेरे पैरेंट्स इस दुनिया में नहीं रहे। ये मेरे लिए बहुत मुश्किल समय था। उस वक्त मैंने अपनी जॉब छोड़ दी और ऐसी कई किताबें पढ़ी जिससे मोटिवेशन मिल सके''।
भव्या के पापा डॉक्टर थे जो लोगों की हर तरह से मदद करते थे। वे कहती हैं ''मैंने अपने प्रयासों से मैंने एक बार फिर लोगों की मदद करने की कोशिश की है। मैंने लोगों की सोच को सही दिशा देने के लिए ही अपने डूडल के साथ मैसेज लिखना शुरू किया है''।
पिछले कुछ सालों से भव्या पेपर पर डूडल बना रहीं थीं। फिर उसका फोटो लेकर ऑनलाइन पोस्ट करती थीं। लेकिन अब वे लैपटॉप पर डूडल बनाने में एक्सपर्ट हो गईं हैं।
गुरूग्राम की रहने वाली भव्या का यह आर्ट जापानी और कोरियन आर्टिस्ट के 'कवाई डूडल्स' से प्रेरित है। भव्या अपने काम के जरिये मुश्किल वक्त में लोगों का साथ देना चाहती हैं। भव्या कहती हैं ''जब आप लोगों को प्यार और सम्मान देते हैं तो बदले में आपको भी प्यार और आदर ही मिलता है''।
इस वक्त वे टी शर्ट्स, पोस्टर्स, कॉफी मग्स, सिपर्स और उन सभी चीजों पर डूडलिंग कर रही हैं जो सुबह से शाम तक हमारे काम आती हैं। इन छोटी-छोटी चीजों के माध्यम से वे लोगों को खुश करना चाहती हैं।
लोगों को डूडलिंग सीखाने के लिए उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पेज पर कुछ वीडियोज अपलोड किए हैं। भव्या ने अपनी वेबसाइट पर एक 'हैप्पी क्लब' बनाया है जिसके 3000 सदस्य हैं।
02:57

