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Tuesday, 6 October 2020

15:55

बिहार के वैशाली के जिस गांव में चमकी बुखार से सात मासूमों की मौत 39 लोग झेल रहे हैं नारेबाजी करने पर सरकारी मुकदमा deepak tiwari

मुजफ्फरपुर.पिछले साल चमकी बुखार से मेरे दो बच्चे मर गए। मुआवजे का पैसा मिला। इसके अलावा गांव में कुछ नहीं बदला। सालभर से ऊपर हो गया। तब विधायक आए थे, एमपी आए थे। बोले थे कि गांव के बगल में अस्पताल बनेगा, सड़क बनेगी। गांव को ऐसा बना देंगे कि इलाज की कमी से किसी बच्चे की मौत नहीं होगी। लेकिन कुछ नहीं बदला। सड़क के नाम पर खाली मिट्टी भरी गई है। अस्पताल का तो पता ही नहीं है। पानी-बिजली भी हवा-हवाई है।
यह दर्द बयां कर रहे हैं 40 साल के चतरी सहनी। इनका घर पटना से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित हरिवंशपुर गांव के मल्लाह टोले में है। पिछले साल जून में इनके दो बेटे प्रिंस (सात साल) और छोटू (ढाई साल) की चमकी बुखार से मौत हो गई थी। चतरी अपने बीमार बड़े बच्चे को लेकर पूरी रात पटना और मुजफ्फरपुर घूमते रहे लेकिन उसे बचा नहीं पाए।
सुबह बेटे की लाश लेकर घर लौटे तो छोटा बेटा भी अचानक बीमार पड़ गया। देखते ही देखते उसकी भी मौत हो गई। दरवाजे से एक साथ दो बच्चों की लाशें उठी थीं। पिछले साल चमकी बुखार से इस एक टोले से 7 बच्चों की मौत हुई थी। वहीं पूरे बिहार में लगभग 175 बच्चों की जान गई।
तस्वीर 70 साल की सुधो की है, जिन्हें कई सालों से वृद्धा पेंशन नहीं मिली है।
एक के बाद एक हो रही बच्चों की मौत से मल्लाह टोला चर्चा में आया था। कई दिनों तक अधिकारियों ने कैंप किया। स्थानीय विधायक राजकुमार साह और सांसद पशुपति कुमार पारस भी आए। इस दौरान कई वादे किए गए। कहा गया कि टोले के बगल में सरकारी अस्पताल बनेगा। नल-जल योजना से हर घर को पानी दिया जाएगा। टोले की हर बुजुर्ग महिला को वृद्धावस्था पेंशन दी जाएगी। जिन विधवाओं को पेंशन नहीं मिलती उन्हें भी जल्दी दी जाएगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
70 साल की सुधो को याद भी नहीं है कि उन्हें पहली बार पेंशन कब और कितनी मिली थी। वो कहती हैं, 'बहुत दिन से न देई छई। इयाद न हैइ कि केतना मिलइत रही। पता नहीं, काहे बंद क देलकई (बहुत दिन से नहीं मिल रहा है। याद नहीं है कि कितना मिलता था। ये भी नहीं मालूम कि क्यों बंद हो गया)। ऐसा कहने वाली सुधो अकेली नहीं हैं।
टोले की कई महिलाओं की शिकायत है कि उन्हें विधवा और मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इन महिलाओं के लिए सरकार का मतलब है स्थानीय मुखिया और सबसे बड़े सरकारी कार्यालय का मतलब है, बीडीओ का दफ्तर।
गांव के हर घर के बाहर नल लगे हैं, लेकिन इनमें कभी पानी नहीं आया है। जब से लगे हैं तब से बंद पड़े हैं।
इन वायदों को किए एक साल से ज्यादा हो गया। चुनाव आ गया है लेकिन, हकीकत की जमीन पर कुछ भी नहीं है। जो है, वो आधा-अधूरा है। टोले में जाने के लिए पक्की सड़क नहीं है। इस साल बाढ़ आई तो पूरा टोला टापू बन गया। पिछले साल अपनी सात साल की बेटी रूपा को खो चुके राजेश सहनी कहते हैं, सब कुछ आपके सामने हैं। आप टोले में आए होंगे तो कीचड़ में घुसकर आए होंगे।
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सोलिंग होनी थी। नहीं हुई। मिट्टी डालकर छोड़ दिए। इस बार बारिश हुई तो वो मिट्टी भी बह गई। हर घर के बाहर पानी वाला टोंटी लगा हुआ है लेकिन वो केवल दिखाने के लिए है। जब से लगा है, उसमें पानी नहीं आया। वो सब छोड़िए, इलाज ना मिलने की वजह से हमारे बच्चे मर गए। अगर आसपास एक अच्छा सरकारी अस्पताल ही बन जाता तो राहत मिलती।
बात केवल इतनी सी नहीं है कि जो कहा गया वो पूरा नहीं हुआ। इस टोले के 39 लोग एक सरकारी मुकदमा भी झेल रहे हैं जो पिछले साल स्थानीय प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा दर्ज करवाया गया था। राजेश सहनी बोलते हैं, क्या कहें? विधायक जी आए थे। टोले की महिलाओं ने उन्हें घेर कर नारेबाजी कर दी थी।
बीडीओ साहेब ने मर्दों के खिलाफ केस कर दिया। विधायक जी बोले थे कि केस खत्म करवा देंगे लेकिन वो भी नहीं हुआ। हर तारीख पर कम से कम पांच हजार रुपया खर्च होता है। अगर कम से कम ये केस भी खत्म हो जाता तो हम गरीबों की बड़ी मदद होती।
गांव में पक्की सड़क नहीं है। पिछले साल ईंट की सोलिंग होनी थी लेकिन अभी तक नहीं हो पाई है।
सवाल उठता है कि ये जो मुश्किलें या अधूरे वादे हैं, वो इस विधानसभा चुनाव में इनके लिए कोई मुद्दा रहेंगे। क्या इस टोले के मतदाता अपने साथ हुए छलावे को वोट देने के दिन तक याद रखेंगे। 40 साल के शंभू सहनी कहते हैं, अभी दो-एक रोज की बात है। कुछ नेताजी आए थे। बाहर रोड पर मिले। बोले कि चुनाव में खड़े हो रहे हैं। जीत गए तो टोले को बदल देंगे।
मैंने कहा कि 40 साल से तो हम टोले को जस का तस देख रहे हैं। कुछ तो नहीं बदला। अगर जीत जाते हैं तो आप भी जोर लगा दीजिएगा। ना हमारे याद रखने से कुछ होता है और ना ही भूल जाने से। चुनाव जीतने के बाद इस तरफ कोई नहीं देखता है। आजतक तो यही होता आया है, आगे भी शायद यही होगा।

