शासकीय राशन दुकान संचालक सेल्समैनो की संपत्ति की हो जांच


रीवा। दीपक तिवारी शासकीय उचित मूल्य दुकान पर जिले में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हितग्राही सुबह से शाम तक आकर बैठे रहने के बावजूद राशन नहीं मिल पा रहा है जिससे राशन कार्ड हितग्राही परेशान हैं।राशन कार्ड हितग्राहियों को अपने दैनिक मजदूरी काम धंधा छोड़कर सुबह से शाम तक जाकर शासकीय उचित मूल्य के दुकान में बैठना पड़ता हैं। इसके बाद भी समय में राशन नहीं मिल पा रहा हैं।राशन लेने के लिए महीनों से हितग्राहियों को दुकानों का चक्कर काटना पड़ता हैं, इसके बावजूद राशन लेने से वंचित रह जाते हैं ।
जिले में गरीबों को बांटे जा रही राशन सामग्री सेल्समैन के द्वारा खाद्यान्न माफियाओं की शह पर तस्करी की जाती यही नहीं खाद्यान्न के साथ साथ आने वाली केरोसिन मिट्टी तेल को वितरण ना कर ट्रक हाईवा संचालकों को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है,बार-बार शिकायतों की एक लंबी फेहरिस्त है,किंतु जिला खाद्य विभाग मूकदर्शक की भूमिका का निर्वहन कर रहे कई शिकायतों की बिना जांच किए ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। ज्ञात हो कि ग्रामों में पात्रता पर्ची को लेकर जिला से लेकर ग्राम पंचायत भवन तक के चक्कर काटते मिल जाएंगे गरीब हितग्राही। किंतु सेल्समैनों द्वारा शासन की मंशाओ पर इस कदर पानी फेरा जा रहा है की अपने जिले के उन सभी गरीब हितग्राहियों बीपीएल कार्ड धारियों के साथ-साथ अंतिम छोर पर उम्मीद व आसाओ भरी नजरों से इस उम्मीद पर ताक रहा है कि व्यवस्था में सुधार होगा। नित नई नियमों व्यवस्थाओं का संचालन करने के लिए तत्पर मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं पर इन खाद्यान्न तस्करों के द्वारा रोड़ा अटकाया जा रहा है।

 *कैसे बने अकूत संपत्ति व चार पहिया वाहनों के मालिक।* 
कुछ वर्षों पूर्व रीवा जिले में खाद्य विभाग में एक छोटे ओहदे का कर्मचारी खाद्यान्न वितरण करने वाला सेल्समैन कुछ वर्षों के अंतराल में पूर्व स्थिति का अवलोकन किया जाए तो एक टूटी फूटी साइकिल पर चलने वाला सेल्समैन आज करोड़ों की संपत्ति बंगला चार पहिया वाहन के साथ साथ कई चीजों का मालिक बना बैठा है। इन खाद्य माफिया द्वारा गरीबों के हक का निवाला छीन कर लाखों और करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन बैठा है। इस स्थिति में जिला प्रशासन को इनके द्वारा अवैध रूप से कमाई गई संपत्ति की जांच की जाए। जिससे आने वाले समय पर किसी के द्वारा सरकार की सर्वोत्तम जनकल्याणकारी योजना के माध्यम से गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले गरीब परिवारों को दी जाने वाली खाद्य सामग्री की खरीद-फरोख्त व तस्करी करने से पहले शासन के नाम का भय बना हो।बड़ी विडंबना है कि पूर्व में डिजिटल मापदंडों की प्रक्रिया ना होने की वजह से खाद्यान्न का उठाव अत्याधिक मात्रा में किया जाता था किंतु अब इन खाद्य माफियाओं की उम्मीदों में पानी फेर दिया गया जिसकी वजह से तिल मिलाएं सेल्समैनो को चोरी करने के सारे रास्ते बंद हो गए जिसके कारण इनके द्वारा पूर्व में कम वेतनमान पर कई वर्षों से अपनी सेवा प्रदान कर रहे थे। और इनके मुंह से ना तो वेतन बढ़ाने की और ना स्थाई तौर पर रखने की बात कही गई,किंतु कुछ समय से इनके द्वारा जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया गया क्या कारण है इस प्रकार गरीबों के हक पर डाका डालने के साथ-साथ उनके हक में सरकार के द्वारा दी जा रही खाद्य सामग्रियों की तस्करी की जाती रही और आज के परिवेश में इनकी सूक्ष्म रूप से जांच की जाए तो जिले के कई ऐसे सेवा सहकारी समितियों के सेल्समैनो के पास करोड़ों की संपत्ति मिल सकती है।
आनलाईन फिंगर के माध्यम से राशन वितरण कार्यप्रणाली नीति अपनाया हैं,लेकिन कही आनलाईन सर्वर व्यस्त कही तो फिंगर नहीं आना सबसे बड़ी समस्या तो वृद्ध हितग्राहियों का अंगूठा ना आने के कारण राशन नहीं मिल पा रहा हैं।समय में राशन ना मिलने के कारण लोग आक्रोशित होकर परेशान हो रहे हैं।यदि महीने के अंदर में कोई हितग्राही राशन लेने में चुक गया तो उसको दूसरे महीने में वीते माह का राशन नहीं मिल पाता इस प्रकार की अनेक समस्याओं से परेशान हो रहे हैं।ऐसे ग्राम पंचायत जिले में भरे पड़े हैं।संचालित शासकीय उचित मूल्य की दुकान समय में ना खुलने एवं नेटवर्क व्यस्त होने के कारण राशन लेने वाले हितग्राहियों का भारी भीड़ होने से राशन लेने वाले हितग्राही परेशान होते हैं, इस कारण कुछ राशन कार्ड राशन लेने से वंचित रह जाते हैं, और महीने के अंतिम दिनों में राशन दुकान खुलता हैं, इन्ही अनेक परेशानियों से परेशान होकर ग्रामीण हितग्राहियों बीपीएल परिवारों को समस्या बनी हुई है। राशन कार्ड हितग्राहियों की मांग हैं कि शासकीय उचित मूल्य की दुकानों राशन वितरण की व्यवस्था दुरुस्त की जाए।