फरहान ने लॉकडाउन में कम किया 15 किलो वजन जाने कैसे

एक मेडिकल स्टूडेंट होने के नाते लाइब्रेरी में घंटों बैठना शामिल होता है। ऐसे में अगर आप हॉस्टल में रह रहे हैं तो सादा खाना कम और जंक फूड ज्यादा खाने लगते हैं। अहमदनगर, महाराष्ट्र में एमबीबीएस के थर्ड ईयर स्टूडेंट फरहान के साथ भी यही हुआ।
सैयद मोहम्मद फरहान इरफान डॉ. विट्‌ठल राव विखे पाटिल फाउंडेशंस मेडिकल कॉलेज एंड मेमोरियल हॉस्पिटल, अहमदनगर से एमबीबीएस कर रहे हैं। वे कहते हैं अगर आपके दोस्त भी खाने के शौकीन हो तो मेस के खराब खाने से बचने के लिए रोज ही बाहर का खाना खाने में आता है।
कभी-कभार बाहर का खाना तो अच्छा लगता है लेकिन अगर रोज ऐसा ही खाना आपकी आदत बन जाए तो आप खुद को थका हुआ और सुस्त महसूस करने लगते हैं। ऐसे में आपका वजन भी तेजी से बढ़ने लगता है।
ऐसा ही कुछ फरहान के साथ भी हुआ और उनका वजन 85 से 90 किलो हो गया। लॉकडाउन के दौरान 15 किलो वजन कम करने वाले फरहान ने अपनी वेट लॉस जर्नी खुद अपने शब्दों में कुछ इस तरह से बयां की। वे चाहते हैं उनके बारे में जानकर दूसरे लोग भी अपने वजन को कंट्रोल करना सीखें और सेहतमंद रहें:
एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान दिन-रात बस बैठे-बैठे पढ़ना और जब पढ़ाई से उठो तो खाना खाना। अब से कुछ महीनों पहले तक यही मेरा डेली रुटीन हुआ करता था। उन दिनों मेरा वजन लगभग 90 किलो हो गया था।
मेरे दोस्तों ने मुझे जिम जॉइन करने की सलाह दी। मैं जिम जाने लगा लेकिन वजन कम नहीं हुआ। तब मैंने नानावटी हॉस्पिटल, मुंबई की चीफ डाइटीशियन डॉ. उषा किरण सिसोदिया से कंसल्ट किया।
मैं ये भी जानता था कि उनके बताए डाइट चार्ट को मैं ज्यादा दिनों तक फॉलो नहीं कर पाऊंगा क्योंकि मैं खुद भी खाने का बहुत शौकीन हूं। मैं नॉनवेज खाए बिना नहीं रह सकता। ऐसे में डाइट प्लान फॉलो करना मेरे लिए मुश्किल था,लेकिन डॉ. उषा किरण द्वारा बताया गया मेरा डाइट प्लान खाने में टेस्टी और हेल्दी था। जिस वजह से इसे फॉलो करना मेरे लिए आसान रहा। साथ ही मैंने साइकिलिंग और वॉकिंग की शुरुआत की।
वजन बढ़ने के दौरान मैंने ये महसूस किया कि जब आप मोटे होने लगते हैं तो आपका शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होने लगता है। चाहे वजन कम करने और परफेक्ट शेप के लिए डाइटिंग और वर्कआउट जरूरी है लेकिन इससे भी जरूरी है आपका विल पावर मजबूत होना। एक बार में ज्यादा खाने के बजाय थोड़ी-थोड़ी देर में पौष्टिक भोजन जैसे सलाद या फल खाना जरूरी है।
अपना वजन कम करने का ख्याल मुझे तब आने लगा जब लोग मेरे वजन का मजाक उड़ाने लगे और मुझे वेट लॉस के लिए तरह-तरह की सलाह देने लगे। ऐसे में मैं अपने लिए जब भी नए कपड़े लेकर आता तो वे कपड़े हर बार मुझे टाइट लगते। धीरे-धीरे अपने वजन की वजह से मुझे फोटो खिंचवाने में भी शर्मिंदगी महसूस होने लगी।
उन्हीं दिनों मैने एमबीबीएस की पढ़ाई करते हुए ये जाना कि वजन बढ़ने के सेहत को क्या नुकसान हो सकते हैं। ऐसी कई बीमारियां हैं जो ज्यादा वजन की वजह से कम उम्र में ही घेरने लगती हैं। इन सब बातों को जानकर मैंने ये फैसला किया कि कुछ भी हो जाए मुझे अपना वजन कम करना ही है।
वजन कम करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी आपका समय और ऊर्जा दोनों देने की है। इसके अलावा सारी कोशिशों के साथ ही सब्र से काम लेना भी जरूरी है। जिन लोगों को लगता है कि वजन कम करने के लिए सर्जरी या जिम सप्लीमेंट जरूरी होते हैं, वे भी गलत हैं। इन दोनों चीजों के बिना भी आसानी से वेट लॉस किया जा सकता है।
मैंने फरवरी और मार्च में पूरे अनुशासन के साथ वजन कम करने की कवायद जारी रखी। उसके बाद रमजान के एक महीने इसे फॉलो नहीं कर पाया। लेकिन ईद के बाद मैंने फिर एक बार अपनी कोशिश की। इस तरह जुलाई तक मैंने 15 किलो वजन कम किया। मेरी वेट लॉस जर्नी अभी भी जारी है।
मुझे अपना वजन 68 किलो करना है। हालांकि वजन कम करने के लिए मैंने अपने खाने पर कंट्रोल किया लेकिन सीमित मात्रा में हर चीज खाई जैसे खाने में दो चपाती के साथ सब्जी। इसके अलावा बीच में भूख लगने पर सलाद, फल या चने में टमाटर और खीरा मिलाकर खाया। अगर सुबह नॉनवेज खा लिया है तो शाम को नहीं खाया। वजन कम करने के लिए रोज क्या खाना है, इससे ज्यादा जरूरी है कितना खाना है। मैंने इस बात का हमेशा ध्यान रखा।
इस समय जो लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं, उनका वजन बढ़ने के अधिक चांस हैं क्योंकि दिन भर बैठकर कंप्यूटर या लैपटॉप के सामने काम करना और घर में रहते हुए ऑफिस के बजाय अधिक खाना। लेकिन यही वो वक्त है जब आप अपना वेट आसानी से कम कर सकते हैं। घर में रहते हुए भी एक साथ ज्यादा खाने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल में कम खाना शुरू करें। साथ ही तली-भुनी चीजों से बचें।
इसके बजाय सलाद, फल या चने खाएं। ऐसे बहुत से लोग हैं जो यह समझते हैं कि एक बार वजन बढ़ गया तो इसे कम करना बहुत मुश्किल है। जबकि ऐसा नहीं है। वजन कम करने के लिए आपको एक अच्छे डाइटीशियन की जरूरत है। साथ ही एक्सरसाइज की भी। इस दौरान आप अपने लक्ष्य की ओर धीरे-धीरे बढ़ेंगे लेकिन कोशिश करते रहेंगे तो कामयाबी जरूर हासिल होगी।
डाइटिंग करना उस वक्त मेरे लिए मुश्किल हुआ जब मैं होस्टल से घर जाता था। इतने कम समय के लिए घर जाने पर घर में रोज ही खाने में कुछ खास बनता है। ऐसे में खुद को कंट्रोल करना कठिन था। लेकिन मैंने तय कर लिया था कि मुझे अपने डाइट चार्ट को हर हाल में फॉलो करना ही है।
जब मैंने अपने घर वालों को मेरे वेट लॉस प्लान के बारे में बताया तो उन्होंने मेरा साथ दिया और इस तरह मेरे मम्मी-पापा भी मेरे साथ डाइटिंग करने लगे। इसके अलावा मेरे दोस्तों ने जब वेट लॉस को लेकर मेरा जज्बा देखा तो उन्होंने भी मेरा साथ दिया।
वजन कम करने के बाद फरहान का फोटो-4।
अगर आप वेट लॉस करना चाहते हैं तो यह जान लें कि वजन कम करना एक बार का लक्ष्य नहीं है बल्कि लगातार की जाने वाली कोशिश है। ये तब सरल हो सकता है जब आप फ्राइड चीजों से दूर रहें। मीठा कम खाएं और कोल्ड ड्रिंक आदि पीने से परहेज करें। इसके साथ ही अपने वजन की नियमित रूप से जांच करते रहें ताकि आप वजन बढ़ते ही अपनी डाइट में बदलाव कर सकें और वजन नियंत्रित रहे।
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आप की कॉफी का स्वाद बढ़ाएंगी ये 5 चीज़ें:deepak tiwari