Friday, 25 September 2020

17:27

deepak tiwari चुनाव का ऐलान होते ही जेल में कैद लालू के ट्वीटर हैंडल से ट्वीट उठो बिहारी करो तैयारी जनता का शासन अबकी बारी

पटना.बिहार में चुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक पार्टियों में हलचल तेज हो गई है। तारीखों का ऐलान होते ही राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने ट्वीट कर लिखा-"उठो बिहारी करो तैयारी, जनता का शासन अबकी बारी"। उन्होंने आगे लिखा-बिहार में बदलाव होगा, अफसर राज खत्म होगा, अब जनता का राज होगा। लालू यादव रांची के केंद्रीय कारागार में बंद हैं।
बिहार में आगे किसका राज रहेगा यह तो जनता तय करेगी, लेकिन लालू के ट्विटर हैंडल से हो रही ट्वीट से यह साफ हो गया है कि राजद सुप्रीमो जेल से ही पार्टी की कमान संभाले रहेंगे। यह पहला चुनाव होगा जब लालू बिहार में मौजूद नहीं होंगे। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी तेजस्वी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के कंधे पर होगी। लालू जेल से ही पार्टी को गाइड करेंगे।
तेजस्वी ने कहा-एनडीए का होगा सफाया, कांग्रेस बोली-कोरोना में चुनाव कराना बड़ा खतरा
नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हम बिहार के लोगों को आश्वासन देते हैं कि उन्हें इस सरकार से मुक्ति दिलाएंगे। इस चुनाव में जदयू कहीं नहीं है। हमारी सीधी टक्कर भाजपा से है। कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कोरोना काल में चुनाव पर सवाल खड़े किये हैं। उनका कहना है कि जब 70 देशों में चुनाव टाला जा सकता है तो बिहार में क्यों चुनाव कराया जा रहा है। कोरोना काल में चुनाव खतरे से खाली नहीं है।
भाजपा-रालोसपा ने किया स्वागत
भाजपा ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया है। पार्टी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने कहा कि भाजपा अपने कार्यकर्ताओं के साथ 200 प्रतिशत तैयार है। मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि भाजपा की बूथ स्तर पर तैयारी है। हमारी सरकार जनता के लिए समर्पित होगी। एनडीए पहले से भी ज्यादा सीट लेकर सत्ता में लौटेगी।
रालोसपा का कहना है कि कोरोना काल में संक्रमण से बचाव के साथ शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो जाए। पार्टी प्रवक्ता भोला शर्मा ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हम पहले भी चुनाव का विरोध नहीं कर रहे थे।
12:06

आचार संहिता लागू होते ही हरकत में आया नगर निगम, उखाड़े जाने लगे बैनर-पोस्टर deepak tiwari

पटना.बिहार में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो चुका है। घोषणा के बाद राजधानी पटना में पोस्टर बैनर को हटाने का काम चालू हो गया। आचार संहिता लागू होते ही शुक्रवार को शहर के प्रमुख चौक चौराहे से बैनर पोस्टर हटाए गए। डाकबंगला से लेकर आयकर गोलंबर और कई जगहों के पोस्टर-बैनर नगर निगम ने उखाड़ फेंके। इस दौरान चुनाव की तारीख के ऐलान से सड़क पर किसान बिल को लेकर आंदोलन कर रहे राजद के नेता और कायर्कर्ता पार्टी कार्यालय भागे तो वहीं अन्य पार्टी कार्यालयों में भी चुनावी समर की तैयारियां शुरू हो गईं।
ऐलान के साथ चुनावी रणनीति पर होने लगा काम
तीन चरणों में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद पार्टी कार्यालयों में गहमागहमी दिखी।कांग्रेस कार्यालय पर शुक्रवार को पार्टी कायकर्ताओं के साथ टिकट के दावेदारों की भीड़ दिखी तो वहीं बीजेपी कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि किसी भी कार्यालय में कोई बड़े नेता नहीं दिखाई पड़े लेकिन चुनावी रणनीति की हर जगह चर्चा रही।कार्यकर्ता जीत की चुनावी समीकरण समझने में जुटे रहे। राजद कार्यालय में भीड़ रही क्योंकि शुक्रवार को किसान बिल को रैली में कई विधानसभा क्षेत्रों से
कार्यकर्ता पटना पहुंचे थे।जेडीयू में भीड़ रही और चुनाव की घोषणा के बाद कार्यकर्ता काफी उत्साहित दिखे

