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Saturday, 30 November 2019

21:04

संदिग्ध परिस्थितियों में कीटनाशक दवा का सेवन करने से विवाहिता गंभीर


महुली सोनभद्र
विन्ढमगंज थाना क्षेत्र के जोरूखाड गांव की निवासी एक महिला ने संदिग्ध परिस्थितियों में कीटनाशक का सेवन कर आत्महत्या करने की कोशिश किया। मुनि देवी 38 वर्ष पत्नी उदित कुमार ने शुक्रवार की  रात करीब 11:00 बजे घर रखा घान में डालने की कीटनाशक दवा खा लिया। कुछ देर बाद जब उसे उल्टी होने के साथ-साथ उसकी हालत बिगड़ने लगी। महिला के मुंह से कीटनाशक दवा की महक का एहसास होते ही आनन-फानन में परिजनों ने समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी भर्ती कराया। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक द्वारा उसे उल्टी करा तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कर लिया।महिला की स्थिति में सुधार बताया जाता है।
20:58

युवक मंगल दल द्वारा सरोली गांव में निकाली गई भव्य शोभायात्रा


युवा सामाजिक संगठन युवक मंगल दल द्वारा घोरावल ब्लॉक के सरौली गांव में आयोजित की जा रही संगीतमय सप्तदिवासिय श्रीमद्भागवत भागवत व ज्ञानयज्ञ कथा का शुभारंभ भव्य कलश शोभा यात्रा के साथ किया गया।कार्यक्रम का सुभारम्भ संगठन के संरक्षक व जिलापंचायत सदस्य राजकुमार यादव एंव पुरोहित यज्ञाचार्य सौरभ भारद्वाज के द्वारा किया गया।राधे-राधे,राधे-कृष्ण के उदघोष के साथ 108 कन्याओं एंव सभी ग्रामीणों के द्वारा भव्य कलश सोभा यात्रा निकली गई।कथा की सुरुआत कल रविवार से कथावाचिका परम पूज्य बाल व्यास आराधना शास्त्री के द्वारा सांय चार बजे से की जायेगी।कार्यक्रम का सुभारम्भ बाल व्यास जी व आईएस साक्षी गर्ग जी के कर कमलों द्वारा किया जायेगा।कलश यात्रा के मुख्य यजमान प्रेमनाथ उपाध्याय,मुनि व्यास गिरी,कृपाशंकर पटेल,रामायण यादव के द्वारा विधिवत विधि-विधान से पूजन कर कलश यात्रा की सुरुआत कराई गई।संगठन के जीलाध्यक्ष सौरभ कांत पति तिवारी,जिला मंत्री मनोज दीक्षित,सामाजिक कार्यकर्ता नीतीश चतुर्वेदी,आलोक मिश्रा,मुकेश द्विवेदी ने कहा कि कार्यक्रम में ग्रामीण भाइयों एंव बहनों का अमूल्य योगदान है।उन्होंने कहा कि गांव के लोगों का उत्साह देख लग रहा है कि कार्यक्रम में सभी लोगों की सभागिता देखने को मिलेगी और कहा कि पंचायत इकाई के सदस्यों की टीम गठित कर दी गई है,जिसमे सभी कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।उक्त अवसर पर अजित पटेल,आलोक,रवि यादव,सुभम, जीतू,शोभनाथ,राजेश यादव,छविनाथ पटेल,जितेंद्र मौर्य,संतोष पाण्डेय,अवधेश मिश्रा,संदीप पटेल,प्रमोद गिरी,अनूप कुमार,प्रिंस,रोहित आदि लोग उपस्थित रहे।
20:54

आगामी पारी की शुभकामनाओं के साथ सेवानिवृत्त सहयोगी यों का हुआ अभिनंदन



नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) परिवार ने नवम्बर में सेवानिवृत्त हो रहे अपने 6 अधिकारियों एवं 51  कर्मचारियों के सम्मान में शनिवार को अभिनंदन समारोह का आयोजन किया। कंपनी मुख्यालय से सेवानिवृत्त हुए कार्यालय अधीक्षक श्री मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव, सहायक फोरमैन वीरेंद्र नाथ तिवारी एवं कुक दीवान राम के सम्मान में आयोजित समारोह में एनसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) श्री पी. के.  सिन्हा बतौर मुख्य अतिथि एवं निदेशक(तकनीकी/संचालन) श्री गुणाधर पाण्डेय व निदेशक (वित्त एवं कार्मिक) श्री एन. एन. ठाकुर बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए।

कंपनी मुख्यालय में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री सिन्हा ने कहा कि अपने कर्मियों के मेहनत, समर्पित योगदान एवं अपनत्व बोध की बदौलत ही आज एनसीएल कामयाबी के मौजूदा शिखर तक पहुंच पाई है और कंपनी को एक नई पहचान मिली है। सेवानिवृत्त सहयोगियों की कार्यशैली एवं विभिन्न क्षेत्रों में  योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने एनसीएल प्रबंधन की ओर से उनकी सेवाओं के प्रति आभार जताया।

निदेशक(तकनीकी/संचालन) श्री गुणाधर पाण्डेय ने सेवानिवृत्त सहयोगियों के अमूल्य योगदान से कंपनी के 100 मिलियन टन पर पहुँचने की बात कही।

निदेशक (वित्त एवं कार्मिक) श्री एन.एन. ठाकुर ने सेवानिवृत्त सहयोगियों को जीवन की आगामी पारी की विशेष शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में एक-दूसरे के सहयोग के प्रति तत्पर रहने की बात कही। साथ ही, सेवानिवृत्ति के पश्चात् प्राप्त होने वाले धन के प्रबंधन का मंत्र भी उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मियों को दिया।

सेवानिवृत्त सहयोगियों ने भी कार्यक्रम में अपनी-अपनी सेवाओं से जुड़े संस्मरण साझा किए। कार्यक्रम में उपस्थित महाप्रबंधकगण, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी सेवानिवृत्त सहयोगियों से जुड़े अपने संस्मरण साझा किए।

कंपनी के सभी कोयला क्षेत्रों में भी सेवानिवृत्त सहयोगियों के सम्मान में अभिनंदन समारोह आयोजित किए गए।
20:50

कांग्रेस प्रदेश सचिव ने कलेक्टर को लिखा पत्र



सिंगरौली- कागें्रस प्रदेश सचिव अमित द्विवेदी ने कलेक्टर को पत्र लिखकर मांग किया है कि एनसीएल अमलोरी अपने सीएसआर मद से गड़ेरिया,चिनगी टोला,बिहरा,खुटार,कंजी,सोलग,पडऱी सहित अन्य गांव में स्वास्थ्य शिविर लगा कर ग्रामीणो को स्वास्थ्य लाभ के साथ विद्यार्थियों को सामग्री उपलब्ध कराने  की मांग की है। श्री द्विवेदी कलेक्टर को दिये पत्र में कहा कि ग्रामीणों का जीवन स्तर व स्वास्थ्य सुधार हेतु नीति आयोग द्वारा एनसीएल अमलोरी परियोजना को सौपे गये गांव गड़हरा, काजन,लूरी,देवरी,पडेनिया,लूरी,खुटार कंजी, करकोसा, ढेकी,धतूरा, हरदी, कुसमहरा, ढेकी, डिग्घी, गहिलरा ,कंजी, जरौधी, सोलंग,पड़री आदि अन्य सहित अन्य गावों में एनसीएल अपने सीएसआर मद से स्वास्थ्य शिविर लगाये। साथ ही इन्ही ग्रामीण क्षेत्रो में शिक्षा के स्तर को बढावा देने के लिये छात्र छात्राओं को स्वेटर,स्कूल  बैग,टिफिन, पानी की बोतल अन्य सामग्री उपलब्ध कराया जाये ताकी छात्र छात्राओं को शिक्षा का लाभ मिल सके।


20:46

विस्थापितों को रोजगार ना दिए जाने के मामले में अनुसूचित जनजाति आयोग भारत सरकार ने सीएमडी एनसीएल से किया जवाब तलब


एनसीएल की कोयला खदानो हेतु किये गये भूमि अधिग्रहण मे भूमि एवं भवन के अधिग्रहण से विस्थापितो एवं उनसे सम्बन्धित परियोजना प्रभावित सदस्यो को एनसीएल मे संचालित संविदा कार्य जिसमे अधिभार के खनन व अभिवहन का कार्य भी सम्मिलित है मे विस्थापित आदिवासियो को रोजगार न दिये जाने के मामले मे अनुसूचित जनजाति आयोग, भारत सरकार ने नाराजगी जताते हुये सीएमडी, एनसीएल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है तथा समुचित जवाब मांगा है और निर्धारित समयावधि मे जवाब प्राप्त न होने पर व्यक्तिगत् उपस्थित होने हेतु सम्मन् जारी करने की चेतावनी दी है। विस्थापित नेता अंकुश कुमार दुबे ने मास अगस्त मे अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति आयोग को एनसीएल की बीना-ककरी अमलगमेशन ओपेन कास्ट परियोजना हेतु किये गये भूमि अधिग्रहण से प्रभावित आदिवासीयो को एनसीएल की परियोजना मे संचालित संविदा कार्य जहा हाई पावर कमेटी द्वारा संस्तुत मजदुरी दर देय है मे रोजगार न दिये जाने से विस्थापित आदिवासियो व उनसे सम्बन्धित परियोजना प्रभावित सदस्यो के समक्ष आजिविका के संकट तथा हो रहे ऐतेहासिक अन्याय के प्रकरण पर आवश्यक हस्तक्षेप किये जाने बाबत 119 पन्नो की विस्तृत शिकायती पत्र प्रेषित किया था जिसके क्रम मे एसटी कमीशन ने नोटिस जारी कर यह कार्यवाही की है। अंकुश दुबे ने बताया कि एनसीएल व संविदा कम्पनियो, फर्मो, ठेकेदारो के मध्य संपादित होने वाली एनआईटी(समझौते) मे स्पष्ट प्राविधान है कि ठेकेदार पुर्नवास-पुर्नव्यवस्थापन नीति के प्रावधिनानुसार परियोजना प्रभावित सदस्यो को रोजगार उपलब्ध करायेगा तथा कोल इण्डिया की पुर्नवास-पुर्नव्यवस्थापन नीति-2012 मे प्राविधान है कि ठेकेदार प्राथमिकता के आधार पर विस्थापितो से सम्बन्धित परियोजना प्रभावित सदस्यो को रोजगार उपलब्ध करायेगा परन्तु एनसीएल प्रबंधन व जिला प्रशासन की लापरवाही व ढुल-मुल रवैये के के वजह से विस्थापितो को रोजगार नही मिलता है तथा विस्थापितो के हिस्से के रोजगार का व्यापार किया जाता है व वर्ष 2017 से ही मांग की जा रही है कि विस्थापितो को संविदा कार्यो मे रोजगार दिया जाये तथा रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया मे एनसीएल प्रबन्धन के अतिरिक्त किसी की कोई भूमिका न हो, ऐसे मे अब एसटी कमीशन द्वारा जवाब-तलब् किये जाने के बाद विस्थापितो के रोजगार की लडाई को एक नया बल मिला है तथा इसे मंजिल तक पहुंचाने के लिये सडक पर संघर्ष जारी किया जायेगा।
17:43

कौन बनेगा भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष गरमाने लगी राजनीति


*रिपोर्ट,के सी शर्मा*
 दरअसल, भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष के कई दावेदार हैं और वे अपने समीकरण भी बैठा रहे हैं।
संगठन चुनाव की प्रकिया के आखिरी दौर में भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेशाध्यक्ष को लेकर सियासत गरमा गई है। जिलाध्यक्षों के चुनाव 30 नवंबर को होने के तत्काल बाद प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव की गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए दावेदारों ने जोर-आजमाइश भी शुरू कर दी है। मौजूदा अध्यक्ष राकेश सिंह ही पार्टी के अगले प्रदेश अध्यक्ष होंगे या कोई नया चेहरा प्रदेश की कमान संभालेगा, इसे लेकर कयासबाजी भी खूब चल रही है। सियासतदार कह रहे हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अब तक प्रदेशाध्यक्ष को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, अगर दोनों के बीच कोई समन्वय हो गया तो प्रदेशाध्यक्ष पद के चुनाव में तस्वीर बदल भी सकती है।

दरअसल, भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष के कई दावेदार हैं और वे अपने समीकरण भी बैठा रहे हैं। सागर संभाग से पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह भी प्रदेशाध्यक्ष के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। हालांकि नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह एक ही जिले व एक ही संभाग से आते हैं पर इसके लिए तर्क दिए जा रहे हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह दोनों ही एक राज्य से है

भूपेंद्र सिंह को चौहान और तोमर दोनों का ही करीबी माना जाता है। संघ की पसंद के चलते खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा का नाम भी दौड़ में शामिल है। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इधर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा पहले भी अध्यक्ष रह चुके हैं, इसलिए वे भी दावा ठोक रहे हैं।
किसकी-क्या संभावना

*राकेश सिंह की हो सकती है पुनरावृत्ति*

राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से नजदीकियों के चलते संभावना है कि राकेश सिंह को ही दोबारा मौका मिल जाए। चूंकि राकेश सिंह को अधूरा कार्यकाल मिला था, इसलिए संभावना है कि पार्टी उन्हें एक मौका और दे। मोदी कैबिनेट में मंत्री पद नहीं देने के पीछे यही तर्क दिया जा रहा है कि पार्टी उन्हें संगठन में ही रखना चाहती है।

*साझा प्रत्याशी बन सकते हैं भूपेंद्र सिंह*

पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की साझा पसंद बन सकते हैं। वरिष्ठता के लिहाज से भी वे सांसद होने के साथ ही संगठन के कई पदों पर रह चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष ब्राह्मण होने के कारण सिंह के साथ जातिगत संतुलन बैठाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

*प्रभात झा भी ठोक रहे दावेदारी*

झा पहले प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं। संगठन में काम करने का बेहतर अनुभव है। प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए सर्वाधिक दौरे किए। फिलहाल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। संघ नेताओं के करीबी होने के कारण दावेदारी मजबूत है पर उम्र बंधन के कारण दौड़ से बाहर हो सकते हैं।
*नरोत्तम मिश्रा हाईकमान के भरोसे*

पूर्व मंत्री मिश्रा हाईकमान के भरोसे प्रदेशाध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहे हैं। लंबे समय तक प्रदेश में मंत्री रहे। पहले भी प्रदेशाध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष पद के भी दावेदार थे।

*वीडी शर्मा संघ की पसंद*

संघ पृष्ठभूमि के चलते सीधे लोकसभा चुनाव का टिकट मिला और सांसद बने। संघ की खास पसंद माने जाते हैं। फिलहाल प्रदेश संगठन में भी महामंत्री हैं। विद्यार्थी परिषद में काम करने के कारण संगठन का बेहतर अनुभव है।
हाईकमान के करीबी कैलाश विजयवर्गीय मालवा से प्रबल दावेदार हैं, मंत्री पद छोड़कर संगठन का काम संभाला। राष्ट्रीय महासचिव हैं। फिलहाल पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं। लोकसभा चुनाव में बेहतर परिणाम भी दिए। हाईकमान के भी करीबी हैं।
- संगठन चुनाव अपने अगले पड़ाव पर है। 30 नवंबर आज  जिलाध्यक्ष का चुनाव होना है। तत्पश्चात प्रदेशाध्यक्ष का चुनाव होगा। संगठन की गाइडलाइन के मुताबिक कोई सामान्य कार्यकर्ता भी प्रदेशाध्यक्ष हो सकता है।
17:37

बदायूं आगमन पर नवनिर्वाचित अध्यक्ष का हुआ जोरदार स्वागत


बदायूं- भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित जिला अध्यक्ष अशोक भारती जी का आगमन जनपद में निर्वाचित होने के बाद पहली बार हुआ बरेली से बदायूं तक स्वागत सम्मान का जोरदार कार्यक्रम कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित किए गए बदायूं नगर में जुलूस के साथ कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त स्वागत सत्कार किया लखनऊ से राज मंत्री महेश चंद गुप्ता जी दर्जा राज्यमंत्री एवं प्रदेश उपाध्यक्ष बी एल वर्मा जी नवनिर्वाचित अध्यक्ष के साथ जनपद में सम्मिलित हुए पूर्व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र सक्सेना अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य मनोज मसीह बदायूं चेयरमैन दीपमाला गोयल महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष सीमा राठौर अंजू सिंह अजय तोमर मंडल अध्यक्ष अखिल अग्रवाल मंडल अध्यक्ष पूर्व मंडल उपाध्यक्ष गिरीश पाल सिंह राहुल शंखधर युवा नेता विश्वजीत गुप्ता पंकज तोमर राघवेंद्र सिंह अंकित मौर्या अशोक तोमर रानी पुंडीर विनोद कुमार  लक्ष्मीनारायण प्रधान अमित शर्मा संजीव गुप्ता अनुज महेश्वरी जिला अध्यक्ष युवा भाजप जिला कार्यालय पर  जोरदार उत्साह के साथ भारी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे

गोविंद सिंह राणा बदायूं
15:10

लंबी दूरी तक मार करने वाली देश की पहली रिवाल्वर लांच




(.32 बोर श्रेणी में) सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली निशंक रिवाल्वर शुक्रवार को निर्माणी सभागार में आयोजित एक समारोह में लांच की गई....