कॉफी का स्वाद बढ़ाएंगी ये 5 चीज़ें:deepak tiwari कॉफी में पीनट बटर मिलाकर पाएं डिफरेंट टेस्ट, इसमें चुटकी भर दालचीनी पाउडर डालने से मिलेगा मनचाहा फ्लेवर
कॉफी लवर्स रोज एक ही तरह की कॉफी पीकर बोर हो गए हैं, तो यह छोटे-छोटे ट्विस्ट अपनाकर अपनी मॉर्निंग या ईवनिंग कप ऑफ कॉफी को घर पर ही अपग्रेड कर सकते हैं। आप चाहें तो अपनी कॉफी को फ्रीज़र में फ्रीज़ किया जा सकता है और इससे भविष्य में आइस्ड बेवरेज बनाए जा सकते हैं। नो-शुगर फ्लेवर्ड कॉफी भी ट्राय कर सकते हैं। हेज़लनट फ्लेवर इन दिनों सबसे ज्यादा मशहूर है। इसके बाद वनिला और मोका भी विकल्प हैं। आजकल बहुत से ब्रांड्स फ्लेवर्ड कॉफी ऑफर कर रहे हैं।
1. होम मेड वैनिला क्रीमर
इसमें केवल दो इंग्रीडिएंट्स के साथ एक कप कॉफी तैयार की जा सकती है। नेचुरली स्वीट वनिला क्रीमर इस्तेमाल करने के लिए एक चौथाई कप दूध (ओट, आमंड, सॉय) को वनिला एक्सट्रैक्ट की 4-5 बूंदों के साथ मिक्स कर 20 सेकंड के लिए माइक्रोवेव में रख दें।
2. कोको :
कॉफी कप में थोड़ा-सा कोको पाउडर मिला लेंगे तो बेहद स्वादिष्ट चॉकलेट फ्लेवर कॉफी आपको मिलेगी। इसमें मौजूद कोको फ्लेवेनॉल्स आपका ब्लड फ्लो सुधार कर हार्ट हेल्थ बेहतर करते हैं।
3. थोड़ा फिज़ :
कॉफी बोरिंग और फ्लैट लग रही है तो उसे फिज़ी स्पिन भी दिया जा सकता है। आइस्ड कॉफी में थोड़ा स्पार्कलिंग वॉटर मिला सकते हैं। इससे कॉफी में न तो शुगर की मात्रा बढ़ती है, न ही कैलोरीज़ बढ़ती हैं। ये कैफीन फ्री भी होता है। इसका स्वाद भी बढ़िया रहेगा।
4. स्पाइसेस :
एक चुटकी सिनेमन पाउडर मिला सकते हैं। इससे कॉफी को फ्लेवर मिलता है। इससे शुगर भी नहीं बढ़ती। मोका ब्लेंड चाहिए तो सिनेमन के साथ थोड़ा कोको पाउडर मिलाएं।
5. पीनट बटर :
पीनट प्रोटीन से कॉफी को पावर करना चाहते हैं, तो इसमें थोड़ा-सा पाउडर्ड पीनट बटर मिला सकते हैं। ये डीहाइड्रेटेड ग्राउंड पीनट्स ही होती हैं।
केवल एक चम्मच पाउडर अपनी गर्म कॉफी में मिला सकते हैं। यह शुगर फ्री होता है और पोषण की बात करें, तो इसे लेने से फाइबर के साथ प्रोटीन भी मिलता है।
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नींद लेने का तरीका बदलें बदल जाएगी जिंदगी :deepak tiwari