Monday, 21 September 2020

18:07

6 महीने बाद खुला गया विष्णुपद मंदिर, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूजा शुरू deepak tiwari

पटना/गया.गया का विष्णुपद मंदिर सोमवार को 6 महीने बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। कोरोना के चलते मंदिर में भीड़ थोड़ी कम दिखी। करीब 200 लोग दर्शन के लिए पहुंचे। आम दिनों में यहां 500 से 1000 लोग दर्शन के लिए आते हैं। भक्तों को थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन के बाद अंदर जाने की इजाजत मिली। बुखार, सर्दी और खांसी से पीड़ित लोगों को मंदिर के अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली।
केंद्र सरकार ने पहले ही अनलॉक-4 को लेकर गाइडलाइन जारी कर दी थी। इसके बाद 21 सितंबर से बिहार के अधिकांश मंदिर खोल दिए गए हैं। सोनपुर के हरिहरनाथ मंदिर में भी पूजन शुरू हो गया। कोरोना के चलते यहां भी भीड़ थोड़ी कम दिखी।
मंदिर खुलने से पंडों को बड़ी राहत
विष्णुपद में पूजा कराने वाले पंडों की आजीविका मंदिर पर ही निर्भर है। मंदिर खुलने के बाद उन्हें बहुत राहत मिली है। पंडों का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से उन्हें बहुत दिक्कत हो रही थी। अब मंदिर खुल गया है तो लोग पूजा करने आएंगे और चढ़ावा भी होगा।
भगवान का दर्शन करने आए भक्त राम गोविंद ने बताया कि वह पहले हर दिन विष्णुपद मंदिर आते थे। लेकिन, कोरोना की वजह से पिछले 6 महीनों से मंदिर नहीं आ रहे थे। सासाराम की रहने वाली एक महिला ने बताया कि 5 महीने पहले मुझे बेटी हुई है। तभी मन्नत मांगी थी कि विष्णुपद मंदिर आऊंगी। आज बेटी और पूरे परिवार के साथ मंदिर में आकर पूजा किया।
मंदिर प्रबंधन की तरफ से जारी गाइडलाइन
बिना मास्क के श्रद्धालुओं को मंदिर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं।
मंदिर के अंदर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है, तापमान अधिक रहने पर अंदर जाने की इजाजत नहीं।
मंदिर प्रबंधन की तरफ से हैंड सैनिटाइजर और साबुन की व्यवस्था की गई है, हाथ धोने के बाद ही अंदर जाने की इजाजत।
मंदिर परिसर में एक बार में 10 लोगों को प्रवेश करने की अनुमति, सभी के निकलने के बाद फिर 10 लोग अंदर जा सकेंगे।
18:05

नोबेल परिवार की सोसाइटी में शामिल हुआ बिहार का बच्चा, नेतृत्व क्षमता ने 14 साल के आदित्य को दिलाई सफलता

पटना.deepak tiwari बोरिंग रोड निवासी आदित्य सिंह ने बिहार का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। 14 साल के आदित्य को नोबेल परिवार द्वारा संचालित अमेरिका स्थित नेशनल सोसाइटी ऑफ हाई स्कूल स्कॉलर्स (एनएसएपएसएस) में सदस्यता प्रदान की गई। ज्ञात हो की इसी परिवार ने नोबेल पुरस्कार की भी स्थापना की थी और दुनिया भर के सबसे मेधावी हाई स्कूल के छात्रों के लिए 2002 में एनएसएचएसएस की स्थापना की।
नेशनल सोसाइटी ऑफ हाई स्कूल स्कॉलर्स एक अंतरराष्ट्रीय ऑनर सोसाइटी है जो दुनियाभर के सबसे मेधावी छात्र-छात्राओं को उत्कृष्ट नेतृत्व की क्षमता, स्कॉलरशिप और सामुदायिक प्रतिबद्धता के कारण सम्मानीत करता है एवं उन्हें भविष्य में आगे बढ़ने के लिए अनेक अनुसंधान, छात्रवृत्ति और इंटर्नशिप के अवसरों से जोड़ता है।
नोबेल परिवार के वरिष्ठ सदस्य एवं ऑनर सोसाइटी के संस्थापक व अध्यक्ष क्लेस नोबेल ने आदित्य को इस सोसाइटी में आमंत्रित करने पर कहा कि आदित्य ने अकादमिक उत्कृष्टता के इस असाधारण स्तर को प्राप्त करने के लिए मेहनत, बलिदान और प्रतिबद्धता दिखाई है। आदित्य अब युवा विद्वानों के एक अनूठे समुदाय का सदस्य हैं। एक ऐसा समुदाय जो भविष्य के लिए हमारी सर्वश्रेष्ठ आशा का प्रतीक है।
कैसे हुए मनोनीत?
इस अंतरराष्ट्रीय संस्था के लिए सदस्यता तभी दी जाती है जब कोई नामांकन सफल होता है। आदित्य को बिहार के सामजिक उद्यमी एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल के संस्थापक व सीईओ शरद विवेक सागर ने मनोनीत किया था। ज्ञात हो कि शरद सागर अपने हाई स्कूल के दौरान बिहार के पहले विद्यार्थी थे जिन्हें एनएसएचएसएस ने सदस्य बनने के लिए आमंत्रित किया था। आदित्य शरद सागर के संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल का हिस्सा हैं और संगठन के नेतृत्व विकास कार्यक्रम से प्रशिक्षित हैं। डेक्सटेरिटी ग्लोबल एक राष्ट्रीय संगठन है जो देश भर के बच्चों एवं युवाओं को शैक्षणिक अवसरों के माध्यम से लीडर्स के रूप में तैयार करता है।
आदित्य वर्तमान में ग्वालियर स्थित सिंधिया स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ते हैं। उन्होंने पटना के दिल्ली पब्लिक स्कूल से कक्षा 7 तक की पढ़ाई कि है। 2018 में आदित्य देश भर से 51 युवाओं में से थे, जिनका चयन डेक्सटेरिटी स्कूल ऑफ लीडरशिप एंड एंटरप्रेन्योरशिप के लिए हुआ था। इसके अलावा आदित्य ने ट्रिनिटी कॉलेज लंदन से संगीत में भी विशिष्टता प्राप्त की है। आदित्य सिंधिया स्कूल के सर्वोच्च शैक्षणिक पुरस्कार स्कॉलर्स स्कार्फ के भी विजेता रहे हैं और विद्यालय परिषद के सदस्य भी हैं।

