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Saturday, 5 October 2019

इस बार दीपावली पर आसानी से नहीं मिलने वाले हैं पटाखे जाने क्यों









दशहरे को मात्र 4 दिन का समय शेष रह गया है परंतु बाजारों में ढूंढने पर भी पटाखे नहीं मिल रहे है।
दीवाली एक ऐसा त्यौहार है जिसका हिन्दू, सिख व अन्य धर्मों में अपना एक महत्व है, जिस कारण इसे पूरे देश का प्रमुख त्यौहार माना जाता है।आज भी दीवाली के दिनों को फैस्टिव सीजन माना जाता है, जिस दौरान जहां लोगों के चेहरों पर एक अलग नूर होता है वहीं दुकानदारों व उत्पादकों इत्यादि को भी इस त्यौहारी सीजन से खासी आशाएं होती हैं।

दीवाली के दिनों में मिठाई, खाने-पीने के सामान, गिफ्ट आइटमें, घरेलू सामान व अन्य चीजों की बिक्री एकाएक बढ़ जाती है।कुछ साल पहले की बात करें तो दीवाली से महीना-दो-महीना पहले ही बाजारों में पटाखों के स्टाल सज जाया करते थे और बच्चे दीवाली, दशहरे के दिनों के दौरान अक्सर गलियों में पटाखे फोड़ते नजर आ जाया करते थे। धीरे-धीरे पर्यावरण, प्रदूषण व अन्य मामलों में आई जागरूकता का प्रभाव यह हुआ है कि आज दशहरे को मात्र 4 दिन का समय शेष रह गया है परंतु बाजारों में ढूंढने पर भी पटाखे नहीं मिल रहे।
 ऐसे में दीवाली, दशहरे का सीजन शुरू हो जाने के बावजूद शायद ही किसी गली में आपको बच्चे पटाखे चलाते हुए मिलें।

एक्ट के मुताबिक 100 किलो हल्के पटाखों के लिए लाइसैंस जरूरी नहीं
हालांकि पटाखों की बिक्री के लिए एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत लाइसैंस लेना आवश्यक होता है परंतु एक्सप्लोसिव एक्ट 1884 के जानकार बताते हैं कि 100 किलो तक हल्के पटाखे रखने के लिए किसी प्रकार के लाइसैंस की आवश्यकता नहीं होती।
इन हल्के पटाखों में पिस्तौल से चलने वाले छोटे पटाखे तथा फुलझड़ियां इत्यादि शामिल हैं। इन्हें 100 किलो तक घर में प्रयोग हेतु या दुकान पर बिक्री हेतु रखा जा सकता है।

इसके बावजूद आजकल बाजारों में दुकानदारों ने पिस्तौल वाले पटाखे तथा फुलझड़ी जैसे हल्के पटाखे भी नहीं रखे हुए हैं।

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सीजन के बावजूद बाजारों में पटाखों की बिक्री बिल्कुल न के बराबर होने बाबत होलसेल विक्रेता बलदेव बल्लू ने बताया कि एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत दुकानदार 100 किलो तक पिस्तौल के पटाखे व फुलझड़ियां इत्यादि रख सकते हैं परंतु फिर भी पुलिस इत्यादि के डर से या एक्ट का पूरा ज्ञान न होने के चलते छोटे दुकानदारों ने भी इनकी बिक्री बंद कर रखी है। उन्होंने कहा कि 100 किलो तक ऐसे पटाखे घर या दुकान में रखने हेतु किसी प्रकार के लाइसैंस की जरूरत नहीं है। यही कारण है कि आज गलियों में आपको बच्चे भी पटाखे चलाते हुए नजर नहीं आएंगे।

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