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Thursday, 4 March 2021

17:53

ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स:रहने के लिए देश में दूसरा सबसे अच्छा शहर है पुणे tap news

tap news India deepak tiwari 
पुणे. देश में ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स यानी देश में रहने के लिए पुणे देश का दूसरा सबसे अच्छा शहर है। गुरुवार को घोषित ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स में पहले स्थान पर बेंगलुरु को रखा गया है, वहीं टॉप 10 की लिस्ट में महाराष्ट्र के तीन शहर शामिल हैं। इनमें नवी मुंबई छठवें और ग्रेटर मुंबई 10वें स्थान पर है। ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स में 111 शहरों का सर्वे शामिल है। इनमें से 49 शहर 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले (मिलियन प्लस) हैं, जबकि 62 शहर 10 लाख से कम कम आबादी वाले हैं।
सस्टेनेबिलिटी में भी पुणे टॉप पर है। पुणे के बाद विशाखापट्‌टनम, पिंपरी चिंचवाड़, अहमदाबाद और ग्वालियर का नंबर आता है। इस पैकेज में हम आपको बताने जा रहे हैं कि पुणे में ऐसा क्या है जो बनाता है यहां रहने वालों के लिए सबसे खास शहर।
पुणे का सुहाना मौसम: अधिकांश बड़े भारतीय शहरों (बेंगलुरु भी शामिल हैं) में गर्मी के मौसम में तापमान काफी ज्यादा हो जाता है। शहर के आसपास के पहाड़ों और हरियाली की वजह से यहां ग्रीष्मकाल में भी मौसम सामान्य और सुहाना रहता है। सर्दियों में भी यहां उत्तर भारत की तरह कड़ाके की ठंड नहीं पड़ती है।
पुणे IT और ऑटोमोबाइल का सबसे बड़ा हब: पुणे उन भारतीय शहरों में से एक है, जहां IT और ऑटोमोबाइल की लगभग सभी बड़ी कंपनियों के या तो मुख्यालय हैं या फिर यहां R&D सेंटर्स हैं। इसलिए रोजगार के लिहाज से यह सबसे महत्वपूर्ण शहर है। शहर में सभी प्रमुख IT कंपनियां, जैसे TCS, इन्फोसिस, विप्रो, कॉग्निजेंट आदि के ऑफिस यहां हैं।
मुंबई के मुकाबले पुणे में घर किफायती: पुणे महाराष्ट्र का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, मुंबई के नजदीक होने के बावजूद यहां घर खरीदना सस्ता है। यहां की चौड़ी-चौड़ी सड़कें और सिस्टेमेटिक ट्रैफिक भी इस शहर को रहने के हिसाब से सबसे मुफीद बनाते हैं। पुणे में मुंबई की तुलना में किराये पर सस्ते घर मिल जाते हैं। शहर सार्वजनिक परिवहन द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
हॉलिडे डेस्टिनेशंस से निकटता: चाहे आप समुद्र तटों से प्यार करते हों या आपको पहाड़ों की शांति पसंद हो पुणे से आसानी से कुछ घंटों में इन जगहों पर जा सकते हैं। पुणे के आसपास बहुत सारे ट्रैकिंग स्थल है, जहां मानसून के मौसम में भारी भीड़ जमा होती है। पुणे के आसपास महाबलेश्वर, माथेरान, लवासा जैसे हिल स्टेशन और कोंकण, रत्नागिरी जैसे समुद्र तट हैं।
पुणे शिक्षा का एक बड़ा हब: पुणे को 'ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट' कहा जाता है। यहां का फर्ग्युसन कॉलेज, पुणे यूनिवर्सिटी, सिम्बायोसिस कॉलेज पूरी दुनिया में फेमस है। यहां ग्लोबल लेवल के इवेंट्स, समिट्स, कॉन्सर्ट्स और फेस्ट का आयोजन होता है। पुणे को महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है।

Monday, 1 March 2021

18:57

सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी गई तो चाय की होम डिलीवरी शुरू की अब हर महीने दो लाख रुपए कमा रहे