कानपुर में बनी लंबी दूरी तक मार करने वाली रिवाल्वर 'निशंक', खूबियां जानकर हैरान रह जाएंगे आप

कानपुर की फील्ड गन फैक्ट्री में अत्याधुनिक रिवाल्वर का निर्माण किया गया है। ये अब तक सबसे ज्यादा दूरी तक मार करने वाली रिवाल्वर है। यही नहीं इसके लिये बनाया गया होल्स्टर भी फिंगर प्रिंट एक्सेस वाला है।



कानपुर। अगर आप रिवाल्वर रखने का शौक रखते हैं या आप नई रिवाल्वर लेने वाले हैं तो कानपुर की फील्ड गन फैक्ट्री ने .32 बोर की नई रिवॉल्वर लॉन्च की है। जो देखने में बेहद शानदार है और सबसे खास बात ये देश की पहली सबसे दूर तक फायर करने वाली रिवाल्वर है। फील्ड गन फैक्ट्री में ने इसे और सुरक्षित बनाने के लिये काफी काम किया है। साथ ही रिवाल्वर को सुरक्षित करने के लिए फील्ड गन फैक्ट्री ने एक होल्स्टर भी लांच किया है जो सिर्फ लाइसेंस धारक की फिंगरप्रिंट से ही खुलेगा।
            कानपुर की फील्ड गन फैक्ट्री में रखी इस नई-नवेली रिवॉल्वर की खेप को जिस किसी ने देखा वो देखता ही रह गया और रिवाल्वर की खूबियां देख रोमांचित हो उठा। और हो भी क्यों ना, ये अत्याधुनिक हथियारों की रेंज में से एक है। इसका नाम है 'निशंक'।

.32 बोर की इस अत्याधुनिक 'निशंक' रिवॉल्वर की मारक क्षमता की बात करें तो ये पूरे देश में फायर रेंज के मामले में अव्वल है। अभी तक जितनी भी रिवॉल्वर मार्केट में थी, उनकी मारक क्षमता अधिकतम 20 मीटर तक थी। वहीं निशंक 50 मीटर तक अपने लक्ष्य को भेद सकेगा। यही नहीं निशंक रिवॉल्वर बेहद हल्की है। इसका भार महज 750 ग्राम है जबकि इसका ट्रिगर पुल आउट भी काफी आसान है। यानी महिलाएं भी अपनी सुरक्षा के लिए इसका बखूबी इस्तेमाल कर सकेंगी।

*फिंगर प्रिंट से एक्सेस होने वाला होल्स्टर*
आज निशंक रिवॉल्वर की लॉन्चिंग के साथ साथ इस रिवॉल्वर की हिफाजत के लिए एक अत्याधुनिक कवर भी लॉन्च किया है। इस कवर का होल्स्टर है और ये पूरी तरह से फिंगर एक्सेस है। लाइसेंस धारक के अलावा जिन 4 लोगों के फिंगर प्रिंट एक्सेज होगा सिर्फ वही इस गन का इस्तेमाल कर सकेगा।
        फील्ड गन फैक्ट्री कानपुर की ये दोनों खोज बदलते दौर में किसी नायाब कीर्तिमान से कम नहीं हैं। इनके मार्केट में आने के बाद जहां सिक्योरिटी और मजबूत होगी, तो वहीं लोगों में खासकर महिलाओं में सेफ्टी का भी एहसास होगा। अगर दाम की बात की जाए तो निशंक की कीमत 94 हजार होगी तो होल्स्टर की कीमत लगभग 10 हजार होगी।
15:06

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों का पूरा विश्व कर रहा है अनुसरण



भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान की शीर्ष समिति की बैठक अभियान के सिविल कम्पाउन्ड बदायूं स्थित शिविर कार्यालय पर आयोजित की गई। बैठक में भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई। सन्गठन के जिला व तहसील स्तरीय पदाधिकारी नामित कर मनोनयन पत्र व परिचय पत्र वितरित किए गए।

इस अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के मुख्य प्रवर्तक हरि प्रताप सिंह राठोड़ एडवोकेट ने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के विचारों का पूरा विश्व अनुसरण कर रहा है। पूरी दुनिया में भारत को जो आदर प्राप्त हो रहा है वह राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के कारण हो रहा है। महात्मा गांधी के विरुद्ध नकारात्मक सोच वाले व्यक्तियों की राष्ट्र भक्ति संदेहास्पद है। राजनैतिक दलों को महात्मा गांधी के प्रति नकारात्मक सोच रखने वाले तत्वों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

जिला समन्वयक रामगोपाल ने कहा कि व्यवस्था सुधार के मिशन को गति प्रदान करने तथा जनोपयोगी कानूनों को प्रभावी बनाने हेतु सात दिसम्बर 2019 को प्रत्येक तहसील मुख्यालय पर सत्याग्रह करके महामहिम राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सम्बन्धित उपजिलाधिकारी को सौंपे जाएंगे।14 दिसंबर 2019 को मुख्यालय पर सूचना कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर आयोजित होगा।21 दिसंबर 2019 को प्रत्येक ब्लाक पर खन्ड विकास अधिकारी के कार्यालय पर सत्याग्रह के कार्यक्रम आयोजित होंगे।28 दिसंबर 2019 को मालवीय आवास गृह बदायूं पर सत्याग्रह किया जायेगा।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से एस सी गुप्ता,एम एल गुप्ता,शमसुल हसन, अखिलेश सिंह,सी एल वर्मा,अभय माहेश्वरी, आकाश तोमर,असद अहमद,नारद सिंह, अखिलेश सोलंकी,आर्येन्द्र पाल सिंह, सतेन्द्र सिंह, नेत्रपाल, महेश चंद्र आदि उपस्थित रहे।
13:41

आरोग्य केंद्र गोविंदपुर में हुआ विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन



गोविंन्दपुर/से बाबू लाल शर्मा की रिपोर्ट

म्योरपुर चिकित्सा क्षेत्र में स्थित बनवासी सेवा आश्रम ग़ोविन्दपुर (आरोग्य केन्द्र) में 29नवंबर को क्षेत्र के लोगों के लिऐ विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ इस स्वास्थ्य शिविर में BMD एक विशेष मशीन द्वारा विशेषज्ञ  डाक्टरों की टीम द्वारा हड्डियों में कैल्सियम आदि की कमी, सांस से संबन्धित बीमारी की जांच,  सुगर का जांच व इलाज सलाह शिविर में डा. विभा बहन के सफल संयोजन में दिया गया। इस स्वास्थ्य शिविर में क्षेत्र के करीब 600 से ज्यादा  जरूरतमंद अपना स्वास्थ्य जांच कराकर इलाज करवाया। इससे पहले शिविर का उद्घाटन MOIC  म्योरपुर के द्वारा फीता काटकर किया गया। इस स्वास्थ्य शिविर में  मुख्य रूप से डॉ विभा,गंगाराम,राधेकृष्ण,रेखा शर्मा,दुर्गा,और आये हुए डॉक्टर की विशेष टीम उपस्थित रही।
13:38

30 नवंबर जगदीश चंद्र बोस जी के जन्म दिवस पर विशेष


के सी शर्मा*
कोई भी व्यक्ति ऐसे ही महान नही बन जाता है उस महानता तक पहुचने के लिए कठोर परिश्रम और एक ही विश्वास पर अडिग रहना पड़ता है | जगदीश चन्द्र बोस भी ऐसे ही व्यक्ति थे उन्होंने कभी भी किसी भी समस्या से हार नही मानी

बोस का प्रारम्भिक जीवन |
 सर जगदीश चन्द्र बोस का जन्म बंगाल के मुंशीगंज इलाके (वर्तमान में बांग्लादेश में स्थित ) में 30 नवम्बर 1858 को हुआ था | उनके पिता भगवान चन्द्र बोस फरीदपुर में डिप्टी मजिस्ट्रेट और ब्रह्म समाज के नेता थे | बोस ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा वेर्नाकुलर स्कूल में हुयी थी क्योंकि उनके पिता का मानना था कि अंग्रेजी सीखने से पहले किसी को भी अपनी मातृभाषा सीखनी चाहिए | बोस ने 1869 में “हरे स्कूल” में प्रवेश लिया और उसके बाद कोलकाता की सेंत ज़ेवियर स्कूल में आगे की पढाई की |बोस को बचपन से ही पेड़ पौधों के बारे में जानने की इच्छा थी | उन्होंने पेड़ पौधों पर अध्यययन करना बचपन से ही शुरू कर दिया था | बचपन में जब उन्हें पेड़ पौधे के बाए में संतुष्ट करने वाले उत्तर नही मिले तो बड़े होकर वे इसकी खोज में लग गये |

1875 में बोस ने कलकत्ता विश्वविद्यालय के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की और सेंट ज़ेवियर स्कूल में दाखिला लिया था | 1879 में उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की | बोस सिविल परीक्षा पुरी करने के लिए इंग्लैंड जाना चाहते थे लेकिन उनके पिता ने उन्हें नही जाने दिया | उनके पिता चाहते थे कि वो एक विद्वान बनकर दुसरो के लिए नही बल्कि अपने लिए काम करे | फिर भी बोस लन्दन विश्वविद्यालय में मेडिसिन की पढाई के लिए गये लेकिन खराब स्वास्थ्य की वजह से उन्हें वापस लौटना पड़ा |

इसके बाद 1884 में लन्दन विश्वविद्यालय से Bsc की और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से प्राकृतिक विज्ञान में डिग्री ली | कैम्ब्रिज में बोस के अध्यापको में माइकल फोस्टर , जेम्स डेवर और फ्रांसिस डार्विन जैसे महान वैज्ञानिक थे | जब  बोस कैम्ब्रिज में पढ़ रहे थे तब प्रफूल्ल चन्द्र रॉय एडिन्बुर्ग में छात्र थे | उन दोनों की मुलाकात लन्दन में हुयी और दोनों घनिष्ट मित्र बन गये | बोस ने बाद में एक सामाजिक कार्यकर्ता अबला बोस से विवाह किया था |

अंग्रेजो को अपने आत्मसम्मान के खातिर किया था परास्त

कोलकाता में भौतिकी का अध्ययन करने के बाद  बोस इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय चले गये | वहा से स्नातक की उपाधि लेकर वो भारत लौट आये | उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज के प्राध्यापक का पद ग्रहण कर लिया | उन दिनों अंग्रेज और भारतीय शिक्षको के बीच भेदभाव किया जाता था | अंग्रेज अध्यापको की तुलना में भारतीय अध्यापको को केवल दो तिहाई वेतन दिया जाता था |
 बोस अस्थाई पद पर थे इसलिए उन्हें केवल आधा वेतन ही मिलता था | वे इससे बहुत दुखी हुयी और उन्होंने घोषणा कर दी कि समान कार्य के लिए वे समान वेतन ही स्वीकार करेंगे “मै पूरा वेतन ही लूँगा अन्यथा वेतन नही लूँगा” | तीन साल तक बोस ने वेतन नही लिया | वे आर्थिक संकटो में पद गये और उन्हें शहर से दूर सस्ता मकान लेना पडा

कोलकाता काम पर आने के लिए वे अपनी पत्नी के साथ हुगली नदी में नाव खेते हुए आये थे | उनकी पत्नी नाव लेकर अकेली लौट जाती और शाम को वापस नाव लेकर उन्हें लेने आती | लम्बे समय तक पति पत्नी इसी प्रकार अपने आने जाने का खर्चा बचाते रहे | आखिरकार अंग्रेजो को उनके सामने झुकना पड़ा |बोस को अंग्रेज अध्यापको कके बराबर मिलने वाला वेतन देना स्वीकार कर लिया गया |

जब सफल हुआ प्रयोग

यह घटना उस समय कि है जब भारत के महान वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बोस Jagadish Chandra Bose इंग्लैंड में थे | उन दिनों वह इस बात की खोज में लगे हुए थे कि पौधों में भी जीवन है और वे भी हमारी तरह पीड़ा का अनुभव करते है | वह इसे सिद्ध करने के लिए दिन रात प्रयोग में जुटे हुए थे | आखिर वह दिन भी आ गया , जब उन्हें लोगो के सामने इस बात को सिद्ध करना था | उस दिन उनका प्रयोग देखने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक और लोग एकत्रित थे |

बोस ने एक नजर भीड़ पर डाली , जो बेसब्री से उनके प्रयोग की प्रतीक्षा कर रही थी और दुसरी नजर उस पौधे पर जिसके माध्यम से वह प्रयोग करने वाले थे | उन्होंने इंजेक्शन द्वारा उस पौधे को जहर दिया | बसु के प्रयोग के अनुरूप जहरीले इंजेक्शन से पौधे को मुरझाना चाहिए था लेकिन कुछ समय बाद भी जब पौधा नही मुरझाया तो वहा उपस्थित लोग उनका मजाक उड़ाने लगे |

बसु के लिए यह अत्यंत कठिन घड़ी थी | वह अपने प्रयोग के प्रति पुरी तरह आश्वस्त थे | उन्हें लगा कि यदि जहरवाले इंजेक्शन से पौधे को नुकसान नही पहुचाया तो वह उन्हें भी नुक्सान हो सकता है | हो सकता है कि शीशी में जहर की बजाय कुछ ओर हो | यह सोचकर बोस ने जहर की शीशी उठाई और अपने मुह से लगा दिया | उन्हें ऐसा करते देख सभी चिल्लाने लगे और वहा भगदड़ मच गयी लेकिन बोस को वह जहर पीने पर भी कुछ नही हुआ |

यह देखकर एक व्यक्ति वहा आया और उन्हें शांत करता हुआ बोला कि इसी ने जहर वाली शीशी बदलकर उसी रंग के पानी की शीशी रख दी थी ताकि यह प्रयोग सही सिद्ध न हो पाए | इसके बाद बोस ने विषवाली शीशी से पौधे को पुनः इंजेक्शन दिया और देखते ही देखते कुछ ही क्षणों में पौधा मुरझा गया | इस तरह यह प्रयोग सफल रहा |

प्रयोग और सफलता

Jagadish Chandra Bose जगदीश चन्द्र बोस ने सूक्ष्म तंरगों (Microwave) के क्षेत्र में वैज्ञानिक कार्य शुरू किया था | उन्होंने यह भी सिद्ध किया कि पेड़ पौधों के भी जीवन होता है | पौधे भी सजीवो के समान सांस लेते है | सोते जगाते है और उनपर भी सुख-दुःख का असर होता है | उन्होंने ऐसा यंत्र बनाया जिससे पेड़ पौधों के गति अपने आप लिखी जाती थी | इस यंत्र को cresco graph कहा जाता है | लन्दन की रॉयल सोसाइटी ने उनके अविष्कार को एक अद्भुद खोज कहा और उन्हें रॉयल सोसाइटी का सदस्य भी मनोनीत कर लिया |

बोस विज्ञान मन्दिर

बोस का निधन 23 नवम्बर 1937 को 78 वर्ष की उम्र में गिरीध (वर्तमान में झारखंड का हिस्सा ) में हुआ था | बोस ने अपना शोधकार्य किसी अच्छे और महंगे उपकरण और प्रयोगशाळा से नही किया था इसलिए जगदीश चन्द्र बोस एक अच्छी प्रयोगशाळा बनाने  की सोच रहे थे | कोलकाता स्थित बोस विज्ञान मन्दिर इसी विचार से प्रेरित है जो विज्ञान में शोध कार्य के लिए राष्ट्र का एक प्रसिद्ध केंद्र है | उन्होंने हमेशा से ही इसका सपना देखा था | सर जगदीश चन्द्र बोस को न सिर्फ वैज्ञानिक उप्लब्ध्यियो के लिए जाना जाता है बल्कि दृढ़ निश्चयी प्रवृति के लिए भी जाना जाता है | वे एक वैज्ञानिक ही नही ,अच्छे लेखक और कुशल वक्ता भी थे | उनके व्यक्तित्व में कई ऐसी बाते थी जिन्हें छात्र जीवन में शामिल करना चाहिए |
13:34

30 नवंबर क्रांति कथाओं के लेखक वचनेश त्रिपाठी जी की पुण्यतिथि पर विशेष



के सी शर्मा*
क्रान्तिकारी इतिहास में रुचि रखने वाला शायद ही कोई व्यक्ति हो, जिसने वचनेश त्रिपाठी का नाम न सुना हो। वे जीवित जाग्रत क्रान्तिकारी थे। उनकी वाणी से सतत आग बरसती थी। उनकी लेखनी सचमुच मशाल ही थी। उनके भाषण का विषय साहित्य, धर्म, संस्कृति हो या कुछ और; पर न जाने कहाँ से भगतसिंह, आजाद, बिस्मिल और सुभाष वहाँ आ जाते थे; फिर उसके बाद वे कितनी देर बोलते रहेंगे, कहना कठिन था।

24 जनवरी, 1914 को संडीला (जिला हरदोई, उत्तर प्रदेश) में श्री महावीर प्रसाद त्रिपाठी के घर में जन्मे वचनेश जी का असली नाम पुष्करनाथ था। सामान्य परिवार के होने के कारण उनकी शिक्षा कक्षा बारह से आगे नहीं हो पायी; पर व्यावहारिक ज्ञान के वे अथाह समुद्र थे।

उन्होंने कई जगह काम किया; पर उग्र स्वभाव और खरी बात के धनी होने के कारण कहीं टिके नहीं। अटल बिहारी वाजपेयी जब संघ के विस्तारक होकर संडीला भेजे गये, तो वे वचनेश जी के घर पर ही रहते थे। लखनऊ से जब मासिक राष्ट्रधर्म, साप्ताहिक पांचजन्य और दैनिक स्वदेश का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ, तो इन सबका काम अटल जी पर ही था। उन्होंने वचनेश जी की लेखन प्रतिभा को पहचान कर उन्हें लखनऊ बुला लिया।

1960 में वे तरुण भारत के सम्पादक बने। 1967 से 73 तथा 1975 से 84 तक वे राष्ट्रधर्म के तथा 1973 से 75 तक पांचजन्य के सम्पादक रहे। क्रान्तिकारी इतिहास में अत्यधिक रुचि के कारण वे जिस भी पत्र में रहे, उसके कई ‘क्रान्ति विशेषांक’ निकाले, जो अत्यधिक लोकप्रिय हुए।

वचनेश जी ने अनेक पुस्तकें लिखीं। कहानी, कविता, संस्मरण, उपन्यास, इतिहास, निबन्ध, वैचारिक लेख..; अर्थात लेखन की सभी विधाओं में उन्होंने प्रचुर कार्य किया। पत्रकारिता एवं साहित्य में उनके इस योगदान के लिए राष्ट्रपति श्री के.आर. नारायणन् ने 2001 ई0 में उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया।

वचनेश जी का क्रान्तिकारियों से अच्छा सम्पर्क था। जयदेव कपूर, शिव वर्मा, काशीराम, देवनारायण भारती, नलिनीकिशोर गुह, मन्मथनाथ गुप्त, पंडित परमानन्द, रमेश चन्द्र गुप्ता, रामदुलारे त्रिवेदी, भगवानदास माहौर, वैशम्पायन, भगतसिंह के भाई कुलतार और भतीजी वीरेन्द्र सन्धू, शचीन्द्रनाथ बख्शी, रामकृष्ण खत्री, सुरेन्द्र पांडे, यशपाल आदि से उनकी बहुत मित्रता थी।

वचनेश जी ने स्वतन्त्रता संग्राम में क्रान्तिकारियों के योगदान को लिपिबद्ध करा कर उसे राष्ट्रधर्म, पांचजन्य आदि में प्रकाशित किया। देवनारायण भारती ने उन्हें छद्म नाम ‘बदनेश’ दिया, जो आगे चलकर वचनेश हो गया। वचनेश जी जब क्रान्तिकारी इतिहास पर बोलते थे, तो उसे कोई चुनौती नहीं दे सकता था; क्योंकि अधिकांश तथ्य उन्होंने स्वयं जाकर एकत्र किये थे। 1984 में सम्पादन कार्य से अवकाश लेने के बाद भी उनकी लेखनी चलती रही। पांचजन्य, राष्ट्रधर्म आदि में उनके लेख सदा प्रकाशित होते रहे।