नींद लेने का तरीका बदलें:deepak tiwari झुर्रियां रोकना है तो पीठ के बल लेटिए और खर्राटों से बचना है तो करवट लेते रहें, अमेरिकी शोधकर्ताओं का दावा
चेहरे की खूबसूरती, खर्राटे और सीने में जलन का कनेक्शन आपके सोने के तरीके से भी है। यह दावा जॉन हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। यूनिवर्सिटी में न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. राचेल सालास कहते हैं, जैसे-जैसे आप बुढ़ापे की ओर बढ़ते हैं सोने के तरीके और नींद लेने पर असर पड़ता है। अगर झुर्रियां रोकना चाहते हैं तो पीठ के बल लेटना चाहिए और खर्राटों से बचना है तो करवट लें।सीने में जलन है तो बाईं करवट लेकर सोएं।
जोर-जोर से खर्राटे आते हैं तो बदलें सोने का तरीका
स्लीप एप्निया के कारण ढंग से सांस लेने में दिक्कत होती है। हवा का फ्लो रुकता है। इसके चलते लोग जोर-जोर से खर्राटे लेते हैं। ऐसे में करवट लेकर या फिर पेट के बल लेटना फायदेमंद हो सकता है।
सीने में जलन है तो बाईं करवट लेकर सोएं
दाईं करवट लेकर लेटने पर समस्या बढ़ सकती है। ऐसे व्यक्ति जिन्हें गैट्रोसोफेगल रिफलक्स डिसीज (जीईआरडी) यानी खाना भोजन नली में ऊपर चढ़ने की समस्या है, जैसे गर्भवती महिलाएं उनमें यह दिक्कत जरूर बढ़ती है। ऐसे में बाईं करवट सोएं। इससे जलन कम होगी।
चेहरे की खूबसूरती के लिए 6 से 8 घंटे की नींद जरूरी
जब आप करवट लेकर या पेट के बल सोते हैं, तब उठने के बाद चेहरे पर सिकुड़न महसूस की होगी। ऐसे में पीठ के बल सोएं। चेहरे पर झुर्रियां धीमे आएंगी। एक्सपर्ट के मुताबिक, रोजाना 6 से 8 घंटे की नींद जरूर लें। यह फिजिकल और मेंटली आपको रिलैक्स रखती है। ​​इसके अलावा रात में देर तक जागने की आदत को बदलें। इसका असर भी चेहर पर पड़ता है।
पीठ या गर्दन में दर्द हो तो ये ध्यान रखें
प्रो. राचेल कहते हैं, पीठ या गर्दन दर्द के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। कुछ लोगों का मानना है कि पीठ के बल सोने से दर्द कम होता है तो कुछ का कहना है कि ऐसा करने पर दर्द और बढ़ सकता है। प्रो. राचेल के मुताबिक, ऐसी स्थिति में सोने की पोजिशन के साथ एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं और देख सकते हैं कि कौन सी स्थिति में आपका दर्द कम हो रहा है।