पुणे.tap news India deepak tiwari महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के रहने वाले रेवन शिंदे 12वीं तक पढ़े हैं। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए उन्हें कम उम्र में ही नौकरी के लिए बाहर जाना पड़ा। एक साल पहले तक वे सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। 12 हजार रुपए महीना सैलरी थी। आज वे चाय की होम डिलीवरी का बिजनेस करते हैं। हर दिन एक हजार से ज्यादा उनके पास ऑर्डर आते हैं। इससे हर महीने 2 लाख रुपए से ज्यादा उनकी कमाई हो रही है।
28 साल के शिंदे बताते हैं कि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। पिता जी कारपेंटर थे, इसलिए 12वीं के बाद मुझे नौकरी के लिए पुणे आना पड़ा। 2009 में एक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी मिल गई। सैलरी कम जरूर थी, लेकिन जैसे-तैसे करके परिवार का खर्च चलता था। इस बीच दिसंबर 2019 में कंपनी ने काम बंद कर दिया और मेरी नौकरी चली गई। इसके बाद कई दिनों तक मैं इधर-उधर अप्लाई करता रहा, लेकिन कहीं से पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिला। फिर घर का खर्च चलाने के लिए एक स्नैक्स सेंटर पर काम करने लगा। हालांकि यहां भी आमदनी कम ही हो रही थी।
लॉकडाउन में बंद हो गई दुकान
इसके बाद शिंदे ने खुद का काम शुरू करने का फैसला लिया और पुणे में मार्च 2020 में किराए पर एक रूम लेकर चाय की दुकान खोली, लेकिन मुसीबत ने यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा। अभी दुकान खुले कुछ ही रोज बीते होंगे कि कोरोना की वजह से लॉकडाउन लग गया और उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी। जो कुछ भी सेविंग्स थी, सब दुकान में लग गई थी। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी उनके सामने संकट खड़ा हो गया।
इसके बाद जून में उन्होंने फिर से अपनी दुकान खोलने की कोशिश की। हालांकि तब भी लोग दुकानों पर जाने से बच रहे थे। संक्रमण के डर से लोग ऐसा करते थे। इस मुसीबत से निकलने के लिए उन्होंने चाय पार्सल करने का निर्णय लिया।
मुफ्त में चाय पार्सल करना शुरू किया
शिंदे बताते हैं कि मैंने एक बड़ा-सा थर्मस खरीदा और चाय बनाकर बैंक में काम करने वाले और पास की कुछ बड़ी दुकानों में गर्म चाय लेकर पहुंचाने लगा। शुरुआत में सभी को मुफ्त में ही चाय की पेशकश की, क्योंकि मैं चाहता था कि लोग पहले इसे आजमाएं। इस तरह एक महीने तक मैं मुफ्त में लोगों तक चाय पहुंचाता रहा। इस इनिशिएटिव का उन्हें फायदा भी हुआ।
शिंदे कहते हैं कि जिन लोगों को मैंने चाय पिलाई, उन्हें मेरा काम पसंद आया और वे मुझसे रेगुलर चाय की डिमांड करने लगे। इस तरह धीरे-धीरे मेरे कस्टमर्स बढ़ते गए। और जल्द ही मेरा काम वापस ट्रैक पर आ गया।
शिंदे अभी अदरक और इलायची फ्लेवर में दो तरह की चाय सप्लाई कर रहे हैं। छोटे कप की कीमत 6 रुपए और बड़े कप की कीमत 10 रुपए है। इसके साथ ही वे गर्म दूध की भी होम डिलीवरी करते हैं। रोजाना करीब एक हजार कप चाय वे बेच देते हैं। इससे 7 से 8 हजार रुपए दिन का बिजनेस हो जाता है। डिलीवरी के लिए उन्होंने पांच लड़कों को हायर किया है। वे चाय की डिलीवरी के साथ-साथ चाय बनाने का भी काम करते हैं। इसके लिए शिंदे ने उन्हें स्पेशल ट्रेनिंग दी है।
फोन पर ऑर्डर 10 मिनट में डिलीवरी
शिंदे और उनकी टीम रोज सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक और फिर शाम 3 बजे से शाम 7 बजे तक पिंपरी के आसपास के इलाकों में चाय सप्लाई करती है। वे कई बड़ी कंपनियों में चाय की रेगुलर डिलीवरी करते हैं। कई लोग उनके परमानेंट कस्टमर भी बन गए हैं। इसके साथ ही वे ऑन डिमांड भी चाय की डिलीवरी करते हैं। इसके लिए बस एक फोन कॉल की जरूरत होती है। फोन पर ऑर्डर मिलने के 10 मिनट के भीतर उनके आदमी चाय की डिलीवरी कर देते हैं। इसके लिए उन्होंने एक वॉट्सऐप ग्रुप भी बनाया है। अपने फोन नंबर्स उन्होंने सभी प्रमुख जगहों पर सर्कुलेट कर दिया है। ताकि जिसे जरूरत हो, वो ऑर्डर कर सके।
आगे हर दिन दो लाख ऑर्डर का है टारगेट
शिंदे कहते हैं कि लोग हमारे काम को पसंद कर रहे हैं। हर दिन डिमांड भी बढ़ती जा रही है, इसलिए अब हम अपने काम का दायरा बढ़ाना चाहते हैं। जल्द ही हम सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाले हैं। इसको लेकर मेरी टीम लगातार काम कर रही है। हमारी कोशिश है कि हम दो लाख लोगों तक पहुंचे। जरूरत पड़ने पर टीम और चाय की वैरायटी भी हम बढ़ाएंगे।