92 वर्ष के सक्रिय जीवन के बाद 30 नवम्बर, 2006 को लखनऊ में उनका देहान्त हुआ। कविवर रामकृष्ण श्रीवास्तव की निम्न पंक्तियां वचनेश जी पर बिल्कुल सही उतरती हैं।

जो कलम सरीखे टूट गये पर झुके नहीं
यह दुनिया उनके आगे शीश झुकाती है।
जो कलम किसी कीमत पर बेची नहीं गयी
वह तो मशाल की तरह उठाई जाती है!!
13:31

30 नवंबर हमारे लिए हीरो पण्डित गेंदालाल दीक्षित के जन्म दिवस पर विशेष रिपोर्ट



के सी शर्मा*
प्रायः ऐसा कहा जाता है कि मुसीबत में अपनी छाया भी साथ छोड़ देती है। क्रांतिकारियों के साथ तो यह पूरी तरह सत्य था। जब कभी वे संकट में पड़े, तो उन्हें आश्रय देने के लिए सगे-संबंधी ही तैयार नहीं हुए। क्रांतिवीर पंडित गेंदालाल दीक्षित के प्रसंग से यह भली-भांति समझा जा सकता है।

पंडित गेंदालाल दीक्षित का जन्म 30 नवम्बर, 1888 को उत्तर प्रदेश में आगरा जिले की बाह तहसील के ग्राम मई में हुआ था। आगरा से हाईस्कूल कर वे डी.ए.वी. पाठशाला, औरैया में अध्यापक हो गये। बंग-भंग के दिनों में उन्होंने ‘शिवाजी समिति’ बनाकर नवयुवकों में देशप्रेम जाग्रत किया; पर इस दौरान उन्हें शिक्षित,  सम्पन्न और तथाकथित उच्च समुदाय से सहयोग नहीं मिला। अतः उन्होंने कुछ डाकुओं से सम्पर्क कर उनके मन में देशप्रेम की भावना जगाई और उनके माध्यम से कुछ धन एकत्र किया।

इसके बाद गेंदालाल जी अध्ययन के बहाने मुंबई चले गये। वहां से लौटकर ब्रह्मचारी लक्ष्मणानंद के साथ उन्होंने ‘मातृदेवी’ नामक संगठन बनाया और युवकों को शस्त्र चलाना सिखाने लगे। इस दल ने आगे चलकर जो काम किया, वह ‘मैनपुरी षड्यंत्र’ के नाम से प्रसिद्ध है। उस दिन 80 क्रांतिकारियों का दल डाका डालने के लिए गया। दुर्भाग्य से उनके साथ एक मुखबिर भी था। उसने शासन को इनके जंगल में ठहरने की जानकारी पहले ही दे रखी थी। अतः 500 पुलिस वालों ने उस क्षेत्र को घेर रखा था।

जब ये लोग वहां रुके, तो सबको बहुत भूख लगी थी। वह मुखबिर कहीं से पूड़ियां ले आया; पर उनमें जहर मिला था। खाते ही कई लोग धराशायी हो गये। मौका पाकर वह मुखबिर भागने लगा। यह देखकर ब्रह्मचारी जी ने उस पर गोली चला दी। गोली की आवाज सुनते ही पुलिस वाले भी आ गये और फिर सीधा संघर्ष शुरू हो गया, जिसमें दल के 35 व्यक्ति मारे गये। शेष लोग पकड़े गये। एक अन्य सरकारी गवाह सोमदेव ने पंडित गेंदालाल दीक्षित को इस योजना का मुखिया बताया। अतः उन्हें मैनपुरी लाया गया। तब तक उनका स्वास्थ्य बहुत बिगड़ चुका था। इसके बाद भी वे एक रात मौका पाकर एक अन्य सरकारी गवाह रामनारायण के साथ फरार हो गये।

पंडित जी अपने एक संबंधी के पास कोटा पहुंचे; पर वहां भी उनकी तलाश जारी थी। इसके बाद वे किसी तरह अपने घर पहुंचे; पर वहां घर वालों ने साफ कह दिया कि या तो आप यहां से चले जाएं, अन्यथा हम पुलिस को बुलाते हैं। अतः उन्हें वहां से भी भागना पड़ा। तब तक वे इतने कमजोर हो चुके थे कि दस कदम चलने मात्र से मूर्छित हो जाते थे। किसी तरह वे दिल्ली आकर पेट भरने के लिए एक प्याऊ पर पानी पिलाने की नौकरी करने लगे।

कुछ समय बाद उन्होंने अपने एक संबंधी को पत्र लिखा, जो उनकी पत्नी को लेकर दिल्ली आ गये। तब तक उनकी दशा और बिगड़ चुकी थी। पत्नी यह देखकर रोने लगी। वह बोली कि मेरा अब इस संसार में कौन है ? पंडित जी ने कहा - आज देश की लाखों विधवाओं, अनाथों, किसानों और दासता की बेड़ी में जकड़ी भारत माता का कौन है ? जो इन सबका मालिक है, वह तुम्हारी भी रक्षा करेगा।

उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती करा दिया। वहीं पर मातृभूमि को स्मरण करते हुए उन नरवीर ने 21 सितम्बर 1920 को प्राण त्याग दिये।
13:27

30 नवंबर हमारे रियल हीरो राजीव दीक्षित जी की पुण्यतिथि पर विशेष



के सी शर्मा*

दोस्तों राजीव दीक्षित जी के परिचय मे जितनी बातें कही जाए वो कम है ! कुछ चंद शब्दो मे उनके परिचय को बयान कर पाना असंभव है ! ये बात वो लोग बहुत अच्छे से समझ सकते है जिन्होने राजीव दीक्षित जी को गहराई से सुना और समझा है !! फिर भी हमने कुछ प्रयास कर उनके परिचय को कुछ शब्दो का रूप देने का प्रयत्न किया है ! परिचय शुरू करने से पहले हम आपको ये बात स्पष्ट करना चाहते हैं कि जितना परिचय राजीव भाई का हम आपको बताने का प्रयत्न करेंगे वो उनके जीवन मे किये गये कार्यो का मात्र 1% से भी कम ही होगा ! उनको पूर्ण रूप से जानना है तो आपको उनके व्याख्यानों को सुनना पडेगा !!

पूर्ण परिचय:-

राजीव दीक्षित जी का जन्म 30 नवम्बर 1967 को उत्तर प्रदेश राज्य के अलीगढ़ जनपद की अतरौली तहसील के नाह गाँव में पिता राधेश्याम दीक्षित एवं माता मिथिलेश कुमारी के यहाँ हुआ था। उन्होने प्रारम्भिक और माध्यमिक शिक्षा फिरोजाबाद जिले के एक स्कूल से प्राप्त की !! इसके उपरान्त उन्होने इलाहाबाद शहर के जे.के इंस्टीटयूट से बी. टेक. और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology से एम. टेक. की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद राजीव भाई ने कुछ समय भारत CSIR (Council of Scientific and Industrial Research) मे कार्य किया। तत्पश्चात उन्होंने किसी Research Project मे भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के साथ भी कार्य किया !!

श्री राजीव जी इलाहाबाद के जे.के इंस्टीटयूट से बी.टेक. की शिक्षा लेते समय ही ‘‘आजादी बचाओ आंदोलन’’ से जुड गए जिसके संस्थापक श्री बनवारी लाल शर्मा जी थे जो कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ही गणित विभाग के मुख्य शिक्षक थे ! इसी संस्था में राजीव भाई प्रवक्ता के पद पर थे, संस्था में श्री अभय प्रताप, संत समीर, केशर जी, राम धीरज जी, मनोज त्यागी जी तथा योगेश कुमार मिश्रा जी शोधकर्ता अपने अपने विषयों पर शोध कार्य किया करते थे जो कि संस्था द्वारा प्रकाशित ‘‘नई आजादी उद्घोष’’ नमक मासिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ करते थे और राजीव भाई के ओजस्वी वाणी से देश के कोने-कोने में व्याख्यानों की एक विशाल श्रंखला-बद्ध वैचारिक क्रान्ति आने लगी राजीव जी ने अपने प्रवक्ता पद के दायित्वों को एक सच्चे राष्ट्रभक्त के रूप में निभाया जो कि अतुल्य है ……

बचपन से ही राजीव भाई में देश की समस्याओ को जानने की गहरी रुची थी ! प्रति मास 800 रूपये का खर्च उनका मैगजीनों, सभी प्रकार के अखबारो को पढने मे हुआ करता था! वे अभी नौवी कक्षा मे ही थे कि उन्होने अपने इतिहास के अध्यापक से एक ऐसा सवाल पूछा जिसका जवाब उस अध्यापक के पास भी नहीं था जैसा कि आप जानते है कि हमको इतिहास की किताबों मे पढाया जाता है कि अंग्रेजो का भारत के राजा से प्रथम युद्ध 1757 मे पलासी के मैदान मे रोबर्ट क्लाइव और बंगाल के नवाब सिराजुद्दोला से हुआ था ! उस युद्ध मे रोबर्ट क्लाइव ने सिराजुद्दोला को हराया था और उसके बाद भारत गुलाम हो गया था !!

राजीव भाई ने अपने इतिहास के अध्यापक से पूछा कि सर मुझे ये बताइए कि प्लासी के युद्ध में अंग्रेजो की तरफ से लड़ने वाले कितने सिपाही थें? तो अध्यापक कहते थे कि मुझको नहीं मालूम, तो राजीव भाई ने पूछा क्यों नहीं मालूम? तो कहते थे कि मुझे किसी ने नहीं पढाया तो मै तुमको कहाँ से पढा दू।

तो राजीव भाई ने उनको बराबर एक ही सवाल पूछा कि सर आप जरा ये बताईये कि बिना सिपाही के कोई युद्ध हो सकता है ?? तो अध्यापक ने कहा नहीं ! तो फिर राजीव भाई ने पूछा फिर हमको ये क्यों नहीं पढाया जाता है कि युद्ध में कितने सिपाही थे अंग्रेजो के पास ? और उसके दूसरी तरफ एक और सवाल राजीव भाई ने पूछा था कि अच्छा ये बताईये कि अंग्रेजो के पास कितने सिपाही थे ये तो हमको नहीं मालुम सिराजुद्दोला जो लड रहा था हिंदुस्तान की तरफ से उनके पास कितने सिपाही थे? तो अध्यापक ने कहा कि वो भी नहीं मालूम। तो खैर इस सवाल का जवाब बहुत बडा और गंभीर है कि आखिर इतना बडा भारत मुठी भर अंग्रेजो का गुलाम कैसे हो गया ?? यहाँ लिखेंगे तो बात बहुत बडी हो जाएगी ! इसका जवाब आपको राजीव भाई के एक व्याख्यान जिसका नाम आजादी का असली इतिहास मे मिल जाएगा।

तो देश की आजादी से जुडे ऐसे सैंकडों-सैंकडों सवाल दिन रात राजीव भाई के दिमाग मे घूमते रहते थे !! इसी बीच उनकी मुलाकात प्रो. धर्मपाल नाम के एक इतिहासकार से हुई जिनकी किताबें अमेरिका मे पढाई जाती है लेकिन भारत मे नहीं !! धर्मपाल जी को राजीव भाई अपना गुरु भी मानते है, उन्होने राजीव भाई के काफी सवालों का जवाब ढूंढने मे बहुत मदद की! उन्होने राजीव भाई को भारत के बारे मे वो दस्तावेज उपलब्ध करवाए जो इंग्लैंड की लाइब्रेरी हाउस आफ कामन्स मे रखे हुए थे जिनमे अंग्रेजो ने पूरा वर्णन किया था कि कैसे उन्होने भारत गुलाम बनाया ! राजीव भाई ने उन सब दस्तावेजो का बहुत अध्यन किया और ये जानकर उनके रोंगटे खडे हो गए कि भारत के लोगो को भारत के बारे मे कितना गलत इतिहास पढाया जा रहा है !! फिर सच्चाई को लोगो के सामने लाने के लिए राजीव भाई गाँव–गाँव, शहर–शहर जाकर व्याख्यान देने लगे ! और साथ-साथ देश की आजादी और देश के अन्य गंभीर समस्याओ का इतिहास और उसका समाधान तलाशने मे लगे रहते !!

इलाहबाद मे पढते हुए उनके एक खास मित्र हुआ करते थे जिनका नाम है योगेश मिश्रा जी उनके पिता जी इलाहबाद हाईकोर्ट मे वकील थे !! तो राजीव भाई और उनके मित्र अक्सर उनसे देश की आजादी से जुडी रहस्यमयी बातों पर वार्तालाप किया करते थे ! तब राजीव भाई को देश की आजादी के विषय मे बहुत ही गंभीर जानकारी प्राप्त हुई ! कि 15 अगस्त 1947 को देश मे कोई आजादी नहीं आई ! बल्कि 14 अगस्त 1947 की रात को अंग्रेज माउंट बेटन और नेहरू के बीच के समझोता हुआ था जिसे सत्ता का हस्तांतरण ( transfer of power agreement) कहते हैं ! इस समझोते के अनुसार अंग्रेज अपनी कुर्सी नेहरू को देकर जाएंगे लेकिन उनके द्वारा भारत को बर्बाद करने के लिए बनाए गये 34735 कानून वैसे ही इस देश मे चलेंगे !! और क्योकि आजादी की लडाई मे पूरे देश का विरोध अँग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ था तो सिर्फ एक ईस्ट इंडिया कंपनी भारत छोड कर जाएगी और उसके साथ जो 126 कंपनिया और भारत को लुटने आए थी वो वैसे की वैसे ही भारत मे व्यापार करेगी ! लूटती रहेगी ! आज उन विदेशी कंपनियो की संख्या बढ कर 6000 को पार कर गई है !! (इस बारे मे और अधिक जानकरी उनके व्याख्यानों मे मिलेगी)

एक बात जो राजीव भाई को हमेशा परेशान करती रहती थी कि आजादी के बाद भी अगर भारत मे अँग्रेजी कानून वैसे के वैसे ही चलेंगे और आजादी के बाद भी विदेशी कंपनियाँ भारत को वैसे ही लूटेंगी जैसे आजादी से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी लूटा करती थी ! आजादी के बाद भी भारत मे वैसे ही गौ हत्या होगी जैसे अंग्रेजो के समय होती थी, तो हमारे देश की आजादी का अर्थ क्या है ??

तो ये सब जानने के बाद राजीव भाई ने इन विदेशी कंपनियो और भारत में चल रहे अँग्रेजी कानूनों के खिलाफ एक बार फिर से वैसा ही स्वदेशी आंदोलन शुरू करने का संकल्प लिया जैसा किसी समय मे बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेजो के खिलाफ लिया था !! अपने राष्ट्र मे पूर्ण स्वतंत्रता लाने और आर्थिक महाशक्ति के रुप में खडा करने के लिए उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की और उसे जीवन पर्यन्त निभाया। वो गाँव-गाँव, शहर-शहर घूम कर लोगो को लोगो को भारत मे चल रहे अँग्रेजी कानून, आधी अधूरी आजादी का सच, विदेशी कंपनियो की भारत मे लूट आदि विषयो के बारे मे बताने लगे ! सन् 1999 में राजीव के स्वदेशी व्याख्यानों की कैसेटों ने समूचे देश में धूम मचा दी थी।!

1984 मे जब भारत मे भोपाल गैस कांड हुआ तब राजीव भाई ने इसके पीछे के षडयंत्र का पता लगाया और ये खुलासा किया कि ये कोई घटना नहीं थी बल्कि अमेरिका द्वारा किया गया एक परीक्षण था (जिसकी अधिक जानकारी आपको उनके व्याख्यानों मे मिलेगी) तब राजीव भाई यूनियन कार्बाइड कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया!

इसी प्रकार 1995-96 में टिहरी बाँध के बनने के खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चे में भाग लिया और पुलिस लाठी चार्ज में काफी चोटें भी खायीं। !! और इसी प्रकार 1999 मे उन्होने राजस्थान के कुछ गांवसियों साथ मिलकर एक शराब बनाने वाली कंपनी जिसको सरकार ने लाइसेन्स दिया था और वो कंपनी रोज जमीन की नीचे बहुत अधिक मात्रा मे पानी निकाल कर शराब बनाने वाली थी उस कंपनी को भगाया !!

1991 भारत मे चले ग्लोबलाएशन, लिब्रलाइजेसशन को राजीव भाई स्वदेशी उद्योगो का सर्वनाश करने वाला बताया और पूरे आंकडों के साथ घंटो-घंटो इस पर व्याख्यान दिये और स्वदेशी व्यापारियो को इसके खिलाफ जागरूक किया !! फिर 1994 मे भारत सरकार द्वारा किए WTO समझोते का विरोध किया क्योकि ये समझोता भारत को एक बहुत बडी आर्थिक गुलामी की और धकेलने वाला था ! इस समझोते मे सैंकडों ऐसे शर्ते सरकार ने स्वीकार कर ली थी जो आज भारत मे किसानो की आत्महत्या करने का, रुपए का डालर की तुलना मे नीचे जाने का, देश बढ रही भूख और बेरोजगारी का, खत्म होते स्वदेशी उद्योगो का, बैंकिंग, इन्सुरेंस, वकालत सभी सर्विस सेक्टर मे बढ रही विदेशी कंपनियो का कारण है ! राजीव भाई के अनुसार इस समझोते के बाद सरकार देश को नहीं चलाएगी बल्कि इस समझोते के अनुसार देश चलेगा !! देश की सारी आर्थिक नीतियाँ इस समझौते को ध्यान मे रख कर बनाई जाएगी ! और भारत मे आज तक बनी किसी भी सरकार में हिम्मत नहीं जो इस WTO समझौते को रद्द करवा सके !!

उन्होने ने बताया कि कैसे WORLD BANK, IMF, UNO जैसे संस्थाये अमेरिका आदि देशो की पिठ्ठू है और विकासशील देशो की सम्पत्ति लूटने के लिए इनको पैदा किया गया है ! (WTO समझोते के बारे मे अधिक जानकारी राजीव भाई के व्याख्यानों मे मिलेगी) इन राष्ट्र विरोधी ताकतों के खिलाफ अपनी लडाई को और मजबूत करने लिए राजीव भाई अपने कुछ साथियो के साथ मिलकर पूरे देश मे विदेशी कम्पनियों, अँग्रेजी कानून, WTO, आदि के खिलाफ अभियान चलाने लगे !! ऐसे ही आर्थर डंकल नाम एक अधिकारी जिसने डंकल ड्राफ्ट बनाया था भारत मे लागू करवाने के लिए वो एक बार भारत आया तो राजीव भाई और बाकी कार्यकर्ता बहुत गुस्से मे थे तब राजीव भाई ने उसे एयरपोर्ट पर ही जूते से मार मार कर भगाया और फिर उनको जेल हुई !!

