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Sunday, 3 May 2020

08:56

3 मई बहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रमोद महाजन जी की पुण्यतिथि पर विशेष-के सी शर्मा


प्रमोद महाजन को अनेक गुणों के कारण सदा याद किया जाता रहेगा। भारतीय राजनीति में आधुनिकता और परम्परा के अद्भुत समन्वयक, राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रबल आग्रही, प्रभावी वक्ता, कुशल संगठक, प्रबन्धन के विशेषज्ञ, प्रयोगधर्मी, गठबन्धन राजनीति के आधार स्तम्भ और सबसे बड़ी बात एक बड़े मन वाले व्यक्ति। उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नयी दिशा दी, यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा।

प्रमोद महाजन का जन्म 30 अक्तूबर, 1949 को महबूबनगर (महाराष्ट्र) में हुआ था। वे बचपन में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आ गये थे। राजनीति शास्त्र में एम.ए. करने के बाद वे कुछ वर्ष अध्यापक और फिर संघ के प्रचारक भी रहे। इससे पूर्व उन पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का भी काम रहा। इसके बाद वे जनसंघ से जुड़े और अपने प्रभावी व्यक्तित्व और संघर्षशील छवि के कारण शीघ्र ही जनसंघ में लोकप्रिय हो गये।

1975 में जब इन्दिरा गान्धी ने देश में आपातकाल लगाया, तो प्रमोद जी ने इसके विरोध में हुए आन्दोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। चुनाव के बाद जनता पार्टी का गठन हुआ, तो वे महाराष्ट्र प्रदेश जनता पार्टी के महासचिव बनाये गये। जब जनता पार्टी के कुछ नेताओं की जिद पर संघ का नाम लेकर विवाद खड़ा किया गया, तो जनसंघ के लोगों ने भारतीय जनता पार्टी के नाम से नया दल बना लिया। प्रमोद जी भी उनमें से एक थे।

भाजपा में भी उन्होंने अनेक महत्त्वपूर्ण दायित्वों पर काम किया। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने पूरे देश में प्रवास किया, इससे उन्हें राष्ट्रीय राजनीति को समझने का अवसर मिला। वे 10 साल तक भाजपा के राष्ट्रीय महामन्त्री रहे। इस दौरान उन्होंने कटक से अटक और कश्मीर से कन्याकुमारी तक समाज के सभी वर्गों को भाजपा से जोड़ा। भाजपा को राष्ट्रीय मान्यता दिलाने में प्रमोद जी का योगदान अविस्मरणीय है।

1986 से 2004 तक वे राज्यसभा के सदस्य रहे। 2004 में अटल जी के नेतृत्व में बनी गठबन्धन सरकार में वे रक्षा मन्त्री बने; पर वह सरकार 13 दिन ही चल सकी। 11 वीं लोकसभा के लिए वे मुम्बई से निर्वाचित हुए। इस बार उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी मन्त्री का काम मिला। इस पद पर रहते हुए उन्होंने स॰चार तन्त्र के विस्तार में बड़ी भूमिका निभायी। इसके अतिरिक्त वे प्रधानमन्त्री के राजनीतिक सलाहकार तथा संसदीय कार्यमन्त्री भी रहे।

प्रमोद जी को समाचार जगत के लोग भी खूब पसन्द करते थे; क्योंकि वे साफ और स्पष्ट टिप्पणी करते थे। आडवाणी जी ने जब श्रीराम मन्दिर के लिए सोमनाथ से अयोध्या की रथयात्रा निकाली, तो उसके सूत्रधार प्रमोद जी ही थे। चुनाव प्रबन्धन में तो उन्हें महारत प्राप्त थी। जब किसी राज्य में चुनाव के समय उन्हें प्रभारी बनाया जाता था, तो विरोधी दल सचेत हो जाते थे। प्रमोद जी के संगणक (कम्प्यूटर) में ताजा आँकड़े भरे रहते थे और उसके आधार पर किये गये विश्लेषण की धाक समर्थक और विरोधी भी मानते थे।