Sunday, 21 February 2021

17:19

तीन बेटियों समेत माता-पिता की नदी में डूबने से गई जान, कपड़ा धोने के दौरान हुआ हादसा

 deepak tiwari 
पुणे.पुणे के मुलशी तहसील में रविवार सुबह नदी में कपड़ा धोने के दौरान तीन बच्चों समेत मां-बाप की डूबने से मौत हो गई। घटना सुबह 11 बजे की है। बताया जा रहा है कि कोलवन गांव के पास एक नदी में माता-पिता अपने बच्चों को लेकर कपड़े धोने गए थे। इसी दौरान पांचों नदी में डूब गए। उधर, इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। घटनास्थल पर रेस्क्यू टीम के साथ पहुंची पुलिस ने पांचों शव बरामद कर लिया है।
मृतकों की पहचान शंकर दशरथ लायगुडे (उम्र 38), पूर्णिमा शंकर लायगुडे (36), अर्पिता शंकर लायगुडे ( 20), राजश्री शंकर लायगुडे (13), आणि अंकिता शंकर लायगुडे (12) के रूप में हुई है। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने पांचों शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कार्रवाई में जुट गई है। बताया जा रहा है कि महिला और उसका पति कपड़े धोने का काम करते थे। आशंका जताई जा रही है कि मां-पिता कपड़े धो रहे थे, इसी दौरान बच्चे नहाते-नहाते गहरे पानी में चले गए। उन्हें बचाने में माता-पिता की भी मौत हो गई।

Monday, 2 November 2020

21:45

deepak tiwari सेना में भर्ती कराने के नाम पर 17 लोगों से एक-एक लाख रुपए लिए क्लर्क समेत तीन हुए गिरफ्तार

पुणे.पुणे में एक फर्जी सेना भर्ती रैकेट का भंडाफोड़ कर तीन लोगों को पुणे क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और मिलिट्री इंटेलीजेंस की टीम ने गिरफ्तार किया है। रविवार को एआईपीटी मैदान में कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE) से पहले इन 3 आरोपियों को पकड़ा गया। रविवार को गिरफ्तार इन आरोपियों को पुलिस कस्टडी के लिए सोमवार को शिवाजीनगर कोर्ट में पेश किया जाएगा। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जयदेव सिंह परिहार (क्लर्क), वेल सिंह रावत और रविंद्र राठौड़ के रूप में हुई है।
एग्जाम के लिए 17 लोगों से लिए गए 1-1 लाख रुपए
बीड में फिजिकल टेस्ट को पास कर चुके 17 उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि वे रिटायर्ड क्लर्क द्वारा गुमराह किए गए थे कि उन सभी को भारतीय सेना में भर्ती किया जाएगा। इसके बदले में हर एक से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की रकम मांगी गई थी। उन्हें आश्वासन दिया गया था कि सेना के वरिष्ठ अधिकारी उनकी लिखित परीक्षा को पास करने में उनकी मदद करेंगे।
ऐसे हुई तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी
इसके बाद पुणे क्राइम ब्रांच पुलिस यूनिट-2 और 5 अधिकारियों ने 3 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। डीसीपी बच्चन सिंह से मिली जानकारी के अनुसार सभी 17 जवान मराठवाड़ा क्षेत्र के हैं और उन्हें भारतीय सेना में जवान के रूप में भर्ती कराने का वादा किया गया था। इसमें सबसे पहले राजस्थान के अजमेर के रहने वाले एक दलाल वेल सिंह को अज्ञात स्थान से शनिवार की रात को पकड़ा गया था। बाद में उसके सहयोगी और एक सेवारत सैन्य कर्मी नॉन कमीशंड ऑफिसर क्लर्क जयदेव सिंह परिहार को पुणे क्राइम ब्रांच ने पकड़ा।