1999-2000 सन् मे उन्होने दो अमेरिकन कम्पनियाँ पेप्सी और कोकाकोला के खिलाफ प्रदर्शन किया और लोगो को बताया कि ये दोनों कम्पनियाँ पेय पदार्थ के नाम पर आप सबको जहर बेच रही है और हजारो करोड की लूट इस देश मे कर रही हैं ! और आपका स्वास्थ बिगाड रही हैं ! राजीव भाई ने लोगो से कोक ,पेप्सी और इसका विज्ञापन करने वाले क्रिकेट खिलाडियो और, फिल्मी स्टारों का बहिष्कार करने को कहा !! सन 2000 मे 9-11 की घटना घटी तो कुछ अखबार वाले राजीव भाई के पास भी उनके विचार जानने को पहुँचे ! तब राजीव भाई ने कहा की मुझे नहीं लगता कि ये दोनों टावर आतंकवादियो ने गिराये है ! तब उन्होने पूछा आपको क्या लगता है ? राजीव भाई ने कहा मुझे लगता है ये काम अमेरिका ने खुद ही करवाया है ! तो उन्होने कहा आपके पास क्या सबूत है ? राजीव भाई ने कहा समय दो जल्दी सबूत भी ला दूंगा !!

और 2007 मे राजीव भाई ने गुजरात के एक व्याख्यान मे इस 9-11 की घटना का पूरा सच लाइव प्रोजक्टर के माध्यम से लोगो के सामने रखा ! (जिसका विडियो youtube पर 9-11 was totally lie के नाम से उपलब्ध है) और 9 सितंबर 2013 को रूस ने भी एक विडियो जारी कर 9-11 की घटना को झूठा बताया! 2003-2004 मे राजीव भाई ने भारत सरकार द्वारा बनाये गये VAT कानून का विरोध किया और पूरे देश के व्यपरियो के समूह मे जाकर घंटो-घंटो व्याख्यान दिये और उन्होने जागरूक किया कि ये VAT का कानून आपकी आर्थिक लूट से ज्यादा आपके धर्म को कमजोर करने और भारत मे ईसाईयत को बढावा देने के लिए बनाया गया है !! (इस बारे मे अधिक जानकारी राजीव भाई के VAT वाले व्याख्यान मे मिलेगी) देश मे हो रही गौ हत्या को रोकने के लिए भी राजीव भाई ने कडा संघर्ष किया ! राजीव भाई का कहना था कि जब तक हम गौ माता का आर्थिक मूल्यांकन कर लोगो को नहीं समझाएँगे ! तब तक भारत मे गौ रक्षा नहीं हो सकती ! क्योंकि कोई भी सरकार आजतक गौ हत्या के खिलाफ संसद मे बिल पास नहीं कर सकी ! उनका कहना था कि सरकारो का तो पता नहीं वो कब संसद मे गौ हत्या के खिलाफ बिल पास करें क्योकि कि आजादी के 64 साल मे तो उनसे बिल पास नहीं हुआ और आगे करेंगे इसका भरोसा नहीं !! इसलिए तब हमे खुद अपने स्तर पर ही गौ हत्या रोकने का प्रयास करना चाहिए !!
उन्होने देश भर मे घूम घूम कर अलग अलग जगह पर व्याख्यान कर लोगो को गौ माता की महत्वता और उसका आर्थिक महत्व बताया ! उन्होने 60 लाख से अधिक किसानो को देसी खेती (organic farming) करने के सूत्र बताये कि कैसे किसान रासायनिक खाद, यूरिया आदि खेतो मे डाले बिना गौ माता के गोबर और गौ मूत्र से खेती कर सकते है ! जिससे उनके उत्पादन का खर्चा लगभग शून्य होगा !! और उनकी आय मे बहुत बढोतरी होगी ! आज किसान 15-15 हजार रुपए लीटर कीटनाश्क खेत मे छिडक रहा है !! टनों टन महंगा यूरिया, रासायनिक खाद खेत मे डाल रहा है जिससे उसके उत्पादन का खर्चा बढता जा रहा है और उत्पादन भी कम होता जा रहा है !! रासायनिक खाद वाले फल सब्जियाँ खाकर लाखो लाखो लोग दिन प्रतिदिन बीमार हो रहे हैं ! राजीव भाई ने गरीब किसानो को गाय ना बेचने की सलाह दी और उसके गोबर और गौ मूत्र से खेती करने के सूत्र बताये !! किसानो ने राजीव भाई के बताये हुए देसी खेती के सूत्रो द्वारा खेती करना शुरू किया और उनकी आर्थिक समृद्धि बहुत बढीं !!

1998 मे राजीव भाई ने कुछ गौ समितियों के साथ मिलकर गौ हत्या रोकने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मे मुकदमा दायर कर दिया कि गौ हत्या नहीं होनी चाहिए ! सामने बैठे कुरेशी कसाइयो ने कहा क्यों नहीं होनी चाहिए ? कोर्ट मे साबित ये करना था की गाय की हत्या कर मांस बेचने से ज्यादा लाभ है या बचाने से !! कसाइयो की तरफ से लड़ने वाले भारत के सभी बड़े-बड़े वकील जो 50-50 लाख तक फीस लेते हैं सोली सोराब्जी की बीस लाख की फीस है, कपिल सिब्बल 22 लाख की फीस है, महेश जेठ मालानी (राम जेठ मालानी का लड़का) जो फीस लेते है 32 लाख से 35 लाख सारे सभी बड़े वकील कसाइयों के पक्ष में ! और इधर राजीव भाई जैसे लोगो के पास कोई बडा वकील नहीं था क्योंकि इतना पैसा नहीं था ! तो इन लोगो ने अपना मुकदमा खुद ही लडा !!

(इस मुकद्दमे की पूरी जानकारी आपको राजीव भाई के व्याख्यान जिसका नाम गौ हत्या और राजनीति) मे मिल जाएगी!! हाँ इतना आपको जरूर बता दें 2005 मे मुकदमा राजीव भाई और उनके कार्यकर्ताओ ने जीत लिया !! राजीव भाई अदालत मे गाय के एक किलो गोबर से 33 किलो खाद तैयार करने का फॉर्मूला बताया और अदालत के सामने करके भी दिखया जिससे रोज की 1800 से 2000 रुपए की रोज की कमाई की जा सकती है !! ऐसे ही उन्होने गौ मूत्र से बनने वाली औषधियों का आर्थिक मूल्यांकन करके बताया !!! और तो और उन्होने सुप्रीम कोर्ट के जज की गाडी गोबर गैस से चलाकर दिखा दी !! जज ने तीन महीने गाडी चलाई और ये सब देख अपने दाँतो तले उंगली दबा ली!! अधिक जानकरी आपको राजीव भाई के व्याख्यान मे मिलेगी !! (Gau Hatya Rajniti Supreme Court mein ladai at Aurngabaad.mp3)

राजीव भाई को जब पता चला कि रासायनिक खाद बनाने वाली कंपनियो के बाद देश की सबसे अधिक हजारो करोड रुपए की लूट दवा बनाने वाली सैंकडों विदेशी कंपनियाँ कर रही है ! और इसके इलावा ये बडी बडी कंपनियाँ वो दवाये भारत मे बेच रहे है जो अमेरिका और यूरोप के बहुत से देशों मे बैन है और जिससे देश वासियो को भयंकर बीमारियाँ हो रही है तब राजीव भाई ने इन कंपनियो के खिलाफ भी आंदोलन शुरू कर दिया !! राजीव भाई ने आयुर्वेद का अध्यन किया और 3500 वर्ष पूर्व महाऋषि चरक के शिष्य वागभट्ट जी को महीनो महीनो तक पढा !! और बहुत ज्ञान अर्जित किया ! फिर घूम घूम कर लोगो को आयुर्वेदिक चिकित्सा के बारे मे बताना शुरू किया की कैसे बिना दवा खाये आयुर्वेद के कुछ नियमो का पालन कर हम सब बिना डॉक्टर के स्वस्थ रह सकते है और जीवन जी सकते है इसके अलावा हर व्यक्ति अपने शरीर की 85% चिकित्सा स्वंय कर सकता है !! राजीव भाई खुद इन नियमो का पालन 15 वर्ष से लगातार कर रहे थे जिस कारण वे पूर्ण स्वस्थ थे 15 वर्ष तक किसी डॉक्टर के पास नहीं गए थे !! वो आयुर्वेद के इतने बडे ज्ञाता हो गए थे कि लोगो की गम्भीर से गम्भीर बीमारियाँ जैसे शुगर, बीपी, दमा, अस्थमा, हार्ट ब्लोकेज, कोलेस्ट्रोल आदि का इलाज करने लगे थे और लोगो को सबसे पहले बीमारी होने का असली कारण समझाते थे और फिर उसका समाधान बताते थे !! लोग उनके हेल्थ के लेक्चर सुनने के लिए दीवाने हो गए थे इसके इलावा वो होमोपैथी चिकित्सा के भी बडे ज्ञाता थे होमोपैथी चिकित्सा मे तो उन्हे डिग्री भी हासिल थी !!

एक बार उनको खबर मिली कि उनके गुरु धर्मपाल जी को लकवा का अटैक आ गया है और उनके कुछ शिष्य उनको अस्पताल ले गए थे ! राजीव भाई ने जाकर देखा तो उनकी आवाज पूरी जा चुकी थी हाथ पाँव चलने पूरे बंद हो गए थे ! अस्पताल मे उनको बांध कर रखा हुआ था ! राजीव भाई धर्मपाल जी को घर ले आए और उनको एक होमियोपैथी दवा दी मात्र 3 दिन उनकी आवाज वापिस आ गई और एक सप्ताह मे वो वैसे चलने फिरने लगे कि कोई देखने वाला मानने को तैयार नहीं था कि इनको कभी लकवा का अटैक आया था !! कर्नाटक राज्य में एक बार बहुत भयंकर चिकन-गुनिया फैल गया हजारो की संख्या मे लोग मरे ! राजीव भाई अपनी टीम के साथ वहाँ पहुँच कर हजारो हजारो लोगो को इलाज करके मृत्यु से बचाया ! ये देख कर कर्नाटक सरकार ने अपनी डॉक्टरों की टीम राजीव भाई के पास भेजी और कहा कि जाकर देखो कि वो किस ढंग से इलाज कर रहे हैं !

(अधिक जानकारी के लिए आप राजीव भाई के हेल्थ के लेक्चर सुन सकते हैं घंटो घंटो उन्होने स्वस्थ रहने और रोगो की चिकित्सा के व्याख्यान दिये है)

इसके इलावा राजीव भाई ने यूरोप और भारत की सभ्यता संस्कृति और इनकी भिन्नताओ पर गहरा अध्यन किया और लोगो को बताया कि कैसे भारतवासी यूरोप के लोगो की मजबूरी को अपना फैशन बना रहे है और कैसे उनकी नकल कर बीमारियो के शिकार हो रहे है !! राजीव भाई का कहना था कि देश मे आधुनिकीकरण के नाम पर पश्चिमीकरण हो रहा है ! और इसका एक मात्र कारण देश मे चल रहा अंग्रेज मैकॉले का बनाया हुआ indian education system है ! क्योकि आजाद भारत मे सारे कानून अंग्रेजो के चल रहे हैं इसीलिए ये मैकॉले द्वारा बनाया गया शिक्षा तंत्र भी चल रहा है !

राजीव भाई कहते थे कि इस अंग्रेज मैकॉले ने जब भारत का शिक्षा तंत्र का कानून बनाया और शिक्षा का पाठयक्रम तैयार किया तब इसने एक बात कही कि मैंने भारत का शिक्षा तंत्र ऐसा बना दिया है की इसमे पढ के निकलने वाला व्यक्ति शक्ल से तो भारतीय होगा पर अकल से पूरा अंग्रेज होगा ! उसकी आत्मा अंगेजों जैसी होगी उसको भारत की हर चीज मे पिछडापन दिखाई देगा !! और उसको अंग्रेज और अंग्रेजियत ही सबसे बढिया लगेगी !!

इसके इलावा राजीव भाई का कहना था कि इसी अंग्रेज मैकॉले ने भारत की न्याय व्यवस्था को तोड कर IPC, CPC जैसे कानून बनाये और उसके बाद ब्यान दिया की मैंने भारत की न्याय पद्धति को ऐसा बना दिया है कि इसमे किसी गरीब को इंसाफ नहीं मिलेगा ! सालों साल मुकदमे लटकते रहेंगे !! मुकदमो के सिर्फ फैंसले आएंगे न्याय नहीं मिलेगा !! इस अंग्रेज शिक्षा पद्धति और अँग्रेजी न्यायव्यवस्था के खिलाफ लोगो को जागरूक करने के लिए राजीव राजीव भाई ने मैकॉले शिक्षा और भारत की प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पर बहुत व्याख्यान दिये और इसके अतिरिक्त अपने एक मित्र आजादी बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता पवन गुप्ता जी के साथ मिल कर एक गुरुकुल की स्थापना की वहाँ वो फेल हुए बच्चो को ही दाखिल करते थे कुछ वर्ष उन बच्चो को उन्होने प्राचीन शिक्षा पद्धति से पढाया ! और बच्चे बाद मे इतने ज्ञानी हो गए की आधुनिक शिक्षा मे पढे बडे बडे वैज्ञानिक उनके आगे दाँतो तले उंगली दबाते थे !

राजीव जी ने रामराज्य की कल्पना को समझना चाहा ! इसके लिए वे भारत अनेकों साधू संतो,रामकथा करने वालों से मिले और उनसे पूछते थे की भगवान श्री राम रामराज्य के बारे क्या कहा है ?? लेकिन कोई भी उत्तर उनको संतुष्ट नहीं कर पाया ! फिर उन्होने भारत मे लिखी सभी प्रकार की रामायणों का अध्यन किया और खुद ये हैरान हुए कि रामकथा मे से भारत की सभी समस्याओ का समाधान निकलता है ! फिर राजीव भाई घूम घूम कर खुद रामकथा करने लगे और उनकी रामकथा सभी संत और बाबाओ से अलग होती वो सिर्फ उसी बात पर अधिक चर्चा करते जिसे अन्य संत तो बताते नहीं या वो खुद ही ना जानते है ! राजीव भाई लोगो को बताते कि किस प्रकार रामकथा मे भारत की सभी समस्याओ का समाधान निकलता है ! (इस बारे मे अधिक जानकारी के लिए आप राजीव भाई की रामकथा वाला व्याख्यान सुन सकते हैं)

2009 मे राजीव भाई बाबा रामदेव के संपर्क मे आए और बाबा रामदेव को देश की गंभीर समस्याओ और उनके समाधानो से परिचित करवाया और विदेशो मे जमा कालेधन आदि के विषय मे बताया और उनके साथ मिल कर आंदोलन को आगे बढाने का फैसला किया !! आजादी बचाओ के कुछ कार्यकर्ता राजीव भाई के इस निर्णय से सहमत नहीं थे !! फिर भी राजीव भाई ने 5 जनवरी 2009 को भारत स्वाभिमान आंदोलन की नीव रखी !! जिसका मुख्य उदेश्य लोगो को अपनी विचार धारा से जोडना, उनको देश की मुख्य समस्याओ का कारण और समाधान बताना !! योग और आयुर्वेद से लोगो को निरोगी बनाना और भारत स्वाभिमान आंदोलन के साथ जोड कर 2014 मे देश से अच्छे लोगो को आगे लाकर एक नई पार्टी का निर्माण करना था जिसका उदेश्य भारत मे चल रही अँग्रेजी व्यवस्थाओ को पूर्ण रूप से खत्म करना, विदेशो मे जमा काला धन वापिस लाना, गौ हत्या पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना, और एक वाक्य मे कहा जाए ये आंदोलन सम्पूर्ण आजादी को लाने के लिए शुरू किया गया था !!

राजीव भाई के व्याख्यान सुन कर मात्र ढाई महीने मे 6 लाख कार्यकर्ता पूरे देश मे प्रत्यक्ष रूप मे इस अंदोलन से जुड गए थे राजीव भाई पतंजलि मे भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओ के बीच व्याख्यान दिया करते थे जो पतंजलि योगपीठ के आस्था चैनल पर के माध्यम से भारत के लोगो तक पहुंचा करते थे इस प्रकार अप्रत्यक्ष रूप से भारत स्वाभिमान अंदोलन के साथ 3 से 4 करोड लोग जुड गए थे ! फिर राजीव भाई भारत स्वाभिमान आंदोलन के प्रतिनिधि बनकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले गाँव-गाँव शहर-शहर जाया करते थे पहले की तरह व्याख्यान देकर लोगो को भारत स्वाभिमान से जुडने के लिए प्रेरित करते थे !!

लगभग आधे भारत की यात्रा करने के बाद राजीव भाई 26 नवंबर 2010 को उडीसा से छतीसगढ राज्य के एक शहर रायगढ पहुंचे वहाँ उन्होने 2 जन सभाओ को आयोजित किया ! इसके पश्चात अगले दिन 27 नवंबर 2010 को जंजगीर जिले मे दो विशाल जन सभाए की इसी प्रकार 28 नवंबर बिलासपुर जिले मे व्याख्यान देने से पश्चात 29 नवंबर 2010 को छतीसगढ के दुर्ग जिले मे पहुंचे ! उनके साथ छतीसगढ के राज्य प्रभारी दया सागर और कुछ अन्य लोग साथ थे ! दुर्ग जिले मे उनकी दो विशाल जन सभाए आयोजित थी पहली जनसभा तहसील बेमतरा मे सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक थी! राजीव भाई ने विशाल जन सभा को आयोजित किया !! इसके बाद का कार्यक्रम साय 4 बजे दुर्ग मे था !! जिसके लिए वह दोपहर 2 बजे बेमेतरा तहसील से रवाना हुए !