Saturday, 19 September 2020

18:49

अंसारी महापंचायत 40 सीटों पर लड़ेगी चुनाव:अंसारी

महुआ(वैशाली)अंसारी समाज को राजनीति में हिस्सेदारी नहीं मिली तो अंसारी महापंचायत बिहार के 40 विधानसभा क्षेत्रों में अपना उम्मीदवार खड़ा करेगा।क्योंकि पूरे बिहार में अंसारी समुदाय लगभग 11.5 प्रतिशत है फिर भी किसी भी राजनीतिक दल ने इस समुदाय को आबादी का उचित हिस्सा नहीं दिया।यह बात अंसारी महापंचायत के संयोजक वसीम नैय्यर अंसारी ने महुआ के वी सेलिब्रेशन हॉल में अंसारी महापंचायत के बैनर तले आयोजित"संकल्प सभा"में उमड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए कही।उन्होंने कहा कि बड़ी आबादी होने के बावजूद अंसारी समाज अभी भी राजनीतिक रूप से हाशिए पर है।हम उस पार्टी का समर्थन करेंगे जो आबादी के अनुपात में योगदान करती है।यदि किसी ने इस समाज को आबादी का हिस्सा नहीं दिया तो 2020 के विधानसभा चुनाव में जहां-जहां अंसारी समुदाय की आबादी 25,000 से अधिक है हम उन सभी निर्वाचन क्षेत्रों से अपना उम्मीदवार खड़ा करेंगे।क्योंकि लोकतंत्र में सभी की समान हिस्सेदारी है।फिर भी इतनी बड़ी आबादी के बावजूद अंसारी समाज को एमएलए,एमपी,एमएलसी या अन्य क्षेत्रों में किसी भी पार्टी द्वारा आबादी के अनुरूप हिस्सा नहीं दिया गया।जिस कारण यह समाज अब भी पिछड़ा हुआ है।मौके पर पूर्व एडीएम खुर्शीद अकबर अंसारी ने कहा कि वर्तमान में बिहार में सभी दलों के भीतर अंसारी महापंचायत की लहर को देखते हुए सभी राजनीतिक पार्टी के लोगों मे खलबली मच गई है।अंसारी समाज अब अपनी आबादी के लिए एकजुट हो गई है और सभी पार्टियों को चुनौती दे रहे हैं।समय आ गया है कि आप सभी एकजुट होकर अंसारी महापंचायत की आवाज को बुलंद करें।राजद पार्टी के पातेपुर प्रखंड अध्यक्ष मकबूल अहमद शाहबाज़पुरी ने कहा कि अगर अंसारी समाज अपने सभी संगठनों को एकजुट करके एक मंच पर आ जाएं तो यह समाज आसानी से अपना पूरा हिस्सा हर स्तर पर प्राप्त कर लेगा।यह सफल तभी होगा जब इस समाज के बड़े- बुजुर्गों को भी शामिल किया जाएगा।कोई मुस्लिम उम्मीदवार महुआ  विधानसभा क्षेत्र से आता है तो उसे एकजुट होकर मतदान करने की अपील की।सामाजिक कार्यकर्ता अल्हाज मोहम्मद फहीम उर्फ ​​बब्लू ने कहा कि वैशाली जिले में महुआ और पातेपुर विधानसभा क्षेत्रों में मुसलमानों की सबसे बड़ी आबादी है।इस आबादी को देखते हुए मैं सभी राजनेताओं से मांग करता हूं कि वैशाली में मुसलमानों की कम से कम 2 सीटें मिलनी चाहिए।अंसारी महापंचायत के उप संयोजक अब्दुल खालिक अंसारी ने कहा कि इस संकल्प सभा की जरूरत थी।क्योंकि आज हर समाज एकजुट है और अपने हिस्से की मांग कर रहा है। इसलिए पूरे बिहार में अंसारी समाज की एक बड़ी आबादी है।लेकिन किसी पार्टियों ने उचित हिस्सा देने के लिए काम नहीं किया।यही वजह है कि यह समाज अभी भी अपने हिस्से के मामले में अंतिम पायदान पर है।अब यह समाज अपने हिस्से के लिए अंसारी महापंचायत के साथ एकजुट है।इस अवसर पर अंसारी महापंचायत वैशाली के जिलाध्यक्ष अरशद अंसारी ने संयोजक वसीम नैय्यर अंसारी,पूर्व एडीएम खुर्शीद अकबर अंसारी,उप संयोजक अब्दुल खालिक अंसारी, संस्थापक डॉक्टर रजी अंसारी,संगठन सचिव जमालुद्दीन अंसारी,स्टार प्रचारक अब्दुल वहाब उर्फ ​​बिगू अंसारी का फूल माला पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया।जिलाध्यक्ष अरशद अंसारी ने कहा कि यदि हम एकजुट होते तो कोई भी पार्टी टिकट देने में चूं  चरा नहीं करती और सफलता कदम चूम लेती।वहीं सभा को मुस्तफा हसन मुखिया,मोहम्मद सज्जाद अंसारी भैरोखरा,डॉक्टर जमाल अंसारी,मोहम्मद नियाज़ अंसारी,मोहम्मद अकबर अली जन्दाहा, क़ैसर अली सोंधो,अब्दुल रज्जाक अंसारी,इम्तियाज़ आदिल,मोहम्मद सगीर आलम,मोहम्मद साबिर,हासिम मुखिया,रोजीद अंसारी,अफजल अंसारी,अमजद अंसारी,मोहम्मद इंतिखाब उर्फ ​​राजा,मोहम्मद मुनीर अंसारी,मोहम्मद शकील अंसारी आदि ने संबोधित किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता अब्दुल्ला अंसारी व संचालन एजाज अहमद आदिल ने किया।कार्यक्रम के अंत में पूर्व एडीएम खुर्शीद अकबर अंसारी ने वैशाली जिले के कोने-कोने से आए हजारों अंसारी समुदाय के सदस्यों को संविधान की प्रस्तावना के साथ शपथ दिलाई।अंसारी महापंचायत द्वारा एक भी बैनर उर्दू मे नहीं लिखवाने पर लोगों ने आपत्ति जताई।जो कार्यक्रम में उर्दू के खिलाफ पक्षपातपूर्ण था।कार्यक्रम का अंत हाजी फहीम उर्फ ​​बब्लू ने आभार व्यक्त करते हुए किया।
रिपोर्ट व फोटो मोहम्मद शाहनवाज अता