Friday, 30 October 2020

03:33

पुणे में नवजात की हत्या की कोशिश :deepak tiwari

पुणे.पुणे में गुरुवार को किसानों ने एक नवजात को बचाया, जिसे दो लोग जिंदा ही गाड़ने की कोशिश कर रहे थे। आरोपी बच्चे को आधा जमीन में गाड़ भी चुके थे, लेकिन बच्चा रोने लगा। रोना सुनकर किसान वहां पहुंचे और आरोपियों को पकड़ लिया। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी किसानों को धक्का देकर फरार हो गए।
नवजात को सिविल हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। डॉक्टर्स के मुताबिक, उसकी तबीयत फिलहाल ठीक है। बच्चे को आरोपी साड़ी में लपेटकर लाए थे।
किसान ने कहा- कुछ सेकंड की देरी होती तो दफन हो जाता बच्चा
घटना पुणे के पुरंदर के अंबोड़ी इलाके की है। प्रकाश पांडुरंग नाम के किसान ने बताया कि दोनों आरोपी बच्चे को आधा गाड़ चुके थे और अगर कुछ सेकंड की देरी होती तो वह उसे पूरी तरह दफन कर देते। मिट्टी में दबने के कारण वह तेज आवाज में चीख रहा था।
सासवड़ पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर डीएस हाके ने बताया- हमें फोन से घटना की जानकारी मिली और हमने एक टीम को मौके पर भेजा। बच्चे की पहचान नहीं हो सकी है। आरोपी बाइक से आए थे। आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरे जब्त कर लिए गए हैं। उनके जरिए बाइक का नंबर ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।
वाखड़ में भी कूड़े के ढेर में मिली थी बच्ची
एक दिन पहले पुणे के वाखड़ इलाके में एक चौराहे के पास कूड़े के ढेर में एक दिन की बच्ची बिलखती हुई मिली थी। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उसे देखा और पुलिस को इसकी सूचना दे दी। फिलहाल बच्ची का पुणे के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज जारी है।

Wednesday, 9 September 2020

01:25

पुणे में कोरोना का कहर जारी :deepak tiwari

पुणे.पुणे देश का ऐसा एक मात्र ऐसा शहर है जहां तकरीबन 1 लाख 90 हजार कोरोना पॉजिटिव पेशेंट हैं। महानगर पालिका (पीएमसी) की और से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पुणे के कुल आबादी के 11 प्रतिशत लोग यानी तकरीबन 5.25 लाख लोग 75 कंटेनमेंट जोन में रहते हैं। पीएमसी की और से इन इलाकों का एक मैप भी किया है। बता दें कि कुछ दिनों पहले केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा था कि पुणे में महामारी रोकने के लिए कंटेनमेंट जोन को बढ़ाया जाएगा।
महामारी के इतने प्रसार के बावजूद लोग सोशल डिस्टेंसिंग के नियम तोड़ते हुए नजर आ रहे हैं। कई जगह बच्चे और बुजुर्ग भी बाहर घूमते नजर आये हैं। पीएमसी कमिश्नर विक्रम कुमार ने भी माना कि प्रतिबंधों को कड़ा करने और उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की तत्काल आवश्यकता है जो नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लॉकडाउन को छह महीने का समय हो चुका है और उन्हें स्थायी रूप से प्रतिबंधों के तहत नहीं रखा जा सकता है।
पुणे में पिछले 24 घंटों में सामने आये 4575 नए केस
पुणे में पिछले 24 घंटे में चार हजार से अधिक नए मामले सामने आए हैं और 80 लोगों की मौत हो गई है। कुल मरीजों का आंकड़ा 1 लाख 93 हजार को पार कर गया है, जिसमें 4575 लोगों की मौत हो चुकी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) चीफ शरद पवार मैदान में उतर गए हैं और अधिकारियों की समीक्षा बैठक कर रहे हैं। शरद पवार ने कहा कि पुणे में 25 से 30 फीसदी लोग सार्वजनिक रूप से मास्क नहीं पहन रहे और सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं।
01:21