ऐसे निश्छल हृदय वाले प्रमोद जी को उनके छोटे भाई प्रवीण महाजन ने 22 अपै्रल को उनके घर में ही गोली मार दी। 11 दिन तक जीवन-मृत्यु से संघर्ष करते हुए तीन मई, 2006 को उन्होंने इस असार संसार को छोड़ दिया। प्रमोद जी के असमय जाने से भारतीय राजनीति में असीम सम्भावनाओं का भी अन्त हो गया।

Thursday, 23 April 2020

05:34

गंगापुर के समाजसेवी दीपक नरूका ने उपखंड प्रशासन की मांग पर मरीजों के लिए उपलब्ध कराई बसें



सवाई माधोपुर/गंगापुर सिटी@रिपोर्ट चंद्रशेखर शर्मा।। सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर शहर में कोरोना संक्रमितों की उपस्थिति के बाद से ही प्रशासन की नींद उड़ी हुई है। मंगलवार को शारदे छात्रावास में क्वारेंटाइन में रहे मरीजों को छान स्थित आवासीय छात्रावास में शिफ्ट करना था, इसके लिए प्रशासन को बसों की आवश्यकता महसूस हुई। प्रशासन ने प्राइवेट बस ऑपरेटर्स यूनियन अध्यक्ष एवं समाजसेवी दीपक सिंह नरूका से बसें उपलब्ध कराने का आग्रह किया। इस पर नरूका ने तुरन्त अपनी ओर से दो बसों की व्यवस्था की। साथ ही नरूका ने दोनों बसों को सेडियम हाइपो क्लोराइट से सेनेटाइज भी कराया। शारदे छात्रावास में से 39 क्वारेंटाइन हुए मरीजों को सीधे बस द्वारा छान स्थित आवासीय छात्रावास के लिए भेज दिया।
भामाशाह दीपक नरूका ने हर संभव सहयोग के लिए प्रशासन को पूर्ण आश्वास्त किया है। प्रशासन की ओर से तहसीलदार ज्ञानचंद जैमन, परिवहन उप निरीक्षक यादराम दायमा, थानाधिकारी दिग्विजय सिंह ने भी अध्यक्ष नरूका का आभार जताया।

Saturday, 9 November 2019

09:17

नीरा आर्य स्वाधीनता संग्राम की मार्मिक कथा हमारे रियल हीरो




नीरा आर्य (१९०२ - १९९८) की संघर्ष पूर्ण जीवनी
नीरा आर्य का विवाह ब्रिटिश भारत में सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के साथ हुआ था।नीरा ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अंग्रेजी सेना में अपने अफसर पति श्रीकांत जयरंजन दास की हत्या कर दी थी।

नीरा ने अपनी एक आत्मकथा भी लिखी है।इस आत्म कथा का एक ह्रदयद्रावक अंश प्रस्तुत है-
५,मार्च-१९०२ को तत्कालीन संयुक्त प्रांत के खेकड़ा नगर में एक प्रतिष्ठित व्यापारी सेठ छज्जूमल के घर जन्मी नीरा आर्य आजाद हिन्द फौज में रानी झांसी रेजिमेंट की सिपाही थीं,जिन पर अंग्रेजी सरकार ने गुप्तचर होने का आरोप भी लगाया था।

इन्हें नीरा ​नागिनी के नाम से भी जाना जाता है।इनके भाई बसंत कुमार भी आजाद हिन्द फौज में थे।इनके पिता सेठ छज्जूमल अपने समय के एक प्रतिष्ठित व्यापारी थे, जिनका व्यापार देशभर में फैला हुआ था।विशेषकर कलकत्ता में इनके पिताजी के व्यापार का मुख्य केंद्र था, इसलिए इनकी शिक्षा-दीक्षा कलकत्ता में ही हुई।

नीरा नागिन और इनके भाई बसंत कुमार के जीवन पर कई लोक गायकों ने काव्य संग्रह एवं भजन भी लिखे।१९९८ में इनका निधन हैदराबाद में हुआ।

नीरा आर्य का विवाह ब्रिटिश भारत में सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के साथ हुआ था।
नीरा ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अंग्रेजी सेना में अपने अफसर पति श्रीकांत जयरंजन दास की हत्या कर दी थी।

