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Wednesday, 9 October 2019

विजयदशमी पर जलाए गए रावण के पुतले पर विशेष



कल एक बार फिर विजयदशमी के अवसर पर बुराई के प्रतीक संत महात्माओं एवं ऋषि मुनियों से उनका खून टैक्स के रूप में वसूलने शक्तिस्वरूपा पराई स्त्री पर कुदृष्टि डालकर उसे अपहृत करने वाले असुरराज लंकापति रावण का वध उनका पुतला जलाकर कर दिया गया।इतना ही नहीं बल्कि उसके वध का जश्न भी दशहरा मेला के रूप में पूरे देश में मनाया गया और राक्षस राज के अंत होने के मौके पर एक दुसरे को शुभकामनाएं एवं बधाई भी दी गई। देश की राजधानी में देश के अगुवा राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री ने बाण चलाकर बुराई एवं अन्याय के प्रतीक रावण के पुतले को जलाया तो राज्यों में वहाँ के मुख्यमंत्रियों मंत्रियों एवं सासंदों विधायकों ने दशहरे में पहुंचकर भगवान राम की आरती उतारकर रावण वध के साक्षी बने।हमेशा की तरह इस बार भी इस अवसर पर अस्त्र शस्त्रों की पूजा अर्चना की गई और पूजा करके रक्षामंत्री ने सेना के बेड़े में राफेल लड़ाकू विमान को शामिल कर लिया गया। सभी जानते हैं कि रावण कुंभकर्ण भगवान विष्णु का प्रिय द्वारपाल जय एवं विजय है जो श्रापवश तीन जन्मों के लिए राक्षस बन गया था और भगवान विष्णु को राक्षस योनि से मुक्ति दिलाने के लिए राम के रूप अवतरित होकर उसका वध करना था। राक्षस कुल में पैदा होने के कारण उसकी प्रवृत्ति राक्षसी हो गई थी और वह राक्षसी आचरण करने लगा था।अगर वह आसुरी आचरण नहीं करता तो भगवान का अवतार नही होता क्योंकि भगवान के अवतार के लिए उसका उत्पाती धर्म, साधु-संत एवं ऋषि-मुनि विरोधी होना आवश्यक था।अगर रावण नें संत महात्माओं एवं ऋषि मुनियों को तंगकर शक्तिस्वरूपा उनकी धर्मपत्नी सीताजी का अपहरण न किया होता तो शायद उसका वध करने के लिए भगवान को मर्यादा पुरुषोत्तम राम के रूप में अवतरित न होना पड़ता।सभी जानते हैं कि रावण ब्राह्मण होने के साथ ही प्रकांड विद्वान एवं भगवान शिव का भक्त था लेकिन यह भी सही है कि आसुरी प्रवृत्ति के कारण उसने आराध्य भोलेनाथ को भी नही बख्शा और उनकी भी पत्नी दुर्गा स्वरूपा को भी नहीं बख्शा और उनके ऊपर भी कुदृष्टि डालने से बाज नहीं आया।इसके बावजूद उसका अपना चरित्र था कि बहन के अपमान का बदला लेने के लिए उसने सीताजी को झांसा देकर उनका अपहरण तो किया लेकिन अपने राजमहल में नहीं ले गया बल्कि राजमहल से दूर बाग में महिला बंदी रक्षकों की देखभाल में रखा गया और अपने साथ शादी करने के लिए सोचने का एक माह का समय दिया गया।इतना ही नहीं इस दौरान वह जब भी अशोक वाटिका में उनके पास गया तो अकेले नहीं बल्कि अपनी पत्नी के साथ गया।रावण को तो भगवान के अवतरण का पता तभी चल गया था जबकि उसकी बहन सूपनखा की नाक कटने के उसका भाई खरदूषण बदला लेने उनके पास गया और मार डाला गया।वह जानता था कि उसके भाई को भगवान के अलावा कोई दूसरा युद्ध में मार नहीं सकता है।भगवान राम ने भले ही पराई नारी पर कुदृष्टि डालने वाले रावण को सजाये मौत दे दी हो लेकिन उसके मरने के बावजूद रावण मरा नहीं है और उसकी प्रवृत्ति वाले आज भी जिंदा है।समाज में व्याप्त कलियुगी रावण किसी भी शक्ति स्वरूपा नारी का अपहरण करने के बाद सोचने समझने का समय उसे नहीं देते हैं और न ही अपनी पत्नी के साथ उसके पास जाते हैं।कलियुगी रावण नारी को अपनी शारीरिक हवस ही नहीं बना रहे हैं बल्कि देवीस्वरूपा बच्चियों तक को नहीं छोड़ रहे हैं और मजबूरी का फायदा उठा रहें है।रावण तो राक्षसी पहनावे में था लेकिन कलियुगी रावण संत महात्माओं की वेशभूषा पहने रंगे सियार बने हुए हैं।दुनिया में फैले हिंसा के पुजारी आतंकी आजकल रावण के अत्याचार को पीछे छोड़ चुके हैं और कलियुगी रावण रूपी आतंकी अपने राक्षसराज का विस्तार करने के लिए महिलाओं का अपहरण ही नहीं कर रहे हैं बल्कि बेगुनाहों का कत्लेआम भी कर रहे हैं।रावण का राक्षसी स्वरूप आज  आतंकियों ने धारण कर लिया है और रावण की तरह बेलगाम हो गये हैं।देश के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री ने रावण पर बाण चलाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि अब कलियुगी रावणों के अंत का समय आ गया है।उस समय भी रावण के समर्थक थे और आज भी कलियुगी रावण रूपी आतंकियों के भी समर्थक हैं जो उन्हें सरंक्षण एवं बढ़ावा दे रहे हैं।धरती पर अपहरण, अत्याचार, पापाचार, दुराचार, शील एवं चीरहरण हो रहे हैं तथा धर्म का नाश हो रहा है।आज का रावण त्रेतायुग वाले रावण से आगे हैं जिनका सर्वनाश होना जरूरी हो गया है।हम भगवान से विनती करते हैं कि इन कलियुगी रावण रूपी राक्षसों का विनाश करने के लिए एक बार पुनः धरती पर अवतरित हो।धन्यवाद।। सुप्रभात/वंदेमातरम/गुडमार्निंग/नमस्कार/अदाब/शुभकामनाएं।। ऊँ भूर्भुव स्वः----/ऊँ नमः शिवाय।।। 
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भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट, बाराबंकी यूपी।

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