पद्मश्री से सम्मानित इस खगोलशास्त्री का निधन:deepak

पुणे.रेडियो खगोलशास्त्री गोविंद स्वरूप का सोमवार रात 91 साल की उम्र में पुणे के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। राष्ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केंद्र (एनसीआरए) ने उनके निधन की पुष्टि की है। एनसीआरए ने कहा, 'हम बेहद भारी मन से यह घोषणा करते हैं कि हमारे विख्यात वैज्ञानिक एवं महान रेडियो खगोलशास्त्री प्रोफेसर गोविंद स्वरूप का सोमवार की रात नौ बजे निधन हो गया।'
दुनिया के सबसे बड़े टेलिस्कोप को पुणे में स्थापित किया
गोविंद स्‍वरूप ने पुणे के पास दुनिया के सबसे बड़े टेलिस्कोप में से एक 'जॉइंट मीटर वेव रेडियो टेलिस्कोप' को स्थापित किया था। उन्‍होंने उटी में एक बड़े रेडियो टेलिस्कोप की भी स्थापना की थी। भारत रेडियो खगोलशास्त्र के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए सरकार ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा था। इसके अलावा भटनागर अवॉर्ड और ग्रोट रेबर मेडल भी उन्हें मिला था।
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से की थी पढ़ाई
स्‍वरूप का जन्‍म 1929 में ठाकुरवाड़ा में हुआ था। वे 1950 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमएससी करने के बाद 1961 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी करने गए थे। इसके बाद वह 1963 में भारत लौटे। लौटने के बाद उन्‍होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च जॉइन किया। उन्‍हें इसका आमंत्रण होमी भाभा ने दिया था। यहां उन्‍होंने एक रेडियो एस्ट्रोनॉमी ग्रुप बनाया। जो आज भी मौजूद है।

Sunday, 6 September 2020

17:45

कोरोनाकाल में अमानवीयता की एक और दुःखद घटना आई सामने :deepak tiwari

इंदौर.कोरोना काल में अमानवीयता का एक और उदाहरण देखने को मिला है। शनिवार तड़के महिला वकील अचला जोशी को हार्ट अटैक आया। परिजन उन्हें लेकर भटकते रहे। एक अस्पताल ने बेड नहीं होने पर भर्ती करने से इनकार कर दिया तो दूसरे ने मिन्नतों के बाद स्ट्रेचर पर ही ऑक्सीजन लगाई। समय पर इलाज नहीं मिल पाने से उनकी मौत हो गई। भाई अरविंद जोशी के अनुसार, अचला को रात दो बजे बेचैनी होने लगी। खासी और पसीना आने लगा। घबराहट बढ़ने पर सवा छह बजे बॉम्बे हॉस्पिटल लेकर पहुंचे तो स्टाफ ने बेड नहीं होने का हवाला देकर भर्ती करने से मना कर दिया। पौने सात बजे अरबिंदो पहुंचे तो वहां भी यही स्थिति थी। मैंने स्टाफ से कहा कि बेड न मिले तो कम से कम स्ट्रेचर पर लेकर ऑक्सीजन सपोर्ट ही दे दें। भर्ती नहीं किया, लेकिन सवा सात बजे ऑक्सीजन लगा दी। 8 बजे अचला ने दम तोड़ दिया। बॉम्बे हॉस्पिटल के जीएम राहुल पाराशर का कहना है कि बेड उपलब्ध होने पर किसी को मना नहीं करते हैं, सबका उपचार करते हैं।
वफादारी महंगी है, सस्ते लोगों से उम्मीद न करें
जोशी की पहचान महिला हक के लिए लड़ने वाली वकील की थी। जो हुआ संयोग से सोशल मीडिया पर आखिरी संदेश से जुड़ता है। उन्होंने लिखा था वफादारी महंगी है, सस्ते लोगों से उम्मीद न करें।
बार एसो. ने जिला जज को लिखा पत्र
इंदौर अभिभाषक संघ सचिव कपिल बिरथरे के मुताबिक, अस्पताल ने प्राथमिक उपचार भी नहीं दिया। हमने जिला व सत्र न्यायाधीश को अस्पतालों पर कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
हार्ट अटैक के बाद के एक-दो घंटे महत्वपूर्ण
कार्डियोलॉजी एसो. के अध्यक्ष डॉ. जीसी गुप्ता के अनुसार, हार्ट अटैक के बाद एक-दो घंटे अहम होते हैं। मरीज की जान बचाने के लिए जितना जल्दी हो अस्पताल पहुंच उपचार शुरू कराना चाहिए।
17:40

168 दिन बाद अनलॉक रविवार को, होटल पर निकल रही थी गरमा-गरम रोटी, सड़क किनारे बैठे दुकानवाले ग्राहकों को बुला रहे थे deepak tiwari

