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Tuesday, 22 September 2020

deepak tiwari लोक भाषा बघेली कवियों में बैजनाथ बैजू सैफुद्दीन



घेली कविता की त्रिवेणी...बैजू सैफू, शंभू...
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लोक भाषा बघेली कवियों में बैजनाथ बैजू,.  सैफुद्दीन सैफू .और शंभू प्रसाद द्विवेदी शंभू काकू .को बघेली कविता का त्रई कहां जाता है । वस्तुतः बघेली में कविताओं के मुख्य शुरुआत यहीं से होती है। यद्यपि इससे पूर्व भी नाथ राय हरिदास और मुन्नीलाल कि कुछ कविताएं मिलती है। बैजू को बघेली कविता का वटवृक्ष कहा जाता है उनकी प्रकाशित बैजू की. सूक्तियां. में बघेलखंड का अंतर्मन झलकता है। 
अभी तक बैजू तथा शंभू काकू की कविताओं का कोई संग्रह लोगों के बीच नहीं है जबकि सैफू का बघेली साहित्य काफी मात्रा में मैं उपलब्ध है। यह सुखद संयोग है कि शंभू काकू का एक कविता संग्रह. बोले चला निरा  लबरी .अगले महीने लोगों के बीच उपलब्ध हो जाएगा वही बैजनाथ बैजू के पौत्र चंद्रनाथ के अनुसार बैजू की प्रकाशित बैजू की .सूक्तियां. का पुनः प्रकाशन के साथ बैजू जी के दो अन्य कविता संग्रह साल के अंत तक छप कर  लोगों के बीच उपलब्ध हो जाएंगे ।  यह बघेली साहित्य के लिए एक उपलब्धि होगी ।

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