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Monday, 1 March 2021

18:43

ISRO का साल का पहला मिशन कामयाब

दीपक तिवारी
चेन्नई.भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) के जरिए रविवार को 19 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे गए। भारतीय रॉकेट PSLV-C51 को रविवार सुबह 10.24 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC) से एक लॉन्च पैड के सहारे रवाना किया गया।
इन सैटेलाइट्स में चेन्नई की स्पेस किड्ज इंडिया (SKI) का सतीश धवन ST (SD-ST) भी शामिल है। इस अंतरिक्ष यान के टॉप पैनल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो उकेरी गई है। SKI के मुताबिक, इसके साथ एक एसडी कार्ड में सेव 'भगवद गीता' भी भेजी गई है।
इस रॉकेट से 637 किलो के ब्राजीलियाई उपग्रह अमेजोनिया-1 को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया गया। इसके अलावा 18 अन्य सैटेलाइट्स भी अंतरिक्ष में भेजे गए। इनमें से 13 अमेरिका से हैं। 2021 में भारत का यह पहला अंतरिक्ष अभियान PSLV रॉकेट के लिए काफी लंबा रहा, क्योंकि इसके उड़ान की समय सीमा 1 घंटा 55 मिनट और 7 सेकेंड रही। रविवार सुबह रॉकेट की लॉन्चिंग के साथ ही भारत की तरफ से लॉन्च किए गए विदेशी सैटेलाइट की कुल संख्या 342 हो गई।
अमेजन क्षेत्र में वनों की कटाई पर नजर रखेगा
ISRO के मुताबिक, अमेजोनिया-1 उपग्रह की मदद से अमेजन क्षेत्र में वनों की कटाई और ब्राजील में कृषि क्षेत्र से संबंधित अलग-अलग विश्लेषणों के लिए यूजर्स को रिमोट सेंसिंग डेटा प्रदान कर मौजूदा संरचना को और भी मजबूत बनाने का काम किया जाएगा।
18 में से 3 सैटेलाइट्स भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के संघ यूनिटीसैट्स से
18 अन्य सैटेलाइट्स में से चार इन-स्पेस से हैं। इनमें से तीन भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के संघ यूनिटीसैट्स से हैं, जिनमें श्रीपेरंबदुर में स्थित जेप्पिआर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नागपुर में स्थित जीएच रायसोनी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और कोयंबटूर में स्थित श्री शक्ति इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी शामिल हैं। एक का निर्माण सतीश धवन सैटेलाइट स्पेस किड्ज इंडिया द्वारा किया गया है और 14 एनएसआईएल से हैं।
भारत-ब्राजील के लिए गर्व की बात : सिवन
ISRO के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि यह भारत और ब्राजील दोनों के लिए गर्व का विषय है। अमेजोनिया-1 को पूरी तरह से ब्राजील के वैज्ञानिकों ने बनाया और विकसित किया था। इसके लिए हम उन्हें बधाई देते हैं।

Saturday, 20 February 2021

15:27

राजनीति में न आने का ऐलान करने के बाद पहली बार रजनीकांत से मिले कमल हासन

deepak tiwari 
चेन्नई.तमिल फिल्मों के दिग्गज एक्टर और मक्कल निधि मइयम पार्टी के चीफ कमल हासन ने सुपरस्टार रजनीकांत से मुलाकात की। रजनीकांत के राजनीति में न उतरने का ऐलान करने के बाद यह पहला मौका है, जब हासन उनसे मिलने पहुंचे। हासन की पार्टी इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभियान की शुरुआत कर चुकी है। ऐसे में उनकी मुलाकात के कई कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, उनके बीच पॉलिटिक्स को लेकर कोई बात नहीं हुई।
31 दिसंबर को नई पार्टी का ऐलान करने वाले थे
पिछले साल 3 दिसंबर को रजनीकांत ने कहा था कि वे नई पार्टी बनाएंगे और 2021 का विधानसभा चुनाव भी लड़ेंगे। 31 दिसंबर को नई पार्टी का ऐलान होना था।
29 दिसंबर राजनीति में आने से इनकार किया
रजनीकांत (70) ने पिछले साल 29 दिसंबर को खराब सेहत की वजह से चुनावी राजनीति में नहीं आने का फैसला किया था। उन्होंने तमिल में लिखी एक चिट्ठी जारी कर कहा था कि वे चुनाव में उतरे बिना ही लोगों की बाहर से सेवा करेंगे।
कमल हासन से गठबंधन की बात भी कही थी
इससे पहले रजनीकांत ने कमल हासन के साथ गठबंधन करने की बात कही थी। तब रजनीकांत ने कहा था कि राज्य की जनता के हितों को देखते हुए यदि कमल हासन के साथ गठबंधन करने की स्थिति बनती है, तो वे जरूर एक-दूसरे के साथ आएंगे।

Sunday, 30 August 2020

08:47

एशिया का पहला कोरोना लंग्स ट्रांसप्लांट: deepak tiwari

चेन्नई के एक निजी अस्पताल में 48 साल के कोरोना मरीज का डबल लंग ट्रांसप्लांट हुआ। कोरोना संक्रमण की वजह से उसके दोनों फेफड़े बुरी तरह डैमेज हो गए थे। हालत अधिक बिगड़ने पर उसे गाजियाबाद से चेन्नई के एमजीएच हेल्थकेयर अस्पताल ले जाया गया। यहां उसके दोनों फेफड़ों को ट्रांसप्लांट किया गया। यह एशिया का पहला मामला है, जब किसी कोरोना मरीज का लंग ट्रांसप्लांट किए गए।
एमजीएच हेल्थकेयर अस्पताल ने बताया कि मरीज दिल्ली का रहने वाला है। 8 जून को उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उस समय फेफड़े का एक छोटा सा हिस्सा ही काम कर रहा था। कोरोना के संक्रमण के कारण उसके फेफड़े बुरी तरह से डैमेज हो चुके थे। संक्रमण के बाद डेढ़ महीने तक फायब्रोसिस की समस्या से जूझ रहे थे।
दोनों फेफड़े बेहतर काम कर रहे हैं
हॉस्पिटल के चेयरमैन और हॉर्ट-लंग ट्रांसप्लांट प्रोग्राम के हेड डॉ. के आर बालाकृष्णन ने बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की हालत स्थिर है। अब मरीज के दोनों फेफड़े बेहतर काम कर रहे हैं। मरीज को दिया जा रहा इक्मो सपोर्ट भी हटा लिया गया।
हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल पल्मनोलॉजी एंड चेस्ट मेडिसिन के क्लीनिकल डायरेक्टर अपार्थ जिंदल के मुताबिक, कोरोना के ऐसे मरीज जो कोविड निमोनिया से जूझते हैं उनमें वेंटिलेटर सपोर्ट भी बेहतर नतीजे नहीं देता है। ऐसे मामलों में शुरुआत में ही इक्मो सपोर्ट लाइफसेविंग साबित हो सकता है।