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Thursday, 10 September 2020

18:01

मुंबई की मेयर किशोरी पेडणेकर हुईं कोविड पॉजिटिव, कुछ महीने पहले नर्स के रूप में की थी मरीजों की सेवा deepak tiwari

मुंबई.राज्य में कोरोना संक्रमण के 9 लाख 67 हजार मामलों के बीच मुंबई की मेयर किशोरी पेडणेकर भी कोरोना पॉजिटिव हो गई हैं। गुरुवार को उन्होंने ट्विटर पर इसकी पुष्टि की है। मेयर ने पिछले कुछ दिनों के दौरान उनके संपर्क में आने वालों को कोविड टेस्ट करवाने का आग्रह किया है। पेडणेकर के बड़े भाई सुनील कदम का 1 अगस्त को कोरोना की वजह से निधन हो गया था। उनका मुंबई के नायर हॉस्पिटल में इलाज जारी था।
ट्विटर पर मेयर ने लिखा,"मुझ में संक्रमण के कोई लक्षण नहीं दिखे हैं। इसलिए डॉक्टरों की सलाह के बाद मैंने खुद को क्वारैंटाइन कर लिया है। जो लोग भी पिछले कुछ दिनों के दौरान मेरे संपर्क में आये हैं वे अपना कोरोना टेस्ट करवाएं और जरूरी एहतियाती कदम उठाएं। मैंने अपने परिवार के अन्य सदस्यों का भी कोरोना टेस्ट कराया है। आप सभी की शुभकामनाओं और आशीर्वाद से मैं जल्द ही मुंबई की सेवा में आऊंगी।"
नर्स के रूप में की थी मरीजों की सेवा
आज से चार महीने पहले मेयर किशोरी पेडणेकर नर्स की ड्रेस में नजर आईं थी। वह बृहन्मुंबई महानगरपालिका के नायर अस्पताल पहुंची। जहां उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को हौसला बढ़ाया और कुछ देर रहकर मरीजों की देखभाल की थी। पेडणेकर ने अस्पताल में नर्सिग का कोर्स कर रही छात्राओं को लेक्चर भी दिया था।
छात्राओं को दिया लेक्चर
मुंबई में तेजी से बढ़ते कोविड-19 के वायरस के मद्देनजर बीएमसी सर्तक हो गया है। कोरोना के कारण मेडिकल स्टाफ पर काम का ज्यादा तनाव है। नर्स की पढ़ाई कर रही छात्राओं का हौसला बढ़ाने के लिए मेयर किशोरी पेडणेकर हॉस्पिटल पहुंची थी। पेडणेकर ने अस्पताल में नर्सिंग का कोर्स कर रही छात्राओं को लेक्चर भी दिया।
पेशे से नर्स है किशोरी पेडणेकर
महापौर किशोर पेडणेकर खुद भी पेश से नर्स हैं। राजनीति में आने पहले किशोरी मुंबई के अस्पताल में नर्स का काम करती है। बता दें कोरोना वायरस से सबसे अधिक प्रभावित महाराष्ट्र है। यहां अबतक 342 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि संक्रमितों की संख्या आठ हजार के पार हो गई है।
किशोरी पेडणेकर का राजनीतिक सफर
नर्स का काम करते-करते और मरीजों की सेवा करते हुए ही किशोरी ने समाज सेवा करने का फैसला लिया था और शिवसैनिक में एक कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। साल 2002 में मुंबई के वर्ली इलाके से पहली बार शिवसेना के टिकट पर पेडणेकर ने जीत दर्ज की और बतौर पार्षद बीएमसी पहुंची। पेडणेकर 22 नवंबर 2019 को मुंबई की मेयर पद पर विराजमान हुईं। शिवसेना नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आदित्य ठाकरे और उनकी माता, रश्मि ठाकरे के करीबी के तौर पर भी किशोरी पेडणेकर की पहचान है। पिछले 25 सालों से बीएमसी पर शिवसेना की सत्ता है। ऐसे में पेडणेकर को कई अलग-अलग समिति में काम करने का मौका मिला।
मुंबई में अब तक 7,985 की मौत
वहीं मुंबई में संक्रमितों की संख्या 1,60,744 पर पहुंच गई है। यहां संक्रमण की चपेट में आने से अब तक 7,985 लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि राहत की बात ये है कि यहां 1,26,743 लोग कोरोना वायरस को मात देकर ठीक हो चुके हैं। मुंबई में इस वक्त सक्रिय मामलों की कुल संख्या 25,665 है।
​​महाराष्ट्र में संक्रमितों आंकड़ा 9 लाख 67 हजार पार
वहीं पूरे महाराष्ट्र राज्य की बात करें तो यहां पर कोरोना संक्रमितों की संख्या 9,67,349 है। इस समय यहां पर सक्रिय मामलों की संख्या 2,52,734 है। वहीं 6,86,462 लोग वायरस को मात देकर ठीक हो चुके हैं। यहां अब तक 27,787 लोग कोरोना की चपेट में आने के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं।

Sunday, 13 October 2019

18:57

मुंबई की हमसफर पद्मिनी का सफर हुआ खत्म 2020 से नहीं दिखेंगी मुंबई की सड़कों पर




मुंबई की हमसफर मानी जाने वाली काली-पीली टैक्सी 'पद्ममिनी' का सफर खत्म हो गया है। ये टैक्सियां जून 2020 से मुंबई की सड़कों पर पूरी तरह बंद हो जाएंगी।
दरअसल आइकॉनिक इंडो-इटैलियन मॉडल की प्रीमियर टैक्सी 'पद्मिनी' का प्रोडक्शन साल 2000 में ही बंद हो गया था।
वर्तमान समय में सिर्फ 50 टैक्सियां ही मुंबई की सड़कों पर दौड़ रही हैं। लेकिन इन्हें अगले साल पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसे लेकर मुंबई टैक्सी यूनियन का कहना है कि यह प्रतिष्ठित कार है। लेकिन नई पीढ़ी के लोग अब इसमें बैठना नहीं चाहते हैं। वे नई तकनीक की मॉडर्न कारें पसंद करते हैं। इतनी महंगाई में अब इन टैक्सियों का रख रखाव भी काफी महंगा हो गया है। वहीं, 2013 में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए 20 साल से पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में इन कारों को सड़कों से हटाना एक मजबूरी बन गया है। हालांकि हर मुंबईवासी इनसे भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है। इसलिए पद्मिनी की कमी उन्हें हमेशा खलेगी।
1964 में लॉन्च की थी; रानी पद्मिनी के नाम पर रखा था नाम
कंपनी ने इस कार को 1964 में फिएट 1100 डिलाइट के नाम से बाजार में उतारा था। ये फिएट 1100 का स्वदेशी वर्जन था। लेकिन लॉन्चिंग के एक साल बाद ही इसका नाम बदलकर प्रीमियर प्रेसिडेंट रख दिया गया। वहीं, 1974 में एक बार फिर इसका नाम बदलकर प्रीमियर पद्मिनी रखा गया। ये नामकरण रानी पद्मिनी के नाम पर ही किया गया था।