आजाद हिन्द फौज के समर्पण के बाद जब लाल किले में मुकदमा चला,तो सभी बंदी सैनिकों को छोड़ दिया गया; लेकिन इन्हें पति की हत्या के आरोप में काले पानी की सजा हुई थी,जहां इन्हें घोर यातनाएं दी गई।

स्वतंत्रता के पश्चात इन्होंने फूल बेचकर जीवन यापन किया,लेकिन कोई भी सरकारी सहायता या पेंशन स्वीकार नहीं की।

नीरा ने अपनी एक आत्मकथा भी लिखी है।इस आत्म कथा का एक ह्रदयद्रावक अंश प्रस्तुत है-
‘‘मैं जब कोलकाता जेल से अंडमान पहुंची,तो हमारे रहने का स्थान वे ही कोठरियाँ थीं,जिनमें अन्य महिला राजनैतिक अपराधी रही थी अथवा रहती थी।

 हमें रात्रि के १९ बजे कोठरियों में बंद कर दिया गया और चटाई,कंबल आदि का नाम भी नहीं सुनाई पड़ा।मन में चिंता होती थी कि इस गहरे समुद्र में अज्ञात द्वीप में रहते स्वतंत्रता कैसे मिलेगी,जहाँ अभी तो ओढ़ने बिछाने का ध्यान छोड़ने की आवश्यकता आ पड़ी है?
 जैसे-तैसे जमीन पर ही लोट लगाई और नींद भी आ गई। अनुमानतः १२ बजे एक पहरेदार दो कम्बल लेकर आया और बिना बोले-चाले ही ऊपर फेंककर चला गया।कंबलों का गिरना और नींद का टूटना भी एक साथ ही हुआ।बुरा तो लगा,परन्तु कंबलों को पाकर संतोष भी आ ही गया।

अब केवल वही एक लोहे के बंधन का कष्ट और रह-रह कर भारत माता से जुदा होने का ध्यान साथ में था।

‘‘सूर्य निकलते ही मुझको खिचड़ी मिली और लुहार भी आ गया।हाथ की सांकल काटते समय थोड़ा-सा चमड़ा भी काटा,परंतु पैरों में से आड़ी बेड़ी काटते समय,केवल दो-तीन बार हथौड़ी से पैरों की हड्डी को जाँचा कि कितनी पुष्ट है।

मैंने एक बार दुःखी होकर कहा,‘‘क्याअंधा है,जो पैर में मारता है?’’‘
पैर क्या हम तो दिल में भी मार देंगे,क्या कर लोगी?’’
उसने मुझे कहा था।‘‘बंधन में हूँ तुम्हारे कर भी क्या सकती हूँ...’’
फिर मैंने उनके ऊपर थूक दिया था,"औरतों की इज्जत करना सीखो?’’

जेलर भी साथ थे,तो उसने कड़क आवाज में कहा,"‘तुम्हें छोड़ दिया जाएगा,यदि तुम बता दोगी कि तुम्हारे नेताजी सुभाष कहाँ हैं?’’

‘‘वे तो हवाई दुर्घटना में चल बसे,’’मैंने जवाब दिया,‘‘सारी दुनिया जानती है।’’

‘‘नेताजी जिंदा हैं....झूठ बोलती हो तुम कि वे हवाई दुर्घटना में मर गए?’’जेलर ने कहा।
‘‘हाँ नेताजी जिंदा हैं।’’

‘‘तो कहाँ हैं...।’’

‘‘मेरे दिल में जिंदा हैं वे।’’
जैसे ही मैंने कहा तो जेलर को गुस्सा आ गया था और बोले,‘‘तो तुम्हारे दिल से हम नेताजी को निकाल देंगे’’ और फिर उन्होंने मेरे आँचल पर ही हाथ डाल दिया और मेरी आँगी को फाड़ते हुए फिर लुहार की ओर संकेत किया...लुहार ने एक बड़ा सा जंबूड़ औजार जैसा फुलवारी में इधर-उधर बढ़ी हुई पत्तियाँ काटने के काम आता है,उस ब्रेस्ट रिपर को उठा लिया और मेरे दाएँ स्तन को उसमें दबाकर काटने चला था...लेकिन उसमें धार नहीं थी,ठूँठा था और उरोजों (स्तनों) को दबाकर असहनीय पीड़ा देते हुए दूसरी तरफ से जेलर ने मेरी गर्दन पकड़ते हुए कहा,‘‘अगर फिर जबान लड़ाई तो तुम्हारे ये दोनों गुब्बारे छाती से अलग कर दिए जाएँगे...’’

