उझानी में 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में लोक मंगल की कामना हेतु आहुतियां देते श्रद्धालु



उझानी: अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा का चैथे दिन यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ यज्ञ का समापन हो गया। ग्रामीणों ने दक्षिणा में अपनी बुराई दी। मातृशक्ति और देवकन्याओं ने दीप प्रज्ज्वलित किए। पुंसवन, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत और दीक्षा संस्कार हुए। ‘‘ गौ, गंगा, गायत्री, गीता यह भारत की शान पुनीता ‘‘ के जयघोष ग्रामीण नगरी गुंजायमान रही।
शांतिकुंज हरिद्वार से आए टोली नायक शशिकांत सिंह ने कहा कि गुरु के जीवन भर का संपूर्ण तप और शक्ति शिष्य के उत्कर्ष के लिए होती है, संमार्ग दिखाती है। मनुष्यता पाने के लिए श्रेष्ठ ज्ञान अर्जित कर संस्कारवान बनें, सुविचारों से आध्यात्मिक प्रखरता लाएं। श्रेष्ठ कार्यों से मनुष्य का जीवन बहुमूल्य बनता है। बच्चों को अच्छे संस्कार देकर उदात्त और महान बनाएं। मानव जीवन को उपयोगी और उत्कृष्ट बनाने वाले आध्यात्मिक उपचार का नाम ही संस्कार है। उन्होंने कहा प्रज्ञा पुराण का मूल उद्देश्य मानव में देवत्व और धरती पर स्वर्ग का अवतरण है। प्रज्ञा पुराण व्यक्ति के दूषित चिंतन और भ्रष्ट आचरण को सुधारने वाली औषधि है। इसके सेवन से अनाचार, अत्याचार, भ्रष्टाचार और व्यभिचार से मानव मात्र को मुक्ति मिलेगी और धरती पर सतयुग आगमन होगा।
सहायक टोली नायक बसंती लाल सोलंकी ने कहा गृहस्थ एक तपोवन है। चार आश्रमों से श्रेष्ठतम है। जिसमें ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संयास है। गृहस्थ आश्रम में विवाह बंधन सर्वोत्तम बंधन है। पति पत्नी दो शरीर एक आत्मा बनकर रहते हैं। प्रदर्शन, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या जैसे कलंक ने समाज को दूषित कर दिया है। अगर हम समय पर नहीं चेते तो हमारी संस्कृति और मानव जाति का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। जीवन जीने की कला और सामाजिक दायित्व के निर्वहन की विधि परिवार की प्रयोगशाला में ही सीखी जा सकती है। बच्चों को संस्कार, अतिथियों का सत्कार और वृद्धों की सेवा करने की मूल भावना परिवार से मिलती है।
शांतिकंुज के स्वेन कुमार, चिंताराम नाग और दिनेश पाल ने ‘‘ मनुज देवता बनें, बनें यह धरती स्वर्ग समान ‘‘ प्रज्ञागीत का श्रवण कराया। यज्ञ में पुंसवन, अन्न प्रासन, नामकरण, विद्यारंभ, दीक्षा और जन्मदिवस और विवाह दिवस संस्कार भी हुए।
नशा उन्मूलन, गौ संवर्धन, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, मृतक भोज आदि के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। युवाओं नेे पर्यावरण संरक्षण और कभी नशा न करने का संकल्प लिया। वहीं ग्रामीणों ने भी अपने बेटे-बेटियों की शादी में दहेज न लेने और देने का संकल्प लिया।
समाजसेवी प्रदीप गोयल ने देव पूजन, धीरेंद्र सोलंकी, भुवनेश शर्मा ने गुरू पूजन और डाॅ. वीपी शर्मा और प्रदीप गुप्ता ने मातृ पूजन किया। आर्येंद्र यादव और ध्रुव यादव ने सपत्नीक मां गायत्री की आरती की।
लोककल्याणार्थ ग्रामीणों और दूर दराज से आए साधु-संतों ने यज्ञ भगवान को गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र की विशेष आहुतियां समर्पित कीं। यज्ञभगवान की परिक्रमा की। जेपी सिंह ने नियमित योगाभ्यास कराया।
इस मौके पर बी ज्ञानेंद्र, रामभरोसे लाल माहेश्वरी, सुखपाल शर्मा, नरेंद्रपाल शर्मा, भगवान सिंह, वीरेंद्र, रघुनाथ सिंह, मनोज शर्मा, कपिल, उपदेश, चंद्रपाल, अजय, जयसिंह यादव, चैयरमैन दीपमाला गोयल, डीपी सिंह, सुरेंद्र पाल सिसौदिया, सुरेंद्रनाथ शर्मा, नत्थूलाल शर्मा, कालीचरन, सृष्टि, दीप्ति, बालक राम, नरेंद्र सिंह, शैलेश चैहान, धर्मेंद्र यादव, राहुल यादव विवेक, अनमोल आदि मौजूद रहे।