(इसके बात की घटना विश्वास योग्य नहीं है इसके बाद की सारी घटना उस समय उपस्थित छतीसगढ के प्रभारी दयासागर और कुछ अन्य साथियो द्वारा बताई गई है)

उन लोगो का कहना है गाडी मे बैठने के बाद उनका शरीर पसीना पसीना हो गया ! दयासागर ने राजीव जी से पूछा तो जवाब मिला की मुझे थोडी गैस सीने मे चढ गई है शोचालय जाऊँ तो ठीक हो जाऊंगा ! फिर दयासागर तुरंत उनको दुर्ग के अपने आश्रम मे ले गए वहाँ राजीव भाई शोचालय गए और जब कुछ देर बाद बाहर नहीं आए तो दयासागर ने उनको आवाज दी राजीव भाई ने दबी दबी आवाज मे कहा गाडी स्टार्ट करो मैं निकल रहा हूँ ! जब काफी देर बाद राजीव भाई बाहर नहीं आए तो दरवाजा खोला गया राजीव भाई पसीने से लथपत होकर नीचे गिरे हुए थे ! उनको बिस्तर पर लिटाया गया और पानी छिडका गया दयासागर ने उनको अस्पताल चलने को कहा ! राजीव भाई ने मना कर दिया उन्होने कहा होमियोपैथी डॉक्टर को दिखाएंगे !

थोडी देर बाद होमियोपैथी डॉक्टर आकर उनको दवाइयाँ दी ! फिर भी आराम ना आने पर उनको भिलाई के सेक्टर 9 मे इस्पात स्वयं अस्पताल मे भर्ती किया गया ! इस अस्पताल मे अच्छी सुविधाइए ना होने के कारण उनको Apollo BSR मे भर्ती करवाया गया ! राजीव भाई एलोपेथी चिकित्सा लेने से मना करते रहे ! उनका संकल्प इतना मजबूत था कि वो अस्पताल मे भर्ती नहीं होना चाहते थे ! उनका कहना था कि सारी जिंदगी एलोपेथी चिकित्सा नहीं ली तो अब कैसे ले लू ? ! ऐसा कहा जाता है कि इसी समय बाबा रामदेव ने उनसे फोन पर बात की और उनको आईसीयु मे भर्ती होने को कहा !

फिर राजीव भाई 5 डॉक्टरों की टीम के निरीक्षण मे आईसीयु भर्ती करवाएगे !! उनकी अवस्था और भी गंभीर होती गई और रात्रि एक से दो के बीच डॉक्टरों ने उन्हे मृत घोषित किया !!

(बेमेतरा तहसील से रवाना होने के बाद की ये सारी घटना राज्य प्रभारी दयासागर और अन्य अधिकारियों द्वारा बताई गई है अब ये कितनी सच है या झूठ ये तो उनके नार्को टेस्ट करने ही पता चलेगा !!)

क्योकि राजीव जी की मृत्यु का कारण दिल का दौरा बता कर सब तरफ प्रचारित किया गया ! 30 नवंबर को उनके मृत शरीर को पतंजलि, हरिद्वार लाया गया जहां हजारो की संख्या मे लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे ! और 1 दिसंबर राजीव जी का दाह संस्कार कनखल हरिद्वार मे किया गया !!

राजीव भाई के चाहने वालों का कहना है कि अंतिम समय मे राजीव जी का चेहरा पूरा हल्का नीला, काला पड गया था ! उनके चाहने वालों ने बार-बार उनका पोस्टमार्टम करवाने का आग्रह किया लेकिन पोस्टमार्ट्म नहीं करवाया गया !! राजीव भाई की मौत लगभग भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की मौत से मिलती जुलती है आप सबको याद होगा ताशकंद से जब शास्त्री जी का मृत शरीर लाया गया था तो उनके भी चेहरे का रंग नीला, काला पड गया था !! और अन्य लोगो की तरह राजीव भाई भी ये मानते थे कि शास्त्री जी को विष दिया गया था !! राजीव भाई और शास्त्री जी की मृत्यु मे एक जो समानता है कि दोनों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था !!

राजीव भाई की मृत्यु से जुडे कुछ सवाल !!

किसके आदेश पर ये प्रचारित किया गया ? कि राजीव भाई की मृत्यु दिल का दौरा पडने से हुयी है ?

29 नवंबर दोपहर 2 बजे बेमेतरा से निकलने के पश्चात जब उनको गैस की समस्या हुए और रात 2 बजे जब उनको मृत घोषित किया गया इसके बीच मे पूरे 12 घंटे का समय था 12 घंटे मे मात्र एक गैस की समस्या का समाधान नहीं हो पाया ??

आखिर पोस्ट मार्टम करवाने मे क्या तकलीफ थी ??

राजीव भाई का फोन जो हमेशा आन रहता था उस 2 बजे बाद बंद क्यों था ??

राजीव भाई के पास एक थैला रहता था जिसमे वो हमेशा आयुर्वेदिक, होमियोपैथी दवाएं रखते थे वो थैला खाली क्यों था ??

30 नवंबर को जब उनको पतंजलि योगपीठ मे अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था उनके मुंह और नाक से क्या टपक रहा था उनके सिर को माथे से लेकर पीछे तक काले रंग के पालिथीन से क्यूँ ढका था ?

राजीव भाई की अंतिम विडियो जो आस्था चैनल पर दिखाई गई तो उसको एडिट कर चेहरे का रंग सफेद कर क्यों दिखाया गया ?? अगर किसी के मन को चोर नहीं था तो विडियो एडिट करने की क्या जरूरत थी ??

अंत पोस्टमार्टम ना होने के कारण उनकी मृत्यु आजतक एक रहस्य ही बन कर रह गई !!

राजीव भाई के कई समर्थक उनके जाने के बाद बाबा रामदेव से काफी खफा है क्योंकि बाबा रामदेव अपने एक व्याख्यान मे कहा कि राजीव भाई को हार्ट ब्लोकेज था, शुगर की समस्या थी, बी.पी. भी था राजीव भाई पतंजलि योगपीठ की बनी दवा मधुनाशनी खाते थे ! जबकि राजीव भाई खुद अपने एक व्याख्यान मे बता रहे हैं कि उनका शुगर, बीपी, कोलेस्ट्रोल सब नार्मल है !! वे पिछले 20 साल से डॉक्टर के पास नहीं गए ! और अगले 15 साल तक जाने की संभावना नहीं !!

और राजीव भाई के चाहने वालो का कहना है कि हम कुछ देर के लिए राजीव भाई की मृत्यु पर प्रश्न नहीं उठाते लेकिन हमको एक बात समझ नहीं आती कि पतंजलि योगपीठ वालों ने राजीव भाई की मृत्यु के बाद उनको तिरस्कृत करना क्यों शुरू कर दिया ??

मंचो के पीछे उनकी फोटो क्यों नहीं लगाई जाती ??

आस्था चैनल पर उनके व्याख्यान दिखाने क्यों बंद कर दिये गए ?? कभी साल अगर उनकी पुण्यतिथि पर व्याख्यान दिखाये भी जाते है तो वो भी 2-3 घंटे के व्याख्यान को काट काट कर एक घंटे का बनाकर दिखा दिया जाता है !!

इसके अतिरिक्त उनके कुछ समर्थक कहते हैं कि भारत स्वाभिमान आंदोलन की स्थापना जिस उदेश्य के लिए हुए थी राजीव भाई की मृत्यु के बाबा रामदेव उस राह हट क्यों गए ?

राजीव भाई और बाबा खुद कहते थे कि सब राजनीतिक पार्टियां एक जैसी है हम 2014 मे अच्छे लोगो को आगे लाकर एक नया राजनीतिक विकल्प देंगे ! लेकिन राजीव भाई की मृत्यु के बाद बाबा रामदेव ने भारत स्वाभिमान के आंदोलन की दिशा बदल दी और राजीव की सोच के विरुद्ध आज वो भाजपा सरकार का समर्थन कर रहें !! इसलिए बहुत से राजीव भाई के चाहने वाले भारत स्वाभिमान से हट कर अपने अपने स्तर पर राजीव भाई का प्रचार करने मे लगे हैं !!

राजीव भाई ने अपने पूरे जीवन मे देश भर मे घूम घूम कर 5000 से ज्यादा व्याख्यान दिये! सन 2005 तक वह भारत के पूर्व से पश्चिम उत्तर से दक्षिण चार बार भ्रमण कर चुके थे !! उन्होने विदेशी कंपनियो की नाक मे दम कर रखा था !

भारत के किसी भी मीडिया चैनल ने उनको दिखाने का साहस नहीं किया !! क्योकि वह देश से जुडे ऐसे मुद्दो पर बात करते थे की एक बार लोग सुन ले तो देश मे 1857 से बडी क्रांति हो जाती ! वह ऐसे ओजस्वी वक्ता थे जिनकी वाणी पर माँ सरस्वती साक्षात निवास करती थी। जब वे बोलते थे तो स्रोता घण्टों मन्त्र-मुग्ध होकर उनको सुना करते थे ! 30 नवम्बर 1967 को जन्मे और 30 नवंबर 2010 को ही संसार छोडने वाले ज्ञान के महासागर श्री राजीव दीक्षित जी आज केवल आवाज के रूप मे हम सबके बीच जिंदा है उनके जाने के बाद भी उनकी आवाज आज देश के लाखो करोडो लोगो का मार्गदर्शन कर रही है और भारत को भारत की मान्यताओं के आधार पर खडा करने आखिरी उम्मीद बनी हुई है !

राजीव भाई को शत शत नमन !!



अंतिम शब्दों में एक भाव पूर्ण श्रद्धांजलि ….

~!~ शत् – शत् नमन है ~!~

जिसने भारत का सोया स्वाभिमान जगा दिया…..

भारत सोने की चिडिया था ..है….और आगे कैसे होगा

हम-सब को फिर से बता दिया ……

आज जब सत्य बोलना नामुमकिन हो ,

उसने उस डगर पे चलना हमे सिखा दिया ……

भारत का सोया स्वाभिमान जगा दिया…..

वो आया था ‘‘विवेकान्द’’ बन कर

अपने सत् कर्मो से बता दिया…….

पर अफसोस कि देश आज भरा गदारो से,

जिस कारण ‘‘माँ भारतीय के लाल को ,

‘‘शास्त्री जी’’ की तरह विदा किया30 नवम्बर
जन्म दिवस एवम पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन
राजीव दीक्षित जी का परिचय

दोस्तों राजीव दीक्षित जी के परिचय मे जितनी बातें कही जाए वो कम है ! कुछ चंद शब्दो मे उनके परिचय को बयान कर पाना असंभव है ! ये बात वो लोग बहुत अच्छे से समझ सकते है जिन्होने राजीव दीक्षित जी को गहराई से सुना और समझा है !! फिर भी हमने कुछ प्रयास कर उनके परिचय को कुछ शब्दो का रूप देने का प्रयत्न किया है ! परिचय शुरू करने से पहले हम आपको ये बात स्पष्ट करना चाहते हैं कि जितना परिचय राजीव भाई का हम आपको बताने का प्रयत्न करेंगे वो उनके जीवन मे किये गये कार्यो का मात्र 1% से भी कम ही होगा ! उनको पूर्ण रूप से जानना है तो आपको उनके व्याख्यानों को सुनना पडेगा !!

पूर्ण परिचय:-

राजीव दीक्षित जी का जन्म 30 नवम्बर 1967 को उत्तर प्रदेश राज्य के अलीगढ़ जनपद की अतरौली तहसील के नाह गाँव में पिता राधेश्याम दीक्षित एवं माता मिथिलेश कुमारी के यहाँ हुआ था। उन्होने प्रारम्भिक और माध्यमिक शिक्षा फिरोजाबाद जिले के एक स्कूल से प्राप्त की !! इसके उपरान्त उन्होने इलाहाबाद शहर के जे.के इंस्टीटयूट से बी. टेक. और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology से एम. टेक. की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद राजीव भाई ने कुछ समय भारत CSIR (Council of Scientific and Industrial Research) मे कार्य किया। तत्पश्चात उन्होंने किसी Research Project मे भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के साथ भी कार्य किया !!

श्री राजीव जी इलाहाबाद के जे.के इंस्टीटयूट से बी.टेक. की शिक्षा लेते समय ही ‘‘आजादी बचाओ आंदोलन’’ से जुड गए जिसके संस्थापक श्री बनवारी लाल शर्मा जी थे जो कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ही गणित विभाग के मुख्य शिक्षक थे ! इसी संस्था में राजीव भाई प्रवक्ता के पद पर थे, संस्था में श्री अभय प्रताप, संत समीर, केशर जी, राम धीरज जी, मनोज त्यागी जी तथा योगेश कुमार मिश्रा जी शोधकर्ता अपने अपने विषयों पर शोध कार्य किया करते थे जो कि संस्था द्वारा प्रकाशित ‘‘नई आजादी उद्घोष’’ नमक मासिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ करते थे और राजीव भाई के ओजस्वी वाणी से देश के कोने-कोने में व्याख्यानों की एक विशाल श्रंखला-बद्ध वैचारिक क्रान्ति आने लगी राजीव जी ने अपने प्रवक्ता पद के दायित्वों को एक सच्चे राष्ट्रभक्त के रूप में निभाया जो कि अतुल्य है ……

बचपन से ही राजीव भाई में देश की समस्याओ को जानने की गहरी रुची थी ! प्रति मास 800 रूपये का खर्च उनका मैगजीनों, सभी प्रकार के अखबारो को पढने मे हुआ करता था! वे अभी नौवी कक्षा मे ही थे कि उन्होने अपने इतिहास के अध्यापक से एक ऐसा सवाल पूछा जिसका जवाब उस अध्यापक के पास भी नहीं था जैसा कि आप जानते है कि हमको इतिहास की किताबों मे पढाया जाता है कि अंग्रेजो का भारत के राजा से प्रथम युद्ध 1757 मे पलासी के मैदान मे रोबर्ट क्लाइव और बंगाल के नवाब सिराजुद्दोला से हुआ था ! उस युद्ध मे रोबर्ट क्लाइव ने सिराजुद्दोला को हराया था और उसके बाद भारत गुलाम हो गया था !!

राजीव भाई ने अपने इतिहास के अध्यापक से पूछा कि सर मुझे ये बताइए कि प्लासी के युद्ध में अंग्रेजो की तरफ से लड़ने वाले कितने सिपाही थें? तो अध्यापक कहते थे कि मुझको नहीं मालूम, तो राजीव भाई ने पूछा क्यों नहीं मालूम? तो कहते थे कि मुझे किसी ने नहीं पढाया तो मै तुमको कहाँ से पढा दू।

तो राजीव भाई ने उनको बराबर एक ही सवाल पूछा कि सर आप जरा ये बताईये कि बिना सिपाही के कोई युद्ध हो सकता है ?? तो अध्यापक ने कहा नहीं ! तो फिर राजीव भाई ने पूछा फिर हमको ये क्यों नहीं पढाया जाता है कि युद्ध में कितने सिपाही थे अंग्रेजो के पास ? और उसके दूसरी तरफ एक और सवाल राजीव भाई ने पूछा था कि अच्छा ये बताईये कि अंग्रेजो के पास कितने सिपाही थे ये तो हमको नहीं मालुम सिराजुद्दोला जो लड रहा था हिंदुस्तान की तरफ से उनके पास कितने सिपाही थे? तो अध्यापक ने कहा कि वो भी नहीं मालूम। तो खैर इस सवाल का जवाब बहुत बडा और गंभीर है कि आखिर इतना बडा भारत मुठी भर अंग्रेजो का गुलाम कैसे हो गया ?? यहाँ लिखेंगे तो बात बहुत बडी हो जाएगी ! इसका जवाब आपको राजीव भाई के एक व्याख्यान जिसका नाम आजादी का असली इतिहास मे मिल जाएगा।

तो देश की आजादी से जुडे ऐसे सैंकडों-सैंकडों सवाल दिन रात राजीव भाई के दिमाग मे घूमते रहते थे !! इसी बीच उनकी मुलाकात प्रो. धर्मपाल नाम के एक इतिहासकार से हुई जिनकी किताबें अमेरिका मे पढाई जाती है लेकिन भारत मे नहीं !! धर्मपाल जी को राजीव भाई अपना गुरु भी मानते है, उन्होने राजीव भाई के काफी सवालों का जवाब ढूंढने मे बहुत मदद की! उन्होने राजीव भाई को भारत के बारे मे वो दस्तावेज उपलब्ध करवाए जो इंग्लैंड की लाइब्रेरी हाउस आफ कामन्स मे रखे हुए थे जिनमे अंग्रेजो ने पूरा वर्णन किया था कि कैसे उन्होने भारत गुलाम बनाया ! राजीव भाई ने उन सब दस्तावेजो का बहुत अध्यन किया और ये जानकर उनके रोंगटे खडे हो गए कि भारत के लोगो को भारत के बारे मे कितना गलत इतिहास पढाया जा रहा है !! फिर सच्चाई को लोगो के सामने लाने के लिए राजीव भाई गाँव–गाँव, शहर–शहर जाकर व्याख्यान देने लगे ! और साथ-साथ देश की आजादी और देश के अन्य गंभीर समस्याओ का इतिहास और उसका समाधान तलाशने मे लगे रहते !!

इलाहबाद मे पढते हुए उनके एक खास मित्र हुआ करते थे जिनका नाम है योगेश मिश्रा जी उनके पिता जी इलाहबाद हाईकोर्ट मे वकील थे !! तो राजीव भाई और उनके मित्र अक्सर उनसे देश की आजादी से जुडी रहस्यमयी बातों पर वार्तालाप किया करते थे ! तब राजीव भाई को देश की आजादी के विषय मे बहुत ही गंभीर जानकारी प्राप्त हुई ! कि 15 अगस्त 1947 को देश मे कोई आजादी नहीं आई ! बल्कि 14 अगस्त 1947 की रात को अंग्रेज माउंट बेटन और नेहरू के बीच के समझोता हुआ था जिसे सत्ता का हस्तांतरण ( transfer of power agreement) कहते हैं ! इस समझोते के अनुसार अंग्रेज अपनी कुर्सी नेहरू को देकर जाएंगे लेकिन उनके द्वारा भारत को बर्बाद करने के लिए बनाए गये 34735 कानून वैसे ही इस देश मे चलेंगे !! और क्योकि आजादी की लडाई मे पूरे देश का विरोध अँग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ था तो सिर्फ एक ईस्ट इंडिया कंपनी भारत छोड कर जाएगी और उसके साथ जो 126 कंपनिया और भारत को लुटने आए थी वो वैसे की वैसे ही भारत मे व्यापार करेगी ! लूटती रहेगी ! आज उन विदेशी कंपनियो की संख्या बढ कर 6000 को पार कर गई है !! (इस बारे मे और अधिक जानकरी उनके व्याख्यानों मे मिलेगी)

एक बात जो राजीव भाई को हमेशा परेशान करती रहती थी कि आजादी के बाद भी अगर भारत मे अँग्रेजी कानून वैसे के वैसे ही चलेंगे और आजादी के बाद भी विदेशी कंपनियाँ भारत को वैसे ही लूटेंगी जैसे आजादी से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी लूटा करती थी ! आजादी के बाद भी भारत मे वैसे ही गौ हत्या होगी जैसे अंग्रेजो के समय होती थी, तो हमारे देश की आजादी का अर्थ क्या है ??