Saturday, 12 September 2020

05:33

पितरों की संतुष्टि के लिए श्राद्ध पक्ष में लगाने चाहिए पीपल का पेंड

पितृपक्ष:deepak tiwari पितरों की संतुष्टि के लिए श्राद्ध पक्ष में लगाने चाहिए पीपल, अशोक और तुलसी जैसे पेड़-पौधे, इनसे खुश होते हैं पितृ
श्राद्ध पक्ष में पितरों की संतुष्टि के लिए तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन के साथ ही पौधे लगाकर भी संतुष्ट करना चाहिए। कुछ पेड़-पौधे सकारात्मक उर्जा देते हैं। इसलिए ग्रंथों में बताए गए शुभ पेड़-पौधे पितृपक्ष में लगाए जाए तो पितरों का आशीर्वाद मिलता है। काशी के ज्योतिषाचार्य और धर्म शास्त्रों के जानकार पं. गणेश मिश्र मुताबिक पीपल में देवताओं के साथ ही पितरों का भी वास होता है। इसलिए श्राद्ध पक्ष में पीपल का पेड़ खासतौर से लगाना चाहिए। इसके साथ बरगद, नीम, अशोक, बिल्वपत्र, तुलसी, आंवला और शमी का पेड़ लगाने से पर्यावरण को साफ रखने में तो मदद होगी ही। पितरों के साथ देवता भी प्रसन्न होंगे।
पीपल: पीपल को पवित्र माना गया है। पुराणों के अनुसार इसमें पितरों का वास होता है। इसलिए पीपल के पेड़ पर दूध में पानी और तिल मिलाकर चढ़ाना चाहिए। इससे पितर संतुष्ट होते हैं।
बरगद: शास्त्रों में बरगद को आयु देने वाला तथा मोक्ष देने वाला पेड़ माना गया है। बरगद के पेड़ को ही साक्षी मानकर माता सीता ने राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था। बरगद पर जल चढ़ाकर इसकी परिक्रमा करने से पितर प्रसन्न होते हैं।
बिल्वपत्र: इस पेड़ में देवी लक्ष्मी और पत्तों में भगवान विष्णु का वास होता है। भगवान विष्णु की पूजा से पितृ प्रसन्न होते हैं। इसलिए इस पेड़ पर भी दूध में गंगाजल मिलाकर चढ़ाना चाहिए।
अशोक: अशोक के पेड़ को शुभ माना गया है। इसमें भी भगवान विष्णु का वास होता है। इसलिए इस पेड़ को लगाने और इसकी पूजा करने से पितृ देवता संतुष्ट और प्रसन्न होते हैं।
तुलसी: तुलसी का पौधा लगाने और उसकी पूजा से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। भगवान विष्णु के प्रसन्न होने से पितर भी संतुष्ट हो जाते हैं। इसलिए तुलसी का पौधा पितृपक्ष में लगाना चाहिए। तुलसी के पौधें में रोज जल डालने से भी पितृ प्रसन्न होते हैं।
पं. मिश्रा का कहना है कि परिवार के मृत सदस्यों के मुताबिक भी अलग-अलग पेड़-पौधे लगाए जा सकते हैं।
बच्चे के लिए अमरूद, आम या इमली का पेड़ लगाएं।
कुंवारी लड़की के लिए आंवला, अनार या अंजीर का पेड़ लगाया जा सकता है।
सौभाग्यवती स्त्री यानी शादीशुदा महिला के लिए अशोक, तुलसी या सीताफल का पेड़ लगाना चाहिए।
दुर्घटना में मृत लोगों के लिए पीपल, बरगद, नीम या शमी का पेड़ लगाएं।
माता, दादी और परदादी के लिए पलाश, पारस पीपल या चन्दन का पेड़ लगाया जा सकता है।
पिता, दादा और परदादा के लिए बिल्वपत्र, पीपल, बरगद या आंवले का पेड़ लगाना चाहिए।