इंदौर.22 मार्च के बाद पहली बार रविवार को बाजार ने पुराने दिनों की याद ताजा कर दी। होटल में निकलती गरमा-गरम रोटी, चौराहे पर कपड़े और जूते वालों की लगी छोटी दुकानें और वहां से आ रही, रेट के साथ कपड़े ले लो की आवाज.. ठेले पर पानी-पूरी में मिर्ची थोड़ी और तेज करने का कहते ग्राहक। गाड़ी पर आगे बैठी बच्ची का रोते हुए पापा से खिलौने दिलाने की जिद। यह सब नजर आया रविवार का लॉकडाउन खुलने से। सुबह से ही लोग परिवार के साथ बाजार में तफरी करने निकले। क्या राजबाड़ा, क्या 56 दुकान सब जगह पर लोग नजर आए। हालांकि उम्मीद के अनुरूप तो लोग नजर नहीं आए, लेकिन संख्या इतनी कम भी नहीं थी। रविवार का दिन होने से लोगों ने परिवार के साथ चटपटा खाने के साथ ही खरीदारी भी की।
होटल पर निकलती गरमा-गरम रोटी।
होटल पर खाना खाने पहुंचे नितेश का कहना है कि रविवार को अनलॉक से बहुत राहत मिली है। हालांकि संक्रमण के कारण लॉकडाउन का निर्णय सही था, लेकिन कोरोना के बीच ही जब हमें जीना है तो फिर कब तक इससे डरेंगे। इसका एक ही इलाज है सुरक्षा। शासन प्रशासन ने जो गाडड लाइन जारी की है, उसका यदि सही तरीके से पालन कर लें तो हम इस बीमारी से बच सकते हैं। जरूरी हो तो ही घरों से बाहर निकलें। भीड़ वाली जगह पर जाने से बचें।
राजबाड़ा किनारे लगी दुकानें।
व्यापारियों ने कहा कि अनलॉक से हमें फायदा तो है, लेकिन संक्रमण के कारण हमें दो-तीन रविवार यह देखना होगा कि संक्रमण का असर कितना हो रहा है। यदि संक्रमण बढ़ता है तो हम व्यापारी प्रशासन कहता है तो अपने प्रतिष्ठानों को रविवार को बंद रखने को तैयार हैं। मैं लोगों ने यही अपील करूंगा कि कम से कम लोग घरों से बाहर निकले। यदि उन्हें कुछ खाना ही है तो ऑनलाइन ऑर्डर कर लें या फिर एक व्यक्ति आकर पार्सल लेकर चला जाए। भीड़ बढ़ाने से अच्छा है कि विकल्प पर ध्यान देना चाहिए।
राजबाड़ा पर खरीदारी करने पहुंचे लोग।
परिवार के साथ राजबाड़ा कपड़ा खरीदने पहुंचे राजेश ने बताया कि सप्ताह में छह दिन ऑफिस के काम में लगा रहता हूं। रविवार को लॉकडाउन के कारण घर पर। ऐसे में जरूरी सामान लेने के लिए समय ही नहीं मिल पा रहा था। आज खुल है तो सामान खरीदने निकल आए। शाम को भीड़ बढ़ जाएगी, इसलिए दोपहर में ही खरीदी करना उचित समझा।
परिवार के साथ लोग खरीदारी करने निकले।
व्यापारी सत्यनारायण शर्मा ने बताया कि अनलॉक के बाद बहुत फर्क पड़ा है। बिजनेस बढ़ेगा। लोग अब खुलकर खरीदी करेंगे। रविवार को जो लोग घर बैठे रहते थे। वे अब घर के बाहर निकलेंगे और खाने-पीने के साथ ही खरीदारी भी करेंगे। अरुण जी का कहना है कि अनलॉक से ही सबका फायदा है। इससे व्यापार बढ़ेगा तो शहर विकास की गति तेज होगी। हां लोगांे को अनलॉक का गलत फायदा नहीं उठाना चाहिए। लापरवाही की बजाय सचेत रहें और ज्यादा से ज्यादा बाहर के खाने को अवाइड करें।
56 दुकान पर लोग पकवान चखने पहुंचे।
सड़क किनारे लगी चप्पल-जूते की दुकान।
उम्मीद के अनुसार भीड़ नजर नहीं आई।
मिठाई की दुकान पर भी लोग पहुंचे।
छप्पन के दुकानदार बाेले- अब बढ़ेगी ग्राहकी।
17:38