Friday, 18 September 2020

15:33

बिहार में कोसी रेल महासेतु का PM मोदी ने किया उद्घाटन deepak tiwari

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिहार में कोसी रेल महासेतु राष्ट्र को समर्पित किया और 12 रेल परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, ‘आज बिहार में रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नया इतिहास रचा गया है। वर्तमान में निर्मली से सरांयगढ़ का सफर करीब‑करीब 300 किमी का होता है। अब वो दिन ज्यादा दूर नहीं जब बिहार के लोगों को 300 किमी की ये यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। 300 किमी की ये यात्रा सिर्फ 22 किमी में सिमट जाएगी।’ पीएम मोदी ने कहा, “आज कोसी महासेतु होते हुए सुपौल‑आसनपुर कुपहा के बीच ट्रेन सेवा शुरू होने से सुपौल, अररिया और सहरसा जिले के लोगों को बहुत लाभ होगा। यही नहीं, इससे नॉर्थ ईस्ट के साथियों के लिए एक वैकल्पिक रेलमार्ग भी उपलब्ध हो जाएगा।”
रेलवे कर्मचारियों की प्रशंसा
रेलवे कर्मचारियों की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “जिस तरह से कोरोना के समय में रेलवे ने काम किया है, काम कर रही है, उसके लिए मैं भारतीय रेल के लाखों कर्मचारियों की विशेष प्रशंसा करता हूं। देश के लाखों श्रमिकों को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए रेलवे ने दिन‑रात एक कर दिया था।” प्रधानमंत्री ने कहा, “2014 के पहले के 5 सालों में बिहार में सिर्फ सवा तीन सौ किलोमीटर नई रेल लाइन शुरु थी। जबकि 2014 के बाद के 5 सालों में बिहार में लगभग 700 किलोमीटर रेल लाइन कमीशन हो चुकी हैं। यानी करीब दोगुने से अधिक नई रेल लाइन शुरु हुईं हैं।”
लालू यादव पर पीएम मोदी का वार
पीएम मोदी ने यहां संबोधन में कहा कि अटल जी की सरकार जाने के बाद इस प्रोजेक्ट की रफ्तार कम हो गई। अगर दूसरी सरकार को बिहार के लोगों की फिक्र होती और जो लोग तब रेल मंत्री थे उन्हें अगर चिंता होती तो काम पहले ही हो जाता, लेकिन वो ऐसा करना नहीं चाहते थे, पीएम बोले कि अगर दृढ़ निश्चय हो और नीतीश जैसा साथी हो तो सबकुछ संभव है।
पीएम ने कहा कि 5–6 साल में हमने समस्याओं का हल ढूंढा है। 4 साल पहले उत्तर-दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले दो महासेतु को शुरू किया गया। पीएम ने कहा कि भूकंप की आपदा ने मिथिला और कोसी को अलग किया था, आज कोरोना महामारी के बीच इन दोनों को फिर से जोड़ा जा रहा है। ये प्रोजेक्ट अटल जी और नीतीश बाबू का ड्रीम प्रोजेक्ट है।
इस कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने कहा कि अटल जी के कार्यकाल में इसकी शुरुआत हुई थी, लेकिन यूपीए सरकार के दौरान पूरा काम रुक गया। अब आप आएं हैं तो इस कारण ये काम पूरा हो पाया। नीतीश ने इस दौरान अपील करते हुए कहा कि इस लाइन को आगे भी बढ़ाया जाना चाहिए, ऐसी मेरी सरकार से उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब 300 किमी. का सफर तय नहीं करना होगा, कुछ ही वक्त में रास्ता कट जाएगा।
पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि आत्मनिर्भर भारत के मिशन के तहत बिहार में रेल नेटवर्क को बढ़ाया जा रहा है और बिजलीकरण किया जा रहा है। पीएम ने बताया कि 2014 से पहले के पांच साल में सिर्फ सवा तीन सौ किमी. रेल लाइन शुरू हुई, लेकिन 2014 के बाद के पांच साल में 700 किमी. रेल लाइन कमीशन हो चुकी है। अभी भी एक हजार किमी. नई रेल लाइन का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा पीएम मोदी ने समस्तीपुर रेलमंडल की कई योजनाओं का उद्घाटन किया और सुपौल से आसनपुर कुपहा डेमू ट्रेन के परिचालन को भी हरी झंडी दिखाई।
लिच्छवी सहित दो ट्रेनों को मिलेगी हरी झंडी
पीएम मोदी ने समस्तीपुर रेलमंडल की 5 बड़ी योजनाओं के साथ 3 ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। डीआरएम अशोक माहेश्वरी के अनुसार पीएम मोदी ने सीतामढ़ी से आनंद विहार टर्मिनल के लिए इलेक्ट्रिक इंजन वाली लिच्छवी एक्सप्रेस, सुपौल सरायगढ़ आसनपुर कुपहा स्टेशन के लिए डेमू और सरायगढ़ राघोपुर के लिए एक डेमू ट्रेन को डिजीटल वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
महासेतु की अहम भूमिका
पीएम नरेन्द्र मोदी ने आज कोसी महासेतु देश को समर्पित किया लेकिन इसके बाद भी मिथिलांचल से जुड़ने में कुछ और दिनों का इंतजार करना पड़ेगा। सुपौल से सरायगढ़ होते हुए कोसी महासेतु से होकर ट्रेन असानपुर कुपहा हॉल्ट तक चलेगी।