Friday, 11 September 2020

15:36

इस साल पितृ पक्ष की अमावस्या के बाद शुरू नहीं होगी नवरात्रि जाने क्यों

17 अक्टूबर को घट स्थापना:deepak tiwari इस साल पितृ पक्ष की अमावस्या के बाद शुरू नहीं होगी नवरात्रि, 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक नहीं आएगा कोई बड़ा त्योहार
हर साल पितृ पक्ष की अमावस्या के बाद से ही आश्विन मास की नवरात्रि शुरू हो जाती है। लेकिन, इस साल ऐसा नहीं होगा। 17 सितंबर को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या है। इसके बाद 18 तारीख से अधिकमास शुरू हो जाएगा। ये माह 16 अक्टूबर तक रहेगा। इस माह में कोई बड़ा त्योहार नहीं रहेगा। 17 अक्टूबर को घट स्थापना के साथ नवरात्रि शुरू होगी।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार 19 साल बाद आश्विन माह का अधिकमास रहेगा। इससे पहले 2001 में ये माह आया था। 17 से 25 अक्टूबर तक नवरात्रि, 26 अक्टूबर को दशहरा और 14 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी। श्राद्ध पक्ष के बाद अधिकमास में कोई भी बड़ा त्योहार नहीं रहेगा। इस माह में चतुर्थी (20 सितंबर और 5 अक्टूबर), एकादशी (27 सितंबर और 13 अक्टूबर), पूर्णिमा (1 अक्टूबर) और अमावस्या (16 अक्टूबर) विशेष तिथियां रहेंगी।
कब और क्यों आता है अधिकमास
पं. शर्मा के मुताबिक एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का रहता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर है। ये अंतर हर तीन साल में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है।
अधिकमास से बनी रहती है त्योहारों की व्यवस्था
हिन्दी पंचांग में अधिकमास का महत्व काफी अधिक है। इस माह के पीछे वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। अगर अधिकमास नहीं होता तो हमारे त्योहारों की व्यवस्था बिगड़ जाती है। अधिकमास की वजह से ही सभी त्योहारों अपने सही समय पर मनाए जाते हैं।
अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है
अधिकमास को मलमास यानी मलिन मास माना गया है, इस वजह से कोई भी देवता इस मास का स्वामी बनना नहीं चाहता था। तब मलमास ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। मलमास की प्रार्थना सुनकर विष्णुजी ने इसे अपना श्रेष्ठ नाम पुरुषोत्तम प्रदान किया। इसी वजह से इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस माह में भगवान विष्णु की विशेष पूजा करने की परंपरा है।