पुणे में बढ़ते कोरोना संक्रमण पर सरकार का फैसला:deepak tiwari

पुणे.पुणे में कोरोना के प्रकोप को कम करने के लिए सरकार ने एक्शन प्लान तैयार किया है। इसके तहत अब शहर में सार्वजनिक स्थानों पर थूकने और मास्क नहीं पहनने पर 500 से 1000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार, डिप्टी सीएम अजित पवार और स्वास्थ्यमंत्री राजेश टोपे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मीटिंग कर यह फैसला लिया है।
जावड़ेकर ने कहा कि शहर के कैंटोनमेंट जोन में एंटीजेन टेस्ट की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा एंटीबॉडी वाले लोगों की पहचान करने के लिए शहर में बड़े पैमाने पर सीरो सर्वे कराया जाएगा। सरकार का यह फैसला तब सामने आया है, जब शहर में तीन दिन पहले एक वरिष्ठ टीवी पत्रकार और पूर्व मेयर की कोरोना से मौत हो चुकी है। दोनों ही मामलों में परिवार ने समय पर एम्बुलेंस और बेड नहीं मिलने के आरोप लगाए थे।
जंबो कोविड अस्पताल के अंदर लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार ने बताया कि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के जरिए हमने केंद्र से कहा है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सरकार को 50-50 के अनुपात में ऑक्सीजन सिलेंडर प्रदान किए जाएं। इसके साथ ही राज्य सरकार ने अधिकारियों से जंबो कोविड अस्पताल के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाने और अस्पताल के बाहर एक टीवी लगाने के निर्देश दिए हैं, ताकि मरीजों के परिजन कम से कम अपने मरीजों को टीवी के माध्यम से देख सकें।
विधानसभा सत्र के शुरू होने के मुद्दे पर पवार ने कहा, 'सात सितंबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के लिए, हमने सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग और कोविड-19 के रोकथाम के लिए काम करने वाले डिपो से उनकी जरूरतों का पता लगाया है और इस सत्र में इस पर चर्चा करेंगे। सत्र में भाग लेने वाले सभी लोगों को कोरोना टेस्ट करवाना होगा।'
अस्पतालों के बिलों का प्री-ऑडिट किया जाए: राजेश टोपे
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा, 'आज, मैंने विशेष रूप से अस्पतालों को निर्देश दिया है कि अस्पताल के बिलों का प्री-ऑडिट किया जाना चाहिए। रोगी को दिए जाने से पहले प्रत्येक बिल को पहले एक ऑडिटर द्वारा ऑडिट किया जाना चाहिए। किसी मरीज की मौत के कारण का पता लगाने के लिए डेथ ऑडिट किया जाना चाहिए।'
दिल्ली से भी आगे निकला पुणे
आपको बता दें कि लगातार बढ़ रहे कोरोना वायरस के मामलों के बीच महाराष्ट्र का पुणे शहर एक्टिव संक्रमित मरीजों की संख्या में दिल्ली से भी आगे निकल गया है। कोरोना वायरस का पहला केस मिलने के बाद से ही पुणे प्रशासन लगातार इस महामारी को रोकने में जुटा हुआ है, लेकिन संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी नहीं आ रही है।
मास्क नहीं लगाने से बढ़ने लगे हैं कोविड केस
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक गतिविधियों के खुलने, जांच बढ़ने और लोगों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने से कोरोना के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। अकेले दिल्ली में पिछले चार दिन से लगातार कोविड-19 के 2,000 से ज्यादा नये मामले सामने आ रहे हैं। शुक्रवार को 2,914 मामले आये थे।