उसने फिर चिमटानुमा हथियार मेरी नाक पर मारते हुए कहा,"शुक्र मानो महारानी विक्टोरिया का कि इसे आग से नहीं तपाया,आग से तपाया होता तो तुम्हारे दोनों स्तन पूरी तरह उखड़ जाते।’’
नमन् हैं ऐसे देश भक्त को।
स्वतंत्रता के पश्चात इन्होंने फूल बेचकर जीवन यापन किया,लेकिन कोई भी सरकारी सहायता या पेंशन स्वीकार नहीं की!!
       ।।जय हिन्द,जय माँ भारती,वन्देमातरम।

Sunday, 1 September 2019

04:07

अब आप चुनेंगे अपने एरिया का हीरो जाने कैसे

आपका वह गांव वह शहर जिसने आपकी सभी जरूरतों को पूरा किया एक नई पहचान दी रोजगार दिया आपके सपनों को पूरा किया प्यार दिया आपके एरिया ने आपको वह सब कुछ दिया जिसकी आपको जरूरत थी लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उसके बदले में आपने अपने शहर को क्या दिया क्या आपने कभी अपने आसपास के रहने वालों के लिए कभी कुछ किया आपने अपने इलाके में साफ-सफाई और खूबसूरती के लिए कोई प्रयास किया यहां की संस्कृति के लिए कोई खास कोशिश की है अगर आप ने शहर के लिए ऐसा कोई भी प्रयास किया है जो आपको औरों से अलग बनाता है तो।

आप टैप न्यूज इंडिया के लिए किसी हीरो से कम नहीं है और हम आपके जैसे हीरो को तलाश रहे हैं अगर आपने सामाजिक मुद्दों पर कोई काम किया है या महिला सुरक्षा सशक्तिकरण के लिए कोई प्रयास किया है साइबरक्राइम या अन्य अपराधों से लड़ने के लिए जागरूकता फैलाने में पुलिस की मदद की है या पर्यावरण के लिए किसी भी तरीके का कोई काम किया है अगर आपने शहर की संस्कृति और साहित्य के लिए कोई प्रयास किया है तो आप हमें 1200 शब्दों की अपनी कहानी लिखकर भेजें जिसकी मीडिया टीम द्वारा छानबीन की जाएगी उसके बाद हम आपके बारे में अपने ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल TAP NEWS INDIA(सच का पहरेदार) पर प्रसारित कर कर पूरी दुनिया को आपके काम की नई पहचान दिलवाने का काम करेंगे अगर आप ने कोई ऐसा काम किया है जिससे समाज या प्रकृति का कोई फायदा हुआ है तो आप हमे अपनी खुद की लिखी हुई कहानी के साथ अपना नाम पता मोबाइल नंबर फोटो हमें भेजें हम 1 सप्ताह के अंदर आपकी उस कहानी को पूरी दुनिया के सामने प्रसारित करेंगे क्योंकि हमारी सोच और  मकसद है कि जिसने  समाज के लिए कोई बेहतर कार्य किया है तो वह खुलकर सामने आए जिससे हम पूरी दुनिया के सामने आपके काम की एक मिसाल पेश कर सके और अन्य लोगों को नेकी के काम करने की नसीहत मिले  इसके अलावा अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसने बड़े खामोशी  से  आपके  गांव या शहर के लिए कुछ खास किया है या कर रहा है तो आप उसकी कहानी लिखकर भी हमसे संपर्क कर सकते हैं हमारा व्हाट्सएप नंबर 98 71 15 12 40 है जिस पर आप उस समाजसेवी की कहानी  भेज सकते हैं  हम कोशिश करेंगे कि जल्द से जल्द आप की कहानी को हम अपने न्यूज़ पोर्टल में जगह देकर पूरी दुनिया कोो दिखाएंगे।