तो ये सब जानने के बाद राजीव भाई ने इन विदेशी कंपनियो और भारत में चल रहे अँग्रेजी कानूनों के खिलाफ एक बार फिर से वैसा ही स्वदेशी आंदोलन शुरू करने का संकल्प लिया जैसा किसी समय मे बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेजो के खिलाफ लिया था !! अपने राष्ट्र मे पूर्ण स्वतंत्रता लाने और आर्थिक महाशक्ति के रुप में खडा करने के लिए उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की और उसे जीवन पर्यन्त निभाया। वो गाँव-गाँव, शहर-शहर घूम कर लोगो को लोगो को भारत मे चल रहे अँग्रेजी कानून, आधी अधूरी आजादी का सच, विदेशी कंपनियो की भारत मे लूट आदि विषयो के बारे मे बताने लगे ! सन् 1999 में राजीव के स्वदेशी व्याख्यानों की कैसेटों ने समूचे देश में धूम मचा दी थी।!

1984 मे जब भारत मे भोपाल गैस कांड हुआ तब राजीव भाई ने इसके पीछे के षडयंत्र का पता लगाया और ये खुलासा किया कि ये कोई घटना नहीं थी बल्कि अमेरिका द्वारा किया गया एक परीक्षण था (जिसकी अधिक जानकारी आपको उनके व्याख्यानों मे मिलेगी) तब राजीव भाई यूनियन कार्बाइड कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया!

इसी प्रकार 1995-96 में टिहरी बाँध के बनने के खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चे में भाग लिया और पुलिस लाठी चार्ज में काफी चोटें भी खायीं। !! और इसी प्रकार 1999 मे उन्होने राजस्थान के कुछ गांवसियों साथ मिलकर एक शराब बनाने वाली कंपनी जिसको सरकार ने लाइसेन्स दिया था और वो कंपनी रोज जमीन की नीचे बहुत अधिक मात्रा मे पानी निकाल कर शराब बनाने वाली थी उस कंपनी को भगाया !!

1991 भारत मे चले ग्लोबलाएशन, लिब्रलाइजेसशन को राजीव भाई स्वदेशी उद्योगो का सर्वनाश करने वाला बताया और पूरे आंकडों के साथ घंटो-घंटो इस पर व्याख्यान दिये और स्वदेशी व्यापारियो को इसके खिलाफ जागरूक किया !! फिर 1994 मे भारत सरकार द्वारा किए WTO समझोते का विरोध किया क्योकि ये समझोता भारत को एक बहुत बडी आर्थिक गुलामी की और धकेलने वाला था ! इस समझोते मे सैंकडों ऐसे शर्ते सरकार ने स्वीकार कर ली थी जो आज भारत मे किसानो की आत्महत्या करने का, रुपए का डालर की तुलना मे नीचे जाने का, देश बढ रही भूख और बेरोजगारी का, खत्म होते स्वदेशी उद्योगो का, बैंकिंग, इन्सुरेंस, वकालत सभी सर्विस सेक्टर मे बढ रही विदेशी कंपनियो का कारण है ! राजीव भाई के अनुसार इस समझोते के बाद सरकार देश को नहीं चलाएगी बल्कि इस समझोते के अनुसार देश चलेगा !! देश की सारी आर्थिक नीतियाँ इस समझौते को ध्यान मे रख कर बनाई जाएगी ! और भारत मे आज तक बनी किसी भी सरकार में हिम्मत नहीं जो इस WTO समझौते को रद्द करवा सके !!

उन्होने ने बताया कि कैसे WORLD BANK, IMF, UNO जैसे संस्थाये अमेरिका आदि देशो की पिठ्ठू है और विकासशील देशो की सम्पत्ति लूटने के लिए इनको पैदा किया गया है ! (WTO समझोते के बारे मे अधिक जानकारी राजीव भाई के व्याख्यानों मे मिलेगी) इन राष्ट्र विरोधी ताकतों के खिलाफ अपनी लडाई को और मजबूत करने लिए राजीव भाई अपने कुछ साथियो के साथ मिलकर पूरे देश मे विदेशी कम्पनियों, अँग्रेजी कानून, WTO, आदि के खिलाफ अभियान चलाने लगे !! ऐसे ही आर्थर डंकल नाम एक अधिकारी जिसने डंकल ड्राफ्ट बनाया था भारत मे लागू करवाने के लिए वो एक बार भारत आया तो राजीव भाई और बाकी कार्यकर्ता बहुत गुस्से मे थे तब राजीव भाई ने उसे एयरपोर्ट पर ही जूते से मार मार कर भगाया और फिर उनको जेल हुई !!

1999-2000 सन् मे उन्होने दो अमेरिकन कम्पनियाँ पेप्सी और कोकाकोला के खिलाफ प्रदर्शन किया और लोगो को बताया कि ये दोनों कम्पनियाँ पेय पदार्थ के नाम पर आप सबको जहर बेच रही है और हजारो करोड की लूट इस देश मे कर रही हैं ! और आपका स्वास्थ बिगाड रही हैं ! राजीव भाई ने लोगो से कोक ,पेप्सी और इसका विज्ञापन करने वाले क्रिकेट खिलाडियो और, फिल्मी स्टारों का बहिष्कार करने को कहा !! सन 2000 मे 9-11 की घटना घटी तो कुछ अखबार वाले राजीव भाई के पास भी उनके विचार जानने को पहुँचे ! तब राजीव भाई ने कहा की मुझे नहीं लगता कि ये दोनों टावर आतंकवादियो ने गिराये है ! तब उन्होने पूछा आपको क्या लगता है ? राजीव भाई ने कहा मुझे लगता है ये काम अमेरिका ने खुद ही करवाया है ! तो उन्होने कहा आपके पास क्या सबूत है ? राजीव भाई ने कहा समय दो जल्दी सबूत भी ला दूंगा !!

और 2007 मे राजीव भाई ने गुजरात के एक व्याख्यान मे इस 9-11 की घटना का पूरा सच लाइव प्रोजक्टर के माध्यम से लोगो के सामने रखा ! (जिसका विडियो youtube पर 9-11 was totally lie के नाम से उपलब्ध है) और 9 सितंबर 2013 को रूस ने भी एक विडियो जारी कर 9-11 की घटना को झूठा बताया! 2003-2004 मे राजीव भाई ने भारत सरकार द्वारा बनाये गये VAT कानून का विरोध किया और पूरे देश के व्यपरियो के समूह मे जाकर घंटो-घंटो व्याख्यान दिये और उन्होने जागरूक किया कि ये VAT का कानून आपकी आर्थिक लूट से ज्यादा आपके धर्म को कमजोर करने और भारत मे ईसाईयत को बढावा देने के लिए बनाया गया है !! (इस बारे मे अधिक जानकारी राजीव भाई के VAT वाले व्याख्यान मे मिलेगी) देश मे हो रही गौ हत्या को रोकने के लिए भी राजीव भाई ने कडा संघर्ष किया ! राजीव भाई का कहना था कि जब तक हम गौ माता का आर्थिक मूल्यांकन कर लोगो को नहीं समझाएँगे ! तब तक भारत मे गौ रक्षा नहीं हो सकती ! क्योंकि कोई भी सरकार आजतक गौ हत्या के खिलाफ संसद मे बिल पास नहीं कर सकी ! उनका कहना था कि सरकारो का तो पता नहीं वो कब संसद मे गौ हत्या के खिलाफ बिल पास करें क्योकि कि आजादी के 64 साल मे तो उनसे बिल पास नहीं हुआ और आगे करेंगे इसका भरोसा नहीं !! इसलिए तब हमे खुद अपने स्तर पर ही गौ हत्या रोकने का प्रयास करना चाहिए !!
उन्होने देश भर मे घूम घूम कर अलग अलग जगह पर व्याख्यान कर लोगो को गौ माता की महत्वता और उसका आर्थिक महत्व बताया ! उन्होने 60 लाख से अधिक किसानो को देसी खेती (organic farming) करने के सूत्र बताये कि कैसे किसान रासायनिक खाद, यूरिया आदि खेतो मे डाले बिना गौ माता के गोबर और गौ मूत्र से खेती कर सकते है ! जिससे उनके उत्पादन का खर्चा लगभग शून्य होगा !! और उनकी आय मे बहुत बढोतरी होगी ! आज किसान 15-15 हजार रुपए लीटर कीटनाश्क खेत मे छिडक रहा है !! टनों टन महंगा यूरिया, रासायनिक खाद खेत मे डाल रहा है जिससे उसके उत्पादन का खर्चा बढता जा रहा है और उत्पादन भी कम होता जा रहा है !! रासायनिक खाद वाले फल सब्जियाँ खाकर लाखो लाखो लोग दिन प्रतिदिन बीमार हो रहे हैं ! राजीव भाई ने गरीब किसानो को गाय ना बेचने की सलाह दी और उसके गोबर और गौ मूत्र से खेती करने के सूत्र बताये !! किसानो ने राजीव भाई के बताये हुए देसी खेती के सूत्रो द्वारा खेती करना शुरू किया और उनकी आर्थिक समृद्धि बहुत बढीं !!

1998 मे राजीव भाई ने कुछ गौ समितियों के साथ मिलकर गौ हत्या रोकने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट मे मुकदमा दायर कर दिया कि गौ हत्या नहीं होनी चाहिए ! सामने बैठे कुरेशी कसाइयो ने कहा क्यों नहीं होनी चाहिए ? कोर्ट मे साबित ये करना था की गाय की हत्या कर मांस बेचने से ज्यादा लाभ है या बचाने से !! कसाइयो की तरफ से लड़ने वाले भारत के सभी बड़े-बड़े वकील जो 50-50 लाख तक फीस लेते हैं सोली सोराब्जी की बीस लाख की फीस है, कपिल सिब्बल 22 लाख की फीस है, महेश जेठ मालानी (राम जेठ मालानी का लड़का) जो फीस लेते है 32 लाख से 35 लाख सारे सभी बड़े वकील कसाइयों के पक्ष में ! और इधर राजीव भाई जैसे लोगो के पास कोई बडा वकील नहीं था क्योंकि इतना पैसा नहीं था ! तो इन लोगो ने अपना मुकदमा खुद ही लडा !!

(इस मुकद्दमे की पूरी जानकारी आपको राजीव भाई के व्याख्यान जिसका नाम गौ हत्या और राजनीति) मे मिल जाएगी!! हाँ इतना आपको जरूर बता दें 2005 मे मुकदमा राजीव भाई और उनके कार्यकर्ताओ ने जीत लिया !! राजीव भाई अदालत मे गाय के एक किलो गोबर से 33 किलो खाद तैयार करने का फॉर्मूला बताया और अदालत के सामने करके भी दिखया जिससे रोज की 1800 से 2000 रुपए की रोज की कमाई की जा सकती है !! ऐसे ही उन्होने गौ मूत्र से बनने वाली औषधियों का आर्थिक मूल्यांकन करके बताया !!! और तो और उन्होने सुप्रीम कोर्ट के जज की गाडी गोबर गैस से चलाकर दिखा दी !! जज ने तीन महीने गाडी चलाई और ये सब देख अपने दाँतो तले उंगली दबा ली!! अधिक जानकरी आपको राजीव भाई के व्याख्यान मे मिलेगी !! (Gau Hatya Rajniti Supreme Court mein ladai at Aurngabaad.mp3)

राजीव भाई को जब पता चला कि रासायनिक खाद बनाने वाली कंपनियो के बाद देश की सबसे अधिक हजारो करोड रुपए की लूट दवा बनाने वाली सैंकडों विदेशी कंपनियाँ कर रही है ! और इसके इलावा ये बडी बडी कंपनियाँ वो दवाये भारत मे बेच रहे है जो अमेरिका और यूरोप के बहुत से देशों मे बैन है और जिससे देश वासियो को भयंकर बीमारियाँ हो रही है तब राजीव भाई ने इन कंपनियो के खिलाफ भी आंदोलन शुरू कर दिया !! राजीव भाई ने आयुर्वेद का अध्यन किया और 3500 वर्ष पूर्व महाऋषि चरक के शिष्य वागभट्ट जी को महीनो महीनो तक पढा !! और बहुत ज्ञान अर्जित किया ! फिर घूम घूम कर लोगो को आयुर्वेदिक चिकित्सा के बारे मे बताना शुरू किया की कैसे बिना दवा खाये आयुर्वेद के कुछ नियमो का पालन कर हम सब बिना डॉक्टर के स्वस्थ रह सकते है और जीवन जी सकते है इसके अलावा हर व्यक्ति अपने शरीर की 85% चिकित्सा स्वंय कर सकता है !! राजीव भाई खुद इन नियमो का पालन 15 वर्ष से लगातार कर रहे थे जिस कारण वे पूर्ण स्वस्थ थे 15 वर्ष तक किसी डॉक्टर के पास नहीं गए थे !! वो आयुर्वेद के इतने बडे ज्ञाता हो गए थे कि लोगो की गम्भीर से गम्भीर बीमारियाँ जैसे शुगर, बीपी, दमा, अस्थमा, हार्ट ब्लोकेज, कोलेस्ट्रोल आदि का इलाज करने लगे थे और लोगो को सबसे पहले बीमारी होने का असली कारण समझाते थे और फिर उसका समाधान बताते थे !! लोग उनके हेल्थ के लेक्चर सुनने के लिए दीवाने हो गए थे इसके इलावा वो होमोपैथी चिकित्सा के भी बडे ज्ञाता थे होमोपैथी चिकित्सा मे तो उन्हे डिग्री भी हासिल थी !!

एक बार उनको खबर मिली कि उनके गुरु धर्मपाल जी को लकवा का अटैक आ गया है और उनके कुछ शिष्य उनको अस्पताल ले गए थे ! राजीव भाई ने जाकर देखा तो उनकी आवाज पूरी जा चुकी थी हाथ पाँव चलने पूरे बंद हो गए थे ! अस्पताल मे उनको बांध कर रखा हुआ था ! राजीव भाई धर्मपाल जी को घर ले आए और उनको एक होमियोपैथी दवा दी मात्र 3 दिन उनकी आवाज वापिस आ गई और एक सप्ताह मे वो वैसे चलने फिरने लगे कि कोई देखने वाला मानने को तैयार नहीं था कि इनको कभी लकवा का अटैक आया था !! कर्नाटक राज्य में एक बार बहुत भयंकर चिकन-गुनिया फैल गया हजारो की संख्या मे लोग मरे ! राजीव भाई अपनी टीम के साथ वहाँ पहुँच कर हजारो हजारो लोगो को इलाज करके मृत्यु से बचाया ! ये देख कर कर्नाटक सरकार ने अपनी डॉक्टरों की टीम राजीव भाई के पास भेजी और कहा कि जाकर देखो कि वो किस ढंग से इलाज कर रहे हैं !

(अधिक जानकारी के लिए आप राजीव भाई के हेल्थ के लेक्चर सुन सकते हैं घंटो घंटो उन्होने स्वस्थ रहने और रोगो की चिकित्सा के व्याख्यान दिये है)

इसके इलावा राजीव भाई ने यूरोप और भारत की सभ्यता संस्कृति और इनकी भिन्नताओ पर गहरा अध्यन किया और लोगो को बताया कि कैसे भारतवासी यूरोप के लोगो की मजबूरी को अपना फैशन बना रहे है और कैसे उनकी नकल कर बीमारियो के शिकार हो रहे है !! राजीव भाई का कहना था कि देश मे आधुनिकीकरण के नाम पर पश्चिमीकरण हो रहा है ! और इसका एक मात्र कारण देश मे चल रहा अंग्रेज मैकॉले का बनाया हुआ indian education system है ! क्योकि आजाद भारत मे सारे कानून अंग्रेजो के चल रहे हैं इसीलिए ये मैकॉले द्वारा बनाया गया शिक्षा तंत्र भी चल रहा है !

राजीव भाई कहते थे कि इस अंग्रेज मैकॉले ने जब भारत का शिक्षा तंत्र का कानून बनाया और शिक्षा का पाठयक्रम तैयार किया तब इसने एक बात कही कि मैंने भारत का शिक्षा तंत्र ऐसा बना दिया है की इसमे पढ के निकलने वाला व्यक्ति शक्ल से तो भारतीय होगा पर अकल से पूरा अंग्रेज होगा ! उसकी आत्मा अंगेजों जैसी होगी उसको भारत की हर चीज मे पिछडापन दिखाई देगा !! और उसको अंग्रेज और अंग्रेजियत ही सबसे बढिया लगेगी !!

इसके इलावा राजीव भाई का कहना था कि इसी अंग्रेज मैकॉले ने भारत की न्याय व्यवस्था को तोड कर IPC, CPC जैसे कानून बनाये और उसके बाद ब्यान दिया की मैंने भारत की न्याय पद्धति को ऐसा बना दिया है कि इसमे किसी गरीब को इंसाफ नहीं मिलेगा ! सालों साल मुकदमे लटकते रहेंगे !! मुकदमो के सिर्फ फैंसले आएंगे न्याय नहीं मिलेगा !! इस अंग्रेज शिक्षा पद्धति और अँग्रेजी न्यायव्यवस्था के खिलाफ लोगो को जागरूक करने के लिए राजीव राजीव भाई ने मैकॉले शिक्षा और भारत की प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पर बहुत व्याख्यान दिये और इसके अतिरिक्त अपने एक मित्र आजादी बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता पवन गुप्ता जी के साथ मिल कर एक गुरुकुल की स्थापना की वहाँ वो फेल हुए बच्चो को ही दाखिल करते थे कुछ वर्ष उन बच्चो को उन्होने प्राचीन शिक्षा पद्धति से पढाया ! और बच्चे बाद मे इतने ज्ञानी हो गए की आधुनिक शिक्षा मे पढे बडे बडे वैज्ञानिक उनके आगे दाँतो तले उंगली दबाते थे !