Saturday, 25 July 2020

07:22

बिहार में कोरोना का महाविस्फोट, मिले 2803 नये मरीज, सूबे में आंकड़ा पहुंचा 36314

deepak tiwari 
बिहार में कोरोना का कहर जारी है. यहां कोरोना ने हाल बेहाल कर दिया है. सूबे में कोरोना का संक्रमण काफी तेजी से फैल रहा है. स्वास्थ्य विभाग ने अपने ताजा अपडेट में 2803 कोरोना के नये मरीज मिलने की पुष्टि की है. इसके साथ ही बिहार में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 36 हजार पार कर गई है. बिहार में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 36314 हो गई है. स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि 2803 मरीज में से 24 जुलाई से अब तक 1021 नए मामले सामने आए हैं. वहीं, बांकी के 1782 मामले 23 जुलाई और उससे पहले के हैं. इस प्रकार से शनिवार को स्वास्थ्य विभाग ने 2803 नये मरीज के मिलने की पुष्टि की है. इसके साथ ही अब बिहार में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 36314 हो गई है.

Saturday, 16 November 2019

22:43

पटना में संपूर्ण क्रांति मंच की बैठक संपन्न




आज़ पटना स्थित बिहार विधालय परीक्षा समिति , सिन्हा लाईब्रेरी रोड के रेस्टोरेंट में लोकनायक जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विकास केन्द्र एवं संपूर्ण क्रांति मंच की एक बैठक प्रो.रमाकांत पांडेय , जेपी सेनानी एवं पूर्व विधायक की अध्यक्षता में हुई जिसमें केन्द्र के राष्ट्रीय महासचिव अभय सिन्हा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के महान नायकों यथा वीर कुंवर सिंह , देशरत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद , लोकनायक जयप्रकाश नारायण , विहार निर्माता एवं प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ सचिदानंद सिन्हा एवं श्री मजरूहल हक इत्यादि महापुरुषों के जीवन दर्शन ,विचारों , आदर्शों को अक्षुण्ण रखने के लिए तथा उन्हें नयी पीढ़ी के बीच में प्रचारित, प्रसारित करने के लिए बिहार की राजधानी पटना में एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन शोध संस्थान की स्थापना होनी चाहिए , जहां समय समय पर संगोष्ठी का आयोजन किया जाना चाहिए , इसके लिए बिहार और केन्द्र सरकार को संस्थाआें के द्वारा मांग करने का निर्णय लिया गया है ।
2. आगामी 3 दिसंबर के पूर्व हरेक संस्थाआें से यह अनुरोध किया जाएगा कि देशरत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद के जन्म दिवस 3 दिसंबर को बिहार सरकार एवं केन्द्र सरकार  को " मेधा दिवस " मनाने हेतु मांग पत्र का ज्ञापन सौंपा जाए और अपने अपने क्षेत्र में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाए , ताकि सरकार मेधा दिवस घोषित करने हेतु बाध्य हो जाए । इस आशय का प्रस्ताव ज्यादा से ज्यादे संस्थाओं को भेजी जाएगी एसा सबकी सहमति से निर्णय लिया गया ।
3. आगामी 8 अप्रैल 2020 को बिहार की राजधानी पटना में लोकनायक जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विकास केन्द्र एवं अन्य संस्थाओं के माध्यम से वृहत स्तर पर " जेपी आन्दोलन दिवस " का आयोजन करने का भी निर्णय लिया गया ।

