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Monday, 7 October 2019

07:15

बेड पर भी सियासत बिहार के अभिमान का अपमान है







के सी शर्मा
देश ही नहीं विदेशों तक में चर्चित रहे बिहारी माटी की शान महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के साथ बिहार सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है ।यह वही वशिष्ट बाबु है जिन्होंने आइंस्टाइन के सिद्धांत को चुनौती दी जिन्होंने नासा को आज से 50 साल पहले ज्ञान से चौंका दिया था  वही वशिष्ठ बाबू गंभीर रूप से बीमार होने के बाद विगत 3 दिनों से पीएमसीएच में इलाजरत है।डॉ गणेश प्रसाद और उनकी टीम के द्वारा उनके स्वास्थ्य पर पल-पल नजर रखी जा रही है शनिवार की सुबह उनके रक्त नमूनों की जांच की गई वह अन्य चिकित्सीय जांच की गई. विगत 40 वर्षों से अपना मानसिक संतुलन खो देने के बाद भी जिंदा लाश की तरह है।
 हालांकि विगत 5 वर्षों से उनके हालात में काफी सुधार हुआ है. अपने परिजनों को पहचानते हैं लिखना पढ़ना आज भी चालू रहता है हरदम के हाथ में पेंसिल लिखने की डायरी रहती है।

 परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है फिर भी उनके भाई अयोध्या सिंह और भतीजे मुकेश कुमार सिंह दिन रात उनकी सेवा में लगे रहते हैं।
बीमार होने के बाद उन्हें पीएमसीएच में एडमिट कराया गया है शुक्रवार की देर रात बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्हें देखने आने वाले थे अंतिम समय में उनका कार्यक्रम स्थगित हो गया आज रविवार की देर शाम मुख्यमंत्री के
चार प्रतिनिधि वशिष्ट बाबू को देखने पीएमसीएच आए थे।
उनके जाते ही पीएमसीएच प्रशासन ने वशिष्ट बाबु के परिजनों को अल्टीमेटम जारी कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में कल 12:00 बजे के बाद इन्हें पीएमसीएच में नहीं रखा जा सकता है।
 अब वे ठीक हो चुके हैं जबकि स्थिति यह है कि इतने कमजोर हैं कि खुद से उठ बैठ नहीं पा रहे हैं परिजन डरे हुए हैं कि कोई अनहोनी ना हो जाए यह बार-बार चिकित्सकों से शासन प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं एक-दो दिन और उन्हें हॉस्पिटल में ही रहने दिया जाए।
 वशिष्ट बाबु किसी जाति के किसी धर्म के किसी प्रदेश के विरासत भर नही उन पर पूरा देश गर्व करता है।
 आज मन व्यवस्था से काफी खिन्न है खासकर बिहार के जनप्रिय लोकप्रिय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी से ।
तमाम आलोचनाओं के बावजूद हम सभी आपको एक गंभीर शासक समझते हैं इस विकट परिस्थिति में आप से ही आस है बिहार के इस बुझते दीपक को बचा लीजिए, आप राजा हैं हम प्रजा हमारी आप से गुहार है।

 वशिष्ट बाबु वोट बैंक नहीं है पर हमारी बिहारी प्रतिभा के प्रखर स्वर है।
बिहार की माटी  सदियों तक इस सपूत को जन्म देने के कारण खुद को गौरवान्वित महसूस करती रहेगी ऐसे सपूत का अपमान बिहार के प्रतिभा का अपमान है बिहार की कोख का अपमान है बिहार के उस विरासत का अपमान है जिसने ऐसे सपूतों को अपने कण कण से अवतरित किया है।

 लाचार बीमार वशिष्ट बाबु के पीएमसीएच में रहने से ना पीएमसीएच के मान सम्मान पर कोई आच आएगा न शासन प्रशासन को कोई अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ेगा हम सभी अपने खून के कतरे कतरे से आपके इस कर्ज को उतारेंगे  बचा लीजिए बिहार के मान सम्मान और अभिमान को।

Sunday, 25 August 2019

11:53

व्यक्ति एक नौकरी 3 और वह भी सरकारी

 बिहार सरकार में एक इंजीनियर 30 साल तक सरकार के 2 विभागों में तीन जगह नौकरी करता रहा और किसी को कानों कान भनक तक नहीं लगी लेकिन जब बिहार में लागू हुए नए फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम सीएफएमएस ने इस गड़बड़ी को पकड़ा तो अधिकारियों और कर्मचारियों के होश फाख्ता हो गए दरअसल एक आदमी दो विभागों में तीन जगह पर नौकरी कैसे कर सकता है यह आश्चर्य का विषय था लेकिन गड़बड़ी पाए जाने पर इंजीनियर सुरेश राम के खिलाफ केस दर्ज किया गया फिलहाल सुरेश अभी तक फरार है मिली जानकारी के अनुसार यह मामला तब प्रकाश में आया जब
सीएफएमएस प्रणाली के तहत वेतन की प्रक्रिया की जांच की जा रही थी इसमें सुरेश नाम के तीन व्यक्ति नौकरी करते हुए सामने आए जिसमें से दो जल संसाधन में और एक भवन निर्माण विभाग में तैनात था लेकिन अधिकारियों के सब होश फाख्ता हो गए जब उस व्यक्ति के तीनों जगह नौकरी करने के एक ही प्रमाण मिले जैसे कि तीनों का नाम एक ही था जन्मतिथि पिता का नाम शरीर का पहचान चिन्ह स्थाई पता आदि सूचनाओं में भी समानता पाई गई तब अधिकारियों ने इस पर गहनता से छानबीन शुरू की और यह मामला खुलकर सामने आया उसके बाद जब तीनों पते को 22 जुलाई को पटना मुख्यालय के शैक्षणिक प्रमाण पत्र पैन कार्ड बायोडाटा से जन्म से संबंधित प्रमाण पत्र शिक्षा से संबंधित प्रमाण पत्र आधार कार्ड आदि अभिलेखों की जांच के लिए बुलाया गया तो भवन निर्माण विभाग किशनगंज में कार्यरत सुरेश राम कार्यालय कक्ष में उपस्थित हुआ उसके पास केवल आधार कार्ड एवं पैन कार्ड उपलब्ध था जब उससे पूछा गया कि आप को शैक्षणिक प्रमाण पत्र एवं नियुक्त सेवा संबंधी अभिलेखों की जांच हेतु विभाग में चलना है तो उसने कहा कि वह कुछ देर में उपस्थित हो रहा है उसके बाद वह फरार हो गया अधिकारियों ने काफी देर तक फोन पर संपर्क किया लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला और उसका मोबाइल बंद आ रहा है और वह अपने कार्यालय में भी उपस्थित नहीं है बल्कि वह कहीं भूमिगत हो गया है पता चला है कि सुरेश सबसे पहले 20 फरवरी 1988 को भवन निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर नियुक्त हुआ था उसने उसके अगले ही जल संसाधन विभाग में नौकरी का शुरू कर दी उसी वर्षों से जल संसाधन विभाग में से और नौकरी का ऑफर मिला तो उसने भीम में नौकरी ज्वाइन कर ली इसके बाद वह लगातार 30 सालों से तीनों स्थानों पर नौकरी का और वेतन बता रहा है