Friday, 4 September 2020

08:06

पुणे में पूर्व मेयर की कोरोना से मौत:deepak tiwari

पुणे.1 लाख 75 हजार से ज्यादा मरीजों के साथ पुणे में कोरोना की स्थिति भयावह होती जा रही है। यहां अब तक 4 हजार 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। एम्बुलेंस की कमी से बुधवार को हुई एक टीवी पत्रकार की मौत के 24 घंटे के भीतर पुणे महानगरपालिका के पूर्व मेयर दत्तात्रेय गोविंद उर्फ दत्ता एकबोटे की भी संक्रमण से मौत हो गई। गुरुवार तड़के उन्होंने पुणे के ससून हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। दत्ता एकबोटे के परिवार का कहना है कि उन्हें भी बेड के लिए कई हॉस्पिटल के चक्कर काटने पड़े।
एकबोटे अपने पीछे इस दुनिया में पत्नी, दो बेटियां और एक पोते को छोड़ गए हैं। समाजवादी विचारक दत्तात्रेय गोविंद उर्फ दत्ता एकबोटे गरीबों के नेता माने जाते थे। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में राज्य उपाध्यक्ष के रूप में काम चुके थे। गरीबों के अधिकार के लिए हुए कुछ आंदोलनों में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।
बेड नहीं मिलने से भटकता रहा परिवार
कुछ दिनों पहले दत्ता एकबोटे की बड़ी बेटी और सबसे छोटे बेटे की भी कोविड की वजह से मृत्यु हो गई थी। 84 वर्षीय एकबोटे को जैसे ही पता चला कि वे कोरोना संक्रमित हैं उन्होंने अपने लिए हॉस्पिटल तलाशना शुरू किया, लेकिन पुणे के सभी प्राइवेट और सरकारी हॉस्पिटल ने बेड खाली नहीं होने की बात कहते हुए उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया गया। आखिरकार उन्हें पुणे के ससून जनरल हॉस्पिटल में एक बेड मिला और यहां उन्हें इलाज के लिए भर्ती करवाया गया।
इलाज के लिए अजित पवार से मांगी गई मदद
परिवार का आरोप है कि उन्हें समय पर सही ट्रीटमेंट नहीं दिया गया। उनके लिए पूर्व पार्षद मीनाक्षी कडगी ने पुणे के सांसद गिरीश महाजन और अजित पवार से बात की और दोनों के निर्देशों के बाद उनका सही ढंग से इलाज शुरू हुआ। हालांकि, तब तक देर हो चुकी थी और उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उन्होंने तड़के 2 से 3 के बीच दम तोड़ दिया।
अंतिम संस्कार के लिए तीन श्मशान में भटकता रहा परिवार
मरने के बाद भी शव को लेकर परिवार को दो कब्रिस्तान में भटकना पड़ा। परिवार पहले उन्हें लेकर कैलाश श्मशान में गया, जहां जगह मिलने के कारण पहले उन्हें यरवडा और फिर कोरेगांव पार्क श्मशान ले जाना पड़ा। यहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।
शरद पवार ने अचानक किया पिंपरी चिंचवाड़ का दौरा
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार आज पिंपरी चिंचवाड़ महानगर पालिका पहुंचे। पवार ने यहां कोरोना के लिए बने वॉर रूम का जायजा लिया और निगम अधिकारियों से कोरोना के संबंध में बात की। पालिका आयुक्त श्रावण हार्डीकर ने शहर में कोरोना की स्थित और उससे निपटने के लिए उठाये कदम की जानकारी दी।
पुणे निगम के पास नहीं है फंड की कमी: मेयर मुरलीधर
बता दें कि पुणे में कई करोड़ रुपए लगाकर तीन जंबो कोविड सेंटर का निर्माण किया गया है। इसके बावजूद लोग बेड की कमी से जूझ रहे हैं। इन दो मौतों ने प्रशासन के इंतजाम की पोल खोल दी है। इस बीच गुरुवार को पुणे के मेयर मुरलीधर मोहोल ने कहा कि पुणे में एक लाख से जायदा कोरोना मरीज हैं। हमारा फोकस ऑक्सीजन बेड और वेंटीलेटर की संख्या को बढ़ाना है। हम लगातार स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती कर रहे हैं। निगम के पास फंड की कोई कमी नहीं है। पुणे महानगरपालिका अब तक 300 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है।
पुणे संभाग में 2 लाख 44 हजार से ज्यादा संक्रमित मरीज
बुधवार को पुणे संभाग (पुणे, सातारा, सांगली, सोलापुर, कोल्हापुर जिलों) में संक्रमितों की संख्या 2 लाख 44 हजार 499 तक पहुंच गई है। हालांकि उनमें से 1 लाख 80 हजार 345 मरीजों ने महामारी को मात दी है। पुणे के संभागीय आयुक्त सौरभ राव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गत 24 घंटे के भीतर महामारी के 6563 नए मरीज मिले हैं। इसमें अकेले पुणे जिले के 3433 नए मरीज शामिल हैं।
फिलहाल पूरे संभाग में 57 हजार 632 मरीजों का इलाज जारी है। अब तक 6522 मरीजों की मौत हुई है। पुणे संभाग में आज तक कुल 11 लाख 59 हजार 411 मरीजों की कोविड टेस्ट की गई, जिसमें से 2 लाख 44 हजार 499 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है।