Monday, 21 October 2019

07:03

घटिया सामग्री का किया गया प्रो अब अंधेरे में कई वार्ड

 अमित चौरसिया बिहार*
 दीपावली आने वाली है। दीपावली के मौके पर हर कोई अपने घर व प्रतिष्ठान को लाइटो से चमकाने में लगे है। वहीं इस्लामपुर नगर पंचायत के कई क्षेत्रों में स्ट्रीट लाईट बिगड़ने के कारण रात्रि में अंधेरा पसरा पड़ रह रहा है। हर कोई चाहता है कि उसके घर-आंगन व गली में रोशनी डेरा डाले कोई अंधेरे को पास भटकने भी नहीं देना चाहता है। लेकिन नगर इस्लामपुर पंचायत के कई वार्डों के लोग अंधेरे के बीच जीने को मज़बूर हैं। नगर पंचायत के वार्ड 11 मुहल्ले में अंधेरा ने अपना डेरा इस कदर डाला है की शाम ढ़लते हीं अंधेरा कायम हो जाता है। जिससे इस मुहल्ले के लोगों को हमेशा परेशानियां होती है। मुहल्ले में तो स्ट्रीट लाइटें तो लगायी गईं हैं, लेकिन वो सिर्फ़ और सिर्फ़ दिखाबा के लिए है सभी लाईटों का हालत जर्जर है और इसे देखने वाला कोई नहीं है। अब स्थिति ऐसी हो गयी है कि इस मुहल्ले की गलियों में रात के समय में आने-जाने में भय प्रतीत होता है। अंधेरे के कारण कुछ भी दिखाई नहीं देता है। रात का समय है यो लाज़मी है कि इन गलियों में कुत्तों का भी जमावड़ा काफी रहता है। जिसके कारण लोग डरे व सहमे हुए आते-जाते हैं। साथ ही इस मुहल्ले की गली से रात के अंधेरे के कारण अप्रिय घटना होने का डर बना रहता है। शहर में बिजली के खंभों पर लगी एलईडी लाइट शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। अधिकांश लाइट या तो बंद पड़ी है या फिर उससे कम रौशनी निकल रही है। कहीं स्वीच खराब है, तो कहीं कनेक्शन का तार टूटा व लटका हुआ है। नगर पंचायत के अधिकारी व जनप्रतिनिधियों को बंद पड़े हुए स्ट्रीट लाइट की वजह से आम लोगों को जवाब देते नहीं बन रहा है। नगर पंचायत द्वारा वार्डों को जगमग करने का सपना पूरा नहीं हो सका है। अब इसके पीछे भी कई तर्क हैं वार्ड वासियों का कहना है कि नगर पंचायत के कर्मियों द्वारा लूट खसोट की गई और सस्ते दामों के एलईडी की खरीदारी कर इन्हें वार्डों में लगाया गया है। दूसरी तरफ हकीकत यह भी है कि एलईडी लगाने में भी वार्ड पार्षदों ने अपनी मनमानी भी जमकर की है। पार्षदों के मन मुताबिक चिह्नित जगहों पर इन लाइटों को लगाया गया जिसके कारण भी वार्ड के लोगों में पार्षदों के प्रति आक्रोश है। वास्तविकता भी यही है कि लगने के कुछ महीने बाद ही आधा से ज्यादा खराब हो गए।

Monday, 7 October 2019

07:15

बेड पर भी सियासत बिहार के अभिमान का अपमान है







के सी शर्मा
देश ही नहीं विदेशों तक में चर्चित रहे बिहारी माटी की शान महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के साथ बिहार सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है ।यह वही वशिष्ट बाबु है जिन्होंने आइंस्टाइन के सिद्धांत को चुनौती दी जिन्होंने नासा को आज से 50 साल पहले ज्ञान से चौंका दिया था  वही वशिष्ठ बाबू गंभीर रूप से बीमार होने के बाद विगत 3 दिनों से पीएमसीएच में इलाजरत है।डॉ गणेश प्रसाद और उनकी टीम के द्वारा उनके स्वास्थ्य पर पल-पल नजर रखी जा रही है शनिवार की सुबह उनके रक्त नमूनों की जांच की गई वह अन्य चिकित्सीय जांच की गई. विगत 40 वर्षों से अपना मानसिक संतुलन खो देने के बाद भी जिंदा लाश की तरह है।
 हालांकि विगत 5 वर्षों से उनके हालात में काफी सुधार हुआ है. अपने परिजनों को पहचानते हैं लिखना पढ़ना आज भी चालू रहता है हरदम के हाथ में पेंसिल लिखने की डायरी रहती है।

 परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है फिर भी उनके भाई अयोध्या सिंह और भतीजे मुकेश कुमार सिंह दिन रात उनकी सेवा में लगे रहते हैं।
बीमार होने के बाद उन्हें पीएमसीएच में एडमिट कराया गया है शुक्रवार की देर रात बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्हें देखने आने वाले थे अंतिम समय में उनका कार्यक्रम स्थगित हो गया आज रविवार की देर शाम मुख्यमंत्री के
चार प्रतिनिधि वशिष्ट बाबू को देखने पीएमसीएच आए थे।
उनके जाते ही पीएमसीएच प्रशासन ने वशिष्ट बाबु के परिजनों को अल्टीमेटम जारी कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में कल 12:00 बजे के बाद इन्हें पीएमसीएच में नहीं रखा जा सकता है।
 अब वे ठीक हो चुके हैं जबकि स्थिति यह है कि इतने कमजोर हैं कि खुद से उठ बैठ नहीं पा रहे हैं परिजन डरे हुए हैं कि कोई अनहोनी ना हो जाए यह बार-बार चिकित्सकों से शासन प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं एक-दो दिन और उन्हें हॉस्पिटल में ही रहने दिया जाए।
 वशिष्ट बाबु किसी जाति के किसी धर्म के किसी प्रदेश के विरासत भर नही उन पर पूरा देश गर्व करता है।
 आज मन व्यवस्था से काफी खिन्न है खासकर बिहार के जनप्रिय लोकप्रिय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी से ।
तमाम आलोचनाओं के बावजूद हम सभी आपको एक गंभीर शासक समझते हैं इस विकट परिस्थिति में आप से ही आस है बिहार के इस बुझते दीपक को बचा लीजिए, आप राजा हैं हम प्रजा हमारी आप से गुहार है।

 वशिष्ट बाबु वोट बैंक नहीं है पर हमारी बिहारी प्रतिभा के प्रखर स्वर है।
बिहार की माटी  सदियों तक इस सपूत को जन्म देने के कारण खुद को गौरवान्वित महसूस करती रहेगी ऐसे सपूत का अपमान बिहार के प्रतिभा का अपमान है बिहार की कोख का अपमान है बिहार के उस विरासत का अपमान है जिसने ऐसे सपूतों को अपने कण कण से अवतरित किया है।

 लाचार बीमार वशिष्ट बाबु के पीएमसीएच में रहने से ना पीएमसीएच के मान सम्मान पर कोई आच आएगा न शासन प्रशासन को कोई अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ेगा हम सभी अपने खून के कतरे कतरे से आपके इस कर्ज को उतारेंगे  बचा लीजिए बिहार के मान सम्मान और अभिमान को।

Sunday, 25 August 2019

11:53

व्यक्ति एक नौकरी 3 और वह भी सरकारी

 बिहार सरकार में एक इंजीनियर 30 साल तक सरकार के 2 विभागों में तीन जगह नौकरी करता रहा और किसी को कानों कान भनक तक नहीं लगी लेकिन जब बिहार में लागू हुए नए फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम सीएफएमएस ने इस गड़बड़ी को पकड़ा तो अधिकारियों और कर्मचारियों के होश फाख्ता हो गए दरअसल एक आदमी दो विभागों में तीन जगह पर नौकरी कैसे कर सकता है यह आश्चर्य का विषय था लेकिन गड़बड़ी पाए जाने पर इंजीनियर सुरेश राम के खिलाफ केस दर्ज किया गया फिलहाल सुरेश अभी तक फरार है मिली जानकारी के अनुसार यह मामला तब प्रकाश में आया जब
सीएफएमएस प्रणाली के तहत वेतन की प्रक्रिया की जांच की जा रही थी इसमें सुरेश नाम के तीन व्यक्ति नौकरी करते हुए सामने आए जिसमें से दो जल संसाधन में और एक भवन निर्माण विभाग में तैनात था लेकिन अधिकारियों के सब होश फाख्ता हो गए जब उस व्यक्ति के तीनों जगह नौकरी करने के एक ही प्रमाण मिले जैसे कि तीनों का नाम एक ही था जन्मतिथि पिता का नाम शरीर का पहचान चिन्ह स्थाई पता आदि सूचनाओं में भी समानता पाई गई तब अधिकारियों ने इस पर गहनता से छानबीन शुरू की और यह मामला खुलकर सामने आया उसके बाद जब तीनों पते को 22 जुलाई को पटना मुख्यालय के शैक्षणिक प्रमाण पत्र पैन कार्ड बायोडाटा से जन्म से संबंधित प्रमाण पत्र शिक्षा से संबंधित प्रमाण पत्र आधार कार्ड आदि अभिलेखों की जांच के लिए बुलाया गया तो भवन निर्माण विभाग किशनगंज में कार्यरत सुरेश राम कार्यालय कक्ष में उपस्थित हुआ उसके पास केवल आधार कार्ड एवं पैन कार्ड उपलब्ध था जब उससे पूछा गया कि आप को शैक्षणिक प्रमाण पत्र एवं नियुक्त सेवा संबंधी अभिलेखों की जांच हेतु विभाग में चलना है तो उसने कहा कि वह कुछ देर में उपस्थित हो रहा है उसके बाद वह फरार हो गया अधिकारियों ने काफी देर तक फोन पर संपर्क किया लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला और उसका मोबाइल बंद आ रहा है और वह अपने कार्यालय में भी उपस्थित नहीं है बल्कि वह कहीं भूमिगत हो गया है पता चला है कि सुरेश सबसे पहले 20 फरवरी 1988 को भवन निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर नियुक्त हुआ था उसने उसके अगले ही जल संसाधन विभाग में नौकरी का शुरू कर दी उसी वर्षों से जल संसाधन विभाग में से और नौकरी का ऑफर मिला तो उसने भीम में नौकरी ज्वाइन कर ली इसके बाद वह लगातार 30 सालों से तीनों स्थानों पर नौकरी का और वेतन बता रहा है