राजीव जी ने रामराज्य की कल्पना को समझना चाहा ! इसके लिए वे भारत अनेकों साधू संतो,रामकथा करने वालों से मिले और उनसे पूछते थे की भगवान श्री राम रामराज्य के बारे क्या कहा है ?? लेकिन कोई भी उत्तर उनको संतुष्ट नहीं कर पाया ! फिर उन्होने भारत मे लिखी सभी प्रकार की रामायणों का अध्यन किया और खुद ये हैरान हुए कि रामकथा मे से भारत की सभी समस्याओ का समाधान निकलता है ! फिर राजीव भाई घूम घूम कर खुद रामकथा करने लगे और उनकी रामकथा सभी संत और बाबाओ से अलग होती वो सिर्फ उसी बात पर अधिक चर्चा करते जिसे अन्य संत तो बताते नहीं या वो खुद ही ना जानते है ! राजीव भाई लोगो को बताते कि किस प्रकार रामकथा मे भारत की सभी समस्याओ का समाधान निकलता है ! (इस बारे मे अधिक जानकारी के लिए आप राजीव भाई की रामकथा वाला व्याख्यान सुन सकते हैं)

2009 मे राजीव भाई बाबा रामदेव के संपर्क मे आए और बाबा रामदेव को देश की गंभीर समस्याओ और उनके समाधानो से परिचित करवाया और विदेशो मे जमा कालेधन आदि के विषय मे बताया और उनके साथ मिल कर आंदोलन को आगे बढाने का फैसला किया !! आजादी बचाओ के कुछ कार्यकर्ता राजीव भाई के इस निर्णय से सहमत नहीं थे !! फिर भी राजीव भाई ने 5 जनवरी 2009 को भारत स्वाभिमान आंदोलन की नीव रखी !! जिसका मुख्य उदेश्य लोगो को अपनी विचार धारा से जोडना, उनको देश की मुख्य समस्याओ का कारण और समाधान बताना !! योग और आयुर्वेद से लोगो को निरोगी बनाना और भारत स्वाभिमान आंदोलन के साथ जोड कर 2014 मे देश से अच्छे लोगो को आगे लाकर एक नई पार्टी का निर्माण करना था जिसका उदेश्य भारत मे चल रही अँग्रेजी व्यवस्थाओ को पूर्ण रूप से खत्म करना, विदेशो मे जमा काला धन वापिस लाना, गौ हत्या पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना, और एक वाक्य मे कहा जाए ये आंदोलन सम्पूर्ण आजादी को लाने के लिए शुरू किया गया था !!

राजीव भाई के व्याख्यान सुन कर मात्र ढाई महीने मे 6 लाख कार्यकर्ता पूरे देश मे प्रत्यक्ष रूप मे इस अंदोलन से जुड गए थे राजीव भाई पतंजलि मे भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओ के बीच व्याख्यान दिया करते थे जो पतंजलि योगपीठ के आस्था चैनल पर के माध्यम से भारत के लोगो तक पहुंचा करते थे इस प्रकार अप्रत्यक्ष रूप से भारत स्वाभिमान अंदोलन के साथ 3 से 4 करोड लोग जुड गए थे ! फिर राजीव भाई भारत स्वाभिमान आंदोलन के प्रतिनिधि बनकर पूरे भारत की यात्रा पर निकले गाँव-गाँव शहर-शहर जाया करते थे पहले की तरह व्याख्यान देकर लोगो को भारत स्वाभिमान से जुडने के लिए प्रेरित करते थे !!

लगभग आधे भारत की यात्रा करने के बाद राजीव भाई 26 नवंबर 2010 को उडीसा से छतीसगढ राज्य के एक शहर रायगढ पहुंचे वहाँ उन्होने 2 जन सभाओ को आयोजित किया ! इसके पश्चात अगले दिन 27 नवंबर 2010 को जंजगीर जिले मे दो विशाल जन सभाए की इसी प्रकार 28 नवंबर बिलासपुर जिले मे व्याख्यान देने से पश्चात 29 नवंबर 2010 को छतीसगढ के दुर्ग जिले मे पहुंचे ! उनके साथ छतीसगढ के राज्य प्रभारी दया सागर और कुछ अन्य लोग साथ थे ! दुर्ग जिले मे उनकी दो विशाल जन सभाए आयोजित थी पहली जनसभा तहसील बेमतरा मे सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक थी! राजीव भाई ने विशाल जन सभा को आयोजित किया !! इसके बाद का कार्यक्रम साय 4 बजे दुर्ग मे था !! जिसके लिए वह दोपहर 2 बजे बेमेतरा तहसील से रवाना हुए !

(इसके बात की घटना विश्वास योग्य नहीं है इसके बाद की सारी घटना उस समय उपस्थित छतीसगढ के प्रभारी दयासागर और कुछ अन्य साथियो द्वारा बताई गई है)

उन लोगो का कहना है गाडी मे बैठने के बाद उनका शरीर पसीना पसीना हो गया ! दयासागर ने राजीव जी से पूछा तो जवाब मिला की मुझे थोडी गैस सीने मे चढ गई है शोचालय जाऊँ तो ठीक हो जाऊंगा ! फिर दयासागर तुरंत उनको दुर्ग के अपने आश्रम मे ले गए वहाँ राजीव भाई शोचालय गए और जब कुछ देर बाद बाहर नहीं आए तो दयासागर ने उनको आवाज दी राजीव भाई ने दबी दबी आवाज मे कहा गाडी स्टार्ट करो मैं निकल रहा हूँ ! जब काफी देर बाद राजीव भाई बाहर नहीं आए तो दरवाजा खोला गया राजीव भाई पसीने से लथपत होकर नीचे गिरे हुए थे ! उनको बिस्तर पर लिटाया गया और पानी छिडका गया दयासागर ने उनको अस्पताल चलने को कहा ! राजीव भाई ने मना कर दिया उन्होने कहा होमियोपैथी डॉक्टर को दिखाएंगे !

थोडी देर बाद होमियोपैथी डॉक्टर आकर उनको दवाइयाँ दी ! फिर भी आराम ना आने पर उनको भिलाई के सेक्टर 9 मे इस्पात स्वयं अस्पताल मे भर्ती किया गया ! इस अस्पताल मे अच्छी सुविधाइए ना होने के कारण उनको Apollo BSR मे भर्ती करवाया गया ! राजीव भाई एलोपेथी चिकित्सा लेने से मना करते रहे ! उनका संकल्प इतना मजबूत था कि वो अस्पताल मे भर्ती नहीं होना चाहते थे ! उनका कहना था कि सारी जिंदगी एलोपेथी चिकित्सा नहीं ली तो अब कैसे ले लू ? ! ऐसा कहा जाता है कि इसी समय बाबा रामदेव ने उनसे फोन पर बात की और उनको आईसीयु मे भर्ती होने को कहा !

फिर राजीव भाई 5 डॉक्टरों की टीम के निरीक्षण मे आईसीयु भर्ती करवाएगे !! उनकी अवस्था और भी गंभीर होती गई और रात्रि एक से दो के बीच डॉक्टरों ने उन्हे मृत घोषित किया !!

(बेमेतरा तहसील से रवाना होने के बाद की ये सारी घटना राज्य प्रभारी दयासागर और अन्य अधिकारियों द्वारा बताई गई है अब ये कितनी सच है या झूठ ये तो उनके नार्को टेस्ट करने ही पता चलेगा !!)

क्योकि राजीव जी की मृत्यु का कारण दिल का दौरा बता कर सब तरफ प्रचारित किया गया ! 30 नवंबर को उनके मृत शरीर को पतंजलि, हरिद्वार लाया गया जहां हजारो की संख्या मे लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे ! और 1 दिसंबर राजीव जी का दाह संस्कार कनखल हरिद्वार मे किया गया !!

राजीव भाई के चाहने वालों का कहना है कि अंतिम समय मे राजीव जी का चेहरा पूरा हल्का नीला, काला पड गया था ! उनके चाहने वालों ने बार-बार उनका पोस्टमार्टम करवाने का आग्रह किया लेकिन पोस्टमार्ट्म नहीं करवाया गया !! राजीव भाई की मौत लगभग भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की मौत से मिलती जुलती है आप सबको याद होगा ताशकंद से जब शास्त्री जी का मृत शरीर लाया गया था तो उनके भी चेहरे का रंग नीला, काला पड गया था !! और अन्य लोगो की तरह राजीव भाई भी ये मानते थे कि शास्त्री जी को विष दिया गया था !! राजीव भाई और शास्त्री जी की मृत्यु मे एक जो समानता है कि दोनों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था !!

राजीव भाई की मृत्यु से जुडे कुछ सवाल !!

किसके आदेश पर ये प्रचारित किया गया ? कि राजीव भाई की मृत्यु दिल का दौरा पडने से हुयी है ?

29 नवंबर दोपहर 2 बजे बेमेतरा से निकलने के पश्चात जब उनको गैस की समस्या हुए और रात 2 बजे जब उनको मृत घोषित किया गया इसके बीच मे पूरे 12 घंटे का समय था 12 घंटे मे मात्र एक गैस की समस्या का समाधान नहीं हो पाया ??

आखिर पोस्ट मार्टम करवाने मे क्या तकलीफ थी ??

राजीव भाई का फोन जो हमेशा आन रहता था उस 2 बजे बाद बंद क्यों था ??

राजीव भाई के पास एक थैला रहता था जिसमे वो हमेशा आयुर्वेदिक, होमियोपैथी दवाएं रखते थे वो थैला खाली क्यों था ??

30 नवंबर को जब उनको पतंजलि योगपीठ मे अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था उनके मुंह और नाक से क्या टपक रहा था उनके सिर को माथे से लेकर पीछे तक काले रंग के पालिथीन से क्यूँ ढका था ?

राजीव भाई की अंतिम विडियो जो आस्था चैनल पर दिखाई गई तो उसको एडिट कर चेहरे का रंग सफेद कर क्यों दिखाया गया ?? अगर किसी के मन को चोर नहीं था तो विडियो एडिट करने की क्या जरूरत थी ??

अंत पोस्टमार्टम ना होने के कारण उनकी मृत्यु आजतक एक रहस्य ही बन कर रह गई !!

राजीव भाई के कई समर्थक उनके जाने के बाद बाबा रामदेव से काफी खफा है क्योंकि बाबा रामदेव अपने एक व्याख्यान मे कहा कि राजीव भाई को हार्ट ब्लोकेज था, शुगर की समस्या थी, बी.पी. भी था राजीव भाई पतंजलि योगपीठ की बनी दवा मधुनाशनी खाते थे ! जबकि राजीव भाई खुद अपने एक व्याख्यान मे बता रहे हैं कि उनका शुगर, बीपी, कोलेस्ट्रोल सब नार्मल है !! वे पिछले 20 साल से डॉक्टर के पास नहीं गए ! और अगले 15 साल तक जाने की संभावना नहीं !!

और राजीव भाई के चाहने वालो का कहना है कि हम कुछ देर के लिए राजीव भाई की मृत्यु पर प्रश्न नहीं उठाते लेकिन हमको एक बात समझ नहीं आती कि पतंजलि योगपीठ वालों ने राजीव भाई की मृत्यु के बाद उनको तिरस्कृत करना क्यों शुरू कर दिया ??

मंचो के पीछे उनकी फोटो क्यों नहीं लगाई जाती ??

आस्था चैनल पर उनके व्याख्यान दिखाने क्यों बंद कर दिये गए ?? कभी साल अगर उनकी पुण्यतिथि पर व्याख्यान दिखाये भी जाते है तो वो भी 2-3 घंटे के व्याख्यान को काट काट कर एक घंटे का बनाकर दिखा दिया जाता है !!

इसके अतिरिक्त उनके कुछ समर्थक कहते हैं कि भारत स्वाभिमान आंदोलन की स्थापना जिस उदेश्य के लिए हुए थी राजीव भाई की मृत्यु के बाबा रामदेव उस राह हट क्यों गए ?

राजीव भाई और बाबा खुद कहते थे कि सब राजनीतिक पार्टियां एक जैसी है हम 2014 मे अच्छे लोगो को आगे लाकर एक नया राजनीतिक विकल्प देंगे ! लेकिन राजीव भाई की मृत्यु के बाद बाबा रामदेव ने भारत स्वाभिमान के आंदोलन की दिशा बदल दी और राजीव की सोच के विरुद्ध आज वो भाजपा सरकार का समर्थन कर रहें !! इसलिए ब
11:57

कर्मवीर चक्र अवार्ड से सम्मानित हुए दिल्ली के श्री कर्मवीर सिंह


 दिल्ली के मयूर विहार के कर्मवीर सिंह को संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्पित अंतरराष्ट्रीय परिषद एनजीओ "आई कांगो "द्वारा कर्मवीर चक्र सम्मान से सम्मानित किया गया यह सम्मान नोएडा में आयोजित तीन दिवसीय 25 /26/ 27 नवंबर 2019 "रेकस कर्मवीर ग्लोबल फैलोशिप के दौरान प्रदान किया गया यह सम्मान प्राप्त करने वाले देश विदेश  के नामचीन रह चुके हैं जिसमें पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, सफेद क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन ,एक्ट्रेस गुल पनाग, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व डायरेक्टर डेविड नूर, अमेरिकी राजदूत और समाजसेवी जॉन ग्रहमआदि शामिल है जिसमें कर्मवीर सिंह को यह सम्मान" फूड सेफ्टी और डिस्ट्रीब्यूटर ऑफ फूड स्ट्रीट चिल्ड्रंस " उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया है बता दें कि कर्मवीर सिंह ऑल इंडिया रोटी बैंक ट्रस्ट के ईस्ट दिल्ली के प्रेसिडेंट है जिसके माध्यम से गरीब बेसहारा बस्ती में रहने वाले बच्चों को डेली खाना खिलाते हैं समय-समय पर बच्चों को कपड़े स्टेशनरी और किताबें भी देते हैं इससे पहले इन्हें रोबिन्हुड आर्मी एसोसिएशन सर्टिफिकेट भी दिया जा चुका है रोबिन हुड की टीम "कौन बनेगा करोड़पति" में भी आ चुकी है इन्होंने सामाजिक कार्यों से भारत का दिल दिल्ली का नाम रोशन किया है और आगे भी करते रहेंगे!
07:08

क्या महाराष्ट्र की राजनीति का असर झारखंड में होने वाले चुनाव पर भी पड़ेगा



महाराष्ट्र की सत्ता येन केन प्रकारेण हथिया कर उद्धव ठाकरे, शरद पवार, और सोनिया गांधी ने खुद को कितना सुरक्षित कर लिया कहना थोड़ा कठिन है, पर एक बात साफ है कि कांग्रेस की धर्म निरपेक्षता, शिव सेना का हिंदुत्व,और शरद पवार की राजनैतिक महत्वाकांक्षा को देश की जनता नए नजरिए से देखेगी,कथित अल्पसंख्यक और धर्मनिरपेक्ष मतों पर यह दुरभि सन्धि असर अवश्य डालेगी इसमें कोई दो राय नहीं, साथ ही झारखंड, और पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव पर भी इसका असर अवश्य पड़ेगा,इसमें भी कोई दोराय नही।
तत्कालिक तौर पर भाजपा को सत्ता से बाहर होना अवश्य पड़ा, किंतु भाजपा गठबंधन से अलग होना शिवसेना को भारी अवश्य पड़ेगा,सीटों के बंटवारे में दोनों(भाजपा व शिवसेना)ने लगभग बराबर सीटों पर चुनाव लड़ा,जहां भाजपा 70%से अधिक मार्जिन से चुनाव जीती वहीं शिव सेना महज 40%से कुछ ही अधिक मार्जिन से जीत हासिल की,कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भाजपा गठबंधन को जनादेश मिला जिसका कांग्रेस व एन सी पी ने शिवसेना को झांसे में लेकर अपहरण कर लिया,यह कर्नाटक की पुनरावृत्ति है, सम्भव हो कुछ ही दिनों या महीनों में यहीं हाल उद्धव ठाकरे का हो,मेरे हिसाब से एक मायने में भजपा को इसका लाभ मिला, अब शिव सेना से अलग होकर भाजपा सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी,और यदि लड़ती तो आज यह थुक्का फजीहत की स्थिति न बनती,जो गठबंधन की वजह से सीटों के बंटवारे में आधी सीटों पर लड़ने की वजह से बनी,एक तरह से शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने पैरों में कुल्हाड़ी मार ली,कल निश्चित है साथ सत्ता हासिल करने वाले दल अलग चुनाव लड़ें,जिसका खामियाजा शिवसेना भुगतना पड़ेगा, अब इस खेल में कांग्रेस व एन सी पी के पास खोने को कुछ भी नही,और पाने को क्या है यह सबके सामने है,, ।
06:57

परमपिता परमात्मा और उनके दिव्य दर्शन



के सी शर्मा*
कलियुग के अन्त में धर्म-ग्लानी अथवा अज्ञान-रात्रि के समय, शिव सृष्टि का कल्याण करने के लिए सबसे  पहले तीन सूक्ष्म देवता ब्रह्मा, विष्णु और शंकर को रचते है और इस कारण शिव ‘त्रिमूर्ति’ कहलाते है | तीन देवताओं की रचना करने के बाद वह स्वयं इस मनुष्य-लोक में एक साधारण एवं वृद्ध भक्त के तन में अवतरित होते है, जिनका नाम वे ‘प्रजापिता ब्रह्मा’ रखते है |
प्रजा पिता ब्रह्मा द्वारा ही परमात्मा शिव मनुष्यात्माओं को पिता, शिक्षक तथा सद्गुरु के रूप में मिलते है और सहज गीता ज्ञान तथा सहज राजयोग सिखा कर उनकी सद्गति करते है, अर्थात उन्हें जीवन-मुक्ति देते है |

"शंकर द्वारा कलियुगी सृष्टि का महाविनाश"

कलियुग के अन्त में प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा सतयुगी दैवी सृष्टि की स्थापना के साथ परमपिता परमात्मा शिव पुरानी, आसुरी सृष्टि के महाविनाश की तैयारी भी शुरू करा देते है | परमात्मा शिव शंकर के द्वारा विज्ञान-गर्वित (Science-Proud) तथा विपरीत बुद्धि अमेरिकन लोगों तथा यूरोप-वासियों (यादवों) को प्रेरित कर उन द्वारा ऐटम और हाइड्रोजन बम और मिसाइल (Missiles) तैयार कराते हैं, जिन्हें कि महभारत में ‘मूसल’ तथा ‘ब्रह्मास्त्र’ कहा गया है | इधर भारत में भी देह-अभिमानी, धर्म-भ्रष्ट तथा विपरीत बुद्धि वाले लोगों (जिन्हें महाभारत की भाषा में ‘कौरव’ कहा गया है) को पारस्परिक युद्ध (Civil War) के लिए प्रेरित होगे |

"विष्णु द्वारा पालना"

विष्णु की चार भुजाओं में से दो भुजाएँ श्री नारायण की और दो भुजाएँ श्री लक्ष्मी की प्रतीक है | ‘शंख’ उनका पवित्र वचन अथवा ज्ञान-घोष की निशानी है, ‘स्वदर्शन चक्र’ आत्मा (स्व) के तथा सृष्टि चक्र के ज्ञान का प्रतीक है, ‘कमल पुष्प’ संसार में रहते हुए अलिप्त तथा पवित्र रहने का सूचक है तथा ‘गदा’ माया पर, अर्थात पाँच विकारों पर विजय का चिन्ह है | अत: मनुष्यात्माओं के सामने विष्णु चतुर्भुज का लक्ष्य रखते हुए परमपिता परमात्मा शिव समझते है कि इन अलंकारों को धारण करने से अर्थात इनके रहस्य को अपने जीवन में उतरने से नर ‘श्री नारायण’ और नारी ‘श्री लक्ष्मी’ पद प्राप्त कर लेती है, अर्थात मनुष्य दो ताजों वाला ‘देवी या देवता’ पद प्राप्त करता है | इन दो ताजों में से एक ताज तो प्रकाश का ताज अर्थात प्रभा-मंडल (Crown of Light) है जो कि पवित्रता व शान्ति का प्रतीक है और दूसरा रत्न-जडित सोने का ताज है जो सम्पति अथवा सुख का अथवा राज्य भाग्य का सूचक है |
इस प्रकार, परमपिता परमात्मा शिव सतयुगी तथा त्रेतायुगी पवित्र, दैवी सृष्टि (स्वर्ग) की पालना के संस्कार भरते है, जिसके फल-स्वरूप ही सतयुग में श्री नारायण तथा श्री लक्ष्मी (जो कि पूर्व जन्म में प्रजापिता ब्रह्मा और सरस्वती थे) तथा सूर्यवंश के अन्य राजा प्रजा-पालन का कार्य करते है और त्रेतायुग में श्री सीता व श्री राम और अन्य चन्द्रवंशी राजा राज्य करते है |

मालूम रहे कि वर्तमान समय परमपिता परमात्मा शिव प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा तथा तीनों देवताओं द्वारा उपर्युक्त तीनो कर्तव्य करा रहे है | अब हमारा कर्तव्य है कि परमपिता परमात्मा शिव तथा प्रजापिता ब्रह्मा से अपना आत्मिक सम्बन्ध जोड़कर पवित्र बनने का पुरषार्थ करे व सच्चे वैष्णव बनें | मुक्ति और जीवनमुक्ति के ईश्वरीय जन्म-सिद्ध अधिकार के लिए पूरा पुरुषार्थ करें |

"परमात्मा का दिव्य – अवतरण"

शिव का अर्थ है – ‘कल्याणकारी’ | परमात्मा का यह नाम इसलिए है, वह धर्म-ग्लानि के समय, जब सभी मनुष्य आत्माएं माया (पाँच विकारों) के कारण दुखी, अशान्त, पतित एवं भ्रष्टाचारी बन जाती है तब उनको पुन: पावन तथा सम्पूर्ण सुखी बनाने का कल्याणकारी कर्तव्य करते है | शिव ब्रह्मलोक में निवास करते है और वे कर्म-भ्रष्ट तथा धर्म भ्रष्ट संसार का उद्धार करने के लिए ब्रह्मलोक से नीचे उतर कर एक मनुष्य के शरीर का आधार लेते है | परमात्मा शिव के इस अवतरण अथवा दिव्य एवं अलौकिक जन्म की पुनीत-स्मृति में ही ‘शिव रात्रि’, अर्थात शिवजयंती का त्यौहार मनाया जाता है |
परमात्मा शिव जो साधारण एवं वृद्ध मनुष्य के तन में अवतरित होते है, उसको वे परिवर्तन के बाद ‘प्रजापिता ब्रह्मा’ नाम देते है | उन्हीं की याद में शिव की प्रतिमा के सामने ही उनका वाहन ‘नन्दी-गण’ दिखाया जाता है | क्योंकि परमात्मा सर्व आत्माओं के माता-पिता है, इसलिए वे किसी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते बल्कि ब्रह्मा के तन में संनिवेश( प्रवेश) ही उनका दिव्य-जन्म अथवा अवतरण है |
"अजन्मा परमात्मा शिव के दिव्य जन्म की रीति न्यारी"

परमात्मा शिव किसी पुरुष के बीज से अथवा किसी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते क्योंकि वे तो स्वयं ही सबके माता-पिता है, मनुष्य-सृष्टि के चेतन बीज रूप है और जन्म-मरण तथा कर्म-बन्धन से रहित है | अत: वे एक साधारण मनुष्य के वृद्धावस्था वाले तन में प्रवेश करते है | इसे ही परमात्मा शिव का ‘दिव्य-जन्म’ अथवा ‘अवतरण’ भी कहा जाता है क्योंकि जिस तन में वे प्रवेश करते है वह एक जन्म-मरण तथा कर्म बन्धन के चक्कर में आने वाली मनुष्यात्मा ही का शरीर होता है, वह परमात्मा का ‘अपना’ शरीर नहीं होता |

जब सारी सृष्टि माया (अर्थात काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार आदि पाँच विकारों) के पंजे में फंस जाती है तब परमपिता परमात्मा शिव, जो कि आवागमन के चक्कर से मुक्त है, मनुष्यात्माओं को पवित्रता, सुख और शान्ति का वरदान देकर माया के पंजे से छुड़ाते है | वे ही सहज ज्ञान और राजयोग की शिक्षा देते है तथा सभी आत्माओं को परमधाम में ले जाते है तथा मुक्ति एवं जीवनमुक्ति का वरदान देते है | शिव रात्रि का त्यौहार फाल्गुन मास, जो कि विक्रमी सम्वत का अंतिम मास होता है, में आता है | उस समय कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी होती है और पूर्ण अन्धकार होता है | उसके पश्चात शुक्ल पक्ष का आरम्भ होता हुई और कुछ ही दिनों बाद नया संवत आरम्भ होता है | अत: रात्री की तरह फाल्गुन की कृष्ण चतुर्दशी भी आत्माओं को अज्ञान अन्धकार, विकार अथवा आसुरी लक्षणों की पराकाष्ठा के अन्तिम चरण का बोधक है | इसके पश्चात आत्माओं का शुक्ल पक्ष अथवा नया कल्प प्रारम्भ होता है, अर्थात अज्ञान और दुःख के समय का अन्त होकर पवित्र तथा सुख आने का समय शुरू होता है |
परमात्मा शिव अवतरित होकर अपने ज्ञान, योग तथा पवित्रता द्वारा आत्माओं में आध्यात्मिक जागृति उत्पन्न करते है इसी महत्व के फलस्वरूप भक्त लोग शिवरात्रि को जागरण करते है | इस दिन मनुष्य उपवास, व्रत आदि भी रखते है | उपवास (उप-निकट, वास-रहना) का वास्तविक अर्थ है ही परमत्मा के समीप हो जाना | अब परमात्मा से युक्त होने के लिए पवित्रता का व्रत लेना जरूरी है |
06:36

हिंदू पंचांग दैनिक राशिफल के साथ विष्णु जोशी की कलम से



🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग पंडित विष्णु जोशी* ~
🌞7905156547
⛅ *दिनांक 30 नवम्बर 2019*
⛅ *दिन - शनिवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत -1941*
⛅ *अयन - दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु - हेमंत*
⛅ *मास - मार्गशीर्ष*
⛅ *पक्ष - शुक्ल*
⛅ *तिथि - चतुर्थी शाम 06:05 तक तत्पश्चात पंचमी*
⛅ *नक्षत्र - पूर्वाषाढा सुबह 08:17 तक तत्पश्चात उत्तराषाढा*
⛅ *योग - गण्ड दोपहर 01:55 तक  तत्पश्चात वृद्धि*
⛅ *राहुकाल - सुबह 09:35 से सुबह 10:55 तक*
⛅ *सूर्योदय - 06:59*
⛅ *सूर्यास्त - 17:54*
⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण -
 💥 *विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *काम धंधे में सफलता न मिलती हो तो* 🌷
🙏🏻 *काम धंधे में सफलता न मिलती हो तो २१ बार ये गीता का आखरी श्लोक बोलें ...*
🌷  *" यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः*
*तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम।।78।। "*
🙏🏻 *२१ बार न बोल सकें तो कम से कम १ बार तो बोलें और शांत हो जाएँ ।*
🙏🏻 *
               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *वास्तु शास्त्र* 🌷
🏡 *घर में सुख और समृद्धि बनी रहे, इसके लिए पुराने समय से ही कई परंपराएं प्रचलित हैं। ये परंपराएं अलग-अलग वस्तुओं और कार्यों से जुड़ी हैं। सभी के घरों में कुछ न कुछ वस्तुएं टूटी-फूटी होती है, बेकार होती है, फिर भी किसी कोने में पड़ी रहती हैं। 7 वस्तुएं ऐसी बताई गई हैं जो टूटी-फूटी अवस्था में घर में नहीं रखना चाहिए।*
🏡 *यदि ये चीजें घर में होती हैं तो इनका नकारात्मक असर परिवार के सभी सदस्यों पर होता है। जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है और कार्यों में गति नहीं बन पाती है। इसी वजह से धन संबंधी कार्यों में भी असफलता के योग बनते हैं। घर में दरिद्रता का आगमन हो सकता है। यहां जानिए ये 7 चीजें कौन-कौन सी हैं...*
👉🏻 *वास्तु अनुसार घर में नहीं रखनी चाहिए ये 7 टूटी-फूटी चीजें, बढ़ती है नकारात्मक ऊर्जा ।*
🏡 *1. बर्तन*
*कई लोग घर में टूटे-फूटे बर्तन भी रखे रहते हैं जो कि अशुभ प्रभाव देते हैं। शास्त्रों के अनुसार घर में टूटे-फूटे बर्तन नहीं रखना चाहिए। यदि ऐसे बर्तन घर में रखे जाते हैं तो इससे महालक्ष्मी असप्रसन्न होती हैं और दरिद्रता का प्रवेश हमारे घर में हो सकता है। टूटे-फूटे और बेकार बर्तन घर में जगह भी घेरते हैं, इससे वास्तु दोष भी उत्पन्न होता है। वास्तु दोष उत्पन्न होने पर नकारात्मक फल मिलने लगते हैं।*
🏡 *2. दर्पण*
*टूटा हुआ दर्पण रखना वास्तु के अनुसार एक बड़ा दोष है। इस दोष के कारण घर में नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है और परिवार के सदस्यों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।*
🏡 *3. पलंग*
*वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए जरूरी है कि पति-पत्नी का पलंग टूटा हुआ बिल्कुल न हो। यदि पलंग ठीक नहीं होगा तो पति-पत्नी के वैवाहिक जीवन में परेशानियां आने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं।*
🏡 *4. घड़ी*
*खराब घड़ी घर में नहीं रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि घड़ियों की स्थिति से हमारे घर-परिवार की उन्नति निर्धारित होती है। यदि घड़ी सही नहीं होगी परिवार के सदस्य कार्य पूर्ण करने में बाधाओं का सामना करेंगे और काम निश्चित  समय में पूर्ण नहीं हो पाएगा।*
🏡 *5. तस्वीर*
*यदि घर में कोई टूटी हुई तस्वीर हो तो उसे भी घर से हटा देना चाहिए। वास्तु के अनुसार यह भी वास्तु दोष उत्पन्न करती है।*
🏡 *6. दरवाजा*
*यदि घर का मुख्य दरवाजा या अन्य कोई दरवाजा कहीं से टूट रहा हो तो उसे तुरंत ठीक करवा लेना चाहिए। दरवाजे में टूट-फूट अशुभ मानी गई है। इनसे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है और वास्तु दोष उत्पन्न होता है।*
🏡 *7. फर्नीचर*
*घर का फर्नीचर भी एकदम सही हालत में होना चाहिए। वास्तु के अनुसार फर्नीचर की टूट-फूट का भी बुरा असर हमारे जीवन पर होता है।*
🏡 *वास्तु दोष उत्पन्न होने पर घर-परिवार के सदस्यों को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जिस घर में वास्तु दोष होते हैं, वहां पैसों की कमी बनी रहती है। अत: इन दोषों को निवारण तुरंत ही कर लेना चाहिए।*

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          🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🌻🍀🌺🙏🏻

गुरुवार, 12 दिसंबर मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत
रविवार, 08 दिसंबर मोक्षदा एकादशी
रविवार, 22 दिसंबर सफला एकादशी
सोमवार, 09 दिसंबर सोम प्रदोष व्रत (शुक्ल)
सोमवार, 23 दिसंबर सोम प्रदोष व्रत (कृष्ण)
पंचक
2 दिसंबर रात्रि 12.57 से 7 दिसंबर रात्रि 1.29 तक
पंचक
2 दिसंबर रात्रि 12.57 से 7 दिसंबर रात्रि 1.29 तक
पंचक
2 दिसंबर रात्रि 12.57 से 7 दिसंबर रात्रि 1.29 तक
पंचक
2 दिसंबर रात्रि 12.57 से 7 दिसंबर रात्रि 1.29 तक

व्यापार को बुरी नज़र से बचाने के उपाय

अगर आपको लगता है कि आप लगन पूर्वक काम करते हैं फिर भी व्यापार में अनुकूल सफलता नहीं मिल रही है तो इसका कारण ग्रहों का विपरीत प्रभाव या वास्तुदोष भी हो सकता है। इन हालातों में व्यवसाय में उन्नति के लिए आप कुछ उपाय आजमा सकते हैं।

अगर किसी की आपके व्यवसाय में बुरी नज़र लग गई है तो उसे दूर करने के लिए रोज़ाना कार्यस्थल पर गोमूत्र ;पिसी हुई फिटकरी और कपूर को आपस मे पानी मे मिला कर पोछा लगाए।
किसी भी तरह की नेगेटिव एनर्जी नही रहेगी और कारोबार में बरकत आएगी।


मेष (Aries) : आर्थिक क्षेत्र में मिले-जुले परिणाम दिखेंगे। आज खर्चों में तेजी रहेगी। कमाई के साथ-साथ व्यय भी समान रूप से बना रहता दिखाई देगा। क्या न करें- लक्ष्य के प्रति भटकाव और भ्रम न लाएं
वृष (Taurus) : आज बच्चों को लेकर आप अधिक चिंतित रह सकते हैं। उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित बातें कुछ परेशान कर सकती हैं। क्या न करें- आज अपने मन की चंचलता को बहकने न दें।
मिथुन (Gemini) : कामकाज के दौरान कुछ नए मौके मिलेंगे। आपकी मेहनत का अच्छा रिजल्ट भी आपको मिलता दिखाई देगा। क्या न करें- आज अपने काम के प्रति लापरवाही न दिखाएं।
कर्क (Cancer) : कारोबार में आपको नए लोगों का साथ मिलेगा, जिसका असर नई योजनाओं पर भी पड़ सकता है। नियमित रूप से अपना काम स्वयं करें। क्या न करें - दूसरों पर अपना काम न छोड़ें।
सिंह (Leo) : कार्यक्षेत्र के लिए आज का दिन पूरी तरह से अनुकूल रहेगा। व्यापार में बदलाव या नौकरी में पदोन्नति की संभावना है। क्या न करें- आज भूलकर भी शेयर बाजार में पैसा न लगाएं।
कन्या (Virgo) : आप कार्य में अपनी पसंदीदा चीजों की तरफ ध्यान देंगे और अपने क्षेत्र में निपुण बनेंगे। पसंदीदा विषय में महारत हासिल करने का निर्णय लेंगे। क्या न करें- आज शत्रुओं से विशेष रूप से सावधान रहें।
तुला (Libra) : आपका अपने प्रति विश्वास आपको लगातार विजय दिलाएगा। आज आपको कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। क्या न करें - आमदनी की गति धीमी रहने के कारण परेशान न हों।
वृश्चिक (Scorpio) : आज काम विलंब से पूरे होंगे। कुछ प्रतिस्पर्धी अड़चनें पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन आप उन पर नियंत्रण पा लेंगे। क्या न करें- किसी अनावश्यक कार्य में खुद को आज शामिल न करें।
धनु (Sagittarius) : आज आप बुद्धिजीवियों की संगति में रहेंगे। व्यापार में अच्छी सफलता मिलेगी, लेकिन अधिक मेहनत करने की जरूरत है। क्या न करें- जमीन खरीदने या बेचने का काम आज न करें।
मकर (Capricorn) : आज के दिन आवश्यक कार्यों के लिए कुछ समय के लिए घर से दूर जाना हो सकता है। क्या न करें - भावनाओं में बहकर कोई निर्णय न लें। व्यावहारिकता का ध्यान रखें।
कुंभ (Aquarius) : आज परिवार में किसी नई खबर के चलते चहल-पहल बढ़ सकती है। बातों को लेकर विरोधाभास और चिंता अधिक होगी। क्या न करें - बाहरी खानपान से आज परहेज करें।
मीन (Pisces) : आज आपके साहस में वृद्धि रहने वाली है। आप मेहनत से भागेंगे नहीं। आपके प्रयास लगातार बने रहते दिखाई देंगे। घरेलू जीवन में व्यस्तता रहेगी। क्या न करें- बातचीत से कतराएं नहीं।


जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाये

अंक ज्योतिष के अनुसार आपका मूलांक तीन आता है। यह बृहस्पति का प्रतिनिधि अंक है। ऐसे व्यक्ति निष्कपट, दयालु एवं उच्च तार्किक क्षमता वाले होते हैं। अनुशासनप्रिय होने के कारण कभी-कभी आप तानाशाह भी बन जाते हैं। आप दार्शनिक स्वभाव के होने के बावजूद एक विशेष प्रकार की स्फूर्ति रखते हैं। आपकी शिक्षा के क्षेत्र में पकड़ मजबूत होगी। आप एक सामाजिक प्राणी हैं। आप सदैव परिपूर्णता या कहें कि परफेक्शन की तलाश में रहते हैं यही वजह है कि अकसर अव्यवस्थाओं के कारण तनाव में रहते हैं।

शुभ दिनांक : 3, 12, 21, 30

शुभ अंक : 1, 3, 6, 7, 9,
शुभ वर्ष : 2028, 2030, 2031, 2034, 2043, 2049, 2052,

ईष्टदेव : देवी सरस्वती, देवगुरु बृहस्पति, भगवान विष्णु

शुभ रंग : पीला, सुनहरा और गुलाबी

कैसा रहेगा यह वर्ष
आपके लिए यह वर्ष सुखद है। किसी विशेष परीक्षा में सफलता मिल सकती है। नौकरीपेशा के लिए प्रतिभा के बल पर उत्तम सफलता का है। नवीन व्यापार की योजना भी बन सकती है।

दांपत्य जीवन में सुखद स्थिति रहेगी। घर या परिवार में शुभ कार्य होंगे। महत्वपूर्ण कार्य से यात्रा के योग भी है। मित्र वर्ग का सहयोग सुखद